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    सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज ने अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस पर जागरूकता सत्र का हुआ आयोजन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज द्वारा 5 सितंबर को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, लाल कोठी, जयपुर में ‘अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस’ विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के दौरान सेंटर संयोजक डॉ. स्वीटी माथुर ने ‘सेक्स’ और ‘जेंडर’ के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि सेक्स जैविक आधार पर निर्धारित होता है, जबकि जेंडर समाज द्वारा निर्मित एवं परिभाषित भूमिकाओं और अपेक्षाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि   प्रकृति ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है, लेकिन समाज ने समय के साथ स्त्री और पुरुष के लिए अलग-अलग भूमिकाएं और अपेक्षाएं निर्धारित कर दीं। उन्होंने इस विषय को अधिक प्रभावी एवं रोचक ढंग से समझाने के लिए दो वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों को जेंडर आधारित रूढ़ियों, सामाजिक अपेक्षाओं एवं निर्धारित भूमिकाओं के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना तभी संभव है जब महिलाएं सशक्त हों और इसके लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र को संवादात्मक बनाते हुए विद्यार्थियों को अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हुए बताया कि उनके घरों में सामान्यतः पैसा कमाने की जिम्मेदारी पिता की होती है, जबकि रोजमर्रा के घरेलू कार्य मुख्य रूप से मां करती हैं। इस चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार पारंपरिक सामाजिक अपेक्षाएं परिवार और दैनिक जीवन में जेंडर भूमिकाओं को प्रभावित करती हैं। सेंटर सदस्य डॉ. पूर्वा भारद्वाज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज द्वारा निर्मित इन जंजीरों और रूढ़ियों को तोड़ पाना आसान नहीं है। इसके लिए बदलाव की शुरुआत हमें स्वयं से और अपने घर से करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने घरों में ही कार्यों और जिम्मेदारियों को जेंडर के आधार पर बांटने के बजाय समान रूप से साझा करने की शुरुआत करें, तो व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता सत्र विद्यार्थियों को सामाजिक रूढ़ियों पर विचार करने तथा अधिक समानतापूर्ण और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। सत्र में लगभग 60 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सेंटर की सदस्य डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. दमयंती सोढ़ा एवं डॉ. सुरभि माथुर की सक्रिय भागीदारी रही एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य रामसेवक, शिक्षिका अनिता दाधीच एवं नरेश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे।

    सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज ने ‘अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस’ पर जागरूकता सत्र का हुआ आयोजन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज द्वारा 5 सितंबर को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, लाल कोठी, जयपुर में ‘अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस’ विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के दौरान सेंटर संयोजक डॉ. स्वीटी माथुर ने ‘सेक्स’ और ‘जेंडर’ के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि सेक्स जैविक आधार पर निर्धारित होता है, जबकि जेंडर समाज द्वारा निर्मित एवं परिभाषित भूमिकाओं और अपेक्षाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि   प्रकृति ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है, लेकिन समाज ने समय के साथ स्त्री और पुरुष के लिए अलग-अलग भूमिकाएं और अपेक्षाएं निर्धारित कर दीं। उन्होंने इस विषय को अधिक प्रभावी एवं रोचक ढंग से समझाने के लिए दो वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों को जेंडर आधारित रूढ़ियों, सामाजिक अपेक्षाओं एवं निर्धारित भूमिकाओं के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना तभी संभव है जब महिलाएं सशक्त हों और इसके लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र को संवादात्मक बनाते हुए विद्यार्थियों को अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हुए बताया कि उनके घरों में सामान्यतः पैसा कमाने की जिम्मेदारी पिता की होती है, जबकि रोजमर्रा के घरेलू कार्य मुख्य रूप से मां करती हैं। इस चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार पारंपरिक सामाजिक अपेक्षाएं परिवार और दैनिक जीवन में जेंडर भूमिकाओं को प्रभावित करती हैं। सेंटर सदस्य डॉ. पूर्वा भारद्वाज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज द्वारा निर्मित इन जंजीरों और रूढ़ियों को तोड़ पाना आसान नहीं है। इसके लिए बदलाव की शुरुआत हमें स्वयं से और अपने घर से करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने घरों में ही कार्यों और जिम्मेदारियों को जेंडर के आधार पर बांटने के बजाय समान रूप से साझा करने की शुरुआत करें, तो व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता सत्र विद्यार्थियों को सामाजिक रूढ़ियों पर विचार करने तथा अधिक समानतापूर्ण और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। सत्र में लगभग 60 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सेंटर की सदस्य डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. दमयंती सोढ़ा एवं डॉ. सुरभि माथुर की सक्रिय भागीदारी रही एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य रामसेवक, शिक्षिका अनिता दाधीच एवं नरेश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे।

    विशेष साक्षात्कार: हिंदी—संस्कृति, ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु

    हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में प्रो.जनक सिंह मीना,  गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय  प्र. आपके लिए हिंदी भाषा का क्या महत्व है? 1. मेरे लिए हिंदी भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना, विचार और ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जनसामान्य से सहज रूप से जुड़ती है और विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच संवाद स्थापित करती है। एक शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में मैं हिंदी को ज्ञान के लोकतंत्रीकरण का महत्वपूर्ण साधन मानता हूँ। मेरे लिए हिंदी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह भारतीय भाषाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच सेतु का कार्य करती है। भाषाई विविधता भारत की शक्ति है। अतः हिंदी मेरे लिए केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समावेशन और ज्ञान-विस्तार का माध्यम है। प्र. हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता आप क्यों महसूस करते हैं? 2. मेरे विचार से हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता केवल हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी भाषाई अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। हिंदी भारत के करोड़ों लोगों को जोड़ने वाली एक सशक्त संपर्क भाषा है। यह हमारे साहित्य, लोकजीवन, सामाजिक अनुभवों और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्ति प्रदान करती है। आज वैश्वीकरण और डिजिटल युग में अंग्रेजी सहित अनेक विदेशी भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में हिंदी दिवस हमें अपनी मातृभाषाओं और भारतीय भाषाओं के महत्व को समझने तथा हिंदी को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और प्रशासन की भाषा के रूप में अधिक सक्षम बनाने की प्रेरणा देता है। प्र. आज के समय में हिंदी भाषा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं? 3. मेरे विचार से आज हिंदी के सामने चुनौती उसके अस्तित्व की नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और बदलती तकनीकी दुनिया में उसकी प्रभावी उपस्थिति की है।मेरे अनुसार हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेज़ी से प्रतिस्पर्धा करना नहीं, बल्कि स्वयं को समयानुकूल बनाना है। हमें ऐसी हिंदी चाहिए जो सरल भी हो, वैज्ञानिक भी हो, तकनीक-सक्षम भी हो और वैश्विक संवाद में प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सके। प्र. क्या आपको लगता है कि युवा पीढ़ी हिंदी से दूर होती जा रही है? क्यों? 4. हाँ, मुझे लगता है कि युवा पीढ़ी का एक वर्ग हिंदी से कुछ हद तक दूर होता जा रहा है, लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि पूरी युवा पीढ़ी हिंदी से विमुख हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण अंग्रेज़ी का बढ़ता प्रभाव, रोजगार और उच्च शिक्षा में अंग्रेज़ी की उपयोगिता, डिजिटल माध्यमों में हिंग्लिश का बढ़ता चलन और हिंदी को लेकर बनी सामाजिक धारणाएँ हैं। प्र. सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया है या उसके स्वरूप को प्रभावित किया है? 5. भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच Hinglish के प्रयोग में निरंतर वृद्धि पाई गई। इसके साथ हिंदी की लिपि और अभिव्यक्ति शैली में भी परिवर्तन आया है। अनेक युवा देवनागरी के बजाय रोमन लिपि में हिंदी लिखते हैं—जैसे “Aap kaise hain?”। इससे संवाद तेज और सहज होता है, लेकिन वर्तनी की एकरूपता तथा हिंदी की पारंपरिक भाषिक संरचना के सामने चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं। प्र. हिंदी और अंग्रेजी के बीच संतुलन को आप किस तरह देखते हैं? 6. हिंदी और अंग्रेजी के बीच संतुलन को मैं प्रतिस्पर्धा के बजाय सह-अस्तित्व और सहयोग के रूप में देखता हूँ। अंग्रेजी आज वैश्विक संचार, विज्ञान, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि हिंदी हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना, अभिव्यक्ति और जनसंचार की सशक्त भाषा है। मेरे विचार से अंग्रेजी सीखना या उसका प्रयोग करना हिंदी के प्रति दूरी का संकेत नहीं होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि हम अंग्रेजी को ज्ञान और वैश्विक अवसरों की भाषा के रूप में अपनाएँ तथा हिंदी को अपनी जड़ों, विचारों और व्यापक जनसमुदाय से जुड़ने की भाषा के रूप में सशक्त बनाएँ। आज आवश्यकता “हिंदी बनाम अंग्रेजी” की नहीं, बल्कि “हिंदी और अंग्रेजी” के संतुलित प्रयोग की है। बहुभाषिकता हमारी शक्ति है। यदि युवा दोनों भाषाओं में दक्ष हों, तो वे स्थानीय संवेदना और वैश्विक दृष्टि—दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ सकते हैं। प्र. उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हिंदी की स्थिति कैसी है? 7. मेरे विचार से उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हिंदी की स्थिति संभावनाओं से भरी हुई है, लेकिन अभी इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है। लंबे समय तक उच्च शिक्षा और विशेषकर शोध के क्षेत्र में अंग्रेजी का वर्चस्व रहा है, जिसके कारण हिंदी में उच्च स्तरीय अकादमिक सामग्री और शोध प्रकाशन अपेक्षाकृत सीमित रहे। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, ज्ञान के स्थानीयकरण और बहुभाषी शिक्षा को अधिक महत्व मिला है। यूजीसी भी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम, अनुवाद और शिक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल कर रहा है। प्र. विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षकों को क्या प्रयास करने चाहिए? 8. विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षकों को हिंदी को केवल परीक्षा का विषय न बनाकर अभिव्यक्ति, संवाद और रचनात्मकता की भाषा के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रयास किए जा सकते हैं: कक्षा को संवादात्मक बनाना ,तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग,साहित्य को रोचक बनाना , रचनात्मक गतिविधियाँ , दैनिक जीवन से जोड़ना, विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति का सम्मान, हिंदी और अन्य भाषाओं के बीच संतुलन । मेरे विचार से शिक्षक स्वयं हिंदी के प्रभावी और सहज प्रयोग का उदाहरण बनें, तभी विद्यार्थी भाषा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण महसूस करेंगे। हिंदी को बोझ नहीं, संवाद, संस्कृति, ज्ञान और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी जीवंत भाषा के रूप में प्रस्तुत करना सबसे प्रभावी उपाय होगा। प्र. क्या हिंदी रोजगार के लिए भी एक प्रभावी भाषा बन सकती है? 9. हाँ, हिंदी रोजगार के लिए एक प्रभावी और व्यापक भाषा बन सकती है। आज हिंदी केवल साहित्य और संवाद की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि प्रशासन, शिक्षा, मीडिया, पत्रकारिता, अनुवाद, पर्यटन, बैंकिंग, डिजिटल कंटेंट, विज्ञापन और तकनीकी क्षेत्र में भी इसके अवसर बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से डिजिटल अर्थव्यवस्था और सोशल मीडिया के विस्तार ने हिंदी में कंटेंट राइटिंग, पत्रकारिता, अनुवाद, कॉपीराइटिंग, वॉयस-ओवर और ऑनलाइन शिक्षा जैसे नए रोजगार के क्षेत्र खोले हैं। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग से भी रोजगार की संभावनाएँ बनी हुई हैं। प्र. नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और हिंदी की भूमिका को आप किस रूप में देखते हैं? 10. नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं और हिंदी की भूमिका को मैं शिक्षा, ज्ञान, संस्कृति और आत्मविश्वास—इन चारों के समन्वय के रूप में देखता हूँ। NEP 2020 ने पहली बार भाषा को केवल संचार का माध्यम न मानकर ज्ञान-अर्जन और व्यक्तित्व-विकास का महत्वपूर्ण आधार माना है। नीति में जहाँ तक संभव हो, कम-से-कम कक्षा 5 तक और preferably कक्षा 8 तथा आगे भी मातृभाषा/स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा देने की बात कही गई है। मेरे विचार से हिंदी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंदी ज्ञान के लोकतंत्रीकरण और उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुँच का माध्यम बन सकती है। यदि विज्ञान, तकनीक, कानून, प्रशासन, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान की गुणवत्तापूर्ण सामग्री हिंदी में उपलब्ध हो, तो विद्यार्थी अपनी भाषा में विषय को अधिक सहजता से समझ सकेंगे। NEP उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं के माध्यम से तथा द्विभाषी रूप में कार्यक्रम संचालित करने को भी प्रोत्साहित करती है।  प्र. तकनीक और AI के बढ़ते दौर में हिंदी के लिए क्या संभावनाएँ हैं? 11. तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दौर में हिंदी के लिए संभावनाएँ अत्यंत व्यापक हैं। मेरे विचार से AI हिंदी के सामने चुनौती नहीं, बल्कि उसे ज्ञान, रोजगार, शिक्षा और वैश्विक संचार की भाषा बनाने का एक बड़ा अवसर है।सबसे पहली संभावना हिंदी में AI आधारित सेवाओं की है। दूसरी बड़ी संभावना शिक्षा और उच्च शिक्षा में है। तीसरी संभावना रोजगार और नए व्यवसायों की है। चौथी संभावना समावेशी डिजिटल शासन की है। हालाँकि, इसके साथ हमें भाषाई शुद्धता, सांस्कृतिक संदर्भ, डेटा की गुणवत्ता और AI द्वारा उत्पन्न गलत सूचनाओं जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। हिंदी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल कॉर्पस, शब्दकोश, पारिभाषिक शब्दावली और प्रमाणित साहित्यिक सामग्री का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण आवश्यक है।  प्र. हिंदी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए हमें क्या करना चाहिए? 12. मेरे दृष्टिकोण से कहा जाए तो हिंदी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए उसे केवल साहित्य और संस्कृति की भाषा न रखकर ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा बनाना होगा। आज डिजिटल युग में भाषा की वैश्विक शक्ति उसके डिजिटल विस्तार से भी निर्धारित होती है। UNESCO भी बहुभाषी डिजिटल व्यवस्था, मशीन अनुवाद, वाक्-पहचान और भाषा-प्रौद्योगिकी को भाषाओं के विस्तार के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखता है। प्र. विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने और साहित्य से जुड़ने के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे? 13. विद्यार्थियों के लिए मेरा संदेश है कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में न पढ़ें, बल्कि उसे अपने विचार, संवेदना और अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में अपनाएँ। हिंदी साहित्य हमारे समाज, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का दर्पण है। प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, निराला और कबीर जैसे साहित्यकारों को पढ़ने से न केवल भाषा समृद्ध होती है, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि भी विकसित होती है। प्र. अंत में, हिंदी दिवस के अवसर पर आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? 14. हिंदी दिवस के अवसर पर मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि हिंदी केवल हमारी भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना, विचार और पहचान की अभिव्यक्ति है। आज का युवा वैश्विक दुनिया से जुड़ रहा है, इसलिए अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युवाओं को हिंदी को केवल परीक्षा या औपचारिकता की भाषा न मानकर ज्ञान, शोध, तकनीक, रोजगार और नवाचार की भाषा के रूप में अपनाना चाहिए। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी के नए अवसर सामने आ रहे हैं। हमें इन अवसरों का रचनात्मक उपयोग करना चाहिए। मेरा युवाओं से आग्रह है—दूसरी भाषाएँ सीखिए, लेकिन अपनी भाषा को मत भूलिए; वैश्विक बनिए, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहिए। हिंदी का सम्मान करना भारत की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना है। हिंदी का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब युवा इसे बोलने के साथ-साथ इसमें सोचेंगे, लिखेंगे, शोध करेंगे और नए ज्ञान का सृजन करेंगे।

    नटखट कान्हा के रूप में मुस्कुराए 8 माह के भव विभू, जन्माष्टमी पर घर में छा गया गोकुल जैसा आनंद

    जयपुर। इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर शर्मा परिवार में भक्ति और उत्सव का एक अनोखा और अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। परिवार के सबसे छोटे और दुलारे सदस्य मास्टर भव विभू (आयु 8 माह) ने अपने बाल-सुलभ अंदाज और नटखट रूप से हर किसी का दिल जीत लिया। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर बाल भव विभू को माखनचोर श्री कृष्ण के पारंपारिक रूप में सजाया गया। सिर पर मोरपंख, माथे पर चंदन का तिलक और हाथों में छोटी सी बांसुरी थामे 8 माह के कान्हा जब मुस्कुराए, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात बाल गोपाल घर पधार गए हों। भव विभू की इस मनमोहक छवि को देखकर उनके पिता जयंत शर्मा और माता डॉ. अनिंधा भावविभोर हो उठे। माता डॉ. अनिंधा ने बताया कि भव विभू की यह पहली जन्माष्टमी है, इसलिए पूरा परिवार बेहद उत्साहित था। वहीं उनके नानाजी प्रो. आर. एन. शर्मा ने अपने दौहित्र (नाती) को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए कहा कि बच्चों में ही भगवान का वास होता है और भव विभू की यह बाल-लीला हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है। घर में बनाई गई विशेष झांकी और माखन की मटकी के साथ भव विभू की इस बाल-लीला ने जन्माष्टमी के उत्सव में चार चांद लगा दिए। स्वजनों और शुभचिंतकों ने मास्टर भव विभू को स्वस्थ, दीर्घायु और तेजस्वी जीवन की ढेरों शुभकामनाएं व आशीर्वाद दिए हैं।  

    “आरम्भ-2026: नई शुरुआत, नए सपने और सफलता की नई उड़ान” — रीजनल कॉलेज में इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों का भव्य स्वागत

    जयपुर। रीजनल कॉलेज, सीतापुरा, जयपुर के इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत हेतु कॉलेज के ऑडिटोरियम में ओरिएंटेशन प्रोग्राम “आरम्भ-2026” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नवागंतुक विद्यार्थियों के साथ-साथ सीनियर विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ तिलक समारोह एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। सीनियर विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक के नवागंतुक विद्यार्थियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरुण वर्मा, सेंटर हेड, सीआईआई एवं लघु उद्योग भारती, जयपुर रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उद्योग जगत, कौशल विकास, इंटर्नशिप एवं उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया। डायरेक्टर, रीजनल कॉलेज कैंपस, डॉ. अशोक सिंह शेखावत ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण, सकारात्मक सोच एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित किया। इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रमोद शर्मा एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य श्री सौरभ पाटनी ने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर इंजीनियरिंग कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित रहे। चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने कहा, “कॉलेज जीवन विद्यार्थियों के भविष्य की नींव तैयार करता है। विद्यार्थी शिक्षा के साथ अनुशासन, कौशल एवं सकारात्मक सोच को अपनाकर अपने लक्ष्यों की ओर निरंतर आगे बढ़ें।” वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने कहा, “नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं और नए अवसरों का द्वार खोलती है। विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को पहचानें, निरंतर सीखते रहें और अपने ज्ञान एवं कौशल से सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करें।” कार्यक्रम में इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक के नवागंतुक तथा सीनियर विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सीनियर विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने आयोजन की सराहना करते हुए कॉलेज के सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन अमित कुमार एवं विनीता गौतम ने किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र सक्सेना ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।  

    पारंपरिक वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता मानसिक स्वास्थ्य, हृदय रोग एवं मनोदैहिक विकारों पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन

    जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पारंपरिक भारतीय वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता पत्र (एमओयू) संपन्न हुआ। यह समझौता 2 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा की गरिमामयी अध्यक्षता में किया गया। इस पहल का उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद, हृदय रोगों तथा विभिन्न मनोदैहिक विकारों के संदर्भ में भारतीय पारंपरिक ज्ञान-पद्धतियों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वित अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. नारायण होसमने द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर वैदिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तावित सहयोग के अंतर्गत मंत्र चिकित्सा, गो-आधारित चिकित्सा तथा काऊ कडलिंग जैसी पारंपरिक एवं वैकल्पिक पद्धतियों का आधुनिक चिकित्सीय विज्ञान और वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक परामर्श के साथ अध्ययन एवं मूल्यांकन किया जाएगा। इस त्रिपक्षीय सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में प्रारंभिक चिकित्सा, डायग्नोस्टिक्स एवं परामर्श संबंधी जांच-सुविधाओं के लिए एक स्क्रीनिंग केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही मंत्रों की ध्वनि तरंगों एवं गो-आलिंगन जैसी गतिविधियों के मानव मस्तिष्क, हृदय गति परिवर्तनशीलता (हार्ट रेट वैरिएबिलिटी), रक्तचाप तथा मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों का क्लिनिकल एवं वैज्ञानिक अध्ययन करने की योजना है। यह संपूर्ण कल्याणकारी परियोजना परम पूज्य सिद्ध गुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव के आशीर्वाद एवं उनके वैश्विक शांति अभियान (ग्लोबल पीस मिशन) की प्रेरणा से मानव कल्याण के व्यापक उद्देश्य को समर्पित बताई गई। कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से देखने की समृद्ध दृष्टि रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के मध्य संवाद एवं प्रमाण-आधारित अनुसंधान समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी, संजय शर्मा, डॉ. सुनील कुमार गर्सा, महावीर खर्रा एवं आत्रेय कुमार सहित विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. राजधर मिश्र, डॉ. शम्भु कुमार झा, डॉ. दिवाकर मिश्र, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. मधुबाला शर्मा, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, सुरेन्द्र मोहन एवं राजेश कुमार शर्मा उपस्थित थे। उपस्थित विद्वानों ने इस सहयोगात्मक पहल को भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच सेतु निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया तथा मानव कल्याण के लिए इसके संभावित योगदान पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन मंत्र प्रतिष्ठान निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह पालावत ने किया।  

    फ्रेशर्स 2026-युवा ऊर्जा का संगम, छात्राओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुत किया डांस सहित अन्य कार्यक्रम

      कनोडिया पीजी महिला महाविद्यालय,जयुपर में छात्राओं के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम फ्रेशर्स डे 2026 का आयोजन किया गया। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्राचार्य, डॉ. सीमा अग्रवाल, उप प्राचार्य (छात्र गतिविधि) डॉ. मनीषा माथुर एवं प्रथम सेमेस्टर की सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली कला संकाय की खुशी जांगिड़, विज्ञान संकाय की ऋषिता अग्रवाल एवं वाणिज्य संकाय की छात्रा गरिमा मंगल ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में बारहवीं कक्षा में 90 प्रतिशत एवं इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली सभी संकायों की, प्रथम वर्ष की मेधावी छात्राओं को महाविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की गई। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में नवागंतुक छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी और उन्होंने मेंटोरिंग ग्रुप की महत्ता बताते हुए छात्राओं को स्वयं को निरंतर निखारने और अपने व्यक्तित्व को संवारने के लिए प्रेरित किया। इस आयोजन में रंग-बिरंगे परिधानों में सजी प्रथम वर्ष की 55 छात्राओं ने विभिन्न टाइटल्स के लिए रैम्पवॉक की। मिस फ्रेशर 2026-पूर्वी वर्मा, फर्स्ट रनरअप-रिद्धि मीणा, सैकंड रनरअप-रमशा खान रहीं। इसके साथ ही मिस चार्मिंग-आलिया फातिमा, मिस फैशनिस्टा-सिद्धि सिंह, मिस आइस ऑन फायर-ख्वाहिश शर्मा, मिस रैपंजल-मीनल मौर्य तथा मिस आइकॉनिक का खिताब-माही सोनी ने जीता। कार्यक्रम में मिस फ्रेशर्स की निर्णायक महाविद्यालय की पूर्व छात्राएँ मिस राजस्थान फर्स्ट रनरअप 2026, वंशिका नूनिया और मॉडल एवं कंटेंट क्रिएटर अनुष्का गुप्ता रहीं। अतिथियों के साथ महाविद्यालय निदेशक,प्राचार्य एवं उप प्राचार्य डॉ. रंजुला जैन, डॉ. मनीषा माथुर और डॉ. रंजना अग्रवाल ने विजेता रहीं छात्राओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में गायक निशांत शर्मा एवं गिटारिस्ट शिवा ने लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर छात्राओं का मन मोह लिया। महाविद्यालय के नृत्यम क्लब की छात्राओं के विभिन्न ग्रुप्स-‘गिद्दा एंड ग्रेस‘, ‘जट्ट एंड जूलियट’ पंजाबी ग्रुप,’लोक लहर ‘राजस्थानी ग्रुप, ‘नृत्य नंदिनी’ क्लासिकल ग्रुप ,यूफोरिक्स एंड हिप्नोसिस’ वेस्टर्न डांस ग्रुप्स ने अपनी परफोर्मेंस से समां बांध दिया। मंच संचालन अभिव्यक्ति क्लब की छात्रा माही असीजा, हुदा एजाज,माया गोस्वामी,प्रिया कुमारी,एकता कुमावत,आस्था शर्मा और दरक्षा खान ने किया। कार्यक्रम समापन पर बीबीए प्रथम वर्ष की छात्रा श्रेया माथुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सभी संकायों की प्रथम वर्ष की लगभग 1500 छात्राओं ने समस्त प्राध्यापिकाओं के साथ उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का लुत्फ उठाया।  

    शिक्षक दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम का पोस्टर विमोचन

    जयपुर। शिक्षक दिवस के उपलक्ष में पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान द्वारा तैयार किया गया पोस्टर भारत देश का शिक्षक दिवस का विमोचन उपमुख्यमंत्री डाॅ.पी. सी. बैरवा ने अपने सरकारी निवास पर गुरुवार 3 सितंबर को किया। विमोचन करते समय डॉ. बैरवा ने कहा कि शिक्षक समाज को प्रेरणा और दिशा देते हैं । देश की भावी पीढ़ी तैयार करने में अहम भूमिका होती है भारत में महान शिक्षाविद और राष्ट्रपति रहे डॉक्टर राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। पुरस्कृत शिक्षक फोरम के प्रदेश संघटन सचिव महेश बाबू शर्मा ने बताया कि महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में फोरम अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर, उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार ने डॉ.बैरवा के राखी बांधी, प्रदेश महिला सचिव मधु कुल्हार ने फोरम की ओर से तिलक लगाकर राखी बांधने की रस्म पूरी की। अंत में फोरम की ओर से महासचिव ने ज्ञापन दिया। तथा बीजेपी के संकल्प पत्र में की गई घोषणा में प्रदेश के पुरस्कृत शिक्षकों को वेतन वृद्धि देने के संकल्प को संकल्प का दो वर्ष और आठ महीने गुजरने के बाद भी पूरा नहीं करने की शिकायत की। तथा चुनाव आचार संहिता के बाद अविलंब पूरा करने की मांग की।उप मुख्यमंत्री ने आचार संहिता समाप्त होने के बाद कार्यवाही करने का आश्वासन दिया । फोरम की ओर से अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर, उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार, तथा विनोद कुमार शर्मा महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा सलाहकार , के. के. चोटिया, जिला फोरम जयपुर के जिला अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश महिला सचिव मधु कुल्हार, तथा कार्यकारिणी सदस्य पवन भास्कर उपस्थित थे ।      

    शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर होगा प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड के 15वें संस्करण का भव्य आयोजन

    शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 148 शिक्षकों का होगा सम्मान सात वरिष्ठ शिक्षकों को प्रदान किया जाएगा माला माथुर मेमोरियल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन जयपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के सम्मान में प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड 2026 के 15वें संस्करण का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह समारोह थार सर्वोदय संस्थान, सिम्पली जयपुर एवं रघु सिन्हा माला माथुर चैरिटी ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगा। आयोजक सोमेंद्र हर्ष ने कहा कि " प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड का 15वां संस्करण शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी मेहनत, समर्पण और उपलब्धियों को सम्मान देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि समाज के भविष्य का निर्माण करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। वे विद्यार्थियों में ज्ञान विकसित करने के साथ-साथ उन्हें प्रेरित करते हैं और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। इस वर्ष के प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड समारोह में प्री-स्कूल, सरकारी एवं निजी विद्यालयों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की अलग-अलग श्रेणियों से कुल 141 शिक्षकों को प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड 2026 प्रदान किया जाएगा जिसमे राजस्थान के जयपुर के 68 शिक्षको के अलावा जोधपुर, अजमेर, बाड़मेर, सिरोही, पाली , भीलवाड़ा, ब्यावर, करोली, सीकर, किशनगढ़, लक्ष्मणगढ़, हनुमानगढ़, जैसलमेर और जालोर से लगभग 46 शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दिल्ली, लखनऊ, वृन्दावन, छत्तीसगढ़ और बहरोड़ से लगभग 27 शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा , यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के समर्पण, उत्कृष्ट कार्य, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान को रेखांकित करता है " आयोजक रघु सिन्हा माला माथुर चैरिटी ट्रस्ट के ट्रस्टी सुधीर माथुर ने बताया कि "इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले सात वरिष्ठ शिक्षकों को विशेष रूप से माला माथुर मेमोरियल “लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास है, जिन्होंने वर्षों तक ज्ञान, संस्कार और शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस वर्ष प्रो. बी.के. शर्मा, डॉ. दीपक सक्सेना, डॉ. रश्मि पाटनी, डॉ. जयश्री भार्गव, श्रीमती अनुराधा टंडन, डॉ. सिद्धार्थ मोथड़िया एवं श्रीमती लवलीना सोगानी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा" आयोजक थार सर्वोदय संस्थान की ट्रस्टी अंशु हर्ष ने बताया कि " प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड का उद्देश्य उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जो अपने ज्ञान, समर्पण और निरंतर प्रयासों से विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से ऐसे वरिष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा और नई पीढ़ी को ज्ञान देने के लिए समर्पित किया है" समारोह को विशेष बनाने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी जाएंगी। ये प्रस्तुतियाँ शिक्षकों के प्रति विद्यार्थियों की कृतज्ञता, सम्मान और स्नेह को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ समारोह की गरिमा को भी बढ़ाएंगी। प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड पिछले 15 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है। 15वें संस्करण के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा जगत के समर्पित कर्मयोगियों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाएगा।    

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रथम NSS कैंप 2026 एवं प्लास्टिक फ्री कैंपस ड्राइव का आयोजन

    जयपुर: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में NSS इकाई द्वारा प्रथम NSS कैंप 2026 एवं “प्लास्टिक फ्री कैंपस ड्राइव” का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के अवसर पर प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। इसके पश्चात प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने विद्यार्थियों को NSS की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा समाज एवं पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत NSS कार्यक्रम अधिकारी यश यादव द्वारा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को NSS (National Service Scheme) के उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं सामाजिक सेवा में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। साथ ही विद्यार्थियों को My Bharat Portal के माध्यम से NSS एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के लिए पंजीकरण करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। कार्यक्रम के अगले चरण में डॉ. प्रेम कुमार ने प्लास्टिक प्रदूषण, प्लास्टिक के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के उपायों पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इसके बाद डॉ. मोनिका शर्मा ने भी प्लास्टिक मुक्त परिसर की आवश्यकता, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर NSS स्वयंसेविका तनिषा मीणा ने प्लास्टिक फ्री अभियान को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करने और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने में योगदान देने की अपील की। स्वच्छता अभियान का दूसरा चरण NSS कैंप के दूसरे चरण में विद्यार्थियों एवं NSS स्वयंसेवकों ने विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। स्वयंसेवकों ने परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में बिखरे हुए प्लास्टिक कचरे को एकत्र किया तथा उसे उचित तरीके से अलग कर निस्तारण के लिए भेजा। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ अभियान में भाग लेते हुए “स्वच्छ परिसर, स्वस्थ पर्यावरण” तथा “प्लास्टिक मुक्त परिसर” का संदेश दिया। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने अन्य विद्यार्थियों एवं परिसर के लोगों को भी प्लास्टिक कचरे को खुले में न फेंकने और कचरे का उचित निस्तारण करने के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में NSS कार्यक्रम अधिकारी यश यादव ने सभी NSS स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय के स्टाफ का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। यह NSS कैंप विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।  

    अमन माहेश्वरी एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में शामिल

    - इस नियुक्ति के साथ एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने बोर्ड में बदलाव पूरा किया इस बदलाव के बाद सभी चारों संस्थापकों ने बोर्ड की जिम्मेदारियां अगली पीढ़ी को सौंप दी हैं, जो अगले 100 वर्षों के लिए एलन के निर्माण के विजन को और मजबूत करता है कोटा. नेक्स्ट-जेनरेशन लीडरशिप की दिशा में बदलाव को आगे बढ़ाते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड ने अमन माहेश्वरी को बोर्ड आफ डायरेक्टर्स (निदेशक मंडल) में नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। इस नियुक्ति के साथ एलन के सभी चारों फाउंडर्स ने अगली पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह बदलाव एलन के अगले 100 वर्षों के भविष्य के लिए तैयार दीर्घकालिक विजन को दर्शाता है। अमन माहेश्वरी निदेशक मंडल में नेक्स्ट-जेनरेशन के साथी डायरेक्टर्स अविरल माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी और केशव माहेश्वरी के साथ शामिल हुए हैं। वे एलन के ग्लोबल स्टडीज डिवीजन का नेतृत्व करने के अनुभव के साथ-साथ भारत, यूएई, यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में शिक्षा एवं प्रोफेशनल अनुभव से विकसित अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण लेकर आए हैं। उनकी नियुक्ति एक सुनियोजित बदलाव के पूरा होने का प्रतीक है, जिसमें एलन के संस्थापक मूल्यों, प्रोफेशनल लीडरशिप के अनुभव और नेक्स्ट-जेनरेशन निदेशकों की ऊर्जा का समावेश है। इस बदलाव पर संस्थापक राजेश माहेश्वरी ने कहा कि अमन के बोर्ड में शामिल होने के साथ एलन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हुआ है। हमारे प्रत्येक नेक्स्ट-जेनरेशन निदेशक की अपनी विशिष्ट क्षमता है और ग्लोबल एजुकेशन वर्टिकल के निर्माण में अमन का अनुभव बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आएगा। मुझे विश्वास है कि यह सामूहिक नेतृत्व एलन के मिशन को आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाएगा। अपने बड़े बेटे अमन माहेश्वरी के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में शामिल होने का स्वागत करते हुए एलन के संस्थापक डॉ. ब्रजेश माहेश्वरी ने कहा, बड़े बेटे अमन को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हुए देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने वर्षों से एलन की ग्लोबल एजुकेशन इनिशिएटिव को मजबूती से विकसित करने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बोर्ड में अपनी नई भूमिका में भी वे उसी समर्पण, प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि के साथ कार्य करते हुए एलन को सफलता के नए आयामों तक ले जाएंगे। एक फाउंडर के रूप में हमारा सदैव प्रयास रहा है कि हम ऐसी संस्था का निर्माण करें, जो हमसे भी बड़ी हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत विरासत बने। अमन का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में यह दायित्व संभालना इसी दूरदर्शी सोच की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक कदम साबित होगा।” नियुक्ति पर अमन माहेश्वरी ने कहा, “एलन के निदेशक मंडल में शामिल होना मेरे लिए सम्मान की बात है। संस्था के साथ वर्षों से इसकी ग्लोबल एजुकेशन पहल के निर्माण एवं विस्तार में योगदान करते हुए मुझे एलन के मूल्यों को समझने के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को जानने का अवसर मिला है। मैं अपने अनुभव और दृष्टिकोण को बोर्ड में लेकर आने, अपने साथी निदेशकों और लीडरशिप टीम के साथ मिलकर एलन के मूल आधार को और मजबूत करने, इनोवेशन को गति देने, वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं, जिसने एलन को भारत के सबसे भरोसेमंद शिक्षा संस्थानों में से एक बनाया है।” निदेशक उदय शंकर ने कहा कि अमन की नियुक्ति के साथ एलन का बोर्ड अब संस्था के अगले अध्याय को दर्शाता है। एक ऐसा अध्याय, जिसमें संस्थापकों का अनुभव, प्रोफेशनल मैनेजमेंट का अनुशासन और अगली पीढ़ी की नई ऊर्जा एक साथ है। इससे ऐसी गवर्नेंस संरचना पूरी होती है, जो आने वाले दशकों तक एलन की उत्कृष्टता को बनाए रखने में सक्षम होगी।} सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि ग्लोबल स्टडीज डिवीजन का नेतृत्व करते हुए वर्षों में अमन ने जो विश्वास अर्जित किया है, उसके आधार पर उनका बोर्ड में शामिल होना एक स्वाभाविक प्रगति है। लीडरशिप टीम के रूप में हम एलन के सेंचुरी विजन की दिशा में काम करते हुए उनके निरंतर मार्गदर्शन की उम्मीद करते हैं। इस नियुक्ति के साथ एलन के पुनर्गठित निदेशक मंडल में उदय शंकर चेयरमैन के रूप में तथा अविरल माहेश्वरी, अमन माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी, केशव माहेश्वरी और प्रतीक गर्ग शामिल हैं। अमन माहेश्वरी के बारे में अमन माहेश्वरी एलन के ग्लोबल स्टडीज डिवीजन के प्रमुख हैं। जनवरी 2020 में एलन से जुड़ने के बाद से उन्होंने इंटरनेशनल अंडरग्रेजुएट एजुकेशन के लिए की गई पहल का नेतृत्व किया है। इसके तहत विद्यार्थियों को दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज में शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने में मदद की गई है, जिसमें हार्वर्ड, एमआईटी, ऑक्सफोर्ड और अन्य क्यूएस टॉप-200 यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। उनके कार्यक्षेत्र में इंटरनेशनल एडमिशन स्ट्रेटेजी, स्टूडेंट काउंसलिंग, स्टैंडड्राइज्ड टेस्ट प्रिपरेशन, प्रोफाइल बिल्डिंग और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक मार्ग विकसित करना शामिल है। सेकंड-जेनरेशन बिजनेस लीडर के रूप में कई देशों में उनकी शिक्षा और प्रोफेशनल एक्सपीरियंस ने शिक्षा, उद्यमिता और युवा विकास के प्रति उनके वैश्विक दृष्टिकोण को आकार दिया है। अमन यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन, यूके से एमबीए हैं और उन्होंने बिट्स पिलानी, दुबई कैंपस से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की है। स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, कोटा से पूरी की है। शिक्षा और बिजनेस के अलावा क्रिकेट भी अमन की अंतरराष्ट्रीय यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में क्रोएशिया का प्रतिनिधित्व किया है। इसमें 2022 में फिनलैंड और 2024 में जर्मनी में हुए वल्र्ड कप क्वालिफाइंग टूर्नामेंट शामिल हैं। वे क्रोएशिया और पड़ोसी यूरोपीय देशों में क्रोएशियाई घरेलू क्रिकेट से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बारे में 1988 में कोटा, राजस्थान में स्थापित एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड भारत के प्रमुख शिक्षा संस्थानों में से एक है, जो जेईई-मैन एवं एडवांस्ड, नीट-यूजी, ओलम्पियाड और अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को शिक्षित करता है। पिछले 38 वर्षों में एलन ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुभवी फैकल्टी, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा और निरंतर बेहतर परिणामों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास अर्जित किया है। आज यह संस्थान भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लासरूम प्रोग्राम्स और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स का एक मजबूत इकोसिस्टम संचालित करता है।  

    विश्व संस्कृत दिवस पर स्वस्तिवाचनम् के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डाक विभाग ने जारी किया विशेष आवरण

    नई दिल्ली विश्व संस्कृत दिवस के पावन अवसर पर स्वस्तिवाचनम् की स्थापना के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग द्वारा एक विशेष आवरण (स्पेशल कवर) जारी किया गया। यह विशेष आवरण नई दिल्ली स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में आयोजित गरिमामय समारोह में जारी किया गया। इस विशिष्ट फिलाटेलिक समारोह में प्रख्यात आध्यात्मिक संतों, कुलपतियों, संस्कृत विद्वानों तथा सांस्कृतिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों ने सहभागिता की। समारोह में श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी, पीठाधीश्वर, पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी, कर्नाटक, प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन, प्रो. आर. जी. मुरली कृष्ण, कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, हरीश चंद्र जोशी, न्यासी एवं अध्यक्ष, स्वस्तिवाचनम्; डॉ. शुभश्री पाणिग्रही, संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं प्रोग्रामिंग), संसद टीवी; डॉ. आर. विट्टोबाचार, प्राचार्य, वेदव्यास गुरुकुलम् एवं निदेशक, वैदिक-वेदान्तिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान,डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अनेक विशिष्ट संस्कृत विद्वान उपस्थित रहे। नई दिल्ली के संसद मार्ग प्रधान डाकघर के वरिष्ठ पोस्टमास्टर इन्द्रेश कुमार वर्मा ने औपचारिक रूप से इस विशेष आवरण एवं कैंसिलेशन का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने समारोह में सहभागिता करते हुए इसे सांस्कृतिक, अकादमिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामय बनाया। स्वस्तिवाचनम् के न्यासी एवं अध्यक्ष हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि यह विशेष आवरण डाक टिकट संग्रहण कला (फिलाटेली) की भाषा के माध्यम से भारत के प्राचीन ज्ञान और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रतीकात्मक रूप से एक सूत्र में पिरोता है। विशेष आवरण में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थ चतुष्टय के साथ जीवात्मा के भावपूर्ण प्रतीक का समावेश किया गया है, जो सम्पूर्ण मानवता को एक कालजयी संदेश देता है कि वास्तविक प्रगति व्यक्ति, समाज और अंतःचेतना के समन्वित एवं संतुलित विकास में निहित है। इस विशेष आवरण पर प्रेरणादायी टैगलाइन— “Sixteen Years – A Glorious Journey of Values, Knowledge and the Arts” सोलह वर्ष—मूल्यों, ज्ञान और कलाओं की गौरवशाली यात्रा-अंकित है। यह स्मारक विशेष आवरण स्वस्तिवाचनम् की सोलह वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव है। स्वस्तिवाचनम् एक ऐसी संस्था है, जो संस्कृत पत्रकारिता, योग, आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, इंडोलॉजी तथा व्यापक भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित है। जोशी ने कहा कि वर्षों से स्वस्तिवाचनम् भारत की कालजयी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत और समकालीन समाज के मध्य एक सार्थक सेतु स्थापित करने का सतत प्रयास कर रहा है। वर्ष 2026 का विशेष महत्व इसलिए भी है कि यह स्वस्तिवाचनम् के संस्थापक, प्रख्यात संस्कृत विद्वान, दूरदर्शी चिंतक एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती का वर्ष है। आचार्य दिनेश चंद्र जोशी का जन्म 11 अप्रैल 1926 को उत्तराखंड में हुआ था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन संस्कृत, भारतीय दर्शन, पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान तथा भारत की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। हरीश चंद्र जोशी ने कहा कि आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती के अवसर पर जारी यह विशेष आवरण उनके विचारों, मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनके आजीवन समर्पण को एक विनम्र श्रद्धांजलि है। यह अवसर न केवल स्वस्तिवाचनम् की 16 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है।