Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Long Island City

    -0.79°C

    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    जीआईटीबी का 15वां संस्करण 28 अप्रैल तक

    - एग्जीबिशन का सोमवार, 27 अप्रैल को जेईसीसी में सुबह 11 बजे होगा उद्घाटन - एग्जीबिशन में 50 से अधिक देशों के विदेशी टूर ऑपरेटर्स बायर्स के रूप में करेंगे शिरकत*  - भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, राजस्थान टूरिज्म (मेजबान राज्य), स्टेट टूरिज्म बोर्ड्स, होटल एंड रिसॉर्ट्स, तथा पूरे भारत से डीएमसी होंगे शामिल राजस्थान को एक वर्ल्ड-क्लास पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना हमारा लक्ष्य- दिया कुमारी, उप मुख्यमंत्री*  जयपुर, 26 अप्रैल। द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार (जीआईटीबी) के माध्यम से निवेश, रोजगार और वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देते हुए प्रदेश सरकार राजस्थान को एक वर्ल्ड-क्लास टूरिज़्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईटीबी केवल एक पर्यटन आयोजन नहीं, बल्कि साझेदारी, विस्तार और वैश्विक अवसरों के लिए उपयुक्त मंच है। इसके 15वें संस्करण के साथ राजस्थान की पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती नेतृत्व क्षमता और भारत की वैश्विक भागीदारी और मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप पर्यटन आज विकास, रोजगार और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रमुख आधार बन चुका है, और राजस्थान में यह लाखों लोगों की आजीविका से जुड़कर समावेशी आर्थिक विकास को गति दे रहा है। यह बात आज राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार के 15वें संस्करण के होटल जय महल पैलेस में आयोजित उद्घाटन सत्र में संबोधन के दौरान कही।    उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आगे कहा कि "मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा जी के नेतृत्व में पर्यटन को ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें पारदर्शी प्रशासन, निजी निवेश और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता दी गई है। उदयपुर की झीलों, थार के रेगिस्तान, जयपुर और चित्तौड़गढ़ के किलों, प्रमुख यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स, वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन्स और 660 से अधिक हवेलियों के संरक्षण जैसे प्रयासों के साथ राजस्थान अनुभव-आधारित पर्यटन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, MICE, फिल्म और स्पिरिचुअल टूरिज़्म के विस्तार के साथ राज्य को वर्षभर सक्रिय पर्यटन गंतव्य बनाया जा रहा है।     इस अवसर पर मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, वी. श्रीनिवास ने कहा कि "राजस्थान आज केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के कारण ही नहीं, बल्कि निवेश-अनुकूल नीतियों, सरल प्रक्रियाओं, समयबद्ध निर्णय व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण एक आकर्षक, वर्षभर सक्रिय पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। हेरिटेज टूरिज़्म, डेज़र्ट सर्किट्स, वाइल्डलाइफ एक्सपीरियंस, वेलनेस, फेथ-बेस्ड ट्रैवल, रूरल और इको-टूरिज़्म जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग और निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। बेहतर रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी, पीपीपी-आधारित पहल और डिजिटल सिस्टम्स के माध्यम से पर्यटन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन को रोज़गार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाना है।"   अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, सुमन बिल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि " प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत भारत का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में पर्यटन के जीडीपी में योगदान को 5.2% से बढ़ाकर 10% तक ले जाने का है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, और देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 से हवाई अड्डों की संख्या 75 से बढ़कर 150 हो गई है और रेल नेटवर्क में भी उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। 2014 से 2025 के बीच घरेलू पर्यटकों के आगमन की संख्या 1.5 बिलियन से बढ़कर 4 बिलियन तक पहुंच गई हैं, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या भी दोगुनी वृद्धि के साथ 10 मिलियन से 20 मिलियन तक पहुंची है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक क्षमता पर जोर देते हुए उन्होंने होटल क्षमता को दोगुना करने, विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के विकास और उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, उन्होंने कहा कि जीआईटीबी छोटे हितधारकों को बड़े वैश्विक भागीदारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"   शासन सचिव, पर्यटन, राजस्थान सरकार, शुचि त्यागी ने कहा कि "राजस्थान सरकार ने पर्यटन को ‘ग्रोथ इंजन सेक्टर’ के रूप में प्राथमिकता दी है, जिससे नीति, निवेश और स्थानीय सहभागिता एक साथ आगे बढ़ें। इसी दृष्टि के अनुरूप जीआईटीबी के मंच से राजस्थान को एक समेकित, अनुभव-आधारित और निवेश-उन्मुख पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। जीआईटीबी का उद्देश्य राज्य की विविध पर्यटन क्षमताओं को वैश्विक ट्रैवल बाजार से जोड़ना है तथा नीति और बाजार के बीच की दूरी को समाप्त करते हुए पर्यटन नीतियों को सीधे टूर ऑपरेटर्स, निवेशकों और ट्रैवल इंडस्ट्री के हितधारकों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जा सके। इस आयोजन में स्थानीय गाइड्स, कार रेंटल ऑपरेटर्स, स्वयं सहायता समूहों और ईको-टूरिज़्म पहलों को विशेष रूप से जोड़ा गया है। यह पहल पर्यटन, संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने वाले मॉडल को आगे बढ़ाती है।"    इससे पूर्व, पूर्व अध्यक्ष, फिक्की; मेंटर, फिक्की पर्यटन समिति और सीएमडी, द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप, डॉ. ज्योत्सना सूरी ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि "पिछले 15 वर्षों में जीआईटीबी ने पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप की शक्ति का एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसमें राजस्थान सरकार, फिक्की और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के बीच मजबूत समन्वय तथा पर्यटन उद्योग के हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल ट्रेड और अन्य हितधारकों की निरंतर भागीदारी इसकी सफलता का आधार रही है। आज जीआईटीबी एक वैश्विक इनबाउंड टूरिज़्म मार्केटप्लेस के रूप में स्थापित है, जो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और भारतीय विक्रेताओं के बीच महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है और भारत को विविधता एवं समृद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में मजबूत करता है। आगे भी जीआईटीबी भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने, नई साझेदारियां बनाने और नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।"   सेक्रेटरी जनरल, फिक्की, अनंत स्वरूप ने अपने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीआईटीबी के 15वें संस्करण में 50 से अधिक देशों से आए 185 से अधिक विदेशी टूर ऑपरेटर्स की भागीदारी हो रही है, साथ ही भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, मेज़बान राज्य राजस्थान, विभिन्न राज्य पर्यटन बोर्ड्स, होटल्स, रिसॉर्ट्स और देशभर के डीएमसी की विविध प्रदर्शनी भी शामिल है। अगले दो दिनों में यह मंच 10,000 से अधिक प्री-शेड्यूल्ड बीटूबी मीटिंग्स को सुगम बनाएगा, जिससे यह 2008 में अपनी स्थापना के बाद से भारत के प्रमुख इनबाउंड टूरिज़्म प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।    उद्घाटन सत्र के दौरान अतिथियों द्वारा 'रीइमेजनिंग इनबाउंड टूरिज्म इन इंडिया - ट्रैंड्स, टेक्नोलॉजी एंड ट्रांस्फॉर्मेशनल अपॉर्च्यूनिटीज टूवर्ड्स इन्क्रेडिबल इंडिया 4.0' थीम पर फिक्की-ईवाय नॉलेज पेपर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार, पर्यटन, कमिश्नर, रुक्मणी रियार और फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के को-चेयरमैन श्री सुरेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित रहे।    वहीं, एग्जीबिशन का उद्घाटन 27 अप्रैल को सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (जेईसीसी) में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी द्वारा सुबह 11 बजे किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जीआईटीबी का आयोजन राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा संयु्क्त रूप से किया जा रहा है। इस आयोजन को राजस्थान एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (राटो), इंडियन हेरिटेज होटल्स एसोसिएशन (आईएचएचए) और होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (एचआरएआर) जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय एसोसिशंस का सहयोग प्राप्त है।   द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाज़ार के उद्घाटन समारोह में 'एकम – द स्पिरिट ऑफ वननैस' ने बांधा समां   द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाज़ार (जीआईटीबी) के उद्घाटन समारोह में 'एकम – एकता की भावना' थीम पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता में छिपी एकता का अद्भुत संदेश दिया। कार्यक्रम में राजस्थान की शाश्वत विरासत, शाही भव्यता और नाथद्वारा की पवित्र भक्ति से प्रेरित इस प्रस्तुति में भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपराएं जैसे कथक और मणिपुरी में लोक नृत्य शैलियां घूमर, चारी, ढोल चोलोम और छऊ का सुंदर समन्वय देखने को मिला।   यह प्रस्तुति विविध भाव-भंगिमाओं और ऊर्जाओं के माध्यम से आगे बढ़ी और अपने चरम पर पहुंचकर एक भावनात्मक दृश्य प्रस्तुत किया, जहाँ भगवान श्री कृष्ण को शाश्वत सारथी के रूप में दर्शाया गया, जो सभी मार्गों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें एक ही सामंजस्यपूर्ण एकता में पिरोते हैं। इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उद्घाटन समारोह को एक सांस्कृतिक भव्यता प्रदान की।

