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    सोने की कीमतों पर दबाव बरकरार, जुलाई में भी गिरावट की आशंका; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

    Yugcharan News - 02-07-2026 वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में भी यह कमजोरी जारी रह सकती है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और वैश्विक आर्थिक संकेतों के चलते निवेशकों का रुझान फिलहाल सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से कुछ हद तक कम हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही सोने के लिए पिछले कई वर्षों की सबसे कमजोर तिमाहियों में रही। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद अब कीमतों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना ने सोने की चमक फीकी कर दी है। इसके अलावा मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले और बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार कई सप्ताह से दबाव में बनी हुई है। हाल के कारोबारी सत्रों में यह कई महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं, जिससे निकट भविष्य में तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि, भारत में स्थिति कुछ अलग देखने को मिल रही है। कीमतों में आई गिरावट के बाद घरेलू बाजार में आभूषण खरीदने वालों की दिलचस्पी बढ़ी है। कई शहरों में ज्वेलर्स के अनुसार ग्राहकों की संख्या में सुधार देखा गया है, क्योंकि कम कीमतों का फायदा उठाकर लोग खरीदारी कर रहे हैं। इसके विपरीत चीन जैसे बड़े बाजारों में मांग अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों, महंगाई, विनिर्माण गतिविधियों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की टिप्पणियों पर रहेगी। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर यह तय होगा कि ब्याज दरों में आगे क्या रुख अपनाया जा सकता है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इसके साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विशेषकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय निवेश फंडों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक तनाव दोबारा बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर से मजबूत हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो कीमतों में सीमित सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन जब तक मौद्रिक नीति सख्त बनी रहती है, तब तक सोने पर दबाव बने रहने की संभावना अधिक है। चांदी के बाजार को लेकर भी विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। हालांकि हालिया गिरावट के बाद चांदी में नीचे की ओर दबाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है, जबकि मजबूत तेजी के लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आवश्यक होगा। बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में जल्दबाजी में बड़े निवेश करने के बजाय वैश्विक आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जा रही है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार में बढ़ती अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की आवश्यकता है।   कुल मिलाकर, जुलाई की शुरुआत में सोने के बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि घरेलू मांग में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती फिलहाल सोने की कीमतों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले आर्थिक आंकड़े यह तय करेंगे कि सोने में गिरावट जारी रहेगी या बाजार को नई दिशा मिलेगी।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के दिए निर्देश

      Yugcharan News - 02-07-2026 दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा द्वारा दायर उस याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक सामग्री, मॉर्फ्ड वीडियो और डीपफेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पांच ऐसे पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जिन्हें प्रथम दृष्टया मानहानिकारक माना गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना को अपने पेशे का स्वाभाविक हिस्सा मानकर स्वीकार करना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन, नीतियों में बदलाव और राजनीतिक घटनाक्रम पर हास्य और व्यंग्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं। राघव चड्ढा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर सुनियोजित अभियान चलाया गया। याचिका के अनुसार इस अभियान के तहत कथित रूप से डीपफेक वीडियो, संपादित क्लिप और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह की सामग्री से उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और इसे तत्काल विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की भी मांग की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का प्रतीत नहीं होता। अदालत ने कहा कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के संबंध में व्यंग्य, पैरोडी या राजनीतिक टिप्पणी को केवल इस आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता कि उससे संबंधित व्यक्ति असहज महसूस करता है। हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। यदि कोई सामग्री किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बिना आधार नुकसान पहुंचाती है या प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है, तो ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने सोशल मीडिया पर प्रसारित पांच पोस्ट को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक मानते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया। बाकी सामग्री के संबंध में अदालत ने तत्काल किसी व्यापक रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की आगे विस्तृत सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा। यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक कंटेंट, सोशल मीडिया अभियानों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लेकर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मामले में आने वाला अंतिम निर्णय राजनीतिक अभिव्यक्ति, ऑनलाइन व्यंग्य और डिजिटल प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय कर सकता है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कोई सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हो तो उसके खिलाफ कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विवाद के अन्य पहलुओं पर भी विस्तार से विचार करेगी।    

    दिल्ली में अमेरिकी महिला की मदद कर मिसाल बने स्थानीय बुजुर्ग, वायरल वीडियो ने जीता लोगों का दिल

      Yugcharan News - 02-07-2026 भारत घूमने आई एक अमेरिकी महिला का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजधानी दिल्ली में अचानक फोन की बैटरी खत्म हो जाने के बाद वह खुद को असहाय महसूस कर रही थीं। ऐसे मुश्किल समय में एक स्थानीय बुजुर्ग ने आगे बढ़कर उनकी मदद की। महिला ने इस पूरे अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं और भारतीय मेहमाननवाज़ी की जमकर सराहना कर रहे हैं। अमेरिका की रहने वाली सिएरा लिलियन इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि दिल्ली में घूमते समय उनके फोन की बैटरी पूरी तरह खत्म हो गई थी। फोन बंद होने के कारण वह न तो कैब बुक कर पा रही थीं, न ही मैप देख सकती थीं और न ही किसी परिचित से संपर्क कर पा रही थीं। अनजान शहर में इस स्थिति ने उन्हें काफी चिंतित कर दिया। सिएरा के अनुसार, जब वह आगे क्या करें, इसे लेकर परेशान थीं, तभी एक स्थानीय बुजुर्ग उनकी मदद के लिए आगे आए। महिला ने उन्हें प्यार से "अंकल जी" कहकर संबोधित किया। उन्होंने न केवल सिएरा के फोन को चार्ज करने की व्यवस्था की, बल्कि तब तक उनके साथ भी रहे जब तक वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करने लगीं। वीडियो में दिखाया गया है कि बुजुर्ग ने सिएरा का अपने घर पर स्वागत किया और उन्हें भोजन भी कराया। उन्होंने अपने घर और आसपास का इलाका दिखाया, अपनी गायों से परिचय कराया, पेड़-पौधों के बारे में बताया और पास के मंदिर भी लेकर गए। पूरी मुलाकात के दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि विदेशी मेहमान सहज और सुरक्षित महसूस करें। सिएरा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इस घटना ने उन्हें भारतीय संस्कृति में प्रचलित "अतिथि देवो भव" की भावना को करीब से समझने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मिले इस व्यक्ति की निस्वार्थ सहायता और अपनापन उनकी भारत यात्रा की सबसे यादगार घटनाओं में से एक रहेगा। सोशल मीडिया पर साझा किया गया यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने बुजुर्ग की उदारता और इंसानियत की प्रशंसा करते हुए लिखा कि यही भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाज़ी की असली पहचान है। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे नेक काम दुनिया के सामने भारत की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इंटरनेट पर इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोगों का मानना है कि अनजान व्यक्ति की निस्वार्थ मदद करना समाज में विश्वास और मानवता को मजबूत बनाता है। यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में दिखाई गई छोटी-सी मदद भी किसी व्यक्ति के जीवन का यादगार अनुभव बन सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो भारत की मेहमाननवाज़ी और मानवीय मूल्यों की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करता है।    

    दिल्ली में मानसून की धमाकेदार एंट्री, मुंबई में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त; कई राज्यों में भारी वर्षा का अलर्ट

      Yugcharan News - 02-07-2026 देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और गुरुवार को इसकी दस्तक के साथ कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आखिरकार मानसून ने प्रवेश कर लिया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली। वहीं दूसरी ओर मुंबई, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। दिल्ली में सुबह से ही हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मौसम में अचानक आए बदलाव से तापमान में गिरावट आई और लोगों को लंबे समय से चली आ रही उमस से राहत मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार राजधानी में पूरे दिन बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। विभाग ने अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ वर्षा जारी रहने का अनुमान भी जताया है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष दिल्ली में मानसून सामान्य तिथि से कुछ दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन इसके सक्रिय होने के बाद आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई राज्यों में वर्षा की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। दूसरी ओर आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ। अंधेरी, चेंबूर, दादर, किंग्स सर्कल और अन्य इलाकों में सड़कों पर पानी भरने से वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई रेलवे ट्रैक भी पानी में डूब गए, जिसके कारण लोकल ट्रेन सेवाएं देरी से संचालित हुईं। मुंबई के लिए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों तक तेज से अत्यधिक तेज बारिश की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने और कमजोर भवनों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि रात और अगले दिन सुबह तक भारी बारिश जारी रह सकती है। हिमाचल प्रदेश में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राज्य के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा है। मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर दिन के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम काफी सुहावना हो गया है, लेकिन लगातार बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। भूस्खलन की आशंका को देखते हुए पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से बचने की सलाह भी दी गई है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार वर्षा के चलते नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और चेतावनी स्तर के करीब पहुंचने पर लोगों को समय रहते अलर्ट जारी करने की तैयारी कर ली गई है। अधिकारियों ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक घोषणाओं और स्थानीय टीमों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा क्षेत्र में भी भारी बारिश जारी है। प्रशासन ने लोगों को भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने और अगले कुछ दिनों तक अनावश्यक यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़कें प्रभावित होने और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। देश के कई हिस्सों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में जान-माल का नुकसान भी हुआ है। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में बारिश तथा भूस्खलन से कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में भी लोगों की जान गई है। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी और सहायता कार्यों में जुटे हुए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र तथा पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून अब पूरे उत्तर भारत में तेजी से सक्रिय हो रहा है। इसके चलते आने वाले दिनों में वर्षा की तीव्रता और बढ़ सकती है। जहां एक ओर यह बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में जलभराव, यातायात बाधित होने और भूस्खलन जैसी चुनौतियां प्रशासन के सामने बनी हुई हैं। फिलहाल पूरे देश में मानसून का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। दिल्ली में राहत भरी बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है, जबकि मुंबई और पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही तेज वर्षा प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी है।    

    पुणे किला मौत मामला: मंगेतर की संदिग्ध मौत से शुरू हुआ मामला, मीडिया ट्रायल और हत्या के आरोपों तक पहुंची जांच

      युगचरण न्यूज़ / 2 जुलाई 2026 महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित प्रसिद्ध लोहागढ़ किले पर एक युवक की संदिग्ध मौत ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शुरुआती जांच में इसे एक हादसा माना गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद पुलिस ने मृतक की मंगेतर और उसके एक मित्र को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद यह मामला केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मीडिया और सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में सुनवाई चल रही है। आरोपियों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। क्या है पूरा मामला? 26 वर्षीय केतन अग्रवाल 18 जून को अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ पुणे के लोकप्रिय पर्यटन स्थल लोहागढ़ किले पर घूमने गए थे। इसी दौरान वह एक गहरी खाई में गिर गए, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक तौर पर इसे दुर्घटना माना गया, लेकिन बाद में पुलिस ने जांच के दौरान नए तथ्यों के आधार पर सिया गोयल और उसके मित्र चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। पुलिस का दावा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले जिनसे उन्हें संदेह हुआ कि यह सामान्य हादसा नहीं था। पुलिस का कहना है कि: मृतक एक अनुभवी ट्रेकर था और उसके अचानक फिसलने की संभावना कम थी। परिवार ने भी घटना को लेकर संदेह जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि सिया और चेतन एक-दूसरे के संपर्क में थे। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने कथित रूप से पहले से योजना बनाकर घटना को अंजाम दिया। हालांकि इन दावों की पुष्टि अभी अदालत द्वारा नहीं की गई है। सीसीटीवी फुटेज बना जांच का हिस्सा जांच के दौरान पुलिस को किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में एक व्यक्ति हुडी पहनकर जाता हुआ दिखाई दिया। पुलिस का कहना है कि मौसम गर्म होने के बावजूद हुडी पहनना संदेहास्पद लगा। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। बाद में पुलिस चेतन चौधरी को घटनास्थल पर लेकर गई, जहां कथित रूप से घटनाक्रम का पुनर्निर्माण और उसकी चाल (गेट एनालिसिस) की प्रक्रिया की गई। बचाव पक्ष ने लगाए गंभीर सवाल दोनों आरोपियों के वकीलों ने पुलिस की पूरी कहानी को खारिज कर दिया है। सिया गोयल के वकील का कहना है कि उनकी मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है और जांच में सहयोग कर रही है। उनके अनुसार गिरफ्तारी पर्याप्त कानूनी आधार के बिना की गई है और अब तक कोई ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है। वहीं चेतन चौधरी के वकील का दावा है कि पुलिस के पास यह साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि उनके मुवक्किल घटना के समय लोहागढ़ किले पर मौजूद थे। उन्होंने यह भी कहा कि केवल दोस्ती के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मृतक और आरोपी दोनों की निजी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। विशेष रूप से सिया गोयल को लेकर कई तरह की टिप्पणियां और आरोप लगाए गए। कई लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही उन्हें दोषी घोषित करना शुरू कर दिया, जबकि कानूनी रूप से अभी अपराध सिद्ध नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने और अदालत का फैसला आने से पहले किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करना न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत माना जाता है। मृतक के परिवार की मांग केतन अग्रवाल के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि विवाह को लेकर किसी प्रकार की असहमति थी तो रिश्ता समाप्त किया जा सकता था, लेकिन किसी की जान लेना स्वीकार्य नहीं है। परिजनों ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। आरोपी पक्ष का बयान सिया गोयल के माता-पिता ने भी इस घटना को बेहद दुखद बताया है। उनका कहना है कि केतन उनके परिवार के बेहद करीब थे और वे उन्हें अपने बेटे की तरह मानते थे। परिवार का दावा है कि यदि उनकी बेटी विवाह नहीं करना चाहती, तो वे बिना किसी दबाव के रिश्ता समाप्त कर देते। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से गहरा सदमा लगा है और वे भी चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो तथा जो भी वास्तविक दोषी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। जांच अभी जारी पुलिस लगातार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच कर रही है। मामले की अगली सुनवाई अदालत में निर्धारित तिथि पर होगी। फिलहाल इस प्रकरण में कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। जब तक अदालत अंतिम फैसला नहीं सुनाती, तब तक सभी आरोप केवल जांच का हिस्सा हैं और किसी भी आरोपी को कानून की नजर में दोषी नहीं माना जा सकता। मामले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है और आगे आने वाली जांच रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही सच्चाई स्पष्ट होगी।    

    अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर समाप्त, होरमुज जलडमरूमध्य और जमे हुए फंड पर रही मुख्य चर्चा

      युगचरण न्यूज़ / 2 जुलाई 2026 कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का एक और दौर संपन्न हो गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने दो दिनों तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, हालांकि स्थायी शांति या किसी बड़े समझौते की दिशा में कोई निर्णायक प्रगति सामने नहीं आई। बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से होरमुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की बहाली और ईरान की विदेशों में जमी वित्तीय संपत्तियों को मुक्त कराने जैसे विषय रहे। दोनों देशों के बीच हाल के संघर्ष के बाद यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कतर ने इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और आगे भी संवाद जारी रखने की इच्छा जताई है। तकनीकी मुद्दों पर रही विस्तृत चर्चा सूत्रों के अनुसार, इस दौर की बातचीत मुख्य रूप से उन बिंदुओं पर केंद्रित रही जो जून में हुए अंतरिम समझौते का हिस्सा थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विषय होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों तक उसकी पहुंच शामिल रही। बताया गया कि दोनों पक्षों ने इन तकनीकी विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया, लेकिन परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों पर इस दौर में चर्चा नहीं हुई। परमाणु कार्यक्रम पर बाद में होगी चर्चा अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषयों पर भविष्य की बैठकों में विस्तार से बातचीत होगी। उनका कहना था कि फिलहाल प्राथमिकता उन मुद्दों को लागू करने पर है जिन पर पहले से सहमति बन चुकी है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई। अगली बैठक खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद कतर के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि अगली बैठक ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद आयोजित की जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान दौर की वार्ता में अंतरिम समझौते से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर सकारात्मक प्रगति हुई है और आगे की बातचीत इन्हीं आधारों पर जारी रहेगी। होरमुज जलडमरूमध्य बना सबसे अहम मुद्दा होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। अब दोनों देश इस समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उसने संकेत दिया है कि अगस्त के मध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लागू किया जा सकता है, जबकि अंतरिम समझौते के तहत फिलहाल सीमित अवधि तक राहत दी गई है। तेल बाजार पर दिखा असर वार्ता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के सकारात्मक बयान से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और कई वैश्विक विश्लेषकों ने आने वाले महीनों के लिए अपने मूल्य अनुमान कम कर दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिल सकती है। जहाज फंसने की घटना भी चर्चा में ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, एक विदेशी कंटेनर जहाज निर्धारित नौवहन मार्ग से हटकर उथले पानी में फंस गया। हालांकि इस घटना से समुद्री यातायात पर व्यापक असर नहीं पड़ा, लेकिन इसने क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं जरूर पैदा कर दी हैं। यूरोपीय देशों की भी नजर कई यूरोपीय देशों ने आवश्यकता पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा और बारूदी सुरंगों की सफाई में सहयोग देने की इच्छा जताई है। हालांकि जर्मनी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह किसी सैन्य अभियान में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा क्योंकि इस संबंध में ईरान का सहयोग सीमित है। दोनों पक्षों ने नहीं दिया स्पष्ट संकेत वार्ता समाप्त होने के बाद न तो अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और न ही ईरानी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि विवादित मुद्दों पर कोई अंतिम सहमति बनी है। ईरान के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने केवल इतना कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है और आगे की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संवाद भविष्य में बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी समझौतों की नींव तैयार कर सकता है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं। आने वाले दौर की वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंध जैसे विषय प्रमुख एजेंडा बनने की संभावना है।    

    रूस का कीव पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, 13 लोगों की मौत, दर्जनों घायल

      युगचरण न्यूज़ | 2 जुलाई 2026 कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच गुरुवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इस हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 86 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। हमले के कारण कई आवासीय इमारतों, सार्वजनिक ढांचों और अन्य स्थानों को भारी नुकसान पहुंचा है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रात के समय हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। सुरक्षा अलर्ट जारी होते ही बड़ी संख्या में नागरिक मेट्रो स्टेशनों और भूमिगत शेल्टरों में शरण लेने के लिए पहुंचे। कई इमारतों को भारी नुकसान कीव प्रशासन ने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक बहुमंजिला आवासीय इमारत का बड़ा हिस्सा सीधे हमले के बाद ढह गया, जबकि अन्य स्थानों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। राहत एवं बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शहर के दर्जनों स्थान इस हमले से प्रभावित हुए हैं और नुकसान का आकलन अभी जारी है। बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन दागे गए यूक्रेनी वायुसेना का दावा है कि रूस ने रातभर में दर्जनों मिसाइलों और लगभग पांच सौ ड्रोन से हमला किया। वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश हवाई हमलों को नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन कुछ मिसाइलें और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे कई स्थानों पर विस्फोट हुए। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के संयुक्त हवाई हमले हाल के समय के सबसे बड़े हमलों में से एक हैं। हमले से पहले मिली थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हमले से कुछ घंटे पहले ही संभावित बड़े हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने नागरिकों से हवाई हमले की चेतावनियों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की थी। बताया गया कि विदेश दौरे पर मौजूद राष्ट्रपति ने स्थिति को देखते हुए अपनी यात्रा भी बीच में समाप्त कर स्वदेश लौटने का निर्णय लिया। रूस का दावा रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने यूक्रेन में सैन्य और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए व्यापक कार्रवाई की है। रूस का कहना है कि यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए कुछ हमलों के जवाब में किया गया। हालांकि, यूक्रेन का कहना है कि हमले में बड़ी संख्या में नागरिक क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिससे आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी कीव पर हुए इस बड़े हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। यूरोप में जारी इस लंबे संघर्ष के बीच लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमले मानवीय संकट को और गंभीर बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है तथा आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत किए जाने की आवश्यकता होगी। नागरिकों से सतर्क रहने की अपील यूक्रेन के प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और आपातकालीन अलर्ट पर तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान दोनों देशों में लगातार सैन्य कार्रवाई, हवाई हमले और जवाबी हमले होते रहे हैं। ताजा हमला इस संघर्ष के सबसे गंभीर घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय स्थिति को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।    

    पीएम मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का किया स्वागत, भारत-जापान साझेदारी को नई गति देने पर जोर

    युगचरण न्यूज़ | 2 जुलाई 2026 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का भारत दौरे पर गर्मजोशी से स्वागत किया। यह ताकाइची की प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जिसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वागत संदेश में कहा कि भारत अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री की मेजबानी करके प्रसन्न है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा होगी। यह तीन दिवसीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और जापान रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला, हरित ऊर्जा और निवेश जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लगातार बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी पहले से ही मजबूत है और इस दौरे से इसमें और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। द्विपक्षीय वार्ता पर रहेगी विशेष नजर प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता में कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें आर्थिक सहयोग, व्यापार, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचा विकास, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सहयोग तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता जैसे मुद्दे शामिल हैं। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श करेंगे तथा साझा हितों से जुड़े विषयों पर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं। निवेश और तकनीकी सहयोग पर रहेगा फोकस भारत और जापान लंबे समय से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, मेट्रो रेल, हाई-स्पीड रेल, औद्योगिक गलियारों और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। इस यात्रा के दौरान जापानी निवेश को बढ़ावा देने, नई औद्योगिक परियोजनाओं और अत्याधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के बीच भारत और जापान मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इनोवेशन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण भारत और जापान लंबे समय से स्वतंत्र, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन में एक जैसी सोच रखते हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है। व्यापारिक संबंधों को मिलेगा नया बल भारत और जापान के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों सरकारें निवेश बढ़ाने, उद्योगों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने और नई तकनीकों के विकास में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कई पहल कर रही हैं। इस यात्रा के दौरान व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की बैठकें भी आयोजित होने की संभावना है, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी। कई अहम समझौतों की संभावना सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोग संबंधी घोषणाओं पर सहमति बन सकती है। इनमें तकनीकी सहयोग, हरित ऊर्जा, कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार तथा औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। दोनों देशों के अधिकारी पहले से विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि यात्रा के दौरान ठोस परिणाम सामने आ सकें। भारत-जापान संबंधों का नया अध्याय भारत और जापान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी भी हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों का सहयोग क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा विकास की भावना को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से भारत-जापान संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी और भविष्य में व्यापार, निवेश, रक्षा तथा तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    दिल्ली में मानसून की धमाकेदार एंट्री, मुंबई में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त; कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन का कहर

    युगचरण न्यूज़ / 2 जुलाई 2026 देशभर में मानसून ने अब तेज़ रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दस्तक दे दी, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली। वहीं दूसरी ओर, मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों में बाढ़, जलभराव, भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दिल्ली में मानसून सामान्य तिथि से कुछ दिन बाद पहुंचा, लेकिन इसके साथ ही राजधानी के कई इलाकों में सुबह से ही हल्की से मध्यम बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। अगले तीन से चार दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून अब पूरे दिल्ली क्षेत्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों, मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों और गुजरात के कुछ भागों तक पहुंच चुका है। अगले दो से तीन दिनों में इसके राजस्थान और उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की संभावना है। उधर आर्थिक राजधानी मुंबई में गुरुवार सुबह से लगातार तेज बारिश ने शहर की रफ्तार धीमी कर दी। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। अंधेरी, दादर, चेंबूर, कुर्ला, किंग्स सर्किल, गांधी मार्केट और अन्य क्षेत्रों में भारी जलभराव की स्थिति देखने को मिली। कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर भी पानी भर गया, जिसके कारण लोकल ट्रेन सेवाएं देरी से संचालित हुईं। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर और उपनगरों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई है, जिनकी गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने लोगों को कमजोर भवनों, बिजली के खंभों और बड़े पेड़ों से दूर रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश को देखते हुए राहत एवं बचाव दलों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश के चलते नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने बताया कि जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंच रहा है। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो स्थानीय लोगों को समय रहते अलर्ट जारी किया जाएगा तथा संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। हिमाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। कई सड़कें बंद हो गई हैं और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने अगले कई दिनों तक भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा क्षेत्र में भी लगातार बारिश जारी है। प्रशासन ने लोगों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि लगातार वर्षा के कारण सड़क अवरुद्ध होने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में लोगों की जान जाने की खबरें भी सामने आई हैं। कहीं भूस्खलन हुआ तो कहीं बिजली गिरने की घटनाएं हुईं। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। महाराष्ट्र में लगातार बारिश के बीच हाल ही में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने की घटना के बाद ठाणे नगर निगम ने शहरभर में खतरनाक पेड़ों का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को स्कूलों, अस्पतालों, आवासीय परिसरों और प्रमुख सड़कों के किनारे लगे पुराने तथा कमजोर पेड़ों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई महीने में देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और कुछ पूर्वी क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने की संभावना है। हालांकि स्थानीय स्तर पर भारी वर्षा और अचानक मौसम परिवर्तन की घटनाएं जारी रह सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही भारी बारिश के दौरान लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, बिजली के खुले तारों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखें तथा प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी सभी चेतावनियों का पालन करें।   देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। जहां एक ओर यह किसानों के लिए राहत और खेती के लिहाज से सकारात्मक संकेत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में भारी बारिश जनजीवन के लिए चुनौती भी बनती जा रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियां और नागरिकों की सतर्कता ही संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    राम मंदिर दान घोटाला: शौचालय में छिपाई जाती थी नकदी, फिर छोटे-छोटे हिस्सों में बाहर निकाली जाती थी; जांच में नए खुलासे

      युगचरण न्यूज़ / 02 जुलाई 2026 अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले की जांच कर रही पुलिस और विशेष जांच टीम (एसआईटी) को पूछताछ के दौरान ऐसे कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि कथित तौर पर दान की राशि को बेहद सुनियोजित तरीके से परिसर से बाहर निकाला जाता था। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कथित अनियमितता का दायरा कितना बड़ा था तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन दावों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक विश्लेषण, दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की जा रही है। अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे। दान गिनती केंद्र की गतिविधियों पर विशेष नजर जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर दान गिनने वाले केंद्र की कार्यप्रणाली का पहले से गहराई से अध्ययन किया गया था। आरोप है कि संबंधित लोगों ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की आवाजाही, प्रवेश और निकास मार्ग तथा सुरक्षा व्यवस्था को समझने के बाद कथित योजना तैयार की। प्रारंभिक जांच के अनुसार, दान गिनती के दौरान निकाली गई नकदी को तुरंत बाहर ले जाने के बजाय पहले परिसर के भीतर सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से रखा जाता था। इसके बाद उसे अलग-अलग समय पर छोटी-छोटी मात्रा में बाहर ले जाया जाता था ताकि किसी को संदेह न हो। पुलिस अब इस पूरे कथित तंत्र को समझने के लिए मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों की गतिविधियों का पुनर्निर्माण कर रही है। साथ ही उन कर्मचारियों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है जो नियमित रूप से इन स्थानों पर कार्य करते थे। सीसीटीवी व्यवस्था की भी हो रही जांच जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं सुरक्षा कैमरों की निगरानी से बचने के लिए किसी प्रकार की रणनीति तो नहीं अपनाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध फुटेज का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित तौर पर किसी समय कैमरों की दृश्य सीमा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था या नहीं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ डिजिटल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण कर रहे हैं। यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि होती है तो उसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की पड़ताल मामले में दान गिनती कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कक्ष तक पहुंच किस प्रकार नियंत्रित की जाती थी और वहां मौजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा था या नहीं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन सभी लोगों से पूछताछ कर रही हैं जिनकी जिम्मेदारी दान गिनती प्रक्रिया या उससे संबंधित व्यवस्थाओं से जुड़ी थी। यदि सुरक्षा प्रणाली में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की गहन जांच पुलिस अब मामले के वित्तीय पहलू पर भी विशेष ध्यान दे रही है। आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, अचल एवं चल संपत्तियों और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं कथित रूप से प्राप्त धनराशि का उपयोग जमीन, मकान, हॉस्टल या अन्य संपत्तियों में निवेश के लिए तो नहीं किया गया। विशेषज्ञ आय के ज्ञात स्रोतों और वर्तमान संपत्तियों का मिलान कर रहे हैं। यदि किसी प्रकार की असामान्य वित्तीय गतिविधि सामने आती है तो उसे जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। कई स्थानों पर तलाशी अभियान जांच के क्रम में पुलिस ने कई आरोपियों के घरों और अन्य संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान नकदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा तथा अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी वैधानिक जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री की वास्तविक प्रकृति और उसका इस मामले से संबंध वैज्ञानिक एवं कानूनी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आठ आरोपी अब तक गिरफ्तार इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी आरोपियों से अलग-अलग चरणों में पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जा रहा है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा। एसआईटी को मिला अतिरिक्त समय मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अब एसआईटी को विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित नई समयसीमा के भीतर सरकार को सौंपनी होगी। जांच दल पिछले कई दिनों से दस्तावेजों की जांच, वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर रहा है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी। क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला? अयोध्या का श्रीराम मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दान प्रबंधन व्यवस्था से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का मामला केवल वित्तीय जांच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच भविष्य में धार्मिक संस्थानों की वित्तीय व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक हो सकती है। आगे क्या? फिलहाल पुलिस, एसआईटी और अन्य संबंधित एजेंसियां फॉरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और पूछताछ से प्राप्त जानकारियों को एक साथ जोड़कर पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।    

