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    रामेश्वर महादेव मंदिर पार्क में विराट हिंदू सम्मेलन, कलश यात्रा, पर्यावरण संरक्षण व समरसता का संदेश

    जयपुर। महारानी फार्म आज 8 फरवरी को रामेश्वर महादेव मंदिर पार्क, महावीर नगर द्वितीय, महारानी फार्म में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया तथा गणेश वंदना के माध्यम से कार्यक्रम का मंगलारंभ हुआ, जिससे उपस्थित जनसमूह में उत्साह और धार्मिक चेतना का संचार हुआ।   कार्यक्रम के सांस्कृतिक पक्ष को सशक्त बनाते हुए मंजू द्वारा कृष्ण लीला का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने भावविभोर होकर सराहा। मंच पर विशिष्ट अतिथि जयंती दीदी को आमंत्रित किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि जल, आकाश, पृथ्वी और वायु हमारे सहचर हैं तथा मानव शरीर भी पंचतत्वों से निर्मित है। उन्होंने कहा कि आज मानव की लापरवाही के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग है। प्लास्टिक न केवल धरती को दूषित करता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी घातक है।   उन्होंने सभी से आह्वान किया कि प्लास्टिक का त्याग कर कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करें और प्रकृति माँ की रक्षा का संकल्प लें। उनके आह्वान पर उपस्थित सभी लोगों ने प्लास्टिक-मुक्त पर्यावरण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।   कार्यक्रम के अगले चरण में परम पूज्य स्वामी संपत कुमार अवधेशानंद जी महाराज, गलता पीठ को मंच पर आमंत्रित किया गया। मंत्रोच्चार के साथ अपने प्रवचन की शुरुआत करते हुए महाराज ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य सनातनियों को संगठित करना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है।   उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा में वर्ण व्यवस्था गुण और कर्म के आधार पर रही है, न कि भेदभाव के लिए। समाज में दूसरों को पीड़ा पहुँचाना कभी भी कर्म नहीं माना गया। महाराज ने कहा कि भारत की मूल आत्मा सनातन धर्म है और विभिन्न जातियों व वर्गों में बँटकर रहना समाज और राष्ट्र—दोनों के लिए घातक है।   उन्होंने समरसता के विचार को संघ परिवार की एक सराहनीय और चिंतनशील पहल बताते हुए कहा कि समरसता तभी स्थापित होगी जब आध्यात्मिक चेतना प्रबल होगी। सनातन धर्म की करुणा और सह-अस्तित्व की भावना का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि यह धर्म पशु-पक्षियों और समस्त सृष्टि के संरक्षण की शिक्षा देता है।   महाराज ने अपने उद्बोधन का समापन मंगल भावना और राष्ट्रवाद व सनातन चेतना के जागरण की कामना के साथ किया। सम्मेलन ने उपस्थित जनसमूह में धार्मिक जागृति, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया।

    ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र की भविष्य संभावनाओं के द्वार खोलने वाला-राज्यपाल

    इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ समापन समारोह आयोजित सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन पर भी ध्यान देना ज़रूरी ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र की भविष्य संभावनाओं के द्वार खोलने वाला-राज्यपाल   जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पत्थर उद्योग और उससे जु़ड़े प्रसंस्करण में सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को प्राथमिकता में रखकर कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्थरों के खनन में ही नहीं उनकी विविधता और निर्यात में भी देश में अग्रणी है। उन्होंने  ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ को पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र, उद्यमिता की भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोलने वाला बताया।   राज्यपाल बागडे  ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ के समापन समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पत्थर उद्योग खनन में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि एक परिपक्व उद्योग की नैतिक जिम्मेदारी भी है। इस मार्ट के आयोजन का अर्थ ही है-राजस्थान के पाषाण वैभव से जुड़े विचार का वैश्विक प्रसार।  उन्होंने कहा कि भारत के कुल पत्थरों के खनन और प्रंसस्करण राजस्थान का 70 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने संगमरमर, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर के सबसे बड़े उत्पादकों में राजस्थान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि इस समय राजस्थान मे 81 प्रकार के पत्थरों का खनन होता है। इनमे से 57 का व्यावसायिक दोहन होता है।   राज्यपाल ने पत्थर खनन से जुड़ी उद्यमशीलता और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर सभी स्तरों पर कार्य किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर विभिन्न स्टॉल में प्रदर्शित पत्थरों के शिल्प-सौंदर्य और निर्माण कार्यों में उनकी उपयोगिता का अवलोकन करते हुए कहा कि भारतीय पत्थर-उद्योग ने विश्वभर में अब अपनी विशिष्ट  पहचान अब स्थापित कर ली है।    बागडे ने कहा कि पाषाण निर्मित दुर्ग-किले महलों, मंदिरों, हवेलियों से लेकर  आधुनिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर पत्थरों के उपयोग ने निर्माण स्थायित्व, दृढ़ता और सामूहिक स्मृति को सदा जीवंत रखा है।  

    सनस्टार स्कूल द्वारा बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित 20वें वार्षिक समारोह एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन

    सनस्टार स्कूल द्वारा बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित 20वें वार्षिक समारोह एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन अत्यंत भव्यए रंगारंग एवं यादगार रहा । सनस्टार स्कूल के वार्षिक समारोह में विद्यार्थियों द्वारा गीतों के माध्यम से भारत की सर्वांगीण प्रगति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। खेलए अंतरिक्ष क्षेत्रए भारतीय संस्कृति एवं विविध त्योहारों पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश की उपलब्धियों और समृद्ध परंपराओं को सजीव रूप में दर्शाया ।   कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वर वंदना से हुईए जिसके पश्चात विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों का मन मोह लिया। प्ले.ग्रुप एवं नर्सरी के नन्हे.मुन्ने बच्चों ने श् फ्लावर एंड बी और एवरीबडी डांस नाओश्पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।   इस अवसर पर प्रस्तुत राजस्थान के विभिन्न त्योहारों पर आधारित नृत्य नाटिकाओं ने प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। भारत की अंतरिक्ष उपलब्धि को दर्शाते हुए चंद्रयान मिशन पर आधारित विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों में गर्व और उत्साह का संचार किया।   इसके अतिरिक्त डिस्को.रेट्रो बॉलीवुड नृत्यए कराटे शोए स्पोर्ट्स प्रस्तुति एवं श्बम बम बोले पर आधारित नृत्य ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।   सनस्टार स्कूल के अध्यक्ष मदन म¨हन भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में चेयरमैन ने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई के साथ.साथ संस्कार और जीवन कौशल पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिएए ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो सकें।   विद्यालय के संस्थापक राजन भारद्वाज ने स्कूल की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी शिक्षकोंए विद्यार्थियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।   अंत में स्कूल की प्राचार्या श्रीमती रागिनी भारद्वाज ने स्कूल की गतिविधियों से अवगत करवाया और ‘तारे जमीं पर’ कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी अभिभावकों को तहे दिल से धन्यवाद किया।  

    समाजसेवी नरेश कुमार मीणा को राजस्थान युवा आइकॉन अवार्ड 2025-26 से सम्मानित

    मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के द्वारा युवा समाजसेवी नरेश कुमार मीणा को राजस्थान युवा आइकॉन अवार्ड 2025-26 से सम्मानित हुए हैं    मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के द्वारा युवा समाजसेवी नरेश कुमार मीणा को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए राजस्थान युवा आइकॉन अवार्ड 2025-26 से सम्मानित हुए हैं । यह राज्य स्तरीय पुरस्कार 15 से 29 वर्ष की आयु के उन युवाओं को दिया जाता है जिन्होंने सामाजिक सेवा, नवाचार, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो। पिछले छह वर्षों से सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय नरेश कुमार मीणा एक संवेदनशील, निष्ठावान एवं प्रतिबद्ध समाजसेवी हैं, जिन्होंने जन-स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, सड़क सुरक्षा, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक चेतना एवं सामुदायिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके नेतृत्व में 11 निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं तथा 18 रक्तदान शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया गया। कोरोना महामारी के दौरान यूनिसेफ के सहयोग से जयपुर की कच्ची बस्तियों में वैक्सीनेशन जागरूकता अभियान चलाकर बड़ी संख्या में लोगों को जागरूक किया गया। इसके साथ ही उन्होंने 2000 से अधिक वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, सड़क सुरक्षा जागरूकता, युवाओं को सीपीआर प्रशिक्षण और जरूरतमंदों को भोजन व कंबल वितरण जैसे कई जनहित कार्य किए। समाज और युवाओं के लिए किए गए इन निरंतर प्रयासों के चलते उन्हें यह प्रतिष्ठित युवा सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

    एन एस एस का सात दिवसय शिविर का समापन का कार्यक्रम हुआ

    लाल बहादुर शास्त्री पीजी महाविद्याल की राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनो इकाईयो के द्वारा 31 जनवरी से 6 फ़रवरी तक झालाना लेपर्ड सफारी वन परिसर मे स्थिति काली माता मंदिर प्रांगण मे संचालित एन एस एस का सात दिवसय शिविर का समापन का कार्यक्रम हुआ शिविर मे महाविद्याल की सभी विभागों से 150 स्वयं सेवकों ने अपनी भागीदारी दी शिविर मे स्वयं सेवकों के द्वारा श्रमदान, जागरूकता रैली, नशा मुक्ति लघु नाटिका, पौधा रोपण आदि कार्य किये! कार्यक्रम मे महाविद्याल के निदेशक प्रगेश्वर तिवारी, सचिव धीरेन्द्र भंडारी,प्राचार्य डॉ मुदित गुप्ता, उप प्राचार्य डॉ सुनीता अग्रवाल मुख्य अतिथि (जिला समन्वयक) डॉ गोविन्द शरण शर्मा के द्वारा सात दिवसय विशेष शिविर मे किये गए उत्कर्ष कार्य के लिए एम ए फाइनल (इतिहास ) के छात्र गणेश बैरवा (ग्रुप लीडर )एवं उनके साथी पूजा, धवल, गौरव को सर्वश्रेष्ठ स्वयं सेवक का पुरस्कार दिया गया! कार्यक्रम अधिकारी डॉ चंदन रावत, डॉ ललिता यादव एवं डॉ दीपिका ने स्वयं सेवक को बधाई दी!

    भूणाजी ने सातल-पातल के शीश काटा

    माताजी भूणाजी को भोजन कराती है और पंखा झुलाती है और कहती है बेटा यदि तू मेरे को देव, मेदू का सिर काटकर ला देवे तो मैं तेरा दो-दो ब्याव करा रानी पद्मनी से तेरी शादी करा और सवा कोस पैदल चलकर सामने आकर तेरी आरती उतार्रूं महलों से रानी सांखली भूणाजी को पत्र लिखकर बुलवाती है। भूणाजी रानी जी के पास जाते हैं और पूछते है माँजी कैसे याद किया ? माँजी कहती है कि दोनों बाप बेटों में क्या लड़ाई हो रही है भूणाजी सारी बात बताते हैं कि पिलोदा पर देव, मेदू ने चढ़ाई कर दी है। रानी ये बात सुनकर भूणाजी से कहती है बेटा भोजन कर। माताजी भूणाजी को भोजन कराती है और पंखा झुलाती है और कहती है बेटा यदि तू मेरे को भागवत देव, मेदू का सिर काटकर ला देवे तो मैं तेरा दो-दो ब्याव करा रानी पद्मनी से तेरी शादी करा और सवा कोस पैदल चलकर सामने आकर तेरी आरती उतार्रूं। यहां का राजपाट सब तुझे सोंप दूं। रानी सांखली कहती है कि सेना साथ में लेकर जाओ और देव, मेदू के सिर काट कर लाओ। भूणाजी अच्छे जवानों और अच्छे घोड़ो को छांटकर १७ हजार की फौज तैयार करके महल में आकर रानी जी से कहते हैं कि मुझेे दरबार की मोहर लगाकर कागज लिखकर दो कि मेरे सारे गुनाह माफ हो तो मैं जाता हूं। रानी रावजी को बुलाकर कहती है कि भूणा देव, मेदू का सिर काटने जा रहा है, इसे दरबार की मोहर लगाकर पत्र लिखकर दे कि इसके सारे गुनाह माफ है। रावजी कागज पर लिखकर भूणाजी के हवाले कर देते हैं। भूणाजी सेना लेकर निकलते हैं और सोचते हैं कि रानी ने मेरे भाईयों के सिर मांगे हैं क्यों न रानी को उसी के भाइयों के सिर काटकर दे दूं ?गली अपना बैर भी निकल जायेगा। सातल-पातल ने जब मेरी काटी थी तब कहा था कि बड़ा होकर अगर अंगुली का बैर ले सके तो ले लेना। भूणाजी की सवारी मारवाड़ में चान्दारुण की ओर चल पड़ती है। चान्दारुण मारवाड़ की ओर जाते समय रास्ते में ग्वालें गायें चरा रहे होते हैं। भूणाजी ग्वालों से पूछते हैं कि ये गायें किसकी है ? एक ग्वाला कहता है चान्दारुण के राजा सातल और पातल सांखला की हैं। भूणाजी कहते हैं मैं उनका भाणजा हूं और वो मेरे मामाजी है। भूणाजी पत्र लिखकर मामाजी को भेजते है, मैं भूणा आपने जो मेरी उगली काटी उसका बैर लेने आया हूं। मिलने के लिये सामने आ जाओ । ग्वाले पत्र ले जाकर मामाजी को दरबार में सोपतें हैं और कहते हैं कि भूणाजी चान्दारुण गांव के बाहर बीहड़ में मामाजी का इन्तजार कर रहे हैं। मामा सातल-पातल पत्र पढ़ते हैं और दोनों भाई सलाह कर अपने हथियार साथ लेकर भूणा से मिलने आते हैं। भूणा से कहते हैं भाणजे राम-राम। आज तुझे हमारी याद कैसे आई है ? भूणाजी कहते हैं जब में ६ महीने का था तब आपने मेरी अंगुली काटी थी, उसी का बैर लेने आया हूं। मामा कहते हैं भाणजे रहने दे। तू हमारी बहन का एक ही बेटा है, क्यों लड़ता है ? भूणाजी कहते हैं कि बिना बैर लिये तो मैं पीछे हटूंगा नहीं । सातल-पातल दोनों भाई मिलकर भूणा पर वार करते हैं मगर भूणाजी उनके वार से हर बार बच जाते हैं और कहते हैं कि मामाजी एक बार मेरे को भी तो वार करने दो। इतना कहते ही अपनी बोर घोड़ी को हाथी के होदे पर चढ़ा देतें हैं और दोनों भाईयों को एक ही वार में खत्म कर देतें हैं। सातल और पातल को मारकर उनके सिर काट कर, उनकी चोटी को पकड़ कर सीधे पुष्कर आते हैं वहां अपने खाण्डे को पानी में धोते हैं और चान्दारुण से लाई गायों को दान कर देते हैं। वहां से राण लौट आते हैं और पत्र लिखकर सांडीवान को आगे भेज देते हैं कि रानी सा आरती लेकर सामने आओ मैं दोनों भाईयों के सिर काट कर लाया हूं। आरती करने सामने पधारों। रानी समाचार पढ़कर बहुत खुश होती है और आरती लेकर भूणाजी के सामने आती है। भूणाजी की आरती करती है। भूणाजी दोनों भाईयों के कटे सिर चोटी से पकड़ कर आरती की थाली में रख देते हैं। रानी सोचती है कि इन बैरियों का मुंह नहीं देखूगीं और रावजी को कहूंगी के गेंद की जगह देव, मेदू जी के सिर से खेलों। तब उनके मुंह देखूंगीं। रानी दोनों भाईयों के कटे सिर लेकर महल में आती है। उसे एक दासी आकर बताती है रानी जी ये देव और मेदू के सिर नहीं है, ये सिर तो आपके भाई सातल और पातल के हैं। ये बात सुनकर रानी दासी को डाटती है और कांच (आईना) मंगवाती है। और कांच के सामने दोनों कटे हुवे सिर रखकर देखती है। जब उसे पता चलता है ये सिर तो मेरे भाई सातल और पातल के हैं। तब कोप भवन में जाकर विलाप करती है और भूणाजी को कोसती है कि क्यों मैंने सांप को दूध पिला कर बड़ा किया ? इसने अपने मामा को ही मार दिया, इसको दया नहीं आयी।

    राजकीय कला महाविद्यालय कोटा से संचालित रघुनाथ व जुबली छात्रावास में प्रवेश प्रक्रिया और गार्गीक बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिलवाने की मांग

    विशाल सद्‌बुद्धि महायज्ञ रघुनाथ व जुबली छात्रावास में प्रवेश व बिजली का बिल माफ कराने हेतु  आज राजकीय कला महाविद्यालय कोटा से संचालित रघुनाथ व जुबली छात्रावास में प्रवेश प्रक्रिया और गार्गीक बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिलवाने के लिए हरिप्रकाश मीना पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व पूर्व उपाध्यक्ष पवन मीणा के नेतृत्व में कॉलेज प्रशासन , जिला प्रशासन व राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री को सद्बुद्धि देने के लिए एक विशाल सद्‌बुद्धि महायज्ञ का आयोजन किया व ईश्वर से इन्हें सद्बुद्धि देने की कामना की।   पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष हरिप्रकाश मीणा ने बताया की रघुनाथ व जुबली छात्रावास में ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा पाने के लिए न्यूनतम दर पर छात्रावास में प्रवेश लेते हैं इसी क्रम में सत्र 2010 —11 में गार्गी बालिका छात्रावास में छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है  राज्य सरकार द्वारा एसटी एससी ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा पाने के लिए कहीं योजनाओं अंतर्गत छात्रावासों का संचालित किया जा रहा है परंतु महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा छात्रावासों को बंद किया जा रहा है हरि प्रकाश मीणा ने अपील की है छात्रावास बचाओ संघर्ष अभियान में जो भी पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षो व समस्त पदाधिकारीयो ने इन छात्रावास में रहकर अध्ययन किया है प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इसे जुड़ाव रहा हो। और सभी छात्र संगठनों से भी अपील है कि वह भी इस आंदोलन में आकर हम सबको मजबूती प्रदान करें और वर्तमान में जो छात्र यहां अध्ययन कर रहे हैं उनके अभिभावक आकर आंदोलन को मजबूती प्रदान करें  आज महायज्ञ के दौरान समस्त छात्र जो उपस्थित रहे रिदम शर्मा अमन शर्मा मोहित वाल्मीकि राहुल बृज बिहारी आजाद धनराज सोनू रविकांत अजय सोनू रामपुरिया दिलीप मीणा सोनू कंजोलिया आदि सैकड़ो छात्र मौजूद रहे।

    वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा पर व्यापक मंथन

    एनईपी–2020 पर आयोजित पाँच दिवसीय एफडीपी का समापन जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020) पर आयोजित पाँच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का पंचम एवं अंतिम दिवस 7 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. अलका पारीक , शिक्षाविद् रहीं। अपने उद्बोधन में डॉ. अलका पारेख ने कहा कि NEP 2020 वैश्विक आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली दूरदर्शी नीति है, जो शिक्षा को समता (Equity), गुणवत्ता (Quality), पहुँच (Access), वहनीयता (Affordability) और जवाबदेही (Accountability)—इन पाँच स्तंभों पर आधारित करती है। उन्होंने डिजिटल लर्निंग को समय की मांग बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा से सीखना अधिक सुलभ, लचीला और प्रभावी हुआ है। उन्होंने बाल-केंद्रित शिक्षा (Child-Centric Education) पर बल देते हुए कहा कि शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और सीखने की गति के अनुरूप होनी चाहिए। साथ ही रचनात्मक एवं आलोचनात्मक शिक्षण विधियाँ (Creative & Critical Teaching Methods) अपनाने तथा शिक्षा को अनुसंधान-उन्मुख (Research-Oriented) बनाना आवश्यक बताया। उन्होंने उच्च शिक्षा में पीएम विद्यालक्ष्मी योजना का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता के अवसरों पर भी प्रकाश डाला। समापन सत्र में पूरे एफडीपी के दौरान हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया गया। प्रथम दिवस में डॉ. रोहित जैन ने Indian Knowledge System पर विचार रखे। द्वितीय दिवस में प्रो. (डॉ.) मथुरेश्वर पारीक ने नवाचार, युवा जनसंख्या, शिक्षा में निवेश, संस्कृत भाषा के महत्व एवं 5+3+3+4 संरचना पर प्रकाश डाला। तृतीय दिवस में डॉ. अलका पारीक ने सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा सुधार, पुस्तक संस्कृति एवं कौशल विकास पर बल दिया। चतुर्थ दिवस में डॉ. रश्मि जैन ने Outcome Based Education, Program एवं Course Outcome, Graduate Attributes, वैश्विक शिक्षा ढांचा तथा Vision–Mission पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. प्रेम सुराणा (अध्यक्ष) एवं डॉ. अंशु सुराणा (प्रेसिडेंट) के संरक्षण में किया गया। एफडीपी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रीता बिष्ट द्वारा की गई।कार्यक्रम की संयोजक डॉ. नीतू चौहान, सह-संयोजक डॉ. अपर्णा सोनी एवं आयोजन सचिव अनिला शर्मा ने समापन अवसर पर समस्त वक्ताओं, आयोजक मंडल एवं सभी प्रतिभागियों को सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।राज्य के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में शिक्षकों की सहभागिता के साथ यह एफडीपी ज्ञानवर्धक, समसामयिक एवं उपयोगी सिद्ध हुई।

    कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर में पी.टी.एम. का आयोजन किया

    पी.टी.एम. का आयोजन आज कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर में पी.टी.एम. का आयोजन किया गया। पी.टी.एम. का आयोजन छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति, व्यवहार और समग्र विकास पर चर्चा करने के लिए आवश्यक है। यह शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद का एक मुख्य मंच है। इसमें सभी सेमेस्टर की छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के द्वारा उत्साहपूर्ण भाग लिया गया। इस मीटिंग के माध्यम से छात्राओं के शैक्षिक स्तर, परीक्षा परिणाम, कमजोर विषयों और स्वास्थ्य से जुडे़ मुद्दों पर चर्चा की गई, जो उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है। अभिभावकों ने भी इस मीटिंग में अपने सुझाव व प्रश्न रखें तथा महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं प्रयासों की सराहना की।

    वाणिज्य महाविद्यालय में हुआ सात दिवसीय शिविर का आगाज

    आज से NSS Camp का शुभारम्भ जोर शोर से वाणिज्य महाविद्यालय में हुआ । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर विज्ञान संकाय के डीन और वनस्पति विभाग के हेड प्रो. रामावतार शर्मा रहे । इस कार्यक्रम के अध्यक्ष कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. भवानी शंकर शर्मा जी ने मुख्य अतिथि का स्वागत कर सात दिवसीय शिविर की भूमिका हमारे बीच में रखी और स्वयंसेवको को “NOT ME BUT YOU” स्लोगन की समीक्षा सरल शब्दों में हमारे बीच में रखी । इसके बाद मुख्य अतिथि प्रो. रामावतार शर्मा जी ने छात्रों को बताया कि ये सात दिन किस तरह किसी व्यक्ति के चरित्र निर्माण में सहायक हो सकते हैं । उन्होने ये भी बताया कि “जिस तरह एक गुलाब का पौधा धरती से जुडा रहकर खुशबू बिखेरता है, उसी तरह हमें भी “Down To Earth” रह कर अपना काम ईमानदारी से करते रहना है"। इसी क्रम में वाणिज्य महाविद्यालय के उप-प्राचार्य डॉ. एम. एल. वसीटा सर ने बताया कि “हमारा युवक ऊर्जावान होने के साथ साथ कौशल से परिपूर्ण है, को इस तरह के Camp सही दिशा में जाने हेतु प्रेरित करते हैं, जिस से कि वह जब भी जरुरत पडे समाज के लिये अपनी उपयोगिता सिध्द कर सकें” । इस कार्यक्रम में वाणिज्य महाविद्यालय के सभी उप-प्राचार्य एंव शिक्षकगण, सभी कार्यक्रम अधिकारी एंव छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में UNIT- II कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मोहित सभी मंचासीन मानुभावों एंव आए हुए सभी अथितियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

    25-27 फ़रवरी तक जयपुर बनेगा नॉर्थ इंडिया का सबसे बड़ा यूथ हब- चमचमाते ड्रोन शो के साथ ‘रिदम 2026’ का ऐलान

    -फ़रहान-ज़ाकिर लाएँगे एंटरटेनमेंट का तूफ़ान- रिदम 2026, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी   -हैकाथॉन्स से लेकर फैशन शोज़ तक, 50 से अधिक ईवेंट्स और 3 ब्लॉकबस्टर नाइट्स   जयपुर,   एजुकेशन और इनोवेशन में अपनी अलग पहचान रखने वाली जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में नॉर्थ इंडिया के सबसे बड़े टैक्नो-मीडिया-स्पोर्ट्स एवं कल्चरल फ़ेस्ट, 'रिदम 2026' का आज हुआ पोस्टर विमोचन | मॉडर्नाइज़ेशन और ग्रैंड्योर को एक नए लेवल पर ले जाते हुए, इस साल के फ़ेस्ट का आगाज़, एक स्पेक्टक्युलर ड्रोन शो, क्लब परफ़ॉर्मन्स और डीजे से किया गया।   'बीट्स ऑफ इमेजिनेशन' की टैगलाइन के साथ, 25 से 27 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस इवेंट के ऑफ़िशियल पोस्टर-जर्सी व आर्टिस्ट्स को जगमगाते ड्रोन शो के ज़रिए, उत्साह से भरे स्टूडेंट्स के बीच रिवील किया गया।   रिदम 2026' में बॉलीवुड के मल्टीटैलेंटेड सुपरस्टार, फ़रहान अख़्तर की पॉवर-पैक्ड परफ़ॉर्मेंस दिखाई देंगी। "रॉक ऑन" और "ज़िंदा" जैसे एंथम्स गाने वाले फ़रहान, अपनी सॉलफ़ुल वॉइस और इलेक्ट्रिक स्टेज प्रेज़ेंस से 'रिदम' का लेवलअप करते नज़र आएँगे। वहीं, कैंपस की वाइब में कॉमेडी का तड़का लगाने के लिए 'सख्त लौंडा' फ़ेम, ज़ाकिर ख़ान अपनी बेमिसाल स्टोरीटेलिंग और "हक़ से सिंगल" वाले अंदाज़ में कॉमेडी पंचलाइंस से ऑडियंस को लोटपोट करेंगे।   स्टार्स की शानदार परफॉरमेंस के साथ ही, इस फेस्ट में 50 से ज़्यादा डायनेमिक ईवेंट्स का रोमांच, देशभर से आए पार्टिसिपेंट्स को एक अनूठा अनुभव दिखेगा। यहाँ, फ़ैशन शो, एड्रेलिन रशड स्पोर्ट्स के साथ-साथ हैकेथॉन्स जैसे टेक्निकल चैलेंजेज़ भी शामिल होंगे। साथ ही, रिदम डायरीज़ और रील-ओ-मानिया जैसे प्लेटफॉर्म्स युवाओं को अपनी स्किल्स निखारने और क्रिएटिविटी का जश्न मनाने का अवसर देंगे।   डिज़िटल स्ट्रेटेजीज़ धीमंत अग्रवाल ने कहा कि यह मंच, हमारी परंपराओं, स्टूडेंट टैलेंट और उस अनमैचड हसल का प्रतीक है जो सालों से जेईसीआरसी की पहचान रहा है।    इस प्रोग्राम में यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर विक्टर गंभीर उपस्थित रहे, जिन्होंने रिदम को स्टूडेंट्स के ओवरऑल डेवलपमेंट का एक अनिवार्य हिस्सा बताया। उन्होंने साझा किया कि किस तरह यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर, यूथ को लीडरशिप और टीम वर्क की बारीकियां सिखाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।