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    एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बोर्ड में अब नेक्स्ट जनरेशन, अविरल माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी और केशव माहेश्वरी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में शामिल

    - आगामी 100 वर्षों के विजन की दिशा में एलन ने शुरू किया नया चरण बोर्ड में यह परिवर्तन संस्थापक मूल्यों, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और अगली पीढ़ी के नेतृत्व को साथ लेकर एलन को भविष्य के लिए और बेहतर तैयार करेगा कोटा। देश की अग्रणी एजुकेशन कंपनी एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड ने नेक्स्ट जनरेशन अविरल माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी और केशव माहेश्वरी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया है। एलन की अगले 100 वर्षों तक निरंतर प्रगति, समय के साथ विकास और भारतीय शिक्षा में सार्थक योगदान के उद्देश्य से ये महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट अपने विजन के अनुरूप समय-समय पर गवर्नेंस, सिस्टम, प्रक्रियाओं, नेतृत्व क्षमता और संस्थागत आधार को सुदृढ़ करने के लिए निरन्तर नवाचार और प्रयास करता आया है। यह परिवर्तन एलन की यात्रा में मील का पत्थर है, जो अगली पीढ़ी के डायरेक्टर्स के नए दृष्टिकोण, फाउंडर्स के अनुभव तथा एलन की प्रोफेशनल लीडरशिप टीम की विशेषज्ञता के साथ इंस्टीट्यूट के विजन को आगे बढ़ाएगा। इस नियुक्ति पर संस्थापक डाॅ. गोविंद माहेश्वरी ने कहा कि चार दशकों में एलन ने साझा मूल्यों, समर्पण और कठोर परिश्रम से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। आज जब हम अगली पीढ़ी का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में स्वागत कर रहे हैं, तो हमें पूरा विश्वास है कि उनकी ऊर्जा और नवाचार की सोच हमें आगे की नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। हम सभी मिलकर भारत के प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के अपने मिशन को साकार करेंगे। नए डायरेक्टर्स का स्वागत करते हुए संस्थापक राजेश माहेश्वरी ने कहा कि अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। संस्थान में कई महत्वपूर्ण कर्यों से जुड़े रहने के कारण इन्हें एलन की कार्य संस्कृति और मूल्यों की गहरी समझ है। मुझे विश्वास है कि उनके विचार, समर्पण, हमारे बोर्ड और नेतृत्व टीम के अनुभव के साथ मिलकर एलन विकास के अगले चरण तथा आगामी 100 वर्षों के लिए सशक्त संस्थान बनाने के हमारे विजन को नई दिशा देंगे। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए संस्थापक नवीन माहेश्वरी ने कहा, हम नए नियुक्त डायरेक्टर्स को इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हैं। उनकी ऊर्जा और दूरदृष्टि एलन के विकास के नए अध्याय लिखेगी। हम सलाहकार की भूमिका में बोर्ड और नेतृत्व टीम के साथ निरंतर खड़े रहेंगे तथा अपने अनुभव और मार्गदर्शन से हर कदम पर उनका सहयोग करेंगे। इस अवसर पर अविरल माहेश्वरी ने कहा, यह नियुक्ति मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसे मैं पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मेरा प्रमुख उद्देश्य एलन की समृद्ध विरासत को और मजबूत बनाते हुए संस्थान को भविष्य के लिए तैयार करना होगा। हम अकादमिक उत्कृष्टता, तकनीक-सक्षम शिक्षण, फैकल्टी डवलपमेंट, विद्यार्थियों के समग्र कल्याण तथा मजबूत गवर्नेंस में निवेश जारी रखेंगे, ताकि हमारे विद्यार्थियों और सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण हो सके। मैं संस्थापकों, बोर्ड तथा संपूर्ण नेतृत्व टीम द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए उनका आभारी हूँ और संस्थान के उद्देश्य के प्रति पूर्णतः समर्पित रहूँगा। आनंद माहेश्वरी ने कहा कि इस जिम्मेदारी के लिए मुझ पर विश्वास जताया जाना मेरे लिए सम्मान की बात है और मैं एलन के अगले चरण मेंयोगदान देने के लिए उत्साहित हूँ। मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता और प्रतिबद्धता विद्यार्थियों तथा फैकल्टीजं के प्रति रहेगी। 21वीं सदी में तकनीक, अकादमिक सिस्टम और प्रक्रियाओं के साथ मिलकर बेहतर शिक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। मेरा प्रयास रहेगा कि अकादमिक उत्कृष्टता और तकनीक के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग को एक साथ जोड़कर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण अनुभव और अधिक सशक्त कॅरियर परिणाम उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि वे भविष्य के अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हों। बोर्ड में शामिल होने पर केशव माहेश्वरी ने कहा एलन मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और इसके मूल्यों ने मेरे व्यक्तित्व को आकार दिया है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था ‘‘वे ही वास्तव में जीवित हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं।‘‘ मैं इस नियुक्ति को एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूँ, जिसके माध्यम से शिक्षा का सकारात्मक प्रभाव और अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचाया जा सके। हमारा उद्देश्य एलन की पहुँच का विस्तार करना है, ताकि भारत या दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला एक प्रतिभाशाली और मेहनती विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने का वास्तविक अवसर प्राप्त कर सके। हमारा दायित्व केवल एलन की विरासत की रक्षा करना नहीं, बल्कि ए-आई और नए विचारों को अपनाते हुए इसकी संभावनाओं को नए आयाम देना भी है, साथ ही अपने मूल्यों से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मैं अपने सभी बोर्ड सदस्यों से सीखते हुए फाउंडर्स द्वारा तैयार की गई मजबूत नींव पर आगे निर्माण करने के लिए उत्सुक हूँ। डायरेक्टर उदय शंकर ने नव-नियुक्त डायरेक्टर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिछले 38 वर्षों में एलन ने उत्कृष्टता की एक सशक्त विरासत स्थापित की है। बदलती दुनिया में उत्कृष्टता को बनाए रखने के लिए संस्थानों का भी समय के साथ विकसित होना आवश्यक है। एलन की मजबूत गवर्नेंस स्ट्रक्चर इसी सोच को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें अगली पीढ़ी के डायरेक्टर्स का दूरदर्शी दृष्टिकोण, फाउंडर्स का अनुभव तथा सीईओ नितिन कुकरेजा के नेतृत्व में कार्यरत अनुभवी प्रोफेशनल मैनेजमेंट टीम की विशेषज्ञता एक साथ कार्य करेगी। यह संस्थान के मूल उद्देश्य की निरंतरता बनाए रखते हुए कार्यान्वयन में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा। परिचय अविरल माहेश्वरी बारे में वर्ष 2014 से एलन से जुड़े अविरल माहेश्वरी ने संस्थान के ऑपरेशनल फ्रेमवर्क को आधुनिक बनाने तथा संगठनात्मक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वरिष्ठ नेतृत्व टीम के साथ मिलकर उन्होंने ऐसी संस्थागत प्रक्रियाओं का नेतृत्व किया, जिन्होंने एलन के विस्तार को गति दी, साथ ही उसके अकादमिक मानकों की गुणवत्ता को बनाए रखा। आनंद माहेश्वरी के बारे में वर्ष 2019 में एलन से जुड़ने के बाद आनंद माहेश्वरी ने अकादमिक और टेक्नोलॉजी टीमों के साथ मिलकर संस्थान के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत किया है, जिससे तकनीकी नवाचार कक्षा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बना सके। उनके नेतृत्व में एलन ने कक्षा शिक्षण में अपनी डिजिटल क्षमताओं को लगातार मजबूत किया है, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक नवाचार संस्थान के मूल अकादमिक दर्शन के अनुरूप हो। केशव माहेश्वरी के बारे में वर्ष 2019 में एलन से जुड़ने के बाद केशव माहेश्वरी ने संस्थान के इंटरनेशनल बिजनस का नेतृत्व किया है। उनके नेतृत्व में एलन ने विदेशी धरती पर उपस्थिति का विस्तार किया है और यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय विद्यार्थियों को विदेशों में भी वही अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त हो, जिसके लिए एलन पहचाना जाता है। उनके नेतृत्व में एलन ओवरसीज भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक मजबूत वैश्विक मंच के रूप में विकसित हुआ है तथा अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को भी तैयार कर रहा है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बारे में वर्ष 1988 में राजस्थान के कोटा में स्थापित एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट भारत के अग्रणी शिक्षा संस्थानों में से एक है, जो जेईई (मेन एवं एडवांस्ड), नीट-यूजी, इंटरनेशनल ओलंपियाड तथा अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए समर्पित है। पिछले 38 वर्षों में एलन ने अकादमिक उत्कृष्टता, अनुभवी फैकल्टी, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धति तथा लगातार उत्कृष्ट परिणामों के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास अर्जित किया है। संस्थान भारत तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने क्लासरूम कार्यक्रमों और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है।  

    "डॉ शर्मा जयपुर केंद्र निदेशक "

    वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरु प्रोफेसर बी एल वर्मा द्वारा डॉ जितेंद्र कुमार शर्मा को जयपुर स्थित क्षेत्रीय केंद्र का निदेशक नियुक्त किया है l डॉ शर्मा पूर्व में जोधपुर बीकानेर कोटा अजमेर के भी निदेशक पद पर रहे हैं आपने विश्वविद्यालय में छात्र वृद्धि में नए आयाम स्थापित किए है l डॉ शर्मा को विश्वविद्यालय मैं उत्कृष्ट कार्य करने के परिणाम स्वरूप "मेमो ऑफ़ एक्सीलेंस अवॉर्ड"से भी नवाजा जा चुका हैl डॉ शर्मा ने निदेशक का पदभार ग्रहण करने के पश्चात अपनी प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय केंद्र पर सेवाओं का विस्तार करना, छात्र संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि करना, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार करना एवं छात्रों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने हेतु नवाचारों को प्राथमिकता देना शामिल हैl  

    दिल्ली में ऊंची इमारतों का रास्ता साफ, लेकिन विशेषज्ञों ने दी बुनियादी ढांचे पर चेतावनी

        युगचरण न्यूज़ | 14 जुलाई 2026 राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शहरी विकास की दिशा में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। नई शहरी नियोजन नीतियों के तहत अब राजधानी में अधिक ऊंची आवासीय इमारतों और बड़े पैमाने पर पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हालांकि, शहरी नियोजन और वास्तुकला विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसके साथ सड़कों, जलापूर्ति, सीवर, सार्वजनिक परिवहन और अन्य नागरिक सुविधाओं का समानांतर विकास नहीं किया गया, तो दिल्ली की मौजूदा समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। नई नीति के तहत सरकार ने फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) क्षेत्रों का भी विस्तार किया है। इन बदलावों का उद्देश्य सीमित भूमि का बेहतर उपयोग करना, अधिक आवास उपलब्ध कराना और तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे महानगर में भूमि की कमी के कारण ऊंची इमारतें एक स्वाभाविक आवश्यकता बनती जा रही हैं। लेकिन केवल बहुमंजिला भवन बनाना ही किसी शहर के विकास का संकेत नहीं माना जा सकता। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इन इमारतों के साथ स्थानीय बुनियादी ढांचा भी उसी गति से विकसित हो। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, कई पुनर्विकास परियोजनाओं में मुख्य ध्यान केवल अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र, ऊंची इमारतों और आर्थिक लाभ पर केंद्रित रहता है। वहीं सड़कों की चौड़ाई, पार्किंग, सार्वजनिक स्थान, जल निकासी, यातायात व्यवस्था और सामाजिक सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय अक्सर पीछे छूट जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी शहर का विकास केवल पुराने मकानों को गिराकर ऊंचे टावर बनाने से नहीं होता। विकास का वास्तविक पैमाना यह होना चाहिए कि बढ़ती आबादी के बावजूद लोगों की जीवन गुणवत्ता बेहतर हो, यातायात सुगम रहे और नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। नई TOD नीति को दिल्ली के शहरी विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इसके तहत मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उच्च घनत्व वाले मिश्रित उपयोग विकास की अनुमति दी गई है। साथ ही न्यूनतम पात्र भूखंड का आकार घटाकर 2,000 वर्गमीटर कर दिया गया है और FAR को बढ़ाकर 500 तक करने की व्यवस्था की गई है। इससे राजधानी के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं। शहरी योजनाकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली की जनसंख्या और आवास की मांग लगातार बढ़ेगी। इसलिए अधिक घनत्व वाले विकास को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, हर परियोजना को अलग-अलग देखने के बजाय पूरे इलाके के स्तर पर उसका प्रभाव आंका जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नई परियोजना को मंजूरी देने से पहले यह मूल्यांकन जरूरी है कि उसका प्रभाव सड़कों, मेट्रो, जलापूर्ति, सीवर नेटवर्क, हरित क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर कितना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में कई इलाकों में यातायात जाम, जल संकट, पार्किंग की कमी और अन्य शहरी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शहर के विकास के लिए केवल वास्तुकार ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि शहरी योजनाकारों, स्थानीय निकायों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। दीर्घकालिक और समग्र योजना के बिना केवल ऊंची इमारतें बनाना भविष्य में नई चुनौतियों को जन्म दे सकता है। फिलहाल दिल्ली की नई शहरी नीति को राजधानी के विकास के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यदि बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं का समानांतर विस्तार नहीं हुआ, तो ऊंची इमारतों का यह विकास मॉडल भविष्य में राजधानी पर अतिरिक्त बोझ भी बन सकता है।    

    जंतर-मंतर पर अनशन का 16वां दिन: एक छात्र अस्पताल में भर्ती, सोनम वांगचुक का वजन 8 किलो से अधिक घटा

    युगचरण न्यूज़ | 14 जुलाई 2026 नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी इस प्रदर्शन का 16वां दिन पूरा हो गया है। इस दौरान एक छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन भी आठ किलोग्राम से अधिक घटने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों के अनुसार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े एक छात्र को हाइपोवोलेमिक शॉक (शरीर में तरल पदार्थ की गंभीर कमी) की स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ा। संगठन का कहना है कि लंबे समय से भोजन न करने और लगातार धरने पर बैठे रहने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी। इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठन का दावा है कि अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन लगभग 8.25 किलोग्राम कम हो चुका है। डॉक्टरों द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है, हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वांगचुक अपनी मांगों को लेकर अब भी अडिग हैं। प्रदर्शनकारी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कथित मुद्दों पर कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह अनशन किया जा रहा है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यधारा के मीडिया द्वारा इस आंदोलन की अनदेखी की जा रही है, जिसे वे दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। वहीं संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए अपने स्वास्थ्य को इस हद तक दांव पर लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है। इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अनशन समाप्त करने की अपील की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनकारी फिलहाल अपनी मांगों पर किसी ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन अब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण भी चर्चा का विषय बन गया है। छात्र संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे मामलों में नियमित चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक होती है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।   फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी प्रकार की बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

    भोजशाला-कमाल मौला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज की अंतरिम अनुमति दी

      युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026 मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को अंतिम निर्णय आने तक प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच विवादित परिसर के निकट स्थित एक अलग खुले स्थान पर नमाज अदा करने की अनुमति दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम है और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रखते हुए यह अंतरिम व्यवस्था लागू की जा रही है। साथ ही मामले को आगे सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले के आधार पर विवादित परिसर में किसी भी प्रकार का स्थायी परिवर्तन न्यायालय की अनुमति के बिना लागू न किया जाए। अदालत ने संकेत दिया कि यथास्थिति बनाए रखना फिलहाल आवश्यक है। यह विवाद उस समय और गहरा गया था जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को अपने फैसले में कहा था कि विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप हिंदू मंदिर का है और इसे देवी सरस्वती को समर्पित भोजशाला माना जाएगा। इसी निर्णय में वर्ष 2003 के उस प्रशासनिक आदेश को भी निरस्त कर दिया गया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि मांग सकता है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों और उपलब्ध दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह स्थल प्राचीन काल में संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और यहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित था। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने अत्यंत विवादित तथ्यों पर बिना पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों की विस्तृत जांच किए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को अचानक समाप्त करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उनका कहना था कि संबंधित मामला पहले से दीवानी अदालत में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट को रिट याचिका पर इस प्रकार का निर्णय नहीं देना चाहिए था। वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंहवी ने भी अदालत में कहा कि भारत का इतिहास अनेक परतों वाला है और यदि प्रत्येक ऐतिहासिक दावे के आधार पर वर्तमान धार्मिक व्यवस्थाओं को बदला जाने लगे तो देश में अनेक नए विवाद खड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में स्पष्ट किया था कि उसका फैसला केवल उसी विवाद तक सीमित रहेगा और उसे अन्य मामलों में मिसाल के रूप में नहीं अपनाया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और न्यायालय को प्रत्येक टिप्पणी तथा आदेश बेहद सावधानी के साथ देना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम सुनवाई से पहले दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित अंतरिम व्यवस्था आवश्यक है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई व्यवस्थाएं लागू हो चुकी हैं और इस समय पूर्व स्थिति बहाल करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। उन्होंने अदालत से मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव से बचने का आग्रह किया। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पिछले लगभग तीन दशकों से दोनों समुदायों के बीच आपसी सहमति के आधार पर परिसर के उपयोग की व्यवस्था चली आ रही थी। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में पूर्व में सहमति दस्तावेज भी मौजूद है और दीवानी मुकदमा लंबित होने के बावजूद हाईकोर्ट द्वारा रिट याचिका स्वीकार करना कानूनी रूप से उचित नहीं था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से पूछा कि क्या विवादित परिसर के निकट कोई सार्वजनिक स्थान उपलब्ध है जहां अंतरिम अवधि में मुस्लिम समुदाय शुक्रवार की नमाज अदा कर सके। इस पर दोनों पक्षों ने ऐसी व्यवस्था पर सहमति जताई। इसके बाद अदालत ने परिसर के निकट खुले स्थान पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज की अनुमति देने का आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान एक अन्य मुद्दा भी उठा, जिसमें हिंदू पक्ष ने विदेश में रखी देवी सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग का उल्लेख किया। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह ऐसा कोई निर्देश नहीं देगा जिससे यह माना जाए कि केंद्र सरकार पर विदेशों में मौजूद सभी भारतीय प्राचीन प्रतिमाओं और कलाकृतियों को वापस लाने का कानूनी दायित्व तत्काल लागू हो गया है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी भविष्य में अनावश्यक कानूनी विवाद उत्पन्न कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश फिलहाल दोनों पक्षों के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए शांति और संतुलन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। मामले की अंतिम सुनवाई आगामी दिनों में नामित पीठ के समक्ष होगी, जहां हाईकोर्ट के फैसले की वैधानिकता और विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप सहित सभी कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।    

    पीओके में प्रदर्शनों पर भारत का सख्त संदेश, पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार

      युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026 पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि पीओके में मौजूदा हालात पाकिस्तान की वर्षों पुरानी दमनकारी नीतियों, प्रशासनिक शोषण और स्थानीय लोगों के मौलिक अधिकारों के लगातार उल्लंघन का परिणाम हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन घटनाओं के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं हैं, बल्कि यह दशकों से जारी आर्थिक उपेक्षा, राजनीतिक दमन और नागरिक अधिकारों के हनन का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए जिस तरह की कार्रवाई की गई है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार महिलाओं, बच्चों और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की गई, इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया तथा कई स्थानों पर घातक बल प्रयोग की भी खबरें सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है। भारत ने कहा कि ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चुप नहीं रहना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि वैश्विक संस्थाएं और मानवाधिकार संगठन पीओके में सामने आ रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देंगे तथा पाकिस्तान से जवाब मांगेंगे। रिपोर्टों के अनुसार पीओके में चल रहे आंदोलन की प्रमुख वजह आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई है। प्रदर्शनकारी सरकार से गेहूं के आटे, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में बसाए गए प्रवासियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को बरकरार रखने वाले न्यायालय के फैसले का भी विरोध किया जा रहा है। इसी प्रकार के प्रदर्शन पिछले वर्ष भी देखने को मिले थे। हालिया विरोध प्रदर्शनों को उस समय और गति मिली जब पाकिस्तान सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया। इस कार्रवाई के बाद संगठन के नेताओं और समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। इसी बीच, JAAC के नेता सरदार अमन खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिसमें उन्होंने भारत से सहायता की अपील करते हुए राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का उल्लेख किया। हालांकि, संबंधित वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी प्रामाणिकता स्पष्ट नहीं है। पीओके के बाहर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जा रही है। अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी, मैरीलैंड और वर्जीनिया में जम्मू-कश्मीर समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन कर क्षेत्र में कथित मानवीय संकट पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की। भारत का कहना है कि पीओके में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है और वहां की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और आवश्यक सेवाओं में बाधा जैसी घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं मानी जा सकतीं। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन पीओके की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।    

    वियतनाम नाव हादसा: हैदराबाद लौटे भारतीय पर्यटकों ने सुनाई दर्दनाक दास्तान, बोले- 'हमने CPR देने की कोशिश की, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी

      Yugcharan News / 14 जुलाई 2026 हैदराबाद: वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे से बचकर लौटे भारतीय पर्यटकों ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि हादसे के बाद उन्होंने कई लोगों की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी से निकाले गए कई यात्रियों को किनारे लाकर सीपीआर (CPR) दिया गया, मगर उन्हें बचाया नहीं जा सका। रविवार रात वियतनाम से लौटे कई भारतीय नागरिक हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। इनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और अन्य राज्यों के पर्यटक शामिल थे, जो हादसे के बाद वहां फंस गए थे। अपने परिजनों के लौटने का इंतजार कर रहे परिवारों की आंखों में राहत के साथ-साथ हादसे की यादों का दर्द भी साफ दिखाई दे रहा था। "हमने पूरी कोशिश की" हादसे के प्रत्यक्षदर्शी महिपाल सांघवी ने बताया कि बचाव दल द्वारा कई लोगों को समुद्र से निकालकर किनारे लाया गया था। वहां मौजूद अन्य पर्यटकों ने मिलकर उन्हें सीपीआर देने और होश में लाने की कोशिश की, लेकिन अधिकांश लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया और कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। परिवारों ने राहत की सांस ली हैदराबाद एयरपोर्ट पर कई परिवार अपने रिश्तेदारों का घंटों से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही फ्लाइट पहुंची, परिजनों ने उन्हें गले लगाकर राहत की सांस ली। हालांकि लौटे हुए पर्यटकों के चेहरों पर हादसे का गहरा सदमा साफ दिखाई दे रहा था। कई भारतीयों की गई जान इस नाव दुर्घटना में कई भारतीय पर्यटकों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए। हादसे के बाद भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। मृतकों के पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। जांच जारी स्थानीय प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के पीछे खराब मौसम, तेज लहरें या तकनीकी कारण हो सकते हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। भारतीय अधिकारियों ने भी प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। वहीं, इस घटना ने विदेश यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे से लौटे यात्रियों का कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई लोगों को जिंदगी और मौत से जूझते देखा। यह अनुभव उनके जीवन की सबसे दर्दनाक याद बन गया है। (नोट: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। जांच पूरी होने तक तथ्यों में बदलाव संभव है।)    

    अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज: अमेरिकी हवाई हमले जारी, खाड़ी देशों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई, हॉर्मुज़ में बढ़ा तनाव

    युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026 पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष लगातार तीसरे दिन भी जारी है। सोमवार देर रात अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए, जबकि इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई स्थानों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए तेल टैंकरों, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों में मौजूद सैन्य परिसंपत्तियों को निशाना बनाया। बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार सोमवार रात शुरू हुआ सैन्य अभियान लगभग पांच घंटे तक चला। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक समुद्री यातायात पर हमलों के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, हमलों के दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा द्वीप और बंदर अब्बास सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने भी दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर विस्फोटों की पुष्टि की है। बंदर अब्बास, किश द्वीप, क़ेश्म द्वीप और बुशेहर प्रांत के कई इलाकों में रातभर धमाकों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। हालांकि ईरान ने दावा किया कि अधिकांश स्थानों पर नुकसान सीमित रहा और कुछ हमलों में कोई जनहानि नहीं हुई। अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों के कई ठिकानों को निशाना बनाया। संयुक्त अरब अमीरात ने पुष्टि की कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे उसके दो तेल टैंकर ईरानी क्रूज़ मिसाइलों की चपेट में आ गए। ओमान के जलक्षेत्र में हुए इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई जबकि आठ अन्य चालक दल के सदस्य घायल हो गए। दोनों जहाजों में आग लग गई थी, लेकिन चालक दल ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और बड़ी दुर्घटना टल गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि जिन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे कथित रूप से प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी ड्रोन हमले करने का दावा किया है। सरकारी प्रसारण माध्यम के अनुसार ड्रोन हमलों का लक्ष्य अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल प्रणाली, ईंधन भंडारण केंद्र, संचार नेटवर्क और गोला-बारूद डिपो थे। बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने अल-जुफैर स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे, हथियार भंडार और अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए। बहरीन में कई बार हवाई हमले के सायरन बजाए गए और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली चार मिसाइलों को मार गिराया। दूसरी ओर ईरान ने दावा किया कि उसका लक्ष्य जॉर्डन नहीं बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे थे। ईरान की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि जॉर्डन की जनता से उसका कोई विरोध नहीं है और कार्रवाई केवल अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के खिलाफ की गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगातार कमजोर कर रहा है, लेकिन यदि ईरान तैयार हो तो कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी भी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए खाड़ी देशों को भी सुरक्षा लागत में योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने ईरान के एक कथित रणनीतिक परमाणु स्थल "पिकऐक्स माउंटेन" को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी। इसके अलावा अमेरिका ने घोषणा की कि ईरान के दक्षिणी समुद्री तट और बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू की जाएगी। यह नाकाबंदी निर्धारित समय के अनुसार प्रभावी होने की बात कही गई है। दूसरी ओर ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर संसद में नया विधेयक पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रणनीतिक सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समुद्री जहाजों की निगरानी करने वाली एजेंसियों के अनुसार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगभग आधी गिरावट आई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार कर रही हैं, जबकि बीमा कंपनियों ने युद्ध जोखिम प्रीमियम भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। भारत सहित अनेक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से पूरा होता है।   फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में बढ़ता है, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

    17वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, बिगड़ी तबीयत; विपक्ष ने जीवन बचाने की अपील की

      युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026 देशभर में परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का आमरण अनशन मंगलवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। चिकित्सकों की निगरानी में होने के बावजूद उनका वजन तेजी से कम हुआ है, जिसके बाद कई विपक्षी नेताओं ने उनसे अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की है। सोनम वांगचुक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में भाग ले रहे हैं। उनका यह अनशन उन छात्रों और युवाओं के समर्थन में है, जो हाल में हुए कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। जानकारी के अनुसार, वांगचुक पिछले 17 दिनों से केवल सीमित मात्रा में तरल पदार्थ लेकर अनशन पर हैं। मौके पर मौजूद चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अब तक उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और उनकी शारीरिक कमजोरी लगातार बढ़ रही है। मंगलवार को उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे मीडिया से बातचीत करने की स्थिति में भी नहीं थे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा संगठन के संस्थापक अभिजीत डिपके ने दावा किया कि वांगचुक को कई बार अनशन समाप्त करने के लिए समझाया गया, लेकिन उन्होंने फिलहाल अपना निर्णय बदलने से इनकार कर दिया है। डिपके के अनुसार, वांगचुक चाहते हैं कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहे और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च की तैयारियां भी जारी रखी जाएं। धरना स्थल पर सोमवार को एक अन्य युवा प्रदर्शनकारी की तबीयत भी बिगड़ गई थी। लंबे समय से उपवास कर रहे उस युवक के बेहोश होने के बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया गया है तथा मेडिकल टीम को लगातार तैनात रखा गया है। इस बीच कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनम वांगचुक का जीवन देश और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपील की कि वे अपना अनशन समाप्त करें ताकि वे भविष्य में भी शिक्षा, पर्यावरण और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अपनी आवाज उठाते रहें। हालांकि आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उधर, शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की ओर से इस ताजा घटनाक्रम पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के बीच असंतोष बढ़ाया है। बड़ी संख्या में छात्र पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, सख्त कानून और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में सोनम वांगचुक जैसे चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता का इस आंदोलन से जुड़ना इसे राष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चा का विषय बना रहा है। सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनकी सामाजिक पहल और शिक्षा मॉडल को देश-विदेश में सराहना मिली है। इसी कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता केवल आंदोलनकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। दूसरी ओर, डॉक्टर लगातार वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं। यदि उनकी स्थिति और गंभीर होती है तो चिकित्सा विशेषज्ञ आगे की आवश्यक सलाह दे सकते हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई संवाद स्थापित होता है या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।    

    हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरानी मिसाइल हमला: दो तेल टैंकर निशाना बने, एक भारतीय नाविक की मौत, कई घायल

      युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026 पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई क्रूज़ मिसाइलों की चपेट में दो अमीराती तेल टैंकर आ गए। इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य चालक दल के सदस्य घायल हुए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले का निशाना बने दोनों तेल टैंकरों के नाम 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' हैं। ये दोनों जहाज़ ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में स्थित हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उन पर मिसाइल हमला किया गया। मंत्रालय ने पुष्टि की कि मृतक भारतीय नागरिक मोम्बासा टैंकर पर कार्यरत चालक दल का सदस्य था। हमले में कई अन्य लोग भी घायल हुए, जिनमें भारतीय नागरिक शामिल होने की जानकारी दी गई है। घायलों का उपचार कराया जा रहा है। हमले के बाद दोनों जहाज़ों में आग लग गई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो गई। हालांकि चालक दल के सदस्यों ने आपातकालीन सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आग पर काबू पा लिया और जहाज़ों को पूरी तरह डूबने या विस्फोट जैसी बड़ी दुर्घटना से बचा लिया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण समुद्री मार्ग पर और अधिक नुकसान टल गया। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी जलमार्ग से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य हमला केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई देखने को मिली है। अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने भी अमेरिकी हितों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाने के संकेत दिए हैं। इसी तनाव के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हो चुकी है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपना रही हैं, जबकि कुछ जहाज़ों ने वैकल्पिक समुद्री मार्गों का उपयोग शुरू कर दिया है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। साथ ही समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी और सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता बनी हुई है। भारतीय नाविक की मौत की खबर सामने आने के बाद भारत से जुड़े समुद्री समुदाय में भी चिंता बढ़ गई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में से एक है और हजारों भारतीय नाविक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज़ों पर कार्यरत हैं। पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य तैनात रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का सीधा प्रभाव भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके अलावा बीमा लागत, माल ढुलाई शुल्क और समुद्री परिवहन खर्च भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हमले के बाद कई देशों ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और क्षेत्र में संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखा जाए और किसी भी प्रकार के संघर्ष को बातचीत के माध्यम से हल किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल हमले में घायल चालक दल के सदस्यों का उपचार जारी है और संबंधित समुद्री एजेंसियां जहाज़ों की स्थिति का आकलन कर रही हैं। भारतीय नागरिक की पहचान और उसके परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में संबंधित अधिकारी आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी आने का इंतजार किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर इस बात का संकेत देती है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवनरेखा है। यहां बढ़ता सैन्य तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है और आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।    

    ट्रंप के नए होर्मुज शुल्क ऐलान से वैश्विक बाजारों में हलचल, तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में गिरावट

      Yugcharan News / 14 जुलाई 2026 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेशकों की धारणा पर एक साथ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश गतिविधियों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मंगलवार को एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बाजार पहले बढ़त के साथ खुले, लेकिन जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से जुड़ी खबरें सामने आती गईं, निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनानी शुरू कर दी। परिणामस्वरूप अधिकांश प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जो पिछले कई सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या व्यापारिक बाधा सीधे तेल की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करती है। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों को चिंता है कि यदि होर्मुज मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है, तो परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा। इसी आशंका के चलते तेल बाजार में खरीदारी बढ़ी और कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। यूरोपीय शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। यूरोप का प्रमुख STOXX 600 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुला। सबसे अधिक दबाव ट्रैवल, एयरलाइन और पर्यटन क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर रहा क्योंकि बढ़ती ईंधन लागत इन उद्योगों के परिचालन खर्च को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों ने तेल, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में अपेक्षाकृत अधिक रुचि दिखाई, जबकि उपभोक्ता और यात्रा आधारित कंपनियों में बिकवाली देखी गई। एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। चीन के शेयर बाजारों को जून महीने के मजबूत निर्यात और आयात आंकड़ों से समर्थन मिला। उम्मीद से बेहतर व्यापारिक आंकड़ों के कारण चीनी शेयरों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी क्षेत्र और वैश्विक मांग में सुधार के चलते चीन के व्यापारिक प्रदर्शन ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। दक्षिण कोरिया के बाजार में भी सीमित बढ़त देखने को मिली, जबकि ताइवान के शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई सूचकांक सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ। जापान के वित्त मंत्री द्वारा सरकारी पेंशन निवेश रणनीति की समीक्षा संबंधी संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों की रुचि कुछ क्षेत्रों में बढ़ी। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान दबाव देखा गया था। वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे नैस्डैक सूचकांक पर अधिक दबाव बना। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर केंद्रित है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वैश्विक निवेशकों के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। दूसरी, दुनिया भर की बड़ी कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम। और तीसरी, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता। इन तीनों कारकों के कारण वैश्विक बाजारों में आने वाले दिनों में अस्थिरता बनी रह सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा हाल ही में दिए गए बयान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारी ने संकेत दिया कि यदि महंगाई लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो निकट भविष्य में ब्याज दरों में फिर वृद्धि की जा सकती है। इसके बाद बाजार में जुलाई के अंत में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में दरें बढ़ाए जाने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दो वर्षीय और दस वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जबकि सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई। पारंपरिक रूप से वैश्विक संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इस बार भी निवेशकों ने इसी रणनीति का पालन किया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हालांकि अपेक्षाकृत सीमित प्रतिक्रिया देखने को मिली। बिटकॉइन में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय क्रिप्टो बाजार पर भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रमों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है या समुद्री व्यापार में और बाधाएं आती हैं, तो तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, विमान ईंधन और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप महंगाई पर भी अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के संकेतों और पश्चिम एशिया की सैन्य स्थिति पर बनी रहेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजारों में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन किसी भी नई सैन्य कार्रवाई या व्यापारिक प्रतिबंध की स्थिति में वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया भर के निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार आने वाली आर्थिक एवं भू-राजनीतिक घटनाओं के आधार पर अपनी अगली दिशा तय करने का इंतजार कर रहे हैं।    

    रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर में 'प्रतिज्ञा' इन्वेस्टिचर सेरेमनी का भव्य आयोजन

    जयपुर। रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर के निर्मला ऑडिटोरियम में विद्यालय की वार्षिक इन्वेस्टिचर सेरेमनी 'प्रतिज्ञा' का गरिमामय एवं भव्य आयोजन किया गया। छात्र नेतृत्व, अनुशासन, सेवा और उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस समारोह में नवगठित स्टूडेंट काउंसिल के सदस्यों को पद एवं दायित्वों की शपथ दिलाई गई। समारोह में सीनियर विंग के हेड बॉय यश अग्रवाल एवं हेड गर्ल उर्मी जोरवाल ने शपथ ग्रहण की। जूनियर विंग में जूनियर हेड बॉय सार्थक जैन तथा जूनियर हेड गर्ल ध्वनि शर्मा ने अपने दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन का संकल्प लिया। वहीं प्री-प्राइमरी विंग के हेड बॉय दिव्यांश गिरि गोस्वामी एवं हेड गर्ल नव्या शर्मा ने भी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही विद्यालय के निष्ठा, प्रगति, प्रेरणा एवं संस्कार हाउस के कैप्टन, वाइस कैप्टन तथा विभिन्न क्लबों के छात्र पदाधिकारियों को बैज प्रदान कर उनके दायित्व सौंपे गए। नव-निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों ने विद्यालय की गरिमा, अनुशासन और मूल्यों को बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करने की प्रतिज्ञा ली। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यालय की नवाचारपूर्ण पहल 'TOBO Comics', विद्यालय की विशिष्ट कार्य-संस्कृति एवं मूल्यों पर आधारित 'Rawat Way' तथा RIDS Dossier का लोकार्पण रहा। इस अवसर पर यह गौरवपूर्ण उपलब्धि भी साझा की गई कि विद्यालय को ब्रिटिश काउंसिल द्वारा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मान्यता दूसरी बार लगातार तीन वर्षों के लिए प्रदान की गई है, जो विद्यालय की वैश्विक शिक्षण दृष्टि, शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। समारोह के दौरान विद्यालय की नवनिर्मित प्री-प्राइमरी विंग तथा विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए कक्षा 3 एवं 4 के नवीन कक्षों का भी उद्घाटन किया गया। रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन बी. एस. रावत ने नवगठित स्टूडेंट काउंसिल के सदस्यों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं देते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में विकसित नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना ही भविष्य में एक सशक्त एवं सफल व्यक्तित्व के निर्माण की नींव रखती है। रावत एजुकेशनल ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत ने नवगठित स्टूडेंट काउंसिल के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नेतृत्व केवल एक पद नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, जिम्मेदारी और दूसरों को प्रेरित करने का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से विद्यालय के मूल्यों को आत्मसात करते हुए उत्कृष्ट नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया। विद्यालय की प्राचार्या मैत्रेयी शुक्ला एवं एकेडमिक हेड राजेश कंथारिया ने सभी चयनित छात्र प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए उनके सफल एवं प्रेरणादायी कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि रावत एजुकेशनल ग्रुप का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेल, कला, नेतृत्व, नवाचार एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के अवसर प्रदान कर उनका सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास करना है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ समूह शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक गरिमामय एवं यादगार बना दिया।