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    इराक में संयुक्त अमेरिका-सऊदी हवाई हमलों के बाद बढ़ा तनाव, ईरान समर्थित गुटों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    2 hours ago

    Yugcharan News / 29-07-2026

    इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों पर अमेरिका और सऊदी अरब द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इन हमलों में इराक की लोकप्रिय सुरक्षा बल (Popular Mobilisation Forces - PMF) के आठ सदस्यों की मौत होने और चार अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित संगठनों ने इस कार्रवाई को इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे "बेहद खतरनाक उकसावे वाली कार्रवाई" करार दिया है।

    हालांकि अमेरिका और सऊदी अरब का कहना है कि यह अभियान हाल के दिनों में सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में चलाया गया। इस घटनाक्रम ने पहले से ही संवेदनशील पश्चिम एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीतिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

    संयुक्त अभियान में ईरान समर्थित ठिकानों को बनाया गया निशाना

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, संयुक्त हवाई अभियान में उन ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों को निशाना बनाया गया जिन्हें हाल के ड्रोन हमलों के लिए जिम्मेदार माना गया है।

    सऊदी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हाल ही में कई ड्रोन सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत और राजधानी रियाद क्षेत्र स्थित पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे। मंत्रालय के अनुसार, देश की वायु रक्षा प्रणाली ने इन ड्रोन को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया। बयान में यह भी कहा गया कि इन हमलों की योजना कथित तौर पर इराकी क्षेत्र से संचालित ईरान समर्थित सशस्त्र संगठनों द्वारा बनाई गई थी।

    सऊदी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं है, लेकिन यदि देश की सुरक्षा या ऊर्जा अवसंरचना पर हमला किया जाता है तो उचित जवाब दिया जाएगा।

    PMF ने हमलों को बताया इराक की संप्रभुता का उल्लंघन

    इराक की लोकप्रिय सुरक्षा बल (PMF), जिसे कई ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों का गठबंधन माना जाता है, ने दावा किया कि संयुक्त हवाई हमलों में उसके आठ सदस्य मारे गए जबकि चार अन्य घायल हुए हैं।

    PMF ने जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई इराक की संप्रभुता और उसके आधिकारिक सुरक्षा संस्थानों का सीधा उल्लंघन है। संगठन ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने की अपील की।

    विश्लेषकों के अनुसार, PMF इराक की सुरक्षा व्यवस्था का आधिकारिक हिस्सा है और देश के कानून के तहत यह सीधे प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है। हालांकि इस संगठन के कई घटकों पर लंबे समय से ईरान के प्रभाव में काम करने के आरोप लगते रहे हैं।

    ईरान समर्थित समूह ने ड्रोन हमलों से किया इनकार

    ईरान समर्थित संगठन "इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक" ने सऊदी अरब पर हुए हालिया ड्रोन हमलों में किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है।

    संगठन ने अपने बयान में कहा कि सऊदी अरब द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें "गढ़ी गई कहानी" बताया। समूह ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उसके खिलाफ आगे कोई सैन्य कार्रवाई की जाती है तो उसका कठोर जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

    लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं PMF

    इराक की लोकप्रिय सुरक्षा बल (PMF) पिछले कई वर्षों से इराक, अमेरिका और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच विवाद का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि PMF की स्थापना आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई के दौरान हुई थी और बाद में इसे इराक की आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल कर लिया गया। इसके बावजूद संगठन के कुछ धड़ों पर समय-समय पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास के आसपास रॉकेट एवं ड्रोन हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।

    कई पूर्व इराकी सरकारों पर भी आरोप लगे कि वे इन सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित नहीं कर सकीं। यही कारण है कि PMF का मुद्दा लगातार क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा विमर्श का हिस्सा बना हुआ है।

    सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमलों ने बढ़ाई चिंता

    पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है और वहां की तेल अवसंरचना पर किसी भी प्रकार का हमला अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकता है।

    सऊदी सरकार का कहना है कि हाल के ड्रोन हमलों का उद्देश्य देश की तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना था। हालांकि अधिकांश ड्रोन को वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले लगातार जारी रहते हैं तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

    इराक सरकार पर बढ़ा दबाव

    संयुक्त हवाई हमलों के बाद इराक सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी आने वाले दिनों में सऊदी अरब की यात्रा कर सकते हैं।

    इससे पहले उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों की जांच करने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि उनकी प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा करना हो सकता है।

    हालांकि इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

    क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराने लगा नया संकट

    पश्चिम एशिया पहले से ही कई सैन्य और राजनीतिक संकटों का सामना कर रहा है। ऐसे में इराक के भीतर संयुक्त सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान समर्थित संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी पक्ष संयम नहीं बरतते हैं तो यह घटनाक्रम व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। दूसरी ओर, कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक कूटनीतिक संवाद और तनाव कम करने की दिशा में प्रयासों पर जोर दे रहे हैं।

    आगे क्या हो सकता है?

    फिलहाल अमेरिका, सऊदी अरब, इराक और ईरान समर्थित संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में इराक सरकार की जांच, क्षेत्रीय कूटनीतिक वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी।

    यदि सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं होता, तो इसका असर केवल इराक और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में सभी पक्षों द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

     
     
     
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