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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी वाटिका, जयपुर के फार्मेसी विभाग द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श सत्र का आयोजन

     शैक्षणिक ज्ञान एवं वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से फार्मेसी विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र जीवन रेखा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा संचालित किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ के समय प्रेसिडेंट डॉ रश्मि जैन, कुलसचिव डॉ अनूप शर्मा,डीन रिसर्च डॉ रोहित सारस्वत, डीन डॉ राम गर्ग, प्रिंसिपल डॉ मनोज खारड़िया, विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राचार्य, विद्यार्थी, स्टाफ एवं समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य, रोग निवारण एवं रोगी परामर्श के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना था। प्रथम सत्र में डॉ शुभ्रांशु ने “स्वस्थ फेफड़े, स्वस्थ जीवन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अस्थमा एवं सीओपीडी जैसी सामान्य श्वसन संबंधी बीमारियों के बारे में जानकारी दी तथा रोगियों को सही परामर्श देकर दवाओं के उचित सेवन में फार्मासिस्ट की भूमिका पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में डॉ अदिति अग्रवाल ने “तनाव प्रबंधन एवं इंटरनेट की लत” विषय पर संबोधित किया। उन्होंने युवाओं में बढ़ते तनाव एवं डिजिटल निर्भरता के मामलों पर चर्चा की तथा परामर्श की व्यावहारिक तकनीकों एवं रोकथाम उपायों की जानकारी दी।   प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ केवल शरीर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मन पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। फेफड़ों के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ—चाहे वे प्रदूषण, जीवनशैली या संक्रमण के कारण हों—तेज़ी से बढ़ रही हैं। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चिंताएँ जैसे तनाव, चिंता और अवसाद भी उतनी ही गंभीर होती जा रही हैं और हमारे ध्यान एवं देखभाल की आवश्यकता रखती हैं। उन्होंने कहा कि आज का यह स्वास्थ्य सत्र केवल परामर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता, रोकथाम और सशक्तिकरण का माध्यम है। यह एक स्वस्थ समुदाय के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ शारीरिक और मानसिक—दोनों प्रकार के स्वास्थ्य को समान महत्व दिया जाता है।   प्रो- प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में कहा कि स्वास्थ्य प्रत्येक व्यक्ति की सर्वोपरि संपदा है, जिसके संरक्षण, संवर्धन एवं सुरक्षित रख-रखाव का दायित्व प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से निहित है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक उपायों तथा नियमित चिकित्सकीय परामर्श को अपनाना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने को प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक एवं सामाजिक कर्तव्य बताते हुए सभी से इसके पालन का आह्वान किया     प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने इस सत्र को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया तथा अपने संदेश में कहा कि ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति संतुलित, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जी सके। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के अधिक से अधिक कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं समाज के अन्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके   कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। फार्मेसी विभागाध्यक्ष ने अतिथि वक्ताओं एवं जीवन रेखा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का बहुमूल्य समय एवं मार्गदर्शन हेतु आभार व्यक्त किया।

    जेईसीआरसी में ‘इको क्रेडिट्स’ की शुरुआत, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा अकादमिक सम्मान

    -कैंपस में 'सर्कुलर इकॉनमी' और विज़न 2030 का आगाज़   -जेईसीआरसी ने पेश किया सस्टेनेबल भविष्य का रोडमैप   जयपुर,   हरित भारत के सपने को साकार करने के संकल्प के साथ, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) ने सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट एंड इनोवेशन समिट का आयोजन किया। "द इम्पैक्ट रिवोल्यूशन: यूथ, इंस्टीट्यूशंस एंड इंडस्ट्री" की थीम पर आधारित इस मंच ने प्रशासन, कॉर्पोरेट और पर्यावरण प्रेमियों के विचारों का एक अनूठा संगम पेश किया जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को जागरूक करने व उन्हें प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाने वाले भविष्य का नेतृत्व सौंपना है।   समिट में राजस्थान के एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी, आईएएस अजिताभ शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे बिना सोचे-समझे 'डिफ़ॉल्ट जीवन' जीने के बजाय, समाज के जटिल पारिस्थितिक संकटों को सुलझाने के संकल्प के साथ अपने करियर का चुनाव करें। उनका मानना है कि सस्टेनेबिलिटी को केवल कागजी नीतियों तक सीमित न रहकर हमारे दैनिक कामकाज का अभिन्न अंग बनना चाहिए।   इस दिशा में, उन्होंने जल व ऊर्जा प्रबंधन को एक 'बहु-विषयक' चुनौती बताया, जिसके समाधान के लिए कृषि, उद्योग और शहरी नीतियों में गहरे तालमेल की आवश्यकता है। उन्होंने भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 'स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर' को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया व स्पष्ट किया कि युवाओं को इन अहम विषयों से जुड़ने के लिए सार्थक अवसर मिलने चाहिए, जिससे वे सरकारी नीतियों पर सवाल उठा सकें, नए दृष्टिकोण ला सकें और भविष्य के सुशासन में एक मजबूत व जागरूक भागीदार बन सकें।   इसी नीतिगत विज़न को जमीनी हकीकत में बदलते हुए, 'ग्रीन मैन ऑफ इंडिया' के नाम से विख्यात विरल देसाई ने उधना रेलवे स्टेशन के 'शहीद स्मृति वन' का उदाहरण देकर प्रकृति संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने पर ज़ोर दिया। पर्यावरण रक्षा को आधुनिक 'सत्याग्रह' का नाम देते हुए, उन्होंने यूथ से 'पर्यावरण सेनानी' बनने का आह्वान किया; ताकि रिफ़ोरेस्टेशन महज एक विकल्प न रहकर, हम सभी की एक आनंददायक और जीवन-रक्षक ज़िम्मेदारी बन सके।   नीति और जन-भागीदारी को आर्थिक नज़रिए से जोड़ते हुए, ईवाई के डायरेक्टर गोकुल पांडियन ने व्यवसायों से केवल नियमों के 'अनुपालन' तक सीमित रहने के बजाय पर्यावरणीय रणनीतियों को अपने मुख्य व्यापार मॉडल में शामिल करने का आग्रह किया। 'पीपल, प्लैनेट, प्रोफ़िट' सिद्धांत और 'कार्बन प्राइसिंग' का उल्लेख करते हुए 'ग्रीनवाशिंग' के दिखावे से बचने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने पारदर्शी व डेटा-आधारित ईएसजी रिपोर्टिंग पर बल दिया, ताकि कॉर्पोरेट कैपिटल का उपयोग सच्चे अर्थों में एक हरित और सुरक्षित भविष्य के निर्माण में हो सके।   सस्टेनेबिलिटी को ग्राउंड रियलिटी में बदलते हुए, यूनिवर्सिटी ने 'इको क्रेडिट्स' की शुरुआत की है। जिसके ज़रिए ग्रीन प्रोजेक्ट्स में एक्टिव पार्टिसिपेशन देने वाले स्टूडेंट्स की मार्कशीट में सीधे 3 क्रेडिट्स जुड़ेंगे। साथ ही, युवाओं के इनोवेटिव आइडियाज़ को सपोर्ट करने के लिए ₹30,000 की 'सस्टेनेबिलिटी स्कॉलरशिप' का भी ऐलान किया गया है। हरित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जेईसीआरसी इन्क्यूबेशन सेंटर (जेआईसी) के माध्यम से ₹25 लाख का फंड तैयार किया है, जहाँ पर्यावरण अनुकूल स्टार्टअप्स को बिना किसी इक्विटी के पूरी फंडिंग और मेंटरशिप मिलेगी। साथ ही, सस्टेनेबल इनोवेशन से जुड़े पेटेंट के पंजीकरण से लेकर उन्हें बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में यूनिवर्सिटी सहयोग करेगी।   जेईसीआरसी के पर्यावरण संकल्प को एक नई ऊर्जा देते हुए, धीमंत अग्रवाल (डायरेक्टर, डिजिटल स्ट्रेटेजीज़) ने 'विज़न 2030' पेश किया; जिसके तहत पूरे कैंपस को 100 प्रतिशत प्लास्टिक-फ्री बनाने के साथ-साथ 'सर्कुलर इकॉनमी' के मॉडल को भी मज़बूती से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा मकसद आने वाली पीढ़ी के हाथों में एक 'संकट' सौंपना नहीं है, बल्कि सस्टेनेबिलिटी को उनके अच्छे भविष्य और सफल लीडरशिप की एक मज़बूत 'नींव' बनाना है। युवाओं को इस बदलाव से सीधे जोड़ने के लिए ही, अब तक 1800 से ज़्यादा छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट, सेल्सफोर्स और ओप्पो जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियों में सस्टेनेबिलिटी इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए गए हैं।   इसके साथ ही, सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की हेड, प्राची कौशिक ने संदेश दिया कि हमारी सही सोच, पक्के इरादे और एकजुटता ही पर्यावरण के इस संकट को एक ऐतिहासिक बदलाव का रूप दे सकती है।

    खंडेलवाल वेश्य धाम जागरण रथ यात्रा का खंडेलवाल समाज राजगढ़ ने किया भव्य स्वागत

    खंडेलवाल समाज राजगढ़ के तत्त्ववधान मे खंडेला धाम से प्रारंभ हुई खंडेलवाल वेश्य धाम जागरण रथ यात्रा का राजगढ़ पहुॅचने पर भव्य एवं हर्षोलास के साथ स्वागत किया गया! इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किये गए! इसमें खंडेलवाल समाज की अनेक संस्था एवं समाज के सदस्यों ने भागीदारी निभाई! आगंतुक अतिथियों का समाज के लोगों की और से गर्म जोशी के साथ जगह जगह पुष्प वर्षा कर आत्मीय स्वागत किया गया! कार्यक्रम मे खण्डेला धाम के संस्थापक एवं आजीवन मैनेजिंग ट्रस्टी - पुरुषोत्तम गुप्ता, अध्यक्ष - आर सी गुप्ता (झालाणी) एवं महामंत्री - रमेशचन्द्र खण्डेलवाल, जोधपुर, सहित समाज के अनेक लोगों ने उत्साह से भाग लेकर सामाजिक एकता एवं समाज के vikasr मे भागीदारी निभाने का संकल्प लिया! इस अवसर पर खंडेला धाम के पदाधिकारी एवं आगंतुक सदस्यों ने यात्रा के उदेश्यो पर प्रकाश डाला! इस अवसर पर रजगढ़ खंडेलवाल समाज के अध्यक्ष सुरेश रावत, कोषाध्यका deepakr पबुवाल, महामंत्री मनीष एडवोकेट, सुरेश कायथवाल, भगवान सहाय, कमलेश मामोडीया, गिरिराज बटवाडा, लोकेश रावत, आशा ताम्बी, कामिनी रावत, प्रेमलता मामोडीया सहित समाज बंधुओ ने अपनी भागीदारी निभाई!    इस अवसर पर समाज के लोगों ने अपनी अपनी कुलदेवी एवं विभिन्न गोत्रों की देवियों की विधि वत पूजा अर्चना कर महा आरती की! इसके साथ ही समाज के लोगों ने खंडेलवाल समाज के सन्त शिरोमणि श्री श्री 1008 संत सुंदरदास जी महाराज की प्रतिमा के समक्ष माल्या अर्पण एवं दीप प्रजवलीत कर पूजा अर्चना की! इस यात्रा को लेकर अखिल भारत वर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा चोमु की अशोक विहार कॉलोनी के निवासी प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने खुशी व्यक्त करते हुए एक सराहनीय कदम बताया एवं फोन पर गैंगटोक से खण्डेला धाम के संस्थापक एवं आजीवन मैनेजिंग ट्रस्टी - पुरुषोत्तम गुप्ता, अध्यक्ष - आर सी गुप्ता (झालाणी) एवं महामंत्री - रमेशचन्द्र खण्डेलवाल, जोधपुर को शुभ कामना, भदाई एवं साधुवाद दिया! साथ ही इस जागरण भारत यात्रा को समाज के विकास मे भी महत्व पूर्ण भागीदारी निभाने मे सहायक बताया!

    बियानी गर्ल्स कॉलेज में प्लेनरी टॉक का आयोजन, वैज्ञानिक शोध और नवाचार पर हुआ विशेष संवाद