    मनरेगा खत्म करने के फैसले के खिलाफ राजस्थान में मजदूरों का संघर्ष शुरू

    मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण भारत पर हमला है - निखिल डे काम मांगो अभियान" की राज्यव्यापी शुरुआत, गांव-गांव से उठी रोजगार अधिकार बचाने की आवाज VB-GRAMG कानून वापस लो, मनरेगा को मजबूत करो, मजदूरों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन जयपुर, मनरेगा को समाप्त कर उसके स्थान पर VB-GRAMG लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ राजस्थान के ग्रामीण मजदूरों ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, राजस्थान के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश में "काम मांगो अभियान"** की शुरुआत की गई। राज्य के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों में हजारों मजदूरों, महिलाओं, ग्रामीण परिवारों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे और साफ संदेश दिया कि "रोजगार का अधिकार छीना नहीं जा सकता, मनरेगा को खत्म नहीं होने देंगे।" प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों में मजदूरों ने मांग की कि VB-GRAMG कानून को तत्काल वापस लिया जाए और मनरेगा को पहले से अधिक मजबूत बनाया जाए। आज भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डूंगरपुर सहित अनेक जिलों में मजदूरों ने प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए। देवगढ़ की ग्राम पंचायत लसानी, भीम की बरजाल और कूकरखेड़ा, डूंगरपुर जिले की बीछीवाड़ा, दोगड़ा, पीपल्दा, घुघरा, ओड़ाबड़ा, करोली, बलवाड़ा, मंडवा, मालमाता, मेवाड़ा, पादरड़ी, श्रम, डेडली, समिसा, जलाना दमोथ, ब्यावर जिले के बदनोर ब्लॉक की बदनोर, छतरपुरा, गिरधरपुरा, मोगर, भादसी, रतनपुरा, जवाजा क्षेत्र की बामनहेड़ा, आसान, रावतामाल, कोटड़ा, सातूखेड़ा, सुवा, कालिंजर, सूरजपुरा, काबरा, भीलवाड़ा जिले की करेड़ा पंचायत समिति की थाना, शिवपुर, नारेली, ज्ञानगढ़, धम्मोत्तर ब्लॉक की डीकनिया, बराबर्दा, मदुरातलाई, जैतारण ब्लॉक सहित अनेक पंचायतों में मजदूरों ने ज्ञापन देकर रोजगार के अपने अधिकार की रक्षा की मांग उठाई। काम मांगो अभियान" मजदूरों ने कहा, काम हमारा अधिकार है। आज से शुरू हुए "काम मांगो अभियान" के तहत ग्रामीण मजदूरों ने ग्राम पंचायतों और प्रशासन के सामने रोजगार की मांग के आवेदन प्रस्तुत किए। अभियान से जुड़े कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचे और मजदूरों को बताया कि काम मांगना उनका कानूनी अधिकार है और रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है। अभियान का उद्देश्य केवल आवेदन देना नहीं, बल्कि गांव-गांव में मजदूरों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी तैयार करना है। मजदूरों ने कहा कि हमने संघर्ष करके मनरेगा का अधिकार हासिल किया है। इसे किसी नए नाम या नई व्यवस्था के जरिए कमजोर नहीं होने देंगे।" मनरेगा कानून के लिए हुए ऐतिहासिक आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले और सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक निखिल डे ने कहा मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के संघर्षों से हासिल किया गया अधिकार है। इस कानून ने सूखे, आर्थिक संकट, कोरोना महामारी और बेरोजगारी के कठिन दौर में ग्रामीण परिवारों को सहारा दिया।" उन्होंने कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता दी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने का अवसर दिया।" उन्होंने आगे कहा कि VB-GRAMG के माध्यम से रोजगार गारंटी की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। पहले मजदूर पूरे साल काम मांग सकते थे, लेकिन नई व्यवस्था रोजगार के अधिकार को सीमित करने वाली है। 125 दिन रोजगार देने का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाएगा, क्योंकि मजबूत कानूनी गारंटी कमजोर हो जाएगी। राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की संयुक्त सचिव मधुलिका ने कहा मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए केवल मजदूरी का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का आधार है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप और वित्तीय व्यवस्था में किए जा रहे बदलाव मजदूरों के रोजगार अधिकार को कमजोर करने वाले हैं।" उन्होंने कहा राजस्थान जैसे राज्य में लाखों ग्रामीण परिवार आज भी मनरेगा पर निर्भर हैं। सरकार को अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय मनरेगा को मजबूत करना चाहिए। मजदूरों को समय पर काम, पूरी मजदूरी और काम मांगने के अधिकार की गारंटी मिलनी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को अपने गांव में रोजगार और आर्थिक मजबूती दी है। इस कानून को कमजोर करने का सबसे अधिक असर गरीब परिवारों, महिलाओं, दलितों और आदिवासी समुदायों पर पड़ेगा। मजदूर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे।" गांवों से उठी आवाज रोजगार का अधिकार वापस नहीं होगा अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों को मजबूरी के पलायन और शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसानों के संघर्ष के सामने सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी प्रकार मजदूर भी अपने रोजगार अधिकार की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगे। मजदूरों की प्रमुख मांगें 1. VB-GRAMG कानून को तत्काल वापस लिया जाए। 2. मनरेगा को पूर्ण कानूनी गारंटी के साथ बहाल रखा जाए। 3. हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 200 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाए। 4. काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। 5. सभी लंबित मजदूरी भुगतान तुरंत जारी किए जाएं। 6. पंचायतों को योजना बनाने और काम चुनने के अधिकार वापस दिए जाएं। 7. मनरेगा मजदूरी दर में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। 8. महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के रोजगार अधिकार सुरक्षित किए जाएं। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, राजस्थान ने घोषणा की है कि "काम मांगो अभियान" अब गांव-गांव तक चलाया जाएगा। मजदूर अपने रोजगार के अधिकार, सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेंगे।

    राजधानी में छात्रों की गूंज : पेपर लीक पर फूटा युवाओं का गुस्सा, अभिषेक चौधरी ने CM आवास घेराव के लिए निकला मार्च

    जयपुर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया, NSUI पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र गुर्जर की थड़ी से मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए रवाना हुए, प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई गई प्रदर्शनकारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं— लीक-मुक्त परीक्षा प्रणाली लागू की जाए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और सभी भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए   प्रदर्शन के दौरान एक ठेले पर प्रधानमंत्री **** का मुखौटा लगाए व्यक्ति और केंद्रीय शिक्षा मंत्री **** का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान "मोदी वीक, तभी तो पेपर लीक" जैसे नारे लगाए गए और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई। मार्च के दौरान पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ा, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक पेपर लीक पर प्रभावी रोक नहीं लगती और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा