Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    दो दिवसीय मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

    2 hours ago

    कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर विमेन, जयपुर द्वारा दो दिवसीय वर्चुअल मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र, प्रथम सत्र एवं द्वितीय सत्र का आयोजन दिनांक 2 नवम्बर, 2026 को किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ न्यायालयीन प्रक्रिया, विधिक शोध, प्रभावी ड्राफ्टिंग और मौखिक पैरवी के व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है। यह कार्यशाला का चौथा संस्करण है, जो संस्थान की विधिक शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ठ अतिथि, प्रतिभागियों एवं विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के प्रथम संस्करण से लेकर चौथे संस्करण तक के सफर पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. निष्ठा जायसवाल, कुलपति, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के संदेश को साझा करते हुए प्राचार्य डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने कहा कि मूट कोर्ट विधि शिक्षा का अभिन्न अंग है। यह विद्यार्थियों को विधिक शोध, प्रारूप लेखन, विधियों की व्याख्या, तर्कों के निर्माण और प्रभावी पैरवी जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावी पैरवी केवल तर्क जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय और सत्य की खोज में न्यायालय की सहायता करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। 

    कार्यशाला की समन्वयक एवं सहायक प्राध्यापक रोशन अली ने अवधारणा पत्र प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा तथा विभिन्न सत्रों के उद्देश्यों की जानकारी दी।

    विशिष्ठ अतिथि प्रो. सरोज शर्मा (बोहरा), डीन, स्कूल ऑफ लॉ, प्रसिडेन्सी यूनिवर्सिटी, बैंगलोर ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विधि विद्यार्थियों को अपने कौशल में निरंतर सुधार करना चाहिए। उन्होंने विधिक शोध, प्रभावी ड्राफ्टिंग, मौखिक पैरवी तथा न्यायालयीन शिष्टाचार को एक सफल अधिवक्ता की चार प्रमुख दक्षताएं बताया। उन्होंने कहा कि प्रभावी वकालत का अर्थ अधिक समय तक बोलना नहीं, बल्कि कम समय में सबसे मजबूत और तार्किक कानूनी तर्क प्रस्तुत करना है। एक अच्छा अधिवक्ता वही होता है, जो धैर्यपूर्वक सुनता है और न्यायपीठ के प्रश्नों का सटीक एवं तार्किक उत्तर देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट को भविष्य के अधिवक्ताओं की प्रयोगशाला के रूप में अपनाने तथा इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विधि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से लगभग 300 विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र का संचालन विद्यार्थियों भाव्या शर्मा एवं कशिश गुप्ता ने किया। अंत में सहायक आचार्य मिस प्रज्ञा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

    कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय ‘‘Fundamentals of Mooting’ रहा, जिसमें वक्ता में डॉ. शोरदीप रक्षित, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, क्राइस्ट (डीम्ड् विश्वविद्यालय), बैंगलोर रहे। उन्होंने प्रतियोगिता की अवधारणा, संरचना एवं मूलभूत पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मूटिंग का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता में भाग लेना या जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि अनुभव प्राप्त करना, विधिक समझ विकसित करना और अपनी प्रस्तुति क्षमता को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने मूट कोर्ट को एक ऐसी व्यवस्थित प्रक्रिया बताया, जिसमें विद्यार्थी काल्पनिक विधिक विवाद पर न्यायाधीश या न्यायाधीशों के पैनल के समक्ष लिखित एवं मौखिक तर्क प्रस्तुत करते हैं।

    कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र का विषय ‘‘Argumentation Skills and Courtroom Etiquette’’ रहा जिसमें वक्ता में मिस मिताली खत्री, लीगर रिसर्चर, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर रही। इस सत्र में विधिक तर्क-वितर्क की कला पर चर्चा की गई। वक्ता ने बताया कि तथ्यों, विधिक सिद्धांतों, वैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दृष्टांतों को तार्किक एवं प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना प्रभावी विधिक तर्क-वितर्क का आधार है। सत्र में मजबूत कानूनी तर्क तैयार करने, प्रासंगिक विधिक शोध करने तथा न्यायिक निर्णयों और अन्य विधिक प्राधिकारों का उचित उपयोग करने के महत्व को समझाया गया। 

    Click here to Read More
    Previous Article
    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने खेल प्रतियोगिताओं में रचा इतिहास, पाँच चैंपियनशिप में जीते 42 पदक

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment