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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन

    3 months ago

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस अत्यंत उत्साह, गरिमा एवं सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया। गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष समारोह को और अधिक व्यापक, सहभागी एवं वैचारिक रूप प्रदान किया गया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों में मातृभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यावहारिक उपयोग के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करना तथा भाषाई विविधता के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः विश्वविद्यालय परिसर में सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभिक उद्बोधन में वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि मातृभाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक चेतना और बौद्धिक विकास की मूल आधारशिला है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा विविध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, काव्य-पाठ, लोकभाषा गायन, पोस्टर प्रस्तुति तथा नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

     भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता में ‘नई शिक्षा नीति और मातृभाषा’, ‘डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं की संभावनाएँ’, तथा ‘भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता’ जैसे समसामयिक विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों ने तर्कसंगत विश्लेषण, भाषा की सशक्त अभिव्यक्ति एवं शोधपूर्ण दृष्टिकोण से निर्णायकों को प्रभावित किया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने मातृभाषा को संवेदना, ज्ञान और संस्कारों की वाहक बताते हुए यह रेखांकित किया कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसकी भाषाई जड़ों से जुड़ी होती है। काव्य-पाठ में विद्यार्थियों ने हिंदी सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में रचनाएँ प्रस्तुत कर भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया। लोकभाषा गायन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष रंग प्रदान किया। राजस्थान, हरियाणा, बिहार और अन्य राज्यों की लोकधुनों ने यह सिद्ध किया कि क्षेत्रीय भाषाएँ और बोलियाँ आज भी जनमानस में सजीव एवं प्रासंगिक हैं। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने मातृभाषा की उपेक्षा से उत्पन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक का संदेश स्पष्ट था-“यदि भाषा सुरक्षित है, तो संस्कृति सुरक्षित है।” कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रो चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा- “मातृभाषा व्यक्ति को उसकी जड़ों से जोड़ती है और आत्मविश्वास को सशक्त बनाती है।”

    प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा- “मातृभाषा में शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार है।” प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने वैश्विक संदर्भ में भारतीय भाषाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा- “अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के साथ-साथ अपनी मातृभाषाओं का सम्मान ही हमें वैश्विक मंच पर विशिष्ट पहचान दिला सकता है।” मानविकी विभागाध्यक्ष डॉ. सीता राम माली ने मातृभाषा को सांस्कृतिक स्मृति का आधार बताया। डॉ. प्रेम कुमार ने भाषा संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताते हुए युवाओं को इसके प्रति सजग रहने का आह्वान किया। डॉ. जितेंद्र सिंह चौधरी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आधुनिकता और परंपरा का संतुलन ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है। इसी प्रकार डॉ कुलदीप शर्मा, डॉ पी एस रघु ने भी अपने विचार व्यक्त किए , कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। पूरे परिसर में भाषाई गौरव, सांस्कृतिक आत्मबोध एवं बौद्धिक संवाद का वातावरण व्याप्त रहा।

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