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    वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के बीच सोने-चांदी में गिरावट, निवेशकों की नजर अमेरिकी नीति और ईरान वार्ता पर

    3 hours ago

    Yugcharan News / 23 June 2026

    वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। लंबे समय से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माने जाने वाले सोने पर अब अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के मिश्रित प्रभाव का दबाव साफ देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय वायदा बाजार तक, हर जगह सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट केवल किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई वैश्विक कारकों के एक साथ सक्रिय होने का परिणाम है। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीतिगत दिशा, अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान में बदलाव प्रमुख रूप से शामिल हैं।


    डॉलर की मजबूती ने सोने पर बढ़ाया दबाव

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स हाल के महीनों में मजबूत बना हुआ है और यह एक साल के उच्च स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर की मजबूती का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि सोना डॉलर में ही मूल्यांकित होता है।

    जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित होती है। इसी कारण हाल के सत्रों में सोने की खरीदारी में कमी देखी गई है। कई देशों के निवेशक अब अधिक रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे गोल्ड मार्केट में दबाव बढ़ा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति से समर्थन मिल रहा है। बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की बजाय वृद्धि का रुख भी अपनाया जा सकता है।


    फेडरल रिजर्व की नीति पर बाजार की नजर

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति हमेशा से वैश्विक सोना बाजार के लिए सबसे बड़ा संकेतक रही है। मौजूदा समय में फेड के रुख को लेकर बाजार में स्पष्टता नहीं है, और यही अनिश्चितता सोने की कीमतों पर दबाव डाल रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं या उनमें और वृद्धि की संभावना बनती है, तो सोने जैसे गैर-यील्डिंग एसेट्स की मांग कमजोर हो सकती है। निवेशक ऐसे समय में बॉन्ड या अन्य ब्याज देने वाले साधनों की ओर आकर्षित होते हैं।

    हाल ही में फेड अधिकारियों के बयानों में यह संकेत मिला है कि मुद्रास्फीति अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। इससे बाजार में यह धारणा बनी है कि दरों में कटौती जल्द नहीं होगी। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर देखा जा रहा है।


    अमेरिका-ईरान वार्ता और भू-राजनीतिक प्रभाव

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता भी है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच शांति समझौते की दिशा में बातचीत तेज हुई है, जिससे वैश्विक बाजारों में जोखिम भावना में बदलाव आया है।

    जब भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश से हटकर जोखिम वाली परिसंपत्तियों की ओर जाते हैं। यही वजह है कि सोने में मांग थोड़ी कमजोर हुई है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। मध्य पूर्व की स्थिति हमेशा अस्थिर रही है और किसी भी समय तनाव बढ़ने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में सोने की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है यदि वार्ता किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंचती।


    कच्चे तेल की कीमतों का अप्रत्यक्ष असर

    कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने भी सोने के बाजार को प्रभावित किया है। तेल की कीमतें घटने से वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंता थोड़ी कम होती है, जिससे सोने की मांग कमजोर पड़ती है।

    लेकिन जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई की आशंका बढ़ती है और निवेशक सोने को एक हेज (Hedge) के रूप में देखते हैं। वर्तमान में तेल बाजार भी अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आपूर्ति स्थिति के कारण अस्थिर बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि तेल और सोने के बीच यह संबंध आगे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


    भारतीय बाजार में भी दिखा असर

    भारत में भी सोने की कीमतों में हाल के दिनों में अस्थिरता देखी गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में दबाव बना हुआ है। घरेलू बाजार पर दो मुख्य कारकों का असर देखा जा रहा है—पहला अंतरराष्ट्रीय कीमतें और दूसरा भारतीय रुपये की चाल।

    डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने पर आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतों में वृद्धि होती है। हालांकि वर्तमान में वैश्विक दबाव इतना अधिक है कि रुपये की कमजोरी भी सोने को पर्याप्त समर्थन नहीं दे पा रही है।

    चांदी में भी समान रुझान देखा जा रहा है, जहां औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों ही प्रभावित हुई हैं।


    निवेशकों का बदलता रुख

    सोने को पारंपरिक रूप से संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों का रुझान थोड़ा बदलता दिख रहा है। अब निवेशक केवल सोने पर निर्भर न रहकर शेयर बाजार, बॉन्ड और डिजिटल एसेट्स जैसे विकल्पों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं।

    हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों का मानना है कि सोना अभी भी पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है और ऐसे समय में सोना स्थिरता प्रदान करता है।


    विशेषज्ञों की राय: आगे क्या हो सकता है?

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने की दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:

    1. अमेरिकी आर्थिक आंकड़े (विशेषकर रोजगार और महंगाई डेटा)
    2. फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
    3. अमेरिका-ईरान वार्ता का परिणाम और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति

    यदि अमेरिकी डॉलर और मजबूत होता है और फेड सख्त रुख बनाए रखता है, तो सोने में और गिरावट देखी जा सकती है। इसके विपरीत, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।


    दीर्घकालिक दृष्टिकोण

    लंबी अवधि में सोने की स्थिति अभी भी स्थिर मानी जा रही है। कई केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना जोड़ रहे हैं, जो इस धातु के प्रति वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते सोना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बना हुआ है।

    हालांकि अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि यह एक नए संतुलन की तलाश में है।


    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, सोने और चांदी के बाजार में मौजूदा गिरावट एक जटिल वैश्विक परिदृश्य का परिणाम है, जिसमें आर्थिक नीतियां, मुद्रा बाजार, भू-राजनीति और निवेशकों की भावना सभी शामिल हैं। डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव डाला है, जबकि अमेरिका-ईरान वार्ता ने सुरक्षित निवेश की मांग को प्रभावित किया है।

    आने वाले दिनों में आर्थिक डेटा और वैश्विक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि सोना फिर से मजबूती की ओर बढ़ता है या मौजूदा दबाव जारी रहता है।

     
     
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