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    राष्ट्रीय एकता के सूत्र: भारत बोध-विकास की अवधारणा' के चार दिवसीय कार्यक्रम का समापन

    भारत बोध आयोजन समिति एवं श्री गुरु गोविन्द सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन के संयुक्त तत्वावधान में' भारत बोध-विकास की अवधारणा' के चार दिवसीय कार्यक्रम का समापन आज दिनांक 06 फरवरी 2026 को मानविकी पीठ सभागार, राजस्थान विश्वविद्यालय,जयपुर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रख्यात शिक्षाविद् हनुमान सिंह राठौड़ रहे। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर विशेष बल दिया और कहा कि इसी में राष्ट्रीय एकता के तत्व निहित हैं। उन्होंने 'भारत' शब्द की संकल्पना को विस्तार से बताया और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों के महत्व को उजागर किया। भारतीय संस्कृति की प्राचीनता के साथ -साथ इसकी निरंतरता के बारे में बताया की विभिन्न बाह्य तत्वों को आत्मसात करने की इसमें अद्भुत क्षमता रही है,इसी कारण यह सदियों से अक्षुण्ण बनी रही है‌।कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने की। उन्होंने भारत बोध अवधारणा के तात्विक चिंतन पर चर्चा की ,साथ ही इस संबंध में विश्वविद्यालय में हो रहे प्रयासों के बारे में बतलाया।इस दौरान कार्यक्रम संयोजक डॉ सुरेंद्र सिंह चौहान ने चार-दिवसीय कार्यक्रम की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। सह-संयोजक डॉ मीना रानी नारंग ने आगामी शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में बतलाया।अंत में प्रोफेसर सरीना कालिया ने सभी को सफल आयोजन की बधाई दी एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान विभिन्न परम्परागत खेल एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं में सफल रहे छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में महारानी महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा देशभक्ति पूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई।

    एनईपी–2020 पर आयोजित एफडीपी के चतुर्थ दिवस ज्ञान आधारित शिक्षा और आउटकम-बेस्ड लर्निंग पर जोर

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020) पर आयोजित पाँच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का चतुर्थ दिवस 6 फरवरी 2026 को उच्च शिक्षा के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित रहा।   चतुर्थ दिवस की मुख्य वक्ता डॉ. रश्मि जैन, प्रेसिडेंट, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि “ज्ञान ही शक्ति है और हम आज ज्ञान युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ केवल डिग्री नहीं बल्कि ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को अब वैश्विक स्तर पर अनुकूल (Globally Adaptable) बनाना समय की आवश्यकता है।   उन्होंने उच्च शिक्षा के ढांचे (Framework of Higher Education) पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि यद्यपि राजस्थान सरकार में प्रक्रियाएँ अपेक्षाकृत धीमी हो सकती हैं, लेकिन संस्थानों को NEP 2020 को अपनाने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने Learning Outcome Based Education की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए Program Outcome और Course Outcome के अंतर को समझाया और कहा कि शिक्षा प्रणाली को परिणाम-उन्मुख बनाना आवश्यक है।   डॉ. जैन ने कहा कि Academic Bank of Credits (ABC-ID) के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं और इससे उनकी क्षमता, कौशल और प्रगति का सही मूल्यांकन संभव होता है। उन्होंने कॉन्सेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा में प्रैक्टिकल, कौशल, तकनीक और भाषा की बाधा रहित व्यवस्था होनी चाहिए।   उन्होंने समता (Equity) और मूल्य आधारित शिक्षा (Value Education) को विकसित भारत की नींव बताते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता है, जिसके लिए इंटर्नशिप और आजीवन सीखने (Lifetime Learning) को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना होगा।   उन्होंने यह भी कहा कि छात्र-केंद्रित शिक्षा (Student Centric Education) और Outcome Based Education के माध्यम से प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपने स्पष्ट आउटपुट देने होंगे। इसके लिए संस्थानों की Vision और Mission का मजबूत होना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने Graduate Attributes, Program Outcome की महत्ता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।   कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रीता बिष्ट द्वारा की जा रही है। आयोजन के सफल संचालन में संयोजक डॉ. नीतू चौहान, सह-संयोजक डॉ. अपर्णा सोनी एवं आयोजन सचिव श्रीमती अनिला शर्मा की सक्रिय भूमिका रही। प्रतिभागी शिक्षकों ने सत्र में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।   चतुर्थ दिवस का सत्र शिक्षकों को उच्च शिक्षा के भविष्य, वैश्विक मानकों और परिणाम-आधारित शिक्षण की दिशा में प्रेरित करने वाला सिद्ध हुआ।

    इन्वेस्टीचर सेरेमनी का आयोजन किया

     महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल में इन्वेस्टीचर सेरेमनी का आयोजन किया गया। इसमें आगामी सत्र के लिए हैड गर्ल, हाउस कैप्टन एवं अन्य कैबिनेट सदस्यों का चुनाव किया गया। नवीन सत्र के लिए अपूर्वा रावत हैड गर्ल, स्वस्ति खंगारोत वाइस प्रेसिडेंट और नंदिनी चौधरी डिप्टी हैड चुनी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुई। स्कूल कैबिनेट के वर्तमान सदस्यों को उनकी प्रतिबद्धता के लिए प्रसंग मेडल देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अनुभवों को सभी के साथ साझा किया। सभी नए सदस्यों को सत्र 2026-27 के लिए कर्तव्यनिष्ठा एवं प्रतिबद्धता की शपथ दिलाई गई। स्कूल डायरेक्टर श्रीमती अर्चना एस. मानकोटिया द्वारा बैच पहनाकर एवं माल्यार्पण करके नवीन सदस्यों को अधिकृत किया गया। श्रीमती मनकोटिया ने अपने संबोधन में बताया कि विनम्रता, निर्णय क्षमता, कर्तव्य पालन, सभी का सहयोग एवं प्रबंधन और छात्राओं के मध्य एक पुल की तरह कार्य करना ही एक अच्छे नेतृत्व की पहचान है।

    टी20 विश्व कप 2026 से पहले भारत को झटका, हर्षित राणा की जगह सिराज या शमी पर मंथन

      टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा के पूरे टूर्नामेंट से बाहर होने की आशंका जताई जा रही है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच के दौरान घुटने में चोट लगने के बाद राणा की स्थिति को लेकर टीम प्रबंधन चिंतित है। ऐसे में भारतीय चयनकर्ताओं के सामने बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह मोहम्मद सिराज को मौका दिया जाए या अनुभवी मोहम्मद शमी की वापसी कराई जाए। यह चोट भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच 4 फरवरी को खेले गए वार्म-अप मुकाबले के दौरान लगी। हर्षित राणा अपने पहले और एकमात्र ओवर में 16 रन देने के बाद असहज दिखे और मैदान छोड़कर बाहर चले गए। इसके बाद उनकी फिटनेस पर सवाल खड़े हो गए। अगले दिन कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी संकेत दिए कि राणा की हालत “अच्छी नहीं” लग रही है। हालांकि बीसीसीआई की ओर से अब तक कोई औपचारिक मेडिकल अपडेट जारी नहीं किया गया है, लेकिन टीम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 24 वर्षीय यह तेज गेंदबाज टूर्नामेंट के किसी भी चरण में पूरी तरह फिट नहीं हो पाएगा। सूर्यकुमार यादव ने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टीम के पास खेलने के लिए पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं, लेकिन 15 सदस्यीय टीम में शामिल किसी खिलाड़ी का बाहर होना हमेशा बड़ी चुनौती होता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राणा को खास सोच-विचार के बाद टीम में शामिल किया गया था और उनकी गैरमौजूदगी संतुलन को प्रभावित कर सकती है। भारत को अपना पहला मुकाबला 7 फरवरी को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के खिलाफ खेलना है। ऐसे में टीम प्रबंधन जल्द से जल्द राणा के विकल्प पर फैसला लेना चाहता है। मोहम्मद सिराज सबसे आगे मौजूदा परिस्थितियों में मोहम्मद सिराज को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह 2024 में भारत की टी20 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं और बड़े मंच पर खेलने का अनुभव रखते हैं। सिराज अपनी आक्रामक गेंदबाजी, नई गेंद से स्विंग और डेथ ओवर्स में सटीक यॉर्कर डालने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। हर्षित राणा की तरह ही वह भी “हिट-द-डेक” गेंदबाज हैं, जिससे टीम की गेंदबाजी रणनीति में ज्यादा बदलाव नहीं करना पड़ेगा। हाल के महीनों में सिराज ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट दोनों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। हालांकि टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वह नियमित सदस्य नहीं रहे हैं और उन्होंने आखिरी टी20 मैच 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था। इसके बावजूद उनकी फिटनेस और फॉर्म को देखते हुए चयनकर्ता उन्हें सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। शमी की वापसी पर भी चर्चा दूसरी ओर, अनुभवी मोहम्मद शमी भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं। शमी को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के बाद से भारतीय टी20 टीम में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने हाल ही में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 16 विकेट, विजय हजारे ट्रॉफी में 15 विकेट और मौजूदा रणजी ट्रॉफी में 28 विकेट लेकर अपनी लय का साफ संकेत दिया है। शमी का अनुभव खासतौर पर आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत के लिए अहम रहा है। 2023 के वनडे विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका सात विकेट का प्रदर्शन आज भी याद किया जाता है। इसके अलावा, निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता टीम को अतिरिक्त विकल्प देती है। हालांकि चयनकर्ताओं ने हाल के समय में उन्हें नजरअंदाज किया है, जिससे उनकी वापसी को लेकर असमंजस बना हुआ है। चयनकर्ताओं के सामने संतुलन की चुनौती अब चयनकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि टीम को अनुभव की जरूरत है या मौजूदा टी20 संयोजन को बरकरार रखने की। सिराज जहां मौजूदा आक्रामक टी20 योजना में फिट बैठते हैं, वहीं शमी का अनुभव दबाव वाले मैचों में अहम साबित हो सकता है। हर्षित राणा की चोट ने भारत की योजनाओं को निश्चित रूप से प्रभावित किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम प्रबंधन किस पर भरोसा जताता है। सिराज की ताजगी और निरंतरता या शमी का अनुभव और बड़ा मैच खेलने की आदत—इन दोनों में से कौन सा पहलू चयनकर्ताओं को ज्यादा भरोसेमंद लगता है, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल जाएगा।    

    डॉलर के मुकाबले रुपया 36 पैसे गिरकर 90.70 पर बंद

      अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को 36 पैसे कमजोर होकर 90.70 (अस्थायी) पर बंद हुआ। अमेरिका–ईरान वार्ता को लेकर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, सत्र के पहले हिस्से में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले से रुपये को कुछ समर्थन मिला, लेकिन लगातार विदेशी फंड की निकासी के चलते स्थानीय मुद्रा अपनी शुरुआती बढ़त कायम नहीं रख सकी। इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.28 पर खुला और कारोबार के दौरान 90.18 के उच्च स्तर तथा 90.83 के निचले स्तर के बीच उतार-चढ़ाव करता रहा। अंत में यह 36 पैसे की गिरावट के साथ 90.70 पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार (5 फरवरी 2026) को रुपया 13 पैसे मजबूत होकर 90.34 पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने से दिन के पहले हिस्से में रुपये को सहारा मिला, लेकिन अमेरिका–ईरान वार्ता से जुड़ी अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी, जिससे रुपये पर दबाव आया। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक उम्मीदें और ताजा विदेशी संस्थागत निवेश (FII) निचले स्तरों पर रुपये को समर्थन दे सकते हैं। चौधरी के अनुसार, निकट अवधि में डॉलर–रुपया (USD-INR) स्पॉट रेट 90.40 से 91.20 के दायरे में रह सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.01% की मामूली गिरावट के साथ 97.81 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.38% चढ़कर 68.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे आयातक देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 266.47 अंकों की बढ़त के साथ 83,580.40 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50.90 अंक चढ़कर 25,693.70 पर पहुंच गया। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 2,150.51 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिसका असर मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की चाल को प्रभावित किया, जबकि घरेलू आर्थिक संकेतकों और नीतिगत स्थिरता ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की।    

    शेयर बाजार में तेजी, आरबीआई के ब्याज दरें यथावत रखने से आई रिकवरी; आईटीसी और बैंक शेयर चमके

    भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को बढ़त के साथ बंद हुए। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखने और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) को बैंकों से ऋण देने की अनुमति के प्रस्ताव से बाजार धारणा को समर्थन मिला। सत्र के अंतिम घंटों में हुई खरीदारी से बाजार में मजबूती देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 266.47 अंक यानी 0.32% की बढ़त के साथ 83,580.40 पर बंद हुआ। दिन के निचले स्तर 82,925.35 से सेंसेक्स ने अंत में 655 अंकों से अधिक की छलांग लगाई। वहीं, एनएसई निफ्टी 50.90 अंक यानी 0.20% चढ़कर 25,693.70 पर बंद हुआ। दिनभर कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ नीति रुख को बरकरार रखते हुए संकेत दिया कि फिलहाल दरों में बदलाव की संभावना कम है। महंगाई के नियंत्रित स्तर पर रहने और बजट के बाद सरकारी खर्च बढ़ने से विकास को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर को वित्तपोषण बढ़ाने के लिए बैंकों को कुछ नियामकीय सुरक्षा उपायों के साथ REITs को ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इस कदम से रियल एस्टेट और क्रेडिट इकोसिस्टम को दीर्घकालिक फंडिंग में मदद मिलने की उम्मीद है। सेंसेक्स की कंपनियों में आईटीसी सबसे ज्यादा 5.09% उछला। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड और बजाज फिनसर्व में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टेक महिंद्रा, अडानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे। एशियाई बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्केई 225 बढ़त में रहा। यूरोपीय बाजारों में कारोबार के दौरान अधिकांश सूचकांक हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार को कमजोरी के साथ बंद हुए, जहां नैस्डैक कंपोजिट 1.59%, एसएंडपी 500 में 1.23% और डाउ जोंस में 1.20% की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी और चुनिंदा सेक्टरों में कमजोरी के बावजूद एफएमसीजी और निजी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से घरेलू बाजार को सहारा मिला। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि आरबीआई की नीति उम्मीदों के अनुरूप रही और विकास को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को 2,150.51 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.20% चढ़कर 68.34 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।   कुल मिलाकर, आरबीआई की नीतिगत स्थिरता और रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर नियामकीय स्पष्टता से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसके चलते बाजार अंत में बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा।

    ईयू ने टिकटॉक पर ‘आदत डालने वाले डिज़ाइन’ का आरोप लगाया, उपयोगकर्ता सुरक्षा के लिए बदलाव की मांग

      यूरोपीय संघ (ईयू) ने लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर अपने डिजिटल नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐप का मौजूदा डिज़ाइन उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों और संवेदनशील वर्गों, में अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। यूरोपीय आयोग ने अपनी प्रारंभिक जांच में दावा किया है कि टिकटॉक के कुछ फीचर ऐसे बनाए गए हैं जो लोगों को लगातार स्क्रीन पर बनाए रखते हैं और इससे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ईयू के कार्यकारी निकाय और डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट (DSA) को लागू करने वाले यूरोपीय आयोग के अनुसार, टिकटॉक में ऑटोप्ले, अनंत स्क्रॉल और अत्यधिक वैयक्तिकृत कंटेंट सिफारिश प्रणाली जैसे फीचर “आदत डालने वाला व्यवहार” पैदा करते हैं। आयोग का कहना है कि प्लेटफॉर्म ने यह आकलन करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए कि ये फीचर उपयोगकर्ताओं, खासकर नाबालिगों, को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि टिकटॉक को अपनी सेवा के “मूलभूत डिज़ाइन” में बदलाव करने की आवश्यकता है। डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों पर यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाएं और उपयोगकर्ताओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए ठोस उपाय करें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कंपनियों पर उनके वैश्विक वार्षिक कारोबार का छह प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यूरोपीय आयोग की टेक संप्रभुता, सुरक्षा और लोकतंत्र से जुड़ी कार्यकारी उपाध्यक्ष हेना विरकुनेन ने कहा कि सोशल मीडिया की लत बच्चों और किशोरों के विकासशील मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उनके अनुसार, यूरोप में कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि ऑनलाइन वातावरण में नागरिकों, विशेषकर बच्चों, की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। जांच में यह भी कहा गया है कि टिकटॉक का डिज़ाइन उपयोगकर्ताओं को लगातार नए वीडियो दिखाकर उन्हें स्क्रॉल करते रहने के लिए प्रेरित करता है, जिससे आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ता है। आयोग का आरोप है कि ऐप इस बात के संकेतों को भी नजरअंदाज करता है कि कोई उपयोगकर्ता अत्यधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, जैसे कि नाबालिगों का देर रात तक ऐप का उपयोग करना या बार-बार ऐप खोलना। आयोग के अनुसार, टिकटॉक द्वारा लागू किए गए समय प्रबंधन और स्क्रीन कंट्रोल से जुड़े मौजूदा फीचर आसानी से नजरअंदाज किए जा सकते हैं और उनमें प्रभावी रुकावट (फ्रिक्शन) की कमी है। वहीं, पैरेंटल कंट्रोल टूल्स को उपयोग में लाने के लिए माता-पिता को अतिरिक्त समय और तकनीकी समझ की जरूरत पड़ती है, जिससे उनकी प्रभावशीलता सीमित हो जाती है। इन निष्कर्षों के आधार पर यूरोपीय आयोग ने टिकटॉक से कई बदलावों पर विचार करने को कहा है। इनमें अनंत स्क्रॉल जैसे फीचर को बंद करना, रात के समय और लंबे उपयोग के दौरान अधिक प्रभावी ब्रेक और चेतावनियां लागू करना, तथा कंटेंट सिफारिश प्रणाली में बदलाव करना शामिल है ताकि उपयोगकर्ताओं को बिना रुके वीडियो देखने के चक्र से बाहर निकलने का अवसर मिल सके। हालांकि, टिकटॉक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि आयोग के प्रारंभिक निष्कर्ष प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली की “गलत और निराधार” तस्वीर पेश करते हैं। टिकटॉक का कहना है कि वह इन निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी और संस्थागत विकल्पों का उपयोग करेगा। कंपनी के अनुसार, टिकटॉक पहले से ही कई ऐसे टूल उपलब्ध कराता है जो उपयोगकर्ताओं को अपने समय के उपयोग को लेकर सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करते हैं। इनमें कस्टम स्क्रीन टाइम लिमिट, स्लीप रिमाइंडर और अन्य नियंत्रण शामिल हैं। टिकटॉक का दावा है कि ये फीचर उपयोगकर्ताओं और अभिभावकों को प्लेटफॉर्म के उपयोग पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करते हैं। अब टिकटॉक को आयोग के निष्कर्षों पर औपचारिक रूप से जवाब देने का अवसर मिलेगा। इसके बाद यदि ईयू को संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो गैर-अनुपालन का निर्णय लिया जा सकता है, जिससे भारी आर्थिक दंड का रास्ता खुल सकता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं में बढ़ती लत को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा चुका है, जबकि स्पेन, फ्रांस और डेनमार्क जैसे देश भी इसी तरह के कदमों पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका में भी हाल ही में सोशल मीडिया की लत से जुड़े एक बड़े मुकदमे में टिकटॉक ने समझौता किया है, जबकि अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ की यह कार्रवाई वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक अहम संकेत है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि टिकटॉक इन मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डिज़ाइन और उपयोगकर्ता सुरक्षा को लेकर नए मानक तय करता है।    

    ग्रीनलैंड में कूटनीतिक गतिविधि तेज: कनाडा और फ्रांस ने खोले वाणिज्य दूतावास

      आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कनाडा और फ्रांस ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अपने-अपने वाणिज्य दूतावास खोलने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हाल के महीनों में संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से खनिज-समृद्ध इस अर्ध-स्वायत्त द्वीप पर प्रभाव बढ़ाने को लेकर चर्चाएं तेज रही हैं। दोनों देशों की इस पहल को न केवल ग्रीनलैंड बल्कि उसके प्रशासनिक संरक्षक डेनमार्क के प्रति समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद शुक्रवार को नूक पहुंचीं, जहां उन्होंने कनाडाई वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। उनके साथ कनाडा की गवर्नर जनरल और स्वदेशी समुदाय से जुड़ी प्रमुख हस्ती मैरी साइमन भी मौजूद रहीं। कनाडाई अधिकारियों के अनुसार, यह दूतावास जलवायु परिवर्तन, आर्कटिक सुरक्षा, स्थानीय इनुइट समुदायों के अधिकारों और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कनाडा ने ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा वर्ष 2024 में ही कर दी थी, यानी हालिया अंतरराष्ट्रीय तनावों से पहले। हालांकि, प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण इसका औपचारिक उद्घाटन नवंबर से टलता रहा। अब इसे सक्रिय किए जाने के साथ ही कनाडा ने स्पष्ट किया है कि वह आर्कटिक क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को प्राथमिकता देता है। उद्घाटन से एक दिन पहले अनीता आनंद ने डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि आर्कटिक राष्ट्र होने के नाते कनाडा और डेनमार्क क्षेत्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने यह भी दोहराया कि ग्रीनलैंड के विकास से जुड़े निर्णय स्थानीय प्रशासन और वहां के लोगों की सहमति से ही होने चाहिए। इसी दिन फ्रांस ने भी ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा को अमल में लाया। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि जीन-नोएल पोइरियर ने नूक में फ्रांस के कौंसल जनरल के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इसके साथ ही फ्रांस, ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास स्थापित करने वाला पहला यूरोपीय संघ देश बन गया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, नए कौंसल जनरल को ग्रीनलैंड के साथ सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक क्षेत्रों में पहले से चल रहे सहयोग को और गहरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन के साथ राजनीतिक संवाद और समन्वय को भी मजबूत किया जाएगा। फ्रांस का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की जून में हुई ग्रीनलैंड यात्रा के बाद लिया गया था, जिसमें आर्कटिक क्षेत्र में यूरोप की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई थी। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, हाल के वर्षों में अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण वैश्विक शक्तियों के ध्यान का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका द्वारा यहां की खनिज संपदा और सामरिक महत्व को लेकर रुचि जताए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं और असहजता बढ़ी थी। जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और कुछ अन्य यूरोपीय देशों पर नए शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह कदम उन देशों की आपत्ति के बाद उठाया गया था, जिन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, बाद में अमेरिका ने इन शुल्कों की धमकी वापस ले ली। यह दावा किया गया कि नाटो महासचिव की मध्यस्थता से खनिज संसाधनों तक पहुंच को लेकर एक प्रारंभिक ढांचा तैयार किया गया है, लेकिन इस समझौते के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए। इन घटनाओं के बीच, अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत भी शुरू हो चुकी है। इन वार्ताओं का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और सहयोग से जुड़ा एक व्यापक ढांचा तैयार करना है। इससे पहले डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री के साथ बैठक में एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा और फ्रांस द्वारा ग्रीनलैंड में कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाना आर्कटिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम संकेत है। यह न केवल स्थानीय प्रशासन के साथ प्रत्यक्ष संवाद को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी समुदायों के अधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बहुपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा देगा। ग्रीनलैंड प्रशासन की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का स्वागत करता है, बशर्ते इससे द्वीप की स्वायत्तता, पर्यावरण और स्थानीय आबादी के हितों की रक्षा हो। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां आर्कटिक क्षेत्र के भविष्य को किस दिशा में ले जाती हैं।    

    यूके की वीज़ा पेनल्टी चेतावनी के बाद तीन अफ्रीकी देशों ने अवैध प्रवासियों को वापस लेने पर जताई सहमति

      ब्रिटेन की सख्त आव्रजन नीति के तहत वीज़ा प्रतिबंधों की चेतावनी दिए जाने के बाद अफ्रीका के तीन देशों ने अपने नागरिकों को वापस लेने पर सहमति जताई है, जो अवैध रूप से यूनाइटेड किंगडम में रह रहे थे या अन्य कानूनी मामलों में दोषी पाए गए हैं। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए इसे सरकार की “सख्त लेकिन प्रभावी” रणनीति का परिणाम बताया। सरकारी बयान के अनुसार, नामीबिया और अंगोला ने औपचारिक रूप से सहयोग पर सहमति जताई है, जबकि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) ने इससे पहले ही ब्रिटेन के साथ प्रवासी वापसी प्रक्रिया में भागीदारी शुरू कर दी थी। यह घटनाक्रम उस चेतावनी के करीब एक महीने बाद सामने आया है, जब ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने साफ शब्दों में कहा था कि जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करेंगे, उन्हें वीज़ा संबंधी दंड का सामना करना पड़ेगा। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, डीआरसी ने तब रुख बदला जब ब्रिटिश सरकार ने उसके वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को दी जा रही विशेष वीज़ा सुविधाएं समाप्त कर दीं। इसके साथ ही डीआरसी के सभी नागरिकों के लिए तेज़-तर्रार वीज़ा प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वहां की सरकार ने प्रवासी वापसी पर सहयोग करने का निर्णय लिया। गृह सचिव शबाना महमूद ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिटेन अब उन देशों के साथ सामान्य वीज़ा संबंध नहीं रखेगा, जो अपने नागरिकों को वापस लेने की जिम्मेदारी से पीछे हटते हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई विदेशी सरकार अपने नागरिकों की वापसी स्वीकार नहीं करती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंगोला, नामीबिया और डीआरसी से जुड़े मामलों में अब अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों और गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को उनके देशों में वापस भेजने की प्रक्रिया तेज़ की जाएगी। गृह सचिव के अनुसार, सरकार सीमाओं पर नियंत्रण और व्यवस्था बहाल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। ब्रिटिश मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, सोमालिया और गैबॉन जैसे देश भी फिलहाल इस तरह के प्रत्यावर्तन समझौतों को लेकर सहयोगी रुख नहीं अपना रहे हैं और भविष्य में उन्हें भी वीज़ा प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने इन देशों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि आगे और देशों को लेकर सख्त चेतावनियां दी जा सकती हैं। गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि हालांकि अंगोला, नामीबिया और डीआरसी अब सहयोग कर रहे हैं, लेकिन कुछ अन्य देश अब भी प्रत्यावर्तन प्रक्रिया में बाधाएं पैदा कर रहे हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने में सहयोग नहीं करेंगे, उनके साथ वीज़ा संबंधों में सख्ती बरती जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2024 में लेबर सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब 58,500 लोगों को ब्रिटेन से हटाया या निर्वासित किया जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को हटाने की प्रक्रिया इस समय अपने उच्चतम स्तर पर है। इन तीन अफ्रीकी देशों के साथ हुए नए समझौतों के चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि 3,000 से अधिक लोग अब निर्वासन के दायरे में आ सकते हैं। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कदम उन कारणों को खत्म करने की दिशा में है, जो अवैध प्रवासियों को ब्रिटेन आने के लिए आकर्षित करते हैं। सरकार के अनुसार, यह नीति व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न केवल अवैध प्रवासन को रोकना है, बल्कि यह संदेश देना भी है कि ब्रिटेन अपने आव्रजन नियमों को लेकर किसी तरह की ढील नहीं देगा। अधिकारियों का मानना है कि वीज़ा दंड की चेतावनी ने कई देशों को सहयोग के लिए मजबूर किया है। पिछले वर्ष भी गृह सचिव शबाना महमूद ने स्पष्ट किया था कि जो देश “नियमों के अनुसार काम नहीं करेंगे”, उन्हें वीज़ा कटौती और अन्य प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने तब कहा था कि यदि किसी देश का नागरिक ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं रखता, तो उस देश को उसे वापस लेना ही होगा। गृह मंत्रालय का कहना है कि अफ्रीकी देशों द्वारा उठाया गया यह कदम सरकार की उस “लेन-देन आधारित” नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है, जिसमें सहयोग के आधार पर देशों के साथ संबंध तय किए जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में भी यह नीति जारी रहेगी और सहयोग न करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाया जाएगा। फिलहाल, ब्रिटेन सरकार इस घटनाक्रम को अपनी आव्रजन रणनीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल अवैध प्रवासन पर अंकुश लगेगा, बल्कि सीमा प्रबंधन को लेकर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।    

    बजट से कर्मचारियों और युवाओं में निराशा: ओपीएस और टैक्स स्लैब पर चुप्पी ने बढ़ाई चिंता

    जयपुर। हाल ही में पेश हुए बजट को लेकर कर्मचारी वर्ग और युवाओं के बीच असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। खेल शिक्षक राजेश चौधरी ने बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे आम आदमी और नौकरीपेशा वर्ग की उम्मीदों के विपरीत बताया है। उनके अनुसार, यह बजट न केवल पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे बुनियादी मुद्दों पर मौन है, बल्कि भविष्य में निजीकरण के खतरों को भी न्योता देता है। पेंशन और टैक्स स्लैब: मध्यम वर्ग को नहीं मिली राहत बजट विश्लेषण में सबसे बड़ी कमी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर देखी गई है। राजेश चौधरी का कहना है कि शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अपनी सामाजिक सुरक्षा के लिए ओपीएस की बहाली या सुदृढ़ीकरण की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बात नहीं की। इसके साथ ही, आयकर (Income Tax) के स्लैब में कोई बदलाव न होने से वेतनभोगी वर्ग को महंगाई के इस दौर में भारी निराशा हाथ लगी है। टैक्स में रियायत न मिलना मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। रोजगार का अभाव और निजीकरण की चुनौती युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए राजेश चौधरी ने कहा कि बजट में रोजगार के लिए कोई ठोस रोड मैप दिखाई नहीं देता। सरकारी क्षेत्रों में नई रिक्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टता की कमी है।  * निजीकरण का बढ़ता प्रभाव: बजट के प्रावधानों से संकेत मिलता है कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में बढ़ रही है।  * असुरक्षित भविष्य: निजीकरण के इस रुझान से सरकारी नौकरियों की सुरक्षा कम होगी और युवाओं के लिए करियर के स्थायी विकल्प सीमित हो जाएंगे। खेल और शिक्षा जगत की उम्मीदें धराशायी एक खेल शिक्षक के नजरिए से राजेश चौधरी ने बताया कि शिक्षा और खेल ढांचे के विकास के लिए जिस बड़े निवेश की आवश्यकता थी, वह बजट के आंकड़ों में कहीं नजर नहीं आता। जब तक युवाओं को शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित मंच और स्थायी रोजगार की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक देश की प्रगति की नींव कमजोर बनी रहेगी। प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु:  * OPS पर मौन: कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े सबसे बड़े मुद्दे को नजरअंदाज किया गया।  * टैक्स की मार: टैक्स स्लैब यथावत रहने से बचत के अवसरों में कमी आएगी।  * युवा विरोधी दृष्टिकोण: रोजगार सृजन के लिए किसी भी नई नीति या योजना का अभाव।  * पूंजीवादी झुकाव: सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण की संभावनाओं से आम जन में असुरक्षा का भाव।    

    राजस्थान में विज्ञान और तकनीक को लगेंगे पंख: विज्ञान भारती और मुख्य सचिव के बीच उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

    जयपुर। राजस्थान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और अत्याधुनिक तकनीक के विस्तार को लेकर आज शासन सचिवालय में एक महत्वपूर्ण विमर्श हुआ। विज्ञान भारती राजस्थान के एक उच्च प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव वी. सरवन के साथ विशेष भेंट की। इस बैठक में प्रदेश के तकनीकी परिदृश्य को बदलने वाले कई आगामी प्रोजेक्ट्स और आयोजनों पर विस्तार से चर्चा की गई। सेमीकंडक्टर स्किल सेंटर और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्थान में तकनीकी कौशल का विकास रहा। प्रतिनिधिमंडल ने जानकारी दी कि CSIR–CEERI (सीरी) पिलानी के सहयोग से प्रदेश में एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर स्किल सेंटर स्थापित करने की योजना है। यह केंद्र युवाओं को भविष्य की तकनीक और चिप डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में निपुण बनाएगा। इसके साथ ही, अलग-अलग विषयों पर 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' (उत्कृष्टता केंद्र) विकसित करने पर भी सहमति बनी, जो अनुसंधान और नवाचार के केंद्र बनेंगे। जयपुर के आसमान में दिखेगा शौर्य: एयर शो की तैयारी विज्ञान और रक्षा तकनीक के प्रति आम जनमानस, विशेषकर युवाओं में उत्साह जगाने के लिए जयपुर में एक भव्य एयरोबेटिक एयर शो का प्रस्ताव रखा गया। भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध 'सारंग' और 'सूर्य किरण' टीमें इस शो में अपने हैरतअंगेज करतब दिखाएंगी। विज्ञान भारती ने इसके सफल आयोजन के लिए सरकार से समन्वय और सहयोग का आग्रह किया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का रोडमैप आगामी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश भर में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की गई। संगठन का लक्ष्य है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर जन-आंदोलन का रूप ले। इसके लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष गतिविधियों और प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे विशेषज्ञ इस उच्च स्तरीय चर्चा में विज्ञान भारती राजस्थान के सचिव डॉ. मेघेंद्र शर्मा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व महानिदेशक व अध्यक्ष डॉ. एल. एस. राठौड़, CSIR–CEERI पिलानी के निदेशक डॉ. पी. सी. पंचारिया, शैलेश जैन और साई कृष्णा शामिल रहे। सहयोग और भविष्य की राह मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और सचिव वी. सरवन ने विज्ञान भारती के इन प्रयासों की सराहना की। सरकार की ओर से इन परियोजनाओं को गति देने और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया गया। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें राजस्थान को देश का 'साइंस हब' बनाने का साझा संकल्प दोहराया गया।