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    भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट का खतरा, 25 साल की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की राह पर सेंसेक्स-निफ्टी

    1 hour ago

    Yugcharan News / 01-10-2026

    भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दबाव बाजार की धारणा पर बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी के बीच दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार आठवें सप्ताह साप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की राह पर हैं। ऐसा होने पर यह करीब 25 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला होगी।

    गुरुवार को सुबह 9:44 बजे तक निफ्टी 50 में 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,558.95 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 0.12 प्रतिशत गिरकर 72,389.51 अंक पर पहुंच गया।

    भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को स्थानीय अवकाश के कारण कारोबार नहीं होगा। ऐसे में गुरुवार का सत्र छुट्टी से पहले का अंतिम कारोबारी सत्र है और निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

    बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी से बना हुआ है। उपलब्ध अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों से करीब 1.06 अरब डॉलर की निकासी की।

    इससे पहले के पांच कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 3.6 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर बेचे थे। इसके साथ ही 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से कुल बिकवाली करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

    लगातार विदेशी निकासी ने घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ाया है। ऊंची उधारी लागत और वैश्विक स्तर पर अनिश्चित परिस्थितियों के बीच विदेशी पूंजी के बाहर जाने से बाजार में जोखिम लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सत्रों में विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत भारतीय शेयरों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिली कुछ राहत

    भारतीय बाजार के लिए एक राहत की बात कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

    ईरान की ओर से यह जानकारी सामने आने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई कि उसे अमेरिका की ओर से नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव महत्वपूर्ण है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए कुछ राहत प्रदान कर सकती है।

    हालांकि, गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ऊंची उधारी लागत का दबाव बाजार पर बना रहा।

    बाजार में सतर्क रुख

    एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि शुक्रवार को बाजार बंद रहने के कारण गुरुवार के सत्र में निवेशक विस्तारित अवकाश से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    उनके अनुसार, विदेशी पूंजी का बाहर जाना और ऊंची उधारी लागत बाजार की धारणा पर दबाव डाल रहे हैं, हालांकि हाल में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से कुछ राहत मिली है।

    इस बीच, गुरुवार को 16 प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से 11 में गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। स्मॉल-कैप सूचकांक में लगभग 0.6 प्रतिशत और मिड-कैप सूचकांक में करीब 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    इससे संकेत मिलता है कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया।

    ऑटो शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

    गुरुवार के शुरुआती कारोबार में ऑटो सेक्टर में उल्लेखनीय कमजोरी रही। ऑटो सूचकांक करीब 2.4 प्रतिशत गिरा।

    बजाज ऑटो के शेयर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर करीब 2.4 प्रतिशत नीचे आए। दोनों कंपनियों के घरेलू बिक्री आंकड़ों में गिरावट की खबरों के बाद इनके शेयरों पर दबाव देखा गया।

    ऑटो कंपनियों के लिए घरेलू बिक्री के आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं, क्योंकि वे वाहन मांग और उपभोक्ता खर्च की स्थिति को दर्शाते हैं। बिक्री में कमजोरी की खबर का असर गुरुवार को प्रमुख ऑटो शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी सूचकांक में तेजी

    जहां अधिकांश प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट रही, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र ने बाजार की कमजोरी के बीच कुछ मजबूती दिखाई।

    आईटी सूचकांक करीब 0.9 प्रतिशत ऊपर रहा। अमेरिका में अगस्त की महंगाई दर में अपेक्षा से धीमी बढ़ोतरी के आंकड़ों के बाद इस क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    महंगाई में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि से इस महीने के अंत में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बाजार की चिंताओं में कुछ कमी आई। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा, क्योंकि अमेरिका भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए एक प्रमुख बाजार है।

    कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में तेजी

    गुरुवार को कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी मजबूती देखी गई। बैंक के शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़े।

    यह तेजी बैंक द्वारा अनूप कुमार साहा को नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद आई। साहा को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। वह अशोक वासवानी की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    प्रमुख निजी बैंक में शीर्ष प्रबंधन से जुड़ी इस नियुक्ति पर बाजार की प्रतिक्रिया शेयर में तेजी के रूप में दिखाई दी।

    25 साल की सबसे लंबी गिरावट की ओर बाजार

    भारतीय शेयर बाजार के लिए मौजूदा सप्ताह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज करने की स्थिति में हैं।

    यदि सप्ताह का अंत गिरावट के साथ होता है, तो यह करीब 25 वर्षों में दोनों प्रमुख भारतीय शेयर सूचकांकों की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला होगी।

    लगातार कई सप्ताह तक बाजार में कमजोरी विदेशी पूंजी निकासी, ऊंची उधारी लागत, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों से जुड़ी चिंताओं के बीच आई है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा है। ऑटो और कुछ अन्य क्षेत्रों में दबाव दिखाई दिया, जबकि आईटी जैसे क्षेत्रों में कुछ मजबूती रही।

    गुरुवार के कारोबार में निवेशकों का ध्यान अब विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मौद्रिक नीति के संकेतों पर बना हुआ है।

    आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर

    भारतीय बाजार के लिए आने वाले सत्रों में कई वैश्विक और घरेलू कारक महत्वपूर्ण रहेंगे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली की गति, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।

    इसके अलावा, कंपनियों के बिक्री आंकड़े और तिमाही प्रदर्शन से जुड़े संकेत भी शेयर-विशेष गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। गुरुवार को ऑटो कंपनियों की घरेलू बिक्री और कोटक महिंद्रा बैंक में नेतृत्व परिवर्तन का असर संबंधित शेयरों में साफ दिखाई दिया।

     

    फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी की लगातार निकासी सबसे प्रमुख दबाव वाले कारकों में बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन ऊंची उधारी लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। शुक्रवार को बाजार बंद रहने के कारण गुरुवार का सत्र इस सप्ताह का अंतिम कारोबारी दिन है, जिसके बाद अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि लगातार जारी बिकवाली का सिलसिला थमता है या बाजार में कमजोरी बनी रहती है।

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