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    पीओके में प्रदर्शनों पर भारत का सख्त संदेश, पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026

    पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि पीओके में मौजूदा हालात पाकिस्तान की वर्षों पुरानी दमनकारी नीतियों, प्रशासनिक शोषण और स्थानीय लोगों के मौलिक अधिकारों के लगातार उल्लंघन का परिणाम हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन घटनाओं के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है।

    विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं हैं, बल्कि यह दशकों से जारी आर्थिक उपेक्षा, राजनीतिक दमन और नागरिक अधिकारों के हनन का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया है।

    जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए जिस तरह की कार्रवाई की गई है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार महिलाओं, बच्चों और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की गई, इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया तथा कई स्थानों पर घातक बल प्रयोग की भी खबरें सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है।

    भारत ने कहा कि ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चुप नहीं रहना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि वैश्विक संस्थाएं और मानवाधिकार संगठन पीओके में सामने आ रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देंगे तथा पाकिस्तान से जवाब मांगेंगे।

    रिपोर्टों के अनुसार पीओके में चल रहे आंदोलन की प्रमुख वजह आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई है। प्रदर्शनकारी सरकार से गेहूं के आटे, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में बसाए गए प्रवासियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को बरकरार रखने वाले न्यायालय के फैसले का भी विरोध किया जा रहा है। इसी प्रकार के प्रदर्शन पिछले वर्ष भी देखने को मिले थे।

    हालिया विरोध प्रदर्शनों को उस समय और गति मिली जब पाकिस्तान सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया। इस कार्रवाई के बाद संगठन के नेताओं और समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

    इसी बीच, JAAC के नेता सरदार अमन खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिसमें उन्होंने भारत से सहायता की अपील करते हुए राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का उल्लेख किया। हालांकि, संबंधित वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी प्रामाणिकता स्पष्ट नहीं है।

    पीओके के बाहर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जा रही है। अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी, मैरीलैंड और वर्जीनिया में जम्मू-कश्मीर समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन कर क्षेत्र में कथित मानवीय संकट पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की।

    भारत का कहना है कि पीओके में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है और वहां की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और आवश्यक सेवाओं में बाधा जैसी घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं मानी जा सकतीं।

    हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन पीओके की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

     
     
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