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    एक और सफलता, एक और उपलब्धि” — रीजनल कॉलेज ऑफ फार्मेसी के छात्र का ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स में चयन

    जयपुर। रीजनल कॉलेज ऑफ फार्मेसी, सीतापुरा, जयपुर के बी. फार्मा अंतिम वर्ष के छात्र रोहित त्यागी का चयन देश की अग्रणी दवा निर्माता कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड में सेल्स एग्जीक्यूटिव पद पर हुआ है। छात्र की इस उपलब्धि से महाविद्यालय में हर्ष का वातावरण है। महाविद्यालय के प्लेसमेंट सेल द्वारा विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्लेसमेंट सेल अधिकारी ने बताया कि विद्यार्थियों को स्किल डेवलपमेंट, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, कम्युनिकेशन स्किल्स, इंटरव्यू प्रिपरेशन तथा तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप छात्र राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अस्पतालों तथा शैक्षणिक संस्थानों में उत्कृष्ट अवसर प्राप्त कर रहे हैं। संस्थान के अध्यक्ष (President) डॉ. प्रेम सुराना ने चयनित छात्र को बधाई देते हुए कहा, "विद्यार्थियों की सफलता ही किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। हमारा उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर विद्यार्थियों को सफल एवं आत्मनिर्भर बनाना है। हमें विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी अपने उत्कृष्ट कार्य से संस्थान का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।" संस्थान के उपाध्यक्ष (Vice President) डॉ. अंशु सुराना ने कहा, "आज के प्रतिस्पर्धी दौर में कौशल आधारित शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण सफलता की कुंजी हैं। हमें प्रसन्नता है कि हमारे विद्यार्थी प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित होकर अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर रहे हैं। संस्थान भविष्य में भी विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट और करियर विकास के लिए उद्योगों के साथ ऐसे अवसर उपलब्ध कराता रहेगा।" प्राचार्य प्रो. डॉ. ताराचंद एवं महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्यों ने रोहित त्यागी को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत है तथा संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावी प्लेसमेंट प्रणाली का प्रमाण है।  

    मध्य पूर्व तनाव के बीच सोने में जोरदार तेजी, चांदी ने भी दिखाई मजबूती; निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    युगचरण न्यूज़ / 22 जुलाई 2026 मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच बुधवार को वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमतें दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जबकि औद्योगिक मांग में सुधार की उम्मीदों के चलते चांदी ने भी शानदार प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने की ओर बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, चीन और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों में मजबूत मांग तथा ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों ने सोने की कीमतों को मजबूती प्रदान की है। एमसीएक्स पर सोने में बड़ी छलांग मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना बुधवार को लगभग 1,580 रुपये की बढ़त के साथ 1,44,463 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि स्पॉट मार्केट में मजबूत मांग और निवेशकों द्वारा नई खरीदारी किए जाने के कारण वायदा बाजार में भी तेजी देखने को मिली। व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में निवेशक जोखिम वाले निवेश विकल्पों से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। मुंबई सर्राफा बाजार में भी तेजी मुंबई के सर्राफा बाजार में भी कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। बाजार में उपलब्ध दरों के अनुसार— 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना लगभग 1,45,440 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता देखा गया। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना लगभग 1,44,858 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। वहीं स्पॉट चांदी की कीमत लगभग 2,26,238 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे दामों के बावजूद निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की दिलचस्पी बनी हुई है। चेन्नई में भी सोने-चांदी के भाव मजबूत चेन्नई के बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में स्थिरता के साथ मजबूती देखने को मिली। 22 कैरेट सोना लगभग 13,430 रुपये प्रति ग्राम पर रहा। 18 कैरेट सोना करीब 11,245 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी का भाव लगभग 245 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी त्योहारों और शादी के सीजन को देखते हुए सोने की मांग आगे भी मजबूत बनी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो सप्ताह के उच्च स्तर पर सोना वैश्विक बाजारों में भी सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया और 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी मजबूत तेजी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने में खरीदारी बढ़ाई है। इसके अलावा अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर भी पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। सोने की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहें विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में कई ऐसे कारक हैं जो सोने की कीमतों को लगातार समर्थन दे रहे हैं। मध्य पूर्व का तनाव क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के कारण वैश्विक निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की तलाश शुरू कर दी है। ऐसी परिस्थितियों में सोना हमेशा से निवेशकों की पहली पसंद माना जाता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। यदि ब्याज दरें स्थिर रहती हैं तो सोने की मांग को और मजबूती मिल सकती है। केंद्रीय बैंकों की खरीद दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी कर रहे हैं। इससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई है और कीमतों को समर्थन मिल रहा है। भारत और चीन की मजबूत मांग भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल हैं। इन दोनों देशों में लगातार बनी हुई मांग ने भी कीमतों को मजबूती प्रदान की है। चांदी ने भी किया शानदार प्रदर्शन बुधवार को चांदी की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार औद्योगिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीदों ने चांदी की मांग को मजबूत किया है। चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण और कई अन्य उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसी कारण औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद से चांदी की कीमतों में तेजी आई। अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों पर बाजार की नजर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयास भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो इसका असर कच्चे तेल सहित अन्य कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, जिसके कारण निवेशक सोने में निवेश बनाए हुए हैं। दिल्ली में पहले ही बढ़ चुके थे दाम इससे पहले मंगलवार को भी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 800 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना करीब 1,47,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में मजबूत मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण यह तेजी देखने को मिली। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? कमोडिटी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, मध्य पूर्व की स्थिति, डॉलर की चाल, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक आर्थिक गतिविधियां आगे की दिशा तय करेंगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को केवल अल्पकालिक तेजी को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश और महंगाई से बचाव का प्रभावी माध्यम माना जाता है, जबकि चांदी में निवेश के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा योगदान रहता है। आगे क्या? यदि मध्य पूर्व में तनाव बना रहता है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जारी रहती है, तो आने वाले समय में सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है। वहीं, औद्योगिक गतिविधियों में सुधार होने पर चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी रह सकती है।   बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और घरेलू मांग पर लगातार नजर रखनी चाहिए। फिलहाल सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के आधार पर कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।

    विदेशों तक पहुंचा सोनम वांगचुक के समर्थन का आंदोलन, अमेरिका, ब्रिटेन और आयरलैंड में प्रदर्शन

    युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी आंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता दिखाई दे रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के समर्थन में अमेरिका, ब्रिटेन और आयरलैंड सहित कई देशों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों के साथ न्याय, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार से जवाबदेही की मांग उठाई। इधर भारत में भी आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है। सरकार एक बार फिर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। अमेरिका और यूरोप में प्रदर्शन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क और सैन जोस में भारतीय मूल के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर सोनम वांगचुक और आंदोलन का समर्थन किया। इसी तरह लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग और आयरलैंड की राजधानी डबलिन में भारतीय दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर छात्रों के समर्थन में नारे लगाए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग दोहराई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। "सरकार जवाबदेही तय करे" प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना था कि भारत के छात्रों को निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से संवाद बढ़ाने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। जारी है सोनम वांगचुक का अनशन सोनम वांगचुक कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में 28 जून से आमरण अनशन पर हैं। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच उन्हें हाल ही में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। इस बीच केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का एक और दौर भी प्रस्तावित है। आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होना चाहिए। इनमें परीक्षा से जुड़े कथित विवादों की निष्पक्ष जांच, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई जैसी मांगें शामिल हैं। संसद में भी उठेगा मुद्दा सरकार ने लोकसभा में कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवादों पर विस्तृत चर्चा कराने की सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि इस विषय पर चर्चा की तारीख, नियम और अवधि तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक भी प्रस्तावित है। अंतरराष्ट्रीय समर्थन से बढ़ा दबाव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आंदोलन को विदेशों में मिल रहा समर्थन इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना सकता है। हालांकि अंतिम समाधान सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत तथा संसद में होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगा।   फिलहाल देश और विदेश दोनों जगहों पर इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार, आंदोलन के प्रतिनिधियों और संसद में होने वाली बहस के आधार पर इस मुद्दे की आगे की दिशा तय हो सकती है।

    ट्रंप के 200% टैरिफ प्लान से भारतीय फार्मा सेक्टर में हलचल, अमेरिकी बाजार पर बढ़ सकता है असर

      युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से 200% तक टैरिफ लगाने की प्रस्तावित योजना ने भारतीय दवा उद्योग में नई चिंता पैदा कर दी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा आपूर्तिकर्ता माना जाता है और अमेरिकी बाजार भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्यों में से एक है। ऐसे में इस प्रस्ताव का असर केवल भारत ही नहीं बल्कि अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था और वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद अगस्त 2028 से एक वर्ष के लिए 100% टैरिफ लागू किया जाएगा और उसके बाद इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य दवा निर्माण को अमेरिका के भीतर बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों को अमेरिकी धरती पर उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना बताया गया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह नीति अमेरिका में जेनेरिक दवा निर्माण को दोबारा स्थापित करने के लिए बनाई गई है। उनका कहना है कि जो कंपनियाँ निर्धारित समय के भीतर अमेरिका में उत्पादन संयंत्र स्थापित नहीं करेंगी, उन्हें भारी शुल्क का सामना करना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पेटेंट, ब्रांडेड और नवाचार आधारित दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत पर कितना पड़ सकता है असर? भारत को लंबे समय से "दुनिया की फार्मेसी" कहा जाता है क्योंकि यहां कम लागत पर बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन होता है। ये दवाएं मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, संक्रमण और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में दुनियाभर में इस्तेमाल की जाती हैं। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया, जो देश के कुल फार्मास्युटिकल निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत था। ऐसे में अमेरिकी बाजार में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर भारतीय कंपनियों की आय और निवेश योजनाओं पर पड़ सकता है। उद्योग ने अपनाया 'वेट एंड वॉच' रुख ट्रंप की इस घोषणा के बाद भारतीय दवा उद्योग ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अभी नीति का पूरा स्वरूप सामने नहीं आया है, इसलिए कंपनियाँ जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बच रही हैं। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि अब तक यह माना जा रहा था कि जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से छूट मिलती रहेगी। इसलिए यह प्रस्ताव अप्रत्याशित माना जा रहा है। कई कंपनियाँ सरकार और अमेरिकी प्रशासन से आने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही हैं। क्या अमेरिका में उत्पादन संभव है? ट्रंप की योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशी कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दो वर्षों के भीतर अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का पूरा उत्पादन तंत्र तैयार करना आसान नहीं होगा। दवा उद्योग के जानकारों के अनुसार केवल फैक्ट्री बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन, कच्चे माल की उपलब्धता, सक्रिय औषधीय संघटक (API) की सप्लाई, नियामकीय मंजूरियाँ और व्यापक सप्लाई चेन विकसित करनी होगी। इन सभी प्रक्रियाओं में कई वर्ष लग सकते हैं। भारतीय कंपनियों के सामने क्या विकल्प? विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियाँ अमेरिका में स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर उत्पादन शुरू करने पर विचार कर सकती हैं। वहीं कुछ कंपनियाँ उच्च लाभ वाली दवाओं का निर्माण अमेरिका में स्थानांतरित करने का विकल्प भी तलाश सकती हैं। दूसरी ओर कई कंपनियाँ अपनी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम कर यूरोप, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और मध्य पूर्व जैसे अन्य बाजारों में विस्तार की रणनीति पर भी काम कर सकती हैं। अमेरिका के मरीजों पर भी पड़ सकता है प्रभाव स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयातित जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। जेनेरिक दवाएं अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ मानी जाती हैं और अधिकांश मरीज इन्हीं पर निर्भर हैं। कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि आयात महंगा हुआ तो कुछ आवश्यक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और दवाओं की कमी या उपचार लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। सरकार और उद्योग की नजर आगे की घोषणा पर फिलहाल भारतीय फार्मा कंपनियाँ और उद्योग संगठन अमेरिका की ओर से जारी होने वाले विस्तृत नियमों और दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन उत्पादों पर यह नीति लागू होगी, किन कंपनियों को राहत मिल सकती है और इसके क्रियान्वयन की अंतिम प्रक्रिया क्या होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत और अमेरिका के बीच इस विषय पर व्यापारिक और कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत हो सकती है। यदि नीति वर्तमान स्वरूप में लागू होती है तो भारतीय दवा उद्योग को अपनी वैश्विक रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। फिलहाल स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है और उद्योग ने किसी त्वरित प्रतिक्रिया के बजाय परिस्थितियों का आकलन करने की रणनीति अपनाई है। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन की अंतिम अधिसूचना और व्यापारिक वार्ताएँ इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगी।      

    राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में सरकार पर बोला हमला, कहा- "छात्र आतंकवादी नहीं हैं"

    युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि "छात्र आतंकवादी नहीं हैं" और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने बुधवार को संसद परिसर में विपक्षी दलों के साथ काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके विरोध प्रदर्शन पर जिस प्रकार की कार्रवाई की गई, वह बेहद चिंताजनक है। छात्रों के समर्थन में विपक्ष एकजुट संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जिसे लोकतांत्रिक तरीके से सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अनावश्यक बल प्रयोग किया गया और इस पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बयान देने तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों की चिंताओं का समाधान भी करे। पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने मांग की कि जिन पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री से माफी की मांग राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और विरोध प्रदर्शन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। संसद में हंगामे के बीच उठा मुद्दा संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा संबंधी विवादों पर चर्चा की मांग की। लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष का कहना है कि इस पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, जबकि सरकार का पक्ष है कि वह परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी दोहराया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और जवाबदेही तय करना आवश्यक है। राजनीतिक माहौल हुआ गर्म छात्र आंदोलन और संसद के भीतर चल रहे विरोध के कारण राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। एक ओर विपक्ष सरकार को छात्रों के मुद्दे पर घेर रहा है, वहीं सरकार विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रही है।   आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।

    जंतर मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पुलिस से मांगा जवाब; CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

      युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 नई दिल्ली: जंतर मंतर और संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाओं में उठाए गए आरोप किसी एक व्यक्ति की अलग-थलग घटना नहीं हैं। इसलिए इसे केवल निजी शिकायत का मामला मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा- यह कोई अलग-थलग घटना नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस की उस दलील पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि यदि किसी व्यक्ति को शिकायत है तो वह संबंधित थाने में जाकर मामला दर्ज करा सकता है। खंडपीठ ने कहा कि यदि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना होती तो शिकायतकर्ता को निजी शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा जा सकता था, लेकिन यहां बड़ी संख्या में लोगों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अदालत पूरे मामले पर पुलिस का विस्तृत पक्ष जानना चाहती है। पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह का समय जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दिया गया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि घटना से संबंधित सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार सुरक्षित रखे जाएं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि 20 और 21 जुलाई को जंतर मंतर तथा दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शनकारी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें कई लोगों के घायल होने की खबरें भी आई थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से क्या कहा गया याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक कठोर व्यवहार किया गया। दलील दी गई कि प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हिस्सा है और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बल प्रयोग से पहले आवश्यक चेतावनी दिए जाने जैसे नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने अदालत से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की। वीडियो और सीसीटीवी साक्ष्यों का मुद्दा सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर उपलब्ध कई वीडियो में कथित पुलिस कार्रवाई दिखाई दे रही है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश दिया जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के साक्ष्य नष्ट न हों। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं भी हुईं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पुलिस के खिलाफ शिकायत है तो वह विधि के अनुसार संबंधित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है। साथ ही यह दलील भी दी गई कि अदालत को पहले पुलिस का पक्ष सुनना चाहिए। अदालत ने फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं निकाला सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने अभी तक याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम राय नहीं बनाई है। अदालत ने कहा कि वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। फिलहाल आवश्यक है कि सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और पुलिस अपना विस्तृत जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। मामले पर आगे क्या होगा अब दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार अदालत में अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया ली जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। फिलहाल हाईकोर्ट के नोटिस और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अदालत की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।      

    संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा, छात्र प्रदर्शन और NEET मुद्दे पर सरकार- विपक्ष आमने-सामने

    युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं, छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई और इस पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगते हुए दोनों सदनों में जोरदार विरोध दर्ज कराया। लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। संसद परिसर के अंदर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया, जबकि केंद्र सरकार ने कहा कि वह परीक्षा संबंधी सभी मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष ने चर्चा की मांग उठाई लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और संसद इस विषय पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित सख्ती चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए और संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित मंगलवार सुबह जैसे ही दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलाने की अपील की गई, लेकिन हंगामा जारी रहा। लोकसभा में अध्यक्ष ने सदस्यों को संसद की गरिमा बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि बैनर, पोस्टर और अन्य प्रदर्शन सामग्री लाना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसके बावजूद शोर-शराबा जारी रहने पर कार्यवाही पहले दोपहर तक, फिर दो बजे तक और अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी लगभग यही स्थिति रही। विपक्ष द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और दिनभर में कई बार स्थगन के बाद कार्यवाही समाप्त कर दी गई। सरकार का पक्ष केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक में परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कथित परीक्षा अनियमितताओं के सामने आने के बाद तुरंत कार्रवाई की थी तथा छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा कि सरकार NEET सहित सभी संबंधित मुद्दों पर संसद में व्यापक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर संसद की बजाय राजनीतिक प्रदर्शन को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। विपक्ष का आरोप विपक्षी नेताओं का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पुलिस ने कठोर कार्रवाई की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सदन में छात्रों के मुद्दे को उठाने की कोशिश की और कहा कि युवाओं की चिंताओं पर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर सहित कई विपक्षी नेताओं ने गृह मंत्री से सदन में उपस्थित होकर पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। संसद के बाहर भी विरोध संसद परिसर के बाहर भी कई विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों ने कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारे लगाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। NEET विवाद बना प्रमुख मुद्दा मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में ही NEET परीक्षा से जुड़ा विवाद संसद की कार्यवाही पर पूरी तरह हावी दिखाई दिया। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग करता रहा। सरकार का कहना है कि वह संसद में सभी प्रश्नों का उत्तर देने और विस्तृत चर्चा करने के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि उसकी मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। दिनभर का घटनाक्रम दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, लेकिन विपक्षी सदस्यों के विरोध के कारण कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में लगातार स्थगन की स्थिति बनी रही। राहुल गांधी ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दे पर प्रधानमंत्री को अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार ने दोहराया कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। एनडीए की संसदीय दल की बैठक में भी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। सरकार ने संकेत दिया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक विधायी और प्रशासनिक कदम जारी रहेंगे। आगामी कार्यवाही दिनभर के गतिरोध के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। माना जा रहा है कि आगामी बैठकों में भी NEET विवाद, छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संसद की कार्यवाही का प्रमुख केंद्र बने रह सकते हैं। संसदीय सूत्रों के अनुसार सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने की स्थिति में इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराई जा सकती है। हालांकि, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गतिरोध जारी रहता है तो मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में विधायी कार्य प्रभावित हो सकता है। वहीं छात्रों से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चल रही राजनीतिक गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में संसद और सड़क दोनों जगह यह विषय प्रमुख बना रह सकता है।   (नोट: इस रिपोर्ट में विभिन्न पक्षों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान और उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों के आधार पर तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है।)

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तेज, छात्रों की मांगों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी; पुलिस कार्रवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

    युगचरण न्यूज़ | 22 जुलाई 2026 नई दिल्ली में कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन बुधवार को और तेज हो गया। हजारों छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के समर्थक प्रदर्शन स्थल पर जुटे और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग दोहराई। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में देशभर से और बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे। इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सभी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और छात्रों की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि देश के परिवार नीट परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतना ही खर्च करते हैं, जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक तथा मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, इसलिए सरकार को उनकी चिंताओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। उधर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी और अन्य रिकॉर्ड निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी जांच की जा सके। प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस अब तक पांच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कुल 10 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि विभिन्न घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की जांच जारी है। दूसरी ओर, सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए देश के छात्रों और युवाओं का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा युवाओं को किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक पिछले 25 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे और अदालत के निर्देश के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनकी हालत स्थिर है, वे पूरी तरह होश में हैं और चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। सीजेपी नेतृत्व ने भी सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अपना अनशन समाप्त करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है और उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दोपहर के समय जंतर-मंतर के आसपास कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी देखने को मिला। मौके पर मौजूद पुलिस ने लोगों से निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर ही रहने और सड़क खाली करने की अपील की। पुलिस लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से भीड़ को निर्देश देती रही ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। इस बीच बिहार की राजधानी पटना में भी नीट मामले को लेकर प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की और लाठीचार्ज किया। वहीं मुंबई, कोच्चि और देश के अन्य शहरों में भी विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन और एकजुटता मार्च निकाले। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजधानी के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा, जिससे बड़ी संख्या में यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कई लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों व छात्रों को लंबा सफर तय करना पड़ा। संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से संकेत दिया कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर चर्चा कराने के लिए सरकार तैयार है। विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के हित से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए विस्तृत चर्चा की मांग की।   फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और आंदोलनकारी अपने प्रमुख मांगों पर सरकार की स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। वहीं न्यायिक कार्यवाही, राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक कदमों के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने सीजेपी प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका खारिज की, दूसरी याचिका पर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

    युगचरण न्यूज़ / 22 जुलाई 2026 दिल्ली में चल रहे कथित छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' मार्च को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने एक ओर जहां जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने की घटना से संबंधित जनहित याचिका को खारिज कर दिया, वहीं पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग की जांच की मांग वाली दूसरी याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए घटना से जुड़े सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है। अदालत में क्या हुआ? दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। पहली याचिका में 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने, एफआईआर दर्ज करने और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस विषय पर पहले ही वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका और उससे संबंधित अपील का निपटारा 21 जुलाई को किया जा चुका है। इसलिए उसी मामले में दोबारा समान राहत नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को संज्ञेय अपराध होने का विश्वास है तो वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकता है। इसी आधार पर अदालत ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया। एफआईआर को लेकर अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि 18 जुलाई की घटना केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक महत्व का विषय है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। इस पर न्यायालय ने कहा कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो कानून में इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है। अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल जनहित याचिका के माध्यम से सीधे एसआईटी गठन की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के दावों या आरोपों के गुण-दोष पर उसने कोई टिप्पणी नहीं की है। दूसरी याचिका में पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई इसी दौरान दूसरी जनहित याचिका में 18 जुलाई को कथित छात्र प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के आरोपों पर विस्तृत सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दावा किया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बिना पर्याप्त चेतावनी के पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि महिलाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ तथा कुछ लोग सादे कपड़ों में कार्रवाई करते दिखाई दिए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से घटना की स्वतंत्र जांच, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, पुलिस रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। दिल्ली पुलिस ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में इन आरोपों का विरोध किया गया। पुलिस पक्ष ने कहा कि प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण हो सकता है, लेकिन बाद में स्थिति हिंसक हो गई थी। पुलिस के अनुसार कई वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से पथराव किए जाने और पुलिसकर्मियों के घायल होने के दृश्य मौजूद हैं। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को शिकायत है तो वह संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष उचित कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाओं में सभी तथ्यों को पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किया गया है और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का दिया निर्देश दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। अदालत ने निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी रिकॉर्ड, जिनमें सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी तथा अन्य आधिकारिक दस्तावेज शामिल हैं, उन्हें दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप सुरक्षित रखा जाए। न्यायालय ने कहा कि भविष्य की सुनवाई के दौरान इन रिकॉर्ड की आवश्यकता पड़ सकती है, इसलिए किसी भी प्रकार का साक्ष्य नष्ट नहीं होना चाहिए। अदालत की अहम टिप्पणी सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने यह आपत्ति उठाई कि याचिका घायल व्यक्तियों द्वारा नहीं बल्कि अन्य लोगों द्वारा दायर की गई है। इस पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित दिखाई नहीं देता। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि यह केवल एक अलग-थलग व्यक्तिगत घटना होती तो शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह दी जा सकती थी, लेकिन वर्तमान मामले में व्यापक सार्वजनिक पहलू भी सामने आया है। हालांकि अदालत ने किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की। सोनम वांगचुक का मामला सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि सोनम वांगचुक को लेकर उनकी पत्नी पहले ही न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। अदालत ने उल्लेख किया कि पूर्व आदेश के अनुसार उन्हें अस्पताल स्थानांतरित किए जाने से संबंधित राहत पहले ही दी जा चुकी है। इसलिए उसी विषय पर नई जनहित याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रदर्शन के बीच राजनीतिक गतिविधियां जारी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की गतिविधियां भी जारी रहीं। कई नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की, जबकि सरकार की ओर से संवाद की संभावना भी व्यक्त की गई। दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े संगठन लगातार अपने रुख पर कायम रहने की बात कह रहे हैं। आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। साथ ही घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। वहीं, सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने की घटना से संबंधित जनहित याचिका को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस विषय पर पहले ही न्यायिक आदेश पारित हो चुका है और उपलब्ध कानूनी उपाय खुले हैं।   फिलहाल मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी पक्ष के आरोपों या दावों की सत्यता पर अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। आने वाली सुनवाई में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस तथा याचिकाकर्ताओं के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन क्या है? जानिए क्यों हजारों युवा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े, संसद तक पहुंचा विरोध

    Yugcharan News | 22 July 2026 देश की राजधानी नई दिल्ली इन दिनों एक ऐसे छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हजारों छात्र और युवा पिछले कई दिनों से राजधानी में डटे हुए हैं और उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद के बाद शुरू हुआ और अब एक व्यापक युवा आंदोलन का रूप ले चुका है। इस आंदोलन की सबसे खास बात इसका अनोखा नाम "कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party)" है। शुरुआत में व्यंग्य और प्रतीकात्मक विरोध के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब लाखों युवाओं के असंतोष का मंच बन चुका है। प्रदर्शनकारी केवल परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। परीक्षा विवाद से भड़का आंदोलन इस आंदोलन की शुरुआत राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद के बाद हुई। देशभर में आयोजित इस परीक्षा में लगभग 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। बाद में विभिन्न स्थानों पर प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए, जिसके बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों की महीनों की मेहनत प्रभावित हुई। दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने से छात्रों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ा। विभिन्न रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि परीक्षा विवाद के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव का सामना किया और कुछ छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया। इसी पृष्ठभूमि में छात्रों और युवाओं के बीच असंतोष तेजी से बढ़ा, जिसने बाद में बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया। आखिर क्यों इतनी महत्वपूर्ण है NEET परीक्षा? NEET भारत में मेडिकल शिक्षा के लिए एकमात्र राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस समेत स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है। हर वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा की तैयारी में महीनों और कई बार वर्षों तक मेहनत करते हैं। लेकिन उपलब्ध सीटों की संख्या सीमित होने के कारण प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन होती है। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार उठ रहे सवाल केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों की ओर भी संकेत करते हैं। पहले भी सामने आ चुके हैं पेपर लीक के मामले भारत में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अलग-अलग राज्यों में पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी परीक्षाओं में भी पेपर लीक के आरोप लगते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार परीक्षा रद्द होने या जांच शुरू होने से सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है, जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी की होती है। यही कारण है कि इस बार छात्रों के बीच असंतोष पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक दिखाई दे रहा है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' कैसे बनी युवाओं की आवाज? इस आंदोलन की पहचान "कॉकरोच जनता पार्टी" नाम से हुई। शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में इसने बड़ी संख्या में युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस अभियान को लाखों लोगों का समर्थन मिला। इसके माध्यम से छात्र केवल परीक्षा विवाद ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां और युवाओं के भविष्य से जुड़े अन्य मुद्दों को भी उठाने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश की बड़ी युवा आबादी के बीच यह आंदोलन इसलिए तेजी से लोकप्रिय हुआ क्योंकि इसने उन समस्याओं को सामने रखा, जिनका सामना लाखों छात्र लंबे समय से कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें प्रदर्शन कर रहे छात्रों और संगठनों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। कुछ संगठनों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया है। वहीं परीक्षा विवाद के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई जा रही है। सरकार का क्या कहना है? केंद्र सरकार का कहना है कि युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि परीक्षा में अनियमितता करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार की ओर से परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए नई व्यवस्थाओं पर भी काम किए जाने की बात कही गई है। संसद तक पहुंचा मुद्दा छात्र आंदोलन अब संसद के मानसून सत्र तक पहुंच चुका है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाने की घोषणा की है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। राजधानी में जारी है विरोध प्रदर्शन हाल के दिनों में हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने के प्रयास में राजधानी की सड़कों पर उतरे। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र अब भी निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यह देश के युवाओं की उन व्यापक चिंताओं को सामने ला रहा है, जिनमें रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। अब सबकी नजर केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकलता, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। वहीं यदि सरकार परीक्षा सुधार और पारदर्शिता को लेकर ठोस कदम उठाती है, तो इससे लाखों छात्रों का विश्वास दोबारा मजबूत हो सकता है।   देशभर के छात्र, अभिभावक और शिक्षा जगत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल वर्तमान परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं बल्कि भारत की भविष्य की शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों युवाओं के विश्वास से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

    रावत एजुकेशनल ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत 'बेस्ट इनोवेटिव स्कूल अवार्ड 2026' से सम्मानित

    रावत एजुकेशनल ग्रुप के लिए अत्यंत गौरव एवं हर्ष का विषय है कि ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत को फर्स्ट इंडिया राजस्थान एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में प्रतिष्ठित "बेस्ट इनोवेटिव स्कूल अवार्ड 2026" से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान के माननीय उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा (मुख्य अतिथि) द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा तथा फर्स्ट इंडिया न्यूज़ एवं फर्स्ट इंडिया राजस्थान के सीईओ एवं मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा भी गरिमामयी उपस्थिति में मौजूद रहे। कॉन्क्लेव में नरेंद्र सिंह रावत ने पैनलिस्ट के रूप में भी सहभागिता करते हुए शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य एवं भविष्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नवाचार, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, नेतृत्व क्षमता एवं चरित्र निर्माण जैसे गुणों का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि वे भविष्य के जिम्मेदार वैश्विक नागरिक एवं सक्षम नेतृत्वकर्ता बन सकें। उन्होंने कहा कि "बेस्ट इनोवेटिव स्कूल अवार्ड 2026" केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि रावत एजुकेशनल ग्रुप के सभी शिक्षकों की अथक मेहनत, विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों, अभिभावकों के अटूट विश्वास तथा पूरे रावत परिवार के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है। यह सम्मान हमें शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित करने के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।  रावत ने इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए फर्स्ट इंडिया राजस्थान का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के भविष्य पर सार्थक संवाद के लिए ऐसा प्रभावी मंच उपलब्ध कराना वास्तव में सराहनीय पहल है। उन्होंने यह सम्मान रावत एजुकेशनल ग्रुप के प्रत्येक सदस्य को समर्पित करते हुए कहा कि हम सभी मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, प्रेरणा और उत्कृष्टता की इस यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे। इस अवसर पर रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन बी. एस. रावत ने नरेंद्र सिंह रावत को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए इसे पूरे रावत परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। उल्लेखनीय है कि रावत एजुकेशनल ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत इससे पूर्व भी 300 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं। इनमें मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन द्वारा प्रदान किया गया प्रतिष्ठित "Educational Entrepreneur of the Year Award" विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह सम्मान एक बार फिर रावत एजुकेशनल ग्रुप की शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।  

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में नवदिवसीय विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ विधि व्यवसाय में ड्राफ्टिंग, प्लीडिंग एवं न्यायिक प्रक्रिया की बारीकियों से विद्यार्थियों को कराया गया अवगत

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जयपुर परिसर में भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा द्वारा तृतीय एवं पंचम सत्रार्द्ध (शैक्षणिक सत्र 2026–27) के विद्यार्थियों के लिए आयोजित नवदिवसीय विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ सोमवार को वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र प्रातः 11:00 बजे आयोजित किया गया। कार्यशाला के मुख्य विधि विशेषज्ञ अधिवक्ता सुनील कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को विधि व्यवसाय में ड्राफ्टिंग एवं प्लीडिंग के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने व्याख्यान में एफआईआर, परिवाद, पुलिस की कार्यप्रणाली, वाद, लिखित कथन तथा न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं का सरल एवं प्रभावी ढंग से विश्लेषण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर के निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने की। उन्होंने विद्यार्थियो को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएँ विधि के विद्यार्थियो को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं तथा उन्हें सफल विधि व्यवसाय के लिए तैयार करती है। सह-निदेशक शैक्षणिक प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि विधि और धर्म एक-दूसरे के पूरक हैं तथा न्याय की स्थापना सद्मार्ग पर चलकर ही संभव है। वहीं सह-निदेशक प्रशासन प्रो. शीशराम ने विधि में प्रयुक्त नियम, उपनियम एवं अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण विधिक शब्दों की विस्तृत व्याख्या करते हुए विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा की अध्यक्ष प्रो. कृष्णा शर्मा ने आगामी प्रशिक्षण सत्रों की रूपरेखा एवं विभिन्न विषयों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. सुरेन्द्र कुमार जाखड़ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूजा सुमन ने प्रस्तुत किया।