Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    ट्रंप के नए होर्मुज शुल्क ऐलान से वैश्विक बाजारों में हलचल, तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में गिरावट

    1 hour ago

    Yugcharan News / 14 जुलाई 2026

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेशकों की धारणा पर एक साथ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश गतिविधियों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

    मंगलवार को एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बाजार पहले बढ़त के साथ खुले, लेकिन जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से जुड़ी खबरें सामने आती गईं, निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनानी शुरू कर दी। परिणामस्वरूप अधिकांश प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।

    सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जो पिछले कई सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या व्यापारिक बाधा सीधे तेल की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करती है।

    विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों को चिंता है कि यदि होर्मुज मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है, तो परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा। इसी आशंका के चलते तेल बाजार में खरीदारी बढ़ी और कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया।

    यूरोपीय शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। यूरोप का प्रमुख STOXX 600 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुला। सबसे अधिक दबाव ट्रैवल, एयरलाइन और पर्यटन क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर रहा क्योंकि बढ़ती ईंधन लागत इन उद्योगों के परिचालन खर्च को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों ने तेल, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में अपेक्षाकृत अधिक रुचि दिखाई, जबकि उपभोक्ता और यात्रा आधारित कंपनियों में बिकवाली देखी गई।

    एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। चीन के शेयर बाजारों को जून महीने के मजबूत निर्यात और आयात आंकड़ों से समर्थन मिला। उम्मीद से बेहतर व्यापारिक आंकड़ों के कारण चीनी शेयरों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी क्षेत्र और वैश्विक मांग में सुधार के चलते चीन के व्यापारिक प्रदर्शन ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

    दक्षिण कोरिया के बाजार में भी सीमित बढ़त देखने को मिली, जबकि ताइवान के शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई सूचकांक सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ। जापान के वित्त मंत्री द्वारा सरकारी पेंशन निवेश रणनीति की समीक्षा संबंधी संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों की रुचि कुछ क्षेत्रों में बढ़ी।

    अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान दबाव देखा गया था। वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे नैस्डैक सूचकांक पर अधिक दबाव बना। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर केंद्रित है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वैश्विक निवेशकों के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। दूसरी, दुनिया भर की बड़ी कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम। और तीसरी, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता। इन तीनों कारकों के कारण वैश्विक बाजारों में आने वाले दिनों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा हाल ही में दिए गए बयान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारी ने संकेत दिया कि यदि महंगाई लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो निकट भविष्य में ब्याज दरों में फिर वृद्धि की जा सकती है। इसके बाद बाजार में जुलाई के अंत में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में दरें बढ़ाए जाने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इसी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दो वर्षीय और दस वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं।

    विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जबकि सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई। पारंपरिक रूप से वैश्विक संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इस बार भी निवेशकों ने इसी रणनीति का पालन किया।

    क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हालांकि अपेक्षाकृत सीमित प्रतिक्रिया देखने को मिली। बिटकॉइन में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय क्रिप्टो बाजार पर भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रमों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है या समुद्री व्यापार में और बाधाएं आती हैं, तो तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, विमान ईंधन और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप महंगाई पर भी अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के संकेतों और पश्चिम एशिया की सैन्य स्थिति पर बनी रहेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजारों में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन किसी भी नई सैन्य कार्रवाई या व्यापारिक प्रतिबंध की स्थिति में वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

    फिलहाल दुनिया भर के निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार आने वाली आर्थिक एवं भू-राजनीतिक घटनाओं के आधार पर अपनी अगली दिशा तय करने का इंतजार कर रहे हैं।

     
     
    Click here to Read More
    Previous Article
    Delhi Police Constable Accused of Fatally Shooting Wife on Her Birthday After Argument
    Next Article
    हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरानी मिसाइल हमला: दो तेल टैंकर निशाना बने, एक भारतीय नाविक की मौत, कई घायल

    Related विदेश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment