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    डॉ. मुकेश कुमार वर्मा को ‘मौर्य अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड-2026’ के लिए चयन

    जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मुकेश कुमार वर्मा का शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘मौर्य अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड-2026’ के लिए चयन किया गया है। यह सम्मान मौर्य एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से प्रदान किया जाएगा। फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. शैलेन्द्र मौर्य ने डॉ. वर्मा को उनके चयन की जानकारी देते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सम्मान समारोह का आयोजन 3 सितंबर 2026 को एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय, रामबाग सर्किल, जयपुर में किया जाएगा। समारोह में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों द्वारा डॉ. वर्मा को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। डॉ. वर्मा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं तथा शिक्षा, राजनीतिक विज्ञान, सामाजिक न्याय और समकालीन राजनीतिक विषयों पर निरंतर शोध एवं लेखन कार्य कर रहे हैं। उनके सम्मान के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है।  

    चौमू के नीरज खंडेलवाल ने किया भारत के स्पेस सेक्टर के लिए “Everest” — भारत का पहला FFSC रॉकेट इंजन विकसित

    राजस्थान प्रदेश के जयपुर जिले के चौमू शहर के निवासी नीरज खंडेलवाल पुत्र अशोक खंडेलवाल ( अशोका बर्तन वाले ) ने भारत के स्पेस सेक्टर के लिए “Everest” — भारत का पहला FFSC रॉकेट इंजन विकसित करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय प्रधानमंत्री जी के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने Everest और Astrobase के काम के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। एक छोटे से शहर से निकलकर देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में कुछ नया और बड़ा करने का प्रयास यह सिर्फ परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे चौमू शहर के लिए भी गर्व का विषय है। अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता ( तुंगा वाले), अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजीव कट्टा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा कुलसचिव, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, गैंगटोक, सिक्किम, प्रोफेसर रमेश कुमार रावत, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय युवा सयोजक शरद फरसोईया सहित अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़, झारखंड, आसाम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, सहित अनेक प्रदेश एवं कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, रतलाम, मुंबई, राजनंद गाव, सहित देश के अनेक प्रमुख शहरों से अनेक पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, आजीवन सदस्यों ने नीरज खंडेलवाल की इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है!  

    डिजिटल मार्केटिंग पर कार्यशाला का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के कैरियर गाईडेन्स, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेंटर द्वारा आईटीएम मुंबई के सहयोग से 22 अगस्त 2026 को “डिजिटल मार्केटिंग- मास्टरिंग कैरोसेल ऐड्स फॉर मैक्सिमम रीच” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की प्रमुख वक्ता डॉ. जागृति गिजारे, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मार्केटिंग, आईटीएम मुंबई, ने विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग के बदलते स्वरूप तथा सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सत्र के दौरान व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं को यह समझाया गया कि प्रभावी एवं आकर्षक कैरोसेल विज्ञापन किस प्रकार ब्रांड कम्युनिकेशन को मजबूत करने, ऑडियंस इंगेजमेंट बढ़ाने तथा डिजिटल मार्केटिंग कैंपेन्स की प्रभावशीलता को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस प्रकार के इंडस्ट्री-ओरिएंटेड एवं स्किल-बेस्ड सेशन्स के आयोजन की सराहना की। कार्यशाला छात्राओं के लिए एक उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक अनुभव रही। लगभग 50 छात्राओं ने इस कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया।  

    एमजीडी गर्ल्स स्कूल में चार दिवसीय इंटर-हाउस खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न

    शिक्षक-छात्र मैत्री मैचों के साथ हुआ रोमांचक समापन महारानी गायत्री देवी (एमजीडी) गर्ल्स स्कूल में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक 'इंटर-हाउस गेम्स एवं स्पोर्ट्स टूर्नामेंट 2026–27' शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता की शुरुआत 19 अगस्त को निदेशिका श्रीमती अर्चना एस. मनकोटिया की प्रेरणादायी उपस्थिति और पारंपरिक खेल शपथ के साथ हुई थी, जिसके बाद चारों सदनों—फ्लोरेंस नाइटिंगेल, मैडम क्यूरी, हेलेन केलर और सरोजिनी नायडू हाउस—के बीच विभिन्न खेल विधाओं में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती दौर के मुकाबलों के बाद प्रतियोगिता में मैडम क्यूरी हाउस ने अपना दबदबा साबित करते हुए टेनिस और सीनियर बैडमिंटन के खिताबी मुकाबलों में पहला स्थान हासिल किया, जबकि टेबल टेनिस के फाइनल में हेलेन केलर हाउस विजयी रहा। इसके साथ ही खो-खो, बास्केटबॉल, थ्रोबॉल, 6-ए-साइड हॉकी और क्रिकेट जैसे प्रमुख टीम इवेंट्स में भी सभी सदनों के खिलाड़ियों ने शानदार तालमेल और कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के चौथे और अंतिम दिन मैदान पर एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिनमें अंडर-19 हैमर थ्रो, अंडर-17 व 19 जैवलिन थ्रो और अंडर-14 शटल रिले मुख्य आकर्षण रहीं। अंतिम दिन का सबसे रोचक हिस्सा विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं के बीच आयोजित दोस्ताना मुकाबले रहे, जिसमें शिक्षक वर्ग ने अपनी रणनीतिक पकड़ के दम पर बास्केटबॉल और थ्रोबॉल दोनों मैचों में जीत दर्ज की। खेल भावना, अनुशासन और आपसी तालमेल के साथ इस चार दिवसीय खेल उत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ।  

    शिक्षा के मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजकीय विद्यालय में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर महासंघ सख्त

    कहा- विद्यालयों में बाहरी दखल और शिक्षकों के राजनीतिक इस्तेमाल का पुरजोर विरोध जयपुर। राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखने के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने अपना रुख और अधिक स्पष्ट करते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। महासंघ के प्रदेश संघठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने कल की घटना के संदर्भ में कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण के प्रयास का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कधित रूप से गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति उत्पन्न होने की जानकारी सामने आई है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि हिंसा या मारपीट का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता. लेकिन यह सवाल भी गंभीर है कि राजनीतिक विवादों को राजकीय विद्यालयों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी राजकीय विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं अथवा शैक्षणिक स्थिति को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम खुले हैं। विद्यालय परिसर में बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना किसी भी रूप में उचित नहीं है। "विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं" अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कहा कि राजस्थान सरकार ने पिछले कुछ समय में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चरणबद्ध तरीके से अनेक प्रयास किए हैं। ये सुधार एक सतत प्रक्रिया हैं और आने वाले समय में भी जारी रहेंगे। विद्यालयों में संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग लगातार काम कर रहे हैं। राजनीति करना किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। महासंघ ने कहा कि शिक्षकों को राजनीतिक दबाव या राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का प्रयास शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं। सरकार के दिशा-निर्देशों का महासंघ ने किया समर्थन संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों को सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का अर्थ किसी व्यक्ति को विद्यालय में जाने से रोकना नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सरकारी आदेशों को ही राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। "राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ न हो" प्रदेश संघठन मंत्री देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल अथवा संगठन को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग करना चाहिए। राजकीय विद्यालयों में जाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना न विद्यार्थियों के हित में है, न शिक्षकों के हित में और न ही राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के हित में। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विद्यालय की वास्तविक समस्याएं सामने आती हैं तो संगठन उनका समाधान कराने के लिए प्रशासन के समक्ष तथ्यात्मक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के पक्ष में है। लेकिन विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, निरीक्षण अथवा शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि विद्यालयों से जुड़े किसी भी विषय को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न न करें। किसी भी विवाद का समाधान कानून और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए। महासंघ ने कहा कि वह हिंसा का विरोध करता है, लेकिन विद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी उतनी ही दृढ़ता से विरोध करता है। यदि भविष्य में किसी राजकीय विद्यालय में नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक गतिविधि अथवा बाहरी हस्तक्षेप का प्रयास किया जाता है तो महासंघ संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाएगा और आवश्यकतानुसार वैधानिक एवं लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का स्पष्ट संदेश है- "विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, राजनीतिक संघर्ष के नहीं। शिक्षा के मंदिरों की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा और शिक्षकों को राजनीति का टूल बनाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।" एबीआरएसएम विद्यालय शिक्षा भारत के सभी विद्यालयों को तीर्थ रूप में विकसित करने के लिए लगातार जनता, एसडीएमसी के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए विद्यालय में भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने शैक्षणिक सुधार करने के लिए लगातार प्रयत्नशील है। वर्तमान में राजस्थान में 10000 स्कूलों में ABRSM से जुड़े शिक्षक कार्यकर्ता बंधु इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, उन विद्यालयों में शिक्षा में गुणात्मक सुधार के साथ साथ इस दिशा में बहुत ही अनुकरणीय काम हुआ है।  

    प्रतिभा से लक्ष्य तक: बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन, सम्मान और सफलता की नई उड़ान

    सफलता के लिए दृढ़ निश्चय, समय का सदुपयोग और मजबूत नेटवर्किंग जरूरी : सीए अभिषेक बियानी जयपुर: बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस, जयपुर द्वारा विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘लक्ष्य’ लाइफ चेंजिंग मोटिवेशनल सेमिनार, नि:शुल्क पर्सनल करियर काउंसलिंग, प्रतिभा सम्मान एवं शिक्षक सम्मान समारोह–2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और आवश्यक कौशल प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित करना रहा। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प स्वागत के साथ हुई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह, पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में तीन स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें संस्कार स्कूल , कृष्णम पब्लिक स्कूल और मयूर स्कूल के लगभग 230 विद्यार्थी शामिल रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ आए शिक्षकों का भी सम्मान किया गया तथा उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनकी सहभागिता एवं उपलब्धि के लिए मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी ने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए आवश्यक पांच आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दृढ़ निश्चय के साथ कार्य करने, काम को कल पर न टालने, सभी के प्रति सम्मानजनक व्यवहार रखने और मजबूत नेटवर्किंग विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें विद्यार्थी जीवन को बेहतर बनाने के साथ भविष्य की सफलता की मजबूत नींव तैयार करती हैं। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी ने विद्यार्थियों को लगातार नई स्किल्स सीखने और उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य और उद्देश्य स्वयं निर्धारित करना चाहिए तथा उसे हासिल करने के लिए आवश्यक कौशल एवं क्षमताओं का विकास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में करियर काउंसलिंग के लिए बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस आने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य के अनुसार उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत करियर काउंसलिंग का लाभ उठा सकते हैं। समारोह के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को पहचानने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य की दिशा में सकारात्मक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, शिक्षकों के सम्मान के माध्यम से विद्यार्थियों के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को भी सराहा गया। समारोह का सफल संचालन बी.एड कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ.शिप्रा गुप्ता द्वारा किया गया।  

    शोधार्थी कपिल देव वर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की

    राजस्थान विश्वविद्यालय ने लोक प्रशासन विभाग के शोधार्थी कपिल देव वर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। कपिल ने 'राजस्थान में लोक शिकायत निवारण तंत्र: जयपुर नगर निगम का एक अनुभव मूलक अध्ययन' विषय पर शोध कार्य पूर्ण किया। शोधकार्य डॉ. मीना रानी के निर्देशन में किया गया।  

    19वीं विशाल देवनारायण पदयात्रा: देवनारायण भगवान के सुरों से गुंजेगा जयपुर से मालासेरी तक का मार्ग

    अगाध भक्ति और लोक-संस्कृति की अनूठी मिसाल:  ​बेगस/जयपुर. राजस्थान की पावन धरा भक्ति, श्रद्धा और अटूट लोक-संस्कृति की साक्षी रही है। जब-जब भगवान श्री देवनारायण जी की महिमा का बखान होता है, तब-तब श्रद्धालुओं के मन में एक अद्भुत ऊर्जा और अगाध आस्था का संचार हो जाता है। इसी भक्तिमय परंपरा को जीवंत रखते हुए "श्री देवनारायण पदयात्रा मित्र मण्डल समिति, भोपा की ढाणी, बेगस, रामसिंहपुरा (जयपुर)" के तत्त्वावधान में 19वीं विशाल पदयात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पदयात्रा शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 से शुरू होकर गुरुवार, 17 सितम्बर 2026 तक चलेगी। यात्रा भगवान श्री देवनारायण जी का मंदिर देव धाम, भोपा की ढाणी, बेगस से गाजे बाजे के साथ रवाना होगी. 7 दिवसीय यात्रा मार्ग एवं रात्रि विश्राम की संपूर्ण रूपरेखा ​ श्री देवनारायण भगवान महा कथा के गायक भोपाजी बिरदी चंद कुमावत देवतवाल ने बताया कि यात्रा का प्रस्थान 11 सितम्बर 2026 को सुबह 7:15 बजे मंदिर श्री देवनारायण जी, भोपा की ढाणी, बेगस-रामसिंहपुरा से होगा। इस यात्रा में बड़ी संख्या में देव भक्त शामिल होंगे और 7 दिन पैदल चल के भोपा की ढाणी से मालासेरी डूंगरी आसींद भीलवाड़ा में पहुंचेंगे. पूरे 7 दिनों की यात्रा के पड़ाव इस प्रकार रहेंगे: ​11 सितम्बर (शुक्रवार): दोपहर विश्राम नासनोदा तथा रात्रि विश्राम डी.लाइट फ्यूल (गिंदानी इण्डियन ऑयल, प्रमोद कुमार)। ​12 सितम्बर (शनिवार): दोपहर विश्राम नौरिया का बालाजी एवं रात्रि विश्राम श्री देव मार्केट-किशनगढ़ बाईपास। ​13 सितम्बर (रविवार): दोपहर विश्राम बालाजी मंदिर और रात्रि विश्राम श्री चन्दनाथ आदर्श विद्या मंदिर-नसीराबाद। ​14 सितम्बर (सोमवार): दोपहर विश्राम फौजी का ढाबा (बांदनवाड़ा) व रात्रि विश्राम बाफना जैन तीर्थ (27 मील, विजय नगर)। ​15 सितम्बर (मंगलवार): दोपहर विश्राम रूपहाली चौराहा तथा रात्रि विश्राम देवनारायण मंदिर, उखलिया। ​16 सितम्बर (बुधवार): दोपहर विश्राम तांबेशर बावड़ी बालाजी और रात्रि विश्राम मालासेरी डूंगरी, श्री देवनारायण भगवान की जन्मस्थली मंदिर ​17 सितम्बर (गुरुवार): देव दर्शन मालासेरी डूंगरी-सवाईभोज, गोटा दड़ावट, देवमाली धाम एवं यात्रा का सफल समापन। ​

    साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक में विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने साइबर सिक्योर्ड इंडिया के साथ किया एमओयू जयपुर। साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करने और उन्हें पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने साइबर सिक्योर्ड इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। इस साझेदारी में ओपीएसवाट अकादमी वैश्विक भागीदार के रूप में जुड़ा है। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी जानकारी तक सीमित न रखते हुए उन्हें वास्तविक मामलों और उद्योग में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की समझ देना है। आज मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल तकनीक हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ साइबर अपराध, डाटा चोरी, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में यह पहल की है। फॉरेंसिक साइंस विभाग की विभागाध्यक्ष वैष्णवी ठाकरे ने कहा, “आज साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और इसमें प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने इस वर्ष से एमएससी डिजिटल फॉरेंसिक्स एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों को पहले से ही डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक की शिक्षा दी जा रही थी, लेकिन अब इस विशेष मास्टर डिग्री कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में और गहराई से सीखने का अवसर मिलेगा।” उन्होंने कहा, साइबर सिक्योर्ड इंडिया और ओपीएसवाट अकादमी के साथ यह राष्ट्रीय और वैश्विक साझेदारी इस नए कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगी। विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, इंटर्नशिप और प्रमाण-पत्र हासिल करने के अवसर मिलेंगे। हमारा उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि उनके पास इस क्षेत्र में काम करने के लिए जरूरी ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक समझ भी हो।” एमओयू के तहत साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक से जुड़े विषयों पर संयुक्त शोध को भी बढ़ावा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय और उद्योग के विशेषज्ञ मिलकर साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियों, डिजिटल साक्ष्यों और नई तकनीकों से जुड़े विषयों पर काम करेंगे। विद्यार्थियों को भी शोध और नई सोच से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उद्योग में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा। इंटर्नशिप के जरिए वे वास्तविक कार्य परिस्थितियों को करीब से समझ सकेंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाण-पत्र उनके कौशल को मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेंगे। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी की यह पहल शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने, विशेषज्ञों से सीखने और बदलती तकनीक के साथ खुद को तैयार करने का अवसर मिलेगा। इस साझेदारी के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है, जो साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में बेहतर करियर बना सकें और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।  

    प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग पर विशेष मास्टरक्लास का आयोजन

    21 अगस्त 2026 को कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के कैरियर गाइडेंस, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेंटर द्वारा ”मास्टरक्लास ऑन प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग- शेपिंग बेटर एआई रिस्पॉन्सेस“ विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के मुख्य वक्ता हिमांशु सौदा, सर्टिफाइड आईबीएम ट्रेनर एवं एआई एक्सपर्ट, ने विद्यार्थियों को प्रभावी प्रॉम्प्ट्स तैयार करने तथा एआई से बेहतर, सटीक और उपयोगी प्रतिक्रियाओं को प्राप्त करने की तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों एवं डेमोंस्ट्रेशन्स के माध्यम से प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के विभिन्न पहलुओं तथा इसके एकेडमिक और प्रोफेशनल एप्लीकेशन की जानकारी दी। वक्ता ने उन प्लेटफ़ॉर्म्स के बारे में भी बताया जिनका इस्तेमाल करके छात्र एआई की मदद से कुछ ही मिनटों में अपनी वेबसाइट और ऐपलिकेशन बना सकते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने विद्यार्थियों को अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों के लिए इमर्जिंग तकनीकों को समझना और उनका प्रभावी उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, नई तकनीकों के साथ स्वयं के कौशल में वृद्धि करने तथा अपने ज्ञान और क्षमताओं का रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। सेंटर संयोजिका डॉ. आकांक्षा गंडा ने बताया कि मास्टरक्लास विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रही तथा उन्हें एआई लिटरेसी, डिजिटल स्किल्स और वर्कप्लेस रेडीनेस विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। सेंटर की सदस्य डॉ. दमयंती सोढा और डॉ. पारुल सिंह का इस सत्र के सफल आयोजन में योगदान रहा। इसमें लगभग 50 छात्राओं ने भाग लेकर लाभ प्राप्त किया।

    फ्लैट तलाशने निकले सॉफ्टवेयर इंजीनियर को मिला एआई स्टार्टअप में नौकरी का ऑफर, सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

    Yugcharan News / 21 अगस्त 2026 बेंगलुरु को देश की तकनीकी राजधानी और स्टार्टअप संस्कृति के प्रमुख केंद्रों में से एक माना जाता है। यहां आए दिन तकनीक, स्टार्टअप और रोजगार से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। ऐसी ही एक दिलचस्प घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के फ्लैट तलाशने के दौरान हुई एक अप्रत्याशित मुलाकात ने कथित तौर पर उसे नौकरी के अवसर तक पहुंचा दिया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई इस घटना को यूजर ने बेंगलुरु का एक खास अनुभव बताते हुए साझा किया। पोस्ट के अनुसार, व्यक्ति फ्लैट की तलाश में निकला था, लेकिन जिस मकान को देखने की योजना थी, वहां संबंधित व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बाद वह उसी इमारत में स्थित एक दूसरे फ्लैट को देखने पहुंचा। यहीं से कहानी ने अप्रत्याशित मोड़ लिया। बताया गया कि जिस दूसरे फ्लैट को देखने के लिए वह गया था, वहां रहने वाले लोग एक एआई स्टार्टअप के संस्थापक निकले। बातचीत के दौरान स्टार्टअप और उसके काम के बारे में चर्चा हुई और कथित तौर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को नौकरी का अवसर भी मिल गया। इस पूरी घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे बेंगलुरु की स्टार्टअप संस्कृति से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। फ्लैट देखने गए थे, स्टार्टअप के संस्थापकों से मुलाकात हो गई वायरल पोस्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि वह एक फ्लैट देखने गया था। जिस व्यक्ति के फ्लैट से बाहर जाने की बात थी, वह उस समय वहां मौजूद नहीं था। ऐसे में उसे उसी इमारत में मौजूद एक अन्य फ्लैट दिखाया गया, ताकि वह वहां के इंटीरियर और रहने की स्थिति को समझ सके। हालांकि, उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस फ्लैट को वह देखने जा रहा है, वहां रहने वाले लोग एक कानूनी तकनीक से जुड़े एआई स्टार्टअप के संस्थापक हैं। मुलाकात के दौरान बातचीत आगे बढ़ी और स्टार्टअप के काम तथा तकनीक से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। पोस्ट करने वाले व्यक्ति के अनुसार, यह सामान्य फ्लैट देखने की प्रक्रिया से शुरू हुआ अनुभव एक संभावित पेशेवर अवसर में बदल गया। उन्होंने अपनी पोस्ट में इसे बेंगलुरु का एक खास पल बताते हुए पूरी घटना साझा की। पोस्ट में यह भी कहा गया कि स्टार्टअप कानूनी क्षेत्र के लिए एआई आधारित समाधान विकसित कर रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में स्टार्टअप का नाम स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पोस्ट करने वाले व्यक्ति से कंपनी का नाम और उसके बारे में अधिक जानकारी साझा करने की मांग की। कौन है पोस्ट करने वाला व्यक्ति? सोशल मीडिया प्रोफाइल से मिली जानकारी के अनुसार, पोस्ट करने वाला व्यक्ति एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से पढ़ाई कर चुका है। प्रोफाइल में उसके माइक्रोसॉफ्ट के साथ काम करने का अनुभव भी दिखाई देता है। इसी वजह से पोस्ट को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई। तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कई लोगों ने इस घटना को नेटवर्किंग और अप्रत्याशित पेशेवर अवसरों के उदाहरण के रूप में देखा। बेंगलुरु में तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बड़ी संख्या होने के कारण एक ही आवासीय परिसर में उद्यमियों, इंजीनियरों, निवेशकों और तकनीकी पेशेवरों का मिलना असामान्य नहीं माना जाता। ऐसे माहौल में सामान्य बातचीत भी कभी-कभी व्यावसायिक या रोजगार के अवसर में बदल सकती है। सोशल मीडिया पर कहानी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। जहां कुछ लोगों ने इस घटना को मजेदार और बेंगलुरु की स्टार्टअप संस्कृति का उदाहरण बताया, वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि यह कहानी बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हो सकती है। कुछ प्रतिक्रियाओं में इसे काल्पनिक कहानी तक बताया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, कुछ उपयोगकर्ताओं ने कहानी को सच मानते हुए इसमें रुचि दिखाई। कई लोगों ने स्टार्टअप का नाम जानने की इच्छा जताई, जबकि कुछ ने पोस्ट करने वाले व्यक्ति से कंपनी से संपर्क कराने का अनुरोध भी किया। यह प्रतिक्रिया बताती है कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ी ऐसी छोटी घटनाएं भी किस तरह तेजी से चर्चा में आ सकती हैं, खासकर तब जब उनमें नौकरी, स्टार्टअप और तकनीकी क्षेत्र जैसे लोकप्रिय विषय शामिल हों। कानूनी क्षेत्र में एआई स्टार्टअप का बढ़ता दायरा इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू कानूनी क्षेत्र में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से भी जुड़ा है। भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में स्टार्टअप कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कानूनी दस्तावेजों के विश्लेषण, शोध, डेटा प्रोसेसिंग और अन्य कार्यों को आसान बनाने के लिए कर रही हैं। कानूनी तकनीक यानी लीगल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी मात्रा में दस्तावेजों को कम समय में पढ़ना, संबंधित कानूनी जानकारी ढूंढना और दस्तावेजों के बीच समानताओं या अंतर को पहचानना जैसे काम एआई आधारित प्रणालियों के जरिए किए जा सकते हैं। हालांकि, कानूनी मामलों में एआई के इस्तेमाल के साथ सटीकता, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मानवीय निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी जुड़े हुए हैं। इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को तकनीकी विकास के साथ-साथ कानूनी और नैतिक मानकों पर भी ध्यान देना पड़ता है। भारत में एआई स्टार्टअप का विस्तार भारत का स्टार्टअप क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस बदलाव के प्रमुख हिस्सों में शामिल है। स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय तकनीक, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, ग्राहक सेवा और व्यापार प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। देश में बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवर और इंजीनियर मौजूद हैं। इसके साथ ही भारत का व्यापक डेवलपर समुदाय भी नई तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। निवेशकों की रुचि और उद्यमिता के बढ़ते अवसरों ने भी एआई आधारित कंपनियों के लिए वातावरण तैयार किया है। कंपनियां एआई का इस्तेमाल निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित करने और बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने के लिए कर रही हैं। कुछ क्षेत्रों में एआई आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का इस्तेमाल मांग का अनुमान लगाने और संभावित जोखिमों को समझने के लिए भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय क्षेत्र के अलावा लॉजिस्टिक्स तथा आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे कंपनियों को परिचालन लागत कम करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है। बेंगलुरु में नौकरी और नेटवर्किंग की अनोखी तस्वीर फ्लैट तलाशने के दौरान नौकरी के अवसर तक पहुंचने वाली यह कहानी भले ही एक व्यक्तिगत अनुभव हो, लेकिन यह बेंगलुरु के तकनीकी और स्टार्टअप वातावरण की एक दिलचस्प तस्वीर भी पेश करती है। शहर में बड़ी संख्या में स्टार्टअप संस्थापक, निवेशक, इंजीनियर और तकनीकी पेशेवर एक साथ काम और रहते हैं। ऐसे माहौल में पेशेवर नेटवर्किंग केवल कार्यालय या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहती। फिर भी, वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस घटना को एक सोशल मीडिया पर साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल पोस्ट के बाद लोगों की सबसे अधिक दिलचस्पी उस एआई स्टार्टअप के नाम को लेकर बनी हुई है। यदि कंपनी और नौकरी के प्रस्ताव से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आती है, तो इस कहानी के बारे में और स्पष्टता मिल सकती है।   इस बीच, वायरल पोस्ट ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बेंगलुरु जैसे स्टार्टअप केंद्र में रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान भी अप्रत्याशित पेशेवर संपर्क और अवसर सामने आ सकते हैं। फ्लैट की तलाश से शुरू हुई यह कथित मुलाकात सोशल मीडिया पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें तकनीक, एआई, नौकरी और बेंगलुरु की स्टार्टअप संस्कृति—चारों पहलू एक साथ दिखाई देते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज बनने के लिए अनिवार्य कानूनी प्रैक्टिस की अवधि 3 साल से घटाकर 1 साल की

    Yugcharan News / 21 August 2026 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के लिए कानून स्नातकों की अनिवार्य कानूनी प्रैक्टिस की अवधि को तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। शुक्रवार को दिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले से न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे कानून स्नातकों और युवा अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ में न्यायमूर्ति एजी मसीह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे। पीठ ने मई 2025 के उस फैसले की समीक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बदलाव किया, जिसमें निचली न्यायपालिका में सिविल जज के पद पर सीधी भर्ती के लिए कम से कम तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस को अनिवार्य किया गया था। नए फैसले में अदालत ने तीन साल की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त को संशोधित करते हुए इसे एक साल कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के फैसले के मूल सिद्धांत को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है। अदालत का मानना है कि न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाले उम्मीदवारों के पास कानून की व्यावहारिक समझ और पेशेवर अनुभव होना आवश्यक है। तीन साल की शर्त में किया गया बदलाव मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के लिए होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षाओं में नए कानून स्नातक सीधे शामिल नहीं हो सकेंगे। उन्हें परीक्षा के लिए पात्र होने से पहले कम से कम तीन साल तक कानूनी प्रैक्टिस करनी होगी। इस फैसले के पीछे अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि न्यायिक सेवा में आने वाले उम्मीदवारों को अदालत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव हो। एक न्यायिक अधिकारी को मुकदमों की सुनवाई, कानूनी दलीलों, साक्ष्यों, दस्तावेजों, प्रक्रियात्मक नियमों और पक्षकारों से जुड़े विभिन्न मामलों से निपटना होता है। हालांकि, तीन साल की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त लागू होने के बाद बड़ी संख्या में कानून स्नातकों और युवा अधिवक्ताओं के बीच चिंता सामने आई। उनका तर्क था कि इससे कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायिक सेवा में प्रवेश का रास्ता लंबा हो जाएगा। समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब इस अवधि को घटाकर एक साल कर दिया है। सफल उम्मीदवारों को मिलेगा न्यायिक प्रशिक्षण सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि केवल एक साल की कानूनी प्रैक्टिस पूरी कर लेना ही न्यायिक सेवा में नियुक्ति के बाद की पूरी प्रक्रिया नहीं होगी। सफल उम्मीदवारों को चयन के बाद निर्धारित प्रशिक्षण से गुजरना होगा। इसमें न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण के साथ-साथ एक साल की संरचित क्लर्कशिप भी शामिल होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य चयनित उम्मीदवारों को न्यायिक कार्यों की व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि वे अदालत में जिम्मेदारी संभालने से पहले न्यायिक प्रक्रिया को नजदीक से समझ सकें। अदालत के अनुसार, सफल उम्मीदवारों को शुरुआत में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित अवधि के दौरान अलग-अलग स्तरों पर न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों के मार्गदर्शन में काम करना होगा। एक साल की क्लर्कशिप दो चरणों में होगी सुप्रीम कोर्ट के नए ढांचे के तहत एक साल की क्लर्कशिप को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले छह महीने उम्मीदवार कानून क्लर्क के रूप में प्रधान जिला न्यायाधीश या उच्च न्यायिक सेवा के सदस्यों की निगरानी में काम करेंगे। इस अवधि में उन्हें जिला स्तर पर न्यायिक कामकाज को समझने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अगले छह महीने उम्मीदवार संबंधित हाई कोर्ट के कार्यरत न्यायाधीशों की निगरानी में काम करेंगे। इससे उन्हें उच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया की व्यापक समझ हासिल करने में मदद मिलेगी। अदालत ने यह भी कहा है कि यह एक साल की क्लर्कशिप, पहले निर्धारित तीन साल की प्रैक्टिस की आवश्यकता के संदर्भ में एक साल की बार प्रैक्टिस के बराबर मानी जाएगी। इस प्रकार नई व्यवस्था में उम्मीदवारों को केवल अदालत में वकालत का अनुभव ही नहीं, बल्कि सीधे न्यायिक संस्थानों के भीतर काम करने का अवसर भी मिलेगा। संक्रमण अवधि के उम्मीदवारों को विशेष राहत सुप्रीम कोर्ट ने उन उम्मीदवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है जो पुराने और नए नियमों के बीच संक्रमण के दौर में हैं। अदालत के अनुसार, 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच अधिसूचित होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पहले लागू तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त पूरी करने की आवश्यकता नहीं होगी। अदालत ने इस अवधि के लिए उम्मीदवारों को विशेष राहत दी है, ताकि नियमों में बदलाव के कारण उन कानून स्नातकों और युवा अधिवक्ताओं को नुकसान न हो जो पहले से न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। ऐसे उम्मीदवारों को आवेदन के उद्देश्य से एक साल की सक्रिय कानूनी प्रैक्टिस पूरी कर लेने वाला माना जाएगा। उन्हें इस अवधि के लिए अलग से प्रैक्टिस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह व्यवस्था उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने मई 2025 के फैसले के बाद अपनी तैयारी और करियर योजना को तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त के अनुसार बनाया था। अप्रैल 2027 से लागू होगा नया ढांचा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि संशोधित व्यवस्था के तहत नया नियम 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद अधिसूचित होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि न्यायिक सेवा की आगामी भर्तियों के लिए पात्रता तय करते समय संबंधित भर्ती अधिसूचना की तारीख भी महत्वपूर्ण होगी। उम्मीदवारों को अपनी पात्रता निर्धारित करने के लिए संबंधित राज्य की न्यायिक सेवा परीक्षा की आधिकारिक अधिसूचना और उसमें दिए गए नियमों को ध्यान से देखना होगा। अदालत ने व्यावहारिक अनुभव के महत्व को बरकरार रखा सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में यह स्पष्ट किया कि उसने कानून के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव के महत्व से जुड़े अपने पुराने दृष्टिकोण को नहीं बदला है। अदालत के अनुसार, न्यायिक अधिकारी बनने वाले उम्मीदवारों को कानून की किताबों और अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ वास्तविक कानूनी प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है। निचली अदालतों में सिविल जज के रूप में काम करने वाले अधिकारियों को रोजाना विभिन्न प्रकार के मामलों का सामना करना पड़ता है। इनमें दीवानी विवाद, साक्ष्य, कानूनी दलीलें, प्रक्रियात्मक मुद्दे और पक्षकारों से संबंधित अनेक प्रश्न शामिल हो सकते हैं। इसी कारण अदालत ने माना कि पेशेवर अनुभव की आवश्यकता का एक तार्किक आधार है। हालांकि, अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अनुभव की ऐसी शर्त उम्मीदवारों पर अनावश्यक या अत्यधिक बोझ नहीं डालनी चाहिए। नए फैसले में इसी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश की गई है। कानून स्नातकों के लिए क्या बदलेगा? इस फैसले का सबसे सीधा प्रभाव उन कानून स्नातकों पर पड़ेगा जो सिविल जज बनने की तैयारी कर रहे हैं। पहले तीन साल की प्रैक्टिस अनिवार्य होने के कारण कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए पात्र बनने से पहले लंबा इंतजार करना पड़ सकता था। अब संशोधित व्यवस्था में यह अवधि घटकर एक साल हो गई है। इससे कानून की पढ़ाई पूरी करने और न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के बीच का अंतर कम हो सकता है। हालांकि, उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना होगा कि एक साल की प्रैक्टिस की शर्त कम होने का मतलब यह नहीं है कि न्यायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता समाप्त हो गई है। चयन के बाद उन्हें न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण और निर्धारित क्लर्कशिप प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस तरह नई व्यवस्था में न्यायिक सेवा में प्रवेश से पहले और नियुक्ति के बाद व्यावहारिक अनुभव हासिल करने के दो अलग-अलग माध्यम बनाए गए हैं। पहले के फैसले की समीक्षा के बाद आया निर्णय सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मई 2025 के निर्णय की समीक्षा के लिए दायर कई याचिकाओं के बाद आया है। पहले फैसले में अदालत ने सीधे भर्ती के माध्यम से सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस को अनिवार्य किया था। इसके बाद इस व्यवस्था को लेकर विभिन्न पक्षों ने समीक्षा याचिकाएं और संबंधित याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने इस मामले में हाई कोर्ट, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और अन्य कानूनी संस्थानों से भी विचार मांगे थे। 13 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती से संबंधित आवेदन की अंतिम तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ाने का निर्देश भी दिया था। इसके बाद मामले में कई पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने 28 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने तीन साल की अनिवार्य प्रैक्टिस की अवधि को घटाकर एक साल करने का फैसला सुनाया है। युवा अधिवक्ताओं के लिए राहत सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को युवा अधिवक्ताओं और न्यायिक सेवा की तैयारी करने वाले कानून स्नातकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर अदालत ने व्यावहारिक कानूनी अनुभव की आवश्यकता को बरकरार रखा है, वहीं दूसरी ओर तीन साल की बाध्यता को कम करके उम्मीदवारों के लिए न्यायिक सेवा में प्रवेश का रास्ता अपेक्षाकृत आसान किया है। नई व्यवस्था में न्यायिक अकादमी प्रशिक्षण और क्लर्कशिप के माध्यम से उम्मीदवारों को न्यायिक कार्य का व्यवस्थित अनुभव देने पर जोर दिया गया है। इससे न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाले नए अधिकारियों के लिए कानून की अकादमिक समझ और अदालतों की वास्तविक कार्यप्रणाली के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की गई है।   कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का संशोधित फैसला न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे कानून स्नातकों के लिए पात्रता नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि, उम्मीदवारों को आगामी भर्तियों में लागू होने वाली अधिसूचनाओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना होगा, क्योंकि नई व्यवस्था की प्रभावी तारीख और संबंधित भर्ती नियम उनकी पात्रता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।