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    दिल्ली में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, तीन साल में जुलाई का सबसे ठंडा दिन; ओडिशा में बाढ़ का अलर्ट

    4 hours ago

    Yugcharan News / 21 August 2026

    देश के कई हिस्सों में इस सप्ताह मानसून का असर बेहद तेज रहा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई, जबकि ओडिशा में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। दक्षिण भारत में भी समुद्री इलाकों के लिए ऊंची लहरों और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

    लगातार बदल रहे मौसम के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने विभिन्न राज्यों में बारिश और समुद्री परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग स्तर की चेतावनियां जारी की हैं। दिल्ली में बारिश ने जहां गर्म और उमस भरे मौसम से राहत दी, वहीं जलभराव के कारण आम लोगों की परेशानी भी बढ़ गई।

    दिल्ली में भारी बारिश से कई इलाके जलमग्न

    राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को हुई तेज बारिश ने शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। कई प्रमुख सड़कों, चौराहों और बाजारों में पानी भर गया, जिसके कारण वाहनों की आवाजाही धीमी हो गई और कई स्थानों पर लंबा जाम देखने को मिला।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सफदरजंग मौसम केंद्र पर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच 57.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, पूसा इलाके में इससे अधिक 88.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

    बारिश की तीव्रता का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। दिल्ली का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग 9.1 डिग्री सेल्सियस कम था। यह जुलाई में पिछले तीन वर्षों के दौरान दर्ज किया गया सबसे कम अधिकतम तापमान बताया गया।

    भारी बारिश के कारण राजेंद्र नगर, सदर बाजार, कनॉट प्लेस और अन्य इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। कई स्थानों पर पानी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंच गया। इससे कारोबार और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा।

    राजेंद्र नगर में जलभराव विशेष चिंता का विषय रहा। यह इलाका प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए प्रमुख केंद्र है। यहां बारिश और जलभराव ने वर्ष 2024 की उस दुखद घटना की यादें भी ताजा कर दीं, जब एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भरने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत हो गई थी।

    प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित

    दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। दिल्ली-नोएडा रोड, आईटीओ और एम्स के पास एनएच-48 जैसे व्यस्त मार्गों पर यातायात की रफ्तार प्रभावित हुई।

    बारिश के दौरान जलभराव, धीमी गति से चल रहे वाहन और कुछ स्थानों पर पेड़ों के गिरने जैसी घटनाओं ने यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) जैसी एजेंसियों को जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति से संबंधित बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन एजेंसियों के पास 130 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं।

    मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है। विभाग की ओर से हल्की से मध्यम बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और रोजाना सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर

    दिल्ली में जहां शहरी जलभराव ने परेशानी बढ़ाई, वहीं ओडिशा में बाढ़ की स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। राज्य के छह जिलों में 11.80 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

    बालासोर जिले में स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। यहां सुबर्णरेखा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी के आसपास बसे निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

    ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, राज्य की कुछ अन्य नदियों में जलस्तर स्थिर या कम होने लगा है, लेकिन सुबर्णरेखा नदी में पानी बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है।

    बुधवार शाम तक सुबर्णरेखा नदी का जलस्तर 11.22 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि इसका खतरे का निशान 10.36 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से काफी ऊपर दर्ज किया गया।

    स्थिति को पड़ोसी झारखंड में स्थित कुछ बांधों से पानी छोड़े जाने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लगातार जलप्रवाह के कारण नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

    प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव दल तैनात किए हैं। विशेष रूप से बालीपाल, बस्ता और जलेश्वर जैसे इलाकों पर निगरानी बढ़ाई गई है। स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराना है।

    केरल और दक्षिणी तटों के लिए ऊंची लहरों की चेतावनी

    मानसून का असर केवल उत्तरी और पूर्वी भारत तक सीमित नहीं है। दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भी समुद्र की स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

    मौसम विभाग ने केरल, लक्षद्वीप, दक्षिण तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय इलाकों के लिए ऊंची लहरों और समुद्री उफान से संबंधित चेतावनी जारी की है। कुछ तटीय क्षेत्रों में 1.1 से 2.2 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की संभावना जताई गई है।

    इन परिस्थितियों के कारण समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों और मछुआरों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। तटीय इलाकों में समुद्री कटाव और अचानक पानी बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

    केरल तट के लिए विशेष रूप से गंभीर चेतावनी जारी की गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा समुद्र तटों पर गतिविधियों और छोटी नावों के संचालन को लेकर भी प्रतिबंधात्मक निर्देश जारी किए गए हैं।

    समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। कुछ हिस्सों में हवा की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में समुद्र में मौजूद नावों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    केरल के कई जिलों में भी बारिश की संभावना

    केरल के अंदरूनी हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की जैसे जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।

    राज्य के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर जलभराव, पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    कई राज्यों में मानसून का व्यापक असर

    देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय मौसम की परिस्थितियां अलग-अलग रूप में सामने आ रही हैं। दिल्ली में भारी बारिश ने शहरी बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर किया है, जबकि ओडिशा में नदी का बढ़ता जलस्तर ग्रामीण और नदी किनारे के क्षेत्रों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

    दक्षिणी तटों पर समुद्री लहरों और तेज हवाओं को लेकर जारी चेतावनी यह दर्शाती है कि मानसून के दौरान केवल बारिश ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य मौसमीय प्रभावों पर भी नजर रखना जरूरी है।

    प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने तथा जलभराव वाले रास्तों और समुद्री क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

     

    मौसम की स्थिति आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है, इस पर दिल्ली, ओडिशा और दक्षिणी तटीय राज्यों में प्रशासन की निगरानी बनी रहेगी। लगातार बारिश की स्थिति में जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।

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