    जयपुर । बियानी गर्ल्स कॉलेज में साइंस विभाग द्वारा सभी विद्यार्थियों के लिए एक “प्लेनरी टॉक” का आयोजन किया गया।   कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रोफेसर राकेश त्यागी मॉलिक्यूलर मेडिसिन में रिसर्चर एवं इनोवेशन विशेषज्ञ, प्रोफेसर पी.सी. माली, हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी, आयोजक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन व प्रिंसिपल डॉ.ध्यान सिंह गोठवाल , डॉ. शिल्पा भार्गव ने दीप प्रज्वलन कर किया।    प्रोफेसर पी.सी. माली ने स्वागत भाषण में प्रो. राकेश के त्यागी के 37 वर्षों के शोध, 22 वर्षों के शिक्षण अनुभव, उनके प्रमुख रिसर्च कार्यों, पुरस्कारों व प्रकाशित शोध पत्रों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उन्हें विज्ञान एवं शिक्षा क्षेत्र का प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताया।   इसके पश्चात प्रोफेसर राकेश के त्यागी ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन (GFP) के इतिहास, उत्पत्ति एवं विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आधुनिक जैविक शोध में एक क्रांतिकारी एवं आधारभूत उपकरण बन चुका है। साथ ही, जीएफपी से जुड़े महत्वपूर्ण शोध कार्यों एवं उसके व्यावहारिक उपयोगों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने उनसे विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल एवं प्रभावी ढंग से उत्तर दिया।   डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित किया तथा नई तकनीकों को अपनाने के लिए विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत किए।   यह सेशन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसने विद्यार्थियों को रिसर्च और साइंटिफिक इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    राजस्थान विश्वविद्यालय में ‘BIOFIESTA 2026’ का आयोजन: विज्ञान और संस्कृति के संगम से निखरी छात्रों की प्रतिभा

    राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग (Department of Zoology) में बुधवार को “BIOFIESTA 2026” का भव्य आयोजन किया गया। यह एक दिवसीय सह-शैक्षिक और सांस्कृतिक उत्सव छात्रों की रचनात्मक ऊर्जा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान परिसर में शैक्षणिक उत्साह और सांस्कृतिक छटा का अनूठा समन्वय देखने को मिला। ​मुख्य अतिथि और नेतृत्व ​उत्सव की मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय की वित्त नियंत्रक मंजू चौधरी रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की और छात्रों को संबोधित करते हुए अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ पाठ्येतर गतिविधियों के महत्व पर जोर दिया। इस पूरे आयोजन का सफल क्रियान्वयन प्राणीशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रतापचंद माली के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में संपन्न हुआ। उनके निर्देशन में विभाग ने छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक अनुशासित और उत्साहजनक वातावरण तैयार किया। ​विविध प्रतियोगिताओं में दिखा कौशल ​छात्रों की प्रतिभा को परखने और उन्हें अपनी अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में विज्ञान और कला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला: ​अभिनय और नृत्य: मंच पर छात्रों ने नाटकों के माध्यम से सामाजिक और वैज्ञानिक संदेश दिए, वहीं नृत्य प्रदर्शनों ने उत्सव में सांस्कृतिक रंग भर दिया। ​बौद्धिक और रचनात्मक वर्ग: 'साइंस टून' (Science Toon) जैसी अनूठी प्रतियोगिता में छात्रों ने जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को कार्टून के माध्यम से रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। इसके अलावा पोस्टर मेकिंग और आशुभाषण (Extempore) में भी प्रतिभागियों ने अपनी तार्किक क्षमता और संचार कौशल का परिचय दिया।  उत्साहपूर्ण सहभागिता और समापन ​कार्यक्रम में एम.एससी. प्राणीशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोधार्थियों ने जहां अपनी वैज्ञानिक समझ साझा की, वहीं नए छात्रों ने रचनात्मक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। ​आयोजन के समापन सत्र में प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई। “BIOFIESTA 2026” न केवल एक उत्सव के रूप में उभरा, बल्कि इसने छात्रों के भीतर आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभाग की इस पहल को भविष्य के वैज्ञानिकों और कलाकारों के निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में “स्टार्टअप कानूनी ढांचा एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण” विषय पर कार्यशाला का सफल आयोजन

    इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल,यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका जयपुर द्वारा अन्वेषकों के लिए स्टार्टअप कानूनी ढांचा एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण” (Startup Legal Framework & IP Protection) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।    यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में प्रेसिडेंट *डॉ. रश्मि जैन* एवं प्रो-प्रेसिडेंट *डॉ. अंकित गांधी* के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संपन्न हुई।इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि आज के युग में केवल एक अच्छा विचार होना पर्याप्त नहीं है। उस विचार को सही दिशा देना, कानूनी रूप से सुरक्षित करना और उसे दीर्घकालिक सफलता तक पहुँचाना भी उतना ही आवश्यक है।   प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा उद्यमियों को केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कानूनी जागरूकता को भी अपने कौशल का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। सही जानकारी और समय पर उठाए गए कदम भविष्य में अनेक चुनौतियों से बचाते हैं। उन्होंने कहा कि उचित कानूनी दृष्टिकोण और बौद्धिक संपदा संरक्षण न केवल स्टार्टअप को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि उसे निवेश के लिए अधिक विश्वसनीय और आकर्षक भी बनाते हैं।   मुख्य वक्ता विशेषज्ञ डॉ. राहुल शर्मा, सहायक प्रोफेसर, आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय, जयपुर ने अपने संबोधन में कहा कि “आपका विचार, आपका उत्पाद और आपकी ब्रांड पहचान ही आपकी असली संपत्ति है। ”उन्होंने बताया कि पेटेंट आपके नवाचार को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। ट्रेडमार्क आपके ब्रांड और पहचान की रक्षा करता है। कॉपीराइट आपके कंटेंट और रचनात्मक कार्यों को सुरक्षित रखता है। यदि इनकी समय पर सुरक्षा न की जाए तो प्रतिस्पर्धी आसानी से आपके विचार का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज निवेशक केवल आइडिया में नहीं, बल्कि उसकी कानूनी स्पष्टता और बौद्धिक संपदा की मजबूती में निवेश करते हैं। एक मजबूत आईपी पोर्टफोलियो रखने वाले स्टार्टअप की बाजार में विश्वसनीयता और मूल्य स्वतः बढ़ जाती है। साथ ही उन्होंने अनुबंध, डेटा संरक्षण कानून, रोजगार समझौते और नियामकीय अनुपालन पर भी ध्यान देने की सलाह दी, क्योंकि छोटी लापरवाही भविष्य में बड़े कानूनी विवादों का कारण बन सकती है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने कहा कि संस्थान इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, नवाचार करें, लेकिन साथ ही उसकी सुरक्षा भी करें, क्योंकि बिना सुरक्षा के नवाचार लंबे समय तक टिक नहीं पाता।”   परीक्षा नियंत्रक डॉ. कमल किशोर जांगिड़ ने विद्यार्थियों को जागरूकता के साथ-साथ व्यावहारिक समझ विकसित करने पर बल दिया।   कार्यशाला का सफल संचालन डॉ. चारु दुबे ,राष्ट्रीय नवाचार एवं स्टार्टअप नीति समन्वयक आईआईसी और डॉ. सीताराम माली सदस्य, आईआईसी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा किया गया।   कार्यक्रम के समापन पर समन्वयक डॉ. सागर कुमार ने मुख्य वक्ता, आयोजकों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते किया एवं भविष्य में भी इस प्रकार की उपयोगी कार्यशालाओं के आयोजन की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि यह कार्यशाला शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है।   इस अवसर पर चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल का विकास कर बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें।     प्रो चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और उन्हें उनके करियर की सही दिशा दिखाती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    श्रेष्ठ पीएम श्री विद्यालयों की बेस्ट प्रैक्टिस शेष विद्यालयों में भी लागू करें: मुख्य सचिव

      — मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने किया शिक्षा संकुल का दौरा   — पीएमश्री विद्यालयों की स्थितियों पर मंथन, समीक्षा बैठक ली   जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बुधवार को शिक्षा संकुल में पीएम श्री विद्यालय योजना की समीक्षा बैठक ली। वी. श्रीनिवास माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुई मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस में राजस्थान को दिए टास्क की क्रियान्विति की जानकारी के लिए शिक्षा संकुल पहुंचे। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा श्री राजेश यादव ने विभाग के अ​न्य अधिकारियों के साथ प्रेजेन्टेशन के माध्यम से विभाग की ओर से प्रदेश के 649 पीएम श्री विद्यालयों में बीते कुछ महीनों में किए गए गहन निरीक्षण में सामने आए तथ्यों की जानकारी मुख्य सचिव को दी।   मुख्य सचिव ने पीएम श्री विद्यालयों की मॉनिटरिंग व रैंकिंग का कार्य जारी रखने व शेष टास्क शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रैंकिंग में शीर्ष पर रहने वाले श्रेष्ठ विद्यालयों में अपनाई जा रही बेस्ट प्रेक्टिस अन्य विद्यालयों तक पहुंचाने के लिए संस्था प्रधानों की वेबीनार का आयोजन किया जाए जिससे सभी विद्यालयों को लाभ मिल सके।    मुख्य सचिव ने पीएम श्री विद्यालयों में आईसीटी लैब, सांइस लैब को बेहतर करने के साथ विद्यालयों में साइंस क्लब बनाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने लर्निंग आउटकम्स और मेंटल हेल्थ पर भी जोर दिया। उन्होंने निपुण भारत अभियान की सराहना भी की।   इससे पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव ने विद्यालयों में सुचारु रूप से कार्यरत बालिका शौचालयों की उपलब्धता, मातृभाषा में शिक्षण, अपार रजिस्ट्रेशन, शिक्षकों का क्षमता संवर्धन, पीएम गति शक्ति, सीबीए, निपुण राजस्थान अभियान, मेगा पीटीएम सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। साथ ही विभाग की ओर से पीएबी में प्रस्तुत प्रस्तावों की भी जानकारी दी।    *वीएसके का अवलोकन किया*   मुख्य सचिव ने पीएम श्री विद्यालयों के डेटा एनालिटिक्स को समझने के लिए संकुल स्थित विद्या समीक्षा केंद्र का भी अवलोकन किया। वीएसके प्रतिनिधियों ने पीएम श्री स्कूल सर्वे इनसाइट्स सहित अन्य महत्वपूर्ण डैशबोर्ड की जानकारी मुख्य सचिव को दी।    इस अवसर पर राज्य परियोजना निदेशक व आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा, संयुक्त सचिव महेन्द्र खींची, निदेशक आरएससीआरटी श्रीमती श्वेता फगेडिया, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक प्रथम श्रीमती सीमा शर्मा, द्वितीय अशोक कुमार मीणा सहित सभी विभागीय उपायुक्त व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

    'शिफ्टिंग पर्सपेक्टिव्स- ए कैरेक्टर-सेंटर्ड एनालिसिस’ विषय पर प्रस्तुति

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के अंग्रेजी विभाग ने निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी और प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के निर्देशन में 28 और 29 अप्रैल 2026 को ‘‘शिफ्टिंग पर्सपेक्टिव्स- ए कैरेक्टर-सेंटर्ड एनालिसिस’’ शीर्षक पर एक शैक्षणिक गतिविधि का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह गतिविधि एम.ए. सेमेस्टर प्प् और प्ट की छात्राओं हेतु आयोजित की गई, जिसने छात्राओं को नवीन और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोणों के माध्यम से साहित्य को समझने के लिए एक मंच प्रदान किया। यह गतिविधि एक मूल्यवान शैक्षणिक अभ्यास साबित हुई, जिसने चरित्र संचालित विश्लेषण को विकसित करने में छात्राओं की विश्लेषणात्मक क्षमताओं को बढ़ाया। यह गतिविधि समूह प्रस्तुतियों के आसपास संरचित की गई जो सहयोगात्मक सीखने और सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध हुई। छात्राओं ने परिप्रेक्ष्य को बदलने के बाद साहित्यिक पात्रों, विषयों, प्रतीकों और रूपांकनों का विश्लेषण और व्याख्या करने के लिए 5 के समूह में एक साथ काम किया। इस गतिविधि के लिए लगभग 50 छात्राओं ने सफलतापूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम में विभाग की शिक्षिका डॉ. स्वाति धनवनी, डॉ. प्रीति शर्मा, ऋषिता शर्मा, अदिति पंकज और भव्या पुरी ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया।    

    ‘‘जॉब फेयर का सफल आयोजन’’

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर करियर गाईडेंस ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट द्वारा राजस्थान एम्प्लॉयमेंट डिपार्टमेंट के सहयोग से दिनांक 29 अप्रैल 2026 को महाविद्यालय में एक भव्य जॉब फेयर का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ सीधे जोड़कर उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करना तथा उनके करियर विकास को नई दिशा देना था। कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए जॉब फेयर के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास के साथ इस जॉब फेयर में भाग लें और इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाकर अपने करियर को नई दिशा दें। जॉब फेयर में देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रमुख भागीदारों में बीएमडब्ल्यू, डेकाथलॉन, क्वेस कॉर्प, टेलिपरफॉर्मेंस, एसएलए फिनसर्व, जयपुर रग्स, सैलराइट, एमसीसी (मॉडल करियर सेंटर), होटल ग्रैंड उनियारा सहित अन्य संस्थान शामिल रहे। कार्यक्रम के स्पॉन्सर पार्टनर के रूप में इमार्टिकस लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने छात्राओं को कौशल विकास एवं करियर मार्गदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया, अपने रिज्यूमे प्रस्तुत किए तथा इंटरव्यू प्रक्रिया में भाग लिया। कंपनियों द्वारा ऑन-द-स्पॉट इंटरव्यू, शॉर्टलिस्टिंग एवं चयन की प्रक्रिया भी संचालित की गई, जिससे अनेक छात्राओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इस जॉब फेयर में लगभग 102 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इनमें से कुल 66 छात्राओं का चयन हुआ। जॉब फेयर के अंत में सेंटर की संयोजिका डॉ आकांक्षा गंडा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी चयनित छात्राओं को बधाई दी। यह जॉब फेयर छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहां उन्हें उद्योग जगत की आवश्यकताओं को समझने और अपने कौशल को निखारने का अवसर मिला।  

    103 छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरित, एचसीएल गुवी के साथ एमओयू से प्रशिक्षण व प्लेसमेंट के नए अवसर

    डेटा साइंस कार्यशाला का प्रमाण पत्र वितरण एवं एमओयू समारोह सम्पन्न   जयपुर। बियानी गर्ल्स कॉलेज के आईटी विभाग द्वारा आयोजित डेटा साइंस टेक्नोलॉजी कार्यशाला का प्रमाण पत्र वितरण एवं एमओयू समारोह सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।   इस अवसर पर कार्यशाला में सहभागिता करने वाली 103 छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, आईटी एवं सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ समझौते कर शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।   इसी क्रम में बियानी कॉलेज द्वारा एचसीएल गुवी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के अंतर्गत छात्राओं को प्रशिक्षण, कार्यशालाएं, इंडस्ट्रियल विजिट तथा प्लेसमेंट सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें सॉफ्टवेयर इंडस्ट्रीज की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।   एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरान बियानी गर्ल्स कॉलेज की ओर से सीए अभिषेक बियानी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एमओयू के महत्व और प्लेसमेंट के अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को इंडस्ट्री से जुड़ने, व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और अपने कौशल को विकसित कर बेहतर करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।   प्राचार्य डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने अपने संबोधन में प्रैक्टिकल स्किल्स पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।   इस अवसर पर विनोद श्रीनिवासन ने छात्राओं को सॉफ्टवेयर कंपनियों के कार्य प्रणाली से अवगत कराया तथा नवीनतम तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए, जो छात्राओं के लिए अत्यंत लाभकारी रहा।    इस अवसर पर चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने छात्राओं को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।   कार्यक्रम में आईटी विभागाध्यक्ष प्रो. सचिन बगोरिया एवं असोसिएट प्रो. राहुल अग्रवाल सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

    “राजस्थान विश्वविद्यालय का अहम फैसला : प्रो. नुपूर माथुर को मिली महारानी कॉलेज की कमान”

    “शोध और नेतृत्व का संगम—प्रो. नुपूर माथुर बनीं महारानी महाविद्यालय की नई प्राचार्य” जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रोफेसर नुपूर माथुर को महारानी महाविद्यालय, जयपुर की प्राचार्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की गई है और प्रो. माथुर ने विधिवत् पदभार ग्रहण कर लिया है। पदभार ग्रहण करने के उपरांत प्रो. नुपूर माथुर ने विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा से शिष्टाचार भेंट कर इस नियुक्ति के लिए उनका आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। प्रो. नुपूर माथुर वर्तमान में विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक हैं। इसके साथ ही वे विभिन्न विश्वविद्यालयीय समितियों में संयोजक और सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अकादमिक व प्रशासनिक निर्णयों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। प्राणीशास्त्र (Zoology) की वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में प्रो. माथुर का शैक्षणिक और शोध अनुभव समृद्ध रहा है। उनके अनेक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतररराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही, उन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतररराष्ट्रीय सेमिनारों और सम्मेलनों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं, जिससे उन्हें अकादमिक जगत में विशिष्ट पहचान मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में महारानी महाविद्यालय शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल करेगा। साथ ही, विद्यार्थी-केन्द्रित गतिविधियों और समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय की गुणवत्ता आधारित शिक्षा एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।