Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, कोर्ट ने CNN, MS NOW और Politico की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का आदेश दिया

    55 minutes ago

    Yugcharan News / 24-09-2026

    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। संघीय जिला अदालत के जज टिम केली ने गुरुवार को ट्रंप प्रशासन को CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच तत्काल बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने शुरुआती स्तर पर माना कि इन तीनों मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने का फैसला संवैधानिक रूप से चुनौती के दायरे में आता है और उनके प्रेस पास रद्द करने की प्रक्रिया में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया हो सकता है।

    जज केली ने प्रशासन को इन मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के हार्ड-प्रेस पास वापस करने और उनकी पहुंच बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को इस प्रतिबंध को लागू करने से 14 दिनों के लिए रोक दिया है। यह आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और मामले की अंतिम सुनवाई या अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है।

    18 सितंबर को लगाया गया था प्रतिबंध

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोकने की घोषणा की थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रपति के बारे में लगातार ऐसी खबरें प्रकाशित या प्रसारित नहीं करनी चाहिए जिन्हें वह गलत या झूठा मानते हैं। प्रशासन की ओर से बाद में इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर भी उचित ठहराने का प्रयास किया गया।

    प्रतिबंध के बाद तीनों मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से संघीय अदालत का रुख किया। उनकी याचिका में कहा गया कि व्हाइट हाउस की कार्रवाई अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन करती है। मीडिया संस्थानों ने यह भी तर्क दिया कि उनके प्रेस पास बिना पर्याप्त पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए रद्द किए गए।

    जज ने राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क पर जताई असहमति

    अपने आदेश में जज टिम केली ने प्रशासन के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि मीडिया संस्थानों के प्रेस पास रद्द करना राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक था। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में ऐसा पर्याप्त तथ्यात्मक आधार दिखाई नहीं देता जिससे यह साबित हो कि इन मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस पहुंच रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करेगा या उनकी पहुंच बहाल होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।

    अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध का कारण इन मीडिया संस्थानों की कथित रिपोर्टिंग को बताया था। इसके विपरीत, न्याय विभाग ने अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रतिबंध के औचित्य के रूप में पेश किया था। इस अंतर ने मामले की कानूनी बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

    उचित कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल

    मामले की सुनवाई के दौरान जज केली ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि क्या व्हाइट हाउस ने मीडिया संस्थानों को उनके प्रेस पास रद्द करने से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया था।

    Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, जज ने बुधवार की सुनवाई में अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के दो पूर्व फैसलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन फैसलों से संकेत मिलता है कि व्हाइट हाउस के प्रेस पास रद्द करने से पहले संबंधित पत्रकारों को उचित प्रक्रिया का अवसर दिया जाना चाहिए।

    मीडिया संस्थानों की ओर से अदालत में पेश वकील ने कहा कि CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को प्रतिबंध से पहले न तो आवश्यक अग्रिम सूचना दी गई और न ही निर्णय को चुनौती देने का वास्तविक अवसर मिला। उनकी दलील थी कि अचानक पहुंच समाप्त करना गंभीर और असामान्य कार्रवाई थी।

    वहीं, न्याय विभाग के वकील ने तर्क दिया कि प्रशासन ने बाद में मीडिया संस्थानों को भेजे गए पत्रों के जरिए प्रतिबंध का पर्याप्त कारण बताया था। हालांकि, जज केली ने इस तर्क पर सवाल उठाया क्योंकि ये पत्र प्रेस पास रद्द किए जाने और मुकदमा दायर होने के बाद भेजे गए थे।

    सरकार ने कहा—व्हाइट हाउस पहुंच अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है

    ट्रंप प्रशासन की कानूनी दलील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि व्हाइट हाउस में मीडिया की पहुंच कोई पूर्ण कानूनी अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। न्याय विभाग ने अदालत में कहा कि राष्ट्रपति के पास यह तय करने का अधिकार है कि किन समाचार संगठनों को व्हाइट हाउस में प्रवेश दिया जाए और किन परिस्थितियों में उनकी पहुंच को सीमित किया जा सकता है।

    दूसरी ओर, CNN, MS NOW और Politico ने अपने मुकदमे में कहा कि प्रशासन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग या संपादकीय रुख के आधार पर उनके साथ अलग व्यवहार नहीं कर सकता। उनका दावा है कि इस तरह की कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों से टकराती है।

    प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने भी किया समर्थन

    मामले में मीडिया संगठनों और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े कई समूहों ने भी तीनों संस्थानों का समर्थन किया। बुधवार को एक संयुक्त कानूनी ब्रीफ अदालत में दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया कि किसी मीडिया संस्थान के कथित संपादकीय दृष्टिकोण के आधार पर उसके पत्रकारों के अधिकारों या सरकारी पहुंच को सीमित करना अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के लंबे समय से चले आ रहे संवैधानिक सिद्धांतों से टकरा सकता है।

    इस ब्रीफ पर Reporters Committee for Freedom of the Press सहित कई संगठनों और समाचार संस्थानों ने हस्ताक्षर किए। Reuters और Washington Post के साथ Fox News भी इसमें शामिल थे।

    14 दिनों का अंतरिम आदेश, मामला अभी जारी

    जज केली का आदेश फिलहाल अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने 14 दिनों के लिए प्रतिबंध के क्रियान्वयन को रोकते हुए तत्काल प्रेस पास बहाल करने का निर्देश दिया है। इस अवधि के दौरान मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और अदालत को यह तय करना होगा कि प्रतिबंध के खिलाफ मीडिया संस्थानों की व्यापक संवैधानिक चुनौती पर आगे क्या कार्रवाई की जाए।

    अदालत के आदेश के बाद फिलहाल CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होनी है। व्हाइट हाउस और संबंधित मीडिया संस्थानों की ओर से आदेश के तुरंत बाद विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

    मध्यावधि चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक महत्व

    यह कानूनी विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी दलों के बीच मुकाबला होना है। ऐसे समय में राष्ट्रपति और बड़े मीडिया संस्थानों के बीच टकराव का मामला अमेरिकी राजनीतिक और संवैधानिक बहस में विशेष महत्व रखता है।

    हालांकि अदालत का मौजूदा आदेश मीडिया संस्थानों की ओर से दायर कानूनी चुनौती के प्रारंभिक चरण से संबंधित है। यह फैसला यह अंतिम रूप से तय नहीं करता कि प्रतिबंध को लेकर मामले का अंतिम कानूनी परिणाम क्या होगा। फिलहाल अदालत ने इतना स्पष्ट किया है कि तीनों मीडिया संस्थानों को तत्काल बाहर रखने की प्रशासन की कार्रवाई पर अंतरिम रोक रहेगी और उनके प्रेस पास बहाल किए जाएंगे।

    इस मामले ने अमेरिका में राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों, प्रेस की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थानों तक पत्रकारों की पहुंच को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर अदालत के केंद्र में ला दिया है। आगे की सुनवाई में यह तय होना बाकी है कि ट्रंप प्रशासन का प्रतिबंध संवैधानिक और प्रक्रियात्मक कसौटियों पर कितना टिकता है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    ऑस्ट्रेलिया में AI एजेंट ने सरकारी मेडिकेयर पोर्टल तक पहुंच बनाई, स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा पर उठे सवाल
    Next Article
    UN में ट्रंप को खुली चुनौती, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- हम घुटने नहीं टेकेंगे, बातचीत के लिए तैयार

    Related विदेश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment