Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन, मामले के तथ्यों का गहन अध्ययन एवं स्पष्ट समझ आवश्यक

    5 minutes ago

    जयपुर. कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर द्वारा 2-3 नवम्बर, 2026 तक दो दिवसीय वर्चुअल मूट कोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विधि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों से लगभग 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्घाटन सत्र 2 नवम्बर को आयोजित किया गया। जिसकी मुख्य अतिथि प्रो. निष्ठा जसवाल, कुलपति, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में प्रो. सरोज शर्मा (बोहरा), डीन, स्कूल ऑफ लॉ, प्रसिडेन्सी यूनिवर्सिटी, बैंगलोर उपस्थित रहीं। 

    इस दो दिवसीय कार्यशाला में कुल 4 सत्रों का संचालन हुआ। प्रथम सत्र का विषय ‘‘Fundamentals of Mooting’’। इस सत्र में वक्ता डॉ. शोरदीप रक्षित, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, क्राइस्ट (डीम्ड् विश्वविद्यालय), बैंगलोर रहे। द्वितीय सत्र का विषय Argumentation Skills and Court Room Etiquette रहा। इस सत्र में वक्ता मिस मिताली खत्री, लीगर रिसर्चर, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर रहीं। तृतीय सत्र का विषय Mooting and Research रहा। इस सत्र में वक्ता डॉ. उपांकर, सह-आचार्य, स्कूल ऑफ लॉ, दयानन्द सागर विश्वविद्यालय, बैंगलोर रहे। चतुर्थ सत्र का विषय Drafting of Memorial & Formulation of Compendium रहा। इस सत्र में वक्ता अंशुमान पाण्डे, रिसर्च स्कॉलर, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली रहे।

    कार्यशाला के सफल आयोजन के पश्चात अनुभव साझा सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सभी के अथक परिश्रम और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आयोजन समिति, विद्यार्थियों, प्राध्यापिकाओं एवं सभी कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

    प्राचार्या ने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट में दक्षता विकसित करने के लिए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट में प्रभावी प्रदर्शन के लिए सर्वप्रथम मामले के तथ्यों का गहन अध्ययन एवं स्पष्ट समझ आवश्यक है। इसके साथ ही सशक्त विधिक शोध, पीठ द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का तार्किक एवं प्रभावी उत्तर देने की क्षमता तथा न्यायालय के क्षेत्राधिकार और प्रार्थना खंड  की सही एवं स्पष्ट प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों एवं संसाधन व्यक्तियों का उनके ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया।

    इस अवसर पर सहायक आचार्या, डॉ. दिशा बांगरवा ने कार्यशाला की गतिविधियों एवं विभिन्न सत्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यशाला की यात्रा और यादगार पलों को समेटे हुए एक विशेष बीटीएस वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के दौरान हुए अनुभवों की पुनः स्मृति कराई।

    अनुभव साझा सत्र में प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान अर्जित ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं इससे प्राप्त लाभों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। सत्र का संचालन छात्रा सुश्री कशिश गुप्ता द्वारा किया गया।  

    Click here to Read More
    Previous Article
    दशहरा मेला अपने परवान पर, आल स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसायटी दे रही लोगों को प्राथमिक उपचार
    Next Article
    दीपावली पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार के व्यापक निर्देश

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment