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    विश्व पुस्तक दिवस पर संपर्क साहित्य संस्थान की ऑनलाइन साहित्यिक संध्या में देशभर से उमड़ा उत्साह

    संपर्क संस्थान साहित्य को जीवंत रखने वाला मंच/ संपर्क के ऑनलाइन मंच पर पुस्तकों के महत्व पर हुआ चिंतन, कविताओं से सजी शाम   जयपुर। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर संपर्क साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक संध्या एवं काव्य पाठ में गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभा कर साहित्य के प्रति अपनी गहरी संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। संस्थान के अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने सभी साहित्यकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि संपर्क साहित्य संस्थान केवल एक मंच नहीं, बल्कि विचारों और संवेदनाओं को जोड़ने वाला सशक्त परिवार है।  कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की महासचिव एवं समन्वयक रेनू ‘शब्दमुखर’ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए प्रभावशाली मंच संचालन संभाला, जिससे कार्यक्रम में गरिमा और ऊर्जा का सुंदर समन्वय बना रहा। मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. सीमा हिंगोनिया ने अपने उद्बोधन में संपर्क साहित्य संस्थान व अध्यक्ष अनिल लढा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान समाज में साहित्यिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से रचनात्मक मंच प्रदान कर रहा है तथा प्रभावशाली कविता सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदी प्रचार-प्रसार संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिल शुक्ला ने संपर्क साहित्य को जीवंत रखने वाला मंच बताया साथ ही कहा कहा कि संपर्क साहित्य संस्थान देशभर में साहित्यिक गतिविधियों, पुस्तक विमोचन एवं काव्य पाठ के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विशेष रूप सेउन्होंने कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में भी संस्थान ने अपनी गतिविधियों से साहित्य को जीवित रखा और समाज में सकारात्मक चेतना बनाए रखी। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिभागियों ने पुस्तकों के महत्व पर अपने विचार साझा किए। किसी ने आचार्य चरक की ‘चरक संहिता’ के ज्ञान पर प्रकाश डाला, तो किसी ने रामधारी सिंह दिनकर की ‘रश्मिरथी’, दुष्यंत कुमार की रचनाओं तथा ‘आनंद मठ’ जैसे कालजयी ग्रंथों के माध्यम से साहित्य की गहराई को प्रस्तुत किया। काव्य पाठ ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।    देश भर के साहित्यकारों ने दी प्रभावी प्रस्तुतियां    कार्यक्रम में पुणे से आशा शर्मा, हल्द्वानी से सौम्या दुआ, कोटा से पूनम झा, दौसा से संदीप छीपा, भोपाल से नीलम वंदना, हैदराबाद से सुहास जी सहित जयपुर की सुजाता पुरोहित, जीनस कंवर, नेहा खत्री, हिमाद्री समर्थ, सुनीता त्रिपाठी, डॉ. नीलम कालरा, प्रियंका पुरोहित, कमलेश शर्मा, पुनीता कुमारी, पुष्पा माथुर, डॉ. दीपाली वार्ष्णेय अग्रवाल, अरुण कुमावत, डॉ. दीपक कपूर, मधुमिता,अनिल कुमार,ममता महक एवं रितु अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।   समापन में यह स्पष्ट हुआ कि संपर्क साहित्य संस्थान न केवल साहित्य को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को भी पुस्तकों और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति प्रेरित कर रहा है। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सकारात्मक विचारों का एक सुंदर संगम बनकर सभी के मन में विशेष छाप छोड़ गया।  

    अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला के महासभा में आजीवन मुख्य संरक्षक बनने पर स्वागत

    अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला के महासभा में आजीवन मुख्य संरक्षक बनने पर उनके घर पर महासभा पदाधिकारियों व आजीवन संरक्षकों द्वारा माल्यार्पण कर, शॉल व साफा पहनाकर अभिनंदन किया गया । मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा, कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल खंडेलवाल, कार्यालय मंत्री रामकिशोर खूंटेटा, आजीवन संरक्षकगण हनुमान सहाय ओढ, कृष्ण मोहन खंडेलवाल, ललित खंडेलवाल, राकेश कूलवाल, पत्रिका प्रभारी राम स्वरूप ताम्बी, उपप्रभारी राम बाबू गुप्ता, भवन संयोजक रमेश चंद्र सौखिया व संयुक्त मंत्री नितिन खंडेलवाल भरतपुर आदि उपस्थित थे । उपस्थित सभी ने महासभा अध्यक्ष द्वारा आजीवन संरक्षक पद लेने व महासभा के महिला कल्याण कोष में 31 लाख रुपए देने के वचन की सराहना की । रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला ने उपस्थित सभी के सामने इनमें से महासभा कोष में ऑनलाइन 5 लाख रुपए ट्रांसफर भी कर दिए । महासभा अध्यक्ष पद हेतु घोषित वचन राशि रुपए 31 लाख श्री रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला महासभा कोष में जमा करवा चुके हैं ।  राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा महासभा कोष में दी जा रही दान राशियों से महिला सहायता कार्यक्रमों, छात्रवृत्ति व मेडिकल सहायता कार्यक्रमों को चलाने में सहयोग मिला है ।   अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तूंगावाला) के खंडेलवाल समाज के विकास मे अथक परीश्रम करते हुए तन मन एवं धन से निरंतर सहयोग करने एवं समाज के विकास मे अनेक आयोजनों के माध्यम से निरंतर अनेक रचनात्मक कार्य करते रहने पर अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तूंगावाला) को शुभकामना देते हुए खुशी वयक्त की है, इसके साथ ही आशा एवं विश्वास जताया है की आगे भी जोश, जूनून, नई भरपूर ऊर्जा के साथ काम करते हुए अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वेश्य महासभा के विकास मे नए आयाम स्थापित करेगे!

    राजुवास (जोबनेर) जयपुर द्वारा “विश्व पशुचिकित्सा दिवस-2026” का आयोजन

    केबिनेट मंत्री पशुपालन विभाग ने कहा पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करना हमारा लक्ष्य जयपुर। राजुवास (जोबनेर) जयपुर द्वारा स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर में शनिवार को “विश्व पशुचिकित्सा दिवस-2026” का आयोजन किया गया। संस्थान के अधिष्ठाता एवं फेकल्टी चेयरमेन प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने सभी अतिथियों का स्वागत किया व विश्व पशुचिकित्सा दिवस की बधाई दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जोराराम कुमावत, केबिनेट मंत्री, पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार ने इस अवसर पर सभी को विश्व पशुचिकित्सा दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि आज का दिन पशुचिकित्सकों के योगदान को याद करने का दिन है। विश्व पशुचिकित्सा दिवस मनाने का उद्वेष्य सभी को जागरुक व पशुधन के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं संरक्षण के बारे में सोचना है। उन्हांने कहा कि हमें पषुचिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार करके पषुपालन एवं पशुओं की चिकित्सा बेहतर करना है। पशुओं को बीमारियों से बचा कर हम अपने आप को भी स्वस्थ रख सकते है। उन्होनें बताया की राज्य सरकार ने भी पशुचिकित्सा क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए अनेक नये पशुचिकित्सालय खोले हैं, अनेकों का क्रमोन्नयन किया है, निःषुल्क दवाईयों की संख्या बढ़ाई है तथा उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की है। आगे उन्होनें बताया कि पशुपालकों के घर पर पशुचिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए मोबाइल वेटनरी वेन, पशुपालकों के लिए गोपालक कार्ड, मंगला पशु बीमा योजना व सेक्स सॉर्टेड सीमन उपलब्ध करवाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं। पशु टीकाकरण कार्यक्रम भी प्रभावी तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है जिससे पशुओं में होने वाली बीमारियों की रोकथाम की जा सके। मंत्री महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा की पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करना हमारा लक्ष्य है क्यांकि पशुपालन ग्रामीण क्षेत्र में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के लिए आजीविका का माध्यम है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन शर्मा, कुलपति रूवास (जोबनेर) जयपुर ने सभी को पशुचिकित्सा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था व पोषण सुरक्षा में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा के हमें चिंतन करने की जरुरत है कि हम समाज में अपनी उपयोगिता को सिद्ध करें। हमें ना केवल पशु स्वास्थ्य बल्कि पशु उत्पादन के बारे में भी सोचना है जिससे पशुपालकों के आथि्र्ाक स्तर में सुधार हो। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान होगा। कार्यक्रम के विशिष्ठ अथिति पशुपालन विभाग के निदेषक डॉ. सुरेष चन्द मीना ने कहा कि पशुचिकित्सक न सिर्फ पशुओं का ईलाज करता है बल्कि मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण आदि में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। संस्थान के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने अपने उदबोधन में पशुचिकित्सा के इतिहास व वर्तमान स्थिति के बारे में अपने विचार रखे। साथ ही उन्हांने माननीय केबिनेट मंत्री को संस्थान द्वारा गुणवत्तायुक्त शिक्षा व पशुपालकां को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया। इस अवसर पर अथितियों द्वारा दो सेवानिवृत आचार्य प्रो. (डॉ.) जी.सी. गहलोत व प्रो. (डॉ.) सुनन्दा षर्मा को उनकी विशिष्ठ सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों ने रूवास की न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान तकनिकी सेमिनार में डॉ. एस.के. झीरवाल ने विश्व पशुचिकित्सा दिवस की इस वर्ष की थीम “पशुचिकित्सक- भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक” पर अपना व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका करनानी ने किया तथा रूवास के कुलसचिव तथा राजस्थान प्रषासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी सावन कुमार चायल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। यह कार्यक्रम संस्थान के सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. निर्मल कुमार जेफ की देख-रेख में आयोजित किया गया। आज स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर के पशुचिकित्सा संकुल द्वारा विश्व पशु चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य पर निःशुल्क एन्टी रैबीज टीकाकरण एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर तथा पशु बांझपन निवारण षिविर का आयोजन किया गया । पशुचिकित्सा संकुल प्रभारी डॉ. एस.के. झीरवाल ने बताया कि इस षिविर बड़ी संख्या में पशुपालकों ने भाग लेकर सुविधाओं का लाभ लिया। विद्यार्थियो के लिए पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। संस्थान के पशु जन्य रोग निदान, निगरानी एवं निवारण केन्द्र (सी.डी.एस.आर.जेड.) द्वारा एक ऑनलाईन क्वीज का भी आयोजन किया गया।

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की छात्राओं ने रचा इतिहास, राजस्थान विश्वविद्यालय मेरिट सूची में शीर्ष स्थान हासिल

    बीबीए की कोमल स्वामी, बीसीए की श्वेता कुमारी एवं बी.एड.-एम.एड. की कविता पारीक ने प्राप्त किया गोल्ड मेडल जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया। इस गरिमामयी अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की विशेष उपस्थिति रही।   बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (2021–24) की छात्रा कोमल स्वामी, बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (2022–25) की छात्रा श्वेता कुमारी तथा बी.एड.-एम.एड. (2022–25) की छात्रा कविता पारीक ने अपने-अपने संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए गोल्ड मेडल और डिग्री हासिल की।   इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर संस्थान के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, प्राचार्य एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल,बी.एड. कॉलेज प्राचार्या *शिप्रा गुप्ता, कॉमर्स विभागाध्यक्ष प्रियंका गुप्ता, आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन पाटोदिया और राहुल अग्रवाल ने छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण और संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है।   इस अवसर पर छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय डॉ. संजय बियानी के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग एवं परिवार के निरंतर समर्थन को दिया।

    राजस्थान विश्वविद्यालय ने जीता अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय हैण्डबॉल पुरुष खिताब

    राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा की अध्यक्षता में आयोजित अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय हैण्डबॉल (पुरुष) प्रतियोगिता 2025-26 का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। खेल मंडल सचिव व प्रतियोगिता की आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा सिंह रतनू ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। समारोह के मुख्य अतिथि कुलदीप धनकड़ ( विधायक एवं सदस्य, सिंडिकेट, राजस्थान वि.वि.) रहे। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एम.एस. चूंडावत (पूर्व सचिव, खेल मंडल) उपस्थित रहे।   आज खेले गए फाइनल मुकाबले में राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर ने UEM विश्वविद्यालय जयपुर को 24-18 के अंतर से हराकर खिताबी जीत दर्ज की।   फाइनल मैच में राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से देवेन्द्र, गोहित और दिनेश ने 05-05 गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। वहीं, उप-विजेता UEM टीम की तरफ से दिव्यांशु ने 05 जबकि श्याम और अजय ने 04-04 गोल किए। आज ही खेले गए हार्ड लाइन फाइनल में लवली यूनिवर्सिटी पंजाब ने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी गुजरात को 34-22 के अंतर से पराजित कर तीसरा स्थान अर्जित किया ।   LPU की ओर से मनीष ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 गोल दागे, परमजीत ने 08 और सुमित ने 07 गोल किए। सौराष्ट्र की ओर से हर्ष ने 06, जगराज ने 05 तथा भावेश और नितिन ने 03-03 गोल किए।   प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंटः दिनेश डूडी राजस्थान विश्वविद्यालय को मिला। सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर   हरदयाल ने UEM यूनिवर्सिटी, चोमू को मिला।   राजस्थान विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा और लोक संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया।   प्रतियोगिता के सफल संचालन में एआईयू (AIU) पर्यवेक्षक के रूप में डॉ. हरीश बी. सबा और तकनीकी निदेशक के रूप में सुरभित सैन की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।   अंत में मुख्य अतिथि ने विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी और पदक प्रदान किए। मंच का सफल संचालन एस.एन. पारीक एवं श्रीमति बिंदु चौधरी द्वारा किया गया।

    रंग, उमंग और सफलता: SAGA 2025 का शानदार समापन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक साहित्य उत्सव ‘सागा 2025’ के दूसरे दिन की शुरुआत छात्रा ख्याति द्वारा ऊर्जावान उद्घाटन के साथ हुई, जिसमें उन्होंने दिनभर के कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात ‘विज़ाज ऑफ मिथिकल म्यूज़ेसः फेबल्स अक्रॉस फेसेज़’ फेस पेंटिंग प्रतियोगिता तथा ‘मोज़ेक ऑफ हिस्टोरिकल टेल्स’ पुस्तक आवरण डिज़ाइन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिनमें प्रतिभागियों ने लोककथाओं से प्रेरित रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में तान्या परमान (कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय) ने प्रथम, अंशुल डागोदिया (महाराजा कॉलेज) ने द्वितीय तथा सुरभि वर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पुस्तक आवरण डिज़ाइन प्रतियोगिता में मंतशा कपूर (कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय) ने प्रथम, यशराज यादव (राजस्थान कॉलेज) ने द्वितीय तथा आदित्य परमार (राजस्थान कॉलेज) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही ‘द रस्टिक रिडल्स ऑफ रिवर्बरेटिंग लोर्स’ क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें महारानी कॉलेज ने प्रथम, कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय ने द्वितीय एवं महाराजा कॉलेज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी दौरान आयोजित साहित्य-आधारित ट्रेज़र हंट में कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय की टीम (परख मोतियानी, विशाखा दास, मनस्वी गुप्ता एवं वंशिका शर्मा) ने ‘अरबियन नाइट्स’ थीम पर विजय प्राप्त की। द्वितीय दिवस का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। सर्वप्रथम प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। महाविद्यालय अंग्रेज़ी ऑनर्स षष्ठम सेमेस्टर की छात्रा अदीबा गुचिया ने दो दिवसीय उत्सव की संकलित रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके उपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार नंद भारद्वाज ने राजस्थान विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अंशु वर्मा (संगीत विभाग) के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान भारद्वाज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लेखक केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव ही नहीं, बल्कि समाज और परिवेश से प्राप्त सामूहिक अनुभवों को भी अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल लिखित शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने लोक साहित्य की सांस्कृतिक गहराई, उसकी जीवंतता और मौखिक परंपरा की व्यापकता पर विशेष बल देते हुए बताया कि ज्ञान निरंतर विकसित होता है और कहानियों व अनुभवों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रवाहित होता रहता है। साथ ही डॉ. वर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि लोक साहित्य में मानवीय मूल्यों का समावेश होता है और उसमें एक शिक्षाप्रद स्वरूप निहित रहता है। अंत में महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने समापन टिप्पणी प्रस्तुत की तथा उत्सव संयोजक एवं यूजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम का समापन मेराकी बैंड की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने वहाँ उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दो दिवसीय उत्सव लोककथाओं की सतत प्रासंगिकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसने साहित्य प्रेमियों को एक मंच पर लाकर उन्हें साहित्य की समृद्ध परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।       

    विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन तथा हसनदीन खान, असिस्टेंट प्रोफेसर, विशेष शिक्षा विभाग के समन्वय में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न कक्षाओं का अवलोकन करते हुए दृष्टिबाधित बालक-बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विशेष रूप से ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई की प्रक्रिया, स्पर्श आधारित अधिगम , श्रव्य शिक्षण विधियों तथा सहायक उपकरणों जैसे ब्रेल किताबें, ऑडियो डिवाइसेस एवं स्क्रीन रीडर के उपयोग को समझा। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि दृष्टिबाधित बच्चों को दैनिक जीवन कौशल जैसे—स्वयं चलना-फिरना, व्यक्तिगत स्वच्छता, तथा स्वतंत्र जीवन जीने के लिए किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही, उन्होंने कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त विशेष शिक्षण विधियों, ध्वनि संकेतों, स्पर्शात्मक शिक्षण सामग्री एवं अनुकूलित मूल्यांकन पद्धतियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के डी.एड एवं बी.एड के विद्यार्थियों ने कक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न प्रशिक्षण सेवाओं का गहन अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान उत्पन्न जिज्ञासाओं का समाधान डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, हसनदीन खान एवं मनीष कुमार मीणा द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं कौशल-आधारित ज्ञान प्राप्त हुआ। भ्रमण के समापन पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर ने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ दृष्टिबाधित बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं आत्मनिर्भर विकास के लिए अत्यंत समर्पण के साथ कार्य कर रहा है और यह विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट शिक्षण प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को समावेशी शिक्षा के व्यावहारिक आयामों से परिचित कराते हैं तथा उनके पेशेवर कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव उन्हें अपने दायित्वों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं दक्ष बनाते हैं। कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों में सेवा भाव, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि विशेष शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए धैर्य, सहानुभूति एवं व्यावहारिक समझ अत्यंत आवश्यक है, और इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों में इन गुणों को विकसित करने में सहायक होते हैं। अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग का दिशा स्पेशल स्कूल में शैक्षणिक भ्रमण, विद्यार्थियों ने जाने दिव्यांग शिक्षा के व्यवहारिक आयाम

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों एवं अध्यापकगण द्वारा दिशा स्पेशल स्कूल में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन तथा मनीष कुमार मीणा, असिस्टेंट प्रोफेसर, विशेष शिक्षा विभाग के समन्वय में संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में जाकर दिव्यांग बालक-बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। विद्यार्थियों ने न केवल बच्चों के साथ सहभागिता की, बल्कि उनके व्यवहार, अधिगम शैली एवं आवश्यकताओं को भी समझने का प्रयास किया। इस अवसर पर विशेष शिक्षा विभाग के डी.एड एवं बी.एड के विद्यार्थियों ने सभी कक्षाओं एवं थेरेपी सेंटर का गहन अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उत्पन्न शंकाओं का समाधान डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, मनीष कुमार मीणा एवं श्री हसन दीन खान द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। भ्रमण के समापन पर डॉ. वंदना सिंह ठाकुर ने दिशा स्पेशल स्कूल की निदेशक डॉ. भारती कुंटेता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य कर रहा है। इस सफल आयोजन पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल एवं प्रशिक्षण क्षमता का निरंतर विकास होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों के व्यावसायिक कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं तथा उन्हें अपने कार्यक्षेत्र के प्रति अधिक जागरूक बनाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक भ्रमण से न केवल कौशल विकास होता है, बल्कि दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता एवं समझ भी बढ़ती है।  डॉ. अंशु सुराना, प्रो-चेयरपर्सन (यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलॉजी) ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए सहनशीलता, तत्परता एवं व्यावहारिक बुद्धिमत्ता का होना अत्यंत आवश्यक है। अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. प्रेम सुराना ने भीषण गर्मी के बावजूद विद्यार्थियों की लगन, ईमानदारी एवं समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार की संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में मनाया गया विश्व पुस्तक दिवस

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विभाग में ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के अवसर पर सेमिनार हॉल ए-ब्लॉक में एक गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में पठन-पाठन की संस्कृति को सुदृढ़ करना तथा पुस्तकों के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि- “पुस्तकें मानव सभ्यता की धरोहर हैं, जो ज्ञान, संस्कार और विचारों की निरंतरता को बनाए रखती हैं। डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व अक्षुण्ण है।” प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने अपने संदेश में कहा कि- “पठन की आदत व्यक्ति के भीतर विश्लेषणात्मक सोच और सृजनात्मकता का विकास करती है, जो किसी भी समाज के बौद्धिक उत्थान के लिए आवश्यक है।”  प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने अपने संदेश में कहा कि- “पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न आयामों को समझने का सशक्त माध्यम हैं, जो हमें संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाती हैं।” कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि- “विश्वविद्यालयों में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देना समय की मांग है, जिससे विद्यार्थियों में आत्म-अध्ययन और अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित हो सके।” संयोजक डॉ. प्रेम कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि- “ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकों के प्रति आकर्षित करने और उनके बौद्धिक विकास को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” विभागाध्यक्ष डॉ. सीता राम माली ने अपने वक्तव्य में कहा कि- “विश्व पुस्तक दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पुस्तकें हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं और इनके माध्यम से हम ज्ञान के नए आयामों को प्राप्त कर सकते हैं।” डॉ. कुलदीप शर्मा, (कृषि विभाग ) ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि- “नियमित पठन से व्यक्ति का व्यक्तित्व समृद्ध होता है और वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम बनता है।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पुस्तक-पठन के अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन श्री जितेन्द्र कुमार योगी ( सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष) द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ . प्रेम कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

    पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करने की सराहनीय पहल की

    भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करने की सराहनीय पहल की गई। विभाग परिसर में पक्षियों की प्यास बुझाने हेतु विभिन्न स्थानों पर परिंडे बांधे गए। यह कार्य विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रताप चंद माली के मार्गदर्शन में संकाय सदस्यों, एम.एससी. विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी से सम्पन्न हुआ। सभी ने मिलकर जल से भरे परिंडे स्थापित किए, जिससे भीषण गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। इस दौरान विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया गया।       इस अवसर पर मुख्य अतिथियों के रूप में डॉ. किशोर रीठे (निदेशक, बम्बई प्राकृतिक इतिहास सोसायटी, मुंबई), डॉ. प्रमोद कांबले (सह प्राध्यापक, पर्यावरण विज्ञान विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान, अजमेर) तथा डॉ. सुजीत मरवड़े (उप निदेशक, बीएनएचएस, अजमेर) उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तेज गर्मी में पक्षियों के लिए पानी उपलब्ध कराना एक सरल किन्तु अत्यंत आवश्यक प्रयास है। उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी इस प्रकार की पहल करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक पक्षियों को लाभ मिल सके। यह पहल विभाग की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी तथा स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    राजस्थान विश्वविद्यालय का 35वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर का 35वां दीक्षांत समारोह आज भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता, परंपरा एवं आधुनिक तकनीकी नवाचारों का समन्वित स्वरूप देखने को मिला। समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय राज्यपाल, राजस्थान एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे द्वारा की गई। इस अवसर पर राजस्थान के माननीय उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा एवं राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह के शुभारम्भ के साथ कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने सभी अतिथियों, गणमान्यजनों, प्राध्यापकों, अभिभावकों व विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि का समापन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन की नई यात्रा का प्रारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को केवल डिग्री तक सीमित न रखें, बल्कि उसे ईमानदारी, उद्देश्यपूर्णता और उत्कृष्टता के साथ अपने जीवन में उतारें। उन्होंने देश के विकास के संदर्भ में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नवाचारकर्ता और जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता बनें। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वर्ण पदकों में उनकी बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संकेत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी देश के नीति-निर्माण और नेतृत्व में और अधिक सुदृढ़ होगी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, प्रश्न पूछने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उपराष्ट्रपति महोदय ने विद्यार्थियों को जीवन में नैतिकता, संवेदनशीलता और विनम्रता को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जिसमें व्यक्तिगत प्रगति के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय हो। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया तथा विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंत में उन्होंने सभी स्नातकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य “धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा” के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि कर्तव्य, नैतिकता और सत्य आचरण से है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों के समन्वय की रही है, और विश्वविद्यालय इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय एवं विवेकानंद मेमोरियल जैसे केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि ये विद्यार्थियों को ज्ञान और आत्मविकास के लिए प्रेरित करते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को जीवन की सफलता का आधार बताया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का मूल्य केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज को दिए गए योगदान से तय होता है। उन्होंने नैतिकता, सेवा भावना और गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, समाज में नकारात्मकता को प्रारंभ में ही समाप्त करने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासित, मूल्यवान और आदर्श जीवन जीने का आह्वान किया। डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, उपमुख्यमंत्री ने आज एक प्रेरणादायक संबोधन में युवाओं को शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन है और हर युवा को इसे अपना सर्वोच्च लक्ष्य बनाना चाहिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने सफलता के पाँच मूल मंत्र-धैर्य, अनुशासन, अनुकूलन, ईमानदारी और सार्थकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ निरंतर सीखना और स्वयं को ढालना आवश्यक है, जबकि चरित्र और ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। डॉ. बैरवा ने कहा कि युवाओं की शिक्षा तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “यही समय है, सही समय है” मंत्र को दोहराया और युवाओं को “विकसित भारत” के संकल्प में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का युवा नवाचार, स्टार्टअप और तकनीकी प्रगति के माध्यम से देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने राजस्थान विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में स्थापित यह संस्थान शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख केंद्र रहा है, जिससे सी. राजगोपालाचारी जैसे महान व्यक्तित्व जुड़े रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों-महाराजा और महारानी कॉलेज के क्रांतिकारी गौरव को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन लाल जेटली, रामानंद चौधरी और बिहारीलाल अग्रवाल के बलिदानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन शिक्षण संस्थानों ने न केवल शिक्षा दी, बल्कि आजादी के आंदोलन को भी नई दिशा दी। महाभारत के ’यक्ष-प्रश्न’ प्रसंग का उल्लेख करते हुए सांसद ने जोर दिया कि बिना अनुशासन और नैतिक आचरण के केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आचरण को श्रेष्ठ बनाना है। छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा, “आपका व्यवहार ही आपकी असली पहचान होनी चाहिए।“ उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय की परंपरा को आगे बढ़ाएं ताकि समाज में उनका आचरण संस्थान की प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब बने। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति के स्वभाव और चरित्र में झलकती हो। इस अवसर पर कुल 250 स्वर्ण पदक मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान किए गए, जिनमें 197 छात्राएँ एवं 53 छात्र शामिल रहे। इसके अतिरिक्त लगभग 2.71 लाख उपाधियाँ विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय की यह भी एक नई अभिनव पहल रही कि दीक्षान्त समारोह की डिग्रीयों का डाटा आज ही ’डिजी लॉकर’ पर अपलोड कर छात्रों हेतु उपलब्ध करवा दिया गया है।  विशेष उल्लेखनीय है कि इस वर्ष प्रदान की गई उपाधियाँ उन्नत सुरक्षा मानकों एवं आधुनिक तकनीकी विशेषताओं से युक्त हैं। प्रत्येक डिग्री को 4-कलर उच्च गुणवत्ता प्रिंटिंग के साथ तैयार किया गया है, जबकि विशेष 243 GSM/350 माइक्रोन सिंथेटिक, माइक्रोपोरस एवं जलरोधी कागज का उपयोग किया गया है, जिससे यह दीर्घकाल तक सुरक्षित एवं टिकाऊ रहती है। डिग्रियों में QR कोड/ बारकोड आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली सम्मिलित की गई है, जिससे उपाधियों का त्वरित ऑनलाइन सत्यापन संभव है तथा यह विश्वविद्यालय के डिजिटल डेटाबेस से संबद्ध है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक उपाधि पर यूनिक सीरियल नंबर एवं वेरिएबल डेटा फीचर्स अंकित हैं, जो उसकी विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से डिग्रियों में यूवी इनविजिबल इंक, माइक्रो एवं रिवर्स माइक्रो प्रिंटिंग, वॉइड पैंटोग्राफ (फोटोकॉपी पर 'COPY' का उभरना), हिडन एवं ड्यूल हिडन फीचर्स, इनविजिबल लोगो, एंटी-कॉपी तंत्र एवं कोरिलेशन मार्क जैसे उन्नत उपाय शामिल किए गए हैं, जिससे जालसाजी की संभावना अत्यंत न्यूनतम हो जाती है। साथ ही, डिग्रियों में गोल्ड फॉइल प्रिंटिंग, एम्बॉसिंग, हाई-रिजोल्यूशन बॉर्डर, रेनबो कलर, फाइन लाइन रिलीफ एवं थर्मो-क्रोमिक इंक जैसी उन्नत प्रिंटिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जो इन्हें न केवल आकर्षक बनाती हैं, बल्कि सुरक्षा की अतिरिक्त परत भी प्रदान करती हैं। अंत में कुलसचिव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। यह दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी एवं तकनीक-सक्षम डिग्री प्रणाली के माध्यम से विश्वविद्यालय की नवाचार एवं गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण भी बना।