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    राजस्थान का सबसे बड़ा साइंस डिपार्टमेंट बना जेईसीआरसी का 'स्कूल ऑफ साइंस'

    -राजस्थान का सबसे बड़ा साइंस डिपार्टमेंट बना जेईसीआरसी का 'स्कूल ऑफ साइंस'  -850 से अधिक रिसर्च पेपर और 100 से ज़्यादा किताबें पब्लिश करने वाली डेडिकेटेड फैकल्टी -ग्लोबल रिसर्च और एक्सपीरियंस्ड फैकल्टी के साथ जेईसीआरसी दे रहा साइंस एजुकेशन को नई दिशा  जयपुर, साइंस एजुकेशन को ग्लोबल रिसर्च और इंडस्ट्री से जोड़ते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी का स्कूल ऑफ साइंस लगातार आगे बढ़ा है और छात्रों के बढ़ते रुझान से आज राजस्थान का सबसे बड़ा साइंस डिपार्टमेंट बन चुका है। बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स, फॉरेंसिक साइंस, मैथेमेटिक्स, बॉटनी, जूलॉजी जैसे आठ अलग-अलग विभागों को एक जगह लाकर, यह स्कूल छात्रों को प्रैक्टिकल लर्निंग एनवायरनमेंट के साथ डाइवर्सिफाइड व कम्पलीट इकोसिस्टम प्रदान कर रहा है। इस प्रोग्रेस में सबसे अहम रोल यहाँ की फैकल्टी का है। डिपार्टमेंट के सभी टीचर्स पीएचडी होल्डर हैं, जिनके पास एवरेज 15 साल से अधिक का टीचिंग और रिसर्च एक्सपीरियंस है। टीचर्स की यह डेडिकेटेड टीम अब तक एससीआई, स्कोपस और यूजीसी केअर जैसे टॉप जर्नल्स में 850 से ज्यादा रिसर्च पेपर और जाने-माने इंटरनेशनल पब्लिशर्स के साथ 100 से अधिक किताबें भी पब्लिश कर चुकी है। रिसर्च फील्ड में भी डिपार्टमेंट की अप्रोच पूरी तरह प्रैक्टिकल और आउटकम-बेस्ड है। डीएसटी और डीबीटी जैसी सरकारी एजेंसियों से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की ग्रांट्स मिलना इसी रिसर्च कल्चर का नतीजा है। अब तक यहाँ से 45 से ज्यादा स्टूडेंट्स को पीएचडी अवार्ड की जा चुकी है। फैकल्टी का इंडिविजुअल कंट्रीब्यूशन भी इंस्पायरिंग है; मैथ्स के प्रो. जगदेव सिंह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टॉप 2% साइंटिस्ट्स की लिस्ट में अपनी जगह बना चुके हैं और रिसर्च.कॉम ने उन्हें देश में चौथी रैंक दी है। वहीं, प्रो. एकता मेंघनी को हाल ही में 'वूमेन इन एसटीईएम लीडरशिप अवॉर्ड' से नवाजा गया है। इसी कड़ी में, बायोटेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स जहां वियतनाम में इंटरनेशनल इंटर्नशिप कर रहे हैं, वहीं कई स्टूडेंट्स आईआईटी दिल्ली, कानपुर और सीएसआईआर जैसे टॉप इंस्टीट्यूट्स में अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स पूरे कर रहे हैं। ऑस्ट्रिया और मेक्सिको से आने वाले आईएईएसटीई इंटर्न्स भी यहाँ के इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं, जिससे कैंपस में एक क्रॉस-कल्चरल और ग्लोबल एनवायरनमेंट बन रहा है। एकेडेमिक्स को और ज्यादा अपग्रेड करते हुए कैंपस में इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स (आईयूसीएए) को भी सेटअप किया गया है, ताकि यूथ को एस्ट्रोनॉमी के फील्ड में नया एक्सपोज़र मिले। साथ ही, रेगुलर बेसिस पर होने वाले हैकेथॉन व अन्य इवेंट्स स्टूडेंट्स को सीधे ग्लोबल इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से कनेक्ट करने का काम करते हैं। स्कूल की डीन प्रो. विधि दुबे का मानना है कि एजुकेशन का फोकस इस बात पर होना चाहिए कि हर स्टूडेंट साइंस को समझे और सोसाइटी की जरूरतों के हिसाब से इनोवेट करे। एक्सपीरियंस्ड फैकल्टी, एक्टिव रिसर्च और इंटरनेशनल एक्सपोजर का यह मॉडल जेईसीआरसी के स्कूल ऑफ साइंस को एजुकेशन सेक्टर में एक मजबूत और रिलायबल पहचान दे रहा है।

    ऑनलाइन आवंटन और नई प्रोसेसिंग यूनिट्स से चमकेगी राजस्थान डेयरी

    डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने ली हाई-लेवल बैठक जयपुर। राजस्थान में डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने और पशुपालकों को संबल देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने मंगलवार को शासन सचिवालय में डेयरी विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राजस्थान कोॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक (MD) श्रुति भारद्धाज सहित विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में बजट घोषणाओं, लंबित भुगतानों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विस्तृत मंथन हुआ। पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन आवंटन नीति कैबिनेट मंत्री ने डेयरी नेटवर्क में पारदर्शिता लाने के लिए बड़े निर्देश दिए। अब नई आवंटन नीति के तहत दुग्ध सहकारी समितियां और दुग्ध संकलन केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इनका आवंटन भी पूरी तरह ऑनलाइन ही होगा।   समितियां स्वयं के खर्च पर लगा सकेंगी बीएमसी मंत्री कुमावत ने बल्क मिल्क कूलर्स (BMC) के आवंटन की भी समीक्षा की। उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुधार की जानकारी देते हुए बताया कि नई नीति के तहत अब दुग्ध समितियां अपने स्वयं के पूंजी निवेश से भी बीएमसी स्थापित कर सकेंगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बुनियादी ढांचे का विस्तार: नए प्लांट्स तैयार बैठक में राज्य में बनकर तैयार हो चुके नए प्रोसेसिंग और कैटल फीड प्लांट्स के लोकार्पण की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री कुमावत ने बताया कि जयपुर डेयरी में 10 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाली एक और नई प्रोसेसिंग यूनिट, राजसमंद में 50 हजार लीटर क्षमता का नया प्रोसेसिंग प्लांट बनकर तैयार है। वहीं, पाली में 300 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला आधुनिक कैटल फीड प्लांट,गुलाबपुरा में 150 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला कैटल फीड प्लांट भी बनकर तैयार हो चुका है। इन नवनिर्मित प्लांट्स के लोकार्पण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कुमावत ने यह भी बताया कि कोटा में 150 टन प्रतिदिन क्षमता के नए कैटल फीड प्लांट के भूमि पूजन को लेकर भी रणनीति बनाई गई।   भुगतान और योजनाओं की समीक्षा डेयरी मंत्री ने बजट घोषणाओं को समय पर धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को डेडलाइन तय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना और पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने पशुपालकों और डेयरियों के सभी लंबित भुगतानों को तुरंत निपटाने के सख्त निर्देश दिए। मंत्री कुमावत ने साफ किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और पशुपालकों की आय को बढ़ाना है, जिसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

    मन्त्र-तन्त्र विज्ञान को आधुनिक चिकित्सा एवं मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ने की आवश्यकता प्रो. मदन मोहन झा राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान की राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न तनाव प्रबंधन,

     पाण्डुलिपि संरक्षण एवं नवीन पाठ्यक्रमों पर हुआ गहन मंथन जयपुर। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “मन्त्र-तन्त्र-यन्त्र : प्रयोग एवं विश्लेषण” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में देशभर से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विषय विशेषज्ञों ने मन्त्र, तन्त्र एवं यन्त्र विज्ञान के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया। राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. कुलदीप पालावत ने बताया कि कार्यशाला के दूसरे दिन तनाव प्रबंधन, चित्तशुद्धि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद, पाण्डुलिपि संरक्षण तथा डिजिटल लेखन जैसे समसामयिक एवं व्यावहारिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। तन्त्र का व्यावहारिक एवं चिकित्सकीय पक्ष प्रथम तकनीकी सत्र का विषय प्रवर्तन एवं संचालन डॉ. कैलाशचन्द्र शर्मा ने किया। सत्र के प्रथम उप-विषय “तन्त्र परम्परा का प्रामाणिक स्वरूप आध्यात्मिक एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन” की अध्यक्षता प्रो. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा ने की तथा मुख्य परामर्शक प्रो. सुन्दरनारायण झा रहे। इस अवसर पर तन्त्र परम्परा के आध्यात्मिक, मानसिक एवं सामाजिक पक्षों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। द्वितीय उप-विषय “तनाव प्रबंधन, चित्तशुद्धि एवं ऊर्जा रूपान्तरण में तन्त्र का व्यावहारिक प्रयोग” पर आयोजित चर्चा की अध्यक्षता प्रो. कमलेश कुमार शर्मा ने की तथा मुख्य परामर्शक डॉ. रघुवीर सिंह रहे। वक्ताओं ने बताया कि तन्त्र की प्राचीन पद्धतियाँ आधुनिक जीवन में बढ़ते तनाव, मानसिक असंतुलन एवं ऊर्जा प्रबंधन की चुनौतियों के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा एवं डिजिटल लेखन पर विमर्श द्वितीय सत्र का विषय प्रवर्तन एवं संचालन डॉ. शशि कुमार शर्मा द्वारा किया गया। सत्र के अंतर्गत “दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण” विषय पर प्रो. बीना अग्रवाल की अध्यक्षता तथा डॉ. रणजीत झा के मुख्य परामर्श में विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परम्परा के अमूल्य ग्रन्थों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रखने तथा उनके डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। इसी सत्र में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की रूपरेखा” विषय पर प्रो. सत्यप्रकाश दुबे की अध्यक्षता एवं प्रो. लम्बोदर मिश्र के मुख्य परामर्श में विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मन्त्र, तन्त्र एवं यन्त्र विज्ञान को रोजगारोन्मुखी प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मन्त्र एवं तन्त्र विज्ञान को केवल परम्परागत आस्था के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके वैज्ञानिक, चिकित्सकीय तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आयामों पर भी गंभीर शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के समन्वय से समाज को नई दिशा प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कार्यशाला में प्रस्तुत विचारों एवं निष्कर्षों को भविष्य की शोध योजनाओं तथा शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु तैयार हुआ रोडमैप दोपहर बाद आयोजित तृतीय सत्र “योजना क्रियान्वयन मंत्रणा” का संचालन डॉ. मधुबाला शर्मा ने किया। श्रीकृष्ण शर्मा की अध्यक्षता तथा प्रो. उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी के मुख्य परामर्श में कार्यशाला से प्राप्त निष्कर्षों एवं सुझावों को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना एवं रोडमैप तैयार किया गया। कार्यशाला में प्रो. सुरेन्द्र कुमार शर्मा, प्रो. मोहनलाल शर्मा, डॉ.राजधर मिश्र, डॉ हेमन्त कृष्ण मिश्र सहित देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं विषय विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता रही। सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला को भारतीय ज्ञान परम्परा के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों को समाज के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सभी विद्वानों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।  

    कृषि महाविद्यालय सुमेरपुर में ‘हरित्मा 2026’ का भव्य आयोजन • कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने विद्यार्थियों को किया सम्मानित

    सुमेरपुर। कृषि महाविद्यालय, सुमेरपुर में तृतीय वार्षिकोत्सव समारोह ‘हरित्मा 2026’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में स्थानीय विधायक तथा प्रदेश के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन और छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक वंदना से हुई। समारोह के दौरान मंत्री श्री कुमावत ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इसमें एम.एससी. हॉर्टिकल्चर (फ्रूट साइंस) सहित बी.एससी. कृषि विज्ञान के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने वाले छात्रों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र दिए गए। शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ खेलकूद के क्षेत्र में भी कॉलेज का दबदबा देखने को मिला। विश्वविद्यालय स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्रतिभावान खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुल 23 पदक अपनी झोली में डाले, जिनमें 7 स्वर्ण (गोल्ड), 5 रजत (सिल्वर) और 11 कांस्य (ब्रॉन्ज) पदक शामिल हैं। मंत्री कुमावत ने इन सभी खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई और इसे संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां वार्षिकोत्सव के दौरान कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। राजस्थानी लोक नृत्य, देशभक्ति से ओत-प्रोत नाटक और सुरीले गीतों की प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय प्रशासन की ओर से मुख्य अतिथि का आभार प्रकट किया गया और सभी सफल विद्यार्थियों के साथ सामूहिक तस्वीरें खिंचवाई गईं।   समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री कुमावत ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अव्वल रहे विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आपने अपने माता-पिता और इस संस्थान का नाम रोशन किया है। आपकी यह सफलता आपकी कड़ी मेहनत, अनुशासित जीवन और आपके गुरुजनों के सही मार्गदर्शन का परिणाम है। कुमावत ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को आज सम्मानित होने का अवसर मिला है, वे याद रखें कि यह सफलता एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। आपको आगे जाकर देश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देनी है। श्री कुमावत ने कहा कि आज का युग आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि का युग है। आप सभी कृषि के छात्र हैं, इसलिए आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हमारे देश की आत्मा गांवों में बसती है और हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। सरकार पशुपालन, गोपालन और डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस कॉलेज से निकलने वाले युवा वैज्ञानिक और शोधकर्ता हमारे किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ेंगे, जिससे उनकी आय दोगुनी होगी और खेती अधिक समृद्ध बनेगी। इसके साथ ही, खेल के मैदान पर हमारे खिलाड़ियों ने जो कमाल किया है, वह वास्तव में सराहनीय है। आपने सुमेरपुर कृषि महाविद्यालय का गौरव पूरे विश्वविद्यालय स्तर पर बढ़ाया है। खेल हमें केवल जीतना नहीं सिखाते, बल्कि टीम भावना, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में लड़ना सिखाते हैं। हार और जीत जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन मैदान में उतरकर पूरी ताकत से लड़ना सबसे महत्वपूर्ण है। इस मौके पर कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरू प्रो. डॉ. वीएस जैतावत, विश्वविद्यालय के निदेशक, छात्र कल्याण डॉ. एसआर कुमावत, पाली सरस डेयरी के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, एसडीएम कालूराम कुम्हार, डीएसपी जितेंद्र सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष चर्तुभुज शर्मा, कृषि महाविद्यालय के विशेषाधिकारी डॉ. एमएल तेतरवाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।  

    तख्तगढ़ में डेढ़ करोड़ की लागत से बनेगा बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय

    -पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने किया शिलान्यास सुमेरपुर। सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के तख्तगढ़ कस्बे में पशुपालकों को एक बड़ी सौगात मिली। राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने तख्तगढ़ में राजकीय बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय के नए भवन निर्माण कार्य का विधि-विधान से शिलान्यास किया। इस आधुनिक चिकित्सालय भवन का निर्माण डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से करवाया जाएगा। नया भवन बनने तक पशु चिकित्सालय के अस्थाई कार्यालय को हनुमान गली, गौगरा रोड स्थित सामुदायिक भवन में शिफ्ट किया गया है, ताकि पशुओं के उपचार की सेवाएं बाधित न हों। इस नए बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय में पशुओं के लिए आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, इनडोर व आउटडोर वार्ड, सोनोग्राफी व एक्स-रे जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं और दवाइयों के लिए उचित भंडारण की व्यवस्था उपलब्ध होगी। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय भाजपाइयों और ग्रामीणों ने मंत्री कुमावत का साफा व माला पहनाकर भव्य स्वागत किया। शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा- हमारी सरकार राजस्थान के ग्रामीण अंचलों की अर्थव्यवस्था की रीढ़, यानी हमारे पशुपालकों और किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है, और हमारे ग्रामीण परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर गोवंश और अन्य पशुधन से जुड़ी है। तख्तगढ़ में बनने वाला यह डेढ़ करोड़ का बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय इस पूरे क्षेत्र के मूक पशुओं के लिए संजीवनी साबित होगा और पशुपालकों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।  कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में हमने सुमेरपुर, बाली और तख्तगढ़ के पशु चिकित्सालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए की विशेष मंजूरी दिलवाई थी, जिसके तहत आज तख्तगढ़ में इस भवन निर्माण का कार्य शुरू हो रहा है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पशु चिकित्सालय और उप-केंद्रों की सुदृढ़ व्यवस्था हो, ताकि हर बीमार पशु को समय पर और आधुनिक इलाज मिल सके। इस अवसर पर तख्तगढ नगरपालिका के पूर्व चैयरमैन चंदनमल गांधी, मन की बात कार्यक्रम के जिला संयोजक शिवराज सिंह बिठिया, एसडीएम कालूराम कुम्हार, नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी मगाराम चौधरी, पूर्व उपाध्यक्ष मनोज नामा, एक्सईएन आरएस नैण, निवर्तमान पार्षद देवाराम चौधरी, सांडेराव मंडल के महामंत्री मुकेश मोदी, पुलिस निरीक्षक शैतान सिंह, पशुपालन विभाग, पाली के संयुक्त निदेशक डॉ. ताराचंद मीणा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण व पशुपालक उपस्थित रहे।  

    हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार

    जेईई एडवांस्ड: आल इंडिया रैंक-1 पिताः शिवकुमार (हार्डवेयर व्यवसायी) माताः कंचन देवी जन्मतिथि: 20 सितंबर 2008 एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर आॅल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और आल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। ─── सेल्फ स्टडी में अटेंशन स्पान और क्वालिटी लर्निंग जरूरी: कबीर छिल्लर आॅल इंडिया रैंक-2 पिता: मोहित छिल्लर (आईआईटीयन) माता: प्रियंका छिल्लर (प्राइवेट टीचर) जन्मतिथिः 30 जुलाई 2008 एलन कोटा के क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने जेईई-एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की है। परिवार मूलतः दिल्ली-एनसीआर गुरूग्राम से है। पिछले दो वर्षों से एलन कोटा के क्लासरुम स्टूडेंट कबीर की यह उपलब्धि लगातार मेहनत, सटीक रणनीति और सेल्फ एनालिसिस का परिणाम है। कबीर के पिता मोहित छिल्लर आईआईटीयन हैं और वर्तमान में दिल्ली एनसीआर में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि मां प्रियंका छिल्लर प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। कबीर ने जेईई-मेन में 300 मे ंसे 300 अंक प्राप्त कर आॅल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। इससे पहले 10वीं कक्षा 98 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण कर चुके हैं। कबीर आईआईटी मुम्बई से कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में बीटेक करने के बाद वल्र्ड की नंबर-1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता है। कबीर ने बताया कि मेरी सक्सेस का मुख्य कारण एलन कोटा में फैकल्टीज का गाइडेंस मानता हूं, साथ ही मंैंने अपने पढ़ाई करने के तरीके को भी अलग बनाया है। क्योंकि मैं सेल्फ स्टडीज में अटेंशन स्पान और क्वालिटी देखता हूं। हर टेस्ट के बाद खुद का एनालिसिस किया और जहां कमी थी, उसी पर सबसे ज्यादा फोकस किया। मैं एग्जाम से पहले स्टडी स्ट्रेटेजी को फाइन ट्यून करता हूं। नियमित मॉक टेस्ट देने के साथ-साथ हर पेपर का गहराई से एनालिसिस किया, जिससे मेरी एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट दोनों बेहतर होते चले गए। कॉन्सेप्ट क्लियर होना सबसे जरूरी है। रटने की बजाय हर टॉपिक को समझना और उसे एप्लाई करना ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही। पढ़ाई को छोटे-छोटे टारगेट्स में विभाजित किया, शॉर्ट नोट्स बनाए और नियमित रिवीजन को अपनी आदत बनाया। गलतियों को दोहराने से बचने के लिए मैं हर टेस्ट के बाद कमजोरियों पर फोकस करता था। मैं दोस्तों के साथ समय बिताता हूं, जिससे मानसिक रूप से रिफ्रेश रहने में मदद मिलती है। ─── अनुशासित और नियमित प्रयासों से ही मिलते हैं बड़े परिणाम: जतिन जतिन कुमार चाहर, गांव गोठ, झुंझुनूं (राजस्थान) जेईई एडवांस्डः आॅल इंडिया रैंक-3 पिताः दिनेश चाहर (बीएसएफ, ग्वालियर) मांः मोनिका कुमारी जन्मतिथिः 2 दिसंबर 2008 एलन क्लासरूम स्टूडेंट जतिन कुमार चाहर ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की है। जतिन छह साल से एलन का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है। परिवार मूलतः राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव गोठ से है। जतिन साधारण ग्रामीण परिवेश से आता है। जतिन ने 10वीं कक्षा 97 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 95.2 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। जेईई मेनः आॅल इंडिया रैंक 133 प्राप्त की। इसके अलावा चारों ओलंपियाड्स आईजेएसओ, आईईएसओ, आईओएए एवं आईएनसीएचओ में ओसीएससी कैम्प तक पहुंच चुका है। जतिन ने बताया कि सफलता किसी एक दिन की मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि रोजाना की छोटी-छोटी कोशिशें ही बड़ा परिणाम बनती हैं। मैंने शुरुआत से ही अपना पूरा फोकस कॉन्सेप्ट क्लियर करने पर रखा। विषय को गहराई से समझना जरूरी है। एलन फैकल्टीज ने हर टॉपिक को बहुत अच्छे तरीके से समझाया। मैं क्लास में पूरा ध्यान देता था और उसी दिन पढ़ाए गए टापिक को दोबारा रिवाइज करता था। मॉक टेस्ट देता था और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस करता था। मैंने कभी नंबरों पर फोकस नहीं किया। मेरा लक्ष्य कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारना था। टेस्ट में जहां गलती होती थी, वहां ज्यादा मेहनत करता था। मैं रोजाना लगभग 7 से 8 घंटे सेल्फ-स्टडी करता था, क्योंकि मेरा मानना है कि जेईई की तैयारी में निरंतरता सबसे ज्यादा जरूरी होती है। मैं अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दूंगा। परिवार के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मेरा आत्मविश्वास मजबूत बनाए रखा। पेरेन्ट्स ने हमेशा मुझे मोटिवेट किया। उन्होंने कभी दबाव नहीं बनाया, बल्कि हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया। जब भी मैं थकता था, परिवार और टीचर्स मुझे फिर से प्रेरित करते थे। मैं आईआईटी मुम्बई से बीटेक करने के बाद सिविल सर्विस में जाना चाहता हूं। ─── गर्व है कि मैं कोटा से हूं: अर्णव जेईई-एडवांस्ड - एआईआर-07 पिताः डॉ. बुद्धिप्रकाश (ज्योग्राफी शिक्षक) मांः निधि गौतम (गर्वनमेन्ट टीचर) एलन कोटा के क्लासरूम स्टूडेंट अर्णव गौतम ने जेईई एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक 07 हासिल की है। कोटा निवासी अर्णव पिछले छह वर्षों से एलन कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है। इससे पहले 10वीं कक्षा 95.8 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। 2023 में जूनियर साइंस ओलंपियाड के ओसीएससी, 2024 में एस्ट्रो ओलंपियाड के ओसीएससी और 2025 में फिजिक्स ओलंपियाड के ओसीएससी में भाग लिया। इसके अलावा एशियन फिजिक्स ओलंपियाड 2025 में ब्रॉन्ज मेडल मिला। जेईई-मेन में अर्णव ने एआईआर-5 हासिल की। मेरे दिमाग में हमेशा टारगेट रहता था कि मुझे यह हासिल करना है। अब मैं आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस ब्रांच में बीटेक करना चाहता हूं। अर्णव ने बताया कि जब-जब रिजल्ट आते हैं और कोटा की बात आती है तो गर्व महसूस होता है कि मैं कोटा से ही हूं। यहां एलन के साथ तैयारी से मेरी अकेडमिक्स मजबूत हुई। मेरा मानना है कि सेल्फ स्टडी बहुत जरूरी है, लेकिन सही गाइडेंस के लिए कोचिंग के सहयोग भी जरूरी है। यदि कोच अच्छे हैं और अच्छा मार्गदर्शन मिलता है तो प्रतिभा निखरती है और उससे रिजल्ट्स अच्छे आते हैं। मुझे अच्छा गाइडेंस मिला और इससे कमजोरियां दूर होती चली गई। जेईई जैसे एग्जाम की तैयारी में डाउट्स का तुरंत समाधान होना बेहद जरूरी है, जो फैकल्टीज के मार्गदर्शन से ही संभव हो पाता है। ─── फिक्स स्टडी आवर्स नहीं, बल्कि इफेक्टिव स्टडी पर रहा फोकसः कनिष्क जैन जेईई एडवांस्ड 2026: ऑल इंडिया रैंक 8 पिताः रितुल जैन (आईटी प्रोफेशनल) मां: सरिता गुप्ता एलन कोटा क्लासरूम स्टूडेंट कनिष्क जैन ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-8 हासिल की है। पिछले दो वर्षों से एलन के क्लासरूम स्टूडेंट कनिष्क ने जेईई मेन्स में ऑल इंडिया रैंक 36 प्राप्त की थी। कनिष्क का चयन वल्र्ड रैंकिंग नंबर-1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) में हो चुका हैं। परिवार मूलतः कोटा से है पिता रितुल जैन पुणे में आईटी प्रोफेशनल हैं तथा मां सरिता गृहिणी हैं। 10वीं कक्षा 90.8 प्रतिशत और 12वीं बोर्ड में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। 10वीं कक्षा में एशियन फिजिक्स ओलंपियाड (एपीएचओ) में ऑनरेबल मेंशन, 11वीं में इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड (आईपीएचओ) में गोल्ड मेडल तथा एपीएचओ में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं, 12वीं में उसका चयन आईपीएचओ के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आईजेएसओ में गोल्ड मेडल जीतने के साथ थ्योरी टॉपर रहा। कनिष्क ने बताया कि जेईई की तैयारी के लिए एलन एवं कोटा बेस्ट काॅम्बीनेशन है। ओलंपियाड्स में भाग लेने से सब्जेक्ट्स को गहराई से समझने का अवसर मिलता है। ओलंपियाड्स की तैयारी ने मुझे कठिन प्राॅब्लम्स को साॅल्व करने की क्षमता दी, जिसका लाभ मुझे जेईई की तैयारी में भी मिला। क्वालिटी स्टडी और सब्जेक्ट की समझ ज्यादा महत्वपूर्ण है। मेरा कोई फिक्स स्टडी शेड्यूल नहीं था। रात में जल्दी सोेता था और सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करता था। हर स्टूडेंट का सीखने का तरीका अलग होता है, इसलिए अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार पढ़ाई करनी चाहिए। ─── मैथ्स में इंट्रेस्ट, यही मेरी सक्सेस: दर्श सिक्का जेईई एडवांस्डः आॅल इंडिया रैंक-10 पिताः डॉ. कबीर सिक्का (ईएनटी सर्जन) माताः डॉ. आशी बिंद्रा (न्यूरो एनेस्थेसिस्ट) एलन क्लासरूम स्टूडेंट दर्श सिक्का ने जेईई एडवांस्ड में आल इंडिया रैंक-10 हासिल की है। दिल्ली निवासी दर्श पिछले दो वर्षों से एलन में अध्ययरत है। जेईई मेन्स में 99.999 पर्सेन्टाइल स्कोर हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 53 प्राप्त की थी। दर्श ने 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड के ओसीएससी कैंप में शामिल हो चुका है। फिलहाल आईआईटी मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करना है। पिता डाॅ.कबीर सिक्का ईएनटी सर्जन हैं और मां डाॅ.आशी बिन्द्रा न्यूरो एनेस्थेसिस्ट हैं। दर्श ने बताया कि मजबूत कंसेप्ट्स, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं। सभी को लगता था कि मैं भी मम्मी-पापा की तरह मेडिकल फील्ड में जाउंगा लेकिन मैथ्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट रहा है और इसी इंटरेस्ट की वजह से मैंने जेईई की तैयारी करने का डिसीजन लिया। जेईई की तैयारी केवल कठिन प्रश्न साॅल्व करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सब्जेक्ट्स और सभी टाॅपिक्स के कंसेप्ट्स की गहराई से समझ होना जरूरी है। मैंने हर टॉपिक को गहराई से समझने और रेगुलरली प्रश्नों की प्रेक्टिस करने पर जोर दिया। मेरा मानना है कि छोटी कक्षाओं से ही कंसेप्ट्स मजबूत किए जाएं तो आगे की तैयारी काफी आसान हो जाती है। एक तरह से एलन में जाकर मुझे घर जैसा महसूस होता था। फैकल्टीज हो या स्टाफ, हर कोई हमेशा स्टूडेंट के साथ खड़ा दिखाई देता है। जेइई की तैयारी का जो सफर रहा उसमें एलन की फैकल्टीज एवं इंस्टीट्यूट के एनवायरमेंट का काफी सपोर्ट रहा। दर्श कहते हैं, मैंने हमेशा विषय को समझने पर फोकस किया, रटने पर नहीं। नियमित टेस्ट, उनकी एनालिसिस और अपनी कमजोरियों पर काम करना मेरी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ओलंपियाड्स में भाग लेने से कठिन समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास बढ़ता है, इसलिए विद्यार्थियों को उनमें भी भाग लेना चाहिए। इसके लिए मैं डेली वॉक करता था और बैडमिंटन खेलता हूं।

    एआईआर-1, 2, 3 के साथ रचा नया रिकाॅर्ड एलन क्लासरूम से टाॅप 50 में 24 स्टूडेंट्स

    जेईई-एडवांस्ड 2026: एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान   एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम आल इंडिया टाॅपर, टाॅप-10 में एलन क्लासरूम से 6 स्टूडेंट     आल इंडिया गल्र्स टाॅपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से, आईआईटी-जेईई के 7 में से 5 जोन टाॅपर एलन से   एलन आनलाइन लाइव कोर्स के यशवर्धन को भारत के सभी आनलाइन प्लेटफार्म में बेस्ट आॅल इंडिया रैंक-52   एलन कोटा से लगातार तीसरे वर्ष आल इंडिया टाॅपर   कोटा. आईआईटी रुड़की द्वारा जारी जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे है। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है।   देशभर में एलन की सफलता की अगुवाई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही आॅल इंडिया गल्र्स टाॅपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ आल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन आॅनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने आॅल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर आॅनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है।   टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। परिणाम देखे जा रहे हैं और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स के सफल होने की संभावना है।   स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, आॅफलाइन और आॅनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है।”   उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है।   इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी।  

    जेईई-एडवांस्ड 2026 : एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम आल इंडिया टाॅपर, टाॅप-10 में एलन क्लासरूम से 6 स्टूडेंट, एआईआर-1, 2, 3 के साथ रचा नया रिकाॅर्ड

    एलन क्लासरूम से टाॅप 50 में 24 स्टूडेंट्स, आल इंडिया गल्र्स टाॅपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से, आईआईटी-जेईई के 7 में से 5 जोन टाॅपर एलन से   आॅनलाइन लाइव कोर्स के यशवर्धन को भारत के सभी आनलाइन प्लेटफार्म में बेस्ट आॅल इंडिया रैंक-52   एलन कोटा से लगातार तीसरे वर्ष आल इंडिया टाॅपर   कोटा. आईआईटी रुड़की द्वारा जारी जेईई-एडवांस्ड 2026 के रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स rahe है, इसके साथटॉप-100 में 41 स्थान प्राप्त किए हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुवाई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही आॅल इंडिया गल्र्स टाॅपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ आॅल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन आॅनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने आॅल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर आॅनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है।   टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं।   स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप 50, टाॅप-100, आॅफलाइन और आॅनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चौथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है।” उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है।   इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी।  

    जेईई-एडवांस्ड 2026: एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान: एआईआर-1, 2, 3 के साथ रचा नया रिकाॅर्ड

    जेईई-एडवांस्ड 2026: एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान: एआईआर-1, 2, 3 के साथ रचा नया रिकाॅर्ड   6 ALLEN classroom students in Top 10   एलन कोटा से लगातार तीसरे वर्ष आॅल इंडिया टाॅपर   आॅल इंडिया गल्र्स टाॅपर आरोही देशपांडे भी एलन kota क्लासरूम से   आॅनलाइन लाइव कोर्स के यशवर्धन को आॅल इंडिया रैंक-52   Shubham AIR 1 Kabeer chiillar 2 Jatin Chahar 3  

    राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान में 'मंत्रविज्ञान एवं यंत्र संरचना' पर राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

    जयपुर। राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आज दिनांक 01 जून, 2026 को 'मंत्रविज्ञान, ध्वनि तरंग विश्लेषण एवं यंत्र संरचना' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजन सचिव व कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का प्रारंभ प्रातः 10:00 बजे पारंपरिक वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंत्र प्रतिष्ठान के निदेशक व कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुलदीप पालावत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। प्रथम तकनीकी सत्र: मंत्रविज्ञान व ध्वनि तरंग विश्लेषण सत्र को दो उप-विषयों में विभाजित किया गया , जिसका संचालन और विषय प्रवर्तन डॉ. राजधर मिश्र ने किया मंत्रों की विशिष्ट ध्वनियाँ इस विषय पर गहन विस्तृत चर्चा की गयी , जिसकी सत्राध्यक्षता बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने की तथा प्रमुख परामर्शक के रूप में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. सुन्दरनारायण झा ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि मंत्रों के सटीक उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें मस्तिष्क और वातावरण पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। मंत्रोच्चार की आवृत्तियां: इस उप-सत्र की अध्यक्षता श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. रामराज उपाध्याय ने की तथा मुख्य परामर्शक के रूप में प्रो. रामानुज उपाध्याय उपस्थित रहे। सत्र में विभिन्न मंत्रों की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) और उनके वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया गया। द्वितीय तकनीकी सत्र: यन्त्र संरचना एवं ज्यामितीय ऊर्जा दोपहर 2:30 बजे से कार्यशाला के दूसरे सत्र की शुरुआत हुई, जिसका विषय प्रवर्तन व कुशल संचालन निदेशक शैक्षणिक परिसर डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने किया। इस सत्र को भी दो मुख्य भागों में बांटा गया यंत्रों का रेखीय विन्यास, बिन्दु व आकार का वैज्ञानिक आधार: उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में प्रमुख परामर्शक केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के डॉ. डी. दयानाथ ने रेखाओं और बिंदुओं से बनने वाली ज्यामितीय आकृतियों के पीछे छिपे विज्ञान को समझाया। यंत्रों द्वारा ऊर्जा का केन्द्रीकरण इस अंतिम विषय पर व्याकरण के पूर्व पीठाधीश प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की और प्रमुख परामर्शक पं. सत्यनारायण शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार यंत्र अपने विशिष्ट आकार के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक केंद्र पर स्थापित करने में सक्षम होते हैं। कार्यशाला के पहले दिन देश भर से आए शोधार्थियों, आचार्यों और विद्वानों ने सक्रिय सहभागिता की। आयोजन सचिव व कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सभी आगंतुकों और विषय विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया इस अवसर पर प्रो मोहन लाल शर्मा डॉ. विनोद कुमार शर्मा, डॉ संदीप जोशी, डॉ स्नेहलता शर्मा,डॉ हेमन्त कृष्ण मिश्र सहित अनेक संस्कृत अनुरागी शिक्षक शोधार्थी उपस्थित थे।  

    हिमालय की ऊँचाइयों पर गूँजा संस्कृत का स्वर “हिमालयस्य शिखरे शिखरे संस्कृतम् संस्कृत की वाणी भारत के घर-घर में गूँजनी चाहिए कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 51 सदस्यीय छात्र दल ने लिया भाग जयपुर । केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, संस्कृत भारती, तरुणोदय संस्कृत सेवा संस्था (शिवमोग्गा), यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरुणोदय इकाई, शिवमोग्गा तथा गीर्वाण भारती इकाई, श्री आदिचुंचनगिरि क्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी स्थित रोली-खोली हिमालय पर्वत पर रविवार, 31 मई 2026 को भव्य संस्कृत ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया गया। समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई पर आयोजित इस समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 51 सदस्यीय छात्र-छात्राओं के दल ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संस्कृत ध्वज फहराया तथा संस्कृत संवर्धन का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर युवाओ द्वारा संस्कृत प्रचार के संकल्प को व्यक्त करते हुए यह प्रेरणादायी श्लोक भी प्रस्तुत किया गया “हिमाद्रौ तरुणाः सर्वे संस्कृतध्वजवाहकाः । ज्ञानदीपं नयामोऽद्य भारतस्य नवोदितम् ॥” अर्थात् हिमालय की ऊँचाइयों पर खड़े युवा संस्कृत ध्वज के वाहक बनकर नवभारत के निर्माण हेतु ज्ञान का दीप प्रज्वलित कर रहे हैं। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने अपने संदेश में कहा कि हिमालय की चोटियो से लेकर भारत के प्रत्येक घर तक संस्कृत की वाणी गूँजनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुल्लू-मनाली के निकट स्थित रमणीय रोली-खोली हिमालय पर्वत पर तीसरी बार संस्कृत ध्वजारोहण कार्यक्रम का सफल आयोजन अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने कार्यक्रम के सभी आयोजकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियो को हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित की । कुलपति प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि हिमालय के दिव्य वातावरण में संस्कृत ध्वज का फहराया जाना भारतीय संस्कृति के गौरव, वैभव और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश “हिमालयस्य शिखरे शिखरे संस्कृतम्, भारतस्य गेहे गेहे संस्कृतम्” रहा, जिसने हिमालय की ऊँचाइयों से संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश सम्पूर्ण राष्ट्र तक पहुँचाया। संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक, तार्किक एवं सुव्यवस्थित भाषाओं में से एक है। इसका अध्ययन बाल्यावस्था से ही प्रारम्भ होना चाहिए, क्योंकि संस्कृत के अध्ययन से भाषाई दक्षता, तार्किक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना तथा नैतिक मूल्यों का विकास होता है। छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने कहा कि ऐसे साहसिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ट्रेकिंग अभियान के समन्वयक डॉ. योगेन्द्र दीक्षित ने बताया कि इस हिमालयी ट्रेकिंग अभियान में विश्वविद्यालय के 12 परिसरों से 51 विद्यार्थियों ने भाग लिया है। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के क्रीड़ा सहायक निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा, संस्कृत भारती एवं तरुणोदय संस्कृत सेवा संस्था के प्रमुख तथा ट्रेक समन्वयक ए. एन. विजयेन्द्र राव, यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के ट्रेक संयोजक नवीन चंद्र तिवारी, टीम लीडर एम. के. ज्योति तथा रोली-खोली शिविर प्रमुख आदित्य सहित छात्र उपस्थित थे ।  

    इंटरनेशनल बिजनेस समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन

    इंडियन काउंसिल फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन (ICEI) एवं फेडरेशन ऑफ़ यूनिकॉर्न इनोवेटिव स्टार्टअप एंड इंडस्ट्री (FUISI) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इंटरनेशनल बिजनेस समिट एंड अवॉर्ड्स 2026” के अंतिम दिन आज देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपति, स्टार्टअप्स, निवेशक एवं नवाचार से जुड़े विषेशज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति की भूमिका में कैबिनेट मिनिस्टर (जल संसाधन मंत्रालय ) सुरेश रावत उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से आज नीदरलैंड से पधारे विकास चतुर्वेदी (सी ए), सुनील चोपड़ा, डाइरेक्टर एम एस एम ई प्रदीप ओझा, सी ए नीरज मित्तल ने अपने बिजनेस को कैसे जीरो से आई पी ओ तक पहुंचाने की दिशा में सार्थक तरीको से काम करना चाहिए और नए स्टार्टअप्स को किन किन बारिकीयों को ध्यान में रखते हुए किस दिशा में काम करना चाहिए के बारे में बताया। फेडरेशन ऑफ़ यूनिकॉर्न इनोवेटिव स्टार्टअप एंड इंडस्ट्री (FUISI) के चेयरपर्सन डॉ आनंद पोद्दार, अभिषेक जैन और पुनीत सेठी के साथ माननीय मुख्य अतिथियों को गुलदस्ता देकर और दुप्पटा पहना कर स्वागत किया। इस अवसर पर सुरेश रावत ने कहा की राज्य सरकार स्टार्ट अप्स और उद्यमिओं के लिए उनके व्यसाय को बढ़ावा देने की लिए संकल्पित है और नित नए नवाचारों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं को ला रही है। इंडियन काउंसिल फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन (ICEI) के फाउंडर अभिषेक जैन और पुनीत सेठी ने बताया कि "यह समिट MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए एक सशक्त मंच साबित होगा, जो भारतीय उद्यमशीलता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, हम एक ऐसा समावेशी मंच तैयार कर रहे हैं जहां नवाचार को सम्मान मिलेगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूती मिलेगी।" कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों को उनके सराहनीय योगदान के लिए मुख्य अथिति द्वारा अवार्ड देकर सम्मनित किया गया