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    अफगानिस्तान-पाकिस्तान टकराव गहराया: ड्रोन हमलों और हवाई हमलों के बीच ‘खुली जंग’ का ऐलान

    1 week ago

    YUGCHARAN | 27 फरवरी 2026

    दक्षिण एशिया के पहले से अस्थिर सुरक्षा परिदृश्य में शुक्रवार को एक और गंभीर मोड़ तब आया जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार सैन्य टकराव खुली जंग के स्तर तक पहुंच गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले, ड्रोन हमले और सीमा चौकियों पर हमले करने के आरोप लगाए हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसे औपचारिक रूप से “ओपन वॉर” करार दिया है, जबकि अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के भीतर सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की पुष्टि की है।

    यह टकराव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बनता जा रहा है, बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। चीन, रूस और ईरान जैसे प्रभावशाली देशों ने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से संयम और संवाद की अपील की है।


    क्या हुआ: सीमा पर अचानक भड़की जंग

    अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय और सरकारी प्रवक्ता ने दावा किया कि तालिबान बलों ने पाकिस्तान के भीतर स्थित सैन्य ठिकानों पर ड्रोन के माध्यम से “सफल हवाई हमले” किए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया सहित कई अफगान प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि ये कार्रवाई अफगान सीमा से हुए हमलों के प्रतिशोध में की गई है।

    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार के अनुसार, जवाबी सैन्य अभियान में 130 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। वहीं तालिबान प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि अफगान बलों ने पाकिस्तानी सेना की कई चौकियों पर कब्जा किया और दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि, इस दावे को इस्लामाबाद ने सिरे से खारिज कर दिया है।


    पृष्ठभूमि: महीनों से सुलगता तनाव

    अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध पिछले कई महीनों से तनावपूर्ण रहे हैं। अक्टूबर 2025 में सीमा पर हुई भीषण झड़पों में दोनों पक्षों के 70 से अधिक लोगों की मौत के बाद से हालात लगातार बिगड़ते गए। कई प्रमुख सीमा क्रॉसिंग बंद कर दी गईं, जिससे व्यापार और आम लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

    पाकिस्तान का आरोप रहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी गुटों द्वारा किया जा रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। इसके उलट, काबुल का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।


    प्रमुख घटनाक्रम: काबुल से तोरखम तक धमाकों की गूंज

    शुक्रवार सुबह अफगान राजधानी काबुल में जोरदार विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। इसके साथ ही कंधार और पक्तिया प्रांतों में भी हवाई हमलों की पुष्टि हुई। अफगान अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान ने नागरिक इलाकों के पास भी हमले किए, जिससे आम नागरिकों के घायल होने की खबरें हैं।

    उधर, तोरखम सीमा चौकी के पास भारी गोलीबारी और तोपखाने की आवाज़ें सुनी गईं। सीमा के दोनों ओर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है और कई इलाकों से नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: कूटनीति की अपील

    तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय सक्रिय हो गया है। चीन ने दोनों देशों से तत्काल युद्धविराम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और तनाव कम करने में “रचनात्मक भूमिका” निभाने को तैयार है।

    रूस ने भी स्पष्ट किया है कि यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो वह मध्यस्थता के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रमज़ान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों को आपसी मतभेद संवाद से सुलझाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने सीमा पार झड़पों पर गहरी चिंता जताते हुए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।


    सैन्य संतुलन: कौन कितना मजबूत

    सैन्य दृष्टि से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्पष्ट असमानता है। पाकिस्तान के पास संगठित थलसेना, आधुनिक वायुसेना, नौसेना और परमाणु हथियार हैं। इसके विपरीत, तालिबान की सैन्य शक्ति सीमित है और उसके पास आधुनिक लड़ाकू विमान नहीं हैं। हालांकि, ड्रोन और सीमित हवाई संसाधनों के उपयोग ने यह दिखा दिया है कि तालिबान भी असममित युद्ध क्षमता रखता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी।


    क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

    इस टकराव का असर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापार मार्ग बाधित होने से मध्य एशिया से दक्षिण एशिया तक की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका है।

    भारत सहित कई क्षेत्रीय देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष का अप्रत्यक्ष असर पूरे उपमहाद्वीप पर पड़ता है।


    आगे क्या: युद्ध या वार्ता?

    फिलहाल दोनों देशों की ओर से तीखे बयान और सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। कूटनीतिक हल की संभावनाएं अब भी बनी हुई हैं, बशर्ते दोनों पक्ष सैन्य आक्रामकता को रोककर बातचीत की मेज पर लौटने को तैयार हों।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह संघर्ष अगर लंबे समय तक चलता है तो मानवीय संकट और गहराएगा, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।


    निष्कर्ष

     

    अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा टकराव केवल दो पड़ोसी देशों की सैन्य झड़प नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या बंदूकों की आवाज़ें कूटनीति की आवाज़ से शांत होती हैं या यह संघर्ष एक और लंबे क्षेत्रीय संकट का रूप ले लेता है।

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