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    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में दो दिवसीय फेस्ट ‘संवेतम’ का आगाज़ विभाजन की विभीषिका और पितृसत्ता पर मुखर हुईं छात्राएं

    51 minutes ago

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर में दो दिवसीय वार्षिक उत्सव ‘संवेतम’ का भव्य शुभारंभ हुआ। उत्सव के पहले दिन आयोजित वैचारिक सत्रों में विदुषियों और विद्वानों ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति, इतिहास और उनकी स्वतंत्रता पर बेबाक विचार साझा किए।

    कार्यक्रम की शुरुआत समाजशास्त्र विभाग की छात्राओं द्वारा तैयार की गई एक मर्मस्पर्शी स्किट (नाटिका) से हुई, जो ‘पार्टीशन’ (देश के विभाजन) पर आधारित थी। छात्राओं ने अभिनय और वेशभूषा के माध्यम से ‘विभाजन की विभीषिका’ को जीवंत कर एक गहरा कलात्मक संदेश दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस प्रस्तुति की सूत्रधार समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोहिता चतुर्वेदी शर्मा रहीं। इसके बाद विभाग की डॉ. स्वीटी माथुर ने कार्यक्रम का कॉन्सेप्ट नोट प्रस्तुत कर इसके मुख्य उद्देश्यों और रूपरेखा को सामने रखा।

    इतिहास में महिलाओं की भूमिका को समझना जरूरीः डॉ. अभिरामंजन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के डॉ. अभिरामंजन कुमार ने छात्राओं के साथ विभाजन के दौर के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने ‘इतिहास में महिलाओं के अध्ययन की आवश्यकता’ (Why study women in history?) पर प्रकाश डाला। डॉ. कुमार ने पितृसत्ता, रिफ्यूजी कैंपों के पुनर्निर्माण, भारतीय सरकारी नीतियों और सरजूबाला सेन के योगदान का जिक्र किया। मानव सभ्यता के विकास को समझाते हुए उन्होंने मिर्ज़ा ग़ालिब के एक नोट के साथ अपनी बात को विराम दिया और छात्राओं को ‘अपने हक के लिए अपने घर से ही आवाज़ उठाने’ का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने ‘संवेतम’ से जुड़ी 3 महत्वपूर्ण पुस्तकों की जानकारी भी साझा की।

    अपनी मर्यादा खुद तय करें महिलाएंः प्रो. रितु सारस्वत, विशिष्ट वक्ता, प्रो. रितु सारस्वत ने अपने व्याख्यान में पितृसत्तात्मक सोच पर कड़ा प्रहार किया। समाजशास्त्र के व्यावहारिक उदाहरण देते हुए उन्होंने समाजीकरण (Socialisation) की प्रक्रिया को बदलने और रूढ़िगत सोच को तोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “महिलाओं के लिए कोई लक्ष्मण रेखा नहीं होनी चाहिए, उन्हें अपनी मर्यादा खुद निश्चित करनी होगी।” प्रो. सारस्वत ने छात्राओं को अपनी ऊर्जा व्यर्थ के संघर्षों में गंवाने के बजाय पुस्तकों को पढ़ने और स्वयं से स्वतंत्र होने के लिए प्रेरित किया।

    लिविंग म्यूजियम में दिखीं महान महिला विभूतियां: फेस्ट के दौरान आयोजित ‘लिविंग म्यूजियम’ आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। इसके माध्यम से छात्राओं ने गंगूबाई, शाहजिया बानो और शकुंतला देवी जैसे महान किरदारों को जीवंत करते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके संघर्ष के विभिन्न आयामों को बखूबी प्रस्तुत किया। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने समाज में शक्ति संरचना (Power Structure) के महत्व पर जोर दिया, वहीं प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं के इस उत्कृष्ट प्रयास और पूरे आयोजन की जमकर सराहना की। उत्सव के इस पहले दिन कई गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उत्सव का दूसरा सत्र दिनांक 29 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।

     

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