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    लालिथा ज्वेलरी आईपीओ की लिस्टिंग पर नजर, ग्रे मार्केट प्रीमियम से ₹260 तक पहुंचने के संकेत

    4 hours ago

    Yugcharan News / 21 August 2026

    लालिथा ज्वेलरी मार्ट के आईपीओ को निवेशकों की ओर से मिली मजबूत प्रतिक्रिया के बाद अब बाजार की नजर कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग पर है। कंपनी के शेयर सोमवार, 24 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में चल रहे प्रीमियम के आधार पर शेयरों की शुरुआत इश्यू प्राइस से ऊपर होने के संकेत मिल रहे हैं।

    उपलब्ध बाजार संकेतों के अनुसार, लालिथा ज्वेलरी के शेयर लगभग ₹260 प्रति शेयर के स्तर पर सूचीबद्ध हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह ₹201 के ऊपरी इश्यू प्राइस की तुलना में करीब ₹59 या 29.35 प्रतिशत का प्रीमियम होगा।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP आधिकारिक शेयर बाजार का आंकड़ा नहीं होता। यह अनौपचारिक बाजार में निवेशकों की धारणा को दर्शाता है और वास्तविक लिस्टिंग मूल्य इससे अलग हो सकता है। इसलिए केवल GMP के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता।

    मजबूत सब्सक्रिप्शन से बढ़ी उम्मीदें

    लालिथा ज्वेलरी मार्ट का ₹1,700 करोड़ का मेनबोर्ड आईपीओ 17 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। कंपनी ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर ₹201 का मूल्य तय किया था। शेयरों को बीएसई और एनएसई दोनों पर सूचीबद्ध किया जाना प्रस्तावित है।

    आईपीओ को निवेशकों की विभिन्न श्रेणियों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और यह कुल मिलाकर 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें संस्थागत निवेशकों की ओर से विशेष रूप से मजबूत मांग देखने को मिली।

    क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB श्रेणी में सदस्यता लगभग 154 गुना रही। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का हिस्सा करीब 78 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना सब्सक्राइब हुआ। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को भी लगभग 9.10 गुना सदस्यता मिली।

    इस मजबूत मांग को संभावित लिस्टिंग प्रदर्शन के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आईपीओ की मांग और ग्रे मार्केट संकेतों के बावजूद लिस्टिंग के दिन शेयर का वास्तविक प्रदर्शन बाजार की स्थिति और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगा।

    आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल

    लालिथा ज्वेलरी के ₹1,700 करोड़ के इश्यू में लगभग ₹1,200 करोड़ का फ्रेश इश्यू और करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था।

    फ्रेश इश्यू से प्राप्त राशि का प्रमुख इस्तेमाल कंपनी के स्टोर नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जाना है। कंपनी ने इसके अलावा कुछ राशि को सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की योजना भी बताई है।

    कंपनी का स्टोर विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब देश के संगठित आभूषण बाजार में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के ब्रांडों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। नए स्टोर खोलने के माध्यम से कंपनी अपनी पहुंच बढ़ाने और मौजूदा बाजारों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार करने का प्रयास कर रही है।

    दक्षिण भारत में मजबूत मौजूदगी

    लालिथा ज्वेलरी मार्ट मुख्य रूप से दक्षिण भारत के आभूषण बाजार में कारोबार करती है। कंपनी लालिथा ब्रांड के तहत सोने, चांदी और हीरे के आभूषण बेचती है।

    कंपनी के पास तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पुडुचेरी में कुल 61 स्टोर होने की जानकारी दी गई है। इनमें बड़ी संख्या में स्टोर टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं।

    वित्त वर्ष 2026 में इन छोटे और मध्यम शहरों से कंपनी के राजस्व का लगभग 60.25 प्रतिशत हिस्सा आया। यह कंपनी की रणनीति में गैर-महानगरीय बाजारों के महत्व को दर्शाता है।

    कंपनी ने यह भी दावा किया है कि प्रमुख संगठित ज्वेलरी कंपनियों की तुलना में उसका प्रति स्टोर ऑपरेटिंग रेवेन्यू मजबूत है। इस तुलना में Kalyan Jewellers, PC Jeweller, P N Gadgil Jewellers, Senco Gold, Titan Company और Tribhovandas Bhimji Zaveri जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी

    आईपीओ से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 177 प्रतिशत बढ़कर ₹1,009.8 करोड़ हो गया।

    इसी अवधि में कंपनी का राजस्व करीब 48.1 प्रतिशत बढ़कर ₹25,023.9 करोड़ पहुंच गया। राजस्व और मुनाफे में यह वृद्धि निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है।

    हालांकि, पिछले वित्तीय प्रदर्शन को भविष्य के शेयर प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता। ज्वेलरी कारोबार में सोने की कीमतों, उपभोक्ता मांग, प्रतिस्पर्धा, मार्जिन और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का कंपनी के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

    GMP से क्या संकेत मिल रहे हैं?

    ग्रे मार्केट प्रीमियम का इस्तेमाल अक्सर आईपीओ की संभावित लिस्टिंग कीमत का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। लालिथा ज्वेलरी के मामले में करीब ₹260 का GMP-आधारित अनुमान ₹201 के इश्यू प्राइस से लगभग ₹59 अधिक है।

    इस हिसाब से संभावित प्रीमियम करीब 29.35 प्रतिशत बैठता है। यदि लिस्टिंग वास्तव में इसी स्तर के आसपास होती है, तो आईपीओ निवेशकों को लिस्टिंग पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

    लेकिन GMP अनौपचारिक बाजार का संकेतक है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है। इसलिए निवेशकों को लिस्टिंग से पहले और लिस्टिंग के दिन बाजार की वास्तविक परिस्थितियों पर भी नजर रखनी होगी।

    निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

    लालिथा ज्वेलरी आईपीओ की मजबूत सदस्यता, कंपनी का दक्षिण भारत में स्थापित नेटवर्क और वित्तीय प्रदर्शन बाजार की सकारात्मक उम्मीदों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दूसरी ओर, ज्वेलरी क्षेत्र में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, प्रतिस्पर्धा और स्टोर विस्तार से जुड़े खर्च जैसे जोखिम भी मौजूद रहते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आईपीओ में निवेश का निर्णय केवल संभावित लिस्टिंग लाभ को देखकर नहीं लिया जाना चाहिए। कंपनी का कारोबार, वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन, विकास की संभावनाएं और जोखिमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    24 अगस्त को होने वाली संभावित लिस्टिंग से यह स्पष्ट होगा कि ग्रे मार्केट में दिखाई दे रही निवेशकों की धारणा वास्तविक शेयर बाजार में किस हद तक दिखाई देती है। यदि बाजार परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मांग मजबूत बनी रहती है, तो शेयर इश्यू प्राइस से ऊपर शुरुआत कर सकता है। हालांकि, अंतिम लिस्टिंग मूल्य केवल एक्सचेंज पर वास्तविक कारोबार शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

     

    निवेश संबंधी सावधानी: ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक और बदलता रहने वाला संकेतक है। निवेशकों को किसी भी निर्णय से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों, वित्तीय आंकड़ों और प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की राय पर विचार करना चाहिए।

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