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    कोटा के कार्तिक का कोविड में बदला मन

    कार्तिक चैधरी, कोटा (राजस्थान) नीट एआईआरः 16 जेईई मेनः 99.06 पर्सेन्टाइल पिताः सुरेन्द्र चैधरी (एइएन, आरवीपीएन, मोड़क) मांः प्रियंका चैधरी (प्रिंसिपल, गर्वनमेन्ट स्कूल) जन्मतिथिः 6 मार्च 2009 कोटा निवासी कार्तिक चैधरी ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 में आॅल इंडिया रैंक 16 हासिल की है। चार वर्ष से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट कार्तिक ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2026 में भी शानदार प्रदर्शन कर 99.06 पर्सेन्टाइल स्कोर किए थे। आॅल इंडिया रैंक 15008 थी। कार्तिक ने 10वीं कक्षा 94.2 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 93.8 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। कार्तिक ने बताया कि कोविड के समय मैंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों और डॉक्टरों के संघर्ष को करीब से देखा था। तभी मैंने तय कर लिया था कि मुझे डॉक्टर बनना है और लोगों की सेवा करनी है। पिछले चार वर्षों से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट रहने के दौरान मुझे लगातार बेहतर गाइडेंस, अनुशासित माहौल और एक्सपीरियंस्ड फैकल्टीज का सपोर्ट मिला। इसी का परिणाम है कि मेरा डॉक्टर बनने का सपना अब साकार होने जा रहा है। मैंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2026 भी दी थी, जिसमें 99.06 पर्सेंटाइल हासिल किए और मेरी ऑल इंडिया रैंक 15008 रही। मेरे लिए जेईई मेन में शामिल होने की वजह नेशनल लेवल के एग्जाम में खुद का एनालिसिस करना था। इससे मुझे यह समझने में मदद मिली कि मेरी तैयारी किस लेवल की है और किन टाॅपिक्स में सुधार की आवश्यकता है। मैं रोजाना लगभग 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। डेली रिवीजन, टेस्ट और अपनी गलतियों का एनालिसिस मेरी तैयारी का अहम हिस्सा रहे। मैं अपनी सफलता का बड़ा श्रेय एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट को देना चाहता हूं। जब भी किसी टाॅपिक में डाउट आए तो फैकल्टीज ने उसे सरल तरीके से समझाया और काॅन्फिडेंस बनाए रखने के लिए मोटिवेट किया। मेरे परिवार में शुरुआत से ही पढ़ाई का अच्छा माहौल रहा है। मेरे पिता सुरेंद्र चैधरी भी एलन के छात्र रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 1997 में एलन से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा आरपीईटी की तैयारी की थी और वर्तमान में राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम, मोड़क में एईएन के पद पर कार्यरत हैं। मेरी बुआ ज्योति ने भी वर्ष 1999 में एलन से आरपीईटी की तैयारी की थी और वे वर्तमान में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, अलवर में लेक्चरर हैं। सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।   ───   बारां का प्रखर आल इंडिया रैंक-31 पर   प्रखर बंसल, बारां (राजस्थान) नीटः आॅल इंडिया रैंक 31 पिताः डाॅ. सत्यप्रकाश गुप्ता (गाइनोलाॅजिस्ट) मांः डाॅ. मोनिशा गुप्ता (गाइनोलाॅजिस्ट) जन्मतिथिः 29 जून 2009 राजस्थान के हाड़ौती संभाग के बारां जिले के निवासी प्रखर बंसल ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 में 720 में से 700 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 31 प्राप्त कर जिले एवं क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। प्रखर पिछले चार वर्षों से एलन कॅरियर इस्टीट्यूट के रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट रहे हैं। उसनेे राजस्थान बोर्ड से 10वीं कक्षा में 96.3 प्रतिशत तथा 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। पिता डॉ. सत्यप्रकाश गुप्ता एवं माता डॉ. मोनिशा, दोनों गाइनोलॉजिस्ट हैं और बारां में अपना नर्सिंग होम संचालित करते हैं। अपनी सफलता का श्रेय प्रखर ने अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा एलन के अनुशासित एकेडमिक एनवायरमेंट वातावरण को दिया। प्रखर ने बताया, नीट जैसे नेशनल लेवल के एग्जाम में सक्सेस केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन, डेली प्रेक्टिस और एनालिसिस से मिलती है। एलनमें मुझे अनुभवी फैकल्टी, कॉन्सेप्ट आधारित स्टडी, समय-समय पर होने वाले टेस्ट, एनालिसिस और हर सक्जेक्ट में डाउट सॉल्विंग का बेहतरीन सिस्टम मिला। यही कारण रहा कि मेरी तैयारी लगातार सही दिशा में आगे बढ़ती रही। एलन में सिर्फ पढ़ाई नहीं होती, बल्कि हर स्टूडेंट की प्रोग्रेस पर लगातार नजर रखी जाती है। फैकल्टी हमेशा मोटिवेट करती है और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस कराया जाता है। इसी वजह से मैं अपनी कमियों को समय रहते सुधार पाया और बेहतर प्रदर्शन कर सका।   ───   बच्चे के साथ रहती है मां, नीट के दो दिन पहले मां का एक्सीडेंट, सिर में आये थे टांके   रणवीर कुमार नीटः आॅल इंडिया रैंक 39 जेईई मेनः 99.37 परसेन्टाइल पिताः रणधीर नारायण सिंह (व्यापारी) मांः निशी सिंह जन्मतिथिः 18 जुलाई 2008 बिहार के पटना जिले में पालीगंज निवासी रणवीर कुमार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में आॅल इंडिया रैंक 39 हासिल की है। रणवीर ने 10वीं कक्षा 94 एवं 12वीं कक्षा 94.8 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। पिता रणधीर नारायण सिंह व्यापारी एवं मां निशी गृहिणी है। एक छोटी बहिन तनुश्री अभी 11वीं कक्षा में है और एलन कोटा से नीट की तैयारी कर रही है। अपना की-आॅफ सक्सेस शेयर करते हुए रणवीर ने बताया कि एलन में नीट की तैयारी के लिए काफी अनुभवी फैकल्टीज हैं और वे हमेशा स्टूडेंट्स के सपोर्ट के लिए तैयार रहती हैं। मैंने फैकल्टीज की गाइडेंस को फाॅलो किया। मैं रोजाना क्लासरुम स्टडी के अलावा 6-7 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। मेरी प्रतिदिन की स्ट्रेटेजी थी कि 50 प्रतिशत क्वेश्चंस की पेक्टिस करता था तो 50 प्रतिशत रिवीजन करता था। कोटा में मम्मी और बहिन भी रहते हैं लेकिन मैं उनसे अलग हाॅस्टल में रहता था। क्योंकि फैमिली के साथ रहकर पढ़ाई नहीं हो पाती। ये मेरा नीट का दूसरा अटैम्प्ट था। फस्र्ट अटैम्प्ट में 510 माक्र्स एवं आॅल इंडिया रैंक 42 हजार आई थी। नीट के दो दिन पहले मां का एक्सीडेंट रणवीर ने बताया कि नीट की परीक्षा के दो दिन पहले मैं काफी परेशान हो गया था। मेरी मम्मी आॅटो से मेरा एग्जाम सेंटर देखने जा रही थी लेकिन रास्ते में आॅटो पलट गया था। इस वजह से उनके सिर में चोट आई थी। हाॅस्पिटल लेकर गया जहां उनको सिर में टांके आए थे। मम्मी ने उसी दिन शाम को बोला कि एग्जाम पर फोकस करो। इतना ही नहीं, पेपर वाले दिन मम्मी खुद मुझे एग्जाम सेंटर तक छोड़ने गई थी। .....  

