Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Latest

    प्री-पीएबी बैठक: अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

    — RSCERT पुनर्गठन, ड्रॉपआउट ट्रैकिंग, रिक्त पदों सहित विभिन्न शैक्षिक मुद्दों पर हुई विस्तृत समीक्षा जयपुर। समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के साथ 26 मई को आयोजित होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) बैठक से पूर्व सोमवार को शिक्षा संकुल में प्री-पीएबी बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार राजेश यादव ने की।   बैठक में आगामी पीएबी 2026–27 से संबंधित विभिन्न शैक्षिक एवं प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए विभागीय अधिकारियों एवं संबंधित उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।   बैठक के दौरान सामाजिक एवं मूल्यांकन ऑडिट, RSCERT के पुनर्गठन, शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की स्थिति, ड्रॉपआउट बच्चों की ट्रैकिंग, ICT लैब एवं स्मार्ट कक्षाओं की वर्तमान स्थिति, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के नामांकन, पहचान, मुख्यधारा में लाने एवं विशेष प्रशिक्षण से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की गई।   इसके साथ ही बालिका शौचालयों की उपलब्धता, अपार आईडी निर्माण की प्रगति, बहुभाषी शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव, विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की आवश्यकता, SQAAF, शिक्षकों के रिक्त पदों, प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI) 2.0 तथा परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 सहित अन्य शैक्षिक संकेतकों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।   अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं नवाचारों से संबंधित सभी प्रस्ताव तथ्यों एवं आवश्यक आंकड़ों के साथ समयबद्ध रूप से तैयार किए जाएं, ताकि पीएबी बैठक में राज्य का पक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा छात्र हित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया।   बैठक में राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक (प्रथम) सीमा शर्मा, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक (द्वितीय) अशोक कुमार मीणा सहित समस्त उपायुक्त एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

    प्लास्टिक कचरा संग्रहण अभियान का आयोजन’’

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 25 मई, 2026 को प्लास्टिक कचरा संग्रहण अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के तहत 86 किलो से भी ज्यादा प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर बिसलेरी इंडिया लिमिटेड को पुनर्नवीनीकरण एवं पुनर्चक्रण के लिए दिया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना एवं उसे पुनः उपयोग हेतु एकत्रित करना था और समाज को यह संदेश देना था कि ”यूज्ड प्लास्टिक कचरा नहीं है, यह पुनः उपयोग योग्य है।” इस पहल से यह स्पष्ट किया गया कि प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से पुनर्नवीनीकरण किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए हानिकारक होने के बजाय उपयोगी बन सकता है। महाविद्यालय की छात्राओं के साथ सभी स्टाफ को भी प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने घरों से उपयोग की हुई प्लास्टिक की बोतलें और अन्य प्लास्टिक सामग्री इस अभियान में जमा करें। स्वयं सेविकाओं ने पोस्टर और स्लोगन के माध्यम से प्लास्टिक के पुनर्चक्रण के महत्व को समझाया। ”यूज्ड प्लास्टिक को कचरे में न फेंके, उसे पुनः उपयोग में लाएं“ जैसे नारे लगाए गए। एकत्रित प्लास्टिक सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया ताकि इसे सही तरीके से पुनर्नवीनीकरण के लिए भेजा जा सके। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक बोतलें, पॉलिथीन और अन्य प्लास्टिक सामग्री एकत्र की गई। इन सामग्रियों को आगे पुनर्चक्रण केंद्र भेजने की व्यवस्था की गई। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया इस अभियान ने छात्राओं और स्टाफ को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से जोड़ा और प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया के प्रति जागरूक किया। इस पहल से न केवल प्लास्टिक कचरा कम हुआ, बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी उठाया गया। महाविद्यालय की यह पहल अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध होगी। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आँचल पुरी, डॉ. विजयलक्ष्मी गुप्ता, डॉ. रेणु शक्तावत एवं चारूल शर्मा की भूमिका रही ।  

    जल के बिना सृष्टि की कल्पना असंभव : कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत

    जल संरक्षण जन अभियान का आगाज, आयोजित हुईं विभिन्न गतिविधियां • प्रभारी सचिव पी रमेश व जिला कलक्टर व अन्य रहे मौजूद पाली । “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026” के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुसार सोमवार को गंगा दशहरा के अवसर पर पाली जिला प्रशासन द्वारा एक भव्य “वन्दे गंगा कलश यात्रा” का आयोजन किया गया। अभियान सोमवार, 25 जून से प्रांरभ होकर विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून तक चलेगा। अभियान में प्रत्येक दिन विभिन्न विभागों की विविध गतिविधियां आयोजित होगी।  कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रातः व्यास सर्कल से हरी झंडी दिखाई और अभियान का शुभारंभ किया। वंदे गंगा प्रभात फेरी व्यास सर्किल से अम्बेडकर सर्किल तक निकली गयी। इस अवसर पर उन्होंने फेरी को हरी झंडी दिखायी जल बचाने की व संरक्षित रखने की शपथ भी दिलायी। साथ ही लखोटिया उद्यान में श्रमदान एवं स्वच्छता गतिविधियां भी आयोजित की गई, जिनमें कुमावत ने सहभागिता की। “वन्दे गंगा कलश यात्रा” के मार्ग और गऊ घाट पर पीपल पूजन, दीप प्रज्ज्वलन, आकर्षक रंगोली निर्माण तथा विधि-विधान से जल पूजन जैसे अनेक सांस्कृतिक व पर्यावरण-अनुकूल कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण के नारों की गूँज रही। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान कुमावत ने राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद के अंतर्गत स्वरोजगार से जुड़ी विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा महिला स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उद्यमों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इसके उपरांत मंत्री कुमावत ने लखोटिया उद्यान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणादायी “एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं उपस्थित जनों के साथ पौधारोपण किया। साथ ही उपस्थित नारी शक्ति को पीपल के पौधे वितरित कर पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन को जल संरक्षण और नदियों की स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने जल की हर एक बूँद को सहेजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल के बिना सृष्टि की कल्पना असंभव है। हमारी प्राचीन संस्कृति ने हमेशा जल और प्रकृति को पूजनीय माना है। कुमावत ने कहा कि आज बढ़ता जल संकट एक गंभीर चुनौती है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाना ही होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी अभियान तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक आम जनता उससे न जुड़े। पानी को व्यर्थ बहने से रोकना हर नागरिक का कर्तव्य है। मंत्री कुमावत ने कहा कि राजस्थान सरकार जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि कलश यात्रा में उमड़ी महिलाओं की भीड़ यह दर्शाती है कि समाज में जल चेतना जागृत हो चुकी है, क्योंकि घर-परिवार में जल प्रबंधन की धुरी महिलाएँ ही हैं। मंत्री कुमावत ने उपस्थित जनसमूह को जल की बर्बादी रोकने और वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) को अपनाने का संकल्प दिलाया। उनके साथ जिले के प्रभारी सचिव सचिव पी रमेश, जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी, नगरपरिषद के पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा, जिला परिषद सीईओ मुकेश चौधरी, पुखराज पटेल, त्रिलोक चौधरी, स्काउट गाईड व बडी संख्या में बच्चे मौजूद रहे। जल संरक्षण में मीडीया की अहम् भूमिका : मंत्री कुमावत कैबिनेट मंत्री कुमावत ने पत्रकार वार्ता में जल संरक्षण सद्पयोग के बारे में जागरूक कर 5 जून तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप जल संरक्षण की थीम पर यह व्यापक अभियान शुरू किया गया है। 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान को धरातल पर लागू करवाने और आमजन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने अपील की कि मीडिया इस अभियान के संदेश को जन-जन तक ले जा सकती है ,ताकि लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने विगत वर्ष हुए रिकॉर्ड पौधारोपण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारा दायित्व है कि हम आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित धरोहर और समृद्ध संस्कृति सौंप कर जाएं। इसके लिए प्रकृति का संरक्षण और व्यापक पौधारोपण बेहद जरूरी है। उन्होने इसे जन जन का अभियान बनाने का आहा्न किया इसमें सभी की भागीदारी हो। इस अवसर पर प्रभारी सचिव पी रमेश, जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलटर डॉ बजरंग सिंह, सीईओं मुकेश चौधरी, एसीईओ महेन्द्र मेहता, सभी जिला स्तरीय अधिकारी, उपखंड अधिकारी व अन्य संबधित कार्मिक मौजूद रहे।

    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब: 12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड

    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब:  12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड डॉ. राम भजन कुमावत  जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं का परिणाम घोषित किए जाने के बाद प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के घरों में कहीं उत्सव तो कहीं आगे की रणनीति को लेकर मंथन का दौर जारी है। इस वर्ष भी कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों ही संकायों में शानदार उत्तीर्ण प्रतिशत रहा है, जिसमें बेटियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजस्थान का युवा अब किस दिशा में आगे बढ़ रहा है? पारंपरिक ढर्रे को छोड़ इस बार राजस्थान के विद्यार्थियों के रुझान में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। छात्र अब केवल डिग्री हासिल करने के बजाय करियर और स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रोफेशनल और जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेज की तरफ झुकाव   कोटा, जयपुर, जोधपुर और सीकर जैसे शिक्षा के बड़े केंद्रों से आ रही रिपोर्ट बताती है कि अब छात्र सिर्फ बीए, बीएससी या बीकॉम जैसी सामान्य डिग्रियों के भरोसे नहीं बैठना चाहते। इस बार विद्यार्थियों का सबसे बड़ा रुझान प्रोफेशनल कोर्सेज की तरफ है।   आईटी और टेक क्षेत्र:  कंप्यूटर एप्लीकेशन, डेटा एनालिसिस, और एआई से जुड़े कोर्सेज के लिए कॉलेजों में पूछताछ अचानक बढ़ गई है। विज्ञान वर्ग के छात्र इंजीनियरिंग के अलावा अब सीधे टेक-स्किल्स सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।   मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट:  वाणिज्य और कला वर्ग के छात्रों में बीबीए और होटल मैनेजमेंट जैसे कोर्सेज का क्रेज बढ़ा है, ताकि पढ़ाई पूरी होते ही हाथ में रोजगार हो।    सीयूईटी के जरिए देश के टॉप विश्वविद्यालयों पर नजर   राजस्थान के युवाओं में अब स्थानीय कॉलेजों के अलावा देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, बीएचयू, जेएनयू) में दाखिला पाने की होड़ मची है। 12वीं की परीक्षा खत्म होते ही छात्र सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी में जुट गए थे। खासकर शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू) और मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र अब देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना चाहते हैं।   कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही 'सरकारी नौकरी' का लक्ष्य   राजस्थान में सरकारी नौकरी (सिविल सर्विसेज, प्रशासनिक सेवाएं और बैंकिंग) के प्रति दीवानगी जगजाहिर है। इस बार का ट्रेंड दिखाता है कि छात्र स्नातक की पढ़ाई को एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह देख रहे हैं। कला वर्ग में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन रहने का एक बड़ा कारण यह भी है कि छात्र आरएएस, आईएएस या शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को ध्यान में रखकर ही 11वीं-12वीं में ह्यूमेनिटीज चुनते हैं। अब परिणाम आते ही छात्र कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ इन प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग या ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर तैयारी में जुट गए हैं।   बेटियों की उड़ान: आत्मनिर्भर बनने की नई जिद   इस साल के नतीजों में भी छात्राओं का पास प्रतिशत छात्रों से काफी बेहतर रहा है। यह बदलाव केवल मार्कशीट तक सीमित नहीं है। गांवों और कस्बों की लड़कियां अब केवल घर के पास के महिला कॉलेजों से प्राइवेट पढ़ाई करने तक सीमित नहीं हैं; वे नर्सिंग, क्लैट ( लॉ एंट्रेंस), डिजिटल मार्केटिंग और डिफेंस सर्विसेज (जैसे पुलिस और सेना भर्ती) में करियर बनाने के लिए घरों से बाहर निकल रही हैं।   छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' बनना चाहते हैं   राजस्थान में 12वीं के बाद का यह नया परिदृश्य साफ करता है कि आज का छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' और 'स्किलफुल' बनना चाहता है। युवाओं का यह बदला हुआ रुख आने वाले समय में राजस्थान को देश के सबसे बड़े 'ह्यूमन रिसोर्स हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

    पाली जिले में दर्जनों पशु चिकित्सालयों को मिलेंगे नए भवन

    -पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने किया वर्चुअली शिलान्यास -सोनाई मांझी में मुख्यमंत्री बजट घोषणा की सड़क जनता को समर्पित   पाली/सुमेरपुर। विधानसभा क्षेत्र के सोनाई मांझी गांव में रविवार को विकास कार्यों की सौगात देने के लिए एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत थे। मंत्री कुमावत ने गांव और आस-पास के क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा मुख्यमंत्री बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत नवनिर्मित सोनाई मांझी से आइचिया सड़क का विधिवत लोकार्पण किया गया। इसी दौरान कुमावत ने राजकीय पशु चिकित्सालय, बालराई, जिला पाली की चारदिवारी के निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया। इस चारदिवारी के निर्माण कार्य पर 13.97 लाख रुपए की लागत आएगी। इसके अतिरिक्त पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली व ब्यावर जिले के दर्जनों राजकीय पशु चिकित्सा उप केंद्रों, पशु चिकित्सालयों, प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों, राजकीय बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय तथा राजकीय ब्लॉक वेटेरीनरी हेल्थ ऑफिस, खैरवा की चारदिवारी के निर्माण कार्य का वर्चुअली शिलान्यास किया। साथ ही उन्होंने पाली जिले के सिंदरू, सोनाई मांझी, भांगेसर, कोरटा, खिमाडा, टेवाली, खिवांदी, खारड़ा, नीपल, लापोद, ब्यावर जिले के सेंदड़ा व लिलांबा के राजकीय पशु चिकित्सालय के नए भवन निर्माण कार्यों का भी शिलान्यास किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने मंत्री का साफा पहनाकर और मालाओं से भव्य स्वागत किया।   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री कुमावत ने कहा-आज का यह दिन हमारे सुमेरपुर क्षेत्र और विशेषकर सोनाई मांझी के लिए बेहद हर्ष का विषय है। हमारी सरकार 'सशक्त राजस्थान, समृद्ध राजस्थान' के संकल्प को लेकर निरंतर आगे बढ़ रही है। आज जिस सोनाई मांझी से आइचिया सड़क का लोकार्पण हुआ है, वह केवल डामर की सड़क नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र के विकास और खुशहाली का नया मार्ग है। इस सड़क के बनने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का आवागमन सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट 2025-26 में जो वादा आपसे किया था, आज वह धरातल पर उतर चुका है।   मेरे पास जो पशुपालन, गोपालन और डेयरी विभाग हैं, वे सीधे हमारे ग्रामीण परिवेश और किसान भाइयों की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हमारी गौमाता की सेवा, पशुपालकों के कल्याण और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं का पैसा सीधे आप तक पहुंचेगा। देवस्थान विभाग के माध्यम से हम हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का भी कायाकल्प कर रहे हैं। विकास की यह गंगा रुकने वाली नहीं है। सुमेरपुर विधानसभा का हर गांव, हर ढाणी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। इस दौरान मंत्री श्री कुमावत ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके त्वरित, प्रभावी एवं गुणवतापूर्ण निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस मोके पर पाली पंचायत समिति प्रधान के प्रतिनिधि पुखराज पटेल, पशुपालन विभाग के निदेशक सुरेश मीणा, किसान केसरी भंवर चौधरी, पूर्व उप जिला प्रमुख नवल किशोर रावल, रामलाल कुमावत, हेमावास के पूर्व सरपंच मोहनलाल, हेमावास के मंडल अध्यक्ष मनोहरलाल सीरवी, सोनाई मांझी के सरपंच प्रताप सिंह, पंचायत समिति सदस्य रामलाल हीरागर, बडेरवास के पूर्व सरपंच मांगीलाल चौधरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।  

    अग्रवाल पीजी महाविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित

    अग्रवाल पीजी महाविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित। अग्रवाल कॉलेज जयपुर में विद्यार्थी प्रतिभा सम्मान समारोह -2026 का आयोजन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. सरीना कालिया रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एल. देवंदा ने की। समारोह में मनीष मित्तल राहुल पारीक एवं रोहित गर्ग उपस्थित रहे। प्राचार्य ने बताया कि राजस्थान प्रदेश के 12 वी में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल सिल्वर मेडल एवं ब्रोंज मेडल एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया । समारोह में शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. सरीना कालिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता निरंतर परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने एवं समाज के विकास में योगदान देने की प्रेरणा दी। प्राचार्य डॉ. बी.एल. देवंदा ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि कॉलेज हमेशा छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत है। उन्होंने सम्मानित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री अग्रवाल शिक्षा समिति के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल महासचिव नरेश सिंघल तथा कॉलेज सचिव अशोक गोयल ने कार्यक्रम की सफलता की शुभकामनाएं प्रेषित की। कार्यक्रम में कॉलेज के सभी शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।  

    वेदांत और भगवद्गीता की रोशनी में सुलझेंगे सुंदरकांड के गूढ़ रहस्य

    जयपुर - जयपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरा एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक वैचारिक क्रांति की गवाह बनने जा रही है। आगामी 30 मई, शनिवार को वेद विद्या ट्रस्ट दिल्ली के तत्वावधान में बनीपार्क स्थित “श्री जंगलेश्वर महादेव मंदिर” में एक दिवसीय सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। सुंदरकांड - एक तार्किक विश्लेषण इस ज्ञान यज्ञ के मुख्य वक्ता “आर्ष विद्या मंदिर दिल्ली के परम पूज्य ब्रह्मलीन स्वामी प्रबुद्धानंद जी” की महान वेदांत परंपरा के संवाहक आचार्य ईश्वरानंदा जी होंगे, जो सुंदरकांड के माध्यम से जीवन-प्रबंधन के उन व्यावहारिक सूत्रों को खोलेंगे, जिनका सीधा संबंध भगवान श्री कृष्ण द्वारा भगवद्गीता में दिए गए निष्काम कर्म के सिद्धांतों से है। राजधानी जयपुर में सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता आचार्य ईश्वरानंदा भी मौजुद रहें। आचार्य ईश्वरानंदा ने बताया कि यह आयोजन पारंपरिक पाठ से आगे बढ़कर, आधुनिक मानव जीवन की समस्याओं का एक लॉजिकल और सर्जिकल ऑडिट होगा। यह व्याख्यान समाज को अंधविश्वास और केवल बाहरी कर्मकांडों से ऊपर उठाकर शास्त्र श्रवण, शास्त्रों के गहरे और तार्किक अध्ययन की ओर प्रेरित करेगा। आयोजन समिति की सदस्य गरिमा श्रृंगी ने बताया कि इस सत्र में भगवदगीता के ज्ञान को जोड़ते हुए यह सिखाया जाएगा कि कैसे भक्ति हमारे अंतःकरण को कोमल और शुद्ध बनाती है, और कैसे वेदांत का ज्ञान हमें पूर्ण मोक्ष की ओर ले जाता है।  

    शिक्षा मंत्री के साथ शैक्षिक महासंघ की वार्ता , गतिरोध समाप्त,आंदोलन स्थगित ग्रीष्मावकाश 28 जून तक

    प्रधानाचार्य अधिकृत अवकाश पूर्व की भांति ​जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (ABRSM) विद्यालय शिक्षा द्वारा शिक्षकों के हितों को लेकर चलाए जा रहे प्रान्तव्यापी आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है। 29 मई को होने वाले जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन के भारी दबाव के मध्य शुक्रवार देर रात शिक्षा मंत्री ने संगठन के शिष्टमंडल को वार्ता के लिए अपने निवास पर आमंत्रित किया। ​प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल और शिक्षा मंत्री के मध्य, छात्र एवं शिक्षक हित में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई, जिसके बाद संगठन ने अपने आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा की है। ​प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने बताया कि वार्ता के मुख्य बिन्दुओं में नया शैक्षणिक सत्र 21 जून के बजाय 29 जून से प्रारंभ करने तथा संस्था प्रधान अधिकृत अवकाश में की गई कटौती को वापस लेते हुए इसे यथावत 2 दिवस रखने पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इसके आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। ​ तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों के स्थानांतरण (तबादलों) के विषय पर शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री से विशेष अनुरोध करने का आश्वासन दिया। ​शिक्षकों की पदोन्नति के मामले में माननीय न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने के लिए शिक्षा मंत्री ने शिष्टमंडल के सामने ही विभागीय अधिकारियों और अतिरिक्त महाधिवक्ता को दूरभाष पर निर्देश दिए। वहीं ​ क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति दिलाने और तृतीय श्रेणी शिक्षकों व प्रबोधकों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए वित्त विभाग के स्तर पर व्यक्तिगत प्रयास करने का भरोसा दिया। ​ शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में अधिकांश संख्या में केवल शिक्षकों को न लगाने के लिए चुनाव आयोग सहित संबंधित विभागों से संवाद कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। ​ संविदा कर्मियों के लिए बने नियमों को लेकर अधिकारियों के साथ पुनर्विचार करने की बात कही। ​संघर्ष समिति सयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि​"यह शिक्षकों के संघर्ष की जीत है" उन्होंने जानकारी दी कि "शिक्षा मंत्री के साथ हुए संवाद में अधिकांश मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। विभाग के इस सकारात्मक और गंभीर रुख को देखते हुए संगठन ने अपने आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि संघर्ष के कारण ही विभाग को हमारी मांगों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ा। ​प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने कहा कि संगठन के मांग पत्र में शामिल अन्य प्रशासनिक मुद्दों के निस्तारण के लिए भी शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को तुरंत वार्ता करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से हुए इस महत्वपूर्ण संवाद में प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के साथ प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा, संघर्ष समिति संयोजक सम्पत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। ​

    भारतीय भाषाओं को सशक्त करना ही भारत की आत्मा को सशक्त करना है : प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी CBSE के त्रिभाषा सूत्र (R3) के समर्थन में उठी राष्ट्रीय आवाज़

    जयपुर । कक्षा 9 से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा त्रिभाषा सूत्र (R3) के कार्यान्वयन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) के बाद देशभर में भारतीय भाषाओं, सांस्कृतिक अस्मिता और शिक्षा नीति को लेकर व्यापक चर्चा प्रारंभ हो गई है। शिक्षा जगत, भाषाविदो तथा भारतीय भाषाओ के समर्थको का मानना है कि यह केवल पाठ्यक्रम से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की भाषाई पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता और शैक्षिक न्याय से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारतीय भाषाओं को लेकर बढ़ी राष्ट्रीय चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि देश के सीमित अभिजात्य वर्ग अथवा विदेशी भाषा समर्थक समूहों की अपेक्षाओं के आधार पर करोड़ों विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं के अध्ययन से वंचित नहीं किया जा सकता। अधिकांश विद्यार्थी आठवीं कक्षा तक किसी भारतीय भाषा का अध्ययन करते हैं और नई व्यवस्था उन्हें कक्षा 9 एवं 10 तक उसी भाषा का अध्ययन जारी रखने का अवसर प्रदान करती है। भारत की भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला हैं। इस विषय पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि भारत की भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओ को शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है तथा सीबीएसई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का त्रिभाषा सूत्र उसी दूरदर्शी सोच का व्यावहारिक स्वरूप है। प्रो. वरखेड़ी ने कहा जो विद्यार्थी प्रारंभिक कक्षाओ से भारतीय भाषाओं का अध्ययन करते आए हैं, उन्हें माध्यमिक स्तर पर भी भाषाई निरंतरता का अवसर मिलना चाहिए। मातृभाषा और भारतीय भाषाओ में शिक्षा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, आत्मविश्वास और सृजनात्मक क्षमता को सुदृढ़ करती है। भारत की भाषाई विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे संरक्षित तथा समृद्ध करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विदेशी भाषाओं का विरोध नहीं, भारतीय भाषाओं का सम्मान प्रो. वरखेड़ी ने स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाओ के संवर्धन का अर्थ किसी विदेशी भाषा का विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सदैव विश्व ज्ञान के प्रति उदार और खुला रहा है, किंतु अपनी भाषाई जड़ों को कमजोर कर कोई भी राष्ट्र दीर्घकाल तक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नहीं रह सकता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना से जुड़ा R3 मॉडल शिक्षाविदों के अनुसार सीबीएसई द्वारा लागू किया जा रहा R3 मॉडल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की मूल भावना के अनुरूप है। नई शिक्षा नीति मातृभाषा आधारित शिक्षा, बहुभाषिकता तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल देती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोधों में भी यह सिद्ध हुआ है कि विद्यार्थी अपनी परिचित भाषा में अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं तथा उनका बौद्धिक, भावनात्मक और रचनात्मक विकास अधिक सुदृढ़ होता है। भारतीय भाषाओं के अध्ययन के प्रमुख लाभ 1. बौद्धिक विकास बहुभाषिक शिक्षा विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति, तार्किक चिंतन और रचनात्मकता को विकसित करती है। 2. शैक्षिक समानता भारतीय भाषाएँ शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं तथा इससे शिक्षा में कृत्रिम अभिजात्यवाद कम होता है। 3. सांस्कृतिक संरक्षण भाषा के माध्यम से साहित्य, लोकज्ञान, परंपराएँ और राष्ट्रीय स्मृतियाँ सुरक्षित रहती हैं। 4.राष्ट्रीय एकता भारतीय भाषाएँ विभिन्न क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करती हैं। 5.विद्यार्थियों के हित में निरंतरता आठवीं कक्षा तक किसी भारतीय भाषा का अध्ययन कर चुके विद्यार्थियों को आगे भी उसी भाषा के अध्ययन का अवसर मिलना चाहिए। इसे लेकर जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े विद्वानों ने देशभर में भारतीय भाषाओ के समर्थन में सकारात्मक जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया है। सामाजिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, डिजिटल मंचों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों से अपेक्षा की जा रही है कि वे बहुभाषिक शिक्षा और भारतीय भाषाओ के महत्व को समाज तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।  

    कलाओं के प्रदेश में कला शिक्षा विषय की दुर्दशा

    लाखों बच्चों के सृजनात्मक आनन्द मय शिक्षण के साथ खिलवाड़ सरकार ने राज्य पाठ्य-पुस्तक सूची में एनसीईआरटी की कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम सम्मिलित करना भूली न डिमांड भेजी नतिजा नवीन सत्र 2026-27 में कला शिक्षा का न पाठ्यक्रम न पुस्तक कक्षा 9,10 की कला कुन्ज पुस्तक का भी मुद्रण, वितरण भी बन्द राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग ने सत्र 2020-2021 से एनसीईआरटी का कक्षा 6 से 12 तक पाठ्यक्रम पुस्तक लागू कर दिया है जिसके के तहत् एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम व पुस्तक लागू है उसका शिक्षण राजकीय विद्यालयों में करवाया जाता है लेकिन कलाओं के प्रदेश राजस्थान में कला शिक्षा विषय स्थिति दयनीय है शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम को राज्य की पाठ्य-पुस्तक पाठ्यक्रम सूची में सम्मिलित नहीं किया जिससे नवीन सत्र में कला शिक्षा की पुस्तक का न तो मुद्रण हुआ न वितरण हुआ और न डिमांड भेजी राज्य सरकार के पास नवीन सत्र 2026-2027 में अनिवार्य कला शिक्षा विषय का कक्षा 1 से 8 तक न पाठ्यक्रम है पुस्तक उपलब्ध है और राज्य में कक्षा 9 और 10 में लागू कला शिक्षा पाठ्यक्रम की पुस्तक कला कुन्ज पुस्तक की डिमांड नहीं भेजने से उसका मुद्रण और वितरण भी बन्द है अब देखने वाली बात यह है की कक्षा 1 से 10 तक नवीन सत्र में राजकीय विद्यालयों सहित निजी विद्यालयों में लाखों बच्चों का अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत विषय का शिक्षण कैसे होगा ? बिना पुस्तक, पाठ्यक्रम, शिक्षण के लाखों बच्चों का 100 अंकों होगा मूल्यांकन अंकतालिकाओं आयेगी ग्रेड अनिवार्य है शिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत सहित कलाओं का शिक्षण अनिवार्य है। 100 अंकों का निर्धारित मूल्यांकन कला शिक्षा के लिए 100 अंकों का मूल्यांकन शिक्षा विभाग ने निर्धारित कर रखा है जिसके आधार पर अंकतालिकाओं में ग्रेड आती है। एनसीईआरटी की यह है पुस्तकें लागू कक्षा 3 से 5 तक बांसूरी नामक कक्षा 6 से 8 तक कृति नामक कक्षा 9 में मधुरिमा राज्य में कक्षा 9 व 10 में कला कुन्ज पुस्तक नामक शिक्षा विभाग अतिशीघ्र एनसीईआरटी की कक्षा 3 से 10 तक कला शिक्षा विषय निर्धारित के पाठ्यक्रम पुस्तक को राज्य की पाठ्य-पुस्तक सूची में सम्मिलित कर पुस्तक मुद्रण कर राजकीय विद्यालयों नि: शुल्क वितरण करायें ताकि लाखों को कला शिक्षा विषय का नवीन सत्र में शिक्षण मिल सकें। महेश गुर्जर प्रदेश सचिव कला शिक्षा आन्दोलन