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    कानपुर में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब का शानदार प्रदर्शन, प्लेट ग्रुप में बना उपविजेता

    राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के अधिवक्ताओं ने लहराया परचम, अब जयपुर में होगा टूर्नामेंट का अगला संस्करण जयपुर। कानपुर में आयोजित 8वें ऑल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट टूर्नामेंट में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेट ग्रुप में उपविजेता का खिताब हासिल किया। कप्तान एडवोकेट अमित छंगाणी और उपकप्तान अमित पारीक के नेतृत्व में टीम ने अनुशासन, खेल भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का गौरव बढ़ाया। क्लब के सदस्य महेश दुबे , विलियम पाठक, पवन कुमार पाण्डेय और सुभाष सैनी ने बताया की इलाहाबाद हाई कोर्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा इंडियन एडवोकेट्स स्पोर्ट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में 17 से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने किया। प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हाई कोर्ट की कुल 12 टीमों ने भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन टीमवर्क और प्रतिस्पर्धात्मक खेल भावना का परिचय दिया। प्लेट ग्रुप में उपविजेता बनना टीम की निरंतर मेहनत, सामूहिक प्रयास और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है। क्लब के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। टूर्नामेंट के आठ संस्करणों में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब अब तक तीन बार उपविजेता और दो बार सेमीफाइनलिस्ट रह चुका है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर क्लब की निरंतर मजबूत उपस्थिति और क्रिकेट के प्रति अधिवक्ताओं के उत्साह को दर्शाती है। इस सफलता के साथ राजस्थान के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। आयोजकों ने टूर्नामेंट का अगला संस्करण जयपुर में आयोजित करने की घोषणा की है। इससे जयपुर को देशभर के अधिवक्ताओं की क्रिकेट प्रतिभा की मेजबानी करने का अवसर मिलेगा और राजस्थान की खेल एवं अधिवक्ता जगत में पहचान को और मजबूती मिलेगी। इस उपलब्धि पर रवि सूर्य ग्रुप के चेयरमैन एवं क्रेडाई अध्यक्ष रविन्द्र प्रताप सिंह तथा कोरल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर गिर्राज डागा ने टीम को शानदार प्रदर्शन और उपविजेता बनने पर शुभकामनाएं दीं। साथ ही, आगामी संस्करण की मेजबानी जयपुर को मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राजस्थान के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब की यह सफलता साबित करती है कि अधिवक्ता न्यायिक दायित्वों के साथ खेल के मैदान पर भी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और टीम भावना से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। अब जयपुर में होने वाले आगामी संस्करण को लेकर क्लब और प्रदेश के खेलप्रेमियों की उम्मीदें और उत्साह बढ़ गए हैं।

    प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत बने विराज फाउंडेशन के प्रदेश संरक्षक

    सामाजिक सरोकारों में योगदान को देखते हुए सौंपी जिम्मेदारी, पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं चौमूं। सामाजिक सेवा, जनकल्याण एवं समाजहित के कार्यों में सक्रिय विराज फाउंडेशन द्वारा अशोक विहार निवासी प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत को प्रदेश संरक्षक नियुक्त किया गया है। फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान कर नई जिम्मेदारी सौंपी। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने कहा कि समाज के प्रति समर्पित व्यक्तियों का मार्गदर्शन किसी भी सामाजिक संगठन की कार्यशैली को मजबूती प्रदान करता है। प्रोफेसर डॉ. रावत के अनुभव एवं मार्गदर्शन से फाउंडेशन के सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों को नई दिशा मिलेगी। नियुक्ति के दौरान फाउंडेशन के प्रदेश मार्गदर्शक बनवारी लाल शर्मा, प्रदेश सलाहकार सत्य प्रकाश पारीक तथा चौमूं नगर अध्यक्ष डॉ. सीताराम कुमावत उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत को प्रदेश संरक्षक नियुक्त होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विराज फाउंडेशन समाज में सेवा, समर्पण एवं संस्कार की भावना को प्रोत्साहित करते हुए सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के लिए निरंतर प्रयासरत है।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र विभाग में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICAPST-2026 का भव्य शुभारंभ

    राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Advances in Physical Sciences & Technologies (ICAPST-2026)” का शुभारंभ गुरुवार को विश्वविद्यालय के ह्यूमैनिटीज हॉल में हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य भौतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम शोध, वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा तकनीकी नवाचारों पर विचार-विमर्श करना और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के बीच अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। उद्घाटन समारोह में इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सीलरेटर सेंटर (IUAC), नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडे मुख्य अतिथि तथा दक्षिण अफ्रीका स्थित नॉर्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च (CSR) के निदेशक प्रो. अमारे अबेबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, विश्वविद्यालय के कुलगीत, राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्प स्वागत किया गया तथा सम्मेलन के उद्देश्यों और महत्व से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. एस. के. गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन देते हुए देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान, शोध की नई दिशाओं की पहचान तथा विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुनीता महावर ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके प्रमुख उद्देश्यों, वैज्ञानिक सत्रों और विभिन्न शोध विषयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में भौतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित विविध क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ अपने शोध निष्कर्ष और नवीन वैज्ञानिक विचार साझा करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत प्रायोगिक सुविधाओं तथा आधुनिक तकनीकों के विकास में अंतर्विषयी सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि प्रो. अमारे अबेबे ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग तथा अंतरिक्ष विज्ञान और संबंधित अनुसंधान क्षेत्रों में नवीन संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उद्घाटन समारोह का प्रमुख आकर्षण सम्मेलन की शोध-सार पुस्तक का विमोचन रहा। मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे, विशिष्ट अतिथि प्रो. अमारे अबेबे तथा संयोजक समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति में शोध-सार पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध कार्यों के सार संकलित हैं, जो विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में हो रहे अनुसंधान और नवीन विचारों का परिचय प्रदान करते हैं। यह विमोचन सम्मेलन के अकादमिक महत्व को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। उद्घाटन सत्र के बाद मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने पूर्ण सत्र व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए। प्रथम दिवस के आगामी कार्यक्रमों में दक्षिण अफ्रीका के प्रो. अमारे अबेबे तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. केदार सिंह के व्याख्यानों सहित विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त फ्रांस के IP2I–CNRS से डॉ. मैक्सिम गूज़ेविच, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के डॉ. हरफूल कुमावत, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. अजय कुमार त्यागी तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रो. एस. के. शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने शोध एवं वैज्ञानिक विचार प्रस्तुत किए। बेल्जियम की KU Leuven यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्टेन वानियर्शॉट तथा दक्षिण अफ्रीका के नॉर्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रो. एशमोर माविरे ने भी सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. मार्टेन वानियर्शॉट ने एक तकनीकी सत्र में आमंत्रित व्याख्यान दिया, जबकि प्रो. एशमोर माविरे ने वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता की। उनकी सहभागिता से सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभवों और वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिला। सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने, नवीन वैज्ञानिक प्रगति पर चर्चा करने तथा भविष्य में अनुसंधान सहयोग की संभावनाओं को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सम्मेलन का आयोजन भौतिक विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. एस. के. गुप्ता, संयोजक डॉ. सुनीता महावर, सह-अध्यक्ष डॉ. मनीषा गुप्ता तथा आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार एवं डॉ. अरविंद कुमार सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

    एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विष्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से 'Research for Viksit Bharat' विषय पर डॉ. सुरेश कुमार अग्रवाल कुलगुरु महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के निर्देशन में ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ आज दिनांक 22 अक्टूबर, 2026 को कानोड़िया पी.जी महिला महाविद्यालय, जयपुर में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप शोध अभिरुचि को प्रोत्साहित करना तथा अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। डॉ. सीमा अग्रवाल, प्राचार्य, कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर ने मुख्य अतिथि एवं सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, अजमेर के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. नीरजा अरुण गुप्ता, मध्य प्रदेश की सांची यूनिवर्सिटी और अहमदाबाद की गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, निदेशक, कानोड़िया महाविद्यालय, जयपुर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रंजना अग्रवाल ने कार्यक्रम का संचालन व सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र के पश्चात दो अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में प्रो. नीरजा अरुण ने “Indian Insight for Shodh” विषय पर व्याख्यान दिया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के शोध में महत्व पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में प्रो. पी. के. दशोरा ने “Research Methodology” विषय पर व्याख्यान देते हुए व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध की प्रक्रिया पर विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में देशभर से 319 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    अंग्रेजी के हुनर से वैश्विक सपनों तक: जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 साल का जश्न

    डिजिटल लर्निंग, विदेश में उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय करियर के अवसरों पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से किया संवाद; आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी सीखने के लिए किया प्रेरित जयपुर। वैश्विक शिक्षा के नए अवसरों, डिजिटल माध्यम से अंग्रेजी सीखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा के साथ जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेजेज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा की दक्षता, विदेश में उच्च शिक्षा और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध शैक्षणिक एवं करियर अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इस अवसर पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहा, “आज के वैश्विक दौर में विद्यार्थियों के लिए अकादमिक ज्ञान के साथ भाषा कौशल, आत्मविश्वास और विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है। डिजिटल तकनीक ने दुनिया भर में शिक्षा के अवसरों तक पहुंच को आसान बनाया है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसे मंच और अनुभव उपलब्ध कराए जाएं, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए तैयार करें। डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के बदलते स्वरूप और नई संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।” डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट एक ऑनलाइन अंग्रेजी दक्षता परीक्षा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अपनी अंग्रेजी भाषा की क्षमता प्रदर्शित कर सकते हैं। कार्यक्रम में डिजिटल शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने और विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने में भाषा कौशल की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की सीनियर मार्केटिंग मैनेजर दिव्या राव ने कहा कि शिक्षा लोगों के जीवन में नए अवसर खोलने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डुओलिंगो का उद्देश्य अंग्रेजी भाषा सीखने और उसकी दक्षता जांचने की प्रक्रिया को आसान, सुलभ और किफायती बनाना है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट को दुनिया भर के 6,500 से अधिक संस्थानों ने स्वीकार किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को सवाल पूछने, उपलब्ध अवसरों को समझने और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान वैश्विक शिक्षा के अवसरों पर आयोजित विशेष संवाद में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की ग्लोबल मार्केटिंग डायरेक्टर तारा कपूर ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा और डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की परीक्षार्थी अनहीज़ पटेल से बातचीत की। इस दौरान विदेश में पढ़ाई के अनुभवों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि विदेश में उच्च शिक्षा केवल बेहतर करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को नई संस्कृतियों को समझने, अपनी सोच का दायरा बढ़ाने और व्यक्तिगत विकास के नए अवसर भी प्रदान करती है। अनहीज़ पटेल ने विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटकर देश में उपलब्ध अवसरों को तलाशने के लिए भी प्रेरित किया। डुओलिंगो के इंडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के रीजनल मार्केटिंग डायरेक्टर करनदीप सिंह कपनी ने कहा कि भाषा सीखने का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना और नए लोगों से जुड़ना भी है। अंग्रेजी बोलते समय झिझक होना स्वाभाविक है, लेकिन नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नई संस्कृतियों से सीखने, सवाल पूछने और अपनी मातृभाषा एवं संस्कृति पर गर्व करते हुए दूसरी भाषाओं को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आपसी सहयोग और संवाद के लिए ऐसा माहौल बनाने पर भी जोर दिया, जहां प्रत्येक विद्यार्थी बिना झिझक अपनी बात रख सके। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेजेज के प्रोग्राम मैनेजर मुदित कृष्ण शर्मा के संचालन में आयोजित चर्चा के दौरान तारा कपूर ने डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की वैश्विक पहुंच और विद्यार्थियों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार परीक्षा देने का अवसर प्रदान करती है। इसके साथ ही, डुओलिंगो की वेबसाइट पर उपलब्ध निःशुल्क मॉक टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थी परीक्षा के प्रारूप को समझ सकते हैं और अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में अपनी दक्षता बढ़ाने, आत्मविश्वास के साथ संवाद करने और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने के साथ हुआ। इस आयोजन ने डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि भाषा कौशल, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के माध्यम से वे वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।  

    राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन, नवकन्या पूजन के साथ विश्व कल्याण की कामना

    जयपुर। भारतीय वैदिक परंपरा, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के प्रांगण में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। अनुष्ठान में मां भगवती की आराधना के साथ लोककल्याण, विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि और जनमानस के आरोग्य की कामना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं विशेष पूजा-अर्चना के बीच आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में विद्वान आचार्यों, संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह आयोजन जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में संपन्न हुआ। उनके सानिध्य में वैदिक परंपराओं के अनुरूप यज्ञ एवं पूजन की विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी की गईं। नवदुर्गा की आराधना और नवकन्या पूजन शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना की गई। अनुष्ठान में नारी शक्ति के सम्मान एवं धार्मिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप नौ कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराकर उपहार भेंट किए गए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। सफेद ज्वारे के प्रकट होने की रही विशेष चर्चा शतचंडी महायज्ञ के दौरान पारंपरिक ज्वारों के साथ सफेद रंग का ज्वारा भी दिखाई देने की विशेष चर्चा रही। इसे देखने और इसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। इस प्रसंग ने धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और जिज्ञासा को विशेष रूप से आकर्षित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सपरिवार विधि-विधान से विशेष पूजन किया तथा यज्ञ में आहुतियां अर्पित की। उन्होंने विश्वविद्यालय, समाज और राष्ट्र की निरंतर उन्नति, सुख-समृद्धि एवं आरोग्यता की मंगलकामना की। वैदिक ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर जोर राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान में आयोजित शतचंडी महायज्ञ भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और वैदिक अनुष्ठानों के प्रति जनजागरूकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। ऐसे आयोजन प्राचीन ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ने, सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

    बढ़ते वर्क प्रेशर और डिजिटल दौर की चुनौतियों के बीच शिक्षकों की वेलबीइंग पर जोर

    जयपुर। शिक्षकों की खुशहाली, मानसिक संतुलन और जीवन कौशल विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों को दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले स्वयं के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ जेईसीआरसी फाउंडेशन, जयपुर में आयोजित छह दिवसीय ऑफलाइन एआईसीटीई-एटीएएल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) ‘लाइफ स्किल्स फॉर वेलबीइंग एंड सक्सेस’ का शनिवार को सफल समापन हुआ। 12 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में सात राज्यों के 25 संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, प्रभावी संवाद, सार्थक संबंधों के निर्माण और व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में संतुलन से जुड़े व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराना था। ‘आज मेरे जीवन के शेष हिस्से का पहला दिन है’ विचार से हुई शुरुआत कार्यक्रम के पहले दिन वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता ने ‘वेलबीइंग एंड सक्सेस’ विषय पर विचार साझा करते हुए कहा, ‘आज मेरे जीवन के शेष हिस्से का पहला दिन है।’ इस विचार ने छह दिवसीय कार्यक्रम की दिशा तय की और प्रतिभागियों को हर दिन को नई शुरुआत के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया। पहले दिन मिस ध्रुवी ने इमेज बिल्डिंग पर चर्चा की, जबकि स्पिरिचुअल रिसर्च सेल के प्रमुख प्रोफेसर मुकेश अग्रवाल ने केस स्टडी के माध्यम से जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को समझाया। आगे के कार्यक्रम में मिस मोनिका गुप्ता ने तनाव कम करने और जीवन में खुशहाली बनाए रखने पर चर्चा की। डॉ. मेधावी गौतम ने स्ट्रैटिजी फोर हेल्थ एंड वेलबीइंग पर सेशन लिया। डॉ. अदिति सिंघल ने सार्थक संबंधों के महत्व और उन्हें बेहतर बनाने के तरीकों पर विचार साझा किए। प्रो. प्रभात के. झा ने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाने पर चर्चा की, वहीं डॉ. कृति कला ने कला के माध्यम से तनाव कम करने की तकनीकों से प्रतिभागियों को परिचित कराया। कार्यक्रम के दौरान सुश्री सुप्रिया नंदकुमार ने मेडिटेशन और समग्र वेलबीइंग के महत्व पर सत्र लिया। इसके साथ ही श्री नवीन थापलियाल ने प्रभावी अभिव्यक्ति, बॉडी लैंग्वेज और मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने से जुड़ी गतिविधियां कराईं। प्रतिभागियों ने मेडिटेशन सेंटर का भी दौरा किया, जहां बीके सिस्टर एकता के सत्र में नैतिक मूल्यों और जीवन मूल्यों पर चर्चा हुई। आईएएस नवीन जैन ने प्रशासनिक अनुभवों पर आधारित नेतृत्व संबंधी केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। डॉ. राधिका गुप्ता ने विचारों और मानसिक दृष्टिकोण को सकारात्मक दिशा देने की तकनीकों पर चर्चा की। 25 संस्थानों के प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सत्रों की गुणवत्ता, विशेषज्ञों के विचारों और उनसे मिली नई सीख की सराहना की। उन्होंने आयोजन स्थल, आतिथ्य, व्यवस्थाओं, जलपान और समन्वय की भी प्रशंसा की। प्रतिभागियों ने बताया कि छह दिनों के अनुभव ने उन्हें जीवन की रोजमर्रा की चुनौतियों को नए नजरिए से देखने और अपने दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की। समापन समारोह में जेईसीआरसी डायरेक्टर अर्पित अग्रवाल ने शिक्षकों की मानसिक खुशहाली और जीवन कौशल के विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने वाले होते हैं और समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन दूसरों को बेहतर बनाने के लिए उनका स्वयं स्वस्थ और संतुलित रहना भी आवश्यक है। उन्होंने इस विचार पर जोर दिया कि खाली पात्र से किसी दूसरे को नहीं भरा जा सकता। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों की वेलबीइंग से जुड़ी पहलों को आगे भी सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी जेईसीआरसी को सौंपने के लिए एआईसीटीई के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों के अनुसार, एआईसीटीई द्वारा चयनित 379 ऑफलाइन एफडीपी में यह कार्यक्रम विशेष रूप से वेलबीइंग पर केंद्रित था। छह दिवसीय एफडीपी ने यह संदेश दिया कि जब शिक्षक अपनी खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं, तो वे विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देने और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने में अधिक सक्षम बनते हैं।  

    राजस्थान पुलिस की निधि कॉमनवेल्थ कबड्डी में भारत की महिला टीम की कप्तान

    राजस्थान पुलिस की निधि कॉमनवेल्थ कबड्डी में भारत की महिला टीम की कप्तान किसान की बेटी ने कबड्डी में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान टीम में बोनस अंकों की मानी जाती है महारथी जयपुर। राजस्थान पुलिस की निधि शर्मा ने कबड्डी के मैदान पर अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अलग पहचान बनाई है। दाएं कोने से रेड करने वाली निधि की खासियत बोनस अंक हासिल करने की क्षमता है। वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं निधि की नजर अब शुक्रवार से अहमदाबाद में शुरू हो रही कॉमनवेल्थ कबड्डी चैम्पियनशिप में भारत को खिताब दिलाने पर है। निधि मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर की हैं लेकिन कई साल से जयपुर में राजस्थान पुलिस में सेवाएं दे रही हैं । 16 साल की उम्र में की शुरुआत निधि ने 16 वर्ष की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू किया था। शुरुआती दौर से ही इस खेल के प्रति उनकी लगन ने उन्हें स्कूल, कॉलेज, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर से होते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में भाग लेना उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। युवा कबड्डी सीरीज में दमदार प्रदर्शन निधि ने जेएसजी विमेंस युवा कबड्डी सीरीज 2024 में अरावली एरोज का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के सात मैचों में उन्होंने कुल 162 अंक हासिल किए, जिसमें 52 बोनस अंक शामिल हैं। उनके नाम कुल 161 रेड अंक दर्ज रहे। किसान परिवार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक निधि का संबंध एक साधारण किसान परिवार से है। उनके पिता जयदेव किसान हैं, जबकि मां शर्मिला गृहिणी हैं। परिवार में उनकी एक बड़ी बहन, एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है। परिवार में पहले कबड्डी का विशेष माहौल नहीं था, लेकिन निधि ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस खेल में मुकाम हासिल किया।कोच संजीव ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाली निधि ने खेल के साथ शिक्षा को भी महत्व दिया। वह अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं। कबड्डी के अलावा उन्हें वॉलीबॉल खेलना भी पसंद है।  

    मानसिक स्वास्थ्य एवं नशामुक्ति पर आधारित फिल्म 'The Echoes of Silence' के पोस्टर का विमोचन

    अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने की सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के अभिनय की सराहना • ज्ञानसंजीवनी ट्रस्ट और जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव एंड मीडिया आर्ट्स (ZICMA) की अनूठी पहल जयपुर। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने ज्ञानसंजीवनी ट्रस्ट एवं टेक्निकल पार्टनर 'जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव एंड मीडिया आर्ट्स' (Zee Institute of Creative and Media Arts) द्वारा प्रस्तुत फिल्म 'The Echoes of Silence' के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने फिल्म की अनूठी थीम और इसमें शामिल सामाजिक संदेश की भूरि-भूरि सराहना की। इस अवसर पर ज्ञानसंजीवनी ट्रस्ट की डायरेक्टर डॉ. साधना शर्मा एवं फिल्म के लेखक व निर्देशक माधव शर्मा ने बताया कि यह फिल्म आज के समय की दो सबसे बड़ी चुनौतियों—मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) एवं नशामुक्ति पर आधारित है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें अभिनय करने वाले सभी कलाकार जयपुर के गांधी नगर स्थित सरकारी विद्यालय 'राजकीय राजा रामदेव पोद्दार उच्च माध्यमिक विद्यालय' के विद्यार्थी हैं। इन छात्रों ने अपनी कला के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। पोस्टर विमोचन के इस गरिमामयी कार्यक्रम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे: • कैलाश चंद्र यादव, अतिरिक्त आयुक्त, कॉलेज शिक्षा • डॉ. कृष्ण कुमार कुमावत, राज्य समन्वयक, एनएसएस (NSS) • डॉ. हरबीर सिंह डागुर, ओएसडी (OSD), एमजीआईजीएसएस (MGIGSS) इसके साथ ही कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय, राजस्थान के वित्तीय सलाहकार, समस्त संयुक्त निदेशक एवं विभिन्न प्रभारी अधिकारीगण भी इस कार्यक्रम के साक्षी बने। सभी अतिथियों ने सरकारी स्कूल के बच्चों के इस हुनर और ज्ञानसंजीवनी ट्रस्ट के इस सामाजिक प्रयास को बेहद सराहनीय और प्रेरणादायी बताया।  

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज़ की पहल, डॉ. स्वीटी माथुर ने विद्यार्थियों को लैंगिक समानता के प्रति किया जागरूक

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज़ की ओर से डॉल्फिन्स हाई स्कूल, प्रताप नगर में “लैंगिक संवेदनशीलता एवं जागरूकता” विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशिता और समान अवसरों के प्रति जागरूकता विकसित करना था। कार्यक्रम में सेंटर संयोजक डॉ. स्वीटी माथुर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए जेंडर संवेदनशीलता, लैंगिक रूढ़ियों, समान अधिकारों और पारस्परिक सम्मान जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए। उन्होंने सरल एवं रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि घर और विद्यालय में लड़के-लड़कियों के साथ समान व्यवहार करना तथा सभी को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर देना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने ऐसे सामाजिक विचारों पर चर्चा की, जिनमें कुछ कार्यों को केवल लड़कियों या लड़कों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इन रूढ़ियों पर प्रश्न उठाने, एक-दूसरे की क्षमताओं का सम्मान करने और भेदभाव रहित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान ‘मुस्कान’ फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसके माध्यम से बेटियों के प्रति सामाजिक पूर्वाग्रहों, कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में एक खेल.गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को एक दूसरे के साथ से ही आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में कुल 162 विद्यार्थियों ने भाग लिया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना और लैंगिक समानता के मूल्यों को विकसित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास बताया। विद्यालय की उप-प्रधानाचार्य सेजलीन रेजीनॉल्ड ने डॉ. स्वीटी माथुर को स्मृति चिह्न भेंट किया। सेंटर सदस्य डॉ. दमयंती सोढ़ा, डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. सुरभि माथुर और डॉ. पूर्वा भारद्वाज की कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका रही।

    राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित

    जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026–27 के स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के पैट्रन (Patron) राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी. पी. सारस्वत रहे। उनके संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस अभिविन्यास कार्यक्रम का उद्देश्य नवागंतुक विद्यार्थियों को मनोविज्ञान विषय, विभाग की गौरवशाली परंपराओं तथा इसके शैक्षणिक एवं व्यावहारिक महत्व से परिचित कराना था। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभाग की समृद्ध शैक्षणिक विरासत, इसकी स्थापना एवं विकास में दिए गए योगदान तथा इससे जुड़ी प्रतिष्ठित शैक्षणिक विभूतियों से परिचित कराना था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विभाग के प्रबुद्ध शिक्षाविदों के अनुभवों और उपलब्धियों से सीखने तथा प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने भी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रम की रूपरेखा से परिचित कराया। उन्होंने मुख्य विषयों, वैकल्पिक विषयों, परियोजना कार्य, क्षेत्रकार्य, सामान्य मनोविज्ञान प्रयोगशाला तथा कौशल संवर्धन पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव एवं कौशल विकास को समाहित करने वाली संतुलित शैक्षणिक व्यवस्था के महत्त्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभाग के पूर्व संकाय सदस्यों एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविदों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभवों एवं विचारों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया तथा उनकी नई शैक्षणिक यात्रा के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और शुभकामनाएँ प्रदान कीं। इन विशिष्ट शिक्षाविदों में डॉ. एस. सी. प्रसाद, डॉ. मूरजानी, प्रो. विजय लक्ष्मी चौहान, प्रो. मणिका मोहन सक्सेना, प्रो. ए. वी. एस. मदनावत, प्रो. उमा मित्तल शामिल रहे। प्रोफेसर एस. सी. प्रसाद ने अपने संबोधन में राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की स्थापना एवं उसके गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभाग की शुरुआत, इसके विकास की यात्रा तथा अकादमिक एवं शोध के क्षेत्र में इसके योगदान को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को विभाग की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा से अवगत कराया। प्रोफेसर जानकी मूरजानी ने विभाग में प्रवेश लेने वाले नवागंतुक विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पित भाव से प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। प्रोफेसर विजयलक्ष्मी चौहान ने मनोविज्ञान विभाग की गौरवशाली परंपरा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों और शैक्षणिक गरिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने “3H = 3H” की अवधारणा को प्रस्तुत करते हुए बताया कि Head (मस्तिष्क), Heart (हृदय) और Hand (हाथ) का समन्वय Health (स्वास्थ्य), Happiness (खुशी) और Harmony (सामंजस्य) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बौद्धिक विकास, भावनात्मक संवेदनशीलता और व्यावहारिक कौशल के संतुलित समन्वय से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, प्रसन्नता और सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रोफेसर मणिका मोहन ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सकारात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे मनोवैज्ञानिक बनने के लिए सत्यनिष्ठा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को AI का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा समाज और राष्ट्रहित के विरुद्ध भ्रामक एवं नकारात्मक गतिविधियों से स्वयं को दूर रखने की सीख दी। प्रोफेसर उमा मित्तल ने विद्यार्थियों को मनोविज्ञान के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान का व्यावहारिक उपयोग व्यक्ति को स्वयं को बेहतर ढंग से समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने तथा जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने में सहायता करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक ज्ञान को केवल अकादमिक विषय तक सीमित न रखकर अपने व्यक्तिगत जीवन में भी लागू करने का संदेश दिया। वर्ष 1971 में स्थापित राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की शिक्षण, शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता की गौरवशाली परंपरा रही है। पूर्व संकाय सदस्यों, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं नवप्रवेशित विद्यार्थियों के बीच संवाद ने विद्यार्थियों को विभाग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ने तथा मनोविज्ञान के क्षेत्र में इसके योगदान को समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभाग के शैक्षणिक वातावरण, शोध सुविधाओं, विभिन्न गतिविधियों तथा विश्वविद्यालय के नियमों एवं विनियमों से भी परिचित कराया गया। साथ ही, शैक्षणिक अनुशासन, बौद्धिक जिज्ञासा और शोध के प्रति रुचि विकसित करने पर बल दिया गया। कार्यक्रम का सफल समन्वय विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी, डॉ. ज्योति, शोधार्थियों तथा तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा किया गया। इस पहल ने विभाग की समृद्ध शैक्षणिक विरासत को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को अध्ययन एवं शोध के प्रति प्रेरित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।  

    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में कल सुनवाई

    Yugcharan News / 21-10-2026 दिल्ली हाईकोर्ट 22 अक्टूबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस 16 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में उनकी भागीदारी के बाद जारी किया गया था। नेहा बोरा ने अदालत से नोटिस रद्द करने, उससे जुड़ी कार्यवाही समाप्त करने और अधिकारियों को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मामले को 21 अक्टूबर को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, नेहा बोरा के वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने सुनवाई स्थगित कर दी। अब मामले की सुनवाई 22 अक्टूबर को होने की संभावना है। यह मामला दिल्ली में प्रदर्शनों, निषेधाज्ञाओं और शांति बनाए रखने के लिए जारी किए जाने वाले निवारक नोटिसों से जुड़े व्यापक कानूनी विवाद के बीच सामने आया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या अधिकारियों ने नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले शांति भंग होने की आशंका को दर्शाने वाली पर्याप्त सामग्री पेश की थी। BNSS की धाराओं के तहत जारी नोटिस को दी चुनौती नेहा बोरा ने अपनी याचिका में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा 17 अक्टूबर को जारी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 130 के साथ धारा 135(3) के तहत जारी किया गया था। नोटिस में नेहा बोरा से जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया है। याचिका में उन्होंने इस नोटिस को रद्द करने के साथ-साथ इससे उत्पन्न होने वाली कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अदालत से अधिकारियों को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका का प्रमुख तर्क यह है कि नोटिस में ऐसी ठोस सामग्री का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे यह स्थापित हो सके कि नेहा बोरा के कारण शांति भंग होने की वास्तविक आशंका थी। उनके पक्ष का कहना है कि BNSS की धारा 126 के तहत निवारक कार्यवाही शुरू करने के लिए शांति भंग होने की संभावना से संबंधित आधार आवश्यक हैं। हालांकि, ये याचिका में किए गए दावे हैं। इन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है। आगामी सुनवाई में अदालत नोटिस को चुनौती देने वाले तर्कों पर विचार कर सकती है और मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन का आह्वान याचिका के अनुसार, नेहा बोरा ने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराना था। याचिका में कहा गया है कि यह कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था। नेहा बोरा का आरोप है कि उन्हें उसी दिन शाम लगभग 5:30 बजे हिरासत में ले लिया गया। याचिका के मुताबिक, उन्हें पहले एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और बाद में आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया, जहां उन्हें रातभर रखा गया। याचिका में कहा गया है कि उन्हें 17 अक्टूबर की सुबह छह बजे रिहा किया गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को उन्हें विवादित नोटिस प्राप्त हुआ। इन घटनाओं का विवरण नेहा बोरा की ओर से दायर याचिका में दिया गया है। हिरासत के दौरान हुई घटनाओं और नोटिस जारी करने के आधारों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा अदालत की आगे की टिप्पणियां मामले के परिणाम को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगी। नोटिस में नारेबाजी और निषेधाज्ञा के उल्लंघन का आरोप याचिका के अनुसार, नेहा बोरा को जारी नोटिस में मंडी हाउस में कथित नारेबाजी, जंतर-मंतर के आसपास बार-बार प्रदर्शन किए जाने और 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को कथित रूप से उकसाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में जंतर-मंतर के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद प्रदर्शनों का आयोजन किए जाने का भी संदर्भ दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित प्रतिबंधों का उल्लेख BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेशों के संदर्भ में किया गया है। नेहा बोरा की याचिका इन आरोपों के आधार पर जारी नोटिस की वैधता को चुनौती देती है। उनका कहना है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका को साबित करने वाली आवश्यक सामग्री नहीं बताई गई है। इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न यह है कि निवारक कार्रवाई के लिए केवल प्रदर्शन में भागीदारी या नारेबाजी का उल्लेख पर्याप्त है या अधिकारियों को ऐसी विशिष्ट परिस्थितियां भी दिखानी होंगी, जिनसे सार्वजनिक शांति को खतरा होने की आशंका स्थापित होती हो। इस प्रश्न पर अदालत का रुख मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी दिया गया हवाला नेहा बोरा की याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अक्टूबर और 15 अक्टूबर 2026 को पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। ये आदेश नई दिल्ली में सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों और BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेशों से संबंधित कार्यवाहियों के संदर्भ में दिए गए थे। याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। याचिका में इस निर्देश को विशेष रूप से उन मामलों के संदर्भ में उद्धृत किया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण सभाएं धारा 163 के आदेश से प्रभावित क्षेत्र के बाहर आयोजित की जाती हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह 23 अगस्त के आदेश के अतिरिक्त नई दिल्ली में लागू धारा 163 के आदेशों को रिकॉर्ड पर रखे। इन आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 19 नवंबर के लिए स्थगित कर दी गई थी। नेहा बोरा ने इन आदेशों का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण सभा से संबंधित अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उनकी याचिका पर सटीक प्रभाव क्या होगा, यह दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए तथ्यों और कानूनी दलीलों पर निर्भर करेगा। शांति बांड की कार्यवाही पर क्यों है विवाद? शांति बनाए रखने के लिए बांड प्रस्तुत कराने की प्रक्रिया का उद्देश्य संभावित शांति भंग होने की स्थिति में निवारक कार्रवाई करना है। ऐसी कार्यवाही में अधिकारियों को लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करनी होती है। नेहा बोरा की याचिका इसी प्रक्रिया के आधार और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाती है। उनकी ओर से अदालत में यह दलील दी गई है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका से संबंधित पर्याप्त सामग्री का खुलासा नहीं किया गया। यदि अदालत इस तर्क पर विचार करती है, तो उसे नोटिस में दर्ज आधारों, लागू कानूनी प्रावधानों और याचिका में उद्धृत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में मामले का परीक्षण करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, नोटिस में जिन घटनाओं और आरोपों का उल्लेख किया गया है, उनका कानूनी महत्व संबंधित रिकॉर्ड और अधिकारियों के पक्ष को देखकर ही निर्धारित किया जा सकता है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा नोटिस की वैधता पर कोई अंतिम फैसला सुनाए जाने की जानकारी नहीं है। 22 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर नेहा बोरा की याचिका पर 22 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें एक ओर निवारक कार्रवाई के लिए आवश्यक कानूनी आधार का प्रश्न है और दूसरी ओर प्रदर्शन तथा सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रतिबंधों का मुद्दा है। याचिका में नोटिस रद्द करने, उससे जुड़ी कार्यवाही समाप्त करने और अधिकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है। अदालत को इन मांगों पर विचार करते हुए याचिका में दिए गए तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और उद्धृत न्यायिक आदेशों का परीक्षण करना होगा। फिलहाल, नेहा बोरा को जारी नोटिस को रद्द करने की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। 22 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत का रुख और आगे जारी होने वाले आदेश यह स्पष्ट करने में मदद करेंगे कि इस मामले में निवारक कार्यवाही को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाएगा।