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    अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर समाप्त, होरमुज जलडमरूमध्य और जमे हुए फंड पर रही मुख्य चर्चा

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 2 जुलाई 2026

    कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का एक और दौर संपन्न हो गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने दो दिनों तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, हालांकि स्थायी शांति या किसी बड़े समझौते की दिशा में कोई निर्णायक प्रगति सामने नहीं आई। बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से होरमुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की बहाली और ईरान की विदेशों में जमी वित्तीय संपत्तियों को मुक्त कराने जैसे विषय रहे।

    दोनों देशों के बीच हाल के संघर्ष के बाद यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कतर ने इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और आगे भी संवाद जारी रखने की इच्छा जताई है।

    तकनीकी मुद्दों पर रही विस्तृत चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस दौर की बातचीत मुख्य रूप से उन बिंदुओं पर केंद्रित रही जो जून में हुए अंतरिम समझौते का हिस्सा थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विषय होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों तक उसकी पहुंच शामिल रही।

    बताया गया कि दोनों पक्षों ने इन तकनीकी विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया, लेकिन परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों पर इस दौर में चर्चा नहीं हुई।

    परमाणु कार्यक्रम पर बाद में होगी चर्चा

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषयों पर भविष्य की बैठकों में विस्तार से बातचीत होगी। उनका कहना था कि फिलहाल प्राथमिकता उन मुद्दों को लागू करने पर है जिन पर पहले से सहमति बन चुकी है।

    दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई।

    अगली बैठक खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद

    कतर के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि अगली बैठक ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद आयोजित की जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान दौर की वार्ता में अंतरिम समझौते से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर सकारात्मक प्रगति हुई है और आगे की बातचीत इन्हीं आधारों पर जारी रहेगी।

    होरमुज जलडमरूमध्य बना सबसे अहम मुद्दा

    होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

    हाल के सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। अब दोनों देश इस समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उसने संकेत दिया है कि अगस्त के मध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लागू किया जा सकता है, जबकि अंतरिम समझौते के तहत फिलहाल सीमित अवधि तक राहत दी गई है।

    तेल बाजार पर दिखा असर

    वार्ता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के सकारात्मक बयान से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और कई वैश्विक विश्लेषकों ने आने वाले महीनों के लिए अपने मूल्य अनुमान कम कर दिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिल सकती है।

    जहाज फंसने की घटना भी चर्चा में

    ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, एक विदेशी कंटेनर जहाज निर्धारित नौवहन मार्ग से हटकर उथले पानी में फंस गया। हालांकि इस घटना से समुद्री यातायात पर व्यापक असर नहीं पड़ा, लेकिन इसने क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं जरूर पैदा कर दी हैं।

    यूरोपीय देशों की भी नजर

    कई यूरोपीय देशों ने आवश्यकता पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा और बारूदी सुरंगों की सफाई में सहयोग देने की इच्छा जताई है। हालांकि जर्मनी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह किसी सैन्य अभियान में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा क्योंकि इस संबंध में ईरान का सहयोग सीमित है।

    दोनों पक्षों ने नहीं दिया स्पष्ट संकेत

    वार्ता समाप्त होने के बाद न तो अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और न ही ईरानी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि विवादित मुद्दों पर कोई अंतिम सहमति बनी है। ईरान के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने केवल इतना कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है और आगे की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संवाद भविष्य में बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी समझौतों की नींव तैयार कर सकता है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं। आने वाले दौर की वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंध जैसे विषय प्रमुख एजेंडा बनने की संभावना है।

     
     
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