    जयपुर में मनाई संत सूरदास जयंती; सक्षम संगठन ने किया आयोजन

    संकल्प और निरंतरता ही सफलता की कुंजी: डॉ. कुलदीप मिश्रा जयपुर में मनाई संत सूरदास जयंती; सक्षम संगठन ने किया आयोजन जयपुर।'सक्षम' (समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल) द्वारा रविवार को मोती डूंगरी स्थित दिव्यांग सेवा केंद्र में भक्त शिरोमणि संत सूरदास जी की जयंती उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने संत सूरदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन दर्शन को याद किया। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रदेश सचिव डॉ. कुलदीप मिश्रा ने संत सूरदास जी के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूरदास जी ने शारीरिक बाधाओं के बावजूद अपनी भक्ति और जिजीविषा से समाज को एक नई दिशा दी। डॉ. मिश्रा ने युवाओं और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा, "हमें संत सूरदास जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हुए और निश्चय को बिना छोड़े जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सच्ची सफलता है।" सक्षम के वार्षिक कार्यक्रमों का हुआ शंखनाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला सचिव डॉ. राम भजन कुमावत ने संगठन की आगामी कार्ययोजना साझा की। उन्होंने बताया कि सूरदास जयंती के साथ ही सक्षम संगठन के इस वर्ष के कार्यक्रमों की विधिवत शुरुआत हो गई है। आगामी महीनों में दिव्यांगजनों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, चिकित्सा शिविर और संगठनात्मक बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि 'सक्षम भारत, समर्थ भारत' के ध्येय को प्राप्त किया जा सके। इस गौरवमयी आयोजन में संगठन के कई वरिष्ठ चेहरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में प्रदेश संगठन मंत्री कमल कुमार, जयपुर जिले की उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रमिला दुबे, और प्रांत सचिव राजेंद्र धाकड़ सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में दिव्यांगजनों के प्रति समाज के दृष्टिकोण को और अधिक समावेशी बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में शिक्षक नरेंद्र कुमार, अद्वितीय गोड हैप्पी ब्रह्म भट्ट ने गानों की रंगारंग प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया. कार्यक्रम के अंत में जिला उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रमिला दुबे ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया.     

    बेजुबान पक्षियों के लिए पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बेजुबान बच्चों की स्कूल आनंदी लाल पोद्दार राजकीय बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय जयपुर के प्रांगण एवं परिसर में 30 परिंडे लगाए

    जयपुर । बेजुबान पक्षियों के लिए पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान के पदाधिकारियों और सदस्यों ने रविवार ( 26 अप्रैल ) को बेजुबान बच्चों की स्कूल आनंदी लाल पोद्दार राजकीय बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय जयपुर के प्रांगण एवं परिसर में 30 परिंडे लगाए। पुरस्कृत शिक्षक फोरम कार्यकारिणी की बैठक हुई तथा निर्णय लिया गया है कि 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष में फोरम के महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा द्वारा तैयार की गई प्रदर्शनी ऑपरेशन सिंदूर की शौर्य गाथा का उद्घाटन एवं प्रदर्शन 7 मई को प्रातः 10:30 बजे क.दे .बुधिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हीरापुरा के सभागार में किया जाएगा ।    इस अवसर पर फोरम अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर,उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार,कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ,जयपुर जिला फोरम अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा,फोरम सलाहकार कमल चोटिया, डॉ.राजेश कुमार शर्मा, महिला सचिव मधु कुल्हार,जिला उपाध्यक्ष मुरलीधर जाट, जिला प्रचार सचिव बनवारीलाल कनवंत,कार्यकारिणी सदस्य मुरारीलाल शर्मा ,डॉ. विक्रम सिंह डॉ. पवन भास्कर तथा स्थानीय विद्यालय के प्रिंसिपल भरत जोशी आदि उपस्थित थे ।

    विश्व पुस्तक दिवस पर संपर्क साहित्य संस्थान की ऑनलाइन साहित्यिक संध्या में देशभर से उमड़ा उत्साह

    संपर्क संस्थान साहित्य को जीवंत रखने वाला मंच/ संपर्क के ऑनलाइन मंच पर पुस्तकों के महत्व पर हुआ चिंतन, कविताओं से सजी शाम   जयपुर। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर संपर्क साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक संध्या एवं काव्य पाठ में गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभा कर साहित्य के प्रति अपनी गहरी संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। संस्थान के अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने सभी साहित्यकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि संपर्क साहित्य संस्थान केवल एक मंच नहीं, बल्कि विचारों और संवेदनाओं को जोड़ने वाला सशक्त परिवार है।  कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की महासचिव एवं समन्वयक रेनू ‘शब्दमुखर’ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए प्रभावशाली मंच संचालन संभाला, जिससे कार्यक्रम में गरिमा और ऊर्जा का सुंदर समन्वय बना रहा। मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. सीमा हिंगोनिया ने अपने उद्बोधन में संपर्क साहित्य संस्थान व अध्यक्ष अनिल लढा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान समाज में साहित्यिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से रचनात्मक मंच प्रदान कर रहा है तथा प्रभावशाली कविता सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदी प्रचार-प्रसार संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिल शुक्ला ने संपर्क साहित्य को जीवंत रखने वाला मंच बताया साथ ही कहा कहा कि संपर्क साहित्य संस्थान देशभर में साहित्यिक गतिविधियों, पुस्तक विमोचन एवं काव्य पाठ के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विशेष रूप सेउन्होंने कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में भी संस्थान ने अपनी गतिविधियों से साहित्य को जीवित रखा और समाज में सकारात्मक चेतना बनाए रखी। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिभागियों ने पुस्तकों के महत्व पर अपने विचार साझा किए। किसी ने आचार्य चरक की ‘चरक संहिता’ के ज्ञान पर प्रकाश डाला, तो किसी ने रामधारी सिंह दिनकर की ‘रश्मिरथी’, दुष्यंत कुमार की रचनाओं तथा ‘आनंद मठ’ जैसे कालजयी ग्रंथों के माध्यम से साहित्य की गहराई को प्रस्तुत किया। काव्य पाठ ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।    देश भर के साहित्यकारों ने दी प्रभावी प्रस्तुतियां    कार्यक्रम में पुणे से आशा शर्मा, हल्द्वानी से सौम्या दुआ, कोटा से पूनम झा, दौसा से संदीप छीपा, भोपाल से नीलम वंदना, हैदराबाद से सुहास जी सहित जयपुर की सुजाता पुरोहित, जीनस कंवर, नेहा खत्री, हिमाद्री समर्थ, सुनीता त्रिपाठी, डॉ. नीलम कालरा, प्रियंका पुरोहित, कमलेश शर्मा, पुनीता कुमारी, पुष्पा माथुर, डॉ. दीपाली वार्ष्णेय अग्रवाल, अरुण कुमावत, डॉ. दीपक कपूर, मधुमिता,अनिल कुमार,ममता महक एवं रितु अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।   समापन में यह स्पष्ट हुआ कि संपर्क साहित्य संस्थान न केवल साहित्य को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को भी पुस्तकों और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति प्रेरित कर रहा है। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सकारात्मक विचारों का एक सुंदर संगम बनकर सभी के मन में विशेष छाप छोड़ गया।  

    अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला के महासभा में आजीवन मुख्य संरक्षक बनने पर स्वागत

    अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला के महासभा में आजीवन मुख्य संरक्षक बनने पर उनके घर पर महासभा पदाधिकारियों व आजीवन संरक्षकों द्वारा माल्यार्पण कर, शॉल व साफा पहनाकर अभिनंदन किया गया । मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा, कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल खंडेलवाल, कार्यालय मंत्री रामकिशोर खूंटेटा, आजीवन संरक्षकगण हनुमान सहाय ओढ, कृष्ण मोहन खंडेलवाल, ललित खंडेलवाल, राकेश कूलवाल, पत्रिका प्रभारी राम स्वरूप ताम्बी, उपप्रभारी राम बाबू गुप्ता, भवन संयोजक रमेश चंद्र सौखिया व संयुक्त मंत्री नितिन खंडेलवाल भरतपुर आदि उपस्थित थे । उपस्थित सभी ने महासभा अध्यक्ष द्वारा आजीवन संरक्षक पद लेने व महासभा के महिला कल्याण कोष में 31 लाख रुपए देने के वचन की सराहना की । रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला ने उपस्थित सभी के सामने इनमें से महासभा कोष में ऑनलाइन 5 लाख रुपए ट्रांसफर भी कर दिए । महासभा अध्यक्ष पद हेतु घोषित वचन राशि रुपए 31 लाख श्री रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला महासभा कोष में जमा करवा चुके हैं ।  राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा महासभा कोष में दी जा रही दान राशियों से महिला सहायता कार्यक्रमों, छात्रवृत्ति व मेडिकल सहायता कार्यक्रमों को चलाने में सहयोग मिला है ।   अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तूंगावाला) के खंडेलवाल समाज के विकास मे अथक परीश्रम करते हुए तन मन एवं धन से निरंतर सहयोग करने एवं समाज के विकास मे अनेक आयोजनों के माध्यम से निरंतर अनेक रचनात्मक कार्य करते रहने पर अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तूंगावाला) को शुभकामना देते हुए खुशी वयक्त की है, इसके साथ ही आशा एवं विश्वास जताया है की आगे भी जोश, जूनून, नई भरपूर ऊर्जा के साथ काम करते हुए अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के विकास मे नए आयाम स्थापित करेगे!

    राजुवास (जोबनेर) जयपुर द्वारा “विश्व पशुचिकित्सा दिवस-2026” का आयोजन

    केबिनेट मंत्री पशुपालन विभाग ने कहा पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करना हमारा लक्ष्य जयपुर। राजुवास (जोबनेर) जयपुर द्वारा स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर में शनिवार को “विश्व पशुचिकित्सा दिवस-2026” का आयोजन किया गया। संस्थान के अधिष्ठाता एवं फेकल्टी चेयरमेन प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने सभी अतिथियों का स्वागत किया व विश्व पशुचिकित्सा दिवस की बधाई दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जोराराम कुमावत, केबिनेट मंत्री, पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार ने इस अवसर पर सभी को विश्व पशुचिकित्सा दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि आज का दिन पशुचिकित्सकों के योगदान को याद करने का दिन है। विश्व पशुचिकित्सा दिवस मनाने का उद्वेष्य सभी को जागरुक व पशुधन के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं संरक्षण के बारे में सोचना है। उन्हांने कहा कि हमें पषुचिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार करके पषुपालन एवं पशुओं की चिकित्सा बेहतर करना है। पशुओं को बीमारियों से बचा कर हम अपने आप को भी स्वस्थ रख सकते है। उन्होनें बताया की राज्य सरकार ने भी पशुचिकित्सा क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए अनेक नये पशुचिकित्सालय खोले हैं, अनेकों का क्रमोन्नयन किया है, निःषुल्क दवाईयों की संख्या बढ़ाई है तथा उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की है। आगे उन्होनें बताया कि पशुपालकों के घर पर पशुचिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए मोबाइल वेटनरी वेन, पशुपालकों के लिए गोपालक कार्ड, मंगला पशु बीमा योजना व सेक्स सॉर्टेड सीमन उपलब्ध करवाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं। पशु टीकाकरण कार्यक्रम भी प्रभावी तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है जिससे पशुओं में होने वाली बीमारियों की रोकथाम की जा सके। मंत्री महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा की पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करना हमारा लक्ष्य है क्यांकि पशुपालन ग्रामीण क्षेत्र में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के लिए आजीविका का माध्यम है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन शर्मा, कुलपति रूवास (जोबनेर) जयपुर ने सभी को पशुचिकित्सा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था व पोषण सुरक्षा में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा के हमें चिंतन करने की जरुरत है कि हम समाज में अपनी उपयोगिता को सिद्ध करें। हमें ना केवल पशु स्वास्थ्य बल्कि पशु उत्पादन के बारे में भी सोचना है जिससे पशुपालकों के आथि्र्ाक स्तर में सुधार हो। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान होगा। कार्यक्रम के विशिष्ठ अथिति पशुपालन विभाग के निदेषक डॉ. सुरेष चन्द मीना ने कहा कि पशुचिकित्सक न सिर्फ पशुओं का ईलाज करता है बल्कि मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण आदि में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। संस्थान के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने अपने उदबोधन में पशुचिकित्सा के इतिहास व वर्तमान स्थिति के बारे में अपने विचार रखे। साथ ही उन्हांने माननीय केबिनेट मंत्री को संस्थान द्वारा गुणवत्तायुक्त शिक्षा व पशुपालकां को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया। इस अवसर पर अथितियों द्वारा दो सेवानिवृत आचार्य प्रो. (डॉ.) जी.सी. गहलोत व प्रो. (डॉ.) सुनन्दा षर्मा को उनकी विशिष्ठ सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों ने रूवास की न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान तकनिकी सेमिनार में डॉ. एस.के. झीरवाल ने विश्व पशुचिकित्सा दिवस की इस वर्ष की थीम “पशुचिकित्सक- भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक” पर अपना व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका करनानी ने किया तथा रूवास के कुलसचिव तथा राजस्थान प्रषासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी सावन कुमार चायल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। यह कार्यक्रम संस्थान के सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. निर्मल कुमार जेफ की देख-रेख में आयोजित किया गया। आज स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर के पशुचिकित्सा संकुल द्वारा विश्व पशु चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य पर निःशुल्क एन्टी रैबीज टीकाकरण एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर तथा पशु बांझपन निवारण षिविर का आयोजन किया गया । पशुचिकित्सा संकुल प्रभारी डॉ. एस.के. झीरवाल ने बताया कि इस षिविर बड़ी संख्या में पशुपालकों ने भाग लेकर सुविधाओं का लाभ लिया। विद्यार्थियो के लिए पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। संस्थान के पशु जन्य रोग निदान, निगरानी एवं निवारण केन्द्र (सी.डी.एस.आर.जेड.) द्वारा एक ऑनलाईन क्वीज का भी आयोजन किया गया।

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की छात्राओं ने रचा इतिहास, राजस्थान विश्वविद्यालय मेरिट सूची में शीर्ष स्थान हासिल

    बीबीए की कोमल स्वामी, बीसीए की श्वेता कुमारी एवं बी.एड.-एम.एड. की कविता पारीक ने प्राप्त किया गोल्ड मेडल जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया। इस गरिमामयी अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की विशेष उपस्थिति रही।   बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (2021–24) की छात्रा कोमल स्वामी, बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (2022–25) की छात्रा श्वेता कुमारी तथा बी.एड.-एम.एड. (2022–25) की छात्रा कविता पारीक ने अपने-अपने संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए गोल्ड मेडल और डिग्री हासिल की।   इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर संस्थान के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, प्राचार्य एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल,बी.एड. कॉलेज प्राचार्या *शिप्रा गुप्ता, कॉमर्स विभागाध्यक्ष प्रियंका गुप्ता, आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन पाटोदिया और राहुल अग्रवाल ने छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण और संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है।   इस अवसर पर छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय डॉ. संजय बियानी के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग एवं परिवार के निरंतर समर्थन को दिया।

    राजस्थान विश्वविद्यालय ने जीता अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय हैण्डबॉल पुरुष खिताब

    राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा की अध्यक्षता में आयोजित अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय हैण्डबॉल (पुरुष) प्रतियोगिता 2025-26 का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। खेल मंडल सचिव व प्रतियोगिता की आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा सिंह रतनू ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। समारोह के मुख्य अतिथि कुलदीप धनकड़ ( विधायक एवं सदस्य, सिंडिकेट, राजस्थान वि.वि.) रहे। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एम.एस. चूंडावत (पूर्व सचिव, खेल मंडल) उपस्थित रहे।   आज खेले गए फाइनल मुकाबले में राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर ने UEM विश्वविद्यालय जयपुर को 24-18 के अंतर से हराकर खिताबी जीत दर्ज की।   फाइनल मैच में राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से देवेन्द्र, गोहित और दिनेश ने 05-05 गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। वहीं, उप-विजेता UEM टीम की तरफ से दिव्यांशु ने 05 जबकि श्याम और अजय ने 04-04 गोल किए। आज ही खेले गए हार्ड लाइन फाइनल में लवली यूनिवर्सिटी पंजाब ने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी गुजरात को 34-22 के अंतर से पराजित कर तीसरा स्थान अर्जित किया ।   LPU की ओर से मनीष ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 गोल दागे, परमजीत ने 08 और सुमित ने 07 गोल किए। सौराष्ट्र की ओर से हर्ष ने 06, जगराज ने 05 तथा भावेश और नितिन ने 03-03 गोल किए।   प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंटः दिनेश डूडी राजस्थान विश्वविद्यालय को मिला। सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर   हरदयाल ने UEM यूनिवर्सिटी, चोमू को मिला।   राजस्थान विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा और लोक संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया।   प्रतियोगिता के सफल संचालन में एआईयू (AIU) पर्यवेक्षक के रूप में डॉ. हरीश बी. सबा और तकनीकी निदेशक के रूप में सुरभित सैन की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।   अंत में मुख्य अतिथि ने विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी और पदक प्रदान किए। मंच का सफल संचालन एस.एन. पारीक एवं श्रीमति बिंदु चौधरी द्वारा किया गया।

    रंग, उमंग और सफलता: SAGA 2025 का शानदार समापन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक साहित्य उत्सव ‘सागा 2025’ के दूसरे दिन की शुरुआत छात्रा ख्याति द्वारा ऊर्जावान उद्घाटन के साथ हुई, जिसमें उन्होंने दिनभर के कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात ‘विज़ाज ऑफ मिथिकल म्यूज़ेसः फेबल्स अक्रॉस फेसेज़’ फेस पेंटिंग प्रतियोगिता तथा ‘मोज़ेक ऑफ हिस्टोरिकल टेल्स’ पुस्तक आवरण डिज़ाइन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिनमें प्रतिभागियों ने लोककथाओं से प्रेरित रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में तान्या परमान (कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय) ने प्रथम, अंशुल डागोदिया (महाराजा कॉलेज) ने द्वितीय तथा सुरभि वर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पुस्तक आवरण डिज़ाइन प्रतियोगिता में मंतशा कपूर (कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय) ने प्रथम, यशराज यादव (राजस्थान कॉलेज) ने द्वितीय तथा आदित्य परमार (राजस्थान कॉलेज) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही ‘द रस्टिक रिडल्स ऑफ रिवर्बरेटिंग लोर्स’ क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें महारानी कॉलेज ने प्रथम, कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय ने द्वितीय एवं महाराजा कॉलेज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी दौरान आयोजित साहित्य-आधारित ट्रेज़र हंट में कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय की टीम (परख मोतियानी, विशाखा दास, मनस्वी गुप्ता एवं वंशिका शर्मा) ने ‘अरबियन नाइट्स’ थीम पर विजय प्राप्त की। द्वितीय दिवस का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। सर्वप्रथम प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। महाविद्यालय अंग्रेज़ी ऑनर्स षष्ठम सेमेस्टर की छात्रा अदीबा गुचिया ने दो दिवसीय उत्सव की संकलित रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके उपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार नंद भारद्वाज ने राजस्थान विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अंशु वर्मा (संगीत विभाग) के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान भारद्वाज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लेखक केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव ही नहीं, बल्कि समाज और परिवेश से प्राप्त सामूहिक अनुभवों को भी अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल लिखित शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने लोक साहित्य की सांस्कृतिक गहराई, उसकी जीवंतता और मौखिक परंपरा की व्यापकता पर विशेष बल देते हुए बताया कि ज्ञान निरंतर विकसित होता है और कहानियों व अनुभवों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रवाहित होता रहता है। साथ ही डॉ. वर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि लोक साहित्य में मानवीय मूल्यों का समावेश होता है और उसमें एक शिक्षाप्रद स्वरूप निहित रहता है। अंत में महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने समापन टिप्पणी प्रस्तुत की तथा उत्सव संयोजक एवं यूजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम का समापन मेराकी बैंड की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने वहाँ उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दो दिवसीय उत्सव लोककथाओं की सतत प्रासंगिकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसने साहित्य प्रेमियों को एक मंच पर लाकर उन्हें साहित्य की समृद्ध परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।       

    विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन तथा हसनदीन खान, असिस्टेंट प्रोफेसर, विशेष शिक्षा विभाग के समन्वय में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न कक्षाओं का अवलोकन करते हुए दृष्टिबाधित बालक-बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विशेष रूप से ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई की प्रक्रिया, स्पर्श आधारित अधिगम , श्रव्य शिक्षण विधियों तथा सहायक उपकरणों जैसे ब्रेल किताबें, ऑडियो डिवाइसेस एवं स्क्रीन रीडर के उपयोग को समझा। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि दृष्टिबाधित बच्चों को दैनिक जीवन कौशल जैसे—स्वयं चलना-फिरना, व्यक्तिगत स्वच्छता, तथा स्वतंत्र जीवन जीने के लिए किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही, उन्होंने कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त विशेष शिक्षण विधियों, ध्वनि संकेतों, स्पर्शात्मक शिक्षण सामग्री एवं अनुकूलित मूल्यांकन पद्धतियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के डी.एड एवं बी.एड के विद्यार्थियों ने कक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न प्रशिक्षण सेवाओं का गहन अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान उत्पन्न जिज्ञासाओं का समाधान डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, हसनदीन खान एवं मनीष कुमार मीणा द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं कौशल-आधारित ज्ञान प्राप्त हुआ। भ्रमण के समापन पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर ने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ दृष्टिबाधित बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं आत्मनिर्भर विकास के लिए अत्यंत समर्पण के साथ कार्य कर रहा है और यह विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट शिक्षण प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को समावेशी शिक्षा के व्यावहारिक आयामों से परिचित कराते हैं तथा उनके पेशेवर कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव उन्हें अपने दायित्वों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं दक्ष बनाते हैं। कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों में सेवा भाव, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि विशेष शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए धैर्य, सहानुभूति एवं व्यावहारिक समझ अत्यंत आवश्यक है, और इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों में इन गुणों को विकसित करने में सहायक होते हैं। अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।