Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Latest

    राजस्थान बजट शिक्षा प्रणाली के लिए एक दूरदर्शी विज़न दर्शाता

     वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा प्रस्तुत राजस्थान बजट शिक्षा प्रणाली के लिए एक दूरदर्शी विज़न दर्शाता है। सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों में हर महीने प्रशिक्षित काउंसलर्स के माध्यम से अनिवार्य स्ट्रेस कम मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेशन आयोजित करना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस छात्रों में आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा। एक मजबूत स्कूली शिक्षा इकोसिस्टम के लिए गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और छात्र-केंद्रित लर्निंग आउटकम्स को लगातार प्रोत्साहित करना आवश्यक है। कुल मिलाकर, यह बजट ऐसी शिक्षा प्रणाली की नींव मजबूत करता है जो नवाचार को बढ़ावा देती है, छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करती है और उन्हें केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करती है। रितु शर्मा, धारव हाई स्कूल, विद्याधर नगर, जयपुर   

    उच्च शिक्षा की डिजिटल स्वप्न और पैशन का कड़वा यथार्थ प्रोफेसर अशोक कुमार

    उच्च शिक्षा की डिजिटल स्वप्न और पैशन का कड़वा यथार्थ    प्रोफेसर अशोक कुमार  पूर्व कुलपति गोरखपुर, कानपुर विश्वविद्यालय एवं विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय      उच्च शिक्षा का डिजिटल स्वप्न और पेंशन का कड़वा यथार्थ राजस्थान का बजट 2026-27 एक ऐसे चौराहे पर खड़ा दिखाई देता है, जहाँ भविष्य की तकनीक और अतीत की देनदारियों के बीच एक गहरा असंतुलन है। वित्त मंत्री द्वारा पेश इस बजट ने जहाँ एक ओर 'डिजिटल राजस्थान' और 'स्किल इंडिया' की तर्ज पर उच्च शिक्षा को आधुनिक कलेवर देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे बुनियादी संकटों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। तकनीक की चमक और रोजगार का वादा बजट में युवाओं के लिए की गई घोषणाएं निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं। राजस्थान स्टेट टेस्टिंग एजेंसी का गठन भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है, जो बार-बार होने वाले पेपर लीक के कलंक को धोने में सहायक हो सकता है। साथ ही, 14 नए मानव संसाधन संस्थानों की स्थापना और विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण का प्रस्ताव यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा को वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालना चाहती है। ₹10 लाख तक के ब्याज मुक्त ऋण की घोषणा युवाओं को 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब प्रोवाइडर' बनाने की एक गंभीर कोशिश नज़र आती है। पेंशन का अनसुलझा सवाल: एक बड़ी विफलता किन्तु, उच्च शिक्षा का यह उज्ज्वल भविष्य उन विश्वविद्यालयों की नींव पर टिका है, जो आज आर्थिक बदहाली के कगार पर हैं। बजट का सबसे निराशाजनक पहलू विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त और वर्तमान कर्मचारियों की पेंशन को लेकर सरकार की 'चुप्पी' है। पुरानी पेंशन योजना को लेकर वैधानिक स्पष्टता का न होना और इसके लिए किसी समर्पित 'कॉर्पस फंड' की घोषणा न करना, हजारों परिवारों को अनिश्चितता के अंधेरे में छोड़ने जैसा है। राज्य के पुराने विश्वविद्यालयों पर पेंशन का बोझ इतना अधिक है कि वे अपनी आय का बड़ा हिस्सा इसी में खर्च कर रहे हैं। ऐसे में बजट द्वारा उन्हें "आय के स्वयं के स्रोत विकसित करने" की सलाह देना, वास्तव में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। इसका सीधा परिणाम छात्र शुल्कों में वृद्धि और शिक्षा के महंगे होने के रूप में सामने आएगा, जो 'समावेशी शिक्षा' के लक्ष्य के विपरीत है। अधूरा सुधार और अपेक्षाएं सातवें वेतन आयोग के अवशेष और समय पर पेंशन भुगतान के स्थाई समाधान (जैसे ट्रेजरी से जुड़ाव) की मांग को अनसुना करना यह संकेत देता है कि सरकार उच्च शिक्षा के 'सॉफ्टवेयर' (डिजिटल कोर्स और ए आई ) पर तो ध्यान दे रही है, लेकिन इसके 'हार्डवेयर' (शिक्षक और कर्मचारी) की सुध लेना भूल गई है। उच्च शिक्षा में शोध के लिए किसी विशेष अनुदान की अनुपस्थिति भी यह बताती है कि हमारी प्राथमिकता केवल डिग्रियां बांटने तक सीमित है, मौलिक ज्ञान सृजन पर नहीं। निष्कर्ष कुल मिलाकर, यह बजट उच्च शिक्षा के लिए 'ऊपर से चमकदार और भीतर से खोखला' नजर आता है। नई संस्थाएं और विदेशी भाषाएं तब तक फलदायी नहीं होंगी, जब तक कि विश्वविद्यालयों का मूल ढांचा वित्तीय संकट से जूझता रहेगा। सरकार को यह समझना होगा कि एक सुरक्षित और संतुष्ट शिक्षक ही एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकता है। जब तक पेंशन और स्थाई वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों का हल नहीं निकलता, तब तक उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण के दावे महज कागजी ही रहेंगे।

    ‘रिवर्स ब्रेनस्टॉर्मिंग चैलेंज’ का हुआ आयोजन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के बीबीए विभाग द्वारा “रिवर्स ब्रेनस्टॉर्मिंग चैलेंज” का सफल आयोजन किया गया। रिवर्स ब्रेनस्टॉर्मिंग की इस अनूठी गतिविधि में छात्राओं ने समस्याओं को उल्टे दृष्टिकोण से समझकर उनके सकारात्मक एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में रचनात्मक एवं नवाचारी सोच का विकास करना था। कार्यक्रम की थीम “गेट रेडी टू थिंक आउट ऑफ द बॉक्स” के अनुरूप छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में कुल 23 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें 51 छात्राओं ने बोर्ड, पेपर एवं पीपीटी के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किये। प्रतिभागियों ने अपने प्रस्तुतीकरण में रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं टीमवर्क का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं को प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने छात्राओं के नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक सोच एवं समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। यह आयोजन डॉ. प्रीति अग्रवाल, सहायक आचार्य के निर्देशन में किया गया।

    रयान इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक उत्सव में सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शिक्षा का अनूठा मेल

    Brave the Present, Rise to the Future के संकल्प के साथ मनाया गया मॉन्टेसरी ग्रेजुएशन, पूर्व छात्रों ने दी प्रभावी प्रस्तुतियाँ जयपुर। निर्माण नगर स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में मॉन्टेसरी ग्रेजुएशन और वार्षिक समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह उत्सव विद्यालय की गौरवशाली यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसमें रयान समूह के 50 सफल वर्षों का जश्न भी शामिल रहा। पूरे कार्यक्रम का खाका चेयरमैन डॉ. ऑगस्टीन फ्रांसिस पिंटो और मैनेजिंग डायरेक्टर ग्रेस पिंटो के नेतृत्व में तैयार किया गया था। सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक संदेश समारोह की शुरुआत आध्यात्मिक और शांत वातावरण में विशेष प्रार्थना के साथ हुई। विद्यालय ने अपनी समावेशी संस्कृति का परिचय देते हुए अतिथियों का स्वागत हिंदी, अंग्रेजी और कश्मीरी भाषाओं में किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय की थीम "Brave the Present, Rise to the Future" रही, जिसका उद्देश्य छात्रों को वर्तमान चुनौतियों का साहस से सामना करने के लिए प्रेरित करना था। विद्यार्थियों ने मंच पर भारत के विभिन्न कोनों की झलक पेश की। इसमें मणिपुरी, ओडिसी, हिमाचली और दक्षिण भारतीय नृत्यों की प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर दिया। वहीं, “You Are Special” नामक संगीतमय नाटिका और लाइव ऑर्केस्ट्रा ने बच्चों को अपनी विशिष्टता पहचानने का संदेश दिया। प्रमुख हस्तियों ने बढ़ाया उत्साह इस मेगा इवेंट में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में डॉ. रविन्द्र सिंह राव (उपाध्यक्ष, RHL), नरेश कुमार गोयल (IAS), सुमित धड़डा (FCA, CS), नवीन शर्मा (अभिनेता), डॉ. जी.के. तिवारी (सेवानिवृत्त IAS), जगदीश चंद्र शर्मा (सेवानिवृत्त DIGP), रहमान शेख (कलाकार), गगन मिश्रा (NCERT), डॉ. कविता माथुर (लेखिका) और आशीष जोपत (वरिष्ठ संवाददाता) उपस्थित रहे। इन हस्तियों ने छात्रों के कौशल की सराहना की और उन्हें भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया। उपलब्धियों का सम्मान: रयान अचीवर्स और प्रिंस-प्रिंसेस अवार्ड्स समारोह के दौरान ग्रेजुएशन सेरेमनी का क्षण काफी भावुक रहा, जहाँ नन्हे बच्चों ने अपनी प्राथमिक शिक्षा के पड़ाव को पार किया। इस अवसर पर मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया:  * रयान अचीवर्स अवार्ड: मॉन्टेसरी से कक्षा 5 तक के चयनित विद्यार्थियों को।  * रयान प्रिंस एवं प्रिंसेस अवार्ड: मॉन्टेसरी से कक्षा 9 तक के प्रतिभाशाली छात्रों को। लोगो अनावरण और समापन कार्यक्रम में रयान समूह के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में डायरेक्टर सोनल द्वारा 'लोगो अनावरण' किया गया, जो कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। पूर्व विद्यार्थियों (Alumni) ने भी अपनी प्रस्तुतियों से पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। अंत में, डायरेक्टर सोनल के प्रेरणादायी संबोधन और प्राचार्य के समापन भाषण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आभार प्रदर्शन हिंदी, अंग्रेजी और मलयालम भाषाओं में किया गया। सामूहिक स्वर और भव्य समापन प्रस्तुति ने इस उत्सव को दर्शकों के मानस पटल पर हमेशा के लिए अंकित कर दिया।    

    पशुपालन एवं डेयरी सेक्टर को मजबूती देगा राज्य सरकार का बजट : जोराराम कुमावत

    जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट विकसित राजस्थान- 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस कदम है। कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट “समृद्ध किसान, सशक्त पशुपालक और विकसित राजस्थान” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रावधानों से राज्य में पशुपालन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।  उन्होंने कहा कि बजट में पशुपालन, डेयरी मूल्य शृंखला, सहकारी निवेश को लेकर जो प्रोत्साहन दिए गए हैं, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे। मंत्री ने इसे महिलाओं, छोटे किसानों और ग्रामीण गरीबों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान (विकसित भारत) के लिए एक निर्णायक कदम माना। कुमावत ने पशुपालन से किसानों की आय में 25 से 30 प्रतिशत योगदान को स्वीकारते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उद्यमिता विकास और आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एनसीआर, यूपी व एमपी में सरस खोलेगा आउटलेट्स  कुमावत का मानना है कि बजट में किए गए प्रावधान डेयरी सेक्टर को मजबूती तो देगें ही किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य सरकार के ‘विकसित प्रदेश के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बजट डेयरी और पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने डेयरी सेक्टर के विस्तार के लिए 2000 करोड़ के कोरपस फंड की घोषणा का स्वागत करते हुए, कहा कि सरस ब्रांड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उदेश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत 5 रुपए प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष में इस योजना के तहत 700 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभांवित होंगे। इसके अलावा एक लाख पशुपालकों को दूध आधारित उत्पाद-शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। दुग्ध उत्पादन प्रोसेसिंग केपेसिटी 200 लाख लीटर करेंगे  पशुपालन एवं डेयरी मंत्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन प्रोसेसिंग केपेसिटी को विकसित राजस्थान-2047 तक वर्तमान 52 लाख लीटर प्रतिदिन से बढाकर 200 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही दुग्ध व दुग्ध उत्पादों की बिक्री केंद्रों की संख्या वर्तमान 27 हजार से बढाकर एक लाख करना भी प्रस्तावित है। इसी के तहत आगामी वर्ष में 1000 नवीन दुग्ध संकलन केंद्र खोले जाएंगे, वहीं, 500 नए डेयरी बूथ आवंटित करना प्रस्तावित है। कुमावत ने कहा कि अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट खोलने हेतु 200 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। बारां व सिरोही में 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसी तरह जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढीकरण किया जाएगा। 200 ग्राम पंचायतों में खुलेंगे पशु चिकित्सा उप केंद्र  पशुपालन मंत्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों को पशु चिकित्सा संस्थानों की सुविधाओं का समुचित लाभ मिल सके, इसके लिए पशुधन संख्या एवं निर्धारित दूरी जैसे मानकों के आधार पर आगामी दो वर्षाें में प्रदेशभर में 200 नए पशु चिकित्सा उप केंद्र खोले जाएंगे। साथ ही 25 पशु चिकित्सा उप केंद्रों को चिकित्सालयों व 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों के रूप में क्रमोन्नत किया जाएगा।  गोशालाओं का होगा आर्थिक सुदृढीकरण  गोपालन मंत्री ने बताया कि बजट घोषणा में प्रदेश की गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। इसके तहत 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी। गो-उत्पादों को बढावा देने के लिए राज्य स्तरीय प्रर्दशनी लगाई जाएगी। प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चितौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली जिलों में सुविधायुक्त ब्लेकर्याड पोल्ट्री के 35 महिला शक्ति पोल्ट्री समूह स्थापित किए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक समूह को 10 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा। त्यौहारों पर मंदिरों की होगी विशेष साज-सज्जा  देवस्थान मंत्री कुमावत ने कहा कि देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में आगामी वर्ष में 6 हजार वरिष्ठजनों को हवाई यात्रा व 50 हजार को एसी ट्रेन से देशभर के विभिन्न तीर्थ स्थलों की निःशुल्क यात्रा करवाई जाएगी। इसके साथ ही देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं की मरम्मत व जीर्णोद्धार के कार्य करवाए जाएंगे। विभाग की रिक्त जमीनों पर धर्मशालाओं के निर्माण व संचालन हेतु बीओटी आधारित नीति बनाई जाएगी। मंत्री कुमावत ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर- होली, दीपावली, महाशिवरात्रि, रामनवमी, गुरुपूर्णिमा जैसे प्रमुख त्यौहारों को उत्साहपूर्वक मनाने के लिए देवस्थान विभाग के मंदिरों में विशेष साज-सज्जा व आरती र्कायक्रम आयोजित करने हेतु 13 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेशभर के विभिन्न 10 मंदिरों में 10 करोड़ के कार्य करवाए जाएंगे ।

    बोर्डरूम से मैदान तक: ‘क्लैश ऑफ कॉरपोरेट्स’ ने जयपुर में भरा जोश

    जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने अपने प्रमुख कॉरपोरेट स्पोर्ट्स इवेंट ‘क्लैश ऑफ कॉरपोरेट्स’ के पांचवें संस्करण का सफल आयोजन किया, जिसमें विभिन्न उद्योगों से जुड़े पेशेवरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन खेल भावना, टीमवर्क और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता का जीवंत उत्सव बना। इस वर्ष 40 से अधिक कंपनियों से 800 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए और अंतिम दिन तक प्रतिभागियों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती रही। टूर्नामेंट का औपचारिक उद्घाटन डॉ. दानेश्वर शर्मा, निदेशक प्रभारी, एवं डॉ. आकाश दुबे, डीन प्रशिक्षण द्वारा किया गया। इस अवसर पर करियर मैनेजमेंट सेंटर (सीएमसी) की टीम, जिसमें  प्रफुल जैन, डॉ. प्रिया शर्मा,  शिरीष पारेख,  पीयूषमा पारेख एवं  साक्षी दीप शामिल थीं, की उपस्थिति ने आगामी ऊर्जावान खेल आयोजनों के लिए प्रेरक वातावरण तैयार किया। दो दिवसीय इस खेल महोत्सव में डेलॉइट, सेलेबल टेक्नोलॉजीज, क्यू डिग्रीज, फोर्टिस हॉस्पिटल, एचडीएफसी लाइफ, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, स्विगी, टेलीपरफॉर्मेंस, आदित्य बिरला कैपिटल, पायस मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, क्यूएमएस इंडिया लिमिटेड, वीवॉइस लैब्स, आईडीबीआई बैंक, कोटक सिक्योरिटीज, ईएक्सएल सर्विस इंडिया, वैभव ग्लोबल लिमिटेड, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, नारायणा हेल्थ जयपुर सहित कई प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रही। इस आयोजन को डेकाथलॉन ने स्पोर्ट्स पार्टनर, तीखा गांव ने स्नैक्स पार्टनर और फोर्टिस हॉस्पिटल ने हेल्थ पार्टनर के रूप में सहयोग प्रदान किया। इनके सहयोग से पेशेवर खेल व्यवस्थाएं, प्रतिभागियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और पूरे टूर्नामेंट का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया गया। ‘क्लैश ऑफ कॉरपोरेट्स’ में रस्साकशी, शतरंज, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल, कैरम, वॉलीबॉल और क्रिकेट सहित कई खेल विधाओं में रोमांचक एवं खेल भावना से परिपूर्ण मुकाबले देखने को मिले। प्रमुख विजेताओं में क्रिकेट में क्यूएमएस, रस्साकशी पुरुष वर्ग में क्यू डिग्रीज, रस्साकशी मिश्रित वर्ग में अंगारा, शतरंज में अंगारा, बैडमिंटन मिश्रित युगल में एसटीपीएस सूरतगढ़, बैडमिंटन पुरुष एकल में वैभव ग्लोबल लिमिटेड, बैडमिंटन महिला एकल में सेलेबल टेक्नोलॉजीज, पिकलबॉल पुरुष वर्ग में जयपुरिया जयपुर, पिकलबॉल महिला वर्ग में सेलेबल टेक्नोलॉजीज, पिकलबॉल मिश्रित वर्ग में पायस मिल्क, कैरम युगल में क्यू डिग्रीज, कैरम एकल में टेलीपरफॉर्मेंस, टेबल टेनिस मिश्रित युगल एवं पुरुष एकल में अंगारा, बास्केटबॉल में डेलॉइट, पूल में अंगारा तथा वॉलीबॉल में एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड शामिल रहे। समापन समारोह में न केवल विजेताओं का सम्मान किया गया, बल्कि एकता, दृढ़ता और कॉरपोरेट आपसी सहयोग की भावना का भी उत्सव मनाया गया, जिससे ‘क्लैश ऑफ कॉरपोरेट्स’ क्षेत्र में उभरती कॉरपोरेट स्पोर्ट्स संस्कृति का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

    राजस्थान बजट में 'विकसित राजस्थान 2047' के विजन के साथ

    राजस्थान बजट में 'विकसित राजस्थान 2047' के विजन के साथ किसानों, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।  बजट की मुख्य बात यह रही कि इसमें युवाओं को लोन, किसानों को राहत, सोलर पार्क, पेयजल और सड़कें  आदि बुनियादी ढांचा पर फोकस किया गया  बढ़ती आय पर सरकार का अनुमान है कि 2025-26 के अंत तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय ₹1.67 लाख से बढ़कर ₹2.02 लाख हो जाएगी।     सीएमए हरेंद्र कुमार पारीक  पूर्व चेयरमैन, सीएमए जयपुर चैप्टर

    बजट गांव ,गरीब ओर किसान विरोधी:-बगङिया

    राजस्थान खेत और ग्रामीण मजदूर यूनियन के प्रदेश महासचिव राम रतन बगड़िया ने आज राजस्थान विधानसभा में रखें गये बजट को गांव गरीब और किसान विरोधी बताया है! बगङिया ने कहा कि भाजपा के नेता देश और प्रदेश में मनरेगा को खत्म कर जिस "वी बी जी राम जी " को लागू करने से गरीब का भला करने के ढोल पीट रहे हैं ! केन्द्र सरकार ने उस में 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों पर डाल दिया और राजस्थान की भाजपा सरकार ने "वीसी जी राम जी" पर एक भी रुपये का बजट में प्रावधान ना कर के यह स्पष्ट संदेश दिया है की गांव के सबसे गरीब तबके को रोजगार का अधिकार भाजपा ने हमेशा के लिए जिन लिया है!          

    स्काउट व गाइड संगठन युवाओं की सेवा संकल्प से जुड़ी संस्कृति-राज्यपाल

    राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड राज्य स्तरीय पुरस्कार समारोह  -युवा मन बनाकर समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करें    जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि युवा स्वयं के विकास के साथ राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करें। उन्होंने स्काउट गाइड संगठन के युवाओं को दृढ़ संकल्प शक्ति और मन बनाकर समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को अधिकारों की बजाय राष्ट्र और समाज तथा शिक्षा के प्रति कर्तव्य की भावना को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।      बागडे जगतपुरा में आयोजित राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड के राज्य स्तरीय पुरस्कार समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्काउट व गाइड संगठन युवाओं की सेवा संकल्प से जुड़ी संस्कृति से जुड़ा संगठन है। उन्होंने राजस्थान को योद्धाओं की भूमि बताते हुए कहा कि यहां का व्यक्ति शौर्य, वीरता और साहस से जुड़ा है। यहां निरंतर लड़ाइयाँ हुई पर मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पण की भावना रही है।    उन्होंने सेना में यहां के सर्वाधिक युवाओं के होने की चर्चा करते हुए स्काउट गाइड से जुड़े युवाओं को अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने आपात काल में स्काउट गाइड की रही भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।         राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि वह स्वयं स्काउट संगठन में रहे हैं। यह अनुशासन से जुड़ा युवाओं को प्रेरणा देने वाला संगठन है।    स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त निरंजन आर्य ने मुख्य अतिथि राज्यपाल बागडे राज्य मंत्री देवासी, विधायक दर्शन सिंह, वीरेंद्र सिंह एवं अन्य अतिथियों का शाब्दिक स्वागत करते हुए राजस्थान में संगठन की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आर्य ने बताया कि अब तक जितनी भी राष्ट्रीय जंबूरिया हुई है उन सभी में राजस्थान ने सर्वोच्च पदक प्राप्त करते हुए शिखर पर अपना स्थान बनाए रखा है। राष्ट्र में लगभग 70 लाख स्काउट गाइड है जिनमें से 18 लाख स्काउट गाइड के साथ राजस्थान सर्वोच्च स्थान रखता है।   समारोह में विधायक दर्शन सिंह और वीरेंद्र सिंह, अखिल शुक्ला ने भी विचार रखें।     इससे पहले राज्यपाल ने संगठन को उल्लेखनीय आर्थिक सहयोग के लिए राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, विधायक वीरेंद्र सिंह, दर्शन सिंह, कलेक्टर अभिषेक सुराना, नमिता मेहता व अन्य को धन्यवाद बेज, संगठन में उत्कृष्ट कार्यों व सतत सेवा के लिए प्रशिक्षण आयुक्त बन्ना लाल एवं जनसंपर्क प्रभारी नीरज जैन सहित अन्य कार्मिकों एवं कार्यकर्ताओं को मेडल ऑफ मेरिट तथा श्रेष्ठ स्काउट गाइड को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया। स्काउट गाइड ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां के साथ साहसिक कैंप आदि से जुड़ी गतिविधियों का प्रदर्शन किया।

    कपूरी धोबन और भगवान देवनारायण के ग्वाले

     कपूरी धोबन सारे धोबियों की फौज को अपने साथ लेकर गुदलिया तालाब पर आती है और सबको कहती है कि अगर देव की गायें पानी पीने के लिये आये तो उन्हें पानी पीने मत देना और ग्वालों को पकड़ कर मेरे सामने लेकर आना। ये कहकर कपूरी धोबन अपने तम्बू में विश्राम करने चली जाती है। इधर ग्वाले शिखराणी के जंगल में गायें चराने आते हैं, वहां डूंगर पर से देखते हैं कि आज गुदलिया तालाब पर इतनी भीड़ भाड़ और कपड़े धोने की आवाजें आ रही है, क्या बात है ? पदमा पोसवाल और कुछ ग्वालों को भेजकर नापाजी पता करवाते हैं और कहते हैं कि कोई खतरे की बात हो तो लकड़ी पर कपड़ा बांध कर फहरा देना। हम सब दौड़ कर आ जायेगें। पदमा पोसवाल और ६-७ ग्वाले गुदलिया तालाब पर आते हैं तो देखते हैं कि धोबियों की भीड़ लगी हुई है। चारों तरफ कपड़े सुखा रखे हैं और सारे तालाब का पानी खराब कर दिया है। पदमा पोसवाल कहता है, ऐ धोबियों ये सब अपने कपड़े लत्ते समेटो और यहां से भाग जाओ। अभी देवनारायण की गायें आयेगीं तो सारे कपड़े खराब कर देंगी। ये बात सुनकर एक धोबी कहता हैं कि तम्बू में हमारी काकीजी बैठी हुई हैं। ये बात उनको जाकर कहो। गरड़ डांग नाम का ग्वाला जाकर सीधा तम्बू में जा घुसता है और कपूरी धोबन से जाकर कहता है कि अपने सारे कपड़े समेट ले, नहीं तो हमारी गायें सारे कपड़े खराब कर देगीं। कपूरी धोबन तम्बू से बाहर आकर धोबियों से कहती है कि इन ग्वालों को पकड़ कर बान्ध दो। सारे धोबी मिलकर ग्वालों के पीछे दौड़तें हैं। एक ग्वाला लकड़ी के कपड़ा बांध कर हवा में फहरा देता हैं सारे ग्वाले दौड़ते हुए वहां पहुंच जाते हैं और एक-एक धोबी पर दो-दो ग्वाले टूट पड़ते हैं। धोबी तो सारे वहां से भाग जाते हैं और ग्वाले कपूरी धोबन को पकड़ कर पीटने लगते हैं। गेंद्या धोबी वहीं पेड़ पर चढ़ कर छुप जाता है, बाकि सारे धोबी भाग जाते हैं। सारे ग्वाले मिलकर कपूरी धोबन को पीटते हैं और उसके बाल पकड़ कर उसे तालाब में डुबोते हैं और वापस बाहर निकालते हैं। कपूरी धोबन के सारे बाल काट देते हैं और उसे पानी में डुबो-डूबो कर पीटते हैं जिससे कपूरी धोबन अचेत हो जाती है। ग्वाले समझते हैं कि मर गयी है, इसका यही पर दाह संस्कार कर दो और आस-पास के काटें और लकड़ियां इकट्ठी कर ढेर लगा देते हैं। इतनी बात सुनकर कपूरी धोबन उठकर खड़ी हो जाती हैं। सब ग्वाले समझते हैं कि भूतनी कहां से आ गयी और सब उसको मारने लगते हैं। नापाजी सब ग्वालो को रोकते हैं और मना करते हैं इसको अब छोड़ दो इसके पीड़ा हो रही है। इसको अब ठण्डा करने के लिये माथे में दही लगाओ इसके सारे बाल काट लेने से माथे में जलन हो रही है। एक ग्वाला कहता है कि आकड़े का दूध लगाओ उससे सारी पीड़ा दूर हो जायेगी। ग्वाले पास में लगे आंकड़े के पेड़ के पत्ते तोड़ कर उसका दूध इकट्ठा कर धोबन के माथे में लगा देते हैं। जिससे उसके और जोरों से जलन होने लग जाती हैं और वो उछलने लगती है। सारे ग्वाले हंसते हैं और नापा ग्वाल कहता है कि अपनी एक-एक अंगुठी खोलकर इसे देते जाओ और इसके माथे में मारते जाओ। सारे ग्वाले कपूरी धोबन को एक-एक अंगुठी देते जाते हैं और उसके माथे में मारते जाते हैं। कपूरी धोबन के पास अंगुठियों का ढेर लग जाता है। उसे वो अपनी सभी अंगुलियों में पहन कर वापस गांव की ओर आती हैं। और रानीजी के महल मे जाने से पहले एक पड़ोसन के बच्चे को अपनी गोद में उठाकर साथ लाती हैं। रानीजी कहती हैं काकी जी राम-राम। कपूरी धोबन कहती है जीवती रहो, मेरे साथ हुआ वो सब के साथ होए। रानीजी पूछती है काकीजी आपसे साथ क्या हुआ। धोबन कहती है रानीसा गुदलिया तालाब पर छप्पनीयां भैरु प्रकट हुए है। उन्होनें मुझे बच्चा दिया है, मैं वहां पर जाकर लकड़ी लेकर बैठती हूं। देवनारायण के ग्वाले आते हैं, उनको पीटती हूं। मुझे सब एक-एक अंगुठी देते हैं। इसलिए मेरे पास इतनी सारी अंगूठियां हैं। रानी को विश्वास आ जाता है और धोबन को कहती है काकी मेरा कोई बेटा नहीं हैं। एक भूणा को बेटा बनाया था सो वह तो चला गया। क्या मेरे को भी बच्चा दे देगें भैरुजी। धोबन कहती है रानीसा अगर आप छप्पनीयां भैरु की एक जात जिमाओं तो वो आपकी गोद भर देगें।  

    पशुपालन एवं डेयरी सेक्टर को मजबूती देगा राज्य सरकार का बजट : जोराराम कुमावत

    जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट विकसित राजस्थान- 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस कदम है। कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट “समृद्ध किसान, सशक्त पशुपालक और विकसित राजस्थान” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रावधानों से राज्य में पशुपालन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।  उन्होंने कहा कि बजट में पशुपालन, डेयरी मूल्य शृंखला, सहकारी निवेश को लेकर जो प्रोत्साहन दिए गए हैं, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे। मंत्री ने इसे महिलाओं, छोटे किसानों और ग्रामीण गरीबों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान (विकसित भारत) के लिए एक निर्णायक कदम माना। कुमावत ने पशुपालन से किसानों की आय में 25 से 30 प्रतिशत योगदान को स्वीकारते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उद्यमिता विकास और आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एनसीआर, यूपी व एमपी में सरस खोलेगा आउटलेट्स  कुमावत का मानना है कि बजट में किए गए प्रावधान डेयरी सेक्टर को मजबूती तो देगें ही किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य सरकार के ‘विकसित प्रदेश के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बजट डेयरी और पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने डेयरी सेक्टर के विस्तार के लिए 2000 करोड़ के कोरपस फंड की घोषणा का स्वागत करते हुए, कहा कि सरस ब्रांड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उदेश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत 5 रुपए प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष में इस योजना के तहत 700 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभांवित होंगे। इसके अलावा एक लाख पशुपालकों को दूध आधारित उत्पाद-शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। दुग्ध उत्पादन प्रोसेसिंग केपेसिटी 200 लाख लीटर करेंगे  पशुपालन एवं डेयरी मंत्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन प्रोसेसिंग केपेसिटी को विकसित राजस्थान-2047 तक वर्तमान 52 लाख लीटर प्रतिदिन से बढाकर 200 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही दुग्ध व दुग्ध उत्पादों की बिक्री केंद्रों की संख्या वर्तमान 27 हजार से बढाकर एक लाख करना भी प्रस्तावित है। इसी के तहत आगामी वर्ष में 1000 नवीन दुग्ध संकलन केंद्र खोले जाएंगे, वहीं, 500 नए डेयरी बूथ आवंटित करना प्रस्तावित है। कुमावत ने कहा कि अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट खोलने हेतु 200 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। बारां व सिरोही में 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसी तरह जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढीकरण किया जाएगा। 200 ग्राम पंचायतों में खुलेंगे पशु चिकित्सा उप केंद्र  पशुपालन मंत्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों को पशु चिकित्सा संस्थानों की सुविधाओं का समुचित लाभ मिल सके, इसके लिए पशुधन संख्या एवं निर्धारित दूरी जैसे मानकों के आधार पर आगामी दो वर्षाें में प्रदेशभर में 200 नए पशु चिकित्सा उप केंद्र खोले जाएंगे। साथ ही 25 पशु चिकित्सा उप केंद्रों को चिकित्सालयों व 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों के रूप में क्रमोन्नत किया जाएगा।  गोशालाओं का होगा आर्थिक सुदृढीकरण  गोपालन मंत्री ने बताया कि बजट घोषणा में प्रदेश की गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। इसके तहत 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी। गो-उत्पादों को बढावा देने के लिए राज्य स्तरीय प्रर्दशनी लगाई जाएगी। प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चितौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली जिलों में सुविधायुक्त ब्लेकर्याड पोल्ट्री के 35 महिला शक्ति पोल्ट्री समूह स्थापित किए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक समूह को 10 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा। त्यौहारों पर मंदिरों की होगी विशेष साज-सज्जा  देवस्थान मंत्री कुमावत ने कहा कि देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में आगामी वर्ष में 6 हजार वरिष्ठजनों को हवाई यात्रा व 50 हजार को एसी ट्रेन से देशभर के विभिन्न तीर्थ स्थलों की निःशुल्क यात्रा करवाई जाएगी। इसके साथ ही देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं की मरम्मत व जीर्णोद्धार के कार्य करवाए जाएंगे। विभाग की रिक्त जमीनों पर धर्मशालाओं के निर्माण व संचालन हेतु बीओटी आधारित नीति बनाई जाएगी। मंत्री कुमावत ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर- होली, दीपावली, महाशिवरात्रि, रामनवमी, गुरुपूर्णिमा जैसे प्रमुख त्यौहारों को उत्साहपूर्वक मनाने के लिए देवस्थान विभाग के मंदिरों में विशेष साज-सज्जा व आरती र्कायक्रम आयोजित करने हेतु 13 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेशभर के विभिन्न 10 मंदिरों में 10 करोड़ के कार्य करवाए जाएंगे ।

    रूटा चुनाव 2026: नवीन कुमार शर्मा बने अध्यक्ष, ऋषिकेश मीणा ने महासचिव पद पर मारी बाजी

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (RUTA) के वार्षिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। बुधवार, 11 फरवरी 2026 को कुलपति सचिवालय के सीनेट हॉल में मतदान और मतगणना की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। चुनाव अधिकारी प्रो. गजेन्द्र पाल सिंह ने आधिकारिक परिणामों की घोषणा करते हुए निर्वाचित पदाधिकारियों के नामों का ऐलान किया। अध्यक्ष पद पर नवीन कुमार शर्मा का कब्जा अध्यक्ष पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में नवीन कुमार शर्मा ने जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए सर्वाधिक 161 मत प्राप्त किए। इस पद के लिए अन्य उम्मीदवारों में डेजी शर्मा को 128 और संजय कुमार को 84 वोट मिले। महासचिव और उपाध्यक्ष पद के परिणाम शिक्षक संघ की नई कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पदों पर बड़े उलटफेर देखने को मिले:  * महासचिव: ऋषिकेश मीणा ने 173 मतों के साथ महासचिव पद पर शानदार जीत हासिल की। उन्होंने जितेन्द्र कुमार शर्मा (99 वोट) और कैलाश चन्द सामोता (95 वोट) को शिकस्त दी।  * उपाध्यक्ष: मनीषा ने 150 वोट पाकर उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया। उन्होंने राजेन्द्र प्रसाद (130 वोट) और चन्द्र प्रकाश मौर्य (91 वोट) को हराया। संयुक्त सचिव पद पर रहा कड़ा मुकाबला संयुक्त सचिव पद के लिए चुनावी मैदान में सबसे अधिक प्रत्याशी थे, जहाँ गोपेश शर्मा और दिनेश कुमार यादव ने बाजी मारी।  * गोपेश शर्मा को सबसे ज्यादा 183 वोट मिले।  * दिनेश कुमार यादव 152 वोटों के साथ विजयी रहे।  * इस श्रेणी में अन्य प्रत्याशियों में आशु राम (115), नेहा अरोड़ा (106), दिनेश चन्द्र गहलोत (89) और शिवम् सिंह (59) शामिल थे। कार्यकारिणी में इनका रहा दबदबा चुनाव अधिकारी ने कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में विजयी हुए नामों की भी घोषणा की। नई टीम में मुकेश कुमार वर्मा (राजनीति विज्ञान विभाग), स्वाति बुगालिया, अंशु वर्मा, मोनिका राव, अर्चना शर्मा, सुमन मौर्य, विजय बेनीवाल, पूजा जोशी, जितेन्द्र कुमार मिश्रा और मामराज सिंह ने जीत दर्ज कर कार्यकारिणी में अपनी जगह बनाई है। कुल 377 मतों की गणना की गई, जिसके आधार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने शिक्षक हितों के लिए कार्य करने और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को बनाए रखने का संकल्प लिया है।