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    कर्नाटक SIR सूची में नंदन नीलेकणी और परिवार के नाम, 43.81 लाख मतदाताओं को नोटिस; जानिए क्या है पूरा मामला

    1 hour ago

     

    Yugcharan News / 10-09-2026

    नई दिल्ली: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया के बीच कई प्रमुख नामों के चुनावी रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आने से चर्चा तेज हो गई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी, उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणी और उनके बच्चों जाह्नवी नंदन नीलेकणी तथा निहार नीलेकणी के नाम भी उन मतदाताओं की सूची में शामिल हैं, जिनके मौजूदा चुनावी रिकॉर्ड को 2002 की पुरानी मतदाता सूची से मैप नहीं किया जा सका है।

    कर्नाटक में चल रही इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों और पुराने चुनावी रिकॉर्ड के बीच सत्यापन करना है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में नाम, अभिभावक का विवरण या अन्य जानकारियों में अंतर सामने आया है। ऐसे मामलों को विसंगति सूची में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम इस सूची में आना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का संकेत नहीं है। संबंधित मतदाता को दस्तावेजों के माध्यम से अपना रिकॉर्ड सत्यापित करने का अवसर दिया जा रहा है।

    नंदन नीलेकणी और परिवार का नाम क्यों आया?

    रिपोर्ट के मुताबिक, नंदन नीलेकणी और उनके परिवार के सदस्यों को “Unmapped with last SIR” श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि मौजूदा चुनावी रिकॉर्ड को 2002 की मतदाता सूची के साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत जोड़ा या मैप नहीं किया जा सका।

    नंदन नीलेकणी, रोहिणी नीलेकणी, जाह्नवी नंदन नीलेकणी और निहार नीलेकणी के नाम बेंगलुरु के BTM Layout विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज बताए गए हैं। परिवार मतदान के लिए कोरमंगला के थर्ड ब्लॉक स्थित रेड्डी जनसंघ हाई स्कूल में बने मतदान केंद्र का इस्तेमाल करता है।

    अब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान परिवार को नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। इसके बाद संबंधित मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीकार किए गए दस्तावेजों में से किसी एक के माध्यम से अपना विवरण सत्यापित करना होगा। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली है।

    यहां यह समझना जरूरी है कि “Unmapped” का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है या वह मतदान करने के अधिकार से वंचित हो गया है। यह मुख्य रूप से मौजूदा रिकॉर्ड और पुराने रिकॉर्ड के बीच मैपिंग से जुड़ी प्रशासनिक स्थिति है। आगे की प्रक्रिया में दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

    43.81 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति

    कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान कुल 43.81 लाख मतदाताओं के संबंध में नोटिस तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO के समक्ष प्रस्तुत किए जाने हैं।

    नोटिस चरण 22 अक्टूबर तक जारी रहने की बात कही गई है। इसके बाद रिकॉर्ड के सत्यापन और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को जारी होने की योजना है।

    यह पूरी प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्नाटक में करीब 4.46 करोड़ मतदाताओं का रिकॉर्ड अंतिम सूची में शामिल किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड के सत्यापन के कारण चुनावी प्रशासन के सामने भी व्यापक स्तर पर काम का दबाव है।

    निखिल कामथ और अभिनेता शिवराजकुमार भी सूची में

    SIR के दौरान केवल नीलेकणी परिवार ही नहीं, बल्कि कई अन्य चर्चित लोगों के चुनावी रिकॉर्ड में भी विसंगतियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ और कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार के नाम भी ऐसे मामलों में सामने आए हैं, जहां चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत बताई गई।

    शिवराजकुमार के मामले में प्रक्रिया को अलग तरीके से पूरा किया गया। उन्हें चुनाव कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर रिकॉर्ड का सत्यापन किया।

    निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, प्रमुख या विशेष श्रेणी के मतदाताओं के लिए ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है। संबंधित बूथ लेवल अधिकारी मतदाता के घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्यापन की प्रक्रिया प्रशासनिक रूप से सुविधाजनक तरीके से पूरी हो और किसी मतदाता को केवल औपचारिक सुनवाई के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

    वैज्ञानिक CNR राव के मामले में अलग स्थिति

    भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी कर्नाटक की विसंगति सूची में सामने आने के बाद भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। हालांकि, निर्वाचन अधिकारियों ने बाद में स्पष्ट किया कि राव को SIR के संबंध में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।

    बेंगलुरु अर्बन डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव के अनुसार, राव के चुनावी रिकॉर्ड में एक विसंगति जरूर पाई गई थी। मौजूदा रिकॉर्ड और 2002 की पुरानी मतदाता सूची में उनके नाम के अलग-अलग रूप दर्ज थे।

    लेकिन संबंधित बूथ लेवल अधिकारी ने रिकॉर्ड की जांच के बाद उनके नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की सिफारिश कर दी। इसलिए उन्हें अलग से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

    यह मामला बताता है कि SIR प्रक्रिया में सामने आने वाली हर विसंगति का परिणाम नोटिस या नाम हटाए जाने के रूप में नहीं होता। अधिकारियों द्वारा उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के आधार पर अलग-अलग मामलों में निर्णय लिया जा सकता है।

    पद्मश्री हरेकला हजब्बा को नोटिस

    पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हरेकला हजब्बा का नाम भी कर्नाटक की विसंगति सूची में शामिल बताया गया है। हालांकि, उनके मामले में नाम से संबंधित अंतर के कारण नोटिस जारी किया गया।

    मतदाता सूची में नामों की वर्तनी और अलग-अलग भाषाओं में उनके लिप्यंतरण से जुड़ी समस्याएं SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक हैं। अंग्रेजी और कन्नड़ में दर्ज नामों में मामूली अंतर होने पर भी रिकॉर्ड का मिलान प्रभावित हो सकता है।

    इसके अलावा माता-पिता के नाम, उपनाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में छोटे अंतर भी कई मामलों में रिकॉर्ड को पुराने डेटा से जोड़ने में समस्या पैदा कर रहे हैं।

    आम मतदाताओं को भी परेशानी

    SIR की प्रक्रिया केवल चर्चित या प्रमुख लोगों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में आम मतदाताओं को भी अपने रिकॉर्ड से संबंधित विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    कुछ मतदाताओं ने कथित तौर पर शिकायत की है कि उन्हें यह पता लगाने में कठिनाई हो रही है कि उनके मामले से संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या Electoral Registration Officer कौन है। कुछ मामलों में नोटिस की पूरी जानकारी, सुनवाई की तारीख और स्थान तक पहुंचने में भी दिक्कत की बात सामने आई है।

    नामों की स्पेलिंग में मामूली अंतर, अंग्रेजी और कन्नड़ के बीच लिप्यंतरण में बदलाव तथा माता-पिता के नामों में अंतर जैसे कारण रिकॉर्ड के मिलान को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में मतदाताओं के लिए समय पर सही दस्तावेज उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।

    अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को

    कर्नाटक में SIR की मौजूदा प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण दस्तावेज सत्यापन है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति पाई गई है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद आवश्यक निर्णय लेंगे।

    अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने की निर्धारित योजना है। तब यह अधिक स्पष्ट होगा कि कितने नाम बिना बदलाव के बरकरार रहे, कितने रिकॉर्ड में सुधार किया गया और किन मामलों में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ी।

    नंदन नीलेकणी और उनके परिवार का नाम विसंगति सूची में आना इसलिए विशेष चर्चा का विषय बना है क्योंकि यह प्रक्रिया देश के प्रमुख उद्योगपतियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों तक भी पहुंची है। लेकिन चुनावी प्रशासन के लिहाज से इसका व्यापक महत्व इससे कहीं अधिक है। 43.81 लाख मतदाताओं से जुड़े मामलों का सत्यापन कर्नाटक में मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने की एक बड़ी प्रशासनिक कवायद है।

    फिलहाल नंदन नीलेकणी और उनके परिवार के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज हैं और “Unmapped with last SIR” की स्थिति का सामना कर रहे हैं। आगे दस्तावेज सत्यापन के बाद ही उनके रिकॉर्ड की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। इसी तरह अन्य प्रमुख और आम मतदाताओं के मामलों में भी अंतिम निर्णय संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद लिया जाएगा।

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