    नीट में एलन के टाॅप-10 में 5 और टाॅप-100 में 46 स्टूडेंट्स

    690 एवं अधिक अंक वाले टाॅप-138 स्टूडेंट्स में 63 एलन स्टूडेंट्स   कोटा. देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया। परिणामों में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स ने एक बार फिर श्रेष्ठता साबित की है। एलन के टाॅप-10 में 5 स्टूडेंट्स शामिल है। परिणामों में टाॅप-100 में 46 स्टूडेंट्स एलन से हैं।   रिजल्ट जारी होने के साथ ही उत्सव जैसा माहौल रहा। एलन सत्यार्थ कैम्पस के बाहर डायरेक्टर्स, फैकल्टीज और स्टूडेंट्स रिजल्ट की खुशी में झूमे। परिणामों में आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने संयुक्त रूप से 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं। टाइब्रेकर रूल की प्राथमिकता के आधार पर आर्यन गुप्ता को आल इंडिया रैंक-1 और पंशुल बंसल को आॅल इंडिया रैंक-2 घोषित किया गया है। पंशुल बंसल एलन के दो साल से रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट हैं तथा आर्यन गुप्ता एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट से डिस्टेंस लर्निंग से जुड़े हैं। इसके साथ ही एलन क्लासरूम स्टूडंेट आयुष भालोटिया ने 710 अंक प्राप्त कर आल इंिडया रैंक-4 हासिल की है। एलन आॅनलाइन टेस्ट सीरीज के स्टूडेंट आर्यन दुबे ने एआईआर-7, वहीं एलन क्लासरूम स्टूडेंट गौरव सिंह आल इंडिया रैंक-9 हासिल की है।   एलन के सीईओ नितिन कुकरेजा ने बेहतर परिणामों पर सभी स्टूडेंट्स और उनके परिवारजनों को बधाई दी है। परिणामों में एलन ने श्रेष्ठता साबित की है। अब तक देखे गए परिणामों में टाॅप-10 में 5, टाॅप-20 में 10, टाॅप-50 में 23 और टाॅप-100 में 46 स्टूडेंट्स एलन से हैं। इसमें 36 स्टूडेंट्स क्लासरूम हैं, इनमें से एक आॅनलाइन लाइव क्लास से तथा 10 स्टूडेंट्स डिस्टेंस लर्निंग व आॅनलाइन टेस्ट सीरीज से हैं। एनटीए ने 690 एवं अधिक अंक वाले टाॅप-138 स्टूडेंट्स की लिस्ट प्रेस रिलीज में जारी की है, इसमें 63 स्टूडेंट्स एलन से हैं। इसमें 50 क्लासरूम प्रोग्राम है, जिनमें एक आॅनलाइन लाइव क्लासरूम से तथा 13 डिस्टेंस लर्निंग व आॅनलाइन टेस्ट सीरीज से है।  

