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    दिल्ली की हवा फिर बिगड़ी, AQI 129 पर पहुंचा; सितंबर में पांच साल में सबसे कम औसत का दावा

    1 hour ago

    Yugcharan News / 01-10-2026

    नई दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 129 तक पहुंच गया, जिसके बाद शहर की हवा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वर्गीकरण के अनुसार ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गई है। इससे पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार करीब पांच दिनों तक ‘संतोषजनक’ स्तर पर बनी हुई थी।

    वायु गुणवत्ता में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब राजधानी में सर्दियों का मौसम करीब आ रहा है। इस अवधि में हवा की गति, तापमान, स्थानीय प्रदूषण और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं सहित कई कारक दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

    वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता पिछले चार वर्षों के सितंबर महीने की तुलना में कम रही। इससे आने वाले महीनों में प्रदूषण की स्थिति को लेकर निगरानी और एहतियाती कदमों का महत्व बढ़ गया है।

    AQI 129 होने का क्या मतलब है?

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित पैमाने के अनुसार 0 से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’ माना जाता है। 51 से 100 तक की वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आती है, जबकि 101 से 200 के बीच AQI को ‘मध्यम’ माना जाता है।

    इसके बाद 201 से 300 के बीच AQI ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

    इस लिहाज से दिल्ली का 129 AQI फिलहाल ‘मध्यम’ श्रेणी में है। इसका मतलब यह है कि राजधानी की वायु गुणवत्ता अभी खराब या गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंची है, लेकिन पिछले कुछ दिनों के मुकाबले इसमें गिरावट जरूर दर्ज हुई है।

    पांच दिन तक संतोषजनक रही थी हवा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता इससे पहले लगातार पांच दिनों तक संतोषजनक स्तर पर बनी हुई थी। इसके बाद AQI बढ़कर 129 पहुंच गया।

    सितंबर के दौरान अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता के बाद अक्टूबर की शुरुआत में AQI में आया यह बदलाव आने वाले दिनों की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करता है। सर्दियों की ओर बढ़ते समय प्रदूषण से जुड़े कई कारक एक साथ प्रभाव डाल सकते हैं।

    दिल्ली-एनसीआर में स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के अलावा आसपास के राज्यों में कृषि अवशेष जलाने की घटनाओं पर भी लगातार निगरानी रखी जाती है।

    छह राज्यों में 114 पराली जलाने की घटनाएं

    15 सितंबर से 30 सितंबर के बीच छह राज्यों में कुल 114 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें सबसे अधिक 59 घटनाएं पंजाब में दर्ज हुईं।

    उत्तर प्रदेश में 32, मध्य प्रदेश में 17, हरियाणा में तीन, राजस्थान में दो और दिल्ली में एक पराली जलाने की घटना दर्ज की गई।

    इन आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के दूसरे पखवाड़े में पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की गतिविधियां अन्य राज्यों की तुलना में अधिक दर्ज की गईं। हालांकि, दिल्ली के AQI पर इन घटनाओं का वास्तविक प्रभाव कितना रहा, इसे निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक आकलन और विभिन्न प्रदूषण स्रोतों के योगदान का अध्ययन जरूरी होता है।

    IARI के आंकड़ों में भी पराली जलाने की घटनाएं

    भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब और उत्तर प्रदेश में सात-सात स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं पाई गईं। मध्य प्रदेश में चार और हरियाणा में एक स्थान पर ऐसी घटना दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।

    पराली जलाने का मौसम आमतौर पर खरीफ फसल की कटाई के आसपास शुरू होता है। इस दौरान कृषि अवशेषों को जल्दी साफ करने के लिए कुछ क्षेत्रों में किसान उन्हें खेत में जला देते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर धुएं और प्रदूषण की मात्रा बढ़ सकती है।

    दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर पराली के धुएं का प्रभाव मौसम संबंधी परिस्थितियों और हवा की दिशा सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी एक दिन के AQI में बदलाव को केवल पराली जलाने की घटनाओं से जोड़ना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

    सितंबर के औसत पर भी नजर

    CAQM के आंकड़ों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 में दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता पिछले चार सितंबर महीनों की तुलना में कम रही। यह आंकड़ा राजधानी में प्रदूषण के दीर्घकालिक रुझान को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    सितंबर आम तौर पर दिल्ली के सबसे गंभीर प्रदूषण वाले महीनों में शामिल नहीं होता, लेकिन अक्टूबर के बाद परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। तापमान में गिरावट और हवा की गति में बदलाव के साथ प्रदूषक तत्वों के वातावरण में बने रहने की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    इसी वजह से अक्टूबर से सर्दियों के महीनों तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाती है।

    अक्षरधाम और AIIMS के आसपास भी प्रभाव

    राजधानी के अक्षरधाम और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के आसपास के क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता में बदलाव दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    दिल्ली में अलग-अलग इलाकों की वायु गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती। स्थानीय यातायात, निर्माण गतिविधियां, धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के प्रदूषण स्रोतों के कारण विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI में अंतर देखा जा सकता है।

    ऐसे में राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाले आंकड़ों की लगातार निगरानी करना महत्वपूर्ण है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों और उसके फैलाव का बेहतर आकलन किया जा सके।

    आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती

    फिलहाल दिल्ली का AQI 129 यानी मध्यम श्रेणी में है, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम और प्रदूषण स्रोतों में बदलाव के साथ इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है। खासकर अक्टूबर के बाद पराली जलाने की घटनाओं, स्थानीय प्रदूषण, हवा की गति और तापमान जैसे कारक राजधानी की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

    प्रशासन की ओर से प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण लगातार किया जाता है। वहीं, नागरिकों के लिए भी स्थानीय AQI और आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

    दिल्ली में फिलहाल स्थिति गंभीर श्रेणी में नहीं है, लेकिन AQI का 129 तक पहुंचना यह संकेत देता है कि राजधानी की हवा में एक बार फिर गिरावट शुरू हुई है। सितंबर के आंकड़ों और अक्टूबर से शुरू होने वाले मौसम को देखते हुए आने वाले सप्ताह दिल्ली की वायु गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

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