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    वीजीयू में दो दिवसीय एमटीटीएस गणित प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यशाला का सफल समापन

    2 hours ago

    विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने गणितीय अवधारणाओं, समस्या समाधान एवं विश्लेषणात्मक कौशल को किया सुदृढ़

    विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू), जयपुर के विज्ञान विभाग द्वारा मैथेमेटिक्स ट्रेनिंग एंड टैलेंट सर्च (एमटीटीएस) ओवरचर के अंतर्गत एमटीटीएस ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे दो दिवसीय गणित प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यशाला आयोजन का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 8 एवं 9 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणितीय अवधारणाओं की मजबूत समझ विकसित करने के साथ-साथ समस्या समाधान, तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और अकादमिक कौशल को बढ़ावा देना था। कार्यशाला का आयोजन एवं समन्वय प्रो. (डॉ.) पिंकी लाटा तथा डॉ. मुरली मनोहर गौड़ द्वारा किया गया।

    कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विभिन्न अकादमिक सत्रों में विशेषज्ञों से गणितीय विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यशाला में आठ सत्र आयोजित किए गए। प्रत्येक अकादमिक सत्र के बाद विद्यार्थियों के लिए समस्या समाधान एवं संवादात्मक चर्चा सत्र रखे गए, जिनमें विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा और गणितीय समस्याओं को हल करने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की। कार्यशाला में आयोजित चर्चा सत्रों में विद्यार्थियों को केवल विषय की सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए उसे समस्याओं के समाधान में लागू करने का अवसर मिला। विशेषज्ञों के साथ संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया। 

    कार्यशाला में शिव नादर विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के गणित विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए. सत्यनारायण रेड्डी ने विषय पर विस्तार से चर्चा की और उसके उपरांत कहा कि ऐसे प्रशिक्षण एवं प्रतिभा खोज कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की पढ़ाई से आगे बढ़कर विशेषज्ञों से सीखने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। वही जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय, जयपुर की गणित विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मानुषी गुप्ता ने विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, अभ्यास और जिज्ञासा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बदलते शैक्षणिक एवं तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों के लिए विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एन. डी. माथुर ने कहा कि गणित केवल एक विषय नहीं, बल्कि तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों को गणितीय समस्याओं को केवल हल करने के बजाय उनके पीछे की अवधारणाओं और तर्क को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विज्ञान विभाग, विशेषज्ञों और आयोजन टीम को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के ज्ञान एवं प्रतिभा के विकास के लिए ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करता रहेगा। साथ ही प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) डी.वी.एस. भागवानुलु ने कहा कि विद्यार्थियों का समग्र विकास केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। गणित जैसे विषय विद्यार्थियों में तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता, धैर्य और समस्या समाधान की प्रवृत्ति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को विषय की गहराई से समझ विकसित करने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सही दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यशाला के अंतिम चरण में आयोजित समापन समारोह में एफबीएएस विभाग की डीन प्रो (डॉ.) मृदुला पुरोहित ने समापन संबोधन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को गणितीय अध्ययन के प्रति निरंतर जिज्ञासा बनाए रखने तथा प्राप्त ज्ञान को अपने अकादमिक विकास में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों ने कार्यशाला के अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्रों और समस्या समाधान गतिविधियों ने गणितीय विषयों को समझने तथा प्रश्नों के तार्किक समाधान खोजने में उन्हें सहायता प्रदान की। कार्यशाला के अंत में विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. गोविंद सहाय शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन टीम तथा सभी प्रतिभागियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यशाला को सफल बनाने में उनके योगदान की सराहना की। दो दिवसीय कार्यशाला ने विद्यार्थियों को गणितीय ज्ञान के साथ-साथ तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और संवादात्मक सीखने का उपयोगी अनुभव प्रदान किया। वीजीयू के विज्ञान विभाग की यह पहल विद्यार्थियों की अकादमिक क्षमताओं को मजबूत करने तथा उनमें गणितीय प्रतिभा को पहचानने और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। 

     

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