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    युवाओ के योगदान से सरबत एवं प्रसादी वितरित की

    स्मोल स्टेप फाउंडेशन एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों के द्वारा संस्था संस्थापक एवं राजस्थान स्वच्छता अम्बेसडर के.के. गुप्ता जी के सहयोग एवं निर्देशन मे हनुमान जन्मउत्स्व के उपलक्ष के अवसर पर वाटिका रोड पर आने- जाने वाले राहगीरों को दुर्गा विहार कल्याण विहार के युवाओ के योगदान से सरबत एवं प्रसादी वितरित की गईं! कार्यक्रम मे अमोलक बैरवा (समाज सेवी ), राजेश गुणावत, सौरभ, दीपक, किशन, अमन, आर्यन एवं कुणाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा  

    राज्यपाल हरीभाऊ बागड़े ने किया प्रो. अंजू पारीक की पुस्तक का विमोचन;

    एसएसजी पारीक पीजी कॉलेज के शिक्षाविदों ने की मुलाकात ​जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरीभाऊ बागड़े ने राजभवन में एसएसजी पारीक पीजी कॉलेज की उप-प्राचार्या प्रोफेसर अंजू पारीक द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक विशेष रूप से बी.ए. प्रथम वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर (BA 1st Year, 2nd Semester) के छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक टेक्स्ट बुक है, जो विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में बेहद मददगार साबित होगी। ​पुस्तक विमोचन के इस खास अवसर पर एसएसजी पारीक कॉलेज एवं सम्बद्ध शिक्षण संस्थान के सचिव लक्ष्मीकांत पारीक तथा कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर एन.एम. शर्मा भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।  

    केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने भगवान शिव का किया अभिषेक

    जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर बुधवार को राजस्थान के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार की इस अनूठी पहल के तहत प्रदेशभर में सुख, समृद्धि और राष्ट्र कल्याण के लिए वैदिक अनुष्ठान किए गए। इस राष्ट्रव्यापी गौरव उत्सव की कड़ी में राजस्थान के देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली जिले के सुमेरपुर स्थित ऐतिहासिक जोधेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित विशेष पूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। देवस्थान विभाग द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री ने भगवान शिव की पूजा अभिषेक और आरती की। उन्होंने भगवान नारायण की पूजा अर्चना कर कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा देवालय कार्यक्रम के दौरान प्रकांड पंडितों और आचार्यों द्वारा सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष अनुष्ठान किए गए। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने देश की प्रगति, नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु होने की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और वैदिक ऋचाओं के स्वर से गुंजायमान हो उठा। सेवा और सुशासन के 12 वर्ष इस अवसर पर मंत्री कुमावत ने कहा "प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बनाई है। उनके कार्यकाल के यह 12 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। इसी गौरवशाली यात्रा की सफलता और देश की निरंतर उन्नति के लिए आज प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों में देवस्थान विभाग द्वारा विशेष पूजा-अर्चना कर ईश्वर का आभार जताया गया है।" प्रदेशभर के मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब देवस्थान विभाग के निर्देशानुसार राजस्थान के सभी जिलों में स्थित प्रमुख और सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में भी इसी प्रकार के विशेष मंगलकामना कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर महाआरती, सुंदरकांड पाठ और प्रसादी का वितरण भी हुआ, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और भारी संख्या में आम श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर देश की खुशहाली की कामना की। सुमेरपुर में आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम कालूराम कुम्हार, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य करण सिंह नेतरा और प्रदेश ओबीसी मोर्चा के दीपक भाटी ने भी उद्बोधन दिया। इस मौके पर पाली डेयरी के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, पुलिस उप अधीक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत, नगरपालिका के पूर्व चैयरमैन राकेश राखेचा, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, तख्तगढ नगरपालिका के निवर्तमान चैयरमैन ललित रांकावत, बांकली मण्डल अध्यक्ष हनुवंत सिंह, एससी मोर्चा के प्रदेश मंत्री दिनेश मीणा, जयंतीलाल जैन, रमेशचंद्र बोहरा, जोधेश्वर महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश मेवाड़ा, सरपंच रमणीक त्रिवेदी, पर्वत सिंह कानपुरा, नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी नरपत सिंह राजपुरोहित, अमृत परिहार, प्रेमचंद बरत, वगताराम मेड़तिया, भूराराम मालवीय सांडेराव, परबत सिंह पूर्व सीबीईओ, सहित अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुमेरपुर मंडल अध्यक्ष रविकांत रावल ने किया।  

    बीरबल गुर्जर चौथी बार अध्यक्ष बने

    एकता नगर सी – 1, सी- 2 एवं ए एस विकास समिति के द्वि-वार्षिक के चुनाव में बीरबल प्रसाद गुर्जर को चौथी बार निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया । कैलाश चन्द्र रैगर को सचिव तथा ओमप्रकाश कुमावत को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया । इसके अलावा लादूराम गुर्जर वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मनोज खंडेलवाल उपाध्यक्ष, रामसिंह एवं किशन कुमावत को संगठन मंत्री, नैन सिंह एवं छोटेलाल रैगर को सलाहकार, बाबूलाल यादव को मिडिया सचिव तथा रूपनारायण कुमावत, मोहन कुमावत, विनोद कुमार राठौड़, विमला मोहन, जितेंद्र कुमावत को कार्यकारिणी सदस्य चुना ।  

    12,500 फीट ऊंचे हंगला टॉप पर विनोद खवाल ने बढ़ाया राजस्थान का मान

    जयपुर/हंगला. राजस्थान के जयपुर निवासी युवा स्वयंसेवक विनोद खवाल ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। विनोद ने हिमाचल प्रदेश में स्थित 12,500 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर बने 'हंगला टॉप' पर आयोजित 'माई भारत' कार्यक्रम में हिस्सा लिया और वहां सफलतापूर्वक भारत का ध्वज लहराया। कठिन परिस्थितियों में दिखाया साहस हंगला टॉप का यह क्षेत्र अपने दुर्गम पहाड़ी रास्तों, बर्फीली हवाओं और बेहद कम ऑक्सीजन के स्तर के लिए जाना जाता है। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, विनोद खवाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने पूरे उत्साह, समर्पण और अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए इस अभियान को पूरा किया। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवक के रूप में उनकी यह सक्रिय भागीदारी अब देश के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गई है। चारों ओर से मिल रही सराहना विनोद की इस शानदार सफलता पर एनएसएस (NSS) के अधिकारियों, उनके साथियों और पूरे प्रदेशवासियों ने गहरा गर्व व्यक्त किया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। एनएसएस अधिकारियों का कहना है कि विनोद जैसे समर्पित युवा ही राजस्थान और देश के उज्जवल भविष्य की नींव हैं। 'माई भारत' अभियान: राष्ट्र निर्माण का संदेश इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण, साहस और एकता की भावना को विकसित करना है। अधिकारियों के अनुसार, हंगला टॉप जैसे चुनौतीपूर्ण और दुर्गम स्थानों पर जाकर युवा स्वयंसेवक न केवल अपने भीतर के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी नया आयाम देते हैं। "यह सिर्फ मेरी उपलब्धि नहीं है, यह मेरे माता-पिता, साथियों, प्रशिक्षकों और पूरे राजस्थान का आशीर्वाद है। हम सब मिलकर देश के लिए कुछ बड़ा कर सकते हैं।" — विनोद खवाल(एनएसएस स्वयंसेवक, जयपुर) मुख्य बातें (Highlights): • ऊंचाई पर परचम: विनोद खवाल ने 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हंगला टॉप पर 'माई भारत' का ध्वज फहराया। • अहम भूमिका: राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवक के रूप में कार्यक्रम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। • नेतृत्व और समर्पण: विषम परिस्थितियों, कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन के बीच अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। • युवाओं को संदेश: इस अभियान के जरिए देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा, एकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।    

    रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन, रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी जयपुर में 45 दिवसीय ग्रीष्मकालीन औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

    जयपुर। रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन, रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (RCERT), सीतापुरा, जयपुर में 45 दिवसीय ग्रीष्मकालीन औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पायथन प्रोग्रामिंग आधारित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी कौशल एवं उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में हुआ। इस अवसर पर उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा, डॉ. धर्मेंद्र सक्सेना, इंजी. महेंद्र कुमार वर्मा, इंजी. चेतन कुमार सहित अन्य शिक्षण एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य प्रशिक्षक इंजी. मनन (Linux World Pvt. Ltd.) ने विद्यार्थियों को पायथन प्रोग्रामिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग,… डेटा विज्ञान तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इसके बढ़ते महत्व से अवगत कराया और व्यावहारिक परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत ने कहा कि तकनीकी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाना है। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को उद्योगों की कार्यप्रणाली से परिचित कराते हुए उनके करियर को नई दिशा प्रदान करेगा। वहीं उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा ने विद्यार्थियों से प्रशिक्षण अवधि का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।   कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष इंजी. चेतन कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पायथन फंडामेंटल्स, ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग, डेटाबेस कनेक्टिविटी, वेब विकास, ऑटोमेशन, वास्तविक परियोजनाएं तथा साक्षात्कार तैयारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।   चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने संदेश में कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास समय की मांग है तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं। वाइस चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाकर स्वयं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रेरित किया।   कार्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रशिक्षण के माध्यम से संस्थान विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख एवं रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सशक्त बना रहा है।  

    जनसुनवाई में छाई हरि सिंह कालबेलिया की मूछें

    एक महीने में कालबेलिया बस्ती में पीने के पानी की समस्या के समाधान के निर्देश कोटा/ बारां। बारां जिले की पंचायत समिति अटरू की ग्राम पंचायत कवाई की कालबेलिया बस्ती निवासी हरिसिंह ने शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर को कालबेलिया बस्ती में पीने के पानी की समस्या बताते हुए समाधान के लिए पाइप लाइन डालने की मांग करने जनसुनवाई में पहुंचे थे। जैसे ही मंत्री मदन दिलावर ने कवाई की जनसुनवाई शुरू की तो हरिसिंह का नाम पुकारा ,जिसपर हरिसिंह ऑनलाइन स्क्रीन पर आये । हरि सिंह को देखते ही मंत्री मदन दिलावर ने आत्मीयता से हरि सिंह से पूछा वह हरि सिंह जी आपकी मूछें तो बहुत शानदार है।  मंत्री मदन दिलावर की यू अपने प्रति आत्मीयता देख कर हरि सिंह कालबेलिया प्रसन्न हो गये । उसके बाद मंत्री ने हरि सिंह की पूरी बात सुनी और कालबेलिया बस्ती में एक महीने में पानी की समस्या का समाधान कर पेयजल उपलब्ध करने के निर्देश दिए । गौरतलब है कि आज शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने एक नवाचार करते हुए प्रदेश के सात जिलों की सात पंचायत समिति के एक एक ग्राम पंचायत की वर्चुअल माध्यम से जन सुनवाई की। बारां जिले में पंचायत समिति अटरू की ग्राम पंचायत कवाई की जनसुनवाई की गई । मंत्री दिलावर ने व्यक्तिश 8 परिवादियों से ऑनलाइन बात कर उनकी समस्या सुनी तथा मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को समाधान करने के निर्देश दिए। शिविर में हाथों हाथ अपनी समस्या का समाधान पाकर परिवादी बेहद खुश नज़र आए और मंत्री की इस पहल की प्रशंसा करते नजर आए। जनसुनवाई में बलवंत मीणा ने मुकुंदरा ग्राम को अटरू शेरगढ़ परियोजना से जोड़ने,उमेश महावर पुत्र धन्ना लाल महावार ने मीट की दुकान हटाने,सत्यनारायण पुत्र बाबूलाल ने शौचालय दिलवाने,सुनीता गालव पत्नी आशीष ने प्रधानमंत्री आवास दिलवाने,कुलदीप पुत्र रामगोपाल ने प्रधान मंत्री आवास की अंतिम किश्त दिलवाने,पुखराज सेन पुत्र भीम राज सेन ने प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करवाने तथा राजू,प्रवीण एवं सुदेश ने राष्ट्रीय राज मार्ग नंबर 90 पर खड्डे सही करवाने की मांग करते मंत्री के सामने अपनी बात रखी। मंत्री मदन दिलावर ने स्वयं के विभाग से सम्बन्धित समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया तथा अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं को संबंधित विभाग को भेज कर निस्तारित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए । मंत्री ने जन सुनवाई में उपस्थित अधिकारियों को जनसुनवाई की पूरी रिपोर्ट भेजने के भी निर्देश भी दिए ।  

    मुस्कान: जीवन का सबसे सुंदर आभूषण

    'होंठों पर सजी मुस्कान जब मन से निकलती है, तो थकी हुई राहों में भी उम्मीदें खिलती हैं।' जीवन में अनेक ऐसे क्षण आते हैं जब परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेती हैं। कभी असफलता निराश करती है, कभी संघर्ष थका देता है और कभी भविष्य की अनिश्चितता मन को विचलित कर देती है। ऐसे समय में यदि कोई चीज़ हमें भीतर से संबल देती है, तो वह है हमारी मुस्कान। मुस्कान केवल चेहरे की सजावट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का प्रतीक है। मुस्कान वह शक्ति है जो अंधेरे में भी प्रकाश की किरण खोज लेती है। यह मन के बोझ को हल्का करती है और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देती है। जब हम मुस्कुराते हैं, तो केवल अपना ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों का वातावरण भी सकारात्मक बना देते हैं। 'मुस्कानों की धूप बिखेरो, चाहे मौसम कैसा हो, उम्मीदों के दीप जलाओ, चाहे अँधेरा कितना हो।' आज के प्रतिस्पर्धी युग में युवा वर्ग अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नौकरी की चिंता, कैरियर का दबाव, सफलता की दौड़ और अपेक्षाओं का भार उन्हें मानसिक रूप से थका देता है। ऐसे में मुस्कान एक औषधि की तरह काम करती है, जो मन को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करती है। युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि उनके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच है, तो वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं। जीवन में असफलताएँ आना स्वाभाविक है, लेकिन हर असफलता के बाद मुस्कुराकर फिर से उठ खड़ा होना ही वास्तविक सफलता की पहचान है। 'गिरकर संभलना सीखो, हारकर चलना सीखो, मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो मुस्कुराकर जीना सीखो।' आज सोशल मीडिया की चमक-दमक में कई युवा दूसरों की सफलता देखकर स्वयं को कमतर आँकने लगते हैं। उन्हें यह समझना होगा कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। अपनी मेहनत पर विश्वास रखिए, अपने सपनों को जीवित रखिए और चेहरे पर मुस्कान बनाए रखिए। यही मुस्कान आपके संघर्षों को शक्ति और सपनों को पंख देगी। मुस्कान- रिश्तों की मिठास एक सच्ची मुस्कान रिश्तों में प्रेम और विश्वास का संचार करती है। कई बार जो बात लंबे शब्द नहीं कह पाते, वह एक मुस्कान सहजता से कह देती है। परिवार, मित्रों और समाज के बीच मुस्कुराता हुआ व्यक्ति सदैव प्रिय होता है, क्योंकि उसकी उपस्थिति ही सकारात्मकता का संदेश देती है। 'शब्दों से पहले जो दिल तक पहुँच जाए, वह मुस्कान ही तो है जो रिश्तों को महका जाए।' सफलता केवल उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि संघर्षों के बीच संतुलित और प्रसन्न बने रहने की कला भी है। मुस्कुराने वाला व्यक्ति चुनौतियों से घबराता नहीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदलने का प्रयास करता है। यही दृष्टिकोण उसे दूसरों से अलग बनाता है। याद रखिए, जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होंगी, लेकिन हमारा दृष्टिकोण हमेशा हमारे हाथ में होता है। यदि हम हर परिस्थिति का सामना मुस्कान के साथ करें, तो कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। सार रूप में हम कह सकते हैं कि मुस्कान जीवन का सबसे सरल, सुंदर और मूल्यवान उपहार है। यह न केवल हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, बल्कि हमारे भीतर आशा, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार भी करती है। विशेषकर युवाओं के लिए यह सफलता की यात्रा का सबसे मजबूत साथी है। 'रखो मुस्कान को अपना हमसफ़र हर हाल में, यही रोशनी बन जाएगी जीवन के हर सवाल में। सपनों की उड़ान को कभी थमने मत देना, चेहरे की मुस्कान को कभी कम होने मत देना।' मुस्कुराइए, क्योंकि आपकी मुस्कान केवल आपके चेहरे की नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व, आपके साहस और आपके उज्ज्वल भविष्य की पहचान है। रेनू शब्दमुखर जयपुर  

    जल: सभ्यता, संस्कृति और वेदों का वैज्ञानिक दर्शन

      जल: सभ्यता, संस्कृति और वेदों का वैज्ञानिक दर्शन जल पृथ्वी पर जीवन का सबसे मूलभूत आधार है। भूगर्भीय और जैविक दृष्टि से देखें, तो जल ही वह माध्यम है जिसने जीवन को पनपने और विकसित होने का अवसर दिया। हालांकि, आज के आधुनिक युग में हम जल को केवल एक संसाधन (Resource) के रूप में देखते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और विशेषकर वेदों में इसे एक 'जीवंत तत्व' और 'दिव्य शक्ति' के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। वेद मानव इतिहास के वे अमूल्य ग्रंथ हैं, जो न केवल आध्यात्मिकता का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जल प्रबंधन का सूक्ष्म वैज्ञानिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं। एक वैज्ञानिक के रूप में, जब हम वेदों की ऋचाओं का विश्लेषण करते हैं, तो हम पाते हैं कि उनमें वर्णित जल चक्र, मौसम विज्ञान और जल संचयन के सिद्धांत आज के जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के दौर में अत्यंत प्रासंगिक हैं। वैदिक जल विज्ञान: एक वैज्ञानिक विश्लेषण आधुनिक विज्ञान आज 'हाइड्रोलॉजिकल साइकिल' (Hydrological Cycle) की जिस जटिल प्रक्रिया को पढ़ता है, उसका उल्लेख हजारों वर्ष पूर्व वेदों की ऋचाओं में अत्यंत स्पष्टता के साथ किया गया है। ऋग्वेद में जल को 'आपः' कहा गया है, जिसका अर्थ है वह जो गतिशील है और जीवन देने वाला है। वेदों के अनुसार, जल चक्र का संचालन सूर्य की ऊर्जा से होता है। ऋग्वेद की ऋचाओं में स्पष्ट वर्णन है कि कैसे सूर्य की ऊष्मा से जल का वाष्पीकरण (Evaporation) होता है। ये सूक्ष्म जलकण हवा के साथ मिलकर वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर बादलों का निर्माण करते हैं, जो अंततः वर्षा के रूप में पृथ्वी पर पुन: अवतरित होते हैं। यह प्रक्रिया एक बंद लूप (Closed-loop system) के समान है, जिसे आज हम आधुनिक विज्ञान में 'वाटर रिसाइकिलिंग' कहते हैं। सामवेद की ऋचाएं यह भी बताती हैं कि जल के इस चक्र का सीधा संबंध सूर्य की स्थिति और ऋतुओं के परिवर्तन से है, जो आधुनिक मौसम विज्ञान का आधार है। वेदों में सतही जल (Surface Water) के साथ-साथ 'भूजल' (Groundwater) के महत्व को 'अवनि के गर्भ में छिपे अमृत' के रूप में पहचाना गया है, जो यह दर्शाता है कि हमारे ऋषि-मुनि जलभृतों (Aquifers) के महत्व से पूर्णतः परिचित थे। जल: ऊर्जा, चेतना और मनोविज्ञान का संबंध विज्ञान की दृष्टि से जल के अणुओं की संरचना (Molecular Structure) बहुत ही अनूठी है। वेदों में जल को शुद्धि का माध्यम क्यों माना गया है? इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण है। 1. ध्यान और एकाग्रता: प्राचीन ऋषि जल के स्रोतों के निकट ध्यान करते थे। आधुनिक मनोविज्ञान के शोध बताते हैं कि बहते हुए जल की ध्वनि (White Noise) मस्तिष्क में 'अल्फा वेव्स' (Alpha waves) को बढ़ाती है, जो मानसिक शांति और रचनात्मकता के लिए उत्तरदायी है। 2. यज्ञ और प्रोक्षण: यज्ञों में जल का उपयोग केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यज्ञ के दौरान अग्नि से उत्पन्न ऊर्जा के साथ जल का संस्पर्श वातावरण के सूक्ष्म कणों (Particles) को आवेशित (Ionized) कर देता है, जिससे एक शुद्ध और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। जल, सभ्यता और जैव-विविधता का इतिहास मानव सभ्यता का इतिहास नदियों के किनारे ही लिखा गया है। चाहे सिंधु-सरस्वती सभ्यता हो या नील नदी की घाटी, जल ही विकास का प्रमुख चालक रहा है। एक जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में, मैं यह स्पष्ट कर सकता हूँ कि नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में जैव विविधता का घनत्व अन्य क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक होता है। वेद हमें सिखाते हैं कि नदियाँ केवल परिवहन या सिंचाई का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जीवित तंत्र (Living Systems) हैं। यदि नदी के प्रवाह को अवरुद्ध किया जाता है या उसमें प्रदूषण मिलाया जाता है, तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र चरमरा जाता है। वैदिक साहित्य में नदियों को 'माता' कहना इसी पारिस्थितिक संतुलन के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को दर्शाता है। आधुनिक जल संकट: चुनौतियों का समाधान आज के दौर में हम औद्योगीकरण और अनियंत्रित शहरीकरण की दौड़ में जल के प्राकृतिक संतुलन को भूल चुके हैं। जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने वर्षा के पैटर्न को अनिश्चित बना दिया है। ऐसे में वेदों के 'सतत विकास' (Sustainable Development) के सिद्धांतों को समझना अनिवार्य हो गया है: • वर्षा जल संचयन: वेदों में जल को संग्रहित करने की परंपरा का वर्णन मिलता है। आज के कंक्रीट के जंगलों में, हमें रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल के स्तर को पुनः रिचार्ज करना होगा, जो वैदिक संस्कृति में कुओं और बावड़ियों के माध्यम से किया जाता था। • उपभोग का संयम: वेदों का संदेश स्पष्ट है—'प्रकृति से उतना ही लो जितना आवश्यक हो।' वर्तमान जल संकट का मूल कारण 'अति-उपभोग' है। हमें जल को एक अमूल्य धरोहर मानते हुए इसके दुरुपयोग को रोकना होगा। एक वैज्ञानिक अपील: जड़ों की ओर लौटना वेदों का ज्ञान केवल अतीत की पांडुलिपियों तक सीमित नहीं है; यह एक जीवंत दर्शन है। आधुनिक समय की पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान हमें अपनी वैज्ञानिक विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय में मिलता है। एक वैज्ञानिक के नाते, मेरा यह मानना है कि यदि हम अपनी जल प्रबंधन नीतियों में वेदों के 'पारिस्थितिक संतुलन' (Ecological Balance) के सिद्धांतों को जोड़ें, तो हम जल संकट जैसी आपदाओं से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। जल संरक्षण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत और सामाजिक उत्तरदायित्व है। हमें नदियों के पुनर्जीवन, औद्योगिक कचरे के प्रबंधन और जल संचयन को एक जन-आंदोलन बनाना होगा। जिस तरह हमारे पूर्वजों ने जल के प्रत्येक बूंद को देवता माना, उसी तरह हमें इसे 'जीवन का रक्त' मानकर संरक्षित करना होगा। जल ही सभ्यता है, जल ही संस्कृति है और जल ही वह आधार है जो हमारे भविष्य के अस्तित्व को सुरक्षित रखता है। आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम अपने जल स्रोतों की शुचिता बनाए रखेंगे और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का मार्ग अपनाएंगे। लेखक का संपर्क विवरण: हार्दिक पाठक आचार्य, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जेईसीआरसी विश्वविद्यालय, जयपुर  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर एवं फीडिंग हैंड्स एनजीओ द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों को शैक्षणिक खिलौना किटों का वितरण

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर ने फीडिंग हैंड्स एनजीओ के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए शैक्षणिक खिलौना किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य खेल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना तथा छोटे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना था, जिससे उनके प्रारंभिक शिक्षा स्तर को सुदृढ़ किया जा सके।   इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों तुतोली, फतेहपुरा, कुम्हारियावास, वाटिका, बाजदोली, टेटारिया सहित आसपास के कई गांवों के आंगनबाड़ी केन्द्रों को लाभान्वित किया गया। प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को 20 सेट शैक्षणिक खिलौनों से युक्त एक विशेष खिलौना किट प्रदान की गई, जो बच्चों के बौद्धिक विकास, रचनात्मक सोच तथा खेल-खेल में सीखने की क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।   यह वितरण कार्यक्रम यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर परिसर में आयोजित किया गया, जहां विभिन्न गांवों से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने केन्द्रों की ओर से शैक्षणिक खिलौना किट प्राप्त की। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करना तथा गतिविधि-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।   कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि जैन, अध्यक्ष, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर रहीं। डॉ. रश्मि जैन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा चरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक खिलौने बच्चों में रचनात्मकता, जिज्ञासा तथा समग्र विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।   इस अवसर पर डॉ. अंशु सुराना, प्रो-चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के समग्र विकास में खेल-आधारित शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने फीडिंग हैंड्स एनजीओ एवं विश्वविद्यालय की इस पहल को सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षण अवसर प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी शिक्षा एवं सामुदायिक विकास से जुड़े ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।   इस अवसर पर उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर और फीडिंग हैंड्स एनजीओ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन शैक्षणिक संसाधनों से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अत्यधिक लाभ मिलेगा।   फीडिंग हैंड्स एनजीओ पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर सामाजिक कल्याण एवं सामुदायिक विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थाओं ने भविष्य में भी ग्रामीण समुदायों के शैक्षिक एवं सामाजिक विकास के लिए इसी प्रकार की जनहितकारी पहलें जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।  

    विश्व पर्यावरण दिवस पर रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (RCERT), सीतापुरा, जयपुर में हुआ वृक्षारोपण, विद्यार्थियों ने लिया हरित भविष्य का संकल्प

    जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (RCERT), सीतापुरा, जयपुर में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत के नेतृत्व में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।   इस अवसर पर उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा, इंजी. अनिल बोयल, इंजी. महेंद्र कुमार वर्मा (प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी), इंजी. चेतन कुमार, डॉ. सुमित शर्मा, इंजी. महेंद्र सैनी, इंजी. अश्विनी, इंजी. ओंकार बुनकर, राजेश कुमार बैरवा, इंजी. रूपेंद्र कुमार, , अशोक मौर्य, रामप्रसाद चौधरी तथा हजारी प्रसाद सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर हमारी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी इंजी. महेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण ही स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है तथा प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए।   कॉलेज के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा वृक्षारोपण के माध्यम से ही हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य प्रदान कर सकते हैं। वहीं वाइस चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।   कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ ली। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने हरित, स्वच्छ एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।  

    जिगर के टुकड़े के लिए मां का संघर्ष... कैंसर से पति को खोया, टेलरिंग कर बेटे पढ़ाया, अब जिगर बनेगा गांव का पहला आईआईटीयन

    कॅरियर सिटी कोटा से सफलता की एक ओर कहानी कॅरियर एवं केयर सिटी कोटा का एक बार फिर सामाजिक बदलाव में योगदान सामने आया है। कहानी ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा की है। एक मां ने अपने जिगर के टुकड़े के लिए हर संघर्ष किया और बेटे का कॅरियर बनाकर गांव और परिवार का नाम रोशन किया है। कोटा में दो साल रहकर कॅरियर बनाने वाले एलन स्टूडेंट जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक 17783 और ओबीसी-एनसीएल कैटेगिरी रैंक 4597 हासिल की है। जेईई-मेन में 98.6143 पर्सेन्टाइल स्कोर किया। इससे पूर्व 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।   जिगर नायक की कहानी संघर्ष, त्याग और सपनों की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। जिगर और उसकी मां अपूर्वा ने आर्थिक तंगी, पिता का साया उठ जाना और जिम्मेदारियों के बोझ के बावजूद जिगर ने हार नहीं मानी। अपने सपनों को साकार करने के लिए वह कोटा आया और एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया। यहां दो साल कड़ी मेहनत करने के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली और जिगर अब अपने गांव और परिवार का पहला आईआईटीयन बनने जा रहा है।   जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक उसके पिता को कैंसर से ग्रस्त होने का पता चला। काफी इलाज कराया जिसमें परिवार की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। वर्ष 2020 में जिगर के पिता का निधन हो गया। घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और पिता के जाने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया। लेकिन मां अपूर्वा नायक ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने तय कर लिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, बेटे के सपने को टूटने नहीं देंगी।   ───   परिवार के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी   जिगर की मां अपूर्वा ने परिवार संभालने के साथ-साथ बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई। उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की। दिनभर सिलाई मशीन पर मेहनत कर वे घर का खर्च चलातीं और जिगर की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़तीं। कई बार आर्थिक परेशानियां इतनी बढ़ जाती थीं कि घर चलाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन मां ने कभी बेटे को इसका एहसास नहीं होने दिया।   ───   सोशल मीडिया से मिली जेईई की जानकारी   जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे जेईई परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और जेईई एग्जाम से जुड़ी वीडियो देखने के बाद उसे पहली बार इस परीक्षा के बारे में पता चला। तभी उसके मन में आईआईटीयन बनने का सपना जागा। उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलकर रहेगा। इसके बाद जिगर कोटा आया और पिछले दो वर्षों तक एलन में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में जेईई की तैयारी की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे 11वीं और 12वीं कक्षा में फीस में छूट भी मिली।   ───   परिवार के भविष्य के लिए मेहनत   जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो फिलहाल सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जिगर ने बताया कि मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के भविष्य के लिए मेहनत कर रहा है। मैं चाहता हूं कि आईआईटी पूरी करने के बाद मेरी मां को संघर्ष न करना पड़े और छोटे भाई की पढ़ाई भी बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके। यह समाज को दिशा देने वाला प्रयास एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा साबित होती हैं, जिनमें विद्यार्थी के साथ-साथ अभिभावकों का भी संघर्ष साथ है। ऐसे संदेश जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं तो सामाजिक बदलाव के प्रयास सामने आते हैं। हम चाहते हैं कि पढ़ाई में किसी के भी कोई बाधा नहीं आए और प्रतिभावान विद्यार्थियों को अपनी योग्यता के अनुसार उचित स्थान मिले।