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    रामेश्वर महादेव मंदिर पार्क में विराट हिंदू सम्मेलन, कलश यात्रा, पर्यावरण संरक्षण व समरसता का संदेश

    1 month ago

    जयपुर। महारानी फार्म आज 8 फरवरी को रामेश्वर महादेव मंदिर पार्क, महावीर नगर द्वितीय, महारानी फार्म में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया तथा गणेश वंदना के माध्यम से कार्यक्रम का मंगलारंभ हुआ, जिससे उपस्थित जनसमूह में उत्साह और धार्मिक चेतना का संचार हुआ।

     

    कार्यक्रम के सांस्कृतिक पक्ष को सशक्त बनाते हुए मंजू द्वारा कृष्ण लीला का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने भावविभोर होकर सराहा।

    मंच पर विशिष्ट अतिथि जयंती दीदी को आमंत्रित किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि जल, आकाश, पृथ्वी और वायु हमारे सहचर हैं तथा मानव शरीर भी पंचतत्वों से निर्मित है। उन्होंने कहा कि आज मानव की लापरवाही के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग है। प्लास्टिक न केवल धरती को दूषित करता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी घातक है।

     

    उन्होंने सभी से आह्वान किया कि प्लास्टिक का त्याग कर कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करें और प्रकृति माँ की रक्षा का संकल्प लें। उनके आह्वान पर उपस्थित सभी लोगों ने प्लास्टिक-मुक्त पर्यावरण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।

     

    कार्यक्रम के अगले चरण में परम पूज्य स्वामी संपत कुमार अवधेशानंद जी महाराज, गलता पीठ को मंच पर आमंत्रित किया गया। मंत्रोच्चार के साथ अपने प्रवचन की शुरुआत करते हुए महाराज ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य सनातनियों को संगठित करना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है।

     

    उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा में वर्ण व्यवस्था गुण और कर्म के आधार पर रही है, न कि भेदभाव के लिए। समाज में दूसरों को पीड़ा पहुँचाना कभी भी कर्म नहीं माना गया। महाराज ने कहा कि भारत की मूल आत्मा सनातन धर्म है और विभिन्न जातियों व वर्गों में बँटकर रहना समाज और राष्ट्र—दोनों के लिए घातक है।

     

    उन्होंने समरसता के विचार को संघ परिवार की एक सराहनीय और चिंतनशील पहल बताते हुए कहा कि समरसता तभी स्थापित होगी जब आध्यात्मिक चेतना प्रबल होगी। सनातन धर्म की करुणा और सह-अस्तित्व की भावना का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि यह धर्म पशु-पक्षियों और समस्त सृष्टि के संरक्षण की शिक्षा देता है।

     

    महाराज ने अपने उद्बोधन का समापन मंगल भावना और राष्ट्रवाद व सनातन चेतना के जागरण की कामना के साथ किया। सम्मेलन ने उपस्थित जनसमूह में धार्मिक जागृति, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया।

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