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    सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पंचायती राज चुनावों में 'मतदाता जागरूकता यात्रा' पर राज्य निर्वाचन आयोग की रोक निरस्त

    2 hours ago

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के पाबंदी वाले आदेश को गैर-कानूनी करार देते हुए किया रद्द

    मतदाता जागरूकता को रोकना लोकतंत्र और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रहार: राजस्थान इलेक्शन वॉच

    जयपुर |  राजस्थान में आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान 'मतदाता जागरूकता यात्रा' निकालने पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लगाई गई रोक को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने निरस्त (Set Aside) कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश से यह साफ हो गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नागरिकों द्वारा चलाए जाने वाले शांतिपूर्ण जागरूकता अभियानों पर प्रशासनिक या कानूनी पाबंदी लगाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

    मामले की पृष्ठभूमि और आयोग का रवैया

    'राजस्थान इलेक्शन वॉच', मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) और सहयोगी संस्थाओं द्वारा पिछले 20 वर्षों से निरंतर लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनावों के दौरान जनता को जागरूक करने के लिए 'मतदाता जागरूकता यात्रा' निकाली जाती रही है।

    1. पहले चरण का इनकार (7 व 10 सितंबर): निकाय चुनावों की घोषणा के बाद 7 सितंबर को राज्य के 11 जिलों (अजमेर, ब्यावार, भीलवाड़ा, बीकानेर, डूंगरपुर, जयपुर, राजसमंद, सलूंबर, सिरोही, टोंक और उदयपुर) में यात्रा निकालने की औपचारिक अनुमति मांगी गई थी। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 सितंबर को मात्र 3 दिन में बिना किसी ठोस आधार के अनुमति देने से इनकार कर दिया।

    2. दूसरे चरण का इनकार (6 व 9 अक्टूबर): पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर 6 अक्टूबर 2026 को पुनः आवेदन दिया गया, जिसे आयोग ने 9 अक्टूबर को दोबारा खारिज कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट का रुख और फैसला*

    राज्य निर्वाचन आयोग के इस मनमाने और असहयोगात्मक रवैये के खिलाफ अरुणा रॉय, निखिल डे व अन्य साथियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।

    • 29 October 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 2 नवम्बर को अविलंब सुनवाई करने का निर्णय लिया।

    • 2 नवंबर 2026: आज सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग के रोक संबंधी आदेश को Set Aside (रद्द) कर दिया। इसका सीधा विधिक अर्थ है कि आयोग द्वारा यात्रा पर लगाई गई पाबंदी पूरी तरह गैर-कानूनी थी।

    "यह फैसला संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की बड़ी जीत है। स्वस्थ लोकतंत्र में मतदाताओं को जागरूक करना और उन्हें आचार संहिता (Model Code of Conduct) के प्रति प्रेरित करना हर सजग नागरिक का अधिकार है। बिना किसी वजह जागरूकता यात्राओं पर रोक लगाना लोकतंत्र के मूल मूल्यों पर प्रहार है।"— अरुणा रॉय 

    सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद 'राजस्थान इलेक्शन वॉच' आगामी पंचायती राज चुनावों के दौरान प्रदेश भर में 'मतदाता जागरूकता यात्रा' का संचालन सुचारू रूप से करने हेतु पुनः प्रशासनिक सहयोग और व्यवस्थाओं के लिए आवेदन प्रस्तुत करेगी।

     

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