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    यूके की वीज़ा पेनल्टी चेतावनी के बाद तीन अफ्रीकी देशों ने अवैध प्रवासियों को वापस लेने पर जताई सहमति

    1 month ago

    ब्रिटेन की सख्त आव्रजन नीति के तहत वीज़ा प्रतिबंधों की चेतावनी दिए जाने के बाद अफ्रीका के तीन देशों ने अपने नागरिकों को वापस लेने पर सहमति जताई है, जो अवैध रूप से यूनाइटेड किंगडम में रह रहे थे या अन्य कानूनी मामलों में दोषी पाए गए हैं। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए इसे सरकार की “सख्त लेकिन प्रभावी” रणनीति का परिणाम बताया।

    सरकारी बयान के अनुसार, नामीबिया और अंगोला ने औपचारिक रूप से सहयोग पर सहमति जताई है, जबकि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) ने इससे पहले ही ब्रिटेन के साथ प्रवासी वापसी प्रक्रिया में भागीदारी शुरू कर दी थी। यह घटनाक्रम उस चेतावनी के करीब एक महीने बाद सामने आया है, जब ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने साफ शब्दों में कहा था कि जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करेंगे, उन्हें वीज़ा संबंधी दंड का सामना करना पड़ेगा।

    ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, डीआरसी ने तब रुख बदला जब ब्रिटिश सरकार ने उसके वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को दी जा रही विशेष वीज़ा सुविधाएं समाप्त कर दीं। इसके साथ ही डीआरसी के सभी नागरिकों के लिए तेज़-तर्रार वीज़ा प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वहां की सरकार ने प्रवासी वापसी पर सहयोग करने का निर्णय लिया।

    गृह सचिव शबाना महमूद ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिटेन अब उन देशों के साथ सामान्य वीज़ा संबंध नहीं रखेगा, जो अपने नागरिकों को वापस लेने की जिम्मेदारी से पीछे हटते हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई विदेशी सरकार अपने नागरिकों की वापसी स्वीकार नहीं करती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंगोला, नामीबिया और डीआरसी से जुड़े मामलों में अब अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों और गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को उनके देशों में वापस भेजने की प्रक्रिया तेज़ की जाएगी। गृह सचिव के अनुसार, सरकार सीमाओं पर नियंत्रण और व्यवस्था बहाल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

    ब्रिटिश मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, सोमालिया और गैबॉन जैसे देश भी फिलहाल इस तरह के प्रत्यावर्तन समझौतों को लेकर सहयोगी रुख नहीं अपना रहे हैं और भविष्य में उन्हें भी वीज़ा प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने इन देशों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि आगे और देशों को लेकर सख्त चेतावनियां दी जा सकती हैं।

    गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि हालांकि अंगोला, नामीबिया और डीआरसी अब सहयोग कर रहे हैं, लेकिन कुछ अन्य देश अब भी प्रत्यावर्तन प्रक्रिया में बाधाएं पैदा कर रहे हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने में सहयोग नहीं करेंगे, उनके साथ वीज़ा संबंधों में सख्ती बरती जाएगी।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2024 में लेबर सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब 58,500 लोगों को ब्रिटेन से हटाया या निर्वासित किया जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को हटाने की प्रक्रिया इस समय अपने उच्चतम स्तर पर है।

    इन तीन अफ्रीकी देशों के साथ हुए नए समझौतों के चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि 3,000 से अधिक लोग अब निर्वासन के दायरे में आ सकते हैं। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कदम उन कारणों को खत्म करने की दिशा में है, जो अवैध प्रवासियों को ब्रिटेन आने के लिए आकर्षित करते हैं।

    सरकार के अनुसार, यह नीति व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न केवल अवैध प्रवासन को रोकना है, बल्कि यह संदेश देना भी है कि ब्रिटेन अपने आव्रजन नियमों को लेकर किसी तरह की ढील नहीं देगा। अधिकारियों का मानना है कि वीज़ा दंड की चेतावनी ने कई देशों को सहयोग के लिए मजबूर किया है।

    पिछले वर्ष भी गृह सचिव शबाना महमूद ने स्पष्ट किया था कि जो देश “नियमों के अनुसार काम नहीं करेंगे”, उन्हें वीज़ा कटौती और अन्य प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने तब कहा था कि यदि किसी देश का नागरिक ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं रखता, तो उस देश को उसे वापस लेना ही होगा।

    गृह मंत्रालय का कहना है कि अफ्रीकी देशों द्वारा उठाया गया यह कदम सरकार की उस “लेन-देन आधारित” नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है, जिसमें सहयोग के आधार पर देशों के साथ संबंध तय किए जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में भी यह नीति जारी रहेगी और सहयोग न करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाया जाएगा।

    फिलहाल, ब्रिटेन सरकार इस घटनाक्रम को अपनी आव्रजन रणनीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल अवैध प्रवासन पर अंकुश लगेगा, बल्कि सीमा प्रबंधन को लेकर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

     
     
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