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    अग्रवाल पी जी कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का समापन

    2 hours ago

    NEP 2020 में AI और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर हुआ मंथन

    ​जयपुर। स्थानीय अग्रवाल पी जी कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विभिन्न आयामों पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का गरिमापूर्ण समापन हुआ। इस उच्च स्तरीय कांफ्रेंस का मुख्य विषय 'रोल ऑफ ए आई, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आई टी ई पी इन एन ई पी 2020' रहा।

    ​भव्य शुभारंभ और दीप प्रज्वलन

    कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यपाल के सलाहकार प्रो. कैलाश सोढ़ानी, हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पांडे, संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. आर. पी. पाठक, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर की डीन ऑफ एजुकेशन प्रो. रीटा शर्मा, ए एम डी एस की अध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा तथा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवंदा द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। पूरे कार्यक्रम का कुशल और सफल संचालन डॉ. नमिता चौहान, डॉ. प्रियंका खट्टर एवं डॉ. सजिता नैयर द्वारा किया गया।

    ​द्वितीय दिन के सत्र और स्वागत उद्बोधन

    कांफ्रेