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    30वां राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह-2026 का आयोजन 29 जून को

    — जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में किया जा रहा सम्मान समारोह आयोजित — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि — शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 276 से अधिक भामाशाह, प्रेरक एवं एनआरआई दानदाता होंगे सम्मानित जयपुर। शिक्षा के क्षेत्र में जनसहभागिता और सामाजिक योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह 2026 का आयोजन 29 जून, 2026 (सोमवार) को जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षामंत्री मदन दिलावर करेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रेमचंद बैरवा, उपमुख्यमंत्री राजस्थान सरकार समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे। समारोह में राजकीय विद्यालय भवन निर्माण, अतिरिक्त निर्माण कार्य, निर्मित भवनों के विकास, भूमि उपलब्ध कराने तथा अन्य भौतिक संसाधनों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 276 से अधिक भामाशाह, प्रेरक एवं एनआरआई दानदाताओं को सम्मानित किया जाएगा। इनमें 154 भामाशाह, 99 प्रेरक तथा 23 एनआरआई दानदाता शामिल हैं। यह आयोजन शिक्षा के विकास में समाज की सहभागिता, सहयोग और उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भामाशाहों के सहयोग से विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में उल्लेखनीय योगदान मिला है। इन भामाशाहों से वित्त वर्ष 2025-26 में 318 करोड़ रुपए का सहयोग प्राप्त हुआ है। समारोह के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सहयोगियों को सम्मानित कर समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश देने के साथ जनसहयोग की भावना को और अधिक सशक्त किया जाएगा।  

    खण्डेलवाल समाज के परिचय सम्मेलन का आज शुभारंभ

    खंडेलवाल समाज सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन हेतु कटिबद्ध- रमेश,चन्द्र गुप्ता (तुंगा वाला) इंदौर। लगभग 113 वर्षों से सामाजिक उत्थान व प्रगति हेतु लगातार प्रयासरत अखिल भारतीय खंडेलवाल वैश्य महासभा अभी भी समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, कुरीतियों,और बुराइयों लेन देन दहेज,लिफाफा संस्कृति, तलाक प्रथा आदि के उन्मूलन हेतु लगातार संलग्न है। उक्त प्रेरक,ओजस्वी विचार अ. भा. खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्य अतिथि रमेश चंद्र गुप्ता (तुंगा वाला),जयपुर ने आज रुक्मणी देवी चिरंजीलाल गुप्ता परिसर पंजाब अरोड़ वंशीय ट्रस्ट भवन में महासभा के तत्वावधान में संत सुंदर दास पारमार्थिक ट्रस्ट व खंडेलवाल संस्कृति वुमन्स क्लब द्वारा आयोजित अ.भा खंडेलवाल वैश्य युवक युवती परिचय सम्मेलन में व्यक्त किये।विशिष्ट अतिथि महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा जयपुर ने कहा इस प्रकार के आयोजनों से सामाजिक एकता,परस्पर प्रेम व आत्मीयता बढ़ाने व सामाजिक बुराइयों को दूर करने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रतिष्ठित उद्योगपति रुचि ग्रुप के मनीष शाहरा ने आयोजकों को ऐसे भव्य,सार्थक आयोजन की प्रशंसा की व शुभकामनाएं देते हुए प्रत्याशियों के श्रेष्ठ जीवन साथी चयन की मंगलकामनाएं व्यक्त की।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियो द्वारा संतसुंदर दास जी, संत बलराम दास महाराज व कल्याण महाराज व माता सरस्वती जी के चित्रों पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण से हुआ। अखिल भारतीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने बताया कि इस अवसर पर रमेश गुप्ता ने भी विचार प्रकट करते हुए शुभकामनाएं दी ।अतिथि स्वागत किया सर्व दिनेश कूलवाल, रमेश गुप्ता, कैलाशचंद खंडेलवाल, सुनील माली, राजेंद्र कूलवाल, शुभांगी भूखमरिया, संगीता कूलवाल, सुनीता राजोरिया,उषा कूलवाल, सारिका खंडेलवाल आदि ने।इस अवसर पर प्रकाशित पुस्तक परिणय बंधन का विमोचन अतिथियों ने राजेश डंगायच,कैलाश खंडेलवाल,निर्भय खंडेलवाल संजय बड़गोती,राजेश भूखमारिया द्वारा करवाया गया। आज शुरू हुए परिचय सत्र में प्रत्याशीयों ने अपने परिचय में पढ़ी-लिखी संस्कारवान युवती व उच्च शिक्षितकार्यरत प्रत्याशियों को महत्व दिया। आज शाम 7:30 तक चले परिचय सत्र में करीब 170 प्रत्याशियों ने परिचय दिया जिनमें से करीब 40 से 45 संबंधों की चर्चा अंतिम रूप में है।कल प्रातः 10 बजे से परिचय सत्र प्रारंभ होगा।संचालन किया सी,ए,सुनील खंडेलवाल, प्रियंका खंडेलवाल शीतल गुप्ता ने तथा आभार माना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाशचन्द्र खंडेलवाल ने।  

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की शोधार्थी डॉ. ज्योत्सना कुमारी वर्मा को शिक्षाशास्त्र में पीएच.डी. की उपाधि

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली की शोधार्थी ज्योत्सना कुमारी वर्मा को शिक्षाशास्त्र (Ph.D. in Education) विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई है। ज्योत्सना वर्मा ने "वरिष्ठमाध्यमिकविद्यार्थिनां समायोजनस्य शैक्षिकोपलब्धेश्च सन्दर्भे अभिभावकैः सह तेषां मनः-सामाजिकद्वन्द्वस्य अध्ययनम् (A Study of Psycho-Social Conflicts of Senior-Secondary Students with their Parents in the Context of Adjustment and Academic Achievement)" विषय पर अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह शोधकार्य प्रो. कुलदीप शर्मा, आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के निर्देशन तथा डॉ. पारुल सिंह, सहायकाचार्या, एनसीईआरटी, नई दिल्ली के सह-मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। शोधप्रबन्ध का मूल्यांकन राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति की शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. के. कादम्बिनी तथा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. कुलदीप सिंह ने बाह्य परीक्षक के रूप में किया। शोध में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के मध्य मनः-सामाजिक द्वन्द्व, समायोजन तथा शैक्षिक उपलब्धि के पारस्परिक सम्बन्धों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त होने पर विश्वविद्यालय परिवार, गुरुजनों, सहकर्मियों एवं शुभचिन्तकों ने डॉ. ज्योत्सना कुमारी वर्मा को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं।  

    अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान-ABRSM प्रदेश स्तरीय प्रभावी प्रार्थना सभा कार्यशाला संपन्न..!

    प्रार्थना सभा से बच्चों में संस्कारवान शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना हो- हनुमान सिंह राठौड़ कार्यशाला में राजस्थान के प्रत्येक जिलों के प्रतिनिधियों सहित शिक्षा जगत के अनेक पदाधिकारी और शिक्षक बंधु उपस्थित रहे। अजमेर, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के तत्वावधान में आयोजित " प्रभावी प्रार्थना सभा राज्य स्तरीय कार्यशाला' का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। विद्यालय में प्रार्थना सभा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि प्रार्थना सभा केवल एक दैनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वह धुरी है जिससे बच्चों में संस्कारवान शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना होती है। शिक्षकों को अपने व्यवहार एवं आचरण से बालकों के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए, क्योंकि शिक्षक ही बालकों के लिए अनुकरणीय होते हैं। हमारा संकल्प होना चाहिए कि 'हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ बने' और इसका प्रारंभ प्रभावी प्रार्थना सभा से ही होता है। अतः हम सभी शिक्षकों को यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे विद्यालय की प्रार्थना सभाएं अत्यंत श्रेष्ठ, ऊर्जावान एवं प्रभावी बनें।" सत्र की अध्यक्षता करते हुए संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि "शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे प्रार्थना सभा को केवल ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बनाएं। उन्होंने कहा कि "यदि हम प्रार्थना सभा के समय का सही एवं योजनाबद्ध उपयोग कर लें, तो हम एक अनुशासित, संवेदनशील और संस्कारित भावी पीढ़ी का निर्माण कर सकते हैं। हमारे संगठन का मुख्य उद्देश्य हर विद्यालय तक इस चेतना को पहुँचाना है ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति, नैतिक मूल्यों और देश की गौरवशाली जड़ों से मजबूती से जुड़ी रहे।" द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता, शिक्षाविद एवं प्रभावी प्रार्थना सभा के प्रदेश संयोजक संदीप जोशी ने अपने प्रभावी उद्बोधन में प्रार्थना सभा के माध्यम से पंचकोश विकास' (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोष) एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की अवधारणा को व्यापक और वैज्ञानिक रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा बच्चों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा उठाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रार्थना सभा विद्यार्थियों में से हताश, निराशा और दुर्बलता को दूर करके उनमें उत्साह उमंग और चिंतन के स्वस्थ दृष्टिकोण का विकास कर सकती है। उन्होंने प्रभावी प्रार्थना सभा के लिए पुस्तक संस्कार सरिता के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री कैलाश चंद कच्छावा ने कहा कि किसी भी रचनात्मक बदलाव को धरातल पर उतारने के लिए उचित प्रबंधन और शिक्षकों के सामूहिक सहयोग की आवश्यकता होती है। जब तक हर शिक्षक प्रार्थना सभा को संस्कार निर्माण की पहली सीढ़ी नहीं मानेगा, तब तक हम अपेक्षित परिणाम नहीं पा सकते।" -- व्यावहारिक सत्र: शिक्षकों के नवाचार और श्रेष्ठ प्रयोग कार्यशाला के व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) सत्र के अंतर्गत प्रदेशभर से आए प्रतिभागी शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यशाला में आए शिक्षकों ने व्यावहारिक सत्र के अंतर्गत अपने-अपने विद्यालयों में किए जा रहे प्रार्थना सभा से जुड़े श्रेष्ठ प्रयोगों, रचनात्मक गतिविधियों एवं विशेष नवाचारों की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें अन्य शिक्षकों ने भी अपने विद्यालयों में लागू करने का संकल्प लिया। -- कार्यशाला के आगामी चरण इस गरिमामयी कार्यशाला में राजस्थान के सभी जिलों के चयनित शिक्षकों ने भाग लिया। आगामी योजना के तहत प्रांतीय स्तर पर इस सफल आयोजन के बाद, संगठन द्वारा दूसरे चरण में राजस्थान के सभी जिलों में इस प्रकार की जिला स्तरीय प्रभावी प्रार्थना सभा कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा अपने-अपने जिलों के विद्यालयों की प्रार्थना सभा को प्रभावी एवं संस्कारवान बनाने की दिशा में सक्रिय, निरंतर एवं व्यावहारिक प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान और उपस्थित शिक्षकों के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन इन्द्रा शर्मा ने किया । इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष भंवर सिंह राठौड़ , जिला संगठन मंत्री सत्यनारायण शर्मा,जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नरूका,जिला मंत्री गुमान सिंह जादौन,जिला कोषाध्यक्ष नासिर काठात सहित अनेक कार्यकर्त्ता बंधु उपस्थित रहे।  

    बिट्स पिलानी में नवाचार, शोध एवं स्टार्टअप संस्कृति के लिए विश्व स्तरीय लैब्स उपलब्ध- डॉ अनिल वाॅली

    जयपुर। राजस्थान में नवाचार, उद्यमिता एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भामाशाह टेक्नो हब, जयपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला "अनलॉकिंग राजस्थान्स स्टार्टअप पोटेंशियल : बिट्स बायोसाइटीआईएच नेक्सस – नवाचार एवं उद्यमिता के अवसर" अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला का आयोजन बिट्स बायोसाइटीआईएच फाउंडेशन, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज (आईएसएलएस), लेट्स स्टार्ट तथा आईस्टार्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर इस आयोजन का स्टार्टअप कैटेलिस्ट रहा। उद्घाटन सत्र में प्रो. सुधीर कुमार बराई, निदेशक, बिट्स पिलानी, प्रदीप ओझा, निदेशक, एमएसएमई, प्रो. अशोक कुमार, अध्यक्ष, आईएसएलएस तथा डॉ. अनिल वाली ने नवाचार आधारित उद्यमिता को राजस्थान के विकास का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु फैकल्टी इनोवेशन एवं स्टार्टअप ट्रांसलेशन (एफआईएसटी) अनुदान कार्यक्रम का भी शुभारम्भ किया गया, जिसके अंतर्गत नवाचार आधारित परियोजनाओं को ₹75 लाख तक की सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एआईसीटीई के नवाचार प्रकोष्ठ से आये डॉ. दीपन साहू, "प्रयोगशाला से बाजार तक" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया तथा शोध आधारित नवाचारों के व्यावसायीकरण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। दोनों दिनों में नीति, वित्तपोषण, निवेश, शैक्षणिक सहयोग तथा स्थानीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। इनमें श्री महावीर प्रताप शर्मा (स्विशिन वेंचर्स), डॉ. शीनू झंवर (टाई राजस्थान), अनिला चोरड़िया (एमएसएमई), डॉ. अनिल वाली, प्रो. अशोक कुमार, विकास रुस्तगी, प्रो. सुमिता कच्छवाहा, डॉ. सुनील छींपा सहित अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चाओं का संचालन डॉ. अक्षय जैन तथा डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति ने किया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस आयोजित आइडियाथॉन एवं स्टार्टअप पिचिंग प्रतियोगिता में राज्यभर से चयनित नवाचारकर्ताओं एवं स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने अभिनव विचार एवं व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत किए। निवेशकों एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया तथा संभावित निवेश एवं इन्क्यूबेशन अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति ने बिट्स बायोसाइटीह फाउंडेशन की अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाओं—ओमिक्स लैब, डिवाइस लैब, फैब्रिकेशन लैब, बायोसेंसर लैब तथा इन्क्यूबेशन सुविधाओं—का विस्तृत परिचय कराया और प्रतिभागियों को उपलब्ध सहयोग योजनाओं की जानकारी दी। समापन समारोह में श्री कुलदीप रांका, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने नवाचार आधारित उद्यमिता को राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए युवाओं से रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो. सुमिता कच्छवाहा तथा प्रो. अशोक कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नवाचारकर्ताओं एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार, प्रमाण-पत्र एवं विशेष सम्मान प्रदान किए गए। चयनित स्टार्टअप्स को निवेशकों से संवाद, इन्क्यूबेशन सहयोग तथा आगे की मेंटरशिप के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला ने अपने सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करते हुए राजस्थान में नवाचार, अनुसंधान आधारित उद्यमिता तथा स्टार्टअप संस्कृति को नई गति प्रदान की है। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, युवा नवाचारकर्ताओं तथा स्टार्टअप संस्थापकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम की सफलता पर आयोजकों प्रो. हेमंत पारीक, डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति तथा डॉ. सुनील छींपा ने सभी मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, निवेशकों, पैनल विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों, सहयोगी संस्थानों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से यह कार्यशाला राजस्थान के नवाचार एवं स्टार्टअप परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई।  

    उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा बढ़ी, हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ रहे निहंग जत्थे को लेकर प्रशासन अलर्ट

    Yugcharan News / 26 जून 2026 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर गुरुवार देर रात उस समय सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई जब निहंग सिखों का एक बड़ा जत्था हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और सीमा पर निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन के अनुसार सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। हालात को देखते हुए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और यातायात को नियंत्रित किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की सूचना मिली, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, त्वरित प्रतिक्रिया दल और अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, जत्थे के कुछ सदस्यों ने अपने साथियों की गिरफ्तारी को लेकर नाराज़गी जताई और उनकी रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई होने तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा। हेमकुंड साहिब देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पहले से ही व्यापक तैयारियां करता है। अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा स्थिति के बावजूद यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहों से दूर रहने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार की गलत जानकारी स्थिति को और जटिल बना सकती है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो अतिरिक्त बल भी तैनात किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य बातचीत और कानून के दायरे में रहकर स्थिति का समाधान निकालना है ताकि किसी भी पक्ष को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा और संवाद दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी संवेदनशील परिस्थिति में प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच शांतिपूर्ण संवाद से समाधान निकलने की संभावना अधिक रहती है। इसी दिशा में अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल सीमा क्षेत्र में स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुणे किले से युवक की मौत मामले में नया मोड़, आरोपी युवती के माता-पिता ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की

    Yugcharan News / 26 जून 2026 महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस मामले में गिरफ्तार युवती के माता-पिता ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद उनकी बेटी दोषी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सबसे कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे निष्पक्ष जांच के पक्ष में हैं और किसी भी प्रकार की रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में दर्ज बयानों, तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मृतक युवक और आरोपी युवती की शादी इसी वर्ष तय बताई जा रही थी। दोनों परिवार लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और विवाह की तैयारियां भी चल रही थीं। ऐसे में इस घटना ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। आरोपी युवती के माता-पिता ने कहा कि मृतक उनके लिए भी परिवार के सदस्य जैसा था और उसकी मृत्यु से उन्हें भी उतना ही दुख पहुंचा है। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी ने कभी विवाह को लेकर किसी गंभीर असहमति की जानकारी उन्हें नहीं दी थी। यदि उसे किसी प्रकार की परेशानी थी तो उसने परिवार के साथ खुलकर चर्चा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के अपना काम करने दिया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। पुलिस इस मामले में आरोपी युवती और एक अन्य आरोपी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों के अनुसार घटना से पहले दोनों के बीच संपर्क, यात्रा का विवरण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और क्या इसके पीछे कोई पूर्व योजना थी। मामले से जुड़े कुछ दावों और बयानों की भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के बयान को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता और सभी तथ्यों का सत्यापन कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। इसलिए मामले से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी गई है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहें फैलाने या अपुष्ट दावों को साझा करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा किया जाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और प्रत्यक्ष गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी आरोपी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय केवल न्यायालय ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। दोनों परिवारों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उम्मीद जताई है कि सभी तथ्यों के सामने आने के बाद न्याय सुनिश्चित होगा। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने तक मामले के प्रत्येक पहलू की सावधानीपूर्वक पड़ताल की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, हेमकुंड साहिब की ओर बढ़े निहंग श्रद्धालुओं को लेकर बढ़ी सतर्कता

    Yugcharan News / 26 जून 2026 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर गुरुवार देर रात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब निहंग सिखों का एक बड़ा जत्था हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचा। प्रशासन द्वारा लगाए गए सुरक्षा अवरोधों के बीच कुछ स्थानों पर तनावपूर्ण माहौल बना, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी। प्रशासन के अनुसार सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को एहतियात के तौर पर तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। सुरक्षा अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की। बताया जा रहा है कि जत्था पंजाब से उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ था। सीमा पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत का दौर भी चला। कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग के पास धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई थी। दंगा नियंत्रण उपकरणों से लैस पुलिस बल, स्थानीय प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता शांति बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रदर्शन कर रहे निहंग समूह ने अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रशासन के सामने बात रखी। उन्होंने कहा कि वे संबंधित मामले में गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी निर्णय के लिए कानून का पालन किया जाएगा। हेमकुंड साहिब हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। ऐसे में प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। सीमा क्षेत्र में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल भी तैनात किया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार यात्रा मार्ग पर सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही आम लोगों को सलाह दी गई है कि यदि वे इस मार्ग से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो प्रशासन द्वारा जारी यातायात और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रशासन ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की स्थिति का समाधान बातचीत और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था सख्त है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव, एशियाई शेयर बाजारों पर भी पड़ा असर

    Yugcharan News / 26 जून 2026 मध्य पूर्व में बढ़ते समुद्री सुरक्षा संबंधी तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में पहले तेज़ उछाल दर्ज किया गया, हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता लौटने से कीमतों में आंशिक गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी मार्ग से विभिन्न देशों तक पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर सीधे ऊर्जा बाजारों और निवेशकों की धारणा पर पड़ता है। तेल की कीमतों में पहले तेजी, फिर आई नरमी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार शुक्रवार को कारोबार के शुरुआती घंटों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि बाद में निवेशकों द्वारा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के बाद कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अभी भी क्षेत्रीय हालात पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। यदि समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। समुद्री सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता हाल के घटनाक्रमों के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। कुछ जहाजों की आवाजाही पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और शिपिंग कंपनियाँ भी जोखिम का आकलन कर रही हैं। समुद्री परिवहन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है क्योंकि इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू की, जिसके चलते कई प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊँची बनी रहती है तो इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। वैश्विक व्यापार पर संभावित प्रभाव होर्मुज़ जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं। यदि सुरक्षा कारणों से जहाजों की आवाजाही धीमी होती है तो कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का असर परिवहन, विमानन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप कई देशों में महँगाई पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका रहती है। निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर वित्तीय बाजारों में इस समय निवेशकों का ध्यान पूरी तरह मध्य पूर्व की स्थिति पर केंद्रित है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, जबकि किसी भी नई घटना से तेल और शेयर बाजारों में फिर से अस्थिरता देखने को मिल सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए जाने वाले कदम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों की राय ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो कीमतों में अत्यधिक उछाल की संभावना कम होगी। वहीं किसी भी लंबे व्यवधान की स्थिति में ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। आगे क्या? फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। शिपिंग कंपनियाँ, ऊर्जा उत्पादक देश और निवेशक सभी आगामी घटनाक्रमों का इंतजार कर रहे हैं। यदि समुद्री मार्गों पर सामान्य संचालन बना रहता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन सुरक्षा संबंधी किसी भी नई चुनौती का असर वैश्विक तेल कीमतों और वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।

    वेनेजुएला में दो शक्तिशाली भूकंपों से भारी तबाही, मृतकों की संख्या 235 पहुँची, राहत एवं बचाव अभियान जारी

    Yugcharan News / 26 जून 2026 वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई है। अधिकारियों के अनुसार अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में मलबा हटाने का कार्य अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका बनी हुई है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, सड़कों में दरारें आ गईं और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी राष्ट्रीय आपदा राहत एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग, पुलिस और स्वयंसेवकों की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। भारी मशीनों की मदद से क्षतिग्रस्त इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है ताकि यदि कोई व्यक्ति अभी भी जीवित हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के बाद शुरुआती कुछ दिन बचाव कार्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण राहत दल दिन-रात बिना रुके प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। अस्पतालों पर बढ़ा दबाव भूकंप के बाद बड़ी संख्या में घायल लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की टीमें लगातार मरीजों का उपचार कर रही हैं। कई अस्पतालों में अतिरिक्त चिकित्सा व्यवस्था की गई है ताकि अधिक से अधिक लोगों को समय पर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रशासन ने घायलों के उपचार के लिए अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। कई इलाकों में भारी नुकसान भूकंप के कारण कई रिहायशी मकान, व्यावसायिक इमारतें और सार्वजनिक ढाँचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ स्थानों पर इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि कई भवनों में गंभीर दरारें आने के कारण लोगों को उन्हें खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों, बिजली व्यवस्था और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा है। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित रही, जबकि कुछ इलाकों में संचार सेवाएँ भी प्रभावित हुईं। संबंधित एजेंसियाँ इन सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने का प्रयास कर रही हैं। राहत शिविरों की स्थापना प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयाँ, कंबल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिन लोगों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके लिए अस्थायी आवास की भी व्यवस्था की जा रही है। राहत एजेंसियाँ बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं का भी ध्यान रख रही हैं। स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भी राहत सामग्री वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। लापता लोगों की तलाश जारी भूकंप के बाद कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए विशेष सहायता केंद्र बनाए हैं, जहाँ लोग अपने परिजनों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। राहत दल लगातार मलबे में खोज अभियान चला रहे हैं और प्रत्येक सूचना की गंभीरता से जाँच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट खबर को साझा करने से बचें। अंतरराष्ट्रीय सहायता की संभावना प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों ने सहायता देने की इच्छा व्यक्त की है। मानवीय सहायता के तहत चिकित्सा सामग्री, राहत उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की आपदा से उबरने में समय लगेगा और पुनर्निर्माण का कार्य कई महीनों तक जारी रह सकता है। पुनर्निर्माण की चुनौती राहत अभियान के साथ-साथ प्रशासन अब क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण की योजना भी तैयार कर रहा है। इंजीनियर प्रभावित इमारतों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि किन भवनों की मरम्मत संभव है और किन्हें पूरी तरह दोबारा बनाना होगा। हजारों परिवार फिलहाल अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। आने वाले दिनों में उनके पुनर्वास, रोजगार और आवश्यक सेवाओं की बहाली प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। लोगों से सतर्क रहने की अपील विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बड़े भूकंपों के बाद आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करने और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।   राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जैसे-जैसे नए इलाकों तक राहत दल पहुँच रहे हैं, वैसे-वैसे नुकसान का वास्तविक आकलन सामने आ रहा है।

    भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण में युवाओं की सहभागिता सराहनीय : डॉ. अमृता कौर

    राष्ट्र सम्मत/नागपुर। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं इम्म्वर्स एआई के संयुक्त तत्वावधान में नागपुर में आयोजित 21 दिवसीय समर स्कूल "बिल्डिंग सिविलाइजेशनल एआई फ्रॉम भारत" के दसवें दिवस पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग की सहायक आचार्या एवं समन्वयक डॉ. अमृता कौर ने प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य और पांडुलिपि संपदा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। संस्कृत और एआई का समन्वय भविष्य के ज्ञान-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर के संरक्षण का सशक्त प्रयास बताया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. लीना सक्करवाल के संरक्षण में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन एवं निर्देशन प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, सह संयोजक सहायक आचार्य योगेंद्र दीक्षित द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के 23 प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों से चयनित 30 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के अंतर्गत पांडुलिपियों एवं प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) तकनीक द्वारा जनित पदों एवं वाक्यों का प्रतिभागियों द्वारा सत्यापन एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इससे भारतीय ज्ञान-संपदा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित एवं शोधोपयोगी बनाने का कार्य आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण उन्हें संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक समन्वय को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम में इम्म्वर्स एआई के प्रोजेक्ट मैनेजर नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े तथा उन्होंने परियोजना की प्रगति, उद्देश्यों और तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। समर स्कूल के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि विज्ञान, ग्रंथों के डिजिटलीकरण, भाषा प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग तथा एआई आधारित नवाचारों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय: नीतू यादव को भूगोल विषय में मिली पीएच.डी. की उपाधि

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर ने सोशल साइंस फैकल्टी के भूगोल (Geography) विभाग की शोध छात्रा नीतू यादव को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि के लिए योग्य घोषित करते हुए प्रोविज़नल सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। ​नीतू यादव ने विश्वविद्यालय के जियोग्राफी विभाग के प्रो. आर. एन. शर्मा के निर्देशन में अपना शोध कार्य पूरा किया है। उनके शोध का मुख्य विषय "शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में सूखा नियोजन तथा प्रबंधन - एक भौगोलिक अध्ययन" था।