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    वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ

    अग्रवाल पीजी कॉलेज,जयपुर में 25 अगस्त 2026 को "एक पेड़ मां के नाम" कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी.एल. देवन्दा रहे। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा छायादार वृक्ष लगाए गए l कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों के कार्यक्रम अधिकारी , महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी नरेश कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।  

    बहुविषयक अनुसंधान एवं नवाचार से होगा भारत का रूपांतरण

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं इंस्पिरा रिसर्च एसोसिएशन (आईआरए), जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘ट्रान्सफाॅर्मिंग इंडिया थ्रू मल्टीडिसप्लनेरी रिसर्च इनोवेशनस् (ICTIMRI Hybrid-2026) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आज दिनांक 24 अगस्त 2026 कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय प्राचार्य एवं आयोजन संयोजक डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि सम्मेलन विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान, ज्ञान-विस्तार तथा शैक्षणिक सहयोग के नए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने शोध, ज्ञान और नवाचार के संबंध को रेखांकित किया। इंस्पिरा के महासचिव एवं सह-संयोजक डॉ. रविकांत मोदी ने भी सभी का स्वागत किया और कहा कि ऐसे सम्मेलन अकादमिक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं साथ ही उन्होंने दो दिवसीय आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. एन. के. पांडेय ने शिक्षा, संचार, ज्ञान और सामाजिक परिवर्तन के बीच संबंध पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप उच्च शिक्षा एवं अंतर्विषयक संवाद की महत्ता को रेखांकित कर भारत की समृद्ध शैक्षणिक एवं बौद्धिक विरासत का उल्लेख करते हुए नालंदा जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों से लेकर आधुनिक संस्थानों तक भारतीय शिक्षा की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि भारत की युवा पीढ़ी यदि विकास को ध्यान में रखकर काम करती रहेगी तो 2047 के लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है। सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि, सीए अनिल अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, NAV India ने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत सार्थक प्रश्न पूछने से होती है। उन्होंने भारत की चुनौतियों के बारे मेें गंभीरता से सोचने और इनोवेटिव समाधान खोजने के लिये प्रोत्साहित किया। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने समग्र एवं संतुलित विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, स्वास्थ्य तथा तकनीकी बदलाव जैसी जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण को आवश्यक बताया और कौशल-आधारित एवं अनुभव पर आधारित शिक्षा तथा वैज्ञानिक ज्ञान को भारतीय ज्ञान से जोड़ने की बात की। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल एवं एमडीएस विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. एम. एल. छीपा ने भारतीय मूल्यों, बहुविषयक शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय के “आत्म दीपो भव” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता, व्यक्तिगत विकास एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि कुशल, उद्यमशील, नैतिक एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शोध एवं नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता यूएसए से डॉ. फिरदौस अहमद मलिक, ने कहा कि भारत का वास्तविक परिवर्तन किसी एक अनुशासन से नहीं बल्कि सभी विषयों के अंतर्संबंध से होगा। उद्घाटन सत्र में डॉ. वरिंदर सिंह राणा, सिटी यूनिवर्सिटी अजमान, प्रो. नादा राटकोविच, फैकल्टी ऑफ इकोनॉमिक्स, बिजनेस एंड टूरिज्म, स्प्लिट, क्रोएशिया तथा डॉ. वैशाली रघुवंशी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आॅनलाइन जुड़े। आज डिजिटल ट्रान्सफाॅर्मिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमर्जिंग टेक्नोलाॅजी एवं बिजनेस मैनेजमेंट, इकोनामिक्स और सस्टैनबल डबलमेंट विषयों पर दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। जिनमें देश विदेश के विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रकट किये और लगभग 60 शोधार्थी एवं विशेषज्ञों ने आॅनलाइन एवं आॅफलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किये। कल 25 अगस्त को समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. सुरेश अग्रवाल, कुलगुरु, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर होंगे। विशेष अतिथियों में प्रो. एच.एस. शर्मा, पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर तथा डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, निदेशक, कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर रहेंगे। कल विभिन्न तकनीकी सत्रों के उत्कृष्ट शोध-पत्रों के लिए बेस्ट पेपर अवॉर्ड भी दिए जाएंगे।    

    संत शिरोमणि रविदास जी के 650 वीं जयंती के अवसर पर 107 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान,

    संत शिरोमणि रविदास जी के 650वी जयंती के अवसर पर जयपुर महानगर में सामाजिक समरसता गतिविधि के अंतर्गत श्री हनुमान भक्त मंडल जयपुर के तत्वाधान में 107 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम एवं श्री हनुमान चालीसा के साथ किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के सह कार्यवाह गेंदालाल ने संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों अभिभावकों एवं शिक्षकों का आह्वान किया कि हम सभी को मिलकर एक समृद्ध समाज की स्थापना करनी है और अपने राष्ट्र को विश्व पटल पर शिखर के रूप में स्थापित करना है। हम सबको जाति भेद,वर्ग भेद आदि से ऊपर उठकर काम करना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राम प्रकाश उदेनिया ने कहा कि प्रतिभाओं के साथ पूरा समाज खड़ा है। कार्यक्रम कार्यक्रम की अध्यक्षता गजानंद भूखमारिया ने की एवं विशिष्ट अतिथि भंवर लाल शर्मा उपस्थित रहे। झोटवाड़ा जयपुर शहर के सीबीईओ सुरेश शर्मा ने इस अवसर पर सामाजिक समरसता को लेकर काव्य पाठ किया। आशुतोष भट्ट ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। जयपुर महानगर के समरसता संयोजक महेश भारद्वाज ने बताया कि संत रविदास जी की 650वी जयंती के अवसर पर वर्ष पर्यंत जयपुर महानगर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के संयोजक पवन उपाध्याय ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जयपुर महानगर के सहसंयोजक रतन कानूनगो ,भाग संयोजक रामनिवास सेन, कैलाश चंद्र कुमावत , रामकृष्ण शर्मा,सत्यनारायण शर्मा ,ओम प्रकाश प्रजापति ,विनोद पांडे आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र शर्मा ने किया। इस अवसर पर राजस्थान क्षेत्र के समरसता संयोजक तुलसी नारायण का सानिध्य मिला। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।  

    डॉ. मुकेश कुमार वर्मा को ‘मौर्य अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड-2026’ के लिए चयन

    जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मुकेश कुमार वर्मा का शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘मौर्य अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड-2026’ के लिए चयन किया गया है। यह सम्मान मौर्य एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से प्रदान किया जाएगा। फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. शैलेन्द्र मौर्य ने डॉ. वर्मा को उनके चयन की जानकारी देते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सम्मान समारोह का आयोजन 3 सितंबर 2026 को एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय, रामबाग सर्किल, जयपुर में किया जाएगा। समारोह में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों द्वारा डॉ. वर्मा को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। डॉ. वर्मा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं तथा शिक्षा, राजनीतिक विज्ञान, सामाजिक न्याय और समकालीन राजनीतिक विषयों पर निरंतर शोध एवं लेखन कार्य कर रहे हैं। उनके सम्मान के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है।  

    चौमू के नीरज खंडेलवाल ने किया भारत के स्पेस सेक्टर के लिए “Everest” — भारत का पहला FFSC रॉकेट इंजन विकसित

    राजस्थान प्रदेश के जयपुर जिले के चौमू शहर के निवासी नीरज खंडेलवाल पुत्र अशोक खंडेलवाल ( अशोका बर्तन वाले ) ने भारत के स्पेस सेक्टर के लिए “Everest” — भारत का पहला FFSC रॉकेट इंजन विकसित करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय प्रधानमंत्री जी के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने Everest और Astrobase के काम के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। एक छोटे से शहर से निकलकर देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में कुछ नया और बड़ा करने का प्रयास यह सिर्फ परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे चौमू शहर के लिए भी गर्व का विषय है। अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता ( तुंगा वाले), अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजीव कट्टा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा कुलसचिव, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, गैंगटोक, सिक्किम, प्रोफेसर रमेश कुमार रावत, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय युवा सयोजक शरद फरसोईया सहित अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़, झारखंड, आसाम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, सहित अनेक प्रदेश एवं कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, रतलाम, मुंबई, राजनंद गाव, सहित देश के अनेक प्रमुख शहरों से अनेक पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, आजीवन सदस्यों ने नीरज खंडेलवाल की इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है!  

    डिजिटल मार्केटिंग पर कार्यशाला का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के कैरियर गाईडेन्स, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेंटर द्वारा आईटीएम मुंबई के सहयोग से 22 अगस्त 2026 को “डिजिटल मार्केटिंग- मास्टरिंग कैरोसेल ऐड्स फॉर मैक्सिमम रीच” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की प्रमुख वक्ता डॉ. जागृति गिजारे, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मार्केटिंग, आईटीएम मुंबई, ने विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग के बदलते स्वरूप तथा सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सत्र के दौरान व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं को यह समझाया गया कि प्रभावी एवं आकर्षक कैरोसेल विज्ञापन किस प्रकार ब्रांड कम्युनिकेशन को मजबूत करने, ऑडियंस इंगेजमेंट बढ़ाने तथा डिजिटल मार्केटिंग कैंपेन्स की प्रभावशीलता को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस प्रकार के इंडस्ट्री-ओरिएंटेड एवं स्किल-बेस्ड सेशन्स के आयोजन की सराहना की। कार्यशाला छात्राओं के लिए एक उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक अनुभव रही। लगभग 50 छात्राओं ने इस कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया।  

    एमजीडी गर्ल्स स्कूल में चार दिवसीय इंटर-हाउस खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न

    शिक्षक-छात्र मैत्री मैचों के साथ हुआ रोमांचक समापन महारानी गायत्री देवी (एमजीडी) गर्ल्स स्कूल में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक 'इंटर-हाउस गेम्स एवं स्पोर्ट्स टूर्नामेंट 2026–27' शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता की शुरुआत 19 अगस्त को निदेशिका श्रीमती अर्चना एस. मनकोटिया की प्रेरणादायी उपस्थिति और पारंपरिक खेल शपथ के साथ हुई थी, जिसके बाद चारों सदनों—फ्लोरेंस नाइटिंगेल, मैडम क्यूरी, हेलेन केलर और सरोजिनी नायडू हाउस—के बीच विभिन्न खेल विधाओं में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती दौर के मुकाबलों के बाद प्रतियोगिता में मैडम क्यूरी हाउस ने अपना दबदबा साबित करते हुए टेनिस और सीनियर बैडमिंटन के खिताबी मुकाबलों में पहला स्थान हासिल किया, जबकि टेबल टेनिस के फाइनल में हेलेन केलर हाउस विजयी रहा। इसके साथ ही खो-खो, बास्केटबॉल, थ्रोबॉल, 6-ए-साइड हॉकी और क्रिकेट जैसे प्रमुख टीम इवेंट्स में भी सभी सदनों के खिलाड़ियों ने शानदार तालमेल और कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के चौथे और अंतिम दिन मैदान पर एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिनमें अंडर-19 हैमर थ्रो, अंडर-17 व 19 जैवलिन थ्रो और अंडर-14 शटल रिले मुख्य आकर्षण रहीं। अंतिम दिन का सबसे रोचक हिस्सा विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं के बीच आयोजित दोस्ताना मुकाबले रहे, जिसमें शिक्षक वर्ग ने अपनी रणनीतिक पकड़ के दम पर बास्केटबॉल और थ्रोबॉल दोनों मैचों में जीत दर्ज की। खेल भावना, अनुशासन और आपसी तालमेल के साथ इस चार दिवसीय खेल उत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ।  

    शिक्षा के मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजकीय विद्यालय में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर महासंघ सख्त

    कहा- विद्यालयों में बाहरी दखल और शिक्षकों के राजनीतिक इस्तेमाल का पुरजोर विरोध जयपुर। राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखने के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने अपना रुख और अधिक स्पष्ट करते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। महासंघ के प्रदेश संघठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने कल की घटना के संदर्भ में कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण के प्रयास का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कधित रूप से गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति उत्पन्न होने की जानकारी सामने आई है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि हिंसा या मारपीट का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता. लेकिन यह सवाल भी गंभीर है कि राजनीतिक विवादों को राजकीय विद्यालयों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी राजकीय विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं अथवा शैक्षणिक स्थिति को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम खुले हैं। विद्यालय परिसर में बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना किसी भी रूप में उचित नहीं है। "विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं" अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कहा कि राजस्थान सरकार ने पिछले कुछ समय में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चरणबद्ध तरीके से अनेक प्रयास किए हैं। ये सुधार एक सतत प्रक्रिया हैं और आने वाले समय में भी जारी रहेंगे। विद्यालयों में संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग लगातार काम कर रहे हैं। राजनीति करना किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। महासंघ ने कहा कि शिक्षकों को राजनीतिक दबाव या राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का प्रयास शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं। सरकार के दिशा-निर्देशों का महासंघ ने किया समर्थन संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों को सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का अर्थ किसी व्यक्ति को विद्यालय में जाने से रोकना नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सरकारी आदेशों को ही राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। "राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ न हो" प्रदेश संघठन मंत्री देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल अथवा संगठन को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग करना चाहिए। राजकीय विद्यालयों में जाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना न विद्यार्थियों के हित में है, न शिक्षकों के हित में और न ही राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के हित में। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विद्यालय की वास्तविक समस्याएं सामने आती हैं तो संगठन उनका समाधान कराने के लिए प्रशासन के समक्ष तथ्यात्मक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के पक्ष में है। लेकिन विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, निरीक्षण अथवा शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि विद्यालयों से जुड़े किसी भी विषय को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न न करें। किसी भी विवाद का समाधान कानून और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए। महासंघ ने कहा कि वह हिंसा का विरोध करता है, लेकिन विद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी उतनी ही दृढ़ता से विरोध करता है। यदि भविष्य में किसी राजकीय विद्यालय में नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक गतिविधि अथवा बाहरी हस्तक्षेप का प्रयास किया जाता है तो महासंघ संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाएगा और आवश्यकतानुसार वैधानिक एवं लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का स्पष्ट संदेश है- "विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, राजनीतिक संघर्ष के नहीं। शिक्षा के मंदिरों की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा और शिक्षकों को राजनीति का टूल बनाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।" एबीआरएसएम विद्यालय शिक्षा भारत के सभी विद्यालयों को तीर्थ रूप में विकसित करने के लिए लगातार जनता, एसडीएमसी के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए विद्यालय में भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने शैक्षणिक सुधार करने के लिए लगातार प्रयत्नशील है। वर्तमान में राजस्थान में 10000 स्कूलों में ABRSM से जुड़े शिक्षक कार्यकर्ता बंधु इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, उन विद्यालयों में शिक्षा में गुणात्मक सुधार के साथ साथ इस दिशा में बहुत ही अनुकरणीय काम हुआ है।  

    प्रतिभा से लक्ष्य तक: बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन, सम्मान और सफलता की नई उड़ान

    सफलता के लिए दृढ़ निश्चय, समय का सदुपयोग और मजबूत नेटवर्किंग जरूरी : सीए अभिषेक बियानी जयपुर: बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस, जयपुर द्वारा विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘लक्ष्य’ लाइफ चेंजिंग मोटिवेशनल सेमिनार, नि:शुल्क पर्सनल करियर काउंसलिंग, प्रतिभा सम्मान एवं शिक्षक सम्मान समारोह–2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और आवश्यक कौशल प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित करना रहा। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प स्वागत के साथ हुई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह, पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में तीन स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें संस्कार स्कूल , कृष्णम पब्लिक स्कूल और मयूर स्कूल के लगभग 230 विद्यार्थी शामिल रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ आए शिक्षकों का भी सम्मान किया गया तथा उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनकी सहभागिता एवं उपलब्धि के लिए मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी ने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए आवश्यक पांच आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दृढ़ निश्चय के साथ कार्य करने, काम को कल पर न टालने, सभी के प्रति सम्मानजनक व्यवहार रखने और मजबूत नेटवर्किंग विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें विद्यार्थी जीवन को बेहतर बनाने के साथ भविष्य की सफलता की मजबूत नींव तैयार करती हैं। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी ने विद्यार्थियों को लगातार नई स्किल्स सीखने और उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य और उद्देश्य स्वयं निर्धारित करना चाहिए तथा उसे हासिल करने के लिए आवश्यक कौशल एवं क्षमताओं का विकास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में करियर काउंसलिंग के लिए बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस आने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य के अनुसार उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत करियर काउंसलिंग का लाभ उठा सकते हैं। समारोह के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को पहचानने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य की दिशा में सकारात्मक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, शिक्षकों के सम्मान के माध्यम से विद्यार्थियों के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को भी सराहा गया। समारोह का सफल संचालन बी.एड कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ.शिप्रा गुप्ता द्वारा किया गया।  

    शोधार्थी कपिल देव वर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की

    राजस्थान विश्वविद्यालय ने लोक प्रशासन विभाग के शोधार्थी कपिल देव वर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। कपिल ने 'राजस्थान में लोक शिकायत निवारण तंत्र: जयपुर नगर निगम का एक अनुभव मूलक अध्ययन' विषय पर शोध कार्य पूर्ण किया। शोधकार्य डॉ. मीना रानी के निर्देशन में किया गया।  

    19वीं विशाल देवनारायण पदयात्रा: देवनारायण भगवान के सुरों से गुंजेगा जयपुर से मालासेरी तक का मार्ग

    अगाध भक्ति और लोक-संस्कृति की अनूठी मिसाल:  ​बेगस/जयपुर. राजस्थान की पावन धरा भक्ति, श्रद्धा और अटूट लोक-संस्कृति की साक्षी रही है। जब-जब भगवान श्री देवनारायण जी की महिमा का बखान होता है, तब-तब श्रद्धालुओं के मन में एक अद्भुत ऊर्जा और अगाध आस्था का संचार हो जाता है। इसी भक्तिमय परंपरा को जीवंत रखते हुए "श्री देवनारायण पदयात्रा मित्र मण्डल समिति, भोपा की ढाणी, बेगस, रामसिंहपुरा (जयपुर)" के तत्त्वावधान में 19वीं विशाल पदयात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पदयात्रा शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 से शुरू होकर गुरुवार, 17 सितम्बर 2026 तक चलेगी। यात्रा भगवान श्री देवनारायण जी का मंदिर देव धाम, भोपा की ढाणी, बेगस से गाजे बाजे के साथ रवाना होगी. 7 दिवसीय यात्रा मार्ग एवं रात्रि विश्राम की संपूर्ण रूपरेखा ​ श्री देवनारायण भगवान महा कथा के गायक भोपाजी बिरदी चंद कुमावत देवतवाल ने बताया कि यात्रा का प्रस्थान 11 सितम्बर 2026 को सुबह 7:15 बजे मंदिर श्री देवनारायण जी, भोपा की ढाणी, बेगस-रामसिंहपुरा से होगा। इस यात्रा में बड़ी संख्या में देव भक्त शामिल होंगे और 7 दिन पैदल चल के भोपा की ढाणी से मालासेरी डूंगरी आसींद भीलवाड़ा में पहुंचेंगे. पूरे 7 दिनों की यात्रा के पड़ाव इस प्रकार रहेंगे: ​11 सितम्बर (शुक्रवार): दोपहर विश्राम नासनोदा तथा रात्रि विश्राम डी.लाइट फ्यूल (गिंदानी इण्डियन ऑयल, प्रमोद कुमार)। ​12 सितम्बर (शनिवार): दोपहर विश्राम नौरिया का बालाजी एवं रात्रि विश्राम श्री देव मार्केट-किशनगढ़ बाईपास। ​13 सितम्बर (रविवार): दोपहर विश्राम बालाजी मंदिर और रात्रि विश्राम श्री चन्दनाथ आदर्श विद्या मंदिर-नसीराबाद। ​14 सितम्बर (सोमवार): दोपहर विश्राम फौजी का ढाबा (बांदनवाड़ा) व रात्रि विश्राम बाफना जैन तीर्थ (27 मील, विजय नगर)। ​15 सितम्बर (मंगलवार): दोपहर विश्राम रूपहाली चौराहा तथा रात्रि विश्राम देवनारायण मंदिर, उखलिया। ​16 सितम्बर (बुधवार): दोपहर विश्राम तांबेशर बावड़ी बालाजी और रात्रि विश्राम मालासेरी डूंगरी, श्री देवनारायण भगवान की जन्मस्थली मंदिर ​17 सितम्बर (गुरुवार): देव दर्शन मालासेरी डूंगरी-सवाईभोज, गोटा दड़ावट, देवमाली धाम एवं यात्रा का सफल समापन। ​

    साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक में विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने साइबर सिक्योर्ड इंडिया के साथ किया एमओयू जयपुर। साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करने और उन्हें पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने साइबर सिक्योर्ड इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। इस साझेदारी में ओपीएसवाट अकादमी वैश्विक भागीदार के रूप में जुड़ा है। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी जानकारी तक सीमित न रखते हुए उन्हें वास्तविक मामलों और उद्योग में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की समझ देना है। आज मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल तकनीक हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ साइबर अपराध, डाटा चोरी, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में यह पहल की है। फॉरेंसिक साइंस विभाग की विभागाध्यक्ष वैष्णवी ठाकरे ने कहा, “आज साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और इसमें प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने इस वर्ष से एमएससी डिजिटल फॉरेंसिक्स एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों को पहले से ही डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक की शिक्षा दी जा रही थी, लेकिन अब इस विशेष मास्टर डिग्री कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में और गहराई से सीखने का अवसर मिलेगा।” उन्होंने कहा, साइबर सिक्योर्ड इंडिया और ओपीएसवाट अकादमी के साथ यह राष्ट्रीय और वैश्विक साझेदारी इस नए कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगी। विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, इंटर्नशिप और प्रमाण-पत्र हासिल करने के अवसर मिलेंगे। हमारा उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि उनके पास इस क्षेत्र में काम करने के लिए जरूरी ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक समझ भी हो।” एमओयू के तहत साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक से जुड़े विषयों पर संयुक्त शोध को भी बढ़ावा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय और उद्योग के विशेषज्ञ मिलकर साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियों, डिजिटल साक्ष्यों और नई तकनीकों से जुड़े विषयों पर काम करेंगे। विद्यार्थियों को भी शोध और नई सोच से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उद्योग में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा। इंटर्नशिप के जरिए वे वास्तविक कार्य परिस्थितियों को करीब से समझ सकेंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाण-पत्र उनके कौशल को मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेंगे। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी की यह पहल शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने, विशेषज्ञों से सीखने और बदलती तकनीक के साथ खुद को तैयार करने का अवसर मिलेगा। इस साझेदारी के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है, जो साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में बेहतर करियर बना सकें और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।