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    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब: 12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड

    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब:  12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड डॉ. राम भजन कुमावत  जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं का परिणाम घोषित किए जाने के बाद प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के घरों में कहीं उत्सव तो कहीं आगे की रणनीति को लेकर मंथन का दौर जारी है। इस वर्ष भी कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों ही संकायों में शानदार उत्तीर्ण प्रतिशत रहा है, जिसमें बेटियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजस्थान का युवा अब किस दिशा में आगे बढ़ रहा है? पारंपरिक ढर्रे को छोड़ इस बार राजस्थान के विद्यार्थियों के रुझान में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। छात्र अब केवल डिग्री हासिल करने के बजाय करियर और स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रोफेशनल और जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेज की तरफ झुकाव   कोटा, जयपुर, जोधपुर और सीकर जैसे शिक्षा के बड़े केंद्रों से आ रही रिपोर्ट बताती है कि अब छात्र सिर्फ बीए, बीएससी या बीकॉम जैसी सामान्य डिग्रियों के भरोसे नहीं बैठना चाहते। इस बार विद्यार्थियों का सबसे बड़ा रुझान प्रोफेशनल कोर्सेज की तरफ है।   आईटी और टेक क्षेत्र:  कंप्यूटर एप्लीकेशन, डेटा एनालिसिस, और एआई से जुड़े कोर्सेज के लिए कॉलेजों में पूछताछ अचानक बढ़ गई है। विज्ञान वर्ग के छात्र इंजीनियरिंग के अलावा अब सीधे टेक-स्किल्स सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।   मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट:  वाणिज्य और कला वर्ग के छात्रों में बीबीए और होटल मैनेजमेंट जैसे कोर्सेज का क्रेज बढ़ा है, ताकि पढ़ाई पूरी होते ही हाथ में रोजगार हो।    सीयूईटी के जरिए देश के टॉप विश्वविद्यालयों पर नजर   राजस्थान के युवाओं में अब स्थानीय कॉलेजों के अलावा देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, बीएचयू, जेएनयू) में दाखिला पाने की होड़ मची है। 12वीं की परीक्षा खत्म होते ही छात्र सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी में जुट गए थे। खासकर शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू) और मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र अब देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना चाहते हैं।   कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही 'सरकारी नौकरी' का लक्ष्य   राजस्थान में सरकारी नौकरी (सिविल सर्विसेज, प्रशासनिक सेवाएं और बैंकिंग) के प्रति दीवानगी जगजाहिर है। इस बार का ट्रेंड दिखाता है कि छात्र स्नातक की पढ़ाई को एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह देख रहे हैं। कला वर्ग में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन रहने का एक बड़ा कारण यह भी है कि छात्र आरएएस, आईएएस या शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को ध्यान में रखकर ही 11वीं-12वीं में ह्यूमेनिटीज चुनते हैं। अब परिणाम आते ही छात्र कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ इन प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग या ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर तैयारी में जुट गए हैं।   बेटियों की उड़ान: आत्मनिर्भर बनने की नई जिद   इस साल के नतीजों में भी छात्राओं का पास प्रतिशत छात्रों से काफी बेहतर रहा है। यह बदलाव केवल मार्कशीट तक सीमित नहीं है। गांवों और कस्बों की लड़कियां अब केवल घर के पास के महिला कॉलेजों से प्राइवेट पढ़ाई करने तक सीमित नहीं हैं; वे नर्सिंग, क्लैट ( लॉ एंट्रेंस), डिजिटल मार्केटिंग और डिफेंस सर्विसेज (जैसे पुलिस और सेना भर्ती) में करियर बनाने के लिए घरों से बाहर निकल रही हैं।   छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' बनना चाहते हैं   राजस्थान में 12वीं के बाद का यह नया परिदृश्य साफ करता है कि आज का छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' और 'स्किलफुल' बनना चाहता है। युवाओं का यह बदला हुआ रुख आने वाले समय में राजस्थान को देश के सबसे बड़े 'ह्यूमन रिसोर्स हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

    पाली जिले में दर्जनों पशु चिकित्सालयों को मिलेंगे नए भवन

    -पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने किया वर्चुअली शिलान्यास -सोनाई मांझी में मुख्यमंत्री बजट घोषणा की सड़क जनता को समर्पित   पाली/सुमेरपुर। विधानसभा क्षेत्र के सोनाई मांझी गांव में रविवार को विकास कार्यों की सौगात देने के लिए एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत थे। मंत्री कुमावत ने गांव और आस-पास के क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा मुख्यमंत्री बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत नवनिर्मित सोनाई मांझी से आइचिया सड़क का विधिवत लोकार्पण किया गया। इसी दौरान कुमावत ने राजकीय पशु चिकित्सालय, बालराई, जिला पाली की चारदिवारी के निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया। इस चारदिवारी के निर्माण कार्य पर 13.97 लाख रुपए की लागत आएगी। इसके अतिरिक्त पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली व ब्यावर जिले के दर्जनों राजकीय पशु चिकित्सा उप केंद्रों, पशु चिकित्सालयों, प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों, राजकीय बहुउदेशीय पशु चिकित्सालय तथा राजकीय ब्लॉक वेटेरीनरी हेल्थ ऑफिस, खैरवा की चारदिवारी के निर्माण कार्य का वर्चुअली शिलान्यास किया। साथ ही उन्होंने पाली जिले के सिंदरू, सोनाई मांझी, भांगेसर, कोरटा, खिमाडा, टेवाली, खिवांदी, खारड़ा, नीपल, लापोद, ब्यावर जिले के सेंदड़ा व लिलांबा के राजकीय पशु चिकित्सालय के नए भवन निर्माण कार्यों का भी शिलान्यास किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने मंत्री का साफा पहनाकर और मालाओं से भव्य स्वागत किया।   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री कुमावत ने कहा-आज का यह दिन हमारे सुमेरपुर क्षेत्र और विशेषकर सोनाई मांझी के लिए बेहद हर्ष का विषय है। हमारी सरकार 'सशक्त राजस्थान, समृद्ध राजस्थान' के संकल्प को लेकर निरंतर आगे बढ़ रही है। आज जिस सोनाई मांझी से आइचिया सड़क का लोकार्पण हुआ है, वह केवल डामर की सड़क नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र के विकास और खुशहाली का नया मार्ग है। इस सड़क के बनने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का आवागमन सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट 2025-26 में जो वादा आपसे किया था, आज वह धरातल पर उतर चुका है।   मेरे पास जो पशुपालन, गोपालन और डेयरी विभाग हैं, वे सीधे हमारे ग्रामीण परिवेश और किसान भाइयों की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हमारी गौमाता की सेवा, पशुपालकों के कल्याण और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं का पैसा सीधे आप तक पहुंचेगा। देवस्थान विभाग के माध्यम से हम हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का भी कायाकल्प कर रहे हैं। विकास की यह गंगा रुकने वाली नहीं है। सुमेरपुर विधानसभा का हर गांव, हर ढाणी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। इस दौरान मंत्री श्री कुमावत ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके त्वरित, प्रभावी एवं गुणवतापूर्ण निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस मोके पर पाली पंचायत समिति प्रधान के प्रतिनिधि पुखराज पटेल, पशुपालन विभाग के निदेशक सुरेश मीणा, किसान केसरी भंवर चौधरी, पूर्व उप जिला प्रमुख नवल किशोर रावल, रामलाल कुमावत, हेमावास के पूर्व सरपंच मोहनलाल, हेमावास के मंडल अध्यक्ष मनोहरलाल सीरवी, सोनाई मांझी के सरपंच प्रताप सिंह, पंचायत समिति सदस्य रामलाल हीरागर, बडेरवास के पूर्व सरपंच मांगीलाल चौधरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।  

    अग्रवाल पीजी महाविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित

    अग्रवाल पीजी महाविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित। अग्रवाल कॉलेज जयपुर में विद्यार्थी प्रतिभा सम्मान समारोह -2026 का आयोजन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. सरीना कालिया रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एल. देवंदा ने की। समारोह में मनीष मित्तल राहुल पारीक एवं रोहित गर्ग उपस्थित रहे। प्राचार्य ने बताया कि राजस्थान प्रदेश के 12 वी में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल सिल्वर मेडल एवं ब्रोंज मेडल एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया । समारोह में शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. सरीना कालिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता निरंतर परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने एवं समाज के विकास में योगदान देने की प्रेरणा दी। प्राचार्य डॉ. बी.एल. देवंदा ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि कॉलेज हमेशा छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत है। उन्होंने सम्मानित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री अग्रवाल शिक्षा समिति के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल महासचिव नरेश सिंघल तथा कॉलेज सचिव अशोक गोयल ने कार्यक्रम की सफलता की शुभकामनाएं प्रेषित की। कार्यक्रम में कॉलेज के सभी शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।  

    वेदांत और भगवद्गीता की रोशनी में सुलझेंगे सुंदरकांड के गूढ़ रहस्य

    जयपुर - जयपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरा एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक वैचारिक क्रांति की गवाह बनने जा रही है। आगामी 30 मई, शनिवार को वेद विद्या ट्रस्ट दिल्ली के तत्वावधान में बनीपार्क स्थित “श्री जंगलेश्वर महादेव मंदिर” में एक दिवसीय सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। सुंदरकांड - एक तार्किक विश्लेषण इस ज्ञान यज्ञ के मुख्य वक्ता “आर्ष विद्या मंदिर दिल्ली के परम पूज्य ब्रह्मलीन स्वामी प्रबुद्धानंद जी” की महान वेदांत परंपरा के संवाहक आचार्य ईश्वरानंदा जी होंगे, जो सुंदरकांड के माध्यम से जीवन-प्रबंधन के उन व्यावहारिक सूत्रों को खोलेंगे, जिनका सीधा संबंध भगवान श्री कृष्ण द्वारा भगवद्गीता में दिए गए निष्काम कर्म के सिद्धांतों से है। राजधानी जयपुर में सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता आचार्य ईश्वरानंदा भी मौजुद रहें। आचार्य ईश्वरानंदा ने बताया कि यह आयोजन पारंपरिक पाठ से आगे बढ़कर, आधुनिक मानव जीवन की समस्याओं का एक लॉजिकल और सर्जिकल ऑडिट होगा। यह व्याख्यान समाज को अंधविश्वास और केवल बाहरी कर्मकांडों से ऊपर उठाकर शास्त्र श्रवण, शास्त्रों के गहरे और तार्किक अध्ययन की ओर प्रेरित करेगा। आयोजन समिति की सदस्य गरिमा श्रृंगी ने बताया कि इस सत्र में भगवदगीता के ज्ञान को जोड़ते हुए यह सिखाया जाएगा कि कैसे भक्ति हमारे अंतःकरण को कोमल और शुद्ध बनाती है, और कैसे वेदांत का ज्ञान हमें पूर्ण मोक्ष की ओर ले जाता है।  

    शिक्षा मंत्री के साथ शैक्षिक महासंघ की वार्ता , गतिरोध समाप्त,आंदोलन स्थगित ग्रीष्मावकाश 28 जून तक

    प्रधानाचार्य अधिकृत अवकाश पूर्व की भांति ​जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (ABRSM) विद्यालय शिक्षा द्वारा शिक्षकों के हितों को लेकर चलाए जा रहे प्रान्तव्यापी आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है। 29 मई को होने वाले जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन के भारी दबाव के मध्य शुक्रवार देर रात शिक्षा मंत्री ने संगठन के शिष्टमंडल को वार्ता के लिए अपने निवास पर आमंत्रित किया। ​प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल और शिक्षा मंत्री के मध्य, छात्र एवं शिक्षक हित में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई, जिसके बाद संगठन ने अपने आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा की है। ​प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने बताया कि वार्ता के मुख्य बिन्दुओं में नया शैक्षणिक सत्र 21 जून के बजाय 29 जून से प्रारंभ करने तथा संस्था प्रधान अधिकृत अवकाश में की गई कटौती को वापस लेते हुए इसे यथावत 2 दिवस रखने पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इसके आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। ​ तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों के स्थानांतरण (तबादलों) के विषय पर शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री से विशेष अनुरोध करने का आश्वासन दिया। ​शिक्षकों की पदोन्नति के मामले में माननीय न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने के लिए शिक्षा मंत्री ने शिष्टमंडल के सामने ही विभागीय अधिकारियों और अतिरिक्त महाधिवक्ता को दूरभाष पर निर्देश दिए। वहीं ​ क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति दिलाने और तृतीय श्रेणी शिक्षकों व प्रबोधकों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए वित्त विभाग के स्तर पर व्यक्तिगत प्रयास करने का भरोसा दिया। ​ शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में अधिकांश संख्या में केवल शिक्षकों को न लगाने के लिए चुनाव आयोग सहित संबंधित विभागों से संवाद कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। ​ संविदा कर्मियों के लिए बने नियमों को लेकर अधिकारियों के साथ पुनर्विचार करने की बात कही। ​संघर्ष समिति सयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि​"यह शिक्षकों के संघर्ष की जीत है" उन्होंने जानकारी दी कि "शिक्षा मंत्री के साथ हुए संवाद में अधिकांश मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। विभाग के इस सकारात्मक और गंभीर रुख को देखते हुए संगठन ने अपने आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि संघर्ष के कारण ही विभाग को हमारी मांगों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ा। ​प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने कहा कि संगठन के मांग पत्र में शामिल अन्य प्रशासनिक मुद्दों के निस्तारण के लिए भी शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को तुरंत वार्ता करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से हुए इस महत्वपूर्ण संवाद में प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के साथ प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा, संघर्ष समिति संयोजक सम्पत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। ​

    भारतीय भाषाओं को सशक्त करना ही भारत की आत्मा को सशक्त करना है : प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी CBSE के त्रिभाषा सूत्र (R3) के समर्थन में उठी राष्ट्रीय आवाज़

    जयपुर । कक्षा 9 से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा त्रिभाषा सूत्र (R3) के कार्यान्वयन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) के बाद देशभर में भारतीय भाषाओं, सांस्कृतिक अस्मिता और शिक्षा नीति को लेकर व्यापक चर्चा प्रारंभ हो गई है। शिक्षा जगत, भाषाविदो तथा भारतीय भाषाओ के समर्थको का मानना है कि यह केवल पाठ्यक्रम से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की भाषाई पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता और शैक्षिक न्याय से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारतीय भाषाओं को लेकर बढ़ी राष्ट्रीय चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि देश के सीमित अभिजात्य वर्ग अथवा विदेशी भाषा समर्थक समूहों की अपेक्षाओं के आधार पर करोड़ों विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं के अध्ययन से वंचित नहीं किया जा सकता। अधिकांश विद्यार्थी आठवीं कक्षा तक किसी भारतीय भाषा का अध्ययन करते हैं और नई व्यवस्था उन्हें कक्षा 9 एवं 10 तक उसी भाषा का अध्ययन जारी रखने का अवसर प्रदान करती है। भारत की भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला हैं। इस विषय पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि भारत की भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओ को शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है तथा सीबीएसई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का त्रिभाषा सूत्र उसी दूरदर्शी सोच का व्यावहारिक स्वरूप है। प्रो. वरखेड़ी ने कहा जो विद्यार्थी प्रारंभिक कक्षाओ से भारतीय भाषाओं का अध्ययन करते आए हैं, उन्हें माध्यमिक स्तर पर भी भाषाई निरंतरता का अवसर मिलना चाहिए। मातृभाषा और भारतीय भाषाओ में शिक्षा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, आत्मविश्वास और सृजनात्मक क्षमता को सुदृढ़ करती है। भारत की भाषाई विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे संरक्षित तथा समृद्ध करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विदेशी भाषाओं का विरोध नहीं, भारतीय भाषाओं का सम्मान प्रो. वरखेड़ी ने स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाओ के संवर्धन का अर्थ किसी विदेशी भाषा का विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सदैव विश्व ज्ञान के प्रति उदार और खुला रहा है, किंतु अपनी भाषाई जड़ों को कमजोर कर कोई भी राष्ट्र दीर्घकाल तक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नहीं रह सकता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना से जुड़ा R3 मॉडल शिक्षाविदों के अनुसार सीबीएसई द्वारा लागू किया जा रहा R3 मॉडल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की मूल भावना के अनुरूप है। नई शिक्षा नीति मातृभाषा आधारित शिक्षा, बहुभाषिकता तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल देती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोधों में भी यह सिद्ध हुआ है कि विद्यार्थी अपनी परिचित भाषा में अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं तथा उनका बौद्धिक, भावनात्मक और रचनात्मक विकास अधिक सुदृढ़ होता है। भारतीय भाषाओं के अध्ययन के प्रमुख लाभ 1. बौद्धिक विकास बहुभाषिक शिक्षा विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति, तार्किक चिंतन और रचनात्मकता को विकसित करती है। 2. शैक्षिक समानता भारतीय भाषाएँ शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं तथा इससे शिक्षा में कृत्रिम अभिजात्यवाद कम होता है। 3. सांस्कृतिक संरक्षण भाषा के माध्यम से साहित्य, लोकज्ञान, परंपराएँ और राष्ट्रीय स्मृतियाँ सुरक्षित रहती हैं। 4.राष्ट्रीय एकता भारतीय भाषाएँ विभिन्न क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करती हैं। 5.विद्यार्थियों के हित में निरंतरता आठवीं कक्षा तक किसी भारतीय भाषा का अध्ययन कर चुके विद्यार्थियों को आगे भी उसी भाषा के अध्ययन का अवसर मिलना चाहिए। इसे लेकर जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े विद्वानों ने देशभर में भारतीय भाषाओ के समर्थन में सकारात्मक जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया है। सामाजिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, डिजिटल मंचों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों से अपेक्षा की जा रही है कि वे बहुभाषिक शिक्षा और भारतीय भाषाओ के महत्व को समाज तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।  

    कलाओं के प्रदेश में कला शिक्षा विषय की दुर्दशा

    लाखों बच्चों के सृजनात्मक आनन्द मय शिक्षण के साथ खिलवाड़ सरकार ने राज्य पाठ्य-पुस्तक सूची में एनसीईआरटी की कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम सम्मिलित करना भूली न डिमांड भेजी नतिजा नवीन सत्र 2026-27 में कला शिक्षा का न पाठ्यक्रम न पुस्तक कक्षा 9,10 की कला कुन्ज पुस्तक का भी मुद्रण, वितरण भी बन्द राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग ने सत्र 2020-2021 से एनसीईआरटी का कक्षा 6 से 12 तक पाठ्यक्रम पुस्तक लागू कर दिया है जिसके के तहत् एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम व पुस्तक लागू है उसका शिक्षण राजकीय विद्यालयों में करवाया जाता है लेकिन कलाओं के प्रदेश राजस्थान में कला शिक्षा विषय स्थिति दयनीय है शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम को राज्य की पाठ्य-पुस्तक पाठ्यक्रम सूची में सम्मिलित नहीं किया जिससे नवीन सत्र में कला शिक्षा की पुस्तक का न तो मुद्रण हुआ न वितरण हुआ और न डिमांड भेजी राज्य सरकार के पास नवीन सत्र 2026-2027 में अनिवार्य कला शिक्षा विषय का कक्षा 1 से 8 तक न पाठ्यक्रम है पुस्तक उपलब्ध है और राज्य में कक्षा 9 और 10 में लागू कला शिक्षा पाठ्यक्रम की पुस्तक कला कुन्ज पुस्तक की डिमांड नहीं भेजने से उसका मुद्रण और वितरण भी बन्द है अब देखने वाली बात यह है की कक्षा 1 से 10 तक नवीन सत्र में राजकीय विद्यालयों सहित निजी विद्यालयों में लाखों बच्चों का अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत विषय का शिक्षण कैसे होगा ? बिना पुस्तक, पाठ्यक्रम, शिक्षण के लाखों बच्चों का 100 अंकों होगा मूल्यांकन अंकतालिकाओं आयेगी ग्रेड अनिवार्य है शिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत सहित कलाओं का शिक्षण अनिवार्य है। 100 अंकों का निर्धारित मूल्यांकन कला शिक्षा के लिए 100 अंकों का मूल्यांकन शिक्षा विभाग ने निर्धारित कर रखा है जिसके आधार पर अंकतालिकाओं में ग्रेड आती है। एनसीईआरटी की यह है पुस्तकें लागू कक्षा 3 से 5 तक बांसूरी नामक कक्षा 6 से 8 तक कृति नामक कक्षा 9 में मधुरिमा राज्य में कक्षा 9 व 10 में कला कुन्ज पुस्तक नामक शिक्षा विभाग अतिशीघ्र एनसीईआरटी की कक्षा 3 से 10 तक कला शिक्षा विषय निर्धारित के पाठ्यक्रम पुस्तक को राज्य की पाठ्य-पुस्तक सूची में सम्मिलित कर पुस्तक मुद्रण कर राजकीय विद्यालयों नि: शुल्क वितरण करायें ताकि लाखों को कला शिक्षा विषय का नवीन सत्र में शिक्षण मिल सकें। महेश गुर्जर प्रदेश सचिव कला शिक्षा आन्दोलन  

    कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने जारी किया दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड

    दो साल बेमिसाल विकास पुस्तिका का किया विमोचन सुमेरपुर। राजस्थान सरकार के पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने शनिवार को अपने सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान विगत दो वर्षों में क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक विकास कार्यों का लेखा-जोखा जनता के सामने पेश किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी उपलब्धियों पर आधारित विशेष 'दो साल बेमिसाल विकास पुस्तिका' का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध जनों और भारी संख्या में क्षेत्र की जनता ने भाग लिया। विकास और सुशासन के दो वर्ष कार्यक्रम में मंत्री जोराराम कुमावत ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि बीते दो साल सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव वाले रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह रिपोर्ट कार्ड इस बात का प्रमाण है कि हमने जो वादे चुनाव के समय किए थे, उन्हें धरातल पर उतारने के लिए दिन-रात काम किया है। मंत्री कुमावत ने गणमान्य अतिथियों के साथ मंच से 'विकास कार्यों की पुस्तिका' का विमोचन किया। इस पुस्तिका में क्षेत्र में स्वीकृत हुईं सड़कों, पेयजल योजनाओं, गोशालाओं के अनुदान, मंदिरों के जीर्णोद्धार और दुग्ध उत्पादकों के लिए शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। मंत्री कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि सुमेरपुर की देवतुल्य जनता ने दो वर्ष पूर्व मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी थी, आज मैं उसका पूरा हिसाब लेकर आपके बीच खड़ा हूँ। हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर काम कर रही है। पशुपालन, गोपालन और देवस्थान जैसे विभागों का जिम्मा सौंपकर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी ने जो भरोसा जताया, उसे मैंने सुमेरपुर और पूरे राजस्थान की सेवा में समर्पित कर दिया है। गोवंश और पशुपालकों की समृद्धि  कुमावत ने कहा कि हमारी सरकार ने लंपी बीमारी के बाद पशुपालकों को संबल दिया है। दुग्ध उत्पादकों को समय पर बोनस और गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट जारी किया गया है। सुमेरपुर में आधुनिक नस्ल सुधार केंद्र और नए पशु चिकित्सालयों की सौगात दी गई है। देवस्थान और संस्कृति का संरक्षण  कुमावत ने कहा कि देवस्थान मंत्री के रूप में मेरा संकल्प है कि हमारे आस्था के केंद्र भव्य और सुविधायुक्त बनें। क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना' के तहत रिकॉर्ड बुजुर्गों को यात्रा करवाने का काम हमारी सरकार ने किया है। बुनियादी ढांचा और पानी की समस्या का समाधान स्थानीय विधायक व मंत्री कुमावत ने कहा कि सुमेरपुर के ग्रामीण अंचलों में सड़कों का जाल बिछाया गया है। पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन के कार्यों को गति दी गई है और टेल तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए हम प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं ।यह विकास पुस्तिका मेरा नहीं, बल्कि आपकी सजगता और सहयोग का परिणाम है, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आने वाले समय में सुमेरपुर विकास के मामले में पूरे राजस्थान में आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनेगा। क्षेत्र के विधायक द्वारा इस तरह सार्वजनिक रूप से पुस्तिका जारी कर दो साल का हिसाब देने की जनता ने सराहना की। कार्यक्रम के समापन के बाद मंत्री कुमावत ने मौके पर ही लोगों के अभाव-अभियोग सुने और अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान हिंदू नववर्ष पर प्रकाशित कैलेंडर का भी वितरण किया गया।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष व प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य करण सिंह नेतरा, पाली डेयरी के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, एसडीएम कालूराम कुम्हार, किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह गलथनी, नगरपालिका के पूर्व चैयरमैन अनोप सिंह राठौड़, पुलिस उप अधीक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत, वरिष्ठ भाजपा नेता जयंती लाल जैन, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष चर्तुभुज शर्मा, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट, सांडेराव के अध्यक्ष जगत सिंह, सुमेरपुर नगर मण्डल अध्यक्ष रविकांत रावल, पूर्व मंडल अध्यक्ष महेंद्र माली, बांकली मंडल अध्यक्ष हनुवंत सिंह, मन की बात कार्यक्रम के जिला संयोजक शिवराज सिंह बिठिया, पूर्व मंडल अध्यक्ष मांगीलाल सुथार सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

    दिल्ली-एनसीआर में बारिश और आंधी से मिली राहत, भीषण गर्मी के बीच मौसम ने बदला मिजाज

    Yugcharan News / 23 May 2026 राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शनिवार सुबह हुई बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत दी। पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं के कारण दिल्ली-एनसीआर के लोग परेशान थे, लेकिन सुबह अचानक बदले मौसम ने वातावरण को कुछ हद तक ठंडा कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी के कई हिस्सों में हल्की बारिश, धूल भरी आंधी और गरज के साथ बूंदाबांदी दर्ज की गई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हुई मौसमीय गतिविधियों के कारण दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में यह बदलाव देखने को मिला। विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और हवा की दिशा में बदलाव की वजह से कुछ समय के लिए तापमान में गिरावट दर्ज की गई। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश शनिवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में तेज हवाएं चलीं, जिससे लोगों को तपती गर्मी से राहत महसूस हुई। मौसम विभाग के अनुसार कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास दर्ज की गई। धूल भरी आंधी के कारण कुछ समय के लिए दृश्यता भी प्रभावित हुई। बारिश और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में मौसम अचानक बदल गया। सुबह के समय सड़कों पर लोगों को अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण देखने को मिला, जबकि पिछले कई दिनों से राजधानी में तापमान लगातार 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था। सोशल मीडिया पर भी दिल्ली की बारिश और ठंडी हवाओं के वीडियो तेजी से साझा किए गए। कई लोगों ने इसे “भीषण गर्मी से राहत” बताया, जबकि कुछ लोगों ने मौसम में इस अचानक बदलाव को सुखद अनुभव कहा। गर्मी से बेहाल थे दिल्ली-एनसीआर के लोग दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र पिछले कई दिनों से गंभीर गर्मी की चपेट में थे। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजधानी का अधिकतम तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया गया था। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। विशेष रूप से दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था। सड़क किनारे काम करने वाले मजदूर, डिलीवरी कर्मचारी, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और दैनिक यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई अस्पतालों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को लगातार पानी पीने, धूप से बचने और दोपहर के समय बाहर कम निकलने की सलाह दी थी। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग और पानी की खपत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने दी आगे की चेतावनी हालांकि शनिवार सुबह की बारिश से राहत मिली, लेकिन मौसम विभाग ने साफ किया है कि गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। IMD के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान फिर बढ़ सकता है और दिल्ली में हीटवेव जैसी स्थिति दोबारा देखने को मिल सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल हवा की दिशा बदलने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन राजस्थान और थार मरुस्थल की तरफ से गर्म हवाएं दोबारा सक्रिय हो सकती हैं। इसके चलते तापमान एक बार फिर 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि मई के अंतिम सप्ताह तक गर्मी का असर बना रह सकता है। हालांकि जून की शुरुआत में प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों ने बताई मौसम बदलने की वजह मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ दिनों तक राजस्थान क्षेत्र से आने वाली शुष्क और गर्म हवाओं के कारण दिल्ली का तापमान तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन अब हवा की दिशा बदलने और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते वातावरण में नमी बढ़ी है, जिससे बारिश और गरज के साथ मौसम में बदलाव आया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की मौसमी गतिविधियां गर्मी के मौसम में अस्थायी राहत तो देती हैं, लेकिन लंबे समय तक तापमान कम रहने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। लोगों ने ली राहत की सांस सुबह की बारिश के बाद दिल्ली के कई पार्कों, बाजारों और सड़कों पर लोगों को मौसम का आनंद लेते देखा गया। कुछ लोग छतों और बालकनियों से बारिश का नजारा लेते नजर आए, जबकि कई इलाकों में बच्चों को हल्की बारिश में खेलते हुए देखा गया। दफ्तर जाने वाले लोगों ने भी मौसम में आए बदलाव को राहत भरा बताया। सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाले यात्रियों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की तुलना में शनिवार की सुबह अपेक्षाकृत आरामदायक रही। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि गर्मी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को धूप से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है। राजधानी में बढ़ती गर्मी चिंता का विषय विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में हर साल बढ़ती गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। पर्यावरणीय बदलाव, शहरीकरण, कम होते हरित क्षेत्र और प्रदूषण को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया जा रहा है। हाल के वर्षों में राजधानी में गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की घटनाएं बढ़ी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में अत्यधिक गर्मी और अनियमित मौसम की घटनाएं और बढ़ सकती हैं, जिसके लिए शहरों को बेहतर तैयारी की जरूरत होगी।   फिलहाल दिल्लीवासियों को शनिवार सुबह की बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी साफ संकेत दे रही है कि गर्मी का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है।

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी, निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार पर

      Yugcharan News / 23 May 2026 देशभर में सोने की कीमतों में इस सप्ताह लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय तनाव और डॉलर की चाल के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी के दाम प्रभावित हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिसके चलते निवेशकों और आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। हालिया बाजार आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में अलग-अलग शहरों और ज्वेलरी ब्रांड्स के अनुसार बदलाव दर्ज किया गया। कई बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए अपने रेट्स में संशोधन किया है। वैश्विक हालात का असर भारतीय बाजार पर विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार में सोने की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ती रुचि ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। जब भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर भारत के सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिलता है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर नीतियों को लेकर जारी अटकलों ने भी सोने की कीमतों में तेजी और गिरावट दोनों की स्थिति पैदा की है। डॉलर मजबूत होने पर अक्सर सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है, जबकि वैश्विक जोखिम बढ़ने पर सोना फिर से मजबूत होता दिखाई देता है। 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड के दामों में बदलाव सर्राफा बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस सप्ताह 22 कैरेट सोने के दाम कई शहरों में लगभग ₹14,600 से ₹14,700 प्रति ग्राम के आसपास बने रहे, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत इससे अधिक दर्ज की गई। हालांकि शहर, टैक्स और मेकिंग चार्ज के आधार पर कीमतों में अंतर देखने को मिला। भारतीय बुलियन एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी दरों में भी विभिन्न कैरेट श्रेणियों के अनुसार बदलाव दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी अंतरराष्ट्रीय हलचल भी भारतीय बाजार में प्रति ग्राम कीमत पर असर डालती है। चांदी की कीमतों में भी तेज हलचल सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी इस सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। बाजार जानकारों का मानना है कि चांदी की कीमतें औद्योगिक मांग और कमोडिटी बाजार की चाल से ज्यादा प्रभावित होती हैं। कुछ कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि बाद में बाजार में आंशिक सुधार भी देखा गया। निवेशकों का मानना है कि चांदी में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक देखने को मिलता है। खरीदारों को सतर्क रहने की सलाह विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि आभूषण खरीदने से पहले विभिन्न शहरों और ज्वेलरी ब्रांड्स के रेट्स की तुलना जरूर करें। स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और हॉलमार्किंग शुल्क के कारण एक ही दिन में अलग-अलग दुकानों पर कीमतों में अंतर हो सकता है। इसके साथ ही ग्राहकों को हॉलमार्क प्रमाणित आभूषण खरीदने और बिल लेना सुनिश्चित करने की भी सलाह दी गई है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि सोने की बढ़ती कीमतों के बीच नकली या बिना प्रमाणित उत्पादों का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में केवल विश्वसनीय और अधिकृत विक्रेताओं से खरीदारी करना सुरक्षित माना जाता है। निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना हुआ है सोना बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कई निवेशक अब भी सोने को दीर्घकालिक सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दौर में सोना निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में मदद करता है। हालांकि वित्तीय विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल अल्पकालिक तेजी देखकर निवेश निर्णय नहीं लेने चाहिए। निवेशकों को अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और दीर्घकालिक योजनाओं को ध्यान में रखते हुए ही सोने में निवेश करना चाहिए। ऑनलाइन निवेश मंचों और सोशल मीडिया पर भी हाल के दिनों में सोने की खरीद, एक्सचेंज और निवेश रणनीतियों को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं। कई उपभोक्ताओं ने ज्वेलरी एक्सचेंज, कटौती और मेकिंग चार्ज से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। आने वाले दिनों में बनी रह सकती है अस्थिरता बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक घटनाओं से प्रभावित होती रहेंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है या डॉलर में बड़ी हलचल होती है, तो भारतीय बाजार में भी कीमतों में बदलाव तेज हो सकता है। इस बीच निवेशकों और खरीदारों की नजर अब आगामी आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों पर बनी हुई है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में बाजार काफी संवेदनशील बना हुआ है और कीमतों में रोजाना बदलाव देखने को मिल सकता है।