Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Long Island City

    -0.79°C

    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    जयपुर के विद्वान् प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय का शतक-काव्य ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ अमृतग्रन्थ माला में प्रकाशित 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन के समापन समारोह में हुआ पुस्तक का लोकार्पण

    हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन (AIOC) में जयपुर निवासी मूर्धन्य विद्वान् प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय द्वारा विरचित शतक-काव्य ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ का लोकार्पण किया गया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा इस काव्यग्रन्थ को अमृतग्रन्थ माला 2026 के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है। सम्मेलन के समापन समारोह में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों की उपस्थिति में पुस्तक का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, पतंजलि विश्वविद्यालय की प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामकान्त पाण्डेय, उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, वीरनारायण पांडुरंगी, AIOC की सचिव प्रो. कविता होल्ले तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रकाशन निदेशक प्रो. काशीनाथ न्योपाने सहित अनेक विद्वान् उपस्थित रहे। छह खण्डों में 109 श्लोकों की काव्यरचना ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ शार्दूलविक्रीडित छन्द में विरचित विशिष्ट शतक-काव्य है। इसमें अध्यात्म, भक्ति, शृंगार, राष्ट्र, केलि एवं कारुण्य—इन छह खण्डों में कुल 109 श्लोक शार्दुल छंद में विरचित हैं। काव्य की विशेषता यह है कि इसके 106 श्लोक ‘शून्य’ शब्द से प्रारम्भ होते हैं। छन्द, शब्द-प्रयोग और विषय-विविधता के माध्यम से रचनाकार ने संस्कृत काव्य परम्परा में अपनी विशिष्ट साहित्यिक दृष्टि प्रस्तुत की है। प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय की यह कृति संस्कृत साहित्य की समृद्ध काव्यपरम्परा को आगे बढ़ाने वाली उल्लेखनीय रचना है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की अमृतग्रन्थ माला में इसका प्रकाशन संस्कृत वाङ्मय के संरक्षण, संवर्धन एवं विद्वानों की मौलिक रचनाओं को प्रकाश में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रो पाण्डेय साहित्य अकादमी  दिल्ली से संस्कृत अनुवाद से पुरस्कृत हैं।

    पंचायत राज चुनाव में मिल रहा जनता का आशीर्वाद, हर जगह बनेंगे भाजपा के प्रधान और जिला प्रमुख - कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत

    जयपुर। राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि पंचायत राज चुनाव में जनता का आशीर्वाद भारतीय जनता पार्टी को मिल रहा है। मंत्री कुमावत ने कहा कि दो चरण में पंचायत राज चुनाव पूरे हो गए हैं, तीसरा चरण चल रहा है और फिर चौथा चरण भी होगा। पंचायत राज चुनाव में जिस तरह से जनता का आशीर्वाद भाजपा को मिल रहा है, निश्चित रूप से आने वाले रिजल्ट में भारतीय जनता पार्टी के ही सब जगह प्रधान और जिला प्रमुख बनेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले महीने जो नगर निकाय के चुनाव हुए उनमें से 204 नगर निकायों में भारतीय जनता पार्टी को विजय मिली और भाजपा के बोर्ड बने। मंत्री कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी ने जिस तरह से ढाई साल में राजस्थान के विकास के लिए काम किया उनमें किसान, मजदूर, महिलाओं  और गरीब कल्याण की योजनाओं को लागू करके समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को संबल देने का काम किया, उनको आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पानी और बिजली के क्षेत्र में मुख्यमंत्री जी ने अभूतपूर्व काम किया है और जनता का आशीर्वाद भाजपा के साथ है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी भारतीय जनता पार्टी को जिताकर सरकार को और मज़बूती मिलेगी।

    जल संरक्षण केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी भी

     आरएसपीसीबी  में ‘BRICS Sustainable Lifestyle Week’ के तीसरे दिन ‘Save Water’ थीम पर आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम - अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण की शपथ लेकर पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का लिया संकल्प जयपुर। पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘BRICS Sustainable Lifestyle Week 2026’ के तीसरे दिन मंगलवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) में ‘Save Water – जल संरक्षण’ थीम पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चीफ इंजीनियर  प्रेमलाल थे। इस अवसर पर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण की शपथ लेकर पानी के विवेकपूर्ण उपयोग तथा जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमलाल ने कार्यक्रम की शुरुआत की . इस दौरान मुख्य पर्यावरण अभियंता विष्णु दत्त पुरोहित ने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन का आधार है और इसका संरक्षण वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को पानी के महत्व को समझते हुए इसके जिम्मेदार एवं सीमित उपयोग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी रोकने और जल संरक्षण के छोटे-छोटे उपाय अपनाकर भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस अवसर पर  पुरोहित ने ‘Save Water’ विषय पर प्रकाश डालते हुए जल संरक्षण की आवश्यकता, उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा भविष्य की जल सुरक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझते हुए व्यक्तिगत एवं संस्थागत स्तर पर जल बचत के उपाय अपनाना समय की मांग है। इसी के साथ अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता  (ACEE) वनेश माथुर ने जल संरक्षण में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974) के प्रावधानों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जल प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण तथा जल की गुणवत्ता बनाए रखने में मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने, अपशिष्ट जल के उचित उपचार तथा पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया। वहीं सीनियर एनवायरमेंटल इंजीनियर (SEE) विजय शर्मा ने ‘Save Water’ विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए जल संरक्षण के विभिन्न व्यावहारिक उपायों, जल की बर्बादी रोकने, वर्षा जल संचयन, जल के पुनः उपयोग तथा दैनिक गतिविधियों में जल दक्षता अपनाने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि घरों, कार्यालयों एवं औद्योगिक इकाइयों में जल के उपयोग को लेकर जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार अपनाकर जल संरक्षण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिशन LiFE के तहत जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। सभी ने पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने तथा जल संरक्षण संबंधी उपायों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मंडल के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण एवं जल प्रदूषण की रोकथाम एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं तथा इनके लिए संस्थागत प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि 1 से 7 नवंबर तक आयोजित ‘BRICS Sustainable Lifestyle Week 2026’ के अंतर्गत प्रत्येक दिन एक विशेष पर्यावरणीय विषय निर्धारित किया गया है। इस सप्ताह का उद्देश्य मिशन LiFE के अनुरूप पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा व्यक्तिगत व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है। 

    दीपावली पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार के व्यापक निर्देश

    दीपावली पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार के व्यापक निर्देश - एनसीआर क्षेत्र में केवल CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री एवं उपयोग की अनुमति - 7 एवं 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात्रि 8 से 10 बजे तक ही चला सकेंगे ग्रीन पटाखे - अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों एवं शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध - अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण एवं बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जयपुर। दीपावली के अवसर पर वायु प्रदूषण की रोकथाम, आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से  पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल राजस्थान के जिलों में पटाखों के निर्माण, बिक्री एवं उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशानुसार राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में शामिल अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा एवं कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री एवं उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। - केवल CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चला सकेंगे आमजन - उक्त संबंध में अधिक जानकारी देते हुए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की शासन सचिव श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में केवल CSIR-NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चलाने की अनुमति होगी। अन्य सभी प्रकार के पटाखों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ग्रीन पटाखे चलाने के लिए 7 एवं 8 नवंबर, 2026 को दो निर्धारित समयावधियां तय की गई हैं। आमजन प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक तथा रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे चला सकेंगे। निर्धारित समय के अतिरिक्त पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही पूर्व में लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को 6 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रखा गया है तथा निर्धारित दो दिवसीय छूट के पश्चात 9 नवंबर, 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुनः प्रभावी हो जाएगा। - अस्पतालों एवं शिक्षण संस्थानों के आसपास पटाखे चलाने पर प्रतिबंध श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि, आमजन के स्वास्थ्य एवं संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों को शांत क्षेत्र (Silence Zone) घोषित किया गया है। इन संस्थानों के 300 मीटर की परिधि में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार के सभी विभागों एवं एजेंसियों को निर्धारित समयावधि के अतिरिक्त पटाखे चलाने अथवा प्रतिबंधित क्षेत्रों में पटाखों के उपयोग की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं। - पटाखों की बिक्री के लिए QR कोड अनिवार्य, ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध वहीं पटाखों की अवैध बिक्री एवं प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति रोकने के लिए सरकार ने बिक्री व्यवस्था को भी सख्त किया है। केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जिन पर उत्पाद-विशिष्ट QR कोड अंकित होगा। प्रत्येक पटाखा पैकेजिंग पर संबंधित QR कोड होना अनिवार्य है। QR कोड के माध्यम से निर्माता, NEERI प्रमाणन, PESO तथा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी लाइसेंस, उत्पादक की संरचना एवं उत्पादन संबंधी प्रमाण-पत्रों का विवरण प्रदर्शित होना आवश्यक होगा। QR कोड के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या उसकी प्रामाणिकता में हेरफेर को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। निर्धारित एवं अधिकृत दुकानों तथा बिक्री स्थलों के अतिरिक्त पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की बिक्री भी प्रतिबंधित होगी। इसके अतिरिक्त श्रृंखला में जुड़े पटाखों (लड़ियों) तथा पटाखों की मालाओं के निर्माण एवं बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बेरियम युक्त पटाखों तथा CSIR-NEERI द्वारा ग्रीन पटाखों के रूप में अनुमोदित नहीं किए गए किसी भी पटाखे के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। - निर्माताओं एवं व्यापारियों के लाइसेंस और वित्तीय प्रतिभूति को लेकर सख्त प्रावधान पटाखा निर्माताओं एवं व्यापारियों के लिए भी कड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।  CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखों के निर्माण एवं बिक्री की अनुमति केवल निर्धारित पात्रता और वैध लाइसेंस रखने वाले निर्माताओं एवं व्यापारियों को ही होगी।   - अवैध पटाखों की रोकथाम के लिए विशेष गश्ती दलों का गठन इसी के साथ जिला कलक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एनसीआर क्षेत्र में पटाखों के अवैध निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। अवैध एवं पारंपरिक पटाखों के प्रवाह को रोकने के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार जब्ती एवं अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों एवं अन्य कार्मिकों को शामिल करते हुए विशेष गश्ती दलों का गठन किया जाएगा। गश्ती दल निर्धारित बिक्री स्थलों, दुकानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित निरीक्षण करेंगे। गौरतलब है कि, निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिक्री किए जा रहे पटाखे CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही हों, संबंधित QR कोड वैध एवं प्रामाणिक हों तथा पटाखों का भंडारण एवं बिक्री निर्धारित नियमों के अनुरूप की जा रही हो। विभिन्न विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारियां राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB),स्वायत्त शासन विभाग एवं नगरीय विकास विभाग,सूचना एवं जनसंपर्क विभाग,शिक्षा विभाग,सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग सहित  अतिरिक्त सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर आवश्यक समन्वय स्थापित कर आदेशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। - वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) एवं एनसीआर क्षेत्र के संबंधित जिला कार्यालयों को वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं दैनिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी ।  इस व्यवस्था से दीपावली के दौरान तथा उसके पश्चात वायु गुणवत्ता में होने वाले बदलावों का आकलन किया जा सकेगा और आवश्यकतानुसार प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए जा सकेंगे। - उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई गौरतलब है कि,जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, समूहों, निर्माताओं एवं व्यापारियों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य दीपावली के पर्व को पर्यावरण अनुकूल बनाने, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रभावी एवं समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करना है। 

    मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन, मामले के तथ्यों का गहन अध्ययन एवं स्पष्ट समझ आवश्यक

    जयपुर. कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर द्वारा 2-3 नवम्बर, 2026 तक दो दिवसीय वर्चुअल मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विधि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों से लगभग 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्घाटन सत्र 2 नवम्बर को आयोजित किया गया। जिसकी मुख्य अतिथि प्रो. निष्ठा जसवाल, कुलपति, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में प्रो. सरोज शर्मा (बोहरा), डीन, स्कूल ऑफ लॉ, प्रसिडेन्सी यूनिवर्सिटी, बैंगलोर उपस्थित रहीं।  इस दो दिवसीय कार्यशाला में कुल 4 सत्रों का संचालन हुआ। प्रथम सत्र का विषय ‘‘Fundamentals of Mooting’’। इस सत्र में वक्ता डॉ. शोरदीप रक्षित, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, क्राइस्ट (डीम्ड् विश्वविद्यालय), बैंगलोर रहे। द्वितीय सत्र का विषय Argumentation Skills and Court Room Etiquette रहा। इस सत्र में वक्ता मिस मिताली खत्री, लीगर रिसर्चर, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर रहीं। तृतीय सत्र का विषय Mooting and Research रहा। इस सत्र में वक्ता डॉ. उपांकर, सह-आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, दयानन्द सागर विश्वविद्यालय, बैंगलोर रहे। चतुर्थ सत्र का विषय Drafting of Memorial & Formulation of Compendium रहा। इस सत्र में वक्ता अंशुमान पाण्डे, रिसर्च स्कॉलर, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली रहे। कार्यशाला के सफल आयोजन के पश्चात अनुभव साझा सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सभी के अथक परिश्रम और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आयोजन समिति, विद्यार्थियों, प्राध्यापिकाओं एवं सभी कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। प्राचार्या ने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट में दक्षता विकसित करने के लिए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट में प्रभावी प्रदर्शन के लिए सर्वप्रथम मामले के तथ्यों का गहन अध्ययन एवं स्पष्ट समझ आवश्यक है। इसके साथ ही सशक्त विधिक शोध, पीठ द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का तार्किक एवं प्रभावी उत्तर देने की क्षमता तथा न्यायालय के क्षेत्राधिकार और प्रार्थना खंड  की सही एवं स्पष्ट प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों एवं संसाधन व्यक्तियों का उनके ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर सहायक आचार्या, डॉ. दिशा बांगरवा ने कार्यशाला की गतिविधियों एवं विभिन्न सत्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यशाला की यात्रा और यादगार पलों को समेटे हुए एक विशेष बीटीएस वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के दौरान हुए अनुभवों की पुनः स्मृति कराई। अनुभव साझा सत्र में प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान अर्जित ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं इससे प्राप्त लाभों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। सत्र का संचालन छात्रा सुश्री कशिश गुप्ता द्वारा किया गया।  

    दशहरा मेला अपने परवान पर, आल स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसायटी दे रही लोगों को प्राथमिक उपचार

    कोटा. दशहरा मेला अपने परवान पर है। रोजाना बड़ी संख्या में हाड़ौती और बाहर से भी लोग मेला देखने आ रहे हैं। ऐसे में कई संस्थाओं द्वारा यहां सामाजिक सरोकार भी निभाए जा रहे हैं। आॅल स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसायटी (एएसडब्ल्यूएस) लोगों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवा रहे हैं। सोसायटी के अध्यक्ष मुकेश सारस्वत ने बताया कि लगातार चैथे वर्ष संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं संरक्षक डाॅ.नवीन माहेश्वरी के निर्देशानुसार सामाजिक सरोकार में यह कार्य किया जा रहा है। यहां आमजन के लिए निशुल्क जल सेवा और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही है।  दोपहर 3 बजे से देर रात तक एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सहयोग से मेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है। इस वर्ष अब तक करीब 300 से अधिक लोगों को प्राथमिक चिकित्सा दी जा चुकी है। लोगों के लिए यहां पलंग, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, जांच के विभिन्न उपकरण व कई व्यवस्थाएं की गई है।  इसमें लोगों के ब्लड प्रेशर की जांच, हल्की-फुल्की चोट लगने पर दवा, प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इसके साथ ही मेले में भ्रमण के दौरान चक्कर आने या कमजोरी महसूस करने पर आवश्यक उपचार दिया जाता है।

    दो दिवसीय मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

    कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर विमेन, जयपुर द्वारा दो दिवसीय वर्चुअल मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र, प्रथम सत्र एवं द्वितीय सत्र का आयोजन दिनांक 2 नवम्बर, 2026 को किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ न्यायालयीन प्रक्रिया, विधिक शोध, प्रभावी ड्राफ्टिंग और मौखिक पैरवी के व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है। यह कार्यशाला का चौथा संस्करण है, जो संस्थान की विधिक शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ठ अतिथि, प्रतिभागियों एवं विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के प्रथम संस्करण से लेकर चौथे संस्करण तक के सफर पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. निष्ठा जायसवाल, कुलपति, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के संदेश को साझा करते हुए प्राचार्य डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने कहा कि मूट कोर्ट विधि शिक्षा का अभिन्न अंग है। यह विद्यार्थियों को विधिक शोध, प्रारूप लेखन, विधियों की व्याख्या, तर्कों के निर्माण और प्रभावी पैरवी जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावी पैरवी केवल तर्क जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय और सत्य की खोज में न्यायालय की सहायता करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।  कार्यशाला की समन्वयक एवं सहायक प्राध्यापक रोशन अली ने अवधारणा पत्र प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा तथा विभिन्न सत्रों के उद्देश्यों की जानकारी दी। विशिष्ठ अतिथि प्रो. सरोज शर्मा (बोहरा), डीन, स्कूल ऑफ लॉ, प्रसिडेन्सी यूनिवर्सिटी, बैंगलोर ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विधि विद्यार्थियों को अपने कौशल में निरंतर सुधार करना चाहिए। उन्होंने विधिक शोध, प्रभावी ड्राफ्टिंग, मौखिक पैरवी तथा न्यायालयीन शिष्टाचार को एक सफल अधिवक्ता की चार प्रमुख दक्षताएं बताया। उन्होंने कहा कि प्रभावी वकालत का अर्थ अधिक समय तक बोलना नहीं, बल्कि कम समय में सबसे मजबूत और तार्किक कानूनी तर्क प्रस्तुत करना है। एक अच्छा अधिवक्ता वही होता है, जो धैर्यपूर्वक सुनता है और न्यायपीठ के प्रश्नों का सटीक एवं तार्किक उत्तर देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट को भविष्य के अधिवक्ताओं की प्रयोगशाला के रूप में अपनाने तथा इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विधि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से लगभग 300 विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र का संचालन विद्यार्थियों भाव्या शर्मा एवं कशिश गुप्ता ने किया। अंत में सहायक आचार्य मिस प्रज्ञा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय ‘‘Fundamentals of Mooting’ रहा, जिसमें वक्ता में डॉ. शोरदीप रक्षित, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, क्राइस्ट (डीम्ड् विश्वविद्यालय), बैंगलोर रहे। उन्होंने प्रतियोगिता की अवधारणा, संरचना एवं मूलभूत पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मूटिंग का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता में भाग लेना या जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि अनुभव प्राप्त करना, विधिक समझ विकसित करना और अपनी प्रस्तुति क्षमता को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने मूट कोर्ट को एक ऐसी व्यवस्थित प्रक्रिया बताया, जिसमें विद्यार्थी काल्पनिक विधिक विवाद पर न्यायाधीश या न्यायाधीशों के पैनल के समक्ष लिखित एवं मौखिक तर्क प्रस्तुत करते हैं। कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र का विषय ‘‘Argumentation Skills and Courtroom Etiquette’’ रहा जिसमें वक्ता में मिस मिताली खत्री, लीगर रिसर्चर, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर रही। इस सत्र में विधिक तर्क-वितर्क की कला पर चर्चा की गई। वक्ता ने बताया कि तथ्यों, विधिक सिद्धांतों, वैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दृष्टांतों को तार्किक एवं प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना प्रभावी विधिक तर्क-वितर्क का आधार है। सत्र में मजबूत कानूनी तर्क तैयार करने, प्रासंगिक विधिक शोध करने तथा न्यायिक निर्णयों और अन्य विधिक प्राधिकारों का उचित उपयोग करने के महत्व को समझाया गया। 

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने खेल प्रतियोगिताओं में रचा इतिहास, पाँच चैंपियनशिप में जीते 42 पदक

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर की छात्राओं ने राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्र 2026-27 की विभिन्न अंतर महाविद्यालयी महिला खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए महाविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है। छात्राओं ने बास्केटबॉल, तैराकी, शतरंज, बॉक्सिंग एवं जूडो की प्रतियोगिताओं में अपनी खेल प्रतिभा, अनुशासन और उत्कृष्ट टीम भावना का परिचय देते हुए कुल 42 पदक अर्जित किए। इनमें तैराकी एवं जूडो में महाविद्यालय ने विजेता चैंपियनशिप प्राप्त की, जबकि बास्केटबॉल, शतरंज एवं बॉक्सिंग में उपविजेता का स्थान हासिल किया। अंतर महाविद्यालयी महिला तैराकी प्रतियोगिता में दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को महाविद्यालय की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्वर्ण, 3 रजत एवं 1 कांस्य सहित कुल 11 पदक जीतकर विजेता का खिताब प्राप्त किया। वहीं दिनांक 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में टीम ने उपविजेता रहते हुए 12 रजत पदक अर्जित किए। दिनांक 28-29 सितंबर 2026 को आयोजित महिला शतरंज प्रतियोगिता में छात्राओं ने उपविजेता का स्थान प्राप्त करते हुए 5 रजत पदक हासिल किए। इसी क्रम में दिनांक 16-17 अक्टूबर 2026 को आयोजित महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 2 स्वर्ण, 2 रजत एवं 4 कांस्य सहित कुल 8 पदक जीतकर उपविजेता का खिताब प्राप्त किया। 26-27 अक्टूबर 2026 को आयोजित महिला जूडो प्रतियोगिता में छात्राओं ने 3 स्वर्ण, 1 रजत एवं 2 कांस्य सहित कुल 6 पदक अर्जित कर विजेता चैंपियनशिप अपने नाम की। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सभी विजेता एवं प्रतिभागी छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धियाँ छात्राओं की मेहनत, लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम हैं। उन्होंने खेल प्रशिक्षकों एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महाविद्यालय छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी समान महत्त्व देता है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि छात्राएँ भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाती रहेंगी।  

    रावत पब्लिक स्कूल, भांकरोटा में सातवाँ वार्षिकोत्सव ‘नवोन्मेष’ हर्षोल्लास के साथ आयोजित

    जयपुर। रावत पब्लिक स्कूल, भांकरोटा में विद्यालय का सातवाँ वार्षिकोत्सव ‘नवोन्मेष–2026’ अत्यंत भव्यता, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन  बी.एस. रावत, निदेशक  हेमेन्द्र सिंह रावत,  नरेन्द्र सिंह रावत एवं रावत पब्लिक स्कूल, भांकरोटा की निदेशक डॉ. अक्षिता रावत द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जयपुर की उप महापौर श्रीमती सरोज कंवर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पुलिस मुख्यालय, जयपुर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (क्राइम)  विपिन पाण्डेय, IPS उपस्थित रहे। अतिथियों का विद्यालय परिवार द्वारा स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। वार्षिकोत्सव का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। संगीत, नृत्य, योग एवं विविध विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं, अनुशासन एवं सामाजिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिया। विशेष रूप से विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत योग प्रदर्शन ने दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया। योग के विभिन्न आसनों, संतुलन, लयबद्धता एवं सामूहिक समन्वय का उत्कृष्ट प्रदर्शन विद्यार्थियों की नियमित साधना और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन को दर्शाता था। वहीं खाटू श्याम जी पर आधारित भक्तिमय प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भावपूर्ण अभिनय, आकर्षक वेशभूषा एवं मनमोहक नृत्य ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का विशेष आकर्षण प्राप्त किया। इन दोनों प्रस्तुतियों की अतिथियों ने मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। साथ ही बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनकी मेहनत, लगन एवं शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए ‘रावत गौरव’ एवं ‘रावत प्रतिभा पुरस्कार’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास एवं अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास एवं उनमें अच्छे संस्कार विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मोनिका बोस ने सभी अतिथियों, रावत एजुकेशनल ग्रुप के पदाधिकारियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने वार्षिकोत्सव को सफल बनाने में योगदान देने वाले प्रत्येक सदस्य की सराहना की। ‘नवोन्मेष–2026’ विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना एवं सामूहिक प्रयासों का यादगार उत्सव बनकर संपन्न हुआ।

    गोबर और मिट्टी के दीयों से रोशन होगी दीपावली

     देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने किया 'वोकल फॉर लोकल' का आह्वान" जयपुर। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वॉकल फॉर लोकल' के संकल्प को साकार करने की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रदेश के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने आमजन से अपील की है कि इस बार दीपावली पर अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए गाय के गोबर और मिट्टी से बने दीयों व कलाकृतियों का ही उपयोग करें।  मंत्री कुमावत ने कहा कि गो-उत्पादों और पारंपरिक मिट्टी के दीयों को अपनाकर हम न केवल अपनी संस्कृति को सहेजेंगे, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और गरीब तबके को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंदिरों के लिए विशेष बजट इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस बार दीपावली पर देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख मंदिरों की विशेष साज-सज्जा और लाइटिंग के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट जारी किया गया है। धार्मिक पर्यटन और आस्था को मिल रहा बढ़ावा पिछले कुछ वर्षों का उल्लेख करते हुए  कुमावत ने प्रसन्नता जताई कि राज्य सरकार द्वारा हर साल प्रदेश के आराध्य देवों और प्रमुख मंदिरों की सजावट के लिए निरंतर योगदान दिया जा रहा है। सरकार के इन प्रयासों से न केवल त्योहारों की रौनक बढ़ी है, बल्कि मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक पर्यटन को भी एक नया विस्तार मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार की दीपावली प्रदेश में समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का नया संदेश लेकर आएगी।

    पीसीएम मसाला ने लॉन्च की ऐतिहासिक ‘धनवर्षा योजना 2026-27’: खुदरा विक्रेताओं के लिए दिवाली से पहले दिवाली का तोहफ़ा

     डबल धमाका ऑफ़र के तहत रिटेलर्स को मिलेगा ₹7 लाख और ₹4 लाख से अधिक का अतिरिक्त नकद इनाम व कूपन कैशबैक   20 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी ऐतिहासिक रिटेलर समृद्धि योजना जयपुर, राजस्थान: राजस्थान की प्रतिष्ठित एवं देश की अग्रणी मसाला निर्माण कंपनी पिंक सिटी मिल्स (पीसीएम मसाला) ने अपने नेटवर्क से जुड़े समस्त खुदरा विक्रेताओं (Retailers) के व्यापार में वृद्धि और उनकी समृद्धि के लिए ऐतिहासिक ‘पीसीएम धनवर्षा योजना 2026-27’ (दिवाली से पहले दिवाली ऑफर) का आधिकारिक शुभारंभ किया है। यह योजना 20 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। कंपनी नेतृत्व एवं प्रबंधन के वक्तव्य: एल. एल. गुप्ता एवं कृष्ण अवतार खंडेलवाल (प्रबंध निदेशक, पीसीएम मसाला) पीसीएम मसाला की 58 से अधिक वर्षों की गौरवशाली विरासत में हमारे खुदरा विक्रेताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। 'पीसीएम धनवर्षा योजना' हमारे रिटेलर भाइयों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की एक अनूठी पहल है। इस 'डबल धमाका योजना' से हर छोटा-बड़ा रिटेलर त्योहारों के इस मौसम में लखपति बनने का सपना साकार कर सकेगा।" अमित खंडेलवाल एवं अंकित खंडेलवाल (निदेशक, पीसीएम मसाला): "तकनीक और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए इस बार योजना का लाभ उठाना बेहद आसान बनाया गया है। रिटेलर्स को केवल उत्पाद पैकेट में दिए गए QR कोड को स्कैन करना है और कूपन का कैशबैक लाभ सीधे उनके बैंक खाते में तुरंत प्राप्त हो जाएगा। हम पारंपरिक गुणवत्ता के साथ आधुनिक व्यापारिक सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं।" *श्रीमती द्रौपदी देवी खंडेलवाल एवं श्रीमती माया देवी खंडेलवाल (सह-अध्यक्ष / Co-Chairpersons):"पीसीएम परिवार हमेशा से अपने विक्रेताओं और उपभोक्ताओं की खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध रहा है। 'दिवाली से पहले दिवाली' का यह ऑफर हमारे पूरे रिटेलर नेटवर्क में नई ऊर्जा, उमंग और समृद्धि का संचार करेगा।" 'पीसीएम धनवर्षा योजना 2026-27' के प्रमुख आकर्षण एवं मुख्य बिंदु: * पहला पक्का धमाका (QR कोड कूपन ऑन-द-स्पॉट कैशबैक):    * थोक/नियमित पैक (प्रति 10 किग्रा खरीद पर): ₹30 से लेकर ₹1,000 तक का QR कोड कूपन।    * प्रति 30 किग्रा खरीद पर: ₹90 से लेकर ₹1,500 तक का QR कोड कूपन।    * फैंसी बॉक्स पैक (प्रति 10 बॉक्स खरीद पर): ₹20 से लेकर ₹250 तक का कूपन।  * दूसरा पक्का धमाका (स्लैब अनुसार अतिरिक्त गारंटीड इनामी राशि):    * 14 लेवल्स (थोक खरीद): 100 किग्रा से 55,000 किग्रा तक की खरीद पर 14 अलग-अलग लेवल्स पूरे करने पर ₹7 लाख से भी अधिक का अतिरिक्त इनाम।    * 17 लेवल्स (फैंसी बॉक्स खरीद): 100 बॉक्स से 75,000 बॉक्स तक की खरीद पर 17 लेवल्स पूरे करने पर ₹4 लाख से अधिक का अतिरिक्त इनाम।  

    रूवास जोबनेर: विक्रम राठौड़ विश्वविद्यालय के जनसंपर्क सलाहकार मनोनीत

    कुलगुरु के निर्देशन में संभालेंगे जनसंपर्क व मीडिया प्रचार की जिम्मेदारी पूरी तरह से स्वैच्छिक और मानदेय-मुक्त होंगी सेवाएं जयपुर: राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (रूवास), जोबनेर, जयपुर के कुलसचिव कार्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। इसके तहत, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ को विश्वविद्यालय में आगामी आदेशों तक 'जनसंपर्क सलाहकार' के रूप में मनोनीत किया गया है। शैक्षणिक नीतियों और कार्यक्रमों का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, विक्रम राठौड़ विश्वविद्यालय के कुलगुरु के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे। उनका मुख्य दायित्व विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नीतियों, विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों का प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा अन्य हितधारकों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करना होगा। इसके साथ ही वे विश्वविद्यालय को जनसंपर्क से जुड़े मामलों में अपनी परामर्श सेवाएं भी प्रदान करेंगे। स्वैच्छिक और अवैतनिक सेवा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विक्रम राठौड़ द्वारा दी जाने वाली ये सेवाएं पूरी तरह से स्वैच्छिक और परामर्श प्रकृति की हैं। इन सेवाओं के एवज में उन्हें किसी भी प्रकार का मानदेय या भत्ता देय नहीं होगा। यह आदेश सक्षम स्तर के अनुमोदन के पश्चात कुलसचिव सावन कुमार चायल द्वारा 30 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है, जिसकी प्रतिलिपि विश्वविद्यालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक और संबंधित विभागों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है।