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    राजस्थान के पंचायत राज और निकाय चुनावों एवं SIR की वोटर लिस्टों में विरोधावास से उठा बड़ा सवाल कौनसी वोटर लिस्ट सही है ?

    2 hours ago

    राजस्थान के पंचायत राज और निकाय चुनावों एवं SIR की वोटर लिस्टों में विरोधावास से उठा बड़ा सवाल कौनसी वोटर लिस्ट सही है ?

    ECI और SEC की सूचियों में लगभग 30 लाख नामों का अंतर

    SIR में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने पर गंभीर सवाल,

    राजस्थान से उपजा जनता द्वारा वोटर लिस्ट की गहन सोशल ऑडिट ही असली समाधान

    SEC द्वारा स्वच्छ पंचायतीराज राज चुनाव कराने में जन निगरानी की व्यवस्था नामंजूर

    जयपुर, देश भर में SIR पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच राजस्थान में राजस्थान चुनाव आयोग द्वारा निकाय चुनावों में उपयोग में ले गई एवं ली जा रही मतदाता सूचियों में मतदाताओं की संख्या में बहुत बड़ा अंतर है जो गंभीर सवाल खड़े करता है. राजस्थान में SIR समाप्त होने के बाद और उसके मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं राजस्थान सरकार द्वारा गुणगान किये जाने के बाद, शहरी निकाय एवं पंचायती राज चुनाव में पुरानी 2025 की मतदाता सोची काम में ली गई है. उस सूची को SIR से अलग प्रक्रिया से अपडेट किया गया है, इसके परिणामस्वरूप राज्य चुनाव आयोग द्वारा लिए गए वोटर लिस्ट और SIR वोटर लिस्ट में कम से कम 45 लाख का अंतर है. राज्य सरकार को चुनाव आयोग को एवं राज्य चुनाव आयुक्त को स्पष्ट करना चाहिए कि कौनसी लिस्ट को वो सही मानते हैं और किस वजह से? जनता के सामने दोंनों ही लिस्ट संदिग्ध लगती है और लिस्टों को तैयार करने वाली एजेंसियों एवं उनकी प्रक्रियाओं पर सवाल उठते हैं जो लोकतंत्र की नींव को कमजोर करते हैं. हमारा मानना है कि हर वोटर का वोट डालने का मूल अधिकार है जिसे प्रक्रियाओं द्वारा चीन जा रहा है और यह उसके जीने के अधिकार के साथ जुड़ा हुआ है.

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपलब्ध दस्तावेजों, जमीनी सत्यापन और विभिन्न राज्यों के अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। राजस्थान में 2002–03 के SIR के दौरान अपनाई गई घर-घर सत्यापन, ग्राम सभा, वार्ड सभा और सार्वजनिक रूप से मतदाता सूची पढ़ने की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप लगभग 16 लाख नाम मतदाता सूची में जोड़े गए थे। वर्तमान SIR के संदर्भ में इसी प्रभावी प्रक्रिया को दोबारा लागू करने की मांग की जा रही है।

    2002–03 की प्रक्रिया और RTI से प्राप्त दस्तावेज

    2002 में राजस्थान सहित कई राज्यों में SIR के दौरान बड़ी संख्या में सही मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि कई अपात्र नाम भी सूची में बने रहे। नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त जेम्स लिंडो के समक्ष इसकी शिकायत की। इसके बाद वे राजस्थान आए और जयपुर स्थित हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (OTS) में विभिन्न समूहों के साथ बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि मतदाता सूची की गलतियों को दूर करने के लिए लोगों के बीच जाकर सूची का वाचन किया जाए और ग्राम सभा, वार्ड सभा तथा नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से लोगों को सूची दिखाई जाए। 6 अगस्त 2003 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए और इसके परिणामस्वरूप राजस्थान में लगभग 16 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए। इसी अनुभव के आधार पर 2002–03 की प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज RTI के माध्यम से मांगे गए। नवंबर 2025 में RTI दाखिल होने से लेकर जून 2026 तक प्रथम अपील, द्वितीय अपील, राज्य सूचना आयोग की सुनवाई, पुरानी फाइलों का निरीक्षण और लगभग 1,800 पन्नों से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया चली।

    मंगोलपुरी( दिल्ली) और कर्नाटक ने दिखाया जनभागीदारी से संभव है सही सत्यापन

    दिल्ली के मंगोलपुरी Y ब्लॉक में 5 सितंबर 2026 को हुई जन सुनवाई में SIR की जमीनी प्रक्रिया की गंभीर कमियां सामने आईं। आठ बूथों के 1,516 घरों में से 1,448 घरों का सत्यापन नागरिक स्वयंसेवकों ने किया। जनवरी 2025 की सूची में दर्ज 9,838 मतदाताओं में से केवल 5,639 नाम प्रारूप SIR सूची में आए, जबकि 2,781 नाम ASDD सूची में और 1,328 नाम किसी भी सूची में नहीं मिले। घर-घर सत्यापन में 450 से अधिक ऐसे लोग मिले जो ASDD में डाले जाने के बावजूद उसी पते पर रह रहे थे और 500 से अधिक लोग ऐसे मिले जिनका नाम किसी भी सूची में नहीं था। कई लोग 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डाल चुके थे।

    इसके विपरीत कर्नाटक के मैसूरु जिले की हिरेहल्ली ग्राम पंचायत में नागरिक संगठनों और प्रशासन ने मिलकर घर-घर सत्यापन और जन सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई। 16 मई 2026 को छह बूथों के 5,367 मतदाताओं में से 4,370 यानी 81.4 प्रतिशत का एक ही दिन में भौतिक सत्यापन किया गया। अगले दिन जन सुनवाई में 96 निवासी तथा संबंधित अधिकारी शामिल हुए। इस प्रक्रिया में नए नाम जोड़ने, मृत मतदाताओं के नाम हटाने तथा जन्मतिथि और पारिवारिक विवरण सुधारने की बड़ी संख्या में मांगें सामने आईं। यह अनुभव बताता है कि स्थानीय स्तर पर

    जनभागीदारी से मतदाता सूची का प्रभावी सत्यापन संभव है।

    भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और राजस्थान चुनाव आयोग (SEC) की सूचियों में लगभग 30 लाख नामों का गंभीर अंतर

    ECI की SIR अंतिम सूची और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की स्थानीय निकाय मतदाता सूचियों के तुलनात्मक अध्ययन में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। ECI की SIR अंतिम सूची और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की स्थानीय निकाय मतदाता सूचियों के तुलनात्मक अध्ययन में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। ECI की SIR अंतिम सूची, विलोपन सूची और SEC की लगभग 1.47 लाख सूची-फाइलों का EPIC नंबर के आधार पर मिलान किया गया। अध्ययन के अनुसार SIR में हटाए गए 26.63 लाख मतदाता अभी भी SEC की 2026 की नगरीय और पंचायत मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। यह ECI की मसौदा सूची से बाहर किए गए 41.85 लाख नामों का लगभग 64 प्रतिशत है। SIR में कुल 44.28 लाख नाम हटाए गए और 12.91 लाख जोड़े गए, जिससे ECI की मतदाता संख्या 5.47 करोड़ से घटकर 5.15 करोड़ रह गई; उन्हीं 199 विधानसभा क्षेत्रों में SEC की सूची में लगभग 5.45 करोड़ मतदाता हैं। इन 26.63 लाख नामों में 17.57 लाख लोगों को "स्थायी रूप से स्थानांतरित", 3.68 लाख को "अनुपस्थित/अप्राप्य" और 1.86 लाख को "पहले से नामांकित (डुप्लीकेट)" बताकर हटाया गया। 3.52 लाख नाम मृत्यु के आधार पर हटाए गए, जिनमें 40 वर्ष से कम उम्र के 42,293 नामों की विशेष जांच आवश्यक है। इन 26.63 लाख मतदाताओं में 58 प्रतिशत महिलाएं हैं और 81 प्रतिशत की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच है।

    जयपुर सहित कई शहरी क्षेत्रों में भी अंतर उल्लेखनीय है। जयपुर की सिविल लाइन्स, विद्याधर नगर, सांगानेर, किशनपोल और हवामहल सीटों में नगरीय मतदाता सूची के 10 प्रतिशत से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिन्हें SIR में हटाया गया था। दूसरी ओर ECI की अंतिम सूची के अधिकतम 15.52 लाख मतदाता किसी स्थानीय निकाय सूची में नहीं हैं, जिनमें 55 प्रतिशत 18–25 वर्ष की आयु के हैं।

    हमारी मांगें:- सत्यापन में जनता की भागीदारी और स्वतंत्र निगरानी हो

    2 अक्टूबर 2026 को सामने आए चुनाव आयोग के आदेश में SIR पूरा कर चुके राज्यों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान के लिए BLO को घर-घर जाकर सत्यापन करने और Form-6 लेने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश स्वयं इस आवश्यकता को रेखांकित करता है कि SIR के बाद भी बड़ी संख्या में छूटे मतदाताओं की पहचान करनी पड़ रही है. इसका मतलब है कि SIR में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

    हमारी प्रमुख मांगें हैं—

    1. छूटे हुए प्रत्येक नाम और उसके हटने का कारण वार्ड एवं ग्राम स्तर पर सार्वजनिक किया जाए।

    2. सत्यापन के परिणाम ग्राम सभा और वार्ड सभा में पढ़े जाएं तथा आपत्तियों पर वहीं कार्रवाई शुरू हो।

    3. सत्यापन केवल उसी BLO के भरोसे न छोड़ा जाए जिसने पहले नाम हटाए थे; नागरिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए।

    4. जिन मतदाताओं के नाम प्रशासनिक गलती से हटे हैं, उन्हें नए मतदाता की तरह Form-6 भरने के लिए बाध्य न किया जाए; उनके नाम सीधे बहाल किए जाएं।

    5. राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूचियों में आवश्यक सुधार समय रहते पूरा किया जाए।

    6. राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों की जो घोषणा की गई है उसमें सरपंच और वार्ड पंच को सिम्बल आवंटन के बाद चुनाव चिन्ह के प्रचार के लिए कुछ घंटे ही दिए हैं जिसमें पूर्व में बनाई गई व्यवस्था को ख़त्म कर दिया गया है जिसमें पंच और सरपंच के आवेदन पहले लिए जाते थे और उनको चुनाव चिन्ह आवंटन कर दिया जाता था उसी व्यवस्था को राजस्थान में बहाल किया जाये.

    मतदाता सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार का आधार है। इसलिए इसका निर्माण और संशोधन जनता की भागीदारी, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी के साथ होना चाहिए। 2002–03 का राजस्थान अनुभव, कर्नाटक का हिरेहल्ली मॉडल और मंगोलपुरी की जमीनी जांच, तीनों हमें यही रास्ता दिखाते हैं।

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