    सफलता के लिए पेशन होना जरूरी है: पंशुल

    पंशुल बंसल, फरीदाबाद (हरियाणा) नीटः आॅल इंडिया रैंक-2 माक्र्सः 720 में से 715 संजीव कुमार बंसल (व्यापारी) मोनिका बंसल (सीएस, इंडियन एक्सप्रेस) जन्मतिथिः 23 मार्च 2008   देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के क्लासरुम स्टूडेंट पंशुल बंसल ने आॅल इंडिया रैंक-2 हासिल की है। हरियाणा में फरीदाबाद निवासी पंशुल ने नीट में 720 में से 715 माक्र्स हासिल किए हैं। पंशुल का शुरुआत से लक्ष्य निर्धारित था कि नीट क्रेक कर डाॅक्टर बनना है। उसने 10वीं एवं 12वी कक्षा दोनों में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा वो जेईई मेन 2026 में भी शामिल हुआ था। जिसमें उसने 99.5 परसेन्टाइल स्कोर किए थे। अंशुल के पिता ने नेवल इंजीनियरिंग की हुई है लेकिन फिलहाल बिजनेसमैन हैं। जबकि मां मोनिका कंपनी सैकेट्री है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में दो साल से रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट पंशुल ने बताया कि मैंने यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। मेरे पेरेन्ट्स ने कॅरियर के मामले में मुझे कभी प्रेशराइज नहीं किया। कक्षा 10वीं के बाद मेरे सामने कई सारे आॅप्शंस थे। यहां तक कि यदि मैं आॅर्ट्स भी ले सकता था लेकिन, मुझे शुरुआत से बाॅयोलाॅजी में रुचि थी और मैंने कक्षा 7वीं में आते-आते डिसीजन ले लिया था कि मुझे साइंस लेनी है और डाॅक्टर बनना है। छोटी कक्षा में लाइफ का गोल सेट करना मेरे लिए काफी फायदेमंद सबित हुआ। क्योंकि मेरा माइंड सेट वैसा बन चुका था और इससे मुझे मेरे टारगेट को हसिल करने में काफी मदद मिली। इससे आपकी फाउंडेशन और कंसेप्ट्स दोनों मजबूत होते हैं। मैं स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि आपमें आपके कॅरियर के प्रति पैशन है तो ही उसमें आगे बढ़ो। नीट की तैयारी के लिए एलन में एडमिशन लिया तो पता चला कि कम्पीटिशन क्या होता है। क्योंकि देशभर से टैलेंटेड स्टूडेंट्स अपने सपनों को साकार करने एलन में आते है और ऐसे स्टूडेंट्स को देखकर ही आप मोटिवेट होते हो। यही मोटिवेशन आपको बेस्ट बनाता चला जाता है। फैकल्टीज का सपोर्ट काफी मिलता था। हमें एडवांस् लेवल पर पढ़ाया जाता था ताकि नीट जैसे एग्जाम के लेवल का हम आसानी से सामना कर सकें। मैं ज्यादा टाइम पढ़ाई नही करता था लेकिन जितना भी पढ़ता था वो क्वालिटी स्टडी होती थी। सामान्यतया स्टूडेंट्स थ्योरी पर ज्यादा फोकस करते हैं लेकिन मैं थ्यारी पर उतना ज्यादा फोकस नहीं करता था। मैं क्वेंश्चंस की प्रेक्टिस पर ज्यादा ध्यान देता था। रीक्रिएशन के लिए म्यूजिक सुनता हूं। मैंने पियानो बजाने की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं। राॅक स्कूल में ग्रेड 4 और ट्रिनिटी काॅलेज आॅफ लंदन में ग्रेड 2 का सर्टिफिकेट हासिल कियार हुआ है।       ───     ───   डेली रिवीजन और मॉक टेस्ट मेरा की-ऑफ-सक्सेस- आयुष आयुष भालोटिया, नवादा (बिहार) नीटः एआईआर 4 पिताः सुनील कुमार भोलोटिया (व्यापारी) मांः किरण देवी जन्मतिथिः 11 मई 2008 मोबाइलः 9304863259 बिहार के नवादा जिले में वरीसालीगंज निवासी आयुष भालोटिया ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 में 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल की है। दो साल से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट आयुष अपने परिवार ही नहीं बल्कि अपने गांव का भी पहला डॉक्टर बनने जा रहा है। आयुष ने 10वीं में 96.2 एवं 12वीं कक्षा में 93.8 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। आयुष की उपलब्धि से उनके परिवार सहिज पूरे वरीसालीगंज में खुशी का माहौल है। आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने की था और इस सपने को साकार करने में एलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एलन में नियमित पढ़ाई, नीट की गहन तैयारी, लगातार रिवीजन और नियमित टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। मेरा मानना है कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें सुधारना बेहद जरूरी है। मेरे बड़े भाई अर्पित भालोटिया की गाइडेंस भी काफी काम आई। वे आईआईटी दिल्ली से पास आउट हैं और फिलहाल यूएसए से पीएचडी कर रहे हैं। नीट की तैयारी के दौरान कई बार मेंटल प्रेशर भी महसूस हुआ, लेकिन परिवार और एलन की फैकल्टीज के सपोर्ट ने हमेशा मुझे पॉजिटिव बनाए रखा। क्लासरुम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। रीक्रिएशन के लिए चैस खेलता था। पिता सुनील कुमार सीमेंट और स्टील व्यवसायी हैं और उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई, जबकि मेरी मां किरण देवी ने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया। यह सफलता जितनी मेरी है, उतनी ही मेरी फैमिली और फैकल्टीज की भी है। मैं चाहता हूं कि मेरी सफलता से गांव और छोटे शहरों के अन्य स्टूडेंट्स भी मोटिवेट हों और बड़े टारगेट तय करने का साहस जुटाएं। मैं नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि स्टूडेंट्स को एनसीईआरटी पर मजबूत पकड़ बनानी चाहिए, नियमित रिवीजन करना चाहिए और मॉक टेस्ट को सीरियसली देना चाहिए। धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत ही किसी भी बड़े एग्जाम की की-ऑफ-सक्सेस हैं।   ───     ───   सिर्फ वो किया जो फैकल्टीज ने कहा: गौरव   गौरव सिंह, अलवर (राजस्थान) इंस्टीट्यूट - एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट नीट एआईआर: 09 पिता: राजेश कुमार (भारतीय सेना, पश्चिम बंगाल) मां: सीमा देवी जन्मतिथि: 1 अक्टूबर 2008   राजस्थान में अलवर जिले की मुंडावर तहसील स्थित गाडुवास गांव निवासी राजेश कुमार के घर एवं गांव में इन दिनों उल्लास छाया हुआ है। राजेश कुमार की बेटी अनुजा के बाद उनका बेटा गौरव भी डाॅक्टर बनने जा रहा है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट गौरव ने नीट 2026 में 720 में से 705 अंक हासिल कर आॅल इंडिया रैंक 09 हासिल की है। गौरव ने 10वीं कक्षा 92 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। गौरव ने कहा कि मैं पिछले सात वर्षों से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट, कोटा का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट रहा हूं। मुझसे पहले मेरी बड़ी बहन अनुजा ने भी एलन कोटा से 2022-23 में नीट की तैयारी की थी। आज वह ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, अलवर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उनके हार्डवर्क, कंसिस्टेंसी, डिसिप्लिन और सक्सेस को देखकर मुझे हमेशा मोटिवेशन मिला और मैंने भी डॉक्टर बनने का सपना देखा। मेरी सफलता में मेरे परिवार का भी सबसे बड़ा योगदान रहा है। मेरी मां सीमा देवी मेरे और मेरी बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की, एनसीईआरटी को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्ट फोन यूज करता था लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। रीक्रिएशन के लिए क्रिकेट खेलता था। मेरा मानना है कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस करना और उन्हें सुधारना ही की-आॅफ-सक्सेस है।  

    62वाँ स्थापना दिवस मनाया

    19 जुलाई 1965 में स्वर्गीय भागीरथ जी कानोड़िया द्वारा स्थापित, महिला शिक्षा एवं महिला सशक्तीकरण के लिए राजस्थान में अग्रणी कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय ने आज 18 जुलाई 2026 को 62वाँ स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में एडिशनल डीसीपी साउथ, कालिका इन्चार्ज रानू शर्मा मुख्य अतिथि रहीं। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की छः दशकों की उपलब्धियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय आज भी छात्राओं के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्ध है। महाविद्यालय निदेशक, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने महाविद्यालय के ध्येय वाक्य ‘आत्म दीपो भव’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, आत्मबोध और आत्मप्रेरणा ही व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने छात्राओं को अपनी कल्पनाओं को उड़ान देने, शिक्षा के महत्व को समझने और स्वयं के व्यक्तित्व का निरंतर विकास करने हेतु प्रेरित किया। मुख्य अतिथि रानू शर्मा ने कहा कि समाज और मन दोनों के बनाये बंधनों को तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में छात्राओं को आत्मविश्वास, साहस और निरंतर प्रयास का संदेश दिया। साथ ही अपने संघर्षपूर्ण जीवन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि उनकी प्रत्येक उपलब्धि में शिक्षकों का अमूल्य योगदान रहा है और कहा कि सफलता किसी एक बड़े प्रयास का परिणाम नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे निरंतर कदम ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुँचाते हैं। कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। इसके अतिरिक्त छात्राओं के लिए विभिन्न मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं एवं खेलों का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. आँचल पुरी ने किया। इस आयोजन में महाविद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं समस्त प्राध्यापिकाओं सहित लगभग 600 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक उपस्थिति दर्ज की।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय में दो दिवसीय ‘संगम 2026’ का सफल आयोजन

    , 40 महाविद्यालयों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा राजस्थान विश्वविद्यालय में श्री गुरु गोविंद सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एंड सिख स्टडीज़, व्यंजना : द एक्सप्रेशन सोसाइटी, राजस्थान स्टडीज सेंटर एवं प्रज्ञा प्रवाह-जयपुर प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय ‘संगम 2026’ का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘लोकमंथन’ के प्री-इवेंट के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें जयपुर के लगभग 40 महाविद्यालयों से आए 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र भारती, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय संस्कार भारती ने भारतीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और युवाओं की सृजनात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की समन्वयक एवं श्री गुरु गोविंद सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एंड सिख स्टडीज़ की चेयरपर्सन डॉ. मीना रानी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और सांस्कृतिक चेतना को विकसित करने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं। दो दिवसीय आयोजन के दौरान हिंदी पोएट्री, इंग्लिश पोएट्री, डेविल्स एडवोकेट, आर्ट फ्यूजन, मास्क डिजाइनिंग, ट्विस्टेड टेल्स तथा हिंदी एवं इंग्लिश क्रिएटिव राइटिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसके साथ ही एक विशेष आर्ट एग्जीबिशन भी लगाई गई, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन के समापन समारोह में प्रज्ञा प्रवाह से देवेश जी बंसल, मेरठ से कला की प्रोफेसर वंदना जी वर्मा तथा अर्थ एसोसिएशन की प्रमुख डॉ. हेमलता शर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में प्रतिभागियों की प्रतिभा और रचनात्मकता की सराहना की गई। छात्र समन्वयक आदित्य परमार ने बताया कि ‘संगम 2026’ ने विद्यार्थियों को साहित्य, कला, अभिव्यक्ति और संस्कृति से जुड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह, ऊर्जा और रचनात्मकता का विशेष वातावरण देखने को मिला।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय में मराठी भाषा थोपने के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा: छात्र नेता शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में फूंका राज्यपाल का पुतला

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में आज विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने राज्यपाल के उस फैसले के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया, जिसके तहत राजस्थान की यूनिवर्सिटीज में मराठी भाषा से जुड़े केंद्र/प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जा रही है। आक्रोशित छात्रों ने राजभवन के इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राज्यपाल का पुतला दहन किया। मीडिया को संबोधित करते हुए छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने कहा, "महामहिम स्वयं महाराष्ट्र से आते हैं, हमें उनकी मातृभाषा से कोई आपत्ति नहीं है। भारत की सभी भाषाएं हमारे लिए पूजनीय हैं। लेकिन महामहिम को यह याद रखना होगा कि वे महाराष्ट्र के नहीं, बल्कि राजस्थान के राज्यपाल हैं। राजस्थानी भाषा को दरकिनार करके मराठी भाषा को प्राथमिकता देना राजस्थान के करोड़ों युवाओं और छात्र शक्ति के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है।" शुभम रेवाड़ ने राजभवन और सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट स्कूलों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य करने की बात कह रहा है, प्रदेश का युवा सालों से हर यूनिवर्सिटी में राजस्थानी विभाग खोलने की मांग कर रहा है—तब तो राजभवन की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। लेकिन जैसे ही महाराष्ट्र सरकार से प्रस्ताव आता है, राज्यपाल महोदय तुरंत सक्रिय होकर उसे लागू करने का आदेश दे देते हैं। छात्र शक्ति की मुख्य मांगें: राजस्थान की किसी भी यूनिवर्सिटी में अन्य भाषा का केंद्र खोलने से पहले, प्रदेश की हर एक यूनिवर्सिटी में राजस्थानी भाषा का पूर्ण विभाग अनिवार्य रूप से खोला जाए। 'पहले मायड़ भाषा का सम्मान करो, फिर किसी और भाषा की बात करो!' की नीति पर काम हो।

    अब गांव-गांव तक पहुंचेगी करियर की सही राह, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी और मोइनी फाउंडेशन के बीच एमओयू

    -मनोविज्ञान और तकनीक की जुगलबंदी से बनेगा देशभर के छात्रों के लिए डिजिटल गाइडेंस प्लेटफॉर्म -आठवीं-नौवीं कक्षा से ही एप्टीट्यूड टेस्ट पर जोर, समय रहते पहचानी जाएगी बच्चों की असली क्षमता -ग्रामीण और वंचित तबके के छात्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी, स्कूली स्तर पर होगी करियर काउंसलिंग जयपुर, करियर के चुनाव में भटकाव आज भी लाखों स्टूडेंट्स और उनकी फैमिली की सबसे बड़ी चिंता है, और इसी भटकाव को कम करने के मकसद से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी की करियर डेवलपमेंट एंड गाइडेंस सेल (सीडीजीसी) और मोइनी फाउंडेशन के बीच एक एमओयू साइन किया गया, जिसके तहत रूरल और गवर्नमेंट स्कूलों के स्टूडेंट्स को साइंटिफिक करियर गाइडेंस दी जाएगी। इस पार्टनरशिप में यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजिकल एक्सपर्टीज़ और फाउंडेशन की टेक्निकल स्ट्रेंथ मिलकर एक नया मॉडल तैयार करेंगी। मोइनी फाउंडेशन पिछले कुछ वर्षों से करियर अवेयरनेस और डिजिटल एजुकेशन के फील्ड में काम कर रहा है। सीडीजीसी के साथ यह कोलैबोरेशन इसी काम को एक बड़ा प्लेटफॉर्म देने की कोशिश है। यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 की उस सोच से भी मेल खाता है, जिसमें हर बच्चे की अपनी क्षमता और रुचि को समझकर उसे एक से ज़्यादा विषयों में आगे बढ़ने का मौका देने पर जोर दिया गया है। मोइनी फाउंडेशन के फाउंडर और चीफ मेंटर अरविंद थानवी का कहना है कि ज्यादातर बच्चे बड़ी क्लासेस में आकर जल्दबाजी में करियर डिसीजन ले लेते हैं, इसलिए अवेयरनेस अर्ली स्टेज से ही जरूरी है और करियर को लेकर बातचीत स्कूल के शुरुआती सालों से ही शुरू हो जानी चाहिए। उनकी टीम ऐसे टेक टूल्स डेवलप कर रही है जिनकी मदद से लिमिटेड मैनपावर के बावजूद यह कैंपेन सैकड़ों स्कूलों तक बड़े स्केल पर पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने यूनिवर्सिटी के यंगस्टर्स को भी इस प्रोजेक्ट से जुड़कर अपने स्किल्स शार्पन करने के लिए प्रेरित किया। आज के कॉम्पिटिटिव दौर में सही करियर चुनना बच्चों और पैरेंट्स, दोनों के लिए एक बड़ी चैलेंज बताते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रोफ. विक्टर गंभीर ने कहा कि 11वीं में सब्जेक्ट चुनने से पहले, यानी 8वीं-9वीं क्लास में ही एप्टीट्यूड टेस्ट हो जाना चाहिए, ताकि बच्चे अपनी रियल पोटेंशियल को टाइम रहते पहचान सकें। उन्होंने मोइनी फाउंडेशन के नेटवर्क को रूरल और अंडरप्रिविलेज्ड स्टूडेंट्स तक पहुंच बनाने में एक अहम कड़ी बताया, साथ ही जेईसीआरसी के प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग मॉड्यूल को स्टूडेंट्स के लिए बेहद यूज़फुल इनिशिएटिव बताया। सीडीजीसी की हेड डॉ. कृति काला जैन ने बताया कि यह सेल 2023 से अब तक 5000 से अधिक साइकोमेट्रिक असेसमेंट कर चुकी है। इस एमओयू के बाद दोनों संस्थाएं मिलकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेंगी, जिससे देशभर के स्कूलों तक करियर काउंसलिंग और असेसमेंट की सुविधा डायरेक्ट पहुंच सकेगी। इस पार्टनरशिप का गोल एक ऐसा स्ट्रॉन्ग और स्केलेबल इकोसिस्टम खड़ा करना है, जो सोसाइटी के हर तबके के स्टूडेंट्स तक पहुंच सके। टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक करियर गाइडेंस के इस मेल से आने वाली जनरेशन अपने फ्यूचर से जुड़े डिसीजन अब ज्यादा समझदारी और कॉन्फिडेंस के साथ ले सकेगी।  

    दिल्ली में बिना हीटवेव के भी क्यों पड़ रही है इतनी ज्यादा गर्मी? जानिए वजह

      युगचरण न्यूज़ | 15 जुलाई 2026 दिल्ली में इन दिनों तापमान सामान्य सीमा में रहने के बावजूद लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अधिकतम तापमान लगभग 32 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच है, लेकिन लोगों को महसूस होने वाला तापमान (फील्स लाइक टेम्परेचर) करीब 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह हवा में अत्यधिक नमी (Humidity) है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के अस्थायी रूप से कमजोर पड़ने के दौरान वातावरण में नमी काफी बढ़ गई है। हाल के दिनों में दिल्ली में सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) लगभग 58 से 61 प्रतिशत तक दर्ज की गई, जिससे मौसम काफी उमस भरा हो गया। मानव शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकालता है। सामान्य परिस्थितियों में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। लेकिन जब हवा में नमी अधिक होती है तो पसीना आसानी से नहीं सूख पाता। इसका परिणाम यह होता है कि शरीर को अधिक गर्मी महसूस होती है और व्यक्ति को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्म वातावरण का अनुभव होता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय हीटवेव जैसी आधिकारिक स्थिति नहीं है, लेकिन अधिक नमी के कारण उमस लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ऐसे मौसम में थोड़ी देर बाहर रहने पर भी थकान, अत्यधिक पसीना, बेचैनी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, धूप में लंबे समय तक रहने से बचें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों से परहेज करें। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की गतिविधियां सामान्य होने के बाद नमी और तापमान के बीच संतुलन बनने की संभावना है, जिससे लोगों को उमस से कुछ राहत मिल सकती है। तब तक राजधानी में गर्मी का एहसास वास्तविक तापमान से कहीं अधिक बना रह सकता है।    

    ह्यूमन एज इन एआई एरा-इनोवेशन, साॅफ्ट स्किल्स एंड सोशल इंटरप्रेन्योरशिप’ विषय पर एक व्याख्यान सत्र का आयोजन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल एवं राष्ट्रीय सेवा योजना ने संयुक्त रूप से आई.सी.एफ.ए.आई विश्वविद्यालय के सहयोग से दिनांक 15 जुलाई 2026 को ‘द ह्यूमन एज इन एआई एरा-इनोवेशन, साॅफ्ट स्किल्स एंड सोशल इंटरप्रेन्योरशिप’ विषय पर एक व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. तन्मय अग्रवाल, सहायक आचार्य, संयोजक इनोवेशन क्लब, (आई.सी.एफ.ए. आई विश्वविद्यालय) रहे। उन्होंने बताया कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है तथा शिक्षा, उद्योग, स्टार्टअप, नवाचार, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य एवं अनुसंधान सहित अनेक क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। उन्होंने छात्राओं को विभिन्न एआई टूल एवं उनके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी तथा यह भी बताया कि इन तकनीकों को प्रभावी रूप से उपयोग कर छात्राएँ अपनी सीखने की क्षमता, रचनात्मकता और नवाचार कौशल को विकसित कर सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को एआई का नैतिक एवं सकारात्मक उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कार्यक्रम की सराहना करते हुये छात्राओं को एआई आधारित तकनीकों को सीखने तथा उनका रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में 92 छात्राओं की उत्साहपूर्वक सहभागिता रही साथ ही छात्राओं ने मुख्य वक्ता से एआई से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न पूछकर वक्ता से मार्गदर्शन प्राप्त किया। महाविद्यालय की इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. आंचल पुरी, डाॅ. विजयलक्ष्मी गुप्ता, डाॅ. हर्षा शर्मा एवं चारूल शर्मा की सक्रिय भूमिका रही।    

    अमेरिकी हमलों का सबसे अधिक असर ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों पर, आम नागरिकों में बढ़ी चिंता

    युगचरण न्यूज़ / 15-07-2026 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। हालिया घटनाक्रम में ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों ने स्थानीय आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का समझौता नहीं होता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) पर भी हमले तेज करने की चेतावनी दी है। इस बीच ईरान के दक्षिणी समुद्री तटों पर स्थित कई क्षेत्रों में लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ने से आम नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। दक्षिणी तटीय इलाकों पर लगातार हमले रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी है। इन इलाकों का सामरिक महत्व काफी अधिक माना जाता है क्योंकि ये फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में इन क्षेत्रों के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, जिसके कारण स्थानीय नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। कई इलाकों में लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि संबंधित पक्षों द्वारा सभी सैन्य अभियानों का विस्तृत आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। नागरिक बुनियादी ढांचे को लेकर बढ़ी आशंका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस बयान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि अगले सप्ताह तक कोई समझौता नहीं होता है तो ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के नागरिक ढांचे पर हमले की संभावना मानवीय संकट को और गंभीर बना सकती है। हालांकि इस संबंध में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर अभी कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। सबसे अधिक प्रभावित हो रहे तटीय समुदाय ईरान का दक्षिणी समुद्री तट सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में मछुआरे, बंदरगाह कर्मचारी, व्यापारी और समुद्री परिवहन से जुड़े लोग रहते हैं। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इन समुदायों की आजीविका पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। समुद्री गतिविधियों में व्यवधान, सुरक्षा प्रतिबंध और संभावित संघर्ष की स्थिति ने स्थानीय लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों के निकट स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। विश्व के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। पिछले कुछ समय से इस समुद्री मार्ग के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के समानांतर क्षेत्र के कई अन्य देशों में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ता है तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया में देखने को मिल सकता है। कई देशों ने अपने नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। आम नागरिकों पर पड़ रहा असर लगातार जारी संघर्ष का सबसे बड़ा असर स्थानीय नागरिकों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा संबंधी अनिश्चितता, संभावित हवाई हमलों की आशंका और सैन्य गतिविधियों के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। कई परिवार भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। मानवीय संगठनों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द नहीं रुका तो प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास की आवश्यकता बढ़ सकती है। वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है प्रभाव विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। यदि समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ते हैं तो शिपिंग लागत में वृद्धि, बीमा प्रीमियम में इजाफा और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कूटनीतिक समाधान की जरूरत अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान परिस्थिति में सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक वार्ता ही स्थायी समाधान का रास्ता हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से मतभेद दूर करने का प्रयास करते हैं, तो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम किया जा सकता है और आम नागरिकों को राहत मिल सकती है।   फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियां, संभावित नए हमलों की आशंका और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

    भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते से बदल सकती है बाजार की तस्वीर, कपड़ा उद्योग से लेकर स्कॉच व्हिस्की तक मिलेगा बड़ा लाभ

    युगचरण न्यूज़ / 15-07-2026 भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लागू हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही भारत के निर्यातकों, उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे अधिक लाभ वस्त्र उद्योग, रेडीमेड गारमेंट्स, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल, फुटवियर और कई अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पाद, विशेषकर स्कॉच व्हिस्की, आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है। हालांकि व्यापार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस समझौते का वास्तविक प्रभाव धीरे-धीरे सामने आएगा। केवल शुल्क (टैरिफ) कम होने से व्यापार में स्वतः वृद्धि नहीं होगी, बल्कि उद्योगों को नए नियमों के अनुरूप अपनी रणनीति भी बदलनी होगी। कई वर्षों की बातचीत के बाद लागू हुआ समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। लंबी वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया और अब यह आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है। यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को समाप्त या काफी कम किया गया है। वहीं भारत में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत ब्रिटिश उत्पादों पर भी आयात शुल्क में राहत दी गई है। ब्रिटिश सरकार का अनुमान है कि इस समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा और द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारतीय वस्त्र उद्योग को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा भारत का वस्त्र एवं होम टेक्सटाइल उद्योग इस समझौते से सबसे अधिक लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में शामिल माना जा रहा है। अब तक भारतीय उत्पादों पर ब्रिटेन में लगभग 12 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों को विशेष व्यापार योजनाओं के तहत शुल्क में छूट मिलती थी। इस कारण भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ता था। अब शुल्क कम होने के बाद भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय कपड़ा उद्योग, रेडीमेड गारमेंट्स, बेडशीट, तौलिया, कालीन और घरेलू वस्त्रों की मांग में वृद्धि हो सकती है। रेडीमेड गारमेंट्स क्षेत्र के लिए सुनहरा अवसर बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिटेन में रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) के आयात में चीन की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों से लगातार घट रही है। बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक कंपनियों द्वारा वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश के कारण भारत के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत ब्रिटेन के रेडीमेड परिधान बाजार में अपनी हिस्सेदारी लगभग दोगुनी कर सकता है। इसके अलावा बांग्लादेश में हाल के वर्षों में उत्पन्न सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का भी कुछ लाभ भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है। स्कॉच व्हिस्की हो सकती है सस्ती इस व्यापार समझौते का एक बड़ा प्रभाव ब्रिटेन से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की पर भी देखने को मिल सकता है। समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर भारत में लगने वाला आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद अगले दस वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। आयातकों का मानना है कि इससे ब्रिटिश शराब कंपनियों को भारत में अधिक प्रतिस्पर्धी बाजार मिलेगा। हालांकि खुदरा कीमतों में वास्तविक कमी आने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि कंपनियां पहले नई व्यापार व्यवस्था के अनुसार अपनी आपूर्ति श्रृंखला, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और आयात प्रणाली को व्यवस्थित करेंगी। व्यापारिक कंपनियां कर रही हैं तैयारी समझौता लागू होने के बाद कई भारतीय और ब्रिटिश कंपनियों ने अपनी व्यापारिक रणनीतियों में बदलाव शुरू कर दिया है। कई भारतीय निर्यातक ब्रिटिश कंपनियों के साथ दीर्घकालिक व्यापार योजनाओं पर काम कर रहे हैं। वहीं आयातक कंपनियां नए सीमा शुल्क नियमों, मूल प्रमाणपत्र (Certificate of Origin), लॉजिस्टिक्स और कस्टम प्रक्रियाओं को लेकर तैयारी कर रही हैं ताकि उन्हें शुल्क में मिलने वाली छूट का पूरा लाभ मिल सके। व्यापार जगत का मानना है कि शुरुआती चरण में तैयारी पर अधिक ध्यान रहेगा और वास्तविक व्यापारिक विस्तार अगले कुछ वर्षों में दिखाई देगा। विशेषज्ञ बोले— बदलाव होगा, लेकिन धीरे-धीरे व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते को लेकर अत्यधिक उत्साहित होने के बजाय इसके व्यावहारिक प्रभावों को समझना जरूरी है। भारत के कई उत्पाद पहले भी ब्रिटेन में कम शुल्क या शुल्क-मुक्त व्यवस्था के तहत प्रवेश कर रहे थे। ऐसे में हर क्षेत्र को समान लाभ नहीं मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार असली सफलता इस बात से तय होगी कि जिन उत्पादों पर पहले 4 से 16 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, क्या अब उनके निर्यात ऑर्डर बढ़ते हैं, निर्यात मात्रा में वृद्धि होती है और कंपनियों का लाभ बढ़ता है। इन संकेतकों के आधार पर अगले एक से तीन वर्षों में इस समझौते की वास्तविक सफलता का आकलन किया जा सकेगा। अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हालांकि शुल्क में कमी के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ब्रिटेन ने कुछ उत्पादों, विशेष रूप से स्टील आयात पर सुरक्षा संबंधी सीमाएं लागू रखी हैं। इसके अलावा प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) भी भारतीय निर्यातकों के लिए अतिरिक्त लागत का कारण बन सकता है। यदि कार्बन उत्सर्जन से जुड़े नए शुल्क लागू होते हैं, तो कुछ क्षेत्रों में एफटीए से मिलने वाले लाभ का असर कम हो सकता है। छोटे उद्योगों के सामने जागरूकता की चुनौती भारत में पहले हुए कई मुक्त व्यापार समझौतों का पूरा लाभ छोटे और मध्यम उद्योग नहीं उठा सके क्योंकि उन्हें नियमों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एफटीए का लाभ तभी मिलता है जब निर्यातक निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक प्रमाणपत्र तैयार करें और विदेशी खरीदारों को शुल्क में हुई कमी की जानकारी दें। यदि उद्योगों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला तो केवल समझौता लागू होने से निर्यात में स्वतः वृद्धि नहीं होगी। सरकार और उद्योग संगठनों की होगी अहम भूमिका विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों को मिलकर छोटे और मध्यम उद्यमों को नए नियमों की जानकारी देनी होगी। निर्यातकों को यह समझाना आवश्यक होगा कि किस प्रकार वे मूल प्रमाणपत्र प्राप्त करें, नए दस्तावेज तैयार करें और शुल्क में मिली छूट का लाभ उठाकर अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेच सकें। यदि यह प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उपभोक्ताओं को भी मिलेगा फायदा इस समझौते का लाभ केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिल सकता है। यदि व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षा के अनुरूप बढ़ती हैं, तो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार की वार्षिक वृद्धि दर वर्तमान 10–12 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।   कुल मिलाकर भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव तत्काल दिखाई देने के बजाय आने वाले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे सामने आएगा। यदि उद्योग नए नियमों के अनुसार स्वयं को ढालने में सफल रहते हैं और सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करती है, तो यह समझौता भारतीय निर्यात, निवेश और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

    सोनम वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, अस्पताल में भर्ती कर जबरन पोषण देने की मांग

    युगचरण न्यूज़ / 15-07-2026 लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंताओं के बीच अब यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक जनहित याचिका (PIL) में अदालत से मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और आवश्यक होने पर उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में पोषण उपलब्ध कराया जाए ताकि उनके जीवन की रक्षा की जा सके। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी इस अनशन ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर विपक्षी दल और कई सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी लगातार गिरती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग भी तेज हो गई है। हाईकोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने जनहित याचिका दाखिल करने की अनुमति मांगी। याचिका में कहा गया कि सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि सोनम वांगचुक को तत्काल किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्हें आवश्यक तरल पोषण, विटामिन तथा अन्य जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि किसी व्यक्ति का जीवन गंभीर खतरे में हो, तो राज्य का दायित्व है कि वह उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करे। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की अनुमति दी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत इस बात पर विचार कर सकती है कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासन को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही सामने आएगा। 18 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन अनशन सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे हैं। उनका यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई विभिन्न मांगों के समर्थन में चल रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले सरकार को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए समय दिया था। निर्धारित समयसीमा तक अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी। समय बीतने के साथ उनका अनशन लंबा होता गया और अब उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता लंबे समय तक भोजन न करने के कारण सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि उनका वजन काफी कम हो चुका है और शरीर में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उपवास रहने से शरीर में ऊर्जा की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, मांसपेशियों का क्षय, रक्तचाप में गिरावट और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी कारण अदालत में दायर याचिका में उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन सोनम वांगचुक के आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों का समर्थन मिल रहा है। हाल के दिनों में कई प्रमुख हस्तियां जंतर-मंतर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर चुकी हैं। उन्होंने एक ओर उनकी मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की। समर्थकों का कहना है कि सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। अनशन समाप्त करने पर अभी नहीं लिया गया फैसला हालांकि कई लोगों ने सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन फिलहाल उनकी ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच लगातार बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण प्रशासन और चिकित्सा विशेषज्ञ भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जबरन भोजन कराने पर कानूनी और नैतिक बहस सोनम वांगचुक के मामले ने एक बार फिर उस बहस को जन्म दिया है कि क्या किसी अनशनकारी को उसकी इच्छा के विरुद्ध चिकित्सकीय रूप से भोजन या पोषण देना उचित है। एक पक्ष का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का जीवन खतरे में हो तो राज्य का दायित्व है कि वह उसकी जान बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। वहीं दूसरा पक्ष इसे व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय मानता है। इसी कारण अदालत के समक्ष यह मामला केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और राज्य की जिम्मेदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न भी बन गया है। आगे क्या होगा? अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार और प्रशासन को क्या निर्देश दिए जाने चाहिए। यदि अदालत चिकित्सा हस्तक्षेप का आदेश देती है, तो प्रशासन को उसके अनुरूप कार्रवाई करनी पड़ सकती है। वहीं यदि अदालत पहले संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सुनने का निर्णय लेती है, तो मामले में आगे और सुनवाई हो सकती है।   फिलहाल जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन जारी है और उनके समर्थक लगातार उनके साथ मौजूद हैं। दूसरी ओर, उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए देशभर में चिंता बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।