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    संविधान की गूँज और मशालों की रोशनी से जगमगाया राजस्थान विश्वविद्यालय

     ABVP ने बाबा साहेब को दी भव्य भावांजलि "हम भारत के लोग..." जब सैकड़ों कंठों से निकला संविधान की प्रस्तावना का यह सामूहिक स्वर राजस्थान विश्वविद्यालय की फिजाओं में गूँजा, तो हर चेहरा गर्व और संकल्प से दीप्त हो उठा। अवसर था अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) राजस्थान विश्वविधालय इकाई द्वारा डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल 'मशाल रैली' का प्रस्तावना से हुआ शंखनाद: रैली का विधिवत शुभारंभ विधि कॉलेज के प्रांगण में हुआ, जहाँ उपस्थित विद्यार्थियों ने बाबा साहेब के प्रतिमा पर के समक्ष माल्यार्पण कर किया और पूर्ण निष्ठा के साथ भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया। इस पावन शुरुआत के साथ ही पूरा परिसर 'जय भीम' और 'वंदे मातरम' के नारों से एकाकार हो गया। अंधकार को चीरती मशालों का कारवां: शाम ढलते ही जैसे ही सैकड़ों मशालें एक साथ जलीं, दृश्य अत्यंत विहंगम हो गया। 'ज्ञान, सम्मान और अधिकारों की रोशनी' का संदेश लेकर यह कारवां विधि कॉलेज से निकलकर विश्वविद्यालय के मुख्य मार्गों से होते हुए अम्बेडकर लाइब्रेरी पहुँचा। हाथों में मशालें थामे युवा विद्यार्थियों का उत्साह यह बता रहा था कि बाबा साहेब के विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक हैं। वैचारिक क्रांति का आह्वान: इस अवसर पर अखिल भारतीय राज्य विश्वविधालय संयोजक भारत भूषण यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "बाबा साहेब ने जिस समतामूलक समाज का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी हम युवाओं की है। शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वो दहाड़ेगा—इसी मंत्र को आत्मसात कर हमें राष्ट्र निर्माण में जुटना है।" इकाई अध्यक्ष अभिषेक मीणा कहा कि कि संविधान केवल अधिकारों की बात नहीं करता, बल्कि हमें हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। अम्बेडकर लाइब्रेरी पर ऐतिहासिक रैली का समापन अम्बेडकर लाइब्रेरी पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। यहाँ सभी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने तथा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाने का संकल्प लिया इस मसाल रैली में इकाई मंत्री मीनाक्षी गोड,राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विष्णु कुमार मीणा, इकाई उपाध्यक्ष विशाल उज्जैननिया,विपुल भदौरिया, कुनाल सारासर,रिषभ देव, पल्लव तिवारी , महानगर मंत्री केशव पारीक सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे

    “कॉरपोरेट्स एवं स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय प्रबंधन कौशल” विषय पर एक व्याख्यान का सफल आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में बुधवार को आर्थिक प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन (ई.ए.एफ.एम.) विभाग द्वारा संस्थान के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के सहयोग से “कॉरपोरेट्स एवं स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय प्रबंधन कौशल” विषय पर एक व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता महाविद्यालय की पूर्व छात्रा सुश्री सुरभि सिंघल रहीं, जो एक डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ एवं डीब्रांडकैंप की संस्थापक हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर छात्राओं को वित्तीय प्रबंधन के व्यावहारिक एवं समकालीन पहलुओं से अवगत कराया। अपने व्याख्यान में सुश्री सिंघल ने ईयूएसपैनप मॉडल को विस्तार से समझाते हुए बताया कि ई का आशय एक्सेल से है, यू का अर्थ व्यावसायिक समझ, एस का अर्थ वित्तीय विवरण, पी का आशय वित्तीय विवरण प्रस्तुतीकरण, ए का अर्थ वित्तीय विश्लेषण, एन का अर्थ वित्तीय मॉडलिंग अथवा व्यवसाय मॉडलिंग तथा पी का आशय वित्तीय प्रवीणता से है। इस मॉडल के माध्यम से उन्होंने छात्राओं को आधुनिक व्यावसायिक परिवेश में आवश्यक वित्तीय दक्षताओं की स्पष्ट समझ प्रदान की। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने व्याख्यान की सराहना करते हुए छात्राओं को इसी प्रकार मेहनत करके आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित किया। आयोजित व्याख्यान के माध्यम से छात्राओं में व्यावहारिक वित्तीय जागरूकता, वास्तविक व्यावसायिक समझ, उद्यमशीलता की सोच तथा जोखिम मूल्यांकन क्षमता का विकास हुआ। डॉ. रागिनी शर्मा, विभागाध्यक्ष, आर्थिक प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन (ई.ए.एफ.एम.) विभाग के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 57 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं इसे अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को कॉरपोरेट एवं स्टार्टअप क्षेत्र के लिए आवश्यक वित्तीय कौशल से सशक्त बनाना था, जिसमें महाविद्यालय पूर्णतः सफल रहा।

    अंबेडकर जयंती पर संविधान की चुनौतियों पर मंथन, युवाओं को जागरूक रहने का दिया संदेश

    जयपुर। राजीव गांधी स्टडी सर्कल, भारत सेवा संस्थान एवं बियानी लॉ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “वर्तमान में संविधान व संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष चुनौतियां एवं संभावनाएं” रहा।  कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथि स्वागत के साथ हुई। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के प्रोफेसर एवं मुख्य वक्ता प्रो. रतनलाल, विशिष्ट अतिथि जी.एस. बाफना (पूर्व महामंत्री, भारत सेवा संस्थान), पूर्व अध्यक्ष राजस्थान लोक सेवा आयोग बी.एम. शर्मा तथा सह-समन्वयक, राजीव गांधी स्टडी सर्कल के डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल उपस्थित रहे। इसके साथ ही बियानी कॉलेज के चेयरमेन डॉ. राजीव बियानी, निदेशक डॉ. संजय बियानी सहित कई गणमान्य सदस्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्वागत भाषण के दौरान विशिष्ट अतिथि जी.एस. बाफना (पूर्व महामंत्री, भारत सेवा संस्थान) ने संविधान के मूल्यों को समाज में स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमाएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि बाबा साहेब के सपनों को पूरा करने के लिए संस्थाओं का मजबूत और निष्पक्ष होना जरूरी है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, राज्यों के अधिकार, और सार्वजनिक सेवकों की भूमिका पर चिंता जताई तथा कहा कि शिक्षा का अधिकार होने के बावजूद इसकी पूर्ण प्राप्ति के लिए संघर्ष जारी है। अंत में उन्होंने अहिंसा के माध्यम से बदलाव लाने की बात कही। वहीं हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में मुख्य वक्ता प्रो. रतनलाल ने संविधान के सामने वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर विचारों में जीवित हैं, केवल मूर्तियों में नहीं, और  उन्होंने बताया कि संविधान के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब पैदा होती है जब कानून और प्रशासन दोनों स्तरों पर समानता लागू नहीं होती।  साथ ही, उन्होंने कुछ संगठनों, विचारधाराओं, निजीकरण और कॉरपोरेट प्रभाव को भी संवैधानिक मूल्यों के लिए चुनौती बताया। अंत में उन्होंने जोर दिया कि संविधान के प्रभावी संचालन के लिए उसके सिद्धांतों को ईमानदारी से लागू करना आवश्यक है।  इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने उद्बोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि संविधान उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी प्रावधान निर्धारित हैं, लेकिन वर्तमान समय में उसके सामने कई गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हैं और देश में तानाशाही जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे, तब रोजगार के अवसर बढ़ने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने डॉलर और रुपये के अंतर को कम करने के वादों का भी उल्लेख किया, जो अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। टीकाराम जूली ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे कथनी और करनी के अंतर को समझें। उन्होंने कहा कि आज समाज में मेहनत और विकास के साथ-साथ जाति और धर्म की राजनीति भी हावी हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारा देश आज भी एकजुट है तो उसका मुख्य कारण हमारा संविधान है। इसलिए वर्तमान समय में संविधान की रक्षा करना और उसके सिद्धांतों का पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है। अध्यक्षीय उद्बोधन पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान लोक सेवा आयोग बी.एम. शर्मा ने दिया, जिसमें उन्होंने युवाओं को संविधान के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी।साथ ही यह भी कहा कि जब सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र मजबूत होगा, तभी राजनीतिक लोकतंत्र स्वतः सुदृढ़ होगा। अंत में उन्होंने कहा कि संविधान की सफलता उसे लागू करने वालों पर निर्भर करती है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन सह-समन्वयक, राजीव गांधी स्टडी सर्कल, राजस्थान, डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोनम वांगचुक का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध करने पर कई बार लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज ऐसी स्थिति बन रही है, जहाँ न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने अंत में सभी से अपील की कि देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह संविधान की रक्षा करे और उसे मजबूत बनाए। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया

    रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर के विद्यार्थियों ने रचा सफलता का इतिहास रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर के विद्यार्थियों ने सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है। विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों ने विद्यालय में हर्ष और उत्साह का वातावरण बना दिया है। विद्यालय की छात्रा संजना मीना ने 97.4% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं यश अग्रवाल ने 96.6% तथा पीयूष शर्मा ने 96.4% अंक प्राप्त कर विद्यालय की टॉप रैंक में अपना स्थान सुनिश्चित किया। विशेष गौरव की बात यह रही कि 80 से अधिक विद्यार्थियों ने 85% से अधिक अंक प्राप्त कर शानदार सफलता अर्जित की, जो विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के समर्पण का प्रमाण है। इस शानदार उपलब्धि पर रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन बी. एस. रावत ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। रावत एजुकेशनल ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि “यह सफलता विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के अथक परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है।” विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मैत्रेयी शुक्ला ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभाशीष देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग की भी सराहना की।

    बिना ट्यूशन एसएमएस स्कूल की जान्हवी ने हासिल किए 98.60 फीसदी अंक, AI में मिले 100 में से 100

    जयपुर। महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा ने 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। खास बात यह रही कि जान्हवी ने बिना किसी ट्यूशन के केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह उपलब्धि प्राप्त की। जान्हवी ने संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में 100-100 अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा सोशल साइंस में 99 और साइंस में 98 अंक प्राप्त किए। उनकी इस उपलब्धि ने स्कूल और परिवार का नाम रोशन किया है। जान्हवी के पिता दीपक शर्मा और माता डॉ.मीना शर्मा ने बेटी की इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी हैं। वहीं, जान्हवी ने अपनी सफलता का श्रेय सेल्फ स्टडी, सही समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास को दिया। उनकी इस उपलब्धि से अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि बिना कोचिंग के भी मेहनत और लगन से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    बिना ट्यूशन एसएमएस स्कूल की जान्हवी ने हासिल किए 98.60 फीसदी अंक

    जयपुर। महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा ने 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। खास बात यह रही कि जान्हवी ने बिना किसी ट्यूशन के केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह उपलब्धि प्राप्त की। जान्हवी ने संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में 100-100 अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा सोशल साइंस में 99 और साइंस में 98 अंक प्राप्त किए। उनकी इस उपलब्धि ने स्कूल और परिवार का नाम रोशन किया है। जान्हवी के पिता दीपक शर्मा और माता डॉ.मीना शर्मा ने बेटी की इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी हैं। वहीं, जान्हवी ने अपनी सफलता का श्रेय सेल्फ स्टडी, सही समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास को दिया। उनकी इस उपलब्धि से अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि बिना कोचिंग के भी मेहनत और लगन से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    स्टूडेंट-फर्स्ट अप्रोच से बदलेगा एजुकेशन का भविष्य: अर्पित अग्रवाल

     *राज शमानी के पॉडकास्ट में जेईसीआरसी के अर्पित अग्रवाल: भारतीय उच्च शिक्षा के भविष्य और बदलते परिदृश्य पर खास बातचीत* - *नई पीढ़ी, नई शिक्षा: इंडस्ट्री और क्लासरूम के बीच पुल बनाने की पहल* जयपुर, देश में उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई है। इसी बदलते दौर को समझने और नए एजुकेशन मॉडल पर चर्चा करने के लिए मशहूर पॉडकास्टर राज शमानी के लोकप्रिय पॉडकास्ट में जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने अपनी बात रखी। 14 अप्रैल को जारी इस विशेष एपिसोड में उन्होंने शिक्षा के वर्तमान हालात, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत के दौरान अर्पित अग्रवाल ने साफ कहा कि आज के समय में कॉलेज और यूनिवर्सिटी को पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर छात्रों को वास्तविक दुनिया के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने ‘फ्यूचर-रेडी’ संस्थानों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अब शिक्षा का मकसद केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों को ऐसे कौशल देना है जो उन्हें जीवन और करियर दोनों में सफल बना सकें। उन्होंने ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ अप्रोच को शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि हर निर्णय में छात्रों की जरूरत और उनके भविष्य को केंद्र में रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इनोवेशन, प्रैक्टिकल एक्सपोज़र और टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल को मजबूत शिक्षा प्रणाली की पहचान बताया। पॉडकास्ट में इंडस्ट्री और शिक्षा के बीच बढ़ती दूरी को भी एक बड़ी चुनौती के रूप में रखा गया। अर्पित अग्रवाल ने कहा कि यदि कोर्स और पढ़ाई का तरीका इंडस्ट्री की मांग के अनुसार तैयार किया जाए, तो छात्रों को नौकरी के लिए अलग से संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, यानी अलग-अलग विषयों को जोड़कर पढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया, जिससे छात्र व्यापक समझ विकसित कर सकें। आज के युवाओं की बदलती सोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह ऐसी पढ़ाई चाहती है जो सीधे उनके करियर और जीवन में काम आए। यही कारण है कि अब स्किल-बेस्ड लर्निंग और प्रैक्टिकल नॉलेज की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में वही संस्थान आगे बढ़ेंगे जो छात्रों को एक समावेशी माहौल, इंडस्ट्री से जुड़ाव और नए अवसर प्रदान करेंगे। शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल बनाकर ही एक मजबूत और ‘फ्यूचर-रेडी’ इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। यह एपिसोड न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। यह वर्तमान स्थिति को समझाने के साथ-साथ आने वाले समय के लिए एक स्पष्ट दिशा भी देता है, जिसमें शिक्षा अधिक व्यावहारिक, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनती नजर आती है।

    महाराजा कॉलेज से निकल कर एमडी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बने प्रोफेसर मिलाप पूनिया, एलुमिनाई ने रोहतक जाकर दी बधाई

    जयपुर। जयपुर के महाराजा कॉलेज में पढे मिलाप पूनिया एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक के वाइस चांसलर नियुक्त हुए हैं। हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर अशीम कुमार घोष ने प्रोफेसर मिलाप पूनिया को तीन वर्ष के लिए वाइस चांसलर के रूप में नियुक्ति दी है। सोमवार को प्रोफेसर पूनिया ने वाइस चांसलर के रूप में पदभार ग्रहण किया। जयपुर के महाराजा कॉलेज से निकले प्रोफेसर पूनिया के वीसी बनने पर महाराजा कॉलेज एलुमिनाई के प्रतिनिधि मंडल ने रोहतक पहुंच कर उन्हें शुभकामनाएं दी। गोखले होस्टल के वार्डन डॉक्टर विजयपाल मीणा, जर्मन भाषा के एक्सपर्ट जितेंद्र सैन, अरुण ढाका, रोहिताश्व राव और राजेंद्र यादव ने पुष्प गुच्छ भेंट कर प्रोफेसर पूनिया को बधाई दी। प्रोफेसर पूनिया चूरू जिले के सुलखनिया गांव के रहने वाले हैं।   महाराजा कॉलेज के छात्र से वीसी तक का सफर   वर्ष 1991 से लेकर 1994 तक प्रोफेसर मिलाप पूनिया जयपुर स्थित महाराजा कॉलेज के स्टूडेंट रहे। यहां से उन्होंने बीएससी की पढाई की। इस दौरान वे गोखले हॉस्टल में रहे। वर्ष 1996 में उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय ये ज्योग्राफी डिपार्टमेंट से एमएससी की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1998 में उनका चयन उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ। वर्ष 1998 से 2002 तक राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। इसके बाद वर्ष 2002 से 2006 तक इसरो के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग में वैज्ञानिक के रूप में सेवाएं दी। पिछले कई वर्षों से वे दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट में चेयरपर्सन के रूप में सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर अशीम कुमार घोष ने उन्हें एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक के वाइस चांसलर के रूप में नियुक्त किया। प्रोफेसर मिलाप पूनिया ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया और वे आगामी तीन साल तक वीसी के रूप में सेवाएं देंगे। प्रोफेसर पूनिया जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन साइंसेज रिमोट सेंसिंग अर्बन स्टडीज डिजास्टर मैनेजमेंट और क्लाइमेट चेंजिंग मामलों के विशेषज्ञ हैं।   बड़े सपने देखो और उन्हें पूरा करने की ठान लो   प्रोफेसर पूनिया ने कहा कि स्टूडेंट लाइफ से ही युवाओं को बड़े सपने देखते रहने चाहिए। फिर उन सपनों को पूरा करने के लिए पूरा दम लगाते हुए मेहनत करते रहना चाहिए। मेहनत और लगन का परिणाम हमेशा सुखद होता है। उन्होंने कहा कि निरंतर समर्पण भाव से की गई मेहनत का ही परिणाम है कि वे आज वाइस चांसलर जैसे गरिमामय पद तक पहुंच पाए हैं। यह पद उनके लिए गर्व की बात होने के साथ बड़ी जिम्मेदारी वाला भी है जिसका वे पूरी ईमानदारी से निर्वहन करेंगे।   सामूहिक प्रयासों से हासिल करेंगे लक्ष्य   वीसी के रूप में पदभार ग्रहण करते समय प्रोफेसर मिलाप पूनिया ने महान समाज सुधारक स्वामी दयानंद को नमन करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एमडीयू को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध को बढ़ावा, समावेशी वातावरण, विद्यार्थियों के समग्र विकास और शिक्षकों के व्यावसायिक उन्नयन पर विशेष जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि एमडीयू की विकास यात्रा को मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों से सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पारदर्शिता, डिजिटल नवाचार और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिल सके और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सके।  

    नोएडा श्रमिक प्रदर्शन के बाद सख्ती: 300 से अधिक हिरासत में, सात मामले दर्ज; प्रशासन ने जांच तेज की

      Yugcharan News / 14 April 2026 उत्तर प्रदेश के नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के हालिया विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मंगलवार को गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने जानकारी दी कि प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के सिलसिले में 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सुबह से ही संवेदनशील इलाकों में लगातार रूट मार्च किया गया। उनके अनुसार, सुबह के समय श्रमिकों के समूह तीन अलग-अलग स्थानों पर एकत्र हुए थे, लेकिन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा तत्काल बातचीत किए जाने के बाद स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित कर लिया गया। उन्होंने कहा कि किसी बड़े टकराव की स्थिति बनने से पहले ही लोगों को समझाकर वहां से हटाया गया। विरोध की पृष्ठभूमि: बढ़ती लागत और वेतन संबंधी चिंता पिछले कुछ दिनों से नोएडा के औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों के बीच वेतन, महंगाई और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आ रही थीं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई श्रमिक संगठनों और फैक्ट्री कर्मचारियों ने जीवन-यापन की बढ़ती लागत, परिवहन खर्च और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के महंगे होने को लेकर चिंता जताई थी। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों ने ईंधन, परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर डाला है, जिसका सीधा प्रभाव निम्न और मध्यम आय वर्ग के श्रमिकों पर पड़ा है। ऐसे में वेतन वृद्धि और कामकाजी सुरक्षा जैसे मुद्दे फिर से प्रमुखता से उठने लगे हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि विरोध के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या यातायात अवरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सात एफआईआर दर्ज, जांच कई पहलुओं पर पुलिस ने बताया कि अब तक सात अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन मामलों में सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, भीड़ इकट्ठा करने और कथित रूप से हिंसक गतिविधियों में शामिल होने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच केवल मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कहीं विरोध को किसी संगठित समूह द्वारा दिशा तो नहीं दी गई। पुलिस ने इस संदर्भ में “संगठित नेटवर्क” या कथित “सिंडिकेट” की भूमिका की भी जांच शुरू की है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी शुरुआती जांच चल रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त घटनाओं के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के प्रमुख औद्योगिक सेक्टरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से संवेदनशील इलाकों का दौरा किया और स्थानीय फैक्ट्री प्रबंधन से भी बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि यातायात सामान्य बना रहे और किसी प्रकार की अफवाह या तनाव को फैलने से रोका जा सके। सुबह से ही पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई थी और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी तेज की गई। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। संवाद के जरिए समाधान पर जोर जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं को समझने और समाधान तलाशने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहता है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित विभागों, औद्योगिक संगठनों और श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल पुलिस कार्रवाई से स्थायी समाधान संभव नहीं होता। यदि श्रमिकों की शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, तो संवाद, श्रम कानूनों के अनुपालन और सामाजिक सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उद्योग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन संशोधन, काम के घंटे, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है। कई श्रमिकों का मानना है कि यदि उनकी चिंताओं को पहले सुना जाता, तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने श्रमिकों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। वहीं सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति बनाए रखने की अपील की है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं होतीं, बल्कि यह आर्थिक दबाव, रोजगार असुरक्षा और सामाजिक असंतोष का संकेत भी हो सकती हैं। अफवाहों से बचने की अपील प्रशासन ने लोगों से सोशल मीडिया पर भ्रामक या अपुष्ट जानकारी साझा न करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि अफवाहें स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने, यातायात नियमों का पालन करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा गया है। आगे क्या? फिलहाल नोएडा में स्थिति सामान्य करने की कोशिश जारी है। पुलिस की कार्रवाई, दर्ज मामलों की जांच और संभावित संवाद प्रक्रिया आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। प्रशासन के लिए चुनौती केवल तत्काल शांति बहाल करना नहीं, बल्कि उन कारणों को समझना भी है जिनकी वजह से श्रमिकों में असंतोष बढ़ा। यदि समय रहते संतुलित और संवेदनशील कदम उठाए जाते हैं, तो भविष्य में इस तरह की स्थितियों को रोका जा सकता है। फिलहाल, नोएडा का औद्योगिक तंत्र सतर्क है, श्रमिक समुदाय की नजरें प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हैं, और शहर सामान्य स्थिति की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है।    

    12000 से अधिक की डीपीसी करने पर राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) ने किया शिक्षा मंत्री का अभिनंदन

    जयपुर! शिक्षा विभाग द्वारा 12115 पदों पर डीपीसी करने पर राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य ) ने आज शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का अभिनंदन किया!   डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर हिंदी अनिवार्य के स्थान पर ऑप्शनल विषय चयन का प्रावधान करने एवं निरर्थक नाम को बदलकर सार्थक नाम विद्यालय में रखने की पहल का अभिनंदन करते हुए राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद प्रधानाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजेंद्र बंसल ने कहा की संगठन आपकी इन दोनों पल का हृदय से स्वागत करता है आपके यह दोनों निर्णय क्रांतिकारी है जो आगे चलकर शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे! बच्चों के निरर्थक नाम की जगह सार्थक नाम रखने से उन्हें भविष्य में किसी तरह की असहज स्थिति से सामना नहीं करना पड़ेगा जो कि उनको हीन भावना से बचाएगा!   अभिनंदन करने वालों में राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) के सभा अध्यक्ष दिनेश चौधरी, कोषाध्यक्ष प्रेमनाथ चरण, महामंत्री दिनेश कुमार मीणा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे!  संगठन के पदाधिकारी ने शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के विशेष अधिकारी सतीश कुमार गुप्ता का भी अभिनंदन किया और आभार जिताया!