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    ओजोन दिवस पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पर्यावरणीय प्रभाव पर वाद-विवाद आयोजित

      जयपुर: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर के स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज द्वारा ओजोन दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए एक विभागीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। वाद-विवाद का विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता: पर्यावरण के लिए उपयोगी एवं हानिकारक” रखा गया। कार्यक्रम में डॉ. रजनी माथुर, डीन, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ओजोन परत के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तकनीकी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और अपनी दैनिक गतिविधियों में सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर डॉ. चारु दुबे, असिस्टेंट प्रोफेसर, भौतिक विज्ञान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं सुश्री मनीषा यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन विज्ञान ने सतत तकनीकी विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पर्यावरण पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय निगरानी, जलवायु एवं संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई (AI) की उपयोगिता के साथ-साथ इसके लिए आवश्यक अधिक ऊर्जा खपत, कार्बन फुटप्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों पर भी चर्चा की। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपने विचारों को तार्किक एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को सतत जीवनशैली अपनाने, ओजोन परत के संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के संदेश के साथ हुआ।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में ‘मानसिक क्रूरता तलाक का आधार है’ विषय पर इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित

    जयपुर: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर के विधि विभाग की ओर से मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को “Mental Cruelty as a Ground for Divorce” (मानसिक क्रूरता तलाक का आधार है) विषय पर इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, School of Law के विद्यार्थियों के लिए इस शैक्षणिक गतिविधि का आयोजन 15 सितंबर 2026 को किया गया। कार्यक्रम प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें विधि विभाग के विद्यार्थियों ने उत्साह, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विधिक ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग, न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी शोध, तर्क-वितर्क तथा प्रभावी मौखिक वकालत का अनुभव प्रदान करना रहा। मूट कोर्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायालयीन वातावरण के अनुरूप अपने पक्ष को प्रस्तुत करने तथा विधिक मुद्दों का तार्किक एवं विश्लेषणात्मक ढंग से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अभिलाषा वैष्णव द्वारा अतिथियों, निर्णायक, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों के स्वागत के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए मूट कोर्ट प्रतियोगिता के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधि विद्यार्थियों के लिए ऐसी गतिविधियाँ उनके ज्ञान को व्यवहार से जोड़ने तथा न्यायालयीन कार्यप्रणाली को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियाँ विधि विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि विधि का अध्ययन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी शोध, विधिक तर्क और प्रभावी वकालत का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने विधिक ज्ञान, तार्किक क्षमता तथा संप्रेषण कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने प्रतियोगिता के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनुभवात्मक एवं व्यावहारिक शिक्षा विधि शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को केवल कानून की धाराओं का ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें कानूनी शोध, तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और प्रभावी मौखिक प्रस्तुतीकरण जैसे आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में एक जिम्मेदार, कुशल एवं संवेदनशील विधि पेशेवर बनने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने वाले संकाय सदस्यों को शुभकामनाएँ दीं। मूट कोर्ट प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. कमल किशोर जांगिड़, परीक्षा नियंत्रक द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विभिन्न महत्वपूर्ण मापदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया। इनमें कानूनी शोध, विधिक प्रावधानों की समझ, न्यायिक दृष्टांतों का प्रयोग, विधिक व्याख्या, तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण, प्रत्युत्तर देने की क्षमता, संप्रेषण कौशल तथा न्यायालयीन शिष्टाचार प्रमुख रहे। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपने-अपने पक्ष में प्रभावशाली एवं तर्कपूर्ण विधिक दलीलें प्रस्तुत कीं। प्रतिभागियों ने मानसिक क्रूरता की अवधारणा, वैवाहिक विवादों में इसके प्रभाव तथा तलाक के आधार के रूप में इसकी विधिक प्रासंगिकता का विस्तार से विश्लेषण किया। विद्यार्थियों ने अपने तर्कों को विधिक प्रावधानों एवं प्रासंगिक न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर प्रस्तुत करते हुए अपनी शोध एवं वकालत क्षमता का प्रदर्शन किया। मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने न्यायालय की कार्यवाही के अनुरूप अपने पक्षकारों की ओर से मौखिक बहस, तथ्य प्रस्तुतीकरण, विधिक तर्क, न्यायिक प्रश्नों के उत्तर तथा प्रत्युत्तर प्रस्तुत किए। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में न्यायालयीन वातावरण के प्रति आत्मविश्वास विकसित किया तथा उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी विधिक विवाद का अध्ययन केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि तथ्यों, न्यायिक दृष्टांतों और तार्किक व्याख्या का भी उसमें महत्वपूर्ण योगदान होता है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को कानूनी शोध, केस लॉ का अध्ययन, विधिक लेखन एवं ड्राफ्टिंग, मौखिक वकालत, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक चिंतन, प्रभावी संप्रेषण, समय प्रबंधन तथा न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण जैसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस प्रकार की गतिविधियाँ विधि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विधि विभाग के संकाय सदस्यों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। डॉ. अभिलाषा वैष्णव ने विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के उद्देश्य एवं प्रक्रिया से अवगत कराते हुए उनका मार्गदर्शन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान सक्रिय सहयोग प्रदान किया। डॉ. ज्योति चौहान ने विद्यार्थियों को विधिक विषय के गहन अध्ययन, कानूनी शोध एवं तर्कों को व्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को विषय की गंभीरता को समझने तथा तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।  लतीफ मेहर ने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट की प्रक्रिया, न्यायालयीन व्यवहार तथा प्रभावी मौखिक प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलुओं के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उनके सहयोग से विद्यार्थियों को न्यायालयीन कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिली।  राजनारायण शर्मा ने विद्यार्थियों को संबंधित विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर अपने तर्कों को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के विधिक शोध एवं विश्लेषणात्मक क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।  वीरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को विधिक शोध, मौखिक वकालत एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया तथा प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। विधि विभाग द्वारा आयोजित इस इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक विधिक ज्ञान को व्यावहारिक न्यायालयीन परिवेश में लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने कानून की व्याख्या करने, तथ्यों का विश्लेषण करने, न्यायिक दृष्टांतों का उपयोग करने तथा न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से अपने तर्क प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया। विद्यार्थियों ने न केवल प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि एक-दूसरे के तर्कों एवं प्रस्तुतीकरण से सीखने का अवसर भी प्राप्त किया। इस प्रकार प्रतियोगिता ने सह-अधिगम, प्रतिस्पर्धात्मक भावना और व्यावसायिक कौशल विकास को प्रोत्साहित किया। मूट कोर्ट प्रतियोगिता ने विश्वविद्यालय के व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक विधि शिक्षा के प्रति समर्पण को भी प्रदर्शित किया। विश्वविद्यालय में इस प्रकार की अकादमिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके विषय के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराने तथा भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में कानून के प्रति रुचि, विधिक शोध के प्रति गंभीरता तथा न्यायालयीन वकालत के प्रति आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया। साथ ही, विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक सफल विधि पेशेवर बनने के लिए विषयगत ज्ञान के साथ-साथ तार्किक सोच, प्रभावी संप्रेषण, आत्मविश्वास, शोध क्षमता और नैतिक न्यायालयीन आचरण भी आवश्यक है। इंटर-क्लास मूट कोर्ट प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों, निर्णायक डॉ. कमल किशोर जांगिड़, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा विधि विभाग के सभी संकाय सदस्यों के प्रयासों एवं सहयोग की सराहना की गई। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं व्यावहारिक अनुभव सिद्ध हुआ। प्रतियोगिता ने न केवल विद्यार्थियों की विधिक समझ को मजबूत किया, बल्कि उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया एवं वकालत की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर का विधि विभाग भविष्य में भी ऐसी व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं व्यावसायिक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।  

    तीन दिवसीय कार्यशाला में छात्राओं ने सीखा नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमिता का हुनर

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) एवं नारिका इन्क्यूबेशन सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 15 से 17 सितम्बर, 2026 को छात्राओं में उद्यमशील मानसिकता, नवाचार, रचनात्मकता एवं समस्या-समाधान कौशल विकसित करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पारंपरिक कक्षा शिक्षण से आगे ले जाकर अनुभवात्मक अधिगम के माध्यम से उद्यमिता की अवधारणाओं को समझाना था। कार्यशाला में टाइटन फिल्म को एक प्रभावी शिक्षण माध्यम के रूप में उपयोग किया गया। फिल्म की कहानी एवं व्यावसायिक यात्रा से प्रेरणा लेते हुए छात्राओं ने जाना कि किस प्रकार एक विचार को रचनात्मक सोच, निरंतर प्रयास, समस्या-समाधान एवं नवाचार के माध्यम से एक सफल ब्रांड में परिवर्तित किया जा सकता है। तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने विभिन्न विचार-मंथन, नए विचारों का सृजन, लीक से हटकर सोचने तथा समस्या-समाधान संबंधी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। रोचक एवं सहभागिता पूर्ण गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को अपनी सोच को नए दृष्टिकोण से देखने तथा समस्याओं के लिए अभिनव समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया।महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अनुभवात्मक अधिगम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच एवं नवाचार की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने छात्राओं को निरंतर नवीन एवं रचनात्मक सोच विकसित करने, समस्याओं को अवसर के रूप में देखने तथा अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला की मूल्यांकनकर्ता एवं समीक्षक डॉ. विष्णु प्रिया टेमाणी, इनोवेशन एम्बेसडर, आईआईसी, रहीं। समापन सत्र में छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। छात्राओं ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, रोचक, मनोरंजक एवं प्रेरणादायक अनुभव बताया.   

    राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अवसर पर सतत पोषण शिक्षा सत्र का आयोजन

     राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अवसर पर कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के कम्युनिटी एंड एप्लाइड साइंस विभाग द्वारा सतत पोषण शिक्षा सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं में संतुलित आहार, प्रोटीन-ग्रहण तथा बाल्यावस्था पोषण एवं प्रारंभिक उद्दीपन के प्रति जागरूकता विकसित करना था। यह कार्यक्रम निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी एवं प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विषय-पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली एवं पोषण को दैनिक जीवन में अपनाने हेतु प्रेरित किया। प्रथम सत्र में डॉ. स्वाति व्यास, सह-आचार्य, गृह विज्ञान विभाग, आई.आई.एस. (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) ने “प्रोटीन ऑन योर प्लेट क्या यह पर्याप्त है?” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रोटीन के महत्व, स्रोतों एवं प्रचलित भ्रांतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि शाकाहारी स्रोतों से भी प्रोटीन की आवश्यकता पूरी की जा सकती है। छात्राओं को कैलोरी के बजाय पोषण संतुलन पर ध्यान देने तथा थाली में छोटे बदलावों से उसे प्रोटीन-समृद्ध बनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए। सरल, उदाहरण-आधारित प्रस्तुति सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक बना गई। द्वितीय सत्र में प्रो. निमाली सिंह, पूर्व प्राचार्य, महारानी कॉलेज, जयपुर, ने “न्यूट्रीशन एण्ड अर्ली चाइल्डहुड स्टीम्यूलेशन फॉर डवलपमेंट” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बच्चे के जीवन के प्रथम 1000 दिनों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इस अवधि में उचित पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक उद्दीपन बच्चे के समग्र विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। सत्र में प्रारंभिक बाल विकास की अवधारणा, प्रारंभिक वर्षों में पोषण का महत्व, प्रारंभिक उद्दीपन, पोषण एवं उद्दीपन के अंतर्संबंध, माता-पिता एवं केयरगिवर की भूमिका तथा प्रसवोत्तर अवधि में माता एवं शिशु से जुड़े जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई। विषय को सरल, संवेदनशील एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिससे छात्राओं को समग्र बाल विकास की अवधारणा को गहराई से समझने में सहायता मिली। कार्यक्रम में 100 छात्राओं एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।  

    खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन

    खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर में दिनांक 17 सितंबर 2026 को एल्यूमनी एसोसिएशन द्वारा रक्तदान, निशुल्क स्वास्थ्य जांच तथा नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया । शिविर का शुभारंभ जयपुर संभागीय आयुक्त वी. सरवन कुमार द्वारा किया गया । शिविर में खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जयपुर एवं राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज फागी के छात्र-छात्राओं, भूतपूर्व छात्रों, फैकल्टी एवं अन्य व्यक्तियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । एलूमनी एसोसिएशन द्वारा प्रति वर्ष कॉलेज में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता है जिसमें अध्यनरत विद्यार्थियों, एलूमनी एसोसिएशन सदस्यों और अन्य लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और नेत्र जांच की जाती हैं । शिविर में सीपीआर का प्रदर्शन संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा किया गया । शिविर संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल के सहयोग से आयोजित किया गया । एएसजी ऑय हॉस्पिटल द्वारा सभी की नि:शुल्क नेत्र जांच की गई । शिविर में मुख्य अतिथि के तौर पर प्राविधिक शिक्षा मंडल राजस्थान के निदेशक मुकेश राजोरा ने शिरकत की और सभी को इस आयोजन के लिये बधाई दी तथा ब्लड डॉनर्स और हॉस्पिटल स्टाफ को स्मृति चिह्न प्रदान कियें । इस शिविर का आयोजन खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा किया जाता है । एसोसिएशन अध्यक्ष जी. पी शर्मा ने अपने संबोधन में सभी का आभार व्यक्त किया और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की बात कही । शिविर संयोजक एव महासचिव दिनेश चन्द सैनी ने बताया कि संस्था इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना पूरा योगदान देती है जिससे सभी लाभान्वित हो सकें । संस्थान के प्रधानाचार्य विनोद जांगिड, कोऑर्डिनेटर रूघाराम पंवार, संजय शर्मा तथा समस्त स्टाफ द्वारा पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाता हैं जिससे ये कार्यक्रम सफल हो पाता हैं । एसोसिएशन द्वारा सभी ब्लड डोनर्स, हॉस्पिटल स्टाफ , कॉलेज तथा अन्य सभी वॉलंटियर्स को स्मृति चिह्न तथा सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया ।  

    ‘डिजिटल युग में भारत’ राष्ट्रीय सम्मेलन में भाषा, संस्कृति, विरासत एवं कल्याण पर सार्थक विमर्श

    जयपुर। भारत की समृद्ध भाषायी एवं सांस्कृतिक परंपरा को डिजिटल युग की नवीन संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ‘डिजिटल युग में भारत : भाषा, संस्कृति, विरासत एवं कल्याण’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन जयपुर में किया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन 17 से 19 सितंबर 2026 तक महात्मा गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में किया जा रहा है। इसमें संस्थान के विशेष अधिकारी डॉ हरबीर सिंह डागुर ने बताया कि इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं। सम्मेलन का शुभारंभ महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज (MGIGSS), जेएलएन मार्ग, जयपुर के सभागार में गरिमामय वातावरण में हुआ। उद्घाटन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर विकसित भारत@2047 के निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया गया। अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के पश्चात प्राचार्य प्रो. हेमंत पारीक ने सम्मेलन की रूपरेखा, उद्देश्य एवं विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय भाषाओं, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उद्घाटन अवसर पर समारोह के अध्यक्ष श्री कुलदीप रांका, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार ने डिजिटल युग में तकनीक एवं डिजिटल उपकरणों की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। इनके अतिरिक्त मुख्य अतिथि पंडित डॉ. केदार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु, तथा प्रो. मदन सिंह राठौड़, कुलगुरु, महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। विशिष्ट अतिथि श्री जयंत पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अशोक कुमार, अध्यक्ष, आईएसएलएस ने ज्ञान, संस्कृति एवं तकनीकी परिवर्तन के बीच सामंजस्य की आवश्यकता को रेखांकित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री विनय दीक्षित ने लोक, संस्कृति एवं आधुनिकता के अंतर्संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए दिसंबर माह में आयोज्य लोक मंथन कार्यक्रम के बारे में प्रतिभागियों को अवगत करवाया। इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (एब्स्ट्रैक्ट बुक) का लोकार्पण भी किया गया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में भाषा, साहित्य, संस्कृति, डिजिटल माध्यमों, भारतीय विरासत तथा समकालीन समाज पर तकनीकी परिवर्तन के प्रभाव सहित विविध विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं शोधपरक प्रस्तुतियाँ हुईं। सम्मेलन के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय ‘डिजिटल युग में भाषा एवं साहित्य’ रहा। इस सत्र में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाषा एवं साहित्य के डिजिटल रूपांतरण से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए। प्रो. अजय शुक्ला, डीडीयू गोरखपुर; प्रो. दीपक श्रीवास्तव, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, जयसिंहपुरा खोर; प्रो. राजेन्द्र प्रसाद, पूर्व कुलपति, इलाहाबाद स्टेट विश्वविद्यालय, प्रयागराज; प्रो. संजय अरोड़ा, अंग्रेजी विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान; तथा डॉ. शीतल प्रसाद, हिंदी विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से विषय के विभिन्न पक्षों को सामने रखा। तकनीकी सत्रों में शोधपत्र प्रस्तुतियों के साथ-साथ विद्वानों के बीच अकादमिक संवाद को भी विशेष महत्व दिया गया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर शोधार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा अपने शोधकार्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति एवं विरासत को डिजिटल परिवेश में संरक्षित, संवर्धित एवं व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श हो रहा है। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारतीय भाषाओं, साहित्य, सांस्कृतिक विरासत एवं जीवन-मूल्यों को डिजिटल युग की नवीन तकनीकों से जोड़ते हुए ज्ञान के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन में हो रहा बहुआयामी अकादमिक संवाद भारतीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा को आधुनिक तकनीकी परिवेश में नई दिशा देने की संभावनाओं को सामने ला रहा है। यह राष्ट्रीय सम्मेलन एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय कन्या महाविद्यालय, गंगापोल, जयपुर तथा सहयोगी संस्था आईएसएलएस (इंटरनेशनल साइंस एंड लाइफ साइंसेज) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों सहित कुल 352 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता इसे व्यापक अकादमिक स्वरूप प्रदान कर रही है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में भी भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति, विरासत, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं समकालीन सामाजिक परिवर्तनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, शोधपत्र प्रस्तुतियाँ एवं अकादमिक परिचर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।    

    टाइम्स नाउ एजुकेशन समिट-2026 में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को प्रतिष्ठित सम्मान

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर ने शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत विकास एवं शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए टाइम्स नाउ एजुकेशन समिट-2026 – नेशनल एडिशन में “एक्सीलेंस इन एकेडमिक क्वालिटी, इंस्टीट्यूशनल ग्रोथ एंड एजुकेशनल इनोवेशन” के प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त किया। यह सम्मान विश्वविद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्थागत विकास, नवाचार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाता है। समारोह में यह प्रतिष्ठित सम्मान हरियाणा सरकार के युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता तथा खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम द्वारा प्रदान किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट सदस्य चंद्रकांत दुगर ,रजिस्ट्रार डॉ. अनूप शर्मा, परीक्षा नियंत्रक कमल किशोर ने यह प्रतिष्ठित सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने कहा कि यह सम्मान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, उत्कृष्टता और संस्थागत विकास को निरंतर बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत विकास एवं शैक्षिक नवाचार विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने इस सम्मान को विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताते हुए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी विद्यार्थियों को बदलती शैक्षिक एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास तथा नवाचार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. रश्मि जैन ने इस उपलब्धि को पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। यह सम्मान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत विकास एवं शैक्षिक नवाचार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करता है।  

    सामाजिक जागरूकता, राष्ट्र निर्माण की भावना, नेतृत्व क्षमता एवं जिम्मेदार नागरिकता के भाव को विकसित करना रहा

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना की चारों इकाइयों द्वारा एकदिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेविकाओं में सामाजिक जागरूकता, राष्ट्र निर्माण की भावना, नेतृत्व क्षमता एवं जिम्मेदार नागरिकता के भाव को विकसित करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माय भारत, राजस्थान से शरद त्रिपाठी, सहायक संचालक, कुलदीप वर्मा, नेशनल यूथ अवॉर्डी तथा नरेश, राजस्थान यूथ आइकन रहे। कार्यक्रम के दौरान शरद त्रिपाठी ने माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया एवं उसके महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने युवाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न अवसरों, सामाजिक सहभागिता तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयंसेविकाओं को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ने तथा माय भारत प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। शिविर के अंतर्गत ‘विकसित भारत’ विषय पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आँचल पुरी द्वारा ‘विकसित भारत क्विज़’ का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय सेवा योजना की 400 स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। क्विज़ के माध्यम से छात्राओं को भारत की उपलब्धियों, विकास की दिशा, युवा सहभागिता से परिचित कराया गया। इस अवसर पर छात्राओं को माय भारत पोर्टल से जुड़ने तथा विभिन्न युवा एवं राष्ट्र निर्माण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने स्वंयसेविकाओं को प्रेरित किया कि वें अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आँचल पुरी ने किया एवं डॉ. विजयलक्ष्मी गुप्ता, डॉ. हर्षा शर्मा, डॉ. मंजरी भारद्वाज, डॉ. दीप्ति चौहान एवं चारूल शर्मा की कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका रही।

    रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर द्वारा “समाचार से शोध तकः पढ़ें, प्रश्न करें, शोध करें” कार्यक्रम का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति एवं शोध के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से “शोध पढ़ें, प्रश्न करें, शोध करें” विषय पर एक रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधि का आयोजन किया गया। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में उपलब्ध सूचनाओं, विशेष रूप से समाचार-पत्रों में प्रकाशित लेखों, को केवल पढ़ने के बजाय उनके बारे में सोचने, प्रश्न उठाने और संभावित शोध विषयों की पहचान करने के लिए प्रेरित करना था। गतिविधि में लगभग 130 छात्राओं ने पंजीकरण करवाया।

    विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में दिनांक 16 सितंबर 2026 को भूगोल विभाग द्वारा विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय ग्लोबल एक्शन फॉर कुलर प्लेनेट रखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में ओजोन परत के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। इस अवसर पर छात्रों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए क्विज़, भाषण, एक्सटेम्पोर एवं फोटो बूथ जैसी विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम बागेश्वरी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार आज की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे पर्यावरण-अनुकूल प्रयासों को अपनाकर पृथ्वी को सुरक्षित तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर बना सकता है। उन्होंने छात्राओं से पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखते हुए इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. शीलू, डॉ. रेणु शक्तावत एवं आरती तंवर का मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण रहा। इस अवसर पर डॉ. नीलम बागेश्वरी ने ओजोन परत के महत्व एवं उसके संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। इसके संरक्षण के लिए पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग, हानिकारक उत्सर्जन में कमी तथा सतत जीवनशैली को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में छात्राएं निहारिका चौधरी, गायत्री कुमारी, गुंजन व्यास, हर्षिता चंपावत, जयश्री शर्मा, रोली एवं सोफिया खान सहित विभिन्न सेमेस्टर की छात्राओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान ओजोन परत के संरक्षण, प्रदूषण एवं हानिकारक उत्सर्जन को कम करने तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है और दैनिक जीवन में किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी पृथ्वी के सुरक्षित एवं सतत भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।  

    महाविद्यालय में हुआ विभिन्न क्लब गतिविधियों का संचालन

    जयपुर कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में फोटोग्राफी क्लब द्वारा दिनांक 16 सितम्बर 2026 को “कैप्चर द मोमेंटः एक्सप्लोर, लर्न एण्ड क्रिएट विद डीएसएलआर फोटोग्राफी’’ विषय पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें 23 प्रतिभागियों को डीएसएलआर फोटोग्राफी के कार्यप्रणाली को व्यावहारिक रूप से सिखाया गया। प्रशिक्षण सत्र का संचालन चित्रकला विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रीति कौशल द्वारा किया गया जिन्होंने कैमरा सेटिंग्स, कंपोजिशन, लाइटिंग तकनीक और पोस्ट-प्रोसेसिंग, अपर्चर, शटर स्पीड और आईएसओ जैसी तकनीकी जानकारियों को सरलता से समझाते हुए छात्राओं को हैण्डस ऑन प्रैक्टिस भी करवाई। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने डीएसएलआर कैमरा फोटोग्राफी सिखाने के इस अनुभव को बेहद रोचक, ज्ञानवर्धक बताते हुए क्लब की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में क्लब के संयोजिका डॉ. निधि गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान भारतीय मानक ब्यूरो (ठप्ै) शाखा, जयपुर द्वारा कनोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में गठित मानक क्लब के अंतर्गत मानक क्विज़ का सफल आयोजन किया गया। छात्राओं को विभिन्न स्तरों पर प्रचलित मानकों, प्रोडक्ट लेबलिंग, प्रोडक्ट टेस्टिंग, बारकोड, स्टैंडर्ड मार्क तथा पैकेजिंग मानकों के बारे में विस्तृत एवं उपयोगी जानकारी प्रदान की। महाविद्यालय प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं को जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित किया तथा विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता में मानक क्लब की 40 सदस्य छात्राओं ने उत्साहपूर्ण सहभागिता दर्ज की। कार्यक्रम में मानक क्लब की स्टूडेंट मेंटर, गृहविज्ञान विभाग की डॉ. रचना गोस्वामी ने सभी का हार्दिक स्वागत किया, मनोविज्ञान विभाग की सुश्री सोना मिश्रा ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया। महाविद्यालय के रचनात्मक लेखन क्लब द्वारा ‘रचनात्मक संवाद’ कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं ने रचनात्मक लेखन के गुर सीखे। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सृजन से सकारात्मक रहने की प्रक्रिया द्वारा छात्राओं को प्रोत्साहित किया। क्लब संयोजक डॉ. शीताभ शर्मा ने सुप्रसिद्ध हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता “पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले” का सस्वर पाठ करते हुए छात्राओं को कविता लेखन के साथ उसकी प्रस्तुति को कैसे प्रभावी बनाया जाये, इस पर प्रकाश डाला तथा अपना स्वरचित गीत भी प्रस्तुत किया। हिन्दी एवं अंग्रेजी विभाग की छात्राओं टीया कुमारी, पायल मीणा, स्नेहा शर्मा, ओमकेशी मीणा और अनुषा सिंह ने मंच पर स्वरचित कविताएँ प्रस्तुत कीं। उनमें और क्या सुधार किया जा सकता है, इसकी बारीकियों को इंगित करते हुए अंग्रेजी लेखन क्लब की संयोजिका डॉ. ऋशिता शर्मा ने अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की। कविता पाठ करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप उपहार प्रदान किये गये। मंच संचालन क्लब सदस्य डॉ. सुमन धनाका तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अर्पणा राठौड़ द्वारा किया। वेलनेस क्लब ने महिलाओं एवं छात्राओं में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पॉलिएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम “पीएमओएस” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. प्रियंका रहरिया (डठठैए क्ळव्), जूनियर स्पेशलिस्ट, स्त्री रोग विभाग, सैटेलाइट हॉस्पिटल जयपुर रहीं। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं, आवश्यक सावधानियों तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। स्वस्थ जीवनशैली, समय पर स्वास्थ्य जाँच, निदान एवं उपचार तथा जोखिम कारकों पर चर्चा की गई। उच्च प्रोटीन एवं एंटीऑक्सीडेंट युक्त संतुलित पारंपरिक आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के महत्व पर जोर दिया गया। तनाव प्रबंधन तथा समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित जाँच एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए छात्राओं को जागरूक किया गया। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस तरह के जागरुक कार्यक्रम के आवश्यकता बताते हुए कहा कि महिलाओं एवं छात्राओं के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सजग रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनके बारे में सही जानकारी प्राप्त कर समय पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को छात्राओं के स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में छात्राओं ने विशेषज्ञ वक्ता से स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रश्न पूछे। डॉ. प्रियंका रहरिवा ने छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. पालू जोशी, डॉ. स्वाति धनवानी, डॉ. मृणाली कांकर, डॉ. चेतना शर्मा एवं डॉ. रेणु शक्तावत की भूमिका रही। डॉ. स्वाति धनवानी द्वारा मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित उपयोगी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के अंत में क्लब संयोजिका डॉ. पालू जोशी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता, प्राचार्य, शिक्षिकाओं एवं सभी प्रतिभागियों का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया इस जागरूकता कार्यक्रम में कुल 30 छात्राओं ने भाग लिया ।

    विश्वविद्यालय महारानी कॉलेज में 7-दिवसीय निःशुल्क योग कार्यशाला का शुभारंभ, प्रतिभागियों ने लिया बढ़-चढ़कर भाग

    जयपुर, विश्वविद्यालय महारानी कॉलेज, जयपुर के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग द्वारा आज 7-दिवसीय निःशुल्क योग कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का आयोजन 16 से 23 सितम्बर 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 8:00 से 9:00 बजे तक कॉलेज के खेल मैदान में किया जा रहा है। 20 सितम्बर को अवकाश रहेगा। कार्यशाला का विषय “स्वयं की खोज, योग के साथ” रखा गया है। कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि प्रो. नूपुर माथुर उपस्थित रहीं। उन्होंने योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का मार्गदर्शन अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ योगी रामरस चौधरी जी द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने प्रथम दिवस विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं योगाभ्यास करवाए तथा योग के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। कार्यशाला में विश्वविद्यालय महारानी कॉलेज की बड़ी संख्या में छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास एवं प्राणायाम के माध्यम से कार्यशाला के प्रथम सत्र में सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला का आयोजन समन्वयक डॉ. जितेंद्र सिंह एवं आयोजन सचिव डॉ. चेतना चौधरी के निर्देशन एवं सहयोग से किया जा रहा है। आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम, ध्यान एवं स्वास्थ्यवर्धक योगाभ्यासों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय के शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कार्मिकों में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, एकाग्रता एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करना है।