Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव पहले दिया था केंद्र ने, लेकिन CJP ने ठुकराया: सूत्र

    2 hours ago

    Yugcharan News / 28 जुलाई 2026

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चले विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत को लेकर एक नया खुलासा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उनका मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन CJP ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    बताया जा रहा है कि आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से गतिरोध समाप्त करने के लिए यह पहला औपचारिक प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी प्रमुख मांग केवल मंत्रालय परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा है।

    पहली बैठक में दिया गया था मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव

    सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई को हुई पहली वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह बैठक उस समय हुई जब संसद मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई चल रही थी।

    सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में सरकार की ओर से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन CJP के प्रतिनिधियों ने इसे तुरंत अस्वीकार कर दिया और कहा कि आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान मंत्रिमंडल से पूरी तरह इस्तीफा नहीं देते।

    CJP अपनी मांग पर अड़ा रहा

    सूत्रों के अनुसार, CJP के वार्ताकारों का मानना था कि यदि वे केवल मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव पर सहमत हो जाते, तो आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के बीच इसका नकारात्मक संदेश जाता। उनका कहना था कि इससे आंदोलन की विश्वसनीयता प्रभावित होती और प्रदर्शनकारियों में असंतोष फैल सकता था।

    बताया गया कि CJP ने सरकार को स्पष्ट रूप से संदेश दिया कि आंदोलन की मूल मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है और इससे कम किसी भी विकल्प को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    भाजपा ने दावों को बताया निराधार

    इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही गई है।

    भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मीडिया में चल रही खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और मंत्रालय बदलने संबंधी दावे तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की खबरें वास्तविक घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही हैं।

    इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ आंदोलन

    धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के कुछ घंटे बाद केंद्र सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।

    सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह निर्णय सामने आया, जिससे कई दिनों से जारी गतिरोध खत्म हुआ।

    विपक्ष भी केवल मंत्रालय परिवर्तन के खिलाफ था

    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पहले कहा था कि केवल मंत्रालय बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में उत्पन्न विवादों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और इसके लिए शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना आवश्यक है।

    उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा था कि केवल विभाग बदल देना छात्रों और विपक्ष दोनों के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।

    इस्तीफे में क्या कहा धर्मेंद्र प्रधान ने?

    अपने इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर जारी दो पन्नों के पत्र में कहा कि उन्होंने देशहित और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।

    उन्होंने लिखा कि यदि आंदोलन का राजनीतिक या अन्य तत्व लाभ उठाते हैं तो इससे देश की एकता और छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी जटिलताओं में फंसे या पढ़ाई प्रभावित हो। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

    आगे की स्थिति पर सभी की नजर

    हालांकि आंदोलन फिलहाल समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच हुए समझौते के अन्य बिंदुओं पर सभी की नजर बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और अन्य सहमतियों को लेकर आगे भी प्रशासनिक कार्रवाई जारी रह सकती है।

    सरकार की ओर से अभी तक मंत्रालय बदलने के कथित प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जबकि भाजपा ने ऐसे सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। दूसरी ओर, आंदोलनकारी पक्ष का कहना है कि उनकी प्राथमिक मांग पूरी होने के बाद ही आंदोलन समाप्त किया गया।

     
     
     
    Click here to Read More
    Previous Article
    सिएटल के स्पेस नीडल के पास गोलीबारी, 3 लोगों की मौत, 5 घायल; एक आरोपी गिरफ्तार
    Next Article
    जंतर-मंतर प्रदर्शन में RAF ने दिल्ली पुलिस अधिकारी के निर्देश पर चलाई पेललेट गन? दस्तावेज़ में बड़ा दावा

    Related विदेश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment