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    दीपावली पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार के व्यापक निर्देश

    4 minutes ago

    दीपावली पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार के व्यापक निर्देश

    - एनसीआर क्षेत्र में केवल CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री एवं उपयोग की अनुमति

    - 7 एवं 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात्रि 8 से 10 बजे तक ही चला सकेंगे ग्रीन पटाखे

    - अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों एवं शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध

    - अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण एवं बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

    जयपुर। दीपावली के अवसर पर वायु प्रदूषण की रोकथाम, आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से  पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल राजस्थान के जिलों में पटाखों के निर्माण, बिक्री एवं उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    निर्देशानुसार राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में शामिल अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा एवं कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री एवं उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है।

    - केवल CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चला सकेंगे आमजन

    - उक्त संबंध में अधिक जानकारी देते हुए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की शासन सचिव श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में केवल CSIR-NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चलाने की अनुमति होगी। अन्य सभी प्रकार के पटाखों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

    ग्रीन पटाखे चलाने के लिए 7 एवं 8 नवंबर, 2026 को दो निर्धारित समयावधियां तय की गई हैं। आमजन प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक तथा रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे चला सकेंगे। निर्धारित समय के अतिरिक्त पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके साथ ही पूर्व में लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को 6 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रखा गया है तथा निर्धारित दो दिवसीय छूट के पश्चात 9 नवंबर, 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुनः प्रभावी हो जाएगा।

    - अस्पतालों एवं शिक्षण संस्थानों के आसपास पटाखे चलाने पर प्रतिबंध

    श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि, आमजन के स्वास्थ्य एवं संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों को शांत क्षेत्र (Silence Zone) घोषित किया गया है। इन संस्थानों के 300 मीटर की परिधि में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।

    उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार के सभी विभागों एवं एजेंसियों को निर्धारित समयावधि के अतिरिक्त पटाखे चलाने अथवा प्रतिबंधित क्षेत्रों में पटाखों के उपयोग की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं।

    - पटाखों की बिक्री के लिए QR कोड अनिवार्य, ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध

    वहीं पटाखों की अवैध बिक्री एवं प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति रोकने के लिए सरकार ने बिक्री व्यवस्था को भी सख्त किया है। केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जिन पर उत्पाद-विशिष्ट QR कोड अंकित होगा। प्रत्येक पटाखा पैकेजिंग पर संबंधित QR कोड होना अनिवार्य है।

    QR कोड के माध्यम से निर्माता, NEERI प्रमाणन, PESO तथा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी लाइसेंस, उत्पादक की संरचना एवं उत्पादन संबंधी प्रमाण-पत्रों का विवरण प्रदर्शित होना आवश्यक होगा। QR कोड के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या उसकी प्रामाणिकता में हेरफेर को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

    निर्धारित एवं अधिकृत दुकानों तथा बिक्री स्थलों के अतिरिक्त पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की बिक्री भी प्रतिबंधित होगी।

    इसके अतिरिक्त श्रृंखला में जुड़े पटाखों (लड़ियों) तथा पटाखों की मालाओं के निर्माण एवं बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बेरियम युक्त पटाखों तथा CSIR-NEERI द्वारा ग्रीन पटाखों के रूप में अनुमोदित नहीं किए गए किसी भी पटाखे के उपयोग की अनुमति नहीं होगी।

    - निर्माताओं एवं व्यापारियों के लाइसेंस और वित्तीय प्रतिभूति को लेकर सख्त प्रावधान

    पटाखा निर्माताओं एवं व्यापारियों के लिए भी कड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।  CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखों के निर्माण एवं बिक्री की अनुमति केवल निर्धारित पात्रता और वैध लाइसेंस रखने वाले निर्माताओं एवं व्यापारियों को ही होगी।  

    - अवैध पटाखों की रोकथाम के लिए विशेष गश्ती दलों का गठन

    इसी के साथ जिला कलक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एनसीआर क्षेत्र में पटाखों के अवैध निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं।

    अवैध एवं पारंपरिक पटाखों के प्रवाह को रोकने के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार जब्ती एवं अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों एवं अन्य कार्मिकों को शामिल करते हुए विशेष गश्ती दलों का गठन किया जाएगा। गश्ती दल निर्धारित बिक्री स्थलों, दुकानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित निरीक्षण करेंगे।

    गौरतलब है कि, निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिक्री किए जा रहे पटाखे CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही हों, संबंधित QR कोड वैध एवं प्रामाणिक हों तथा पटाखों का भंडारण एवं बिक्री निर्धारित नियमों के अनुरूप की जा रही हो।

    विभिन्न विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारियां

    राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

    राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB),स्वायत्त शासन विभाग एवं नगरीय विकास विभाग,सूचना एवं जनसंपर्क विभाग,शिक्षा विभाग,सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग सहित  अतिरिक्त सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर आवश्यक समन्वय स्थापित कर आदेशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    - वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) एवं एनसीआर क्षेत्र के संबंधित जिला कार्यालयों को वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं दैनिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी ।  इस व्यवस्था से दीपावली के दौरान तथा उसके पश्चात वायु गुणवत्ता में होने वाले बदलावों का आकलन किया जा सकेगा और आवश्यकतानुसार प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए जा सकेंगे।

    - उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

    गौरतलब है कि,जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, समूहों, निर्माताओं एवं व्यापारियों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    राज्य सरकार का उद्देश्य दीपावली के पर्व को पर्यावरण अनुकूल बनाने, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रभावी एवं समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करना है। 

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