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    जिलाध्यक्ष को पीएचडी की उपाधि मिलने पर किया सम्मानित

    विराज फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी एवं पदाधिकारियों ने अभिनंदन पत्र भेंट कर किया सम्मानित चौमूं। विराज फाउंडेशन की महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष डॉ. उमा शर्मा ने शिक्षा विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि पर विराज फाउंडेशन की ओर से प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी एवं पदाधिकारियों ने अभिनंदन पत्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. उमा शर्मा के दादाजी एवं पूर्व सरपंच श्री जगदीश प्रसाद तिवाड़ी तथा माता-पिता का भी सम्मान किया गया। डॉ. उमा शर्मा ने “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित होने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रति उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की अभिवृत्ति का अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया है। उनका शोध कार्य प्रोफेसर कल्पना सेंगर के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस शोध के माध्यम से उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रति अभिवृत्ति का अध्ययन किया गया। शोध में इन कार्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर विराज फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने डॉ. उमा शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उनकी सफलता अन्य महिलाओं एवं युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता में परिवार का सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सम्मान समारोह के दौरान विराज फाउंडेशन के प्रदेश महासचिव बनवारी लाल शर्मा, प्रदेश मंत्री ओमप्रकाश रीडर, प्रदेश प्रचार-प्रसार मंत्री चंद्र प्रकाश शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, शिवकुमार शर्मा, सियाराम शर्मा, पुष्पा देवी, गिरिजा शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।  

    ध्रुवपद -धरोहर "- जयपुर घराना -विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला" - 300 वर्ष पूर्णता की ओर अग्रसर जयपुर -

    ध्रुवपद -धरोहर "- जयपुर घराना -विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला" - 300 वर्ष पूर्णता की ओर अग्रसर जयपुर   स्थापना के उत्सव का श्री गणेश शास्त्रीय संगीत के पितास्वरूप एवं जयपुर में पल्लवित - पुष्पित होने वाली सबसे पुरानी ध्रुवपद गायकी के कलाकारों द्वारा किया गया, जिसमें विश्व में जाना -माना गया जयपुर घराना पर विमर्श एवं उसकी समृद्ध धुवपद गायकी के प्रशिक्षण की कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' नाम से दिनांक 29 अक्टूबर को भैरोसिंह शेखावत भवन, राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज में हुआ । उल्लेखनीय है कि जयपुर, राजस्थान में पल्लवित - पुष्पित हुई इस पुरातन गायकी को जयपुर सहित ग्वालियर से भी सीखने के इच्छुक आये 50 से भी अधिक युवा विद्यार्थियों ने गहरी रुचि एवं उत्साह के साथ भाग लिया ।जयपुर की स्थापना कच्छवाहा वंश के महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय द्वारा 18 नवम्बर 1725 में हई थी । उत्लेखनीय है कि स्थापना के समय से ही भारतीय साहित्य,संस्कृत, धर्म -दर्शन एवं संगीत आदि क्षेत्रों में भट्ट परिवार के साधक कलाकार पाँच पीढ़ियों से जयपुर में रहकर संस्कृत देववाणी एवं वेद वाणी कहे जाने वाले ध्रुवपद आधारित पुष्टि मार्गीय मंदिर -परम्परा हवेली संगीत के पद्य साहित्य सहित ध्रुवपद की घरानेदार शास्त्रीय संगीत की भी सेवा करते आ रहे हैं इसलिए जयपुर की ३०० वर्ष की लम्बी यात्रा को स्वयं के लिए भी विशेष गर्व एवं हर्ष का विषय समझते हुए इसे ध्रुवपद गायकी से श्री गणेश किया । नवीन पीढी को उसके समृद्ध इतिहास एवं गायन - परम्परा से जोड़ने और आगे बढ़ाने के ख़ास उद्देश्य से "भारतीय शास्त्रीय संगीत के "जयपुर - घराना पर विमर्श एवं उसकी प्रशिक्षण - कार्यशाला का आयोजन किया गया,इसे इन्टरनेशनल धुवपद धाम ट्रस्ट, जयपुर द्वारा राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़, जयपुर एवं कला - संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया । उद्घाटन मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध उद्योगपति अध्यक्ष, राज . चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज डॉ. के एल जैन ने दीपप्रज्ज्वलन कर उद्बोधन दिया और इस अवसर पर संसाधनों के अभाव में भी बाहरी यात्राओं के साथ आजीवन जयपुर को ही समर्पित उल्लेखनीय सेवा करने वाले मुख्य प्रचारक ध्रुवपदाचार्य पद्मश्री पं ० लक्ष्मण भट्ट तैलंग और उनके परिवार की कठिन साधना एवं उसे संरक्षित -संवर्द्धित करने के उनके अथक प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया । पं० जी की पट्ट शिष्या एवं पुत्री जयपुर में ध्रुवपद गायकी की प्रबल - संवाहक विदुषी डॉ मधु भट्ट तैलंग के निर्देशन में लगातार 3 घंटे तक ध्रुवपद की स्वर - -सरिता बहती रही । विमर्श और ध्रुवपद -प्रशिक्षण के पहले चरण में डॉ० मधु ने ध्रुवपद की दो धाराओं के अन्तर्गत जयपुर में स्थापना के समय से ही जयपुर महाराजाओं द्वारा देश के कोने - कोने विशेषकर .दक्षिण से अश्वमेध यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान आदिके लिए बुलाये गये भट्ट घराने के वेल्लनाटीय पंडितों एवं संगीत -साधकों ,जिससे डॉ मधु के पूर्वजों और स्वयं का भी संबंध है,उनके मंदिरपरम्परागत धर्म,संस्कृत एवं मंदिर -परम्परा केअन्तर्गत हवेली संगीत -साधना एवं रुक्मणी मंगल आदि गायनपरम्परा पर प्रकाश डाला एवं महाराजाओं की शैव एवं कृष्णभक्ति और उनके सम्प्रदायों के अंतर्गत उनकी आस्था, दीक्षा एवं उनके संरक्षण पर प्रकाश डाला । मंदिर - परम्परा के पंडित एवं गायक महाराजा के धर्म - गुरू के रूप में रहे एवं प्रचार से दूर सिर्फ प्रभु - भक्ति में लीन रहे,दूसरी ओर जयपुर दरबार में महाराजाओं द्वारा स्थापित छतीस कारखानों में से एक गुणीजन खाने में महाराजाओं द्वारा देश के कोने -कोने से पंडित उस्ताद बुलाकर संरक्षण दिया गया एवं भारतीय शास्रीय संगीत के गुणग्राही राजाओं द्वारा उन्हें गुरू के रूप में सम्मान दिया । इस अवसर पर जयपुर में मूल .रूप से अंबैठा सहारनपुर में जन्में उस्ताद बहराम खां को जयपुर महाराजा रामसिंह जी द्वारा संरक्षण दिया गया एवं उन्होंने जयपुर में दरबारी संरक्षण के बाद डागर घराने की नींव डाली । डागर घराने के वंशज उस्तादों की उल्लेखनीय साधना और प्रचार -प्रसार,जिसने जयपुर के ध्रुवपद को वैश्विक पहचान दी,पर प्रकाश डाला और कहा कि यदि इस घराने को राजदरबार या सरकार का सतत् संरक्षण मिलता रहता या स्कूलों - कॉलेजों में संगीत की दक्षता को अकादमिक डिग्रियों से ज़्यादा महत्व दिया जाता तो ये हुनरमन्द घराने के उस्ताद कई वर्षों पूर्व जयपुर छोड़कर नहीं जाते । डॉ मधु ने गायन के अन्य मनरंग के ख्याल के जयपुर घराने,पखावज के रूपराम घराना, सितार का सोनिया एवं कत्थक के जयपुर घराने पर भी संक्षिप्त प्रकाश डाला । डॉ. मधु ने बताया कि 19 वीं शताब्दी तक लोग ध्रुवपद में पुराने हरिदास,तानसेन, अष्टछाप अदि कवियों की रचनाएं . ही ध्रुवपद में गाते आये ।जयपुर राजस्थान के मेरे पिता गुरू ने अपनी पीढ़ी में सर्व प्रथम ने इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए धुवपद धमार बनाये और दो बार वाराणसी में रचनाओं के लिए तुलसी पुरस्कार भी मिला ।डॉ . मधु ने अपने को सौभाग्य शाली समझते हुए अपने पिता -गुरू द्वारा ध्रुवपद की मंदिर एवं डागर घराने और इन नवाचारों की प्राप्त शिक्षा को प्रसाद माना। मधु ने जयपुर के ध्रुवपद से संबद्ध बीनकार घराने एवं पखावज -परम्परा पर भी प्रकाश डाला। दूसरे चरण में डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने राग वृन्दावनी सारंग में डागर घराने की आलापचारी की विविध गायकी - विशेषणों के साथ कार्यशाला में विलंबित,जोड़ से लेकर झाले तक के आलापों का प्रशिक्षण एवं गायन कराया । डागर घराने के सूलताल में निबद्ध तानसेन रचित अकबर की प्रशंसा में रचित ध्रुवपद 'तुम रब तुम साहेब ' को चारों चरणों स्थाई, अन्तरा, संचारी एवं आभोग स्चनाकार की छाप सहित उसमें लयकारियों के विस्तार को भी सिखाया एवं इसी राग में चौताल में निबद्ध हवेली संगीत कीमंदिर परम्परा के छः सौ वर्ष पूर्व की महाप्रभु वल्लभाचार्य की चारों चरणों में ही कृष्ण -भक्ति परक अष्टयाम सेवा में राजभोग में गाई जाने वाली ध्रुवपद रचना " बैठे हरि राधा संग एवं उसकी गायकी का ताला त्मक स्वरूप भी बताया । डॉ मधु ने स्वरों को वैदिक पद्वति, थाट पद्धति, घरानों की जनक राजस्थान में ही पनपी चारों वाणियों और उसकाआधार भरतकालीन पंच गीतियों और ध्रुवपद साधने के अलंकारों, गमक, मींड, कण, श्रुति गायन -ढंग भी बताया ।मधु ने ख्याल के मनरंग द्वारा गायन के ख्याल घराने पर भी संक्षिप्त प्रकाश डाला।ध्रुवपद की तालों को भी हाथ से लगाने केखेल आदि भी बताये । कार्यशाला में परवावज पर आमेर जयपुर के रूपराम घराने के पखावज- वादक प्रतीश रावत संगत ने की। कार्यशाला का सहसंयोजन डॉ . प्रदीप टांक ने किया । जयपुर की ध्रुवपद की इस समृद्ध परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रहा । समापन समारोह में अध्यक्षता कररहे विख्यात वैदिक चित्रकार रामूरामदेव ने इसे सीखने वालों के लिए उपयोगी बताते हुए जयपुर की ध्रुवपद -परम्परा के संरक्षण -संवर्द्धन में ट्रस्ट के सतत् प्रयासों की सराहना कर विद्यार्थियों को इसे भविष्य में साधने हेतु प्रेरित किया एवं प्रमाण पत्र द्वारा सम्मानित किया । मंच- संचालन योगाचार्य डॉ नरेन्द्र शर्मा ने किया ।

    विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषयक ऑनलाइन एनईपी कार्यक्रम का समापन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से आयोजित आठ दिवसीय (22 से 29 अक्टूबर, 2026) ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का समापन आज दिनांक 29 अक्टूबर, 2026 को हुआ। ‘विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 277 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अनुसंधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका के प्रति शिक्षकों को जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों ने अनुसंधान पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नवाचार, सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे समसामयिक विषयों पर व्याख्यान दिए। विभिन्न सत्रों में अनुसंधान-आधारित शिक्षण, आलोचनात्मक चिंतन, अंतःविषयक सहयोग तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष बल दिया गया। समापन समारोह में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रंजना अग्रवाल ने आठ दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके पश्चात दो प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने समापन टिप्पणियाँ प्रस्तुत कीं। समारोह के मुख्य अतिथि मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के कुलपति प्रो. पी.के. डशोरा ने अपने संबोधन में अनुसंधान एवं ज्ञान सृजन के महत्त्व को रेखांकित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने उच्च शिक्षा में अनुसंधान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अंत में आयोजन समिति की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अनुसंधान की नवीन प्रविधियों, अकादमिक नवाचार एवं नैतिक शोध प्रक्रियाओं की उपयोगी जानकारी प्रदान की। साथ ही, शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समाजोपयोगी ज्ञान के सृजन और सतत विकास के लिए अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया। यह आयोजन ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की दिशा में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की भूमिका को सशक्त बनाने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रयास हैं 

    बियानी कॉलेज में ‘नव्यायन-2026’ डांडिया नाइट का आयोजन

    लोक संस्कृति और संगीत के रंगों से सजी शाम जयपुर। बियानी कॉलेज ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट एवं लॉ कॉलेज में भव्य डांडिया नाइट ‘नव्यायन-2026’ का रंगारंग आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक गुजराती परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने गरबा और डांडिया की मनमोहक धुनों पर नृत्य कर उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे परिसर में संगीत, नृत्य और उल्लास का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी एवं बियानी परिवार के सदस्यों द्वारा मां दुर्गा की आरती के साथ किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी तथा प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने मुख्य अतिथि आईपीएस अधिकारी अरशद अली, लोक नृत्यांगना मीना सपेरा और कालवाड़ तहसीलदार रामचंद्र गुर्जर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम में लोक नृत्यांगना मीना सपेरा ने अपनी लोक कला और नृत्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती को प्रस्तुत किया। आईपीएस अधिकारी अरशद अली की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। विद्यार्थियों ने गरबा और डांडिया की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति के प्रति अपनी रुचि और उत्साह व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया एवं लॉ कॉलेज विभागाध्यक्ष डॉ. सोनम रतनू ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम के समापन पर लॉ विभाग के विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। अंत में असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी और सीए साक्षी बियानी ने सभी अतिथियों, फैकल्टी सदस्यों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को बधाई दी। ‘नव्यायन-2026’ ने भारतीय लोक संस्कृति, परंपरा और युवा ऊर्जा का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम के समापन पर बेस्ट परफॉर्मेंस, बेस्ट कॉस्ट्यूम और बेस्ट स्टाइल जैसी विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल और लॉ डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल डॉ राजेश कुमार वर्मा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर ‘पांडुलिपि से प्रकाशन तक’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं बुनियादी एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के चतुर्थ दिवस पर शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन की प्रक्रिया पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को शोध-लेखन, गुणवत्तापूर्ण शोध-पत्र तैयार करने तथा प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशन की प्रक्रिया से अवगत कराना था। कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस के मुख्य अतिथि वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार सिंह रहे। उन्होंने पांडुलिपि से प्रकाशन तक (From Manuscript to Publication) विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनी माथुर, आइक्यूएसी समन्वयक एवं एफ़डीपी संयोजक के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के लिए शोध की गुणवत्ता, अकादमिक लेखन तथा शोध-प्रकाशन की प्रक्रियाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। अपने व्याख्यान में डॉ. नीरज कुमार सिंह ने पांडुलिपि तैयार करने से लेकर शोध-पत्र के प्रकाशन तक के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने शोध-पत्र की संरचना, उपयुक्त शोध-पत्रिका के चयन, संदर्भों के सही उपयोग, अकादमिक लेखन में मौलिकता, शोध नैतिकता तथा प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य के लिए व्यवस्थित लेखन, प्रामाणिक संदर्भ सामग्री तथा निर्धारित प्रकाशन मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को शोध एवं प्रकाशन के नवीन आयामों से परिचित कराते हैं तथा विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराणा ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है। डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल, एफ़डीपी सह-संयोजक ने कहा कि संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की शैक्षणिक, शोध एवं व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ फीडबैक प्रपत्र पर चर्चा की गई, ताकि कार्यक्रम की उपयोगिता, विषय-वस्तु तथा भविष्य में आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में सुधार के लिए सुझाव प्राप्त किए जा सकें। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोहित सारस्वत, शोध अधिष्ठाता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. नीरज कुमार सिंह के प्रति शोध-पत्र लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों का कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद किया। कार्यक्रम में शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शोध-लेखन एवं प्रकाशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस प्रकार एफ़डीपी का चतुर्थ दिवस शोध कौशल के विकास, अकादमिक गुणवत्ता में वृद्धि तथा उच्च शिक्षा में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में उपयोगी सिद्ध हुआ।  

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई ने राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाने का संकल्प

     10 दिवसीय कार्यक्रम में अब तक 500 महारानी महाविद्यालय कि छात्राओं ने किया भ्रमण जयपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का शैक्षणिक भ्रमण करवाने का संकल्प लिया गया है। इस संकल्प के अंतर्गत 27 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हुए 10 दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था, संसदीय कार्यप्रणाली तथा विधायी प्रक्रिया से परिचित करवाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक लगभग 500 महारानी महाविद्यालय की छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाया जा चुका है। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान छात्राओं को विधानसभा की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी के महत्व को समझने का अवसर मिला। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से छात्राओं में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं एवं राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री शुभेंद्र सिंह निर्वाण ने कहा कि, “विद्यार्थी परिषद का मानना है कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर भी मिलना चाहिए। राजस्थान विश्वविद्यालय की 1000 छात्राओं को राजस्थान विधानसभा का भ्रमण करवाने का संकल्प इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राएं विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगी तथा लोकतंत्र में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होंगी। विद्यार्थी परिषद भविष्य में भी विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास के लिए इस प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।” अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राजस्थान विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आगामी दिनों में भी इस कार्यक्रम को निरंतर जारी रखते हुए शेष छात्राओं को विधानसभा का भ्रमण करवाने का लक्ष्य रखा गया है। परिषद का उद्देश्य छात्राओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना तथा उनमें जागरूक, जिम्मेदार एवं सक्रिय नागरिक बनने की भावना विकसित करना है। इस मौके पर राजस्थान विश्वविद्यालय के इकाई अध्यक्ष विशाल उज्जैनिया इकाई मंत्री हर्षवर्धन खर्रा महारानी महाविद्यालय की इकाई अध्यक्ष संजू चौधरी और इकाई मंत्री चीना शर्मा आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

    लोकतंत्र को मजबूत करने बाजडोली गाँव पहुँचे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र, रैली निकालकर दिया मतदान का संदेश

    जयपुर, आमजन को वोट की ताकत का अहसास कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर द्वारा चलाए जा रहे पाँचदिवसीय विशेष अभियान के तीसरे दिन विद्यार्थियों की टोली बाजडोली गाँव पहुँची। विश्वविद्यालय के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के साझा बैनर तले विद्यार्थियों ने गाँव के चौपालों, गलियों और ढाणियों में जाकर जन-जागरण किया। अभियान के तहत छात्र-छात्राओं ने बाजडोली गाँव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए हर एक वोट कीमती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी भेदभाव, भय या प्रलोभन के, पूरी सूझबूझ के साथ अपने वोट के अधिकार का प्रयोग करें। छात्रों ने ग्रामीणों को समझाया कि देश के विकास में एक सजग मतदाता की भूमिका सबसे अहम होती है। गाँव में निकाली गई इस रैली के दौरान विद्यार्थियों के हाथों में "Your Vote Matters" और "जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ" जैसे प्रेरणादायक नारों की तख्तियाँ थीं, जिन्होंने ग्रामीणों का ध्यान खींचा। विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि ऐसे अभियानों का हिस्सा बनकर विद्यार्थी न सिर्फ सामाजिक बुराइयों और अवेयरनेस के प्रति गंभीर होते हैं, बल्कि उनमें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार भी विकसित होते हैं। प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने इस जमीनी जुड़ाव को विद्यार्थियों के व्यावहारिक अनुभव और सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर बताया, वहीं, कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने उच्च शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की बात कही। मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस तरह के ग्रामीण दौरे विद्यार्थियों को समाज के वास्तविक स्वरूप से रूबरू कराते हैं। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. रजनी खंडेलवाल द्वारा किया गया, जबकि डॉ. अंशु श्रीवास्तव और खुशबू चौधरी ने विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया। कार्यक्रम के समापन पर एनएसएस कोऑर्डिनेटर यश यादव ने बाजडोली के ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने सतर्कता के अनिवार्य रूप से मतदान करने की शपथ दिलाई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की यह मुहिम लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति चेता रही है। बाजडोली गाँव में तीसरे दिन की यह गतिविधि ग्रामीणों में चुनावी साक्षरता और सामुदायिक चेतना जगाने में पूरी तरह सफल रही।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण एवं शोध पत्र लेखन पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

        जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के तृतीय दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण तथा शोध पत्र लेखन विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन 28 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के ब्लॉक ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पाठ्यक्रम परिणाम एवं कार्यक्रम परिणाम के निर्धारण, उनके पारस्परिक संबंध तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आइक्यूएसी समन्वयक एवं संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रजनी माथुर द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं एवं उपस्थित संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा शोध की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में डॉ. एस.वी.एच. नागेंद्र ने “पाठ्यक्रम परिणाम (COs) एवं कार्यक्रम परिणाम (POs) का निर्धारण एवं मानचित्रण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पाठ्यक्रम परिणाम और कार्यक्रम परिणाम की अवधारणा, उनके निर्धारण की प्रक्रिया तथा दोनों के बीच संबंध स्थापित करने की विधियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि परिणाम-आधारित शिक्षा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है। द्वितीय सत्र में डॉ. कुलदीप शर्मा ने शोध पत्र लेखन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध पत्र तैयार करने की विभिन्न प्रक्रियाओं, उपयुक्त शोध विषय के चयन, साहित्य समीक्षा, शोध समस्या के निर्धारण, शोध पद्धति, आँकड़ों के विश्लेषण तथा निष्कर्षों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध पत्र की संरचना, अकादमिक लेखन में मौलिकता, संदर्भों के उचित उल्लेख तथा शोध नैतिकता के पालन के महत्त्व को भी रेखांकित किया। इस सत्र का उद्देश्य संकाय सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने एवं शोध प्रकाशन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान मनीषा यादव ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए प्रतिक्रिया एवं विचार-विमर्श सत्र का संचालन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों के साथ अपने विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को अपने शैक्षणिक एवं शोध संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अकादमिक लेखन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक पद्धतियों, शोध कौशल तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन खुशबू चौधरी ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का तृतीय दिवस शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल, परिणाम-आधारित शिक्षण तथा शोध लेखन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में उपयोगी रहा। इस प्रकार का संकाय विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण पहल है।  

    दीपशिखा कॉलेज में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी एवं स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) के तत्वावधान में 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” रही। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए सतर्कता, भ्रष्टाचार विरोधी उपायों, ईमानदारी, पारदर्शिता एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी तथा स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रोजेक्ट निदेशक सत्यनारायण जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक संगठन का दायित्व है कि वह भ्रष्टाचार उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभाए तथा अपने कार्यों के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी एवं पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखे। जनरल मैनेजर श्री लोकेश स्वामी ने विद्यार्थियों को ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को “न रिश्वत लेंगे, न रिश्वत देंगे” की शपथ भी दिलवाई। महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराणा ने विद्यार्थियों को कानून, नियमों एवं अनुपालन तंत्र का पालन करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराणा ने कहा कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सरकार, नागरिकों एवं निजी क्षेत्र सहित सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। प्रतियोगिताओं के विजेता सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता प्रथम स्थान: अजय चौधरी, बी.ए. द्वितीय वर्ष। द्वितीय स्थान: भावना जैन, बी.एससी.-बी.एड. चतुर्थ वर्ष। तृतीय स्थान: अरविंद शर्मा, बी.एससी.-बी.एड. तृतीय वर्ष। स्लोगन प्रतियोगिता प्रथम स्थान: अक्षत दाधीच, बी.एससी.-बी.एड. तृतीय वर्ष। द्वितीय स्थान: आर्यन, बी.एससी.-बी.एड. द्वितीय वर्ष। तृतीय स्थान: जयमाला कोली, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजेताओं को ट्रॉफी एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अनिला शर्मा ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान देने तथा अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में सत्यनिष्ठा अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को ईमानदारी, जवाबदेही एवं नैतिक आचरण के महत्व के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

    मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

    जयपुर। प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद जैसी समस्याओं को समझने के लिए प्रेरित करना तथा आत्महत्या की रोकथाम के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित भाषण एवं कविताओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, भावनात्मक चुनौतियों तथा कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहयोग करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसने विद्यार्थियों को मानसिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और समय पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। फिल्म प्रदर्शन के पश्चात सभी उपस्थित सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित शपथ दिलवाई गई, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का सफल आयोजन समन्वयक सीमा चौधरी एवं सह-समन्वयक श्री धीरज कुमार नागर किया द्वारा गया। मंच संचालन कृषि विभाग की छात्रा तनिषा मीणा द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। इस अवसर विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता तथा दैनिक जीवन पर पड़ता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करना या उन्हें छिपाना उचित नहीं है। मानसिक तनाव और भावनात्मक कठिनाइयों के समय उचित सहयोग एवं मार्गदर्शन न मिलने से परिस्थितियाँ गंभीर हो सकती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या की रोकथाम के लिए समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति एवं सहयोग का भाव रखने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग के सहायक अध्यापक श्री हसन दीन खान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग की गीता रानी एवं मनीष कुमार मीणा सहित विभाग के सभी शिक्षकों की सहभागिता सराहनीय रही। सभी के सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर शोध, नवाचार एवं परीक्षा सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    जयपुर. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के द्वितीय दिवस पर शोध एवं नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉक-ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संकाय विकास कार्यक्रम की प्रासंगिकता तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिष्ठाता डॉ. रोहित सारस्वत ने “उच्च शिक्षा में बौद्धिक संपदा अधिकारों की संस्कृति का संवर्धन : शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने, अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा नवीन विचारों एवं आविष्कारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों को शोधपरक दृष्टिकोण अपनाने और नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. कमल किशोर जांगिड़ ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधार : चुनौतियाँ एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, मूल्यांकन की पारदर्शिता, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था तथा प्रभावी मूल्यांकन पद्धतियों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं परिणामोन्मुख बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना एवं प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों में संकाय विकास कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों से नवीन शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रयासरत रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजक एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. रजनी माथुर ने कहा कि इस पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में नवीन सुधारों के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाने, अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विशेषज्ञ वक्ताओं, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया गया तथा उनसे कार्यक्रम संबंधी प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की गईं। मनीषा यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रबंधन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संकाय विकास कार्यक्रम का द्वितीय दिवस शोध, नवाचार, बौद्धिक संपदा संरक्षण तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों के प्रति शिक्षकों की समझ विकसित करने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।  

    खेल प्रतियोगिताओं में कानोड़िया कॉलेज की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर की छात्राओं ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया। दिनांक 26 एवं 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित अंतरमहाविद्यालय प्रतियोगिताओं किक्रेट एवं जूडो में छात्राओं ने अपनी खेल प्रतिभा, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय दिया। किक्रेट प्रतियोगिता में पाँच टीमों ने भाग लिया। कानोड़िया कॉलेज की टीम ने सेमीफाइनल मुकाबले में महारानी कॉलेज को 37 रनों से पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। कृतिका तंवर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। फाइनल मुकाबले में टीम ने सुबोध कॉलेज के विरुद्ध खेलते हुए उपविजेता स्थान प्राप्त किया, जिसमें अंजली शर्मा 39 रन व कृतिका तंवर 30 रन की नाबाद पारी का विशेष योगदान रहा। इसी क्रम में जूडो प्रतियोगिता में भी कानोड़ि़या कॉलेज की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया। महाविद्यालय की टीम ने एक स्वर्ण, दो रजत एवं दो कांस्य पदक सहित कुल पाँच पदक अर्जित कर चौंपियनशिप अपने नाम की। इस उल्लेखनीय सफलता पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशक विजय हरीश ने सभी खिलाड़ियों का अभिनंदन किया तथा उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार खेल भावना, समर्पण और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों प्रतियोगिताओं में छात्राओं की उपलब्धियाँ महाविद्यालय में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा छात्राओं के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।