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    17वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, बिगड़ी तबीयत; विपक्ष ने जीवन बचाने की अपील की

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 14 जुलाई 2026

    देशभर में परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का आमरण अनशन मंगलवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। चिकित्सकों की निगरानी में होने के बावजूद उनका वजन तेजी से कम हुआ है, जिसके बाद कई विपक्षी नेताओं ने उनसे अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की है।

    सोनम वांगचुक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में भाग ले रहे हैं। उनका यह अनशन उन छात्रों और युवाओं के समर्थन में है, जो हाल में हुए कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

    जानकारी के अनुसार, वांगचुक पिछले 17 दिनों से केवल सीमित मात्रा में तरल पदार्थ लेकर अनशन पर हैं। मौके पर मौजूद चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अब तक उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और उनकी शारीरिक कमजोरी लगातार बढ़ रही है। मंगलवार को उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे मीडिया से बातचीत करने की स्थिति में भी नहीं थे।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा संगठन के संस्थापक अभिजीत डिपके ने दावा किया कि वांगचुक को कई बार अनशन समाप्त करने के लिए समझाया गया, लेकिन उन्होंने फिलहाल अपना निर्णय बदलने से इनकार कर दिया है। डिपके के अनुसार, वांगचुक चाहते हैं कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहे और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च की तैयारियां भी जारी रखी जाएं।

    धरना स्थल पर सोमवार को एक अन्य युवा प्रदर्शनकारी की तबीयत भी बिगड़ गई थी। लंबे समय से उपवास कर रहे उस युवक के बेहोश होने के बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया गया है तथा मेडिकल टीम को लगातार तैनात रखा गया है।

    इस बीच कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनम वांगचुक का जीवन देश और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपील की कि वे अपना अनशन समाप्त करें ताकि वे भविष्य में भी शिक्षा, पर्यावरण और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अपनी आवाज उठाते रहें।

    हालांकि आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    उधर, शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की ओर से इस ताजा घटनाक्रम पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के बीच असंतोष बढ़ाया है। बड़ी संख्या में छात्र पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, सख्त कानून और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में सोनम वांगचुक जैसे चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता का इस आंदोलन से जुड़ना इसे राष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चा का विषय बना रहा है।

    सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनकी सामाजिक पहल और शिक्षा मॉडल को देश-विदेश में सराहना मिली है। इसी कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता केवल आंदोलनकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। दूसरी ओर, डॉक्टर लगातार वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं। यदि उनकी स्थिति और गंभीर होती है तो चिकित्सा विशेषज्ञ आगे की आवश्यक सलाह दे सकते हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई संवाद स्थापित होता है या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

     
     
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