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    सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार बैंक खातों को संचालित करने की मांग ठुकराई, कलकत्ता हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई का निर्देश

    1 hour ago

    Yugcharan News / 01-10-2026

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट को राहत देने से इनकार करते हुए पार्टी के चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने वाली याचिका खारिज कर दी। ये चार खाते इंडियन बैंक में हैं और पश्चिम बंगाल पुलिस की एक आपराधिक जांच के सिलसिले में डेबिट-फ्रीज किए गए हैं।

    न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें इन खातों को संचालित करने के लिए अंतरिम राहत देने से मना किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से लंबित मुख्य मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है और संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से इनकार किया है।

    चार इंडियन बैंक खातों को लेकर विवाद

    यह मामला पश्चिम बंगाल के विधायक विश्वनाथ दास की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई आपराधिक जांच से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर 18 जून 2026 को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

    इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच के दौरान TMC से जुड़े चार इंडियन बैंक खातों को डेबिट-फ्रीज कर दिया गया। पार्टी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया और खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी।

    पार्टी का कहना था कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई के आधार में मौजूद आपराधिक मामले में कई कानूनी खामियां हैं और खातों के संचालन पर रोक से पार्टी के नियमित कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है।

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को चार खातों के संबंध में अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने पहले के आदेश का भी उल्लेख किया था, जिसके तहत TMC को एक विशेष अधिकारी की निगरानी में दैनिक और मासिक खर्च चलाने की अनुमति दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?

    TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से पार्टी की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    उन्होंने अदालत को बताया कि पार्टी के ऑडिट किए गए खातों के अनुसार, राजनीतिक गतिविधियों को छोड़कर भी उसके नियमित संचालन के लिए न्यूनतम मासिक खर्च करीब 12.15 करोड़ रुपये है। उनके मुताबिक, बैंक खातों पर रोक के कारण पार्टी के सामान्य प्रशासनिक और संगठनात्मक कामकाज में मुश्किलें पैदा हो रही हैं।

    सिंघवी ने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान मामले में शामिल चार इंडियन बैंक खाते पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि दोनों मामलों को एक साथ नहीं देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी दलील दी कि आगामी उपचुनावों को देखते हुए पार्टी को अपने वित्तीय संसाधनों तक पहुंच की आवश्यकता है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सुझाव दिया कि अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी इन खातों से जुड़े खर्चों को भी देख सकते हैं। सिंघवी ने कहा कि फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर वह इस व्यवस्था को स्वीकार कर सकते हैं।

    राज्य की ओर से क्या कहा गया?

    पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने TMC की याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि मौजूदा मामला अलग प्राथमिकी और पार्टी के भीतर चल रहे विवाद से जुड़ा है।

    मेहता ने जांच से जुड़े कुछ आरोपों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, पार्टी के एक गुट से जुड़े एक निजी सहायक द्वारा खातों में करीब 35 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की जांच की जा रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जांच में कथित तौर पर सरकारी जमीन को निजी भूमि में बदलने और उसके बाद उसकी बिक्री से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप और जांच के विषय हैं तथा इन पर अभी न्यायिक रूप से अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।

    सिंघवी ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जिन आरोपों का उल्लेख किया जा रहा है, वे मौजूदा प्राथमिकी से सीधे संबंधित नहीं हैं और अदालत को प्रभावित करने के लिए इनका उल्लेख किया जा रहा है।

    शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने भी पार्टी की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को पहले से ही दैनिक खर्चों के लिए एक अंतरिम व्यवस्था के तहत अनुमति दी जा चुकी है और अब अतिरिक्त खर्चों के लिए खातों के संचालन की मांग की जा रही है।

    चुनाव आयोग के फैसले का भी अदालत ने लिया संज्ञान

    मामले में TMC के आंतरिक संगठनात्मक विवाद का भी महत्वपूर्ण प्रभाव है। चुनाव आयोग के समक्ष यह विवाद लंबित है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार है।

    हालिया घटनाक्रम में चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतरिम कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान इस स्थिति को ध्यान में रखा और कहा कि बैंक खातों में मौजूद धनराशि पर अधिकार का बड़ा सवाल अभी तय होना बाकी है।

    यानी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह तय नहीं किया कि चार बैंक खातों में मौजूद रकम को संचालित करने का अधिकार किस गुट के पास है। यह प्रश्न संबंधित लंबित कार्यवाहियों में तय किया जाना है।

    804 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का मामला

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चार इंडियन बैंक खातों में कुल मिलाकर करीब 804 करोड़ रुपये की राशि है। इन खातों के फ्रीज होने के कारण इनके डेबिट लेनदेन पर रोक लगी हुई है।

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने अगस्त में इन खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया था। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पहले के एक आदेश के तहत पार्टी को दैनिक खर्च चलाने की सीमित अनुमति दी जा चुकी थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किए जाने के बाद इस विवाद पर अगली महत्वपूर्ण सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी।

    पहले HDFC खातों पर भी लगी थी रोक

    यह मामला TMC के तीन HDFC बैंक खातों से जुड़े पहले के विवाद से अलग है।

    जुलाई 2026 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले फ्रीज किए गए HDFC खातों से पार्टी को दैनिक और मासिक खर्च करने की अनुमति दी थी। इसके लिए अदालत ने एक विशेष अधिकारी की निगरानी की व्यवस्था की थी। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

    मौजूदा मामला चार अन्य खातों से जुड़ा है, जो इंडियन बैंक में हैं और जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच के बाद डेबिट-फ्रीज किया गया।

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर फैसला नहीं दिया

    गुरुवार के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उसने मामले के मूल विवाद पर कोई फैसला नहीं दिया है।

    पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से इनकार किया और कलकत्ता हाईकोर्ट से लंबित मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया।

    इसका अर्थ यह है कि चार बैंक खातों को फ्रीज करने की वैधता, खातों में मौजूद रकम पर अधिकार और पार्टी की ओर से उठाए गए अन्य कानूनी सवालों का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

    आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर

    TMC के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के बैंक खातों तक पहुंच का सवाल उसके संगठनात्मक और वित्तीय संचालन से जुड़ा है। दूसरी ओर, राज्य की जांच एजेंसियां खातों को फ्रीज करने के पीछे आपराधिक जांच और संबंधित आरोपों का हवाला दे रही हैं।

    इसके साथ ही TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष चल रहा विवाद भी पूरे मामले को और जटिल बनाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया कार्यवाही में भी इस व्यापक विवाद का संज्ञान लिया है।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने TMC को चार इंडियन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति नहीं दी है। अदालत ने मामले का अंतिम फैसला करने के बजाय कलकत्ता हाईकोर्ट को लंबित कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया है। अब इन खातों और उनसे जुड़े अधिकारों पर आगे का निर्णय हाईकोर्ट की सुनवाई तथा संबंधित अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

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