Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Long Island City

    -0.79°C

    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    मुस्कान: जीवन का सबसे सुंदर आभूषण

    'होंठों पर सजी मुस्कान जब मन से निकलती है, तो थकी हुई राहों में भी उम्मीदें खिलती हैं।' जीवन में अनेक ऐसे क्षण आते हैं जब परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेती हैं। कभी असफलता निराश करती है, कभी संघर्ष थका देता है और कभी भविष्य की अनिश्चितता मन को विचलित कर देती है। ऐसे समय में यदि कोई चीज़ हमें भीतर से संबल देती है, तो वह है हमारी मुस्कान। मुस्कान केवल चेहरे की सजावट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का प्रतीक है। मुस्कान वह शक्ति है जो अंधेरे में भी प्रकाश की किरण खोज लेती है। यह मन के बोझ को हल्का करती है और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देती है। जब हम मुस्कुराते हैं, तो केवल अपना ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों का वातावरण भी सकारात्मक बना देते हैं। 'मुस्कानों की धूप बिखेरो, चाहे मौसम कैसा हो, उम्मीदों के दीप जलाओ, चाहे अँधेरा कितना हो।' आज के प्रतिस्पर्धी युग में युवा वर्ग अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नौकरी की चिंता, कैरियर का दबाव, सफलता की दौड़ और अपेक्षाओं का भार उन्हें मानसिक रूप से थका देता है। ऐसे में मुस्कान एक औषधि की तरह काम करती है, जो मन को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करती है। युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि उनके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच है, तो वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं। जीवन में असफलताएँ आना स्वाभाविक है, लेकिन हर असफलता के बाद मुस्कुराकर फिर से उठ खड़ा होना ही वास्तविक सफलता की पहचान है। 'गिरकर संभलना सीखो, हारकर चलना सीखो, मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो मुस्कुराकर जीना सीखो।' आज सोशल मीडिया की चमक-दमक में कई युवा दूसरों की सफलता देखकर स्वयं को कमतर आँकने लगते हैं। उन्हें यह समझना होगा कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। अपनी मेहनत पर विश्वास रखिए, अपने सपनों को जीवित रखिए और चेहरे पर मुस्कान बनाए रखिए। यही मुस्कान आपके संघर्षों को शक्ति और सपनों को पंख देगी। मुस्कान- रिश्तों की मिठास एक सच्ची मुस्कान रिश्तों में प्रेम और विश्वास का संचार करती है। कई बार जो बात लंबे शब्द नहीं कह पाते, वह एक मुस्कान सहजता से कह देती है। परिवार, मित्रों और समाज के बीच मुस्कुराता हुआ व्यक्ति सदैव प्रिय होता है, क्योंकि उसकी उपस्थिति ही सकारात्मकता का संदेश देती है। 'शब्दों से पहले जो दिल तक पहुँच जाए, वह मुस्कान ही तो है जो रिश्तों को महका जाए।' सफलता केवल उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि संघर्षों के बीच संतुलित और प्रसन्न बने रहने की कला भी है। मुस्कुराने वाला व्यक्ति चुनौतियों से घबराता नहीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदलने का प्रयास करता है। यही दृष्टिकोण उसे दूसरों से अलग बनाता है। याद रखिए, जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होंगी, लेकिन हमारा दृष्टिकोण हमेशा हमारे हाथ में होता है। यदि हम हर परिस्थिति का सामना मुस्कान के साथ करें, तो कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। सार रूप में हम कह सकते हैं कि मुस्कान जीवन का सबसे सरल, सुंदर और मूल्यवान उपहार है। यह न केवल हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, बल्कि हमारे भीतर आशा, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार भी करती है। विशेषकर युवाओं के लिए यह सफलता की यात्रा का सबसे मजबूत साथी है। 'रखो मुस्कान को अपना हमसफ़र हर हाल में, यही रोशनी बन जाएगी जीवन के हर सवाल में। सपनों की उड़ान को कभी थमने मत देना, चेहरे की मुस्कान को कभी कम होने मत देना।' मुस्कुराइए, क्योंकि आपकी मुस्कान केवल आपके चेहरे की नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व, आपके साहस और आपके उज्ज्वल भविष्य की पहचान है। रेनू शब्दमुखर जयपुर  

    जल: सभ्यता, संस्कृति और वेदों का वैज्ञानिक दर्शन

      जल: सभ्यता, संस्कृति और वेदों का वैज्ञानिक दर्शन जल पृथ्वी पर जीवन का सबसे मूलभूत आधार है। भूगर्भीय और जैविक दृष्टि से देखें, तो जल ही वह माध्यम है जिसने जीवन को पनपने और विकसित होने का अवसर दिया। हालांकि, आज के आधुनिक युग में हम जल को केवल एक संसाधन (Resource) के रूप में देखते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और विशेषकर वेदों में इसे एक 'जीवंत तत्व' और 'दिव्य शक्ति' के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। वेद मानव इतिहास के वे अमूल्य ग्रंथ हैं, जो न केवल आध्यात्मिकता का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जल प्रबंधन का सूक्ष्म वैज्ञानिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं। एक वैज्ञानिक के रूप में, जब हम वेदों की ऋचाओं का विश्लेषण करते हैं, तो हम पाते हैं कि उनमें वर्णित जल चक्र, मौसम विज्ञान और जल संचयन के सिद्धांत आज के जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के दौर में अत्यंत प्रासंगिक हैं। वैदिक जल विज्ञान: एक वैज्ञानिक विश्लेषण आधुनिक विज्ञान आज 'हाइड्रोलॉजिकल साइकिल' (Hydrological Cycle) की जिस जटिल प्रक्रिया को पढ़ता है, उसका उल्लेख हजारों वर्ष पूर्व वेदों की ऋचाओं में अत्यंत स्पष्टता के साथ किया गया है। ऋग्वेद में जल को 'आपः' कहा गया है, जिसका अर्थ है वह जो गतिशील है और जीवन देने वाला है। वेदों के अनुसार, जल चक्र का संचालन सूर्य की ऊर्जा से होता है। ऋग्वेद की ऋचाओं में स्पष्ट वर्णन है कि कैसे सूर्य की ऊष्मा से जल का वाष्पीकरण (Evaporation) होता है। ये सूक्ष्म जलकण हवा के साथ मिलकर वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर बादलों का निर्माण करते हैं, जो अंततः वर्षा के रूप में पृथ्वी पर पुन: अवतरित होते हैं। यह प्रक्रिया एक बंद लूप (Closed-loop system) के समान है, जिसे आज हम आधुनिक विज्ञान में 'वाटर रिसाइकिलिंग' कहते हैं। सामवेद की ऋचाएं यह भी बताती हैं कि जल के इस चक्र का सीधा संबंध सूर्य की स्थिति और ऋतुओं के परिवर्तन से है, जो आधुनिक मौसम विज्ञान का आधार है। वेदों में सतही जल (Surface Water) के साथ-साथ 'भूजल' (Groundwater) के महत्व को 'अवनि के गर्भ में छिपे अमृत' के रूप में पहचाना गया है, जो यह दर्शाता है कि हमारे ऋषि-मुनि जलभृतों (Aquifers) के महत्व से पूर्णतः परिचित थे। जल: ऊर्जा, चेतना और मनोविज्ञान का संबंध विज्ञान की दृष्टि से जल के अणुओं की संरचना (Molecular Structure) बहुत ही अनूठी है। वेदों में जल को शुद्धि का माध्यम क्यों माना गया है? इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण है। 1. ध्यान और एकाग्रता: प्राचीन ऋषि जल के स्रोतों के निकट ध्यान करते थे। आधुनिक मनोविज्ञान के शोध बताते हैं कि बहते हुए जल की ध्वनि (White Noise) मस्तिष्क में 'अल्फा वेव्स' (Alpha waves) को बढ़ाती है, जो मानसिक शांति और रचनात्मकता के लिए उत्तरदायी है। 2. यज्ञ और प्रोक्षण: यज्ञों में जल का उपयोग केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यज्ञ के दौरान अग्नि से उत्पन्न ऊर्जा के साथ जल का संस्पर्श वातावरण के सूक्ष्म कणों (Particles) को आवेशित (Ionized) कर देता है, जिससे एक शुद्ध और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। जल, सभ्यता और जैव-विविधता का इतिहास मानव सभ्यता का इतिहास नदियों के किनारे ही लिखा गया है। चाहे सिंधु-सरस्वती सभ्यता हो या नील नदी की घाटी, जल ही विकास का प्रमुख चालक रहा है। एक जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में, मैं यह स्पष्ट कर सकता हूँ कि नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में जैव विविधता का घनत्व अन्य क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक होता है। वेद हमें सिखाते हैं कि नदियाँ केवल परिवहन या सिंचाई का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जीवित तंत्र (Living Systems) हैं। यदि नदी के प्रवाह को अवरुद्ध किया जाता है या उसमें प्रदूषण मिलाया जाता है, तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र चरमरा जाता है। वैदिक साहित्य में नदियों को 'माता' कहना इसी पारिस्थितिक संतुलन के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को दर्शाता है। आधुनिक जल संकट: चुनौतियों का समाधान आज के दौर में हम औद्योगीकरण और अनियंत्रित शहरीकरण की दौड़ में जल के प्राकृतिक संतुलन को भूल चुके हैं। जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने वर्षा के पैटर्न को अनिश्चित बना दिया है। ऐसे में वेदों के 'सतत विकास' (Sustainable Development) के सिद्धांतों को समझना अनिवार्य हो गया है: • वर्षा जल संचयन: वेदों में जल को संग्रहित करने की परंपरा का वर्णन मिलता है। आज के कंक्रीट के जंगलों में, हमें रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल के स्तर को पुनः रिचार्ज करना होगा, जो वैदिक संस्कृति में कुओं और बावड़ियों के माध्यम से किया जाता था। • उपभोग का संयम: वेदों का संदेश स्पष्ट है—'प्रकृति से उतना ही लो जितना आवश्यक हो।' वर्तमान जल संकट का मूल कारण 'अति-उपभोग' है। हमें जल को एक अमूल्य धरोहर मानते हुए इसके दुरुपयोग को रोकना होगा। एक वैज्ञानिक अपील: जड़ों की ओर लौटना वेदों का ज्ञान केवल अतीत की पांडुलिपियों तक सीमित नहीं है; यह एक जीवंत दर्शन है। आधुनिक समय की पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान हमें अपनी वैज्ञानिक विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय में मिलता है। एक वैज्ञानिक के नाते, मेरा यह मानना है कि यदि हम अपनी जल प्रबंधन नीतियों में वेदों के 'पारिस्थितिक संतुलन' (Ecological Balance) के सिद्धांतों को जोड़ें, तो हम जल संकट जैसी आपदाओं से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। जल संरक्षण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत और सामाजिक उत्तरदायित्व है। हमें नदियों के पुनर्जीवन, औद्योगिक कचरे के प्रबंधन और जल संचयन को एक जन-आंदोलन बनाना होगा। जिस तरह हमारे पूर्वजों ने जल के प्रत्येक बूंद को देवता माना, उसी तरह हमें इसे 'जीवन का रक्त' मानकर संरक्षित करना होगा। जल ही सभ्यता है, जल ही संस्कृति है और जल ही वह आधार है जो हमारे भविष्य के अस्तित्व को सुरक्षित रखता है। आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम अपने जल स्रोतों की शुचिता बनाए रखेंगे और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का मार्ग अपनाएंगे। लेखक का संपर्क विवरण: हार्दिक पाठक आचार्य, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जेईसीआरसी विश्वविद्यालय, जयपुर  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर एवं फीडिंग हैंड्स एनजीओ द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों को शैक्षणिक खिलौना किटों का वितरण

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर ने फीडिंग हैंड्स एनजीओ के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए शैक्षणिक खिलौना किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य खेल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना तथा छोटे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना था, जिससे उनके प्रारंभिक शिक्षा स्तर को सुदृढ़ किया जा सके।   इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों तुतोली, फतेहपुरा, कुम्हारियावास, वाटिका, बाजदोली, टेटारिया सहित आसपास के कई गांवों के आंगनबाड़ी केन्द्रों को लाभान्वित किया गया। प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को 20 सेट शैक्षणिक खिलौनों से युक्त एक विशेष खिलौना किट प्रदान की गई, जो बच्चों के बौद्धिक विकास, रचनात्मक सोच तथा खेल-खेल में सीखने की क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।   यह वितरण कार्यक्रम यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर परिसर में आयोजित किया गया, जहां विभिन्न गांवों से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने केन्द्रों की ओर से शैक्षणिक खिलौना किट प्राप्त की। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करना तथा गतिविधि-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।   कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि जैन, अध्यक्ष, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर रहीं। डॉ. रश्मि जैन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा चरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक खिलौने बच्चों में रचनात्मकता, जिज्ञासा तथा समग्र विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।   इस अवसर पर डॉ. अंशु सुराना, प्रो-चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के समग्र विकास में खेल-आधारित शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने फीडिंग हैंड्स एनजीओ एवं विश्वविद्यालय की इस पहल को सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षण अवसर प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी शिक्षा एवं सामुदायिक विकास से जुड़े ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।   इस अवसर पर उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर और फीडिंग हैंड्स एनजीओ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन शैक्षणिक संसाधनों से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अत्यधिक लाभ मिलेगा।   फीडिंग हैंड्स एनजीओ पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर सामाजिक कल्याण एवं सामुदायिक विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थाओं ने भविष्य में भी ग्रामीण समुदायों के शैक्षिक एवं सामाजिक विकास के लिए इसी प्रकार की जनहितकारी पहलें जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।  

    विश्व पर्यावरण दिवस पर रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (RCERT), सीतापुरा, जयपुर में हुआ वृक्षारोपण, विद्यार्थियों ने लिया हरित भविष्य का संकल्प

    जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रीजनल कॉलेज फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (RCERT), सीतापुरा, जयपुर में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत के नेतृत्व में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।   इस अवसर पर उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा, इंजी. अनिल बोयल, इंजी. महेंद्र कुमार वर्मा (प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी), इंजी. चेतन कुमार, डॉ. सुमित शर्मा, इंजी. महेंद्र सैनी, इंजी. अश्विनी, इंजी. ओंकार बुनकर, राजेश कुमार बैरवा, इंजी. रूपेंद्र कुमार, , अशोक मौर्य, रामप्रसाद चौधरी तथा हजारी प्रसाद सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। निदेशक डॉ. अशोक सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर हमारी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी इंजी. महेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण ही स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है तथा प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए।   कॉलेज के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा वृक्षारोपण के माध्यम से ही हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य प्रदान कर सकते हैं। वहीं वाइस चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।   कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ ली। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने हरित, स्वच्छ एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।  

    जिगर के टुकड़े के लिए मां का संघर्ष... कैंसर से पति को खोया, टेलरिंग कर बेटे पढ़ाया, अब जिगर बनेगा गांव का पहला आईआईटीयन

    कॅरियर सिटी कोटा से सफलता की एक ओर कहानी कॅरियर एवं केयर सिटी कोटा का एक बार फिर सामाजिक बदलाव में योगदान सामने आया है। कहानी ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा की है। एक मां ने अपने जिगर के टुकड़े के लिए हर संघर्ष किया और बेटे का कॅरियर बनाकर गांव और परिवार का नाम रोशन किया है। कोटा में दो साल रहकर कॅरियर बनाने वाले एलन स्टूडेंट जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक 17783 और ओबीसी-एनसीएल कैटेगिरी रैंक 4597 हासिल की है। जेईई-मेन में 98.6143 पर्सेन्टाइल स्कोर किया। इससे पूर्व 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।   जिगर नायक की कहानी संघर्ष, त्याग और सपनों की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। जिगर और उसकी मां अपूर्वा ने आर्थिक तंगी, पिता का साया उठ जाना और जिम्मेदारियों के बोझ के बावजूद जिगर ने हार नहीं मानी। अपने सपनों को साकार करने के लिए वह कोटा आया और एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया। यहां दो साल कड़ी मेहनत करने के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली और जिगर अब अपने गांव और परिवार का पहला आईआईटीयन बनने जा रहा है।   जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक उसके पिता को कैंसर से ग्रस्त होने का पता चला। काफी इलाज कराया जिसमें परिवार की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। वर्ष 2020 में जिगर के पिता का निधन हो गया। घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और पिता के जाने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया। लेकिन मां अपूर्वा नायक ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने तय कर लिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, बेटे के सपने को टूटने नहीं देंगी।   ───   परिवार के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी   जिगर की मां अपूर्वा ने परिवार संभालने के साथ-साथ बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई। उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की। दिनभर सिलाई मशीन पर मेहनत कर वे घर का खर्च चलातीं और जिगर की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़तीं। कई बार आर्थिक परेशानियां इतनी बढ़ जाती थीं कि घर चलाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन मां ने कभी बेटे को इसका एहसास नहीं होने दिया।   ───   सोशल मीडिया से मिली जेईई की जानकारी   जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे जेईई परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और जेईई एग्जाम से जुड़ी वीडियो देखने के बाद उसे पहली बार इस परीक्षा के बारे में पता चला। तभी उसके मन में आईआईटीयन बनने का सपना जागा। उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलकर रहेगा। इसके बाद जिगर कोटा आया और पिछले दो वर्षों तक एलन में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में जेईई की तैयारी की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे 11वीं और 12वीं कक्षा में फीस में छूट भी मिली।   ───   परिवार के भविष्य के लिए मेहनत   जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो फिलहाल सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जिगर ने बताया कि मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के भविष्य के लिए मेहनत कर रहा है। मैं चाहता हूं कि आईआईटी पूरी करने के बाद मेरी मां को संघर्ष न करना पड़े और छोटे भाई की पढ़ाई भी बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके। यह समाज को दिशा देने वाला प्रयास एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा साबित होती हैं, जिनमें विद्यार्थी के साथ-साथ अभिभावकों का भी संघर्ष साथ है। ऐसे संदेश जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं तो सामाजिक बदलाव के प्रयास सामने आते हैं। हम चाहते हैं कि पढ़ाई में किसी के भी कोई बाधा नहीं आए और प्रतिभावान विद्यार्थियों को अपनी योग्यता के अनुसार उचित स्थान मिले।  

    एलन ने एजुकेशन में अनुशासन और गुणवत्ता के नए मापदंड स्थापित किएः प्रो.राम शिंदे

    महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष प्रो.राम शिंदे एलन विजिट पर कोटा आए - दिनभर स्टूडेंट्स, पेरेन्ट्स और फैकल्टीज के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की कोटा. महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष प्रो.राम शिंदे रविवार को एक दिवसीय यात्रा पर एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा पहुंचे। यहां दिनभर विद्यार्थियों, अभिभावकों व फैकल्टीज के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान एलन के निदेशक राजेश माहेश्वरी व नवीन माहेश्वरी साथ रहे। कार्यक्रमों की शुरुआत इन्द्रविहार स्थित एलन समर्थ कैम्पस के सद्भाव परिसर में छात्राओं से संवाद से हुई। इसके बाद एलन संकल्प कैम्पस में निदेशक राजेश माहेश्वरी व नवीन माहेश्वरी द्वारा प्रो.शिंदे का मराठी पगड़ी और उपर्णा पहनाकर अभिनन्दन किया गया। इस दौरान सीनियर फैकल्टीज के साथ चर्चा हुई और अनुभव साझा किए। यहां से कुन्हाड़ी स्थित लैंडमार्क सिटी में एलन कैम्पस की विजिट की। यहां विद्यार्थियों से अनुभव जाने और उनके साथ भोजन भी किया। शाम को शहर के रिवर फ्रंट और सिटी पार्क की विजिट करने के बाद कोटा में पढ़ रहे महाराष्ट्र के विद्यार्थियों से मिले।   प्रो.शिंदे ने कहा कि एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के संस्कार से सफलता तक के सफर से प्रभावित हूं। 38 साल में एक छोटे शहर से शुरू होकर आज देशभर में लाखों विद्यार्थियों का कॅरियर बनाना बड़ी बात है। यहां जो व्यवस्थाएं देखी वो बहुत बेहतर हैं, विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन के लिए जो चाहिए वो सब यहां दिया जा रहा है। महाराष्ट्र में भी शिक्षा में गुणवत्ता के प्रयास में इस तरह के इनपुट शामिल किए जाएंगे। सबसे बेहतर बात यह है कि एलन ने शिक्षा में अनुशासन और गुणवत्ता दोनों को बनाए रखा है। किसी भी काम में यदि डिसीप्लीन और स्टैंडर्ड यदि हैं तो उसमें आगे बढ़ना तय है। छात्राओं और फैकल्टीज के साथ संवाद में प्रो.राम शिंदे ने कहा कि असफलता ही सफलता का रास्ता दिखाती है। मैंने अपना कॅरियर शिक्षक के रूप में शुरू किया। इसके बाद फिर सक्रिय राजनीति में आया। संघर्ष किया, बहुत बार असफल भी हुआ। दो चुनाव हारे लेकिन हौसला नहीं खोया, लगातार लोगों की सेवा के लिए प्रयास करता रहा। राजनीति में हूं लेकिन झूठ नहीं बोलता, चाहे कितनी ही बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाए। आपको भी अपने सत्य पर अडिग रहते हुए लक्ष्य के लिए मेहनत करनी चाहिए। देश के अलग-अलग कोनों से कोटा में आए हैं तो यहां अपने परिजनों का गौरव बनकर बताएं। उन्होंने कहा कि अनुशासन कभी नहीं छोड़ना। सुबह जल्दी उठें, कुछ समय अपने शरीर के लिए दें। स्वस्थ रहते हुए अपनी पढ़ाई करें। यहां शिक्षा के साथ संस्कार मिलते हैं, कितनी अच्छी बात है। यहां से डाॅक्टर इंजीनियर तो बनें लेकिन अच्छे इंसान बनकर निकलें।  

    अग्रवाल पी.जी. महाविद्यालय में 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में नैतिकता' विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित

    शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में हुआ आयोजन, विजेता छात्र-छात्राएं हुए पुरस्कृत ​ प्रतिभागियों को भेंट की गई आचार्य श्रीराम शर्मा जी की प्रेरणादायक पुस्तकें ​जयपुर। अग्रवाल पी.जी. महाविद्यालय, जयपुर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक उत्तरदायित्व को रेखांकित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज, हरिद्वार के तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में "कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नैतिकता (Ethics in Artificial Intelligence)" विषय पर एक भव्य प्रश्नोत्तरी (Quiz) प्रतियोगिता का सफल आयोजन संपन्न हुआ। ​शांतिकुंज के प्रति-कुलपति के ऐतिहासिक उद्बोधन पर आधारित थी प्रतियोगिता ​यह विशेष प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज, हरिद्वार के प्रति-कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी द्वारा फरवरी 2026 में भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित 'ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट' के दौरान दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन पर आधारित थी। प्रतियोगिता के सवाल डॉ. पण्ड्या के "AI for Democracy" एवं "Ethics in Artificial Intelligence" विषयों पर दिए गए व्याख्यान से प्रेरित थे, जिसने विद्यार्थियों को तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया। ​विजेता छात्र-छात्राएं सम्मानित ​प्रतियोगिता में महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य पड़ाव पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवेन्दा द्वारा पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे: ​प्रथम स्थान: ज़ोया खान ​द्वितीय स्थान: विकास साहू ​तृतीय स्थान (संयुक्त रूप से): मुस्कान जांगिड़ एवं कोमल टिंकर ​ व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें और युग साहित्य भेंट ​सकारात्मक बदलाव के संकल्प के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा जी की व्यक्तित्व-विकास विषयक प्रेरणादायक पुस्तकें भेंट की गईं। ​कार्यक्रम के दौरान गायत्री परिवार के कार्यकर्ता डॉ. संदीप सिंह चौहान ने गायत्री परिवार की ओर से प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवेन्दा का आत्मीय अभिनंदन किया तथा उन्हें स्मृति स्वरूप युग साहित्य भेंट कर आभार व्यक्त किया। ​ शांतिकुंज भ्रमण के लिए मिला आमंत्रण ​कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य एवं समस्त छात्र-छात्राओं को देव संस्कृति विश्वविद्यालय और शांतिकुंज, हरिद्वार के शैक्षणिक व आध्यात्मिक भ्रमण (Educational Tour) के लिए ससम्मान आमंत्रित किया गया, ताकि विद्यार्थी व्यावहारिक रूप से भी इन जीवन मूल्यों को आत्मसात कर सकें।

    पीआरसीआई जयपुर चैप्टर की मासिक बैठक का सफल आयोजन

    - यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (वाईसीसी) के माध्यम से छात्र कल्याण और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विस्तार विस्तृत चर्चा जयपुर: पब्लिक रिलेशन्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीआरसीआई) जयपुर चैप्टर ने आज जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक सफल बैठक का आयोजन किया। अपने गठन के बाद दूसरे महीने के पूरा होने के उपलक्ष्य में, सदस्यों ने पिछले महीने की उपलब्धियों एवं पीआरसीआई के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की । इस अवसर पर नए सदस्यों का स्वागत उनका अभिनन्दन कर किया गया। बैठक की अध्यक्षता पीआरसीआई जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष, सोमेंद्र हर्ष ने की, जबकि सचिव, सनी कुलश्रेष्ठ ने कार्यवाही का संचालन किया। प्रमुख उपस्थित लोगों में उपाध्यक्ष, अंशु हर्ष, संयुक्त सचिव, डॉ. राहुल बाबू कोडली, अनंत महंत, नीरज जौहर, यशवीता जैन, आशीष कुमार उधावत, उत्तम सिंह, फाल्गुनी शर्मा, डॉ. राजीव सिंह, लोकेश थाडा, अर्जुन सिंह, पुरुषोत्तम शर्मा, डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव, धर्मेंद्र सक्सेना, बृज किशोर गुप्ता, प्रियंकांशी केशवानी, डॉ. शिल्पा राव रस्तोगी, एवं अन्य शामिल थे। बैठक की शुरुआत एक परिचय सत्र के साथ हुई, जहाँ जनसंपर्क, विपणन संचार, कॉर्पोरेट संचार, डिजिटल और सोशल मीडिया, और आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स जैसे विविध क्षेत्रों के पेशेवरों ने अपने अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा की। यह रेखांकित किया गया कि पीआरसीआई जयपुर चैप्टर ने केवल दो महीनों में विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवरों का एक मजबूत नेटवर्क सफलतापूर्वक बनाया है, जो उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। सदस्यों ने इस उपलब्धि का श्रेय टीम वर्क और सक्रिय भागीदारी को देते हुए अपनी संतुष्टि व्यक्त की। पीआरसीआई जयपुर चैप्टर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें सदस्यों ने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और विभिन्न जिम्मेदारियां लीं। छात्रों को यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (वाईसीसी) में शामिल करके नेटवर्क को और मजबूत करने पर जोर दिया गया, जिसके लिए जयपुर के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पीआरसीआई सरकारी, पीएसयू, एमएनसी और कॉर्पोरेट क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सदस्यता लेने और वैश्विक नेटवर्किंग समूह का हिस्सा बनने के लिए संपर्क कर रहा है। बैठक सभी सदस्यों की ओर से पीआरसीआई जयपुर को जनसंपर्क के क्षेत्र में सबसे बड़ा नेटवर्किंग संगठन स्थापित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई।  

    थार मरुस्थल में बदलती पारिस्थितिकी से घट रही चमगादड़ों की संख्या: विश्व पर्यावरण दिवस पर राजस्थान विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान आयोजित

    • मुख्य वक्ता विशेषज्ञ: प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार पुरोहित, पूर्व संकायाध्यक्ष, सिंडिकेट सदस्य एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राणिशास्त्र विभाग, जे.एन.वी. व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर • व्याख्यान का विषय: थार मरुस्थल में पारिस्थितिक-परिवर्तन का चमगादड़ विविधता पर प्रभाव (Impact of Eco-Transformation on Chiropteran (Bats) Diversity in Thar Desert) विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्राणिशास्त्र विभाग और जर्नल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में एल. एस. रामास्वामी हॉल में एक विशेष अकादमिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी. सी. माली ने उपस्थित जनसमूह एवं मुख्य वक्ता का स्वागत किया और अनुसंधान व अकादमिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इसके पश्चात मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जे.एन.वी. व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व विज्ञान संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार पुरोहित ने "थार मरुस्थल में पारिस्थितिक-परिवर्तन का चमगादड़ विविधता पर प्रभाव" विषय पर अपना व्याख्यान दिया। वरिष्ठ प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर पुरोहित ने अपने मरुस्थलीय जीवों से जुड़े व्यापक शोध निष्कर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि जहां तीव्र मरुस्थलीय रूपांतरण के कारण जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर में चमगादड़ों की विविधता दिन-ब-दिन घट रही है, वहीं इसके विपरीत बाड़मेर में चमगादड़ों की जैव विविधता में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सत्र के समापन पर जर्नल क्लब के संयोजक डॉ. नरेश कुमार निर्मल ने उपस्थित समस्त गणमान्य अतिथियों एवं संकाय सदस्यों के प्रति औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। अकादमिक सत्र की समाप्ति के पश्चात, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के संकल्प को सुदृढ़ करने के लिए मुख्य अतिथि वक्ता द्वारा संकाय सदस्यों के साथ मिलकर विभागीय उद्यान में एक प्रतीकात्मक वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न किया गया।      

    विश्व पर्यावरण दिवस पर कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय द्वारा ग्राम सभाओं में वृक्षारोपण एवं जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर द्वारा उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत चयनित पांच गांवों आंधी, अस्थल, थली, सांकोढ़ा खावारानीजी के संरक्षण एवं समग्र विकास को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। इसके अंतर्गत पानी का महत्व उजागर करते हुये द वॉटर प्रोजेक्ट नाम से महाविद्यालय द्वारा जल संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन में जयपुर जिला प्रशासन एवं जिला परिषद, जयपुर का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज दिनांक 05 जून 2026 महाविद्यालय द्वारा जयपुर जिले की जामवारामगढ़ तहसील की आंधी एवं अस्थल ग्राम सभाओं में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की टीम ने ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी स्थानीय समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में जलापूर्ति की स्थिति चिंताजनक है, जहां चार दिनों में केवल आधे घंटे के लिए नल के माध्यम से पानी उपलब्ध हो पाता है तथा सप्ताह में लगभग एक बार ही पानी का टैंकर पहुंचता है। इसके अतिरिक्त महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए पारंपरिक एवं नवीन आजीविका स्रोतों के विकास की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। महाविद्यालय की ओर से ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि उनकी समस्याओं एवं सुझावों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर संबंधित ग्राम सभाओं के सरपंच, शालिनी एवं आकांक्षा मोदी, तथा महाविद्यालय की प्राध्यापिकाएँ डॉ. ऋचा चतुर्वेदी एवं आरती तंवर उपस्थित रहीं। सभी ने पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। महाविद्यालय द्वारा भविष्य में भी उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक जागरूकता से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहेगा।  

    डॉ.सतीश जी पूनिया को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित करने पर उनके परिवारजनो, करीबियों, भाजपा कार्यकर्ता एवं आम जन मे मे खुशी की लहर

    हरियाणा प्रदेश के भाजपा के प्रभारी, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा के कद्दावर एवं रास्ट्रीय नेता डॉ.सतीश पूनिया को भाजपा की और से राजस्थान प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होने पर उनके परिवारजनो, करीबियों, भाजपा कार्यकर्ता एवं आम जन मे खुशी की लहर है! डॉ.सतीश पूनिया को भाजपा की और से राजस्थान प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित करने पर अजमेर से अजमेर निवासी पूर्व जिला उपाध्यक्ष भाजपा संजय खंडेलवाल, राजेश घाटे, चिराग चौधरी, अंकित गुर्जर, तिलक रावत, दीपक सिंह राठौड़, अमित जैन मकराना से और कई कार्यकर्ताओं ने मिलकर के स्वागत किया! इसके साथ ही प्रोफेसर (डॉ) रमेश कुमार रावत, कुलसचिव, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, गैंगटक, सिक्किम, सुशील कटारा पूर्व मंत्री, बीजेपी, राजस्थान सरकार, किसान नेता राजस्थान रामकिशन खींचर सहित राजस्थान भाजपा, हरियाणा भाजपा के कार्यकरता, पदाधिकारी, आमजन ने व्यक्तिगत मिलकर, फोन पर, फेसबुक पर, व्हाट्सअप एवं अन्य माध्यमो से हार्दिक भदाई एवं शुभ कामना दी है!   3 जुलाई 2020 को भाजपा के सच्चे सिपाही डॉक्टर सतीश पुनिया ने विश्व के पहले हिंदी न्यूज़ पोर्टल वेबदुनिया मे उस समय वेबदुनिया के ग्लोबल जर्नलिस्ट रहे डॉक्टर रमेश कुमार रावत को दिये एक इंटरव्यू मे डॉक्टर सतीश पुनिया ने कहा था कि " मेरा मानना है कि सत्ता अथवा कुर्सी के लिए कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए। हालांकि मुझे उम्मीद है कि जिस प्रकार पार्टी ने मुझे प्रदेशाध्यक्ष बनाकर सम्मानित किया है, उसी प्रकार पार्टी मेरे काम को ध्यान में ध्यान में रखकर भविष्य में भी सम्मान देगी। " इस इंटरव्यू मे डॉक्टर सतीश पुनिया की उपरोक्त कही गई बात आज सच साबित हो गई है एवं भाजपा ने उन्हे राज्य सभा का प्रत्याशी घोषित कर सम्मान देने की बात को चरितार्थ कर दिया है! इससे यह भी साबित होता है कि भाजपा कहती है वो करती है!  

    पर्यावरण संरक्षण सरकार की ही नहीं हैं, हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी: प्रो. शर्मा

    राजस्थान विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित; देश भर के 200 से अधिक शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने किया मंथन ​जयपुर, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के 'इन्दिरा गांधी मानव पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं जनसंख्या अध्ययन केंद्र' (पर्यावरण विज्ञान विभाग) के तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय "पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जलवायु कार्रवाई के माध्यम से सतत भविष्य" रखा गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए लगभग 200 शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और पर्यावरण संकट से निपटने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया। ​सामूहिक प्रयासों से ही थमेगा पर्यावरण क्षरण ​सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. बी. एल. शर्मा थे। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। ​"जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों को हम केवल सामूहिक प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर ही रोक सकते हैं। हम सभी को अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।" — प्रो. बी. एल. शर्मा, पूर्व कुलपति ​कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सरगुजा विश्वविद्यालय (छत्तीसगढ़) के विज्ञान संकाय के डीन प्रो. मधुर मोहन रंगा ने कहा कि सतत विकास (Sustainable Development) के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण और उसका पुनरुद्धार आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने युवाओं और शोधकर्ताओं से नए अनुसंधान और नवाचारों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। ​अर्ध-शुष्क क्षेत्रों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा ​सम्मेलन के संयोजक एवं विभाग के निदेशक डॉ. सुरेन्द्र सिंह चौहान ने अपने वक्तव्य में आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी मानवता के लिए एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश, सूखा, बाढ़ और हीट वेव (लू) जैसे दुष्परिणाम अब साफ दिखने लगे हैं। ​डॉ. चौहान ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क (Semi-Arid) प्रदेशों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और भी अधिक घातक हो सकते हैं, जिसका सीधा असर हमारे जल संसाधनों, कृषि उत्पादन और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने समाधान के रूप में वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और सतत जीवनशैली को अपनाने पर बल दिया। ​शोध पत्रों के माध्यम से सार्थक चर्चा और संकल्प ​सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में जैव विविधता, जल प्रबंधन और राजस्थान की विशिष्ट पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. प्रेमा एस्थर सोलोमन ने सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा सामने रखी, जबकि दूसरे आयोजन सचिव डॉ. पंकज कुमार जैन ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। ​समापन सत्र के मुख्य अतिथि पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के प्राणीशास्त्र एवं पर्यावरण विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगबीर सिंह कीर्ती रहे, जिन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति-निर्माण के बेहतर समन्वय को जरूरी बताया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुरेन्द्र सिंह चौहान ने सम्मेलन के निष्कर्षों को साझा किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष 'लोगो' का विमोचन किया गया और सभी ने पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।