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    महारानी महाविद्यालय में ओरिएंटेशन और महिला सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    जयपुर। विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नवप्रवेशित छात्राओं के लिए सावित्री भारतीय सभागार में 'अभिमूखीकरण' (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस के सहयोग से महिला सुरक्षा हेतु जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन भी संपन्न हुआ। ​कार्यक्रम का शुभारंभ एवं स्वागत ​कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और कुलगीत के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नूपुर माथुर ने नवप्रवेशित छात्राओं का स्वागत करते हुए उन्हें कॉलेज के गौरवशाली इतिहास, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली से अवगत कराया। ​अपने संबोधन में प्राचार्या ने: ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी। ​एनसीसी (NCC) एवं एनएसएस (NSS) इकाइयों के बारे में बताया। ​विभिन्न सांस्कृतिक व साहित्यिक समितियों और छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु उपलब्ध शैक्षणिक व सह-शैक्षणिक अवसरों पर विस्तृत प्रकाश डाला। ​अकादमिक मार्गदर्शन ​उप-प्राचार्या डॉ. चंद्राणी सेन ने छात्राओं को महाविद्यालयी जीवन, सेमेस्टर प्रणाली, परीक्षा व्यवस्था, उपस्थिति नियम, इंटर्नशिप तथा स्नातक अध्ययन के दौरान उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। ​महिला सुरक्षा जागरूकता एवं हेल्पलाइन ​ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान राजस्थान पुलिस की ओर से सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) श्री आदित्य पूनिया ने छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने 'राजकॉप सिटीजन ऐप' और 'कालिका यूनिट' के बारे में विस्तार से समझाया। ​इसके अतिरिक्त: ​ज्योति नगर थानाधिकारी गुंजन सोनी ने छात्राओं को महिला हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए और किसी भी आपात स्थिति में इनका उपयोग करने का सुझाव दिया। ​कार्यक्रम में अशोक नगर थानाधिकारी श्री मुरारी लाल शर्मा भी उपस्थित रहे। ​प्रमुख उपस्थितियाँ ​इस अवसर पर उप-प्राचार्या डॉ. चंद्राणी सेन, डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. नीतू कच्छवा, डॉ. रश्मि बुंदेल, चीफ रेक्टर डॉ. तारावती मीना, चीफ प्रॉक्टर डॉ. भारती चौहान, डॉ. लक्ष्मी सहित विभिन्न विषयों के स्थानीय प्रभारी, रेक्टर, प्रॉक्टर, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में नवप्रवेशित छात्राएं उपस्थित रहीं।

    राजकीय महाविद्यालय जयपुर में 'गुरु वंदन' कार्यक्रम का भव्य आयोजन

    जयपुर, राजकीय महाविद्यालय, जयपुर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) की महाविद्यालय इकाई के तत्वावधान में 'गुरु वंदन' कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. रविकांत शर्मा की अध्यक्षता और मुख्य अतिथि प्रोफेसर ओमप्रकाश पारीक के आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यास की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। गुरु-शिष्य परंपरा ही भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा: डॉ. रविकांत शर्मा स्वागत उद्बोधन देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविकांत शर्मा ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों में निहित गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान की महिमा सदियों से प्रासंगिक रही है और समाज को सही दिशा देने का कार्य करती है। वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत विषय प्रवर्तन करते हुए प्रोफेसर रणजीत सिंह राठौड़ ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गुरु वंदन कार्यक्रम की सार्थकता रेखांकित की। साथ ही उन्होंने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा वर्ष भर आयोजित किए जाने वाले विविध रचनात्मक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। रामचरितमानस व भगवद्गीता के उदाहरणों से समझाया गुरु का स्थान मुख्य वक्ता प्रोफेसर ओमप्रकाश पारीक ने अपने संबोधन में रामचरितमानस और भगवद्गीता के कई प्रसंगों का उल्लेख करते हुए गुरु-शिष्य संबंधों की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि एक श्रेष्ठ शिष्य बनने के लिए प्रपन्नता (समर्पण), शरणागति और जिज्ञासु प्रवृत्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जीवन की प्रकृति के अनुसार चार पुरुषार्थों की शिक्षा के माध्यम से गुरु द्वारा जीवन के परम उद्देश्य को प्राप्त करने का मार्ग स्पष्ट किया। विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की रही सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में छात्रा निकिता चौधरी और माही ने भी अपने विचार व्यक्त किए और गुरुजनों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. ललिता शर्मा द्वारा किया गया। अंत में स्थानीय महाविद्यालय इकाई सचिव डॉ. रजनी मीणा ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।  

    छात्र नेता शुभम रेवाड अनिश्चितकालीन भूख लाल पर बैठे हैं आज भूख हड़ताल का सातवां दिन

    आज बुधवार को राजस्थान विश्वविद्यालय गया तो मैं देखा की राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र अलग-अलग दो टेंटोमें बैठे हुए हैं। एक टेंट में छात्र संघ के चुनाव करवाने सहित अन्य मांगों को लेकर 16 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं दूसरे टेंट में छात्र नेता शुभम रेवाड अनिश्चितकालीन भूख लाल पर बैठे हैं आज भूख हड़ताल का सातवां दिन है वे बिल्कुल ही कमजोर होते जा रहे हैं। मैंने छात्रों के धरने एवं मांगों का समर्थन किया। किसी भी संस्था या संगठन का चुनाव करना करवाना जनतांत्रिक अधिकार है। मैं राज्य सरकार से जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग करता हूं साथ ही विश्वविद्यालय से चुनाव कराने के लिए पहल करने की मांग करता हूं। मोहम्मद मुस्तफा पूर्व अध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय सहायक कर्मचारी संघ जयपुर  

    देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली में किया संतों का सम्मान, गुरुओं का सम्मान

    पाली। देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश में एक अनूठी और भव्य पहल की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विभाग द्वारा संपूर्ण राजस्थान में 516 पूज्य संतों और महंतों का सम्मान किया गया। इसी राष्ट्र-व्यापी और सांस्कृतिक संरक्षण की कड़ी में पाली जिले में भव्य "गुरु वंदन कार्यक्रम" का आयोजन हुआ, जिसमें देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने स्वयं विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों का दौरा कर संतों का अभिनंदन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विशेष रूप से प्रेषित ‘‘गुरू वंदन संदेश’’ संतों को भेंट किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। त्यागी आश्रम बूसी में संत पुष्करदास महाराज का अभिनंदन कार्यक्रम के तहत मंत्री कुमावत बूसी स्थित प्रसिद्ध त्यागी आश्रम पहुंचे। वहां आयोजित संत सम्मान समारोह में उन्होंने परम पूज्य संत श्री 1008 पुष्करदास महाराज का भव्य स्वागत किया। मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया ‘‘गुरू वंदन संदेश’’, श्रीफल (नारियल), शाल, दुपट्टा, मिठाई और 2100 रुपए की नकद राशि भेंट कर महाराज श्री का आशीर्वाद लिया। बालराई के धार्मिक स्थलों पर पहुंचे मंत्री इसके बाद देवस्थान मंत्री ग्राम पंचायत बालराई पहुंचे। वहां उन्होंने डोवेश्वर महादेव महाराज एवं श्री श्री 1008 कुबाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर के पंडित बालुदास वैष्णव एवं पंडित जोगाराम पुजारी को श्रीफल, शॉल तथा मुख्यमंत्री का शुभकामना-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, कुमावत ने सुमेरपुर स्थित साकेत आश्रम पहुंचकर परम पूज्य श्री श्री 1008 रामानंद सरस्वती महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात श्री कुमावत ने सुमेरपुर स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में महादेव के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर के पुजारी अशोक पंडित को शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं मिठाई भेंट कर सम्मान किया। साथ ही मुख्यमंत्री की ओर से प्रेषित शुभकामना-पत्र प्रदान कर उन्हें गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। सुमेरपुर के कार्यक्रमों में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष अनोप सिंह राठौड़, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगर मण्डल अध्यक्ष रविकांत रावल, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र माली, सांडेराव मण्डल अध्यक्ष मुकेश मोदी, समाजसेवी नटवर रामीणा, साकेत आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष मदन सिंह राजपुरोहित, संरक्षक प्रेम सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा इन कार्यक्रमों में किसान केसरी भंवर चौधरी, सेवानिवृत बीईईओ रामलाल कुमावत, खौड़ मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह खरोकड़ा, खुनी गुड़ा के बूथ अध्यक्ष गंगा सिंह, सहायक आयुक्त, जोधपुर ओमप्रकाश पालीवाल, प्रशासक जोगाराम कुमावत, समाजसेवी मुकेश भाटी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मेड़तिया, पूर्व मण्डल अध्यक्ष मुकेश सीरवी, प्रशासक पूनम सिंह राजपुरोहित आदि मौजूद रहे। देवस्थान मंत्री कुमावत ने सिरोही जिले के सानवाड़ा में श्रीपति धाम नंदन वन पहुंचकर संत सम्मान कार्यक्रम में पूज्य संत श्री गोविंद वल्लभदास महाराज का सम्मान किया। इस दौरान विधायक श्री समाराम गरासिया, जिला अध्यक्ष भाजपा सिरोही श्रीमती रक्षा भंडारी, जिला महामंत्री श्री गणपत सिंह, पूर्व उप जिला प्रमुख श्री नवल किशोर रावल उपस्थित रहे।   भारतीय संस्कृति और संतों के योगदान की सराहना इस मौके पर मंत्री कुमावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। संत-महात्मा समाज को सही दिशा दिखाने और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजने के लिए पूरी तरह संकल्पित है, और यह आयोजन इसी सम्मान की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ राजा-महाराजाओं के मुकुट भी हमेशा संतों और गुरुओं के चरणों में झुकते आए हैं। हमारे इतिहास में जब-जब समाज का नैतिक पतन हुआ, जब-जब मानवता संकट में आई, तब-तब किसी न किसी संत या गुरु ने आकर समाज को सही दिशा दिखाई है। श्री कुमावत ने कहा कि 'गुरु वंदन कार्यक्रम' इसी महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है। गुरु वंदन केवल एक औपचारिकता या सिर झुकाना नहीं है। गुरु वंदन का वास्तविक अर्थ है—गुरु के बताए सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना। गुरु वह प्रकाश पुंज है जो हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उजाला भरता है। उन्होंने कहा कि आज का समाज जब भौतिकता की दौड़ में अपनी शांति खो रहा है, तब संतों और गुरुओं के विचार ही हमें मानसिक शांति और जीवन जीने का सही उद्देश्य सिखाते हैं। संत निस्वार्थ भाव से पूरे समाज के कल्याण की कामना करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।  

    देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली में किया संतों का सम्मान

    पाली। देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश में एक अनूठी और भव्य पहल की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विभाग द्वारा संपूर्ण राजस्थान में 516 पूज्य संतों और महंतों का सम्मान किया गया। इसी राष्ट्र-व्यापी और सांस्कृतिक संरक्षण की कड़ी में पाली जिले में भव्य "गुरु वंदन कार्यक्रम" का आयोजन हुआ, जिसमें देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने स्वयं विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों का दौरा कर संतों का अभिनंदन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विशेष रूप से प्रेषित ‘‘गुरू वंदन संदेश’’ संतों को भेंट किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। त्यागी आश्रम बूसी में संत पुष्करदास महाराज का अभिनंदन कार्यक्रम के तहत मंत्री कुमावत बूसी स्थित प्रसिद्ध त्यागी आश्रम पहुंचे। वहां आयोजित संत सम्मान समारोह में उन्होंने परम पूज्य संत श्री 1008 पुष्करदास महाराज का भव्य स्वागत किया। मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया ‘‘गुरू वंदन संदेश’’, श्रीफल (नारियल), शाल, दुपट्टा, मिठाई और 2100 रुपए की नकद राशि भेंट कर महाराज श्री का आशीर्वाद लिया। बालराई के धार्मिक स्थलों पर पहुंचे मंत्री इसके बाद देवस्थान मंत्री ग्राम पंचायत बालराई पहुंचे। वहां उन्होंने डोवेश्वर महादेव महाराज एवं श्री श्री 1008 कुबाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर के पंडित बालुदास वैष्णव एवं पंडित जोगाराम पुजारी को श्रीफल, शॉल तथा मुख्यमंत्री का शुभकामना-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, कुमावत ने सुमेरपुर स्थित साकेत आश्रम पहुंचकर परम पूज्य श्री श्री 1008 रामानंद सरस्वती महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात श्री कुमावत ने सुमेरपुर स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में महादेव के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर के पुजारी अशोक पंडित को शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं मिठाई भेंट कर सम्मान किया। साथ ही मुख्यमंत्री की ओर से प्रेषित शुभकामना-पत्र प्रदान कर उन्हें गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। सुमेरपुर के कार्यक्रमों में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष अनोप सिंह राठौड़, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगर मण्डल अध्यक्ष रविकांत रावल, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र माली, सांडेराव मण्डल अध्यक्ष मुकेश मोदी, समाजसेवी नटवर रामीणा, साकेत आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष मदन सिंह राजपुरोहित, संरक्षक प्रेम सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा इन कार्यक्रमों में किसान केसरी भंवर चौधरी, सेवानिवृत बीईईओ रामलाल कुमावत, खौड़ मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह खरोकड़ा, खुनी गुड़ा के बूथ अध्यक्ष गंगा सिंह, सहायक आयुक्त, जोधपुर ओमप्रकाश पालीवाल, प्रशासक जोगाराम कुमावत, समाजसेवी मुकेश भाटी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मेड़तिया, पूर्व मण्डल अध्यक्ष मुकेश सीरवी, प्रशासक पूनम सिंह राजपुरोहित आदि मौजूद रहे। देवस्थान मंत्री कुमावत ने सिरोही जिले के सानवाड़ा में श्रीपति धाम नंदन वन पहुंचकर संत सम्मान कार्यक्रम में पूज्य संत श्री गोविंद वल्लभदास महाराज का सम्मान किया। इस दौरान विधायक श्री समाराम गरासिया, जिला अध्यक्ष भाजपा सिरोही श्रीमती रक्षा भंडारी, जिला महामंत्री श्री गणपत सिंह, पूर्व उप जिला प्रमुख श्री नवल किशोर रावल उपस्थित रहे।   भारतीय संस्कृति और संतों के योगदान की सराहना इस मौके पर मंत्री कुमावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। संत-महात्मा समाज को सही दिशा दिखाने और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजने के लिए पूरी तरह संकल्पित है, और यह आयोजन इसी सम्मान की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ राजा-महाराजाओं के मुकुट भी हमेशा संतों और गुरुओं के चरणों में झुकते आए हैं। हमारे इतिहास में जब-जब समाज का नैतिक पतन हुआ, जब-जब मानवता संकट में आई, तब-तब किसी न किसी संत या गुरु ने आकर समाज को सही दिशा दिखाई है। श्री कुमावत ने कहा कि 'गुरु वंदन कार्यक्रम' इसी महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है। गुरु वंदन केवल एक औपचारिकता या सिर झुकाना नहीं है। गुरु वंदन का वास्तविक अर्थ है—गुरु के बताए सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना। गुरु वह प्रकाश पुंज है जो हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उजाला भरता है। उन्होंने कहा कि आज का समाज जब भौतिकता की दौड़ में अपनी शांति खो रहा है, तब संतों और गुरुओं के विचार ही हमें मानसिक शांति और जीवन जीने का सही उद्देश्य सिखाते हैं। संत निस्वार्थ भाव से पूरे समाज के कल्याण की कामना करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।  

    अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर पोस्टर एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन, "कलाम नवाचार एवं सतत विकास कार्यशाला-2026" का भव्य समापन

    जयपुर। ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय कन्या महाविद्यालय, गंगापोल, जयपुर में पाँच दिवसीय "कलाम नवाचार एवं सतत विकास कार्यशाला-2026" के अंतिम दिवस अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर "टाइगर फेस्टिवल डे" का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन WWF-India, उदयपुर डिवीजन (राजस्थान) के संयुक्त सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ पंजीयन एवं किट वितरण से हुआ। इसके उपरांत छात्राओं के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता तथा टाइगर संरक्षण विषयक क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिनमें छात्राओं ने अत्यंत उत्साह, रचनात्मकता एवं जागरूकता के साथ भाग लिया। समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमंत पारीक ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संध्या यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राजस्थान पुलिस उपस्थित रहीं। कार्यशाला की पाँच दिवसीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रो. निधि माथुर, संयोजक, KIIC द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह में पोस्टर एवं क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा कार्यशाला के सफल आयोजन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों एवं आयोजन दल का भी अभिनंदन किया गया। मुख्य अतिथि ने छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करते हुए प्रकृति संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। प्राचार्य प्रो. हेमंत पारीक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह पाँच दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता, सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में अत्यंत सफल रही। उन्होंने सभी सहयोगी संस्थाओं, विशेषज्ञ वक्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों तथा महाविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता शर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजकुमार बैरवा ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। समूह छायाचित्र के साथ पाँच दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन हुआ।  

    -आज का भारत सशक्त, साहसी, महत्वाकांक्षी व निडर दिखता है, और इन्ही कारणों से भारत आज भी “सारे जहाँ से अच्छा” दिखता है- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जेईसीआरसी ओरिएंट 2026

    -जेयू ओरिएंट 2026 में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, पद्मश्री साइना नेहवाल, अभिनेता विक्रांत मैसी और पॉल ओपेनहाइमर ने विद्यार्थियों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का दिया संदेश जयपुर, कॉलेज का पहला दिन हर छात्र के लिए खास होता है। नए दोस्त, नया कैंपस, नई उम्मीदें और भविष्य को लेकर कई सवाल। लेकिन कुछ शुरुआतें सिर्फ एक नए सैशन का पहला दिन नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की सोच और दिशा तय कर जाती हैं। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में शुरू हुए 'ओरिएंट 2026' का पहला दिन कुछ ऐसा ही रहा। 6972 स्टूडेंट्स ने अपने कॉलेज जीवन की शुरुआत ऐसे मंच से की, जहाँ खेल, अंतरिक्ष, सिनेमा, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अकादमिक नेतृत्व से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। जेईसीआरसी की छात्राओं के साथ कोर्ट पर उतरीं साइना नेहवाल, कहा— बैडमिंटन में आगे बढ़ने वाली हर बेटी को मेरा पूरा साथ मिलेगा पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित भारत की पहली विश्व नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के साथ यादगार समय बिताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की 50 से अधिक छात्राओं के साथ बैडमिंटन कोर्ट पर मैच खेला और उनका उत्साह बढ़ाया। छात्राओं के साथ खेलते हुए उन्होंने खेल की बारीकियां भी साझा कीं और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर साइना ने कहा कि यदि बैडमिंटन में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाली किसी भी छात्रा को कभी उनकी जरूरत पड़े, तो वह हमेशा उसके साथ खड़ी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत होती है, तो उसके उद्घाटन के लिए वह स्वयं जरूर आएंगी और इस पहल को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देंगी। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साइना ने कहा कि सफलता किसी एक बड़े मौके से नहीं, बल्कि रोज़ की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से मिलती है। उन्होंने अपने माता-पिता को अपना पहला रोल मॉडल बताते हुए विद्यार्थियों से अपने सपनों को प्राथमिकता देने, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने का संदेश दिया। सिर्फ 8 मिनट में 28,500 किमी प्रति घंटे की रफ्तार... शुभांशु शुक्ला ने सुनाया अंतरिक्ष सफर का रोमांच अशोक चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के ओरिएंट 2026 में विद्यार्थियों को अपने अंतरिक्ष मिशन की ऐसी झलक दिखाई, जिसने पूरे सभागार को रोमांच और उत्साह से भर दिया। भारत के 75 वर्षों के अंतरिक्ष इतिहास में अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले वे केवल दूसरे भारतीय हैं। उन्होंने लगभग 30 मिनट की विशेष प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने मिशन से जुड़े कई दुर्लभ वीडियो और तस्वीरें दिखाईं, जो सामान्य तौर पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इन वीडियो में उन्होंने अंतरिक्ष तक की अपनी यात्रा, स्पेसक्राफ्ट के भीतर के अनुभव, भारहीनता में जीवन और अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली पृथ्वी के अद्भुत दृश्य साझा किए। उनकी इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति गहरी जिज्ञासा और उत्साह पैदा कर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किस तरह रॉकेट ने सिर्फ आठ मिनट में शून्य से लगभग 28,500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ते हुए उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचाया। इस दौरान शरीर पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव (जी-फोर्स) और शरीर की प्रतिक्रियाओं का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह महसूस होता है कि ऊपर क्या है और नीचे क्या है, इसका अंदाज़ा ही नहीं लग पाता। गुरुत्वाकर्षण की दिशा का एहसास पूरी तरह बदल जाता है और शरीर का संतुलन (ओरिएंटेशन) कुछ समय के लिए पूरी तरह भ्रमित हो जाता है। शुभांशु शुक्ला ने अपनी वीडियो के माध्यम से यह भी दिखाया कि भारहीनता (ज़ीरो ग्रैविटी) में शरीर किस तरह अलग व्यवहार करता है। उन्होंने बताया कि 420 टन वजनी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी वहां इतना हल्का महसूस होता है कि हजारों किलोग्राम वजनी वस्तु को भी हल्के से हाथ लगाने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में शरीर का तरल पदार्थ ऊपर की ओर खिसकने लगता है, जिससे चेहरा सामान्य से थोड़ा बड़ा या फूला हुआ दिखाई देता है, कद भी कुछ सेंटीमीटर तक बढ़ जाता है और हृदय को पृथ्वी की तुलना में रक्त पंप करने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने इसे विज्ञान का अद्भुत अनुभव बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष में हर पल कुछ नया सीखने और महसूस करने का अवसर मिलता है। इन दुर्लभ वीडियो और रोचक किस्सों ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष से पूरी पृथ्वी एक परिवार की तरह दिखाई देती है, जिससे मानवता और साझा जिम्मेदारी का भाव और भी मजबूत होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, असफलताओं से सीखने और बड़े सपने देखने का आह्वान किया। नए भारत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "आज का भारत शक्तिशाली, साहसी, महत्वाकांक्षी और निडर है। यही आत्मविश्वास भारत को आज भी 'सारे जहाँ से अच्छा' बनाता है।" नेशनल अवार्ड विजेता अभिनेता विक्रांत मैसी ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल के साथ मंच पर एक विशेष संवाद में अपने जीवन और करियर के अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती। अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कॉफी शॉप में भी काम किया, लेकिन अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और निरंतर प्रयासों ने उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। AI सब बदल सकता है, लेकिन इंसान का इंसान से जुड़ाव कभी नहीं बदलेगा" — विक्रांत मैसी जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल के साथ मंच पर हुए विशेष संवाद में नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेता विक्रांत मैसी ने विद्यार्थियों से अपने संघर्ष, करियर और जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कॉफी शॉप में भी काम किया, लेकिन कभी अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती, बल्कि धैर्य, लगातार मेहनत और खुद पर विश्वास से हासिल होती है। संवाद के दौरान अर्पित अग्रवाल ने विक्रांत मैसी से पूछा कि आज जब एआई, इंटरनेट और नई तकनीकें तेजी से बदल रही हैं, तो ऐसी कौन-सी बात है जिसे विद्यार्थी अपनी स्टडी टेबल या कमरे की दीवार पर लिखकर रखें, क्योंकि वह समय के साथ कभी नहीं बदलेगी। इस पर विक्रांत ने कहा, "दुनिया चाहे जितनी बदल जाए, तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदलेगी और मुझे उम्मीद है कि वह कभी नहीं बदलेगी—वह है इंसान का इंसान से जुड़ाव (Human to Human Connection)।" उन्होंने कहा कि इंसान की महसूस करने, संवेदनशील होने और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की क्षमता किसी भी तकनीक या एआई से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यही मानवीय जुड़ाव इस दुनिया को बेहतर बनाए रखने की सबसे बड़ी ताकत है। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए विक्रांत मैसी ने कहा कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल नाम, शोहरत या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मन की शांति, परिवार का साथ और जीवन में संतुलन से है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सफलता की परिभाषा स्वयं तय करने, असफलताओं से सीखने और हर परिस्थिति में अपने सपनों के प्रति ईमानदार बने रहने का संदेश दिया। अर्पित अग्रवाल और विक्रांत मैसी के बीच युवाओं के सपनों, करियर, संघर्ष और बदलते भारत में अवसरों पर हुई इस खुली बातचीत को विद्यार्थियों ने बेहद पसंद किया और पूरे सत्र के दौरान तालियों की गूंज से उनका उत्साहवर्धन किया। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन ओ.पी. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का आधार केवल शिक्षा नहीं, बल्कि परिवार से मिले संस्कार, मजबूत मूल्य, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण है। उन्होंने युवाओं से आत्ममंथन करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जेईसीआरसी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल की आगामी शुरुआत की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ समाज को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने इसे जेईसीआरसी की समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के हेड – डिजिटल स्ट्रेटेजी धीमंत अग्रवाल ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष ओरिएंट 2026 में देश के 28 राज्यों से 6,972 विद्यार्थी जेईसीआरसी परिवार का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि यह विविधता जेईसीआरसी की राष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है और यह भी साबित करती है कि जयपुर तेजी से देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टि, निरंतर सीखने की जिज्ञासा और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरक संवाद विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, व्यावसायिक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देते हैं तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. विक्टर गंभीर ने कहा कि जेईसीआरसी आज नई शिक्षा नीति के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू कर चुका है। अब विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार मेजर और माइनर विषयों का चयन कर सकते हैं तथा पहले वर्ष से ही उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं।  

    जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, दिल्ली पुलिस पर अपहरण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

      युगचरण न्यूज़ / 29 जुलाई 2026 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन से जुड़ा एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने वाले जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें कथित तौर पर जबरन उठाया गया, कई घंटों तक पूछताछ की गई और बाद में उत्तराखंड के देहरादून के पास छोड़ दिया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके परिवार के सदस्यों पर भी दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस एजेंसियों की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका मंगलवार को दायर याचिका में जुनैद मलिक ने कहा कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार, इसी गतिविधि के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने उन्हें कथित रूप से अपनी हिरासत में लिया, भोजन की व्यवस्था और उसके लिए प्राप्त धन के स्रोत के बारे में पूछताछ की तथा बाद में उन्हें देहरादून के समीप छोड़ दिया। इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी। परिवार को भी परेशान करने का आरोप सुप्रीम कोर्ट में पेश याचिका के अनुसार, जुनैद मलिक ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के कुछ अधिकारियों ने उनके परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की और उन पर दबाव बनाया कि वे जुनैद को आंदोलन से दूर रहने और पुलिस के सामने उपस्थित होने के लिए कहें। याचिका में यह भी कहा गया कि परिवार के अन्य सदस्यों, जिनमें उनकी विवाहित बहन का परिवार भी शामिल है, से कथित रूप से पूछताछ की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है और इसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखा पक्ष सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने केवल आंदोलन में भोजन उपलब्ध कराया है तो उसके आधार पर उसके परिवार पर दबाव बनाना या पूछताछ करना उचित नहीं माना जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य की शक्तियों का उपयोग किसी नागरिक को डराने या उसके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग से रोकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। अदालत से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। भोजन व्यवस्था को लेकर उठे सवाल याचिका के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर भोजन वितरण के लिए उपयोग किए गए धन के स्रोत के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी। जुनैद मलिक का कहना है कि उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की सहायता के उद्देश्य से भोजन की व्यवस्था की थी। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है कि यदि पूछताछ हुई तो उसका आधार क्या था। हाल के दिनों में बढ़ा कानूनी विवाद जंतर-मंतर और 'चलो संसद' मार्च से जुड़े घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग, सोशल मीडिया पोस्ट, विभिन्न एफआईआर और न्यायालय में दाखिल याचिकाओं को लेकर कई घटनाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में यह नई याचिका भी उस व्यापक कानूनी और प्रशासनिक विवाद का हिस्सा बन गई है, जिसकी सुनवाई अलग-अलग अदालतों में जारी है। अदालत में क्या मांग की गई? याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और यदि किसी प्रकार की अवैध कार्रवाई हुई हो तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं। याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में उनके तथा उनके परिवार के सदस्यों के साथ किसी प्रकार की कथित प्रताड़ना या दबाव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस या उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से याचिका में लगाए गए सभी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई थी। ऐसे मामलों में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इस मामले में नोटिस जारी करती है तो संबंधित एजेंसियों को अपने पक्ष में जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद न्यायालय उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगा। लोकतांत्रिक अधिकार और कानून का संतुलन हाल के छात्र आंदोलनों ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। एक ओर प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाता है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार भी प्राप्त है। इसी कारण ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां आरोपों और सरकारी कार्रवाई दोनों की कानूनी कसौटी पर जांच की जाती है। आगे क्या? अब इस मामले में सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर रहेगी। अदालत यह तय करेगी कि याचिका में लगाए गए आरोपों पर किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है और क्या संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जाएगा। फिलहाल, जुनैद मलिक द्वारा लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। मामले के अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई, सरकारी जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे। युगचरण न्यूज़ इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर पाठकों को आगे की अपडेट से अवगत कराएगा।      

    दिल्ली पुलिस ने X से प्रधानमंत्री और संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटाने को कहा, यूज़र विवरण भी मांगा

    Yugcharan News / 29-07-2026 नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल के छात्र प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी निगरानी और कार्रवाई को और तेज कर दिया है। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को एक औपचारिक पत्र भेजकर ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने का अनुरोध किया है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक, अभद्र या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने संबंधित अकाउंट धारकों की पहचान से जुड़ी जानकारी भी मांगी है ताकि आवश्यकता पड़ने पर आगे की जांच की जा सके। यह कार्रवाई हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े ऑनलाइन कंटेंट की समीक्षा के बाद सामने आई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को भेजा गया आधिकारिक पत्र जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने X को भेजे गए पत्र में उन पोस्टों और वीडियो को हटाने का अनुरोध किया है, जिनमें कथित रूप से प्रधानमंत्री तथा अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनी से अनुरोध किया है कि ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने के साथ-साथ संबंधित अकाउंट संचालकों की आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए ताकि जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून के दायरे में रहकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित सामग्री की समीक्षा के तहत उठाया गया है। किन जानकारियों की मांग की गई? दिल्ली पुलिस ने X से संबंधित खातों के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें उपयोगकर्ता का नाम, पता, ईमेल आईडी, संपर्क विवरण, लॉग-इन और लॉग-आउट रिकॉर्ड, पोस्ट प्रकाशित होने की तारीख और समय जैसी जानकारी शामिल बताई गई है। इसके अलावा पुलिस ने प्लेटफॉर्म से अनुरोध किया है कि संबंधित पोस्टों और वीडियो से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जांच में उपयोग किया जा सके। पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) की धारा 63(4) के तहत आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। छात्र आंदोलन के बाद बढ़ी निगरानी दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों और उसके बाद सामने आए ऑनलाइन कंटेंट की समीक्षा के बाद की गई है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियां साझा की गईं, जिनमें से कुछ की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सामग्री की जांच शुरू की और जिन पोस्टों को प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक माना गया, उनके संबंध में संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजे गए। लगातार सक्रिय है सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम दिल्ली Police ने कहा है कि उसकी साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग इकाइयां चौबीसों घंटे ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी पोस्ट में कानून का उल्लंघन, घृणा फैलाने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया जाता है। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी महत्वपूर्ण सार्वजनिक घटनाओं के दौरान नियमित रूप से अपनाई जाती है। हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उन शिकायतों के बाद की गई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि हाल के छात्र प्रदर्शनों और 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट साझा किए गए थे। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित सामग्री की जांच शुरू की गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। हालांकि यह जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर जोर साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ऑनलाइन जांच में डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। लॉग-इन विवरण, समय-सीमा, आईपी रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारी भविष्य में किसी भी जांच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य का काम कर सकती है। इसी कारण जांच एजेंसियां अक्सर सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित डेटा सुरक्षित रखने का अनुरोध करती हैं ताकि किसी भी डिजिटल साक्ष्य में बदलाव या नुकसान न हो। Meta से जुड़े विवाद के बाद बढ़ी चर्चा यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में Meta के प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक वीडियो हटाए जाने को लेकर भी विवाद हुआ था। केंद्रीय सरकार ने इस मामले में Meta के वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में कंपनी ने कहा कि तकनीकी त्रुटि (ग्लिच) के कारण संबंधित सामग्री गलती से हट गई थी और यह जानबूझकर नहीं किया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और आईटी नियमों के पालन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जिम्मेदारी विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आज लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके साथ कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं। भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं है। यदि किसी पोस्ट से हिंसा भड़कने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने, घृणा फैलाने या कानून का उल्लंघन होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। इसी प्रकार सोशल मीडिया कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे लागू कानूनों और न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करें। आगे क्या? फिलहाल दिल्ली पुलिस द्वारा X को भेजे गए पत्र के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस अनुरोध पर क्या कदम उठाता है। यदि प्लेटफॉर्म आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है, तो पुलिस संबंधित खातों और पोस्टों की जांच आगे बढ़ा सकती है। दूसरी ओर, डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा ऑनलाइन जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।   आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, सोशल मीडिया कंपनियों की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। यह घटनाक्रम एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी, कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

    सीपीआई(एम) का आरोप: दिल्ली पुलिस ने एसएफआई नेता ऐशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की, पुलिस ने कहा—पुराने मामले में नियमित कार्रवाई

    Yugcharan News / 29-07-2026 नई दिल्ली: छात्र आंदोलनों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राजधानी दिल्ली में एक नया विवाद सामने आया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने पार्टी मुख्यालय में प्रवेश कर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव ऐशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की। पार्टी का दावा है कि यह कार्रवाई हाल में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में उनकी कथित भागीदारी के कारण की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को अलग तरीके से पेश करते हुए स्पष्ट किया है कि यह किसी हालिया विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला नहीं था। पुलिस के अनुसार, अधिकारी एक पुराने गैर-जमानती मामले में अदालत के निर्देशों के तहत नियमित कानूनी प्रक्रिया के लिए पहुंचे थे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है, जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बताने का प्रयास कर रहा है, जबकि पुलिस इसे कानून के अनुसार की गई कार्रवाई बता रही है। पार्टी मुख्यालय पहुंची पुलिस, सीपीआई(एम) ने लगाए गंभीर आरोप सीपीआई(एम) के अनुसार, मंगलवार को पुलिस का एक दल पार्टी के केंद्रीय कार्यालय ए.के.जी. भवन पहुंचा और ऐशी घोष को हिरासत में लेने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि पुलिस बिना स्पष्ट कानूनी दस्तावेज दिखाए परिसर में प्रवेश करना चाहती थी, जिसका वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें कुछ नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस होती दिखाई देती है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सीपीआई(एम) का आरोप है कि यह कार्रवाई हाल के छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के कारण की गई, जबकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। जॉन ब्रिटास ने उठाए सवाल राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि जब पुलिस अधिकारियों से गिरफ्तारी वारंट या संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा गया, तब उन्होंने बताया कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर निर्देश मिले हैं। ब्रिटास के अनुसार, पुलिस ने यह भी कहा कि संबंधित मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और इस घटना के बीच समानताएं दिखाई देती हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एम.ए. बेबी ने कहा—लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निजी वाहनों में आई थी और कुछ अधिकारी वर्दी में भी नहीं थे। उनके अनुसार, पार्टी नेताओं द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद पुलिस वहां से लौट गई। बेबी ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ समय से ऐशी घोष की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। हालांकि इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की प्रतिक्रिया केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति रखने वालों के खिलाफ राज्य शक्ति का दुरुपयोग चिंताजनक है। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की असहमति को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। विजयन ने लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्रवाई किसी हालिया प्रदर्शन या राजनीतिक गतिविधि से संबंधित नहीं थी। पुलिस के अनुसार, जांच अधिकारी अदालत के निर्देशों के तहत एक पुराने गैर-जमानती मामले में नियमित प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि इसे हाल की घटनाओं से जोड़ना उचित नहीं होगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी तथा सभी आवश्यक कदम कानूनी प्रावधानों के तहत उठाए जाएंगे। पुराना मामला क्या है? उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2021 में बंग भवन के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। उसी मामले में न्यायालय की प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ रही है। हालांकि इस मामले की विस्तृत न्यायिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और अदालत में इसकी सुनवाई जारी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। एआई निगरानी को लेकर भी उठे थे सवाल हाल ही में ऐशी घोष ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस ने चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग किया। इस याचिका में निगरानी व्यवस्था और निजता के अधिकार से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे। हालांकि इस विषय पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी आना बाकी है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा। छात्र आंदोलन और बढ़ती राजनीतिक बहस देश में हाल के छात्र आंदोलनों के बाद कई राजनीतिक दलों ने कानून-व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की है। कुछ दलों का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। आगे क्या? फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। सीपीआई(एम) अपने आरोपों पर कायम है, जबकि दिल्ली पुलिस इसे अदालत से जुड़े पुराने मामले की नियमित कार्रवाई बता रही है। मामले की अगली सुनवाई न्यायालय में निर्धारित है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों के आधार पर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे प्रस्तुत कर रहे हैं।   विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलनों, डिजिटल निगरानी, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।

    दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्टों पर कार्रवाई तेज की, प्रधानमंत्री और सुरक्षा बलों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री को लेकर नोटिस जारी

      Yugcharan News / 29-07-2026 दिल्ली में हाल के छात्र प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर दिल्ली पुलिस ने निगरानी और कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) सहित कई ऑनलाइन खातों को नोटिस जारी कर उन पोस्टों और वीडियो के संबंध में जानकारी मांगी है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक या अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि किसी सामग्री में कानून का उल्लंघन या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने की संभावना पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई सोशल मीडिया खातों को जारी किए गए नोटिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया खातों, जिनमें कुछ समाचार पोर्टलों से जुड़े अकाउंट भी शामिल बताए जा रहे हैं, को नोटिस भेजकर संबंधित पोस्ट करने वाले व्यक्तियों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। हालांकि पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुल कितने खातों को नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की समीक्षा के बाद की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन खातों से कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री साझा की गई, उनके पीछे कौन लोग हैं और क्या उन पोस्टों से किसी कानून का उल्लंघन हुआ है। छात्र आंदोलन के बाद बढ़ाई गई निगरानी दिल्ली पुलिस के अनुसार, राजधानी में हुए छात्र प्रदर्शनों और उसके बाद हुई घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में सामग्री साझा की गई। इसी को देखते हुए साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीमें लगातार विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन साझा किए जा रहे वीडियो, तस्वीरों और टिप्पणियों की जांच इस दृष्टि से की जा रही है कि कहीं वे अफवाह फैलाने, भ्रामक जानकारी प्रसारित करने या सार्वजनिक शांति प्रभावित करने का कारण तो नहीं बन रही हैं। पुलिस के मुताबिक, यदि किसी पोस्ट में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे हटाने के लिए औपचारिक नोटिस भेजा जाता है। आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश भी दिए थे, जिनमें प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद कई पोस्ट और वीडियो संबंधित प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए हैं। हालांकि निगरानी की प्रक्रिया अभी भी जारी है और नए मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री भी कानून के दायरे में आती है और यदि कोई सामग्री सामाजिक सौहार्द या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करती है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। फर्जी सूचनाओं पर भी पुलिस की नजर दिल्ली पुलिस ने इससे पहले यह भी जानकारी दी थी कि छात्र आंदोलन से संबंधित कई भ्रामक दावे, अफवाहें और कथित रूप से फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए। पुलिस का दावा है कि उसने ऐसे सैकड़ों सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की है, जो कथित तौर पर भ्रामक जानकारी और डीपफेक सामग्री साझा कर रहे थे। इन मामलों की भी साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है और जांच प्रक्रिया जारी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के बीच संतुलन सोशल मीडिया पर कार्रवाई को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त एक महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन इसके साथ कुछ कानूनी सीमाएं भी निर्धारित की गई हैं। यदि किसी सामग्री से हिंसा भड़काने, घृणा फैलाने, गलत सूचना प्रसारित करने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका होती है, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती गतिविधियों के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। साइबर टीम लगातार कर रही है निगरानी दिल्ली पुलिस की साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग इकाइयों को इस पूरे मामले में सक्रिय रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी नई आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री की समय रहते पहचान की जा सके। जरूरत पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को सामग्री हटाने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। छात्र आंदोलन के बाद बढ़ी डिजिटल सक्रियता हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया विभिन्न पक्षों के लिए अपनी बात रखने का प्रमुख माध्यम बनकर सामने आया। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो, लाइव प्रसारण, प्रतिक्रियाएं और विभिन्न दावे बड़ी संख्या में ऑनलाइन साझा किए गए। इसके साथ ही कई प्रकार की अपुष्ट जानकारियां और विवादित सामग्री भी प्रसारित होने लगी, जिसके बाद प्रशासन ने डिजिटल निगरानी को और मजबूत किया। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में बड़े सार्वजनिक आंदोलनों के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारियों पर चर्चा और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी। आगे क्या? फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग प्रक्रिया जारी है। जिन खातों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनसे प्राप्त जवाबों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल उन मामलों में कार्रवाई करना है, जहां प्रथम दृष्टया कानून के उल्लंघन या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका दिखाई देती है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर कानूनी विशेषज्ञों, नागरिक समाज और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों की भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जांच के आधार पर किन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की जाती है और सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री को लेकर प्रशासन की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।      

    17 दिन में ही क्षतिग्रस्त हुआ ₹16 करोड़ का पुल, भारी बारिश के बाद संपर्क मार्ग धंसा, जांच के आदेश

    Yugcharan News / 29-07-2026 उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में निर्मित एक पुल के संपर्क मार्ग (एप्रोच रोड) के धंस जाने की घटना ने राज्य में सार्वजनिक अवसंरचना की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग ₹16 करोड़ की लागत से तैयार किया गया यह पुल उद्घाटन के महज 17 दिन बाद ही भारी बारिश के कारण प्रभावित हो गया। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है, लेकिन एप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा धंसने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घटना के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य या निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। भारी बारिश के बाद धंसा संपर्क मार्ग जानकारी के अनुसार, देहरादून के नंदा की चौकी क्षेत्र में स्थित पुल का उद्घाटन 12 जुलाई 2026 को किया गया था। मंगलवार सुबह हुई लगातार बारिश के बाद पुल से जुड़ा एप्रोच रोड अचानक धंस गया, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो गया और पुल का संपर्क देहरादून–पांवटा साहिब राष्ट्रीय मार्ग से टूट गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, रातभर हुई तेज बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे संपर्क मार्ग कमजोर होकर धंस गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक निरीक्षण में पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित दिखाई दे रही है और नुकसान केवल संपर्क मार्ग तक सीमित है। पिछले वर्ष बह गया था पुराना पुल यह पुल उस पुराने पुल के स्थान पर बनाया गया था, जो पिछले वर्ष सितंबर में आई भीषण बारिश और बाढ़ के दौरान बह गया था। उस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद क्षेत्र के लिए एक नए और मजबूत पुल के निर्माण का निर्णय लिया गया। नया पुल मूल रूप से अप्रैल 2026 तक तैयार होना था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के बाद इसका उद्घाटन जुलाई में किया गया। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई यह घटना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। सरकार ने दिए जांच के निर्देश घटना के बाद जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने तत्काल स्थिति का जायजा लिया। जिला मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि निर्माण कार्य, डिजाइन या निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में घटना के कारणों, तकनीकी पहलुओं और संभावित जिम्मेदारियों का उल्लेख करने को कहा गया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में किसी अधिकारी या निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यातायात पर पड़ा व्यापक असर संपर्क मार्ग धंसने के कारण देहरादून, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के बीच आवागमन प्रभावित हुआ। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाने लगा। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नदी का जलस्तर कम होने के बाद ही मिट्टी भराई और स्थायी मरम्मत का कार्य सुरक्षित रूप से शुरू किया जा सकेगा। सिंचाई विभाग की टीम भी मौके पर तैनात की गई है ताकि नदी के बहाव को नियंत्रित कर आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इस बीच प्रशासन ने कुछ स्थानों पर अस्थायी मरम्मत कर सीमित यातायात बहाल करने की कोशिश भी की है, जबकि स्थायी समाधान के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है। निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का संपर्क मार्ग इतने कम समय में क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया गया होता, तो इतनी जल्दी इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। कई लोगों ने इस मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। विशेषज्ञ क्या कहते हैं? सिविल इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में पुल निर्माण के दौरान केवल पुल की संरचना ही नहीं, बल्कि एप्रोच रोड, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी व्यवस्था और नदी के बहाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक होता है। यदि जल निकासी प्रणाली प्रभावी नहीं हो या मिट्टी का पर्याप्त संरक्षण न किया जाए, तो लगातार बारिश के दौरान एप्रोच रोड कमजोर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि घटना के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। सरकार की प्राथमिकता सड़क बहाली राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से बहाल करना प्राथमिकता है। संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार भी किए जाएंगे। आगे क्या? देहरादून में नए पुल के संपर्क मार्ग के धंसने की घटना ने सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है, लेकिन अंतिम स्थिति तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।   अब सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर टिकी है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई संभव है। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सड़क को जल्द सुरक्षित रूप से बहाल किया जाएगा और भविष्य की परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों का और अधिक सख्ती से पालन किया जाएगा।