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    अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज: अमेरिकी हवाई हमले जारी, खाड़ी देशों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई, हॉर्मुज़ में बढ़ा तनाव

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026

    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष लगातार तीसरे दिन भी जारी है। सोमवार देर रात अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए, जबकि इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई स्थानों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए तेल टैंकरों, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों में मौजूद सैन्य परिसंपत्तियों को निशाना बनाया। बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल समुद्री मार्ग से गुजरता है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार सोमवार रात शुरू हुआ सैन्य अभियान लगभग पांच घंटे तक चला। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक समुद्री यातायात पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

    अमेरिकी सेना के अनुसार, हमलों के दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा द्वीप और बंदर अब्बास सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने भी दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर विस्फोटों की पुष्टि की है। बंदर अब्बास, किश द्वीप, क़ेश्म द्वीप और बुशेहर प्रांत के कई इलाकों में रातभर धमाकों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। हालांकि ईरान ने दावा किया कि अधिकांश स्थानों पर नुकसान सीमित रहा और कुछ हमलों में कोई जनहानि नहीं हुई।

    अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों के कई ठिकानों को निशाना बनाया।

    संयुक्त अरब अमीरात ने पुष्टि की कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे उसके दो तेल टैंकर ईरानी क्रूज़ मिसाइलों की चपेट में आ गए। ओमान के जलक्षेत्र में हुए इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई जबकि आठ अन्य चालक दल के सदस्य घायल हो गए। दोनों जहाजों में आग लग गई थी, लेकिन चालक दल ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और बड़ी दुर्घटना टल गई।

    ईरानी मीडिया ने दावा किया कि जिन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे कथित रूप से प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी ड्रोन हमले करने का दावा किया है। सरकारी प्रसारण माध्यम के अनुसार ड्रोन हमलों का लक्ष्य अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल प्रणाली, ईंधन भंडारण केंद्र, संचार नेटवर्क और गोला-बारूद डिपो थे।

    बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने अल-जुफैर स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे, हथियार भंडार और अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए। बहरीन में कई बार हवाई हमले के सायरन बजाए गए और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया।

    जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली चार मिसाइलों को मार गिराया। दूसरी ओर ईरान ने दावा किया कि उसका लक्ष्य जॉर्डन नहीं बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे थे। ईरान की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि जॉर्डन की जनता से उसका कोई विरोध नहीं है और कार्रवाई केवल अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के खिलाफ की गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगातार कमजोर कर रहा है, लेकिन यदि ईरान तैयार हो तो कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी भी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए खाड़ी देशों को भी सुरक्षा लागत में योगदान देना चाहिए।

    ट्रंप ने ईरान के एक कथित रणनीतिक परमाणु स्थल "पिकऐक्स माउंटेन" को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी। इसके अलावा अमेरिका ने घोषणा की कि ईरान के दक्षिणी समुद्री तट और बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू की जाएगी। यह नाकाबंदी निर्धारित समय के अनुसार प्रभावी होने की बात कही गई है।

    दूसरी ओर ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर संसद में नया विधेयक पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रणनीतिक सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

    बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समुद्री जहाजों की निगरानी करने वाली एजेंसियों के अनुसार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगभग आधी गिरावट आई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार कर रही हैं, जबकि बीमा कंपनियों ने युद्ध जोखिम प्रीमियम भी बढ़ाना शुरू कर दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। भारत सहित अनेक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से पूरा होता है।

     

    फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में बढ़ता है, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

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