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    कलाओं के प्रदेश में कला शिक्षा विषय की दुर्दशा

    1 hour ago

    लाखों बच्चों के सृजनात्मक आनन्द मय शिक्षण के साथ खिलवाड़

    सरकार ने राज्य पाठ्य-पुस्तक सूची में एनसीईआरटी की कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम सम्मिलित करना भूली

    न डिमांड भेजी नतिजा

    नवीन सत्र 2026-27 में कला शिक्षा का न पाठ्यक्रम न पुस्तक

    कक्षा 9,10 की कला कुन्ज पुस्तक का भी मुद्रण, वितरण भी बन्द

    राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग ने सत्र 2020-2021 से एनसीईआरटी का कक्षा 6 से 12 तक पाठ्यक्रम पुस्तक लागू कर दिया है जिसके के तहत् एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम व पुस्तक लागू है उसका शिक्षण राजकीय विद्यालयों में करवाया जाता है लेकिन कलाओं के प्रदेश राजस्थान में कला शिक्षा विषय स्थिति दयनीय है शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित कला शिक्षा विषय की पुस्तक पाठ्यक्रम को राज्य की पाठ्य-पुस्तक पाठ्यक्रम सूची में सम्मिलित नहीं किया जिससे नवीन सत्र में कला शिक्षा की पुस्तक का न तो मुद्रण हुआ न वितरण हुआ और न डिमांड भेजी राज्य सरकार के पास नवीन सत्र 2026-2027 में अनिवार्य

    कला शिक्षा विषय का कक्षा 1 से 8 तक न पाठ्यक्रम है पुस्तक उपलब्ध है और राज्य में कक्षा 9 और 10 में लागू कला शिक्षा पाठ्यक्रम की पुस्तक कला कुन्ज पुस्तक की डिमांड नहीं भेजने से उसका मुद्रण और वितरण भी बन्द है अब देखने वाली बात यह है की कक्षा 1 से 10 तक नवीन सत्र में राजकीय विद्यालयों सहित निजी विद्यालयों में लाखों बच्चों का अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत विषय का शिक्षण कैसे होगा ?

    बिना पुस्तक, पाठ्यक्रम, शिक्षण के लाखों बच्चों का 100 अंकों होगा मूल्यांकन अंकतालिकाओं आयेगी ग्रेड

    अनिवार्य है शिक्षण

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनिवार्य कला शिक्षा चित्रकला एवं संगीत सहित कलाओं का शिक्षण अनिवार्य है।

    100 अंकों का निर्धारित मूल्यांकन

    कला शिक्षा के लिए 100 अंकों का मूल्यांकन शिक्षा विभाग ने निर्धारित कर रखा है जिसके आधार पर अंकतालिकाओं में ग्रेड आती है।

    एनसीईआरटी की यह है पुस्तकें लागू

    कक्षा 3 से 5 तक बांसूरी नामक

    कक्षा 6 से 8 तक कृति नामक

    कक्षा 9 में मधुरिमा

    राज्य में कक्षा 9 व 10 में कला कुन्ज पुस्तक नामक

    शिक्षा विभाग अतिशीघ्र एनसीईआरटी की कक्षा 3 से 10 तक कला शिक्षा विषय निर्धारित के पाठ्यक्रम पुस्तक को राज्य की पाठ्य-पुस्तक सूची में सम्मिलित कर पुस्तक मुद्रण कर राजकीय विद्यालयों नि: शुल्क वितरण करायें ताकि लाखों को कला शिक्षा विषय का नवीन सत्र में शिक्षण मिल सकें।

    महेश गुर्जर

    प्रदेश सचिव

    कला शिक्षा आन्दोलन

     

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