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    भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को बड़ी मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने पर हुआ समझौता

    6 hours ago

    युगचरण न्यूज़ / 07 जुलाई 2026

    भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए दोनों देशों ने ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल सिस्टम से जुड़े एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के दौरान हुआ, जहां उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस यात्रा के दौरान रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, इस्पात उद्योग, कृषि और समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    हालांकि दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में ब्रह्मोस समझौते का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इसे भारत की रक्षा निर्यात नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने पर हुआ समझौता

    इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, भारत-रूस संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के बीच ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति को लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

    हालांकि समझौते की वित्तीय राशि, मिसाइलों की संख्या या डिलीवरी की समयसीमा जैसी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने बताया था कि इंडोनेशिया के साथ 20 से 35 करोड़ डॉलर के संभावित रक्षा सौदे पर उन्नत स्तर की बातचीत चल रही थी।

    अब इस समझौते के औपचारिक रूप लेने के बाद इंडोनेशिया उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने भारत के विकसित ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को अपनाने का निर्णय लिया है।

    भारत से मिलेगी ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल

    सूत्रों के अनुसार भारत इंडोनेशिया को केवल ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल सिस्टम ही नहीं बल्कि स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल भी उपलब्ध कराएगा। यह समझौता दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक संतुलन को नई दिशा दे सकता है।

    इसी क्रम में इंडोनेशिया की निजी रक्षा होल्डिंग कंपनी रिपब्लिकॉर्प और भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच भी एयर-टू-एयर मिसाइलों से संबंधित एक अलग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

    रक्षा के साथ उद्योग और व्यापार पर भी जोर

    दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

    बैठक के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), इस्पात उद्योग और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

    भारत की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और इंडोनेशिया की क्राकाटाऊ स्टील कंपनी ने इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) स्थापित करने पर भी सहमति जताई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को नई दिशा दे सकती है और भविष्य में इस्पात क्षेत्र में निवेश बढ़ने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

    बैठक के बाद राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं और दोनों के बीच मजबूत साझेदारी पूरे क्षेत्र के लिए लाभदायक साबित होगी।

    उन्होंने कहा कि दोनों देश वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते (Preferential Trade Agreement) पर बातचीत को भी तेज करेंगे ताकि व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिल सके।

    वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, समुद्री सहयोग और सुरक्षित नौवहन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।

    हालांकि दोनों नेताओं ने अपने सार्वजनिक संबोधन में ब्रह्मोस रक्षा समझौते का अलग से उल्लेख नहीं किया।

    पहले भी बढ़ा था रणनीतिक सहयोग

    भारत और इंडोनेशिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पिछले वर्ष नई दिल्ली का दौरा किया था, जहां दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा वर्ष 2023 के बाद इंडोनेशिया की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे का उद्देश्य रक्षा, आर्थिक और सामरिक सहयोग को और व्यापक बनाना बताया गया।

    ब्रह्मोस बना भारत के रक्षा निर्यात का प्रमुख हथियार

    ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसे भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है। यह मिसाइल भूमि, समुद्र और वायु—तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है तथा लंबी दूरी तक अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने में सक्षम मानी जाती है।

    भारत ने हाल के वर्षों में रक्षा उपकरणों के निर्यात पर विशेष जोर दिया है। इससे पहले फिलीपींस और वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस प्रणाली को लेकर समझौते हो चुके हैं। अब इंडोनेशिया के साथ हुआ यह नया समझौता भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक रक्षा बाज़ार में उसकी बढ़ती उपस्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा रणनीतिक सहयोग

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी दिखाई देगा।

    दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जुड़ी है। ऐसे में रक्षा और समुद्री सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अपनी इंडोनेशिया यात्रा समाप्त करने के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होंगे, जहां वे विभिन्न द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर नेताओं से मुलाकात करेंगे। भारत की इस सक्रिय कूटनीतिक पहल को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके बढ़ते प्रभाव और रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

     
     
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