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    पेंटागन के दबाव के आगे नहीं झुकी एआई कंपनी: एंथ्रोपिक ने सैन्य उपयोग पर ‘गार्डरेल्स’ हटाने से किया इनकार

    1 week ago

    YUGCHARAN / 27/02/2026

    अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की नैतिक सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच टकराव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सैन फ्रांसिस्को स्थित एआई स्टार्टअप Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी Pentagon के उस अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है, जिसमें कंपनी से अपने प्रमुख एआई मॉडल Claude AI पर लगे सुरक्षा प्रतिबंध (गार्डरेल्स) हटाने की मांग की गई थी। यह मांग ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर एआई के सैन्य उपयोग, स्वायत्त हथियारों और घरेलू निगरानी को लेकर गहन बहस चल रही है।

    एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dario Amodei ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कंपनी किसी भी परिस्थिति में ऐसे बदलावों के लिए सहमत नहीं होगी जो नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हों। अमोडेई के अनुसार, “धमकियां हमारे रुख को नहीं बदल सकतीं। हम अच्छे विवेक के साथ ऐसे अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सकते।” उनका यह बयान पेंटागन द्वारा दिए गए उस समय-सीमा के ठीक पहले आया, जिसके तहत एंथ्रोपिक से ‘किसी भी वैध उद्देश्य’ के लिए अपने एआई के निर्बाध उपयोग की अनुमति देने को कहा गया था।

    इस टकराव की जड़ में पेंटागन की यह इच्छा है कि एंथ्रोपिक अपने एआई मॉडल से वे सीमाएं हटाए, जो उसे पूरी तरह स्वायत्त हथियार प्रणालियों और अमेरिका के भीतर बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए इस्तेमाल होने से रोकती हैं। एंथ्रोपिक का कहना है कि ऐसी दो प्रमुख अपवादात्मक शर्तें—स्वायत्त हथियारों में उपयोग और घरेलू जन-निगरानी—न केवल कंपनी की नैतिक नीति के खिलाफ हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी अवधारणाओं से भी टकराती हैं।

    एंथ्रोपिक का तर्क है कि आज के अग्रणी एआई सिस्टम अभी इतने भरोसेमंद नहीं हैं कि उन्हें बिना मानव हस्तक्षेप के जानलेवा फैसले लेने की शक्ति दे दी जाए। अमोडेई के अनुसार, “हम जानबूझकर ऐसा उत्पाद उपलब्ध नहीं कराएंगे जो सैनिकों और नागरिकों—दोनों को जोखिम में डाले।” कंपनी का यह भी कहना है कि उसके मौजूदा सुरक्षा उपायों ने अब तक सशस्त्र बलों में एआई के उपयोग को बाधित नहीं किया है, बल्कि जिम्मेदार अपनाने की दिशा में मदद की है।

    यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एंथ्रोपिक के पास अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ लगभग 200 मिलियन डॉलर तक का अनुबंध है। कंपनी को तकनीकी दिग्गज Amazon और Google का समर्थन प्राप्त है, जिसने इसे एआई सुरक्षा और जिम्मेदार विकास के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है। हालांकि, पेंटागन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में केवल उन्हीं एआई कंपनियों के साथ काम करेगा जो ‘किसी भी वैध उपयोग’ के लिए अपने मॉडल उपलब्ध कराएं—भले ही वह उपयोग कंपनी की आंतरिक नैतिक नीतियों से टकराता हो।

    सूत्रों के अनुसार, एंथ्रोपिक और पेंटागन के बीच यह तनाव उस बैठक के बाद बढ़ा, जिसमें अमोडेई ने रक्षा सचिव Pete Hegseth से मुलाकात की थी। इसके बाद रक्षा विभाग ने एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा कि यदि कंपनी तय समय तक शर्तें नहीं मानती, तो उस पर आपातकालीन संघीय शक्तियों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इनमें Defense Production Act के उपयोग की संभावना भी शामिल बताई गई, जो सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर निजी कंपनियों से संसाधन और तकनीक उपलब्ध कराने का अधिकार देता है।

    हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया है कि रक्षा विभाग का इरादा न तो अमेरिकी नागरिकों की सामूहिक निगरानी करने का है और न ही बिना मानव नियंत्रण वाले स्वायत्त हथियार विकसित करने का। उनके अनुसार, विभाग केवल यह चाहता है कि एंथ्रोपिक अपने एआई मॉडल को सभी ‘कानूनी उद्देश्यों’ के लिए उपलब्ध कराए। इसके बावजूद, एंथ्रोपिक ने आशंका जताई है कि एक बार गार्डरेल्स हटने के बाद तकनीक का दुरुपयोग रोका नहीं जा सकेगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल एक कंपनी और सरकार के बीच अनुबंध विवाद नहीं है, बल्कि यह एआई के भविष्य को लेकर व्यापक नैतिक बहस का प्रतीक है। एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां एआई को रणनीतिक बढ़त के रूप में देखती हैं, वहीं दूसरी ओर तकनीकी विशेषज्ञ और मानवाधिकार समूह चेतावनी देते हैं कि बिना स्पष्ट सीमाओं के एआई का सैन्यीकरण खतरनाक परिणाम ला सकता है। अमेरिका सहित कई देशों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकतांत्रिक समाज में ऐसी तकनीक को पूरी तरह स्वायत्त निर्णय लेने दिया जाना चाहिए।

    एंथ्रोपिक का कहना है कि यदि पेंटागन उसे ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित करता है—जो आमतौर पर विरोधी देशों की कंपनियों के लिए आरक्षित टैग है—तो इससे न केवल कंपनी की सरकारी परियोजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा भी दांव पर लग सकती है। बावजूद इसके, अमोडेई ने संकेत दिया है कि कंपनी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी। उनके शब्दों में, “यह विभाग का अधिकार है कि वह ऐसे ठेकेदार चुने जो उसके दृष्टिकोण से मेल खाते हों।”

    इस घटनाक्रम ने एआई उद्योग में एक नई रेखा खींच दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां सरकार के दबाव में झुक जाती हैं, तो एआई के जिम्मेदार उपयोग की अवधारणा कमजोर पड़ जाएगी। वहीं, यदि कंपनियां सख्त रुख अपनाती हैं, तो सरकारें वैकल्पिक प्रदाताओं की ओर रुख कर सकती हैं, जिससे उद्योग में विभाजन बढ़ेगा।

    अंततः, यह विवाद इस बात का संकेत है कि एआई अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रहा, बल्कि यह नीति, नैतिकता और सत्ता संतुलन का केंद्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या पेंटागन और एंथ्रोपिक किसी मध्य मार्ग पर पहुंच पाते हैं, या यह टकराव एआई के सैन्य उपयोग को लेकर एक बड़े वैश्विक पुनर्विचार की शुरुआत साबित होगा। फिलहाल, एंथ्रोपिक का स्पष्ट संदेश यही है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और मानव सुरक्षा की कीमत पर कोई तकनीकी समझौता स्वीकार्य नहीं है।

     
     
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