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    दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के दिए निर्देश

    1 hour ago

    Yugcharan News - 02-07-2026

    दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा द्वारा दायर उस याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक सामग्री, मॉर्फ्ड वीडियो और डीपफेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पांच ऐसे पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जिन्हें प्रथम दृष्टया मानहानिकारक माना गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना को अपने पेशे का स्वाभाविक हिस्सा मानकर स्वीकार करना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन, नीतियों में बदलाव और राजनीतिक घटनाक्रम पर हास्य और व्यंग्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं।

    राघव चड्ढा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर सुनियोजित अभियान चलाया गया। याचिका के अनुसार इस अभियान के तहत कथित रूप से डीपफेक वीडियो, संपादित क्लिप और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

    याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह की सामग्री से उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और इसे तत्काल विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की भी मांग की गई।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का प्रतीत नहीं होता। अदालत ने कहा कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के संबंध में व्यंग्य, पैरोडी या राजनीतिक टिप्पणी को केवल इस आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता कि उससे संबंधित व्यक्ति असहज महसूस करता है।

    हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। यदि कोई सामग्री किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बिना आधार नुकसान पहुंचाती है या प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है, तो ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।

    इसी आधार पर अदालत ने सोशल मीडिया पर प्रसारित पांच पोस्ट को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक मानते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया। बाकी सामग्री के संबंध में अदालत ने तत्काल किसी व्यापक रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की आगे विस्तृत सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।

    यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक कंटेंट, सोशल मीडिया अभियानों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लेकर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मामले में आने वाला अंतिम निर्णय राजनीतिक अभिव्यक्ति, ऑनलाइन व्यंग्य और डिजिटल प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय कर सकता है।

    फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कोई सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हो तो उसके खिलाफ कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विवाद के अन्य पहलुओं पर भी विस्तार से विचार करेगी।

     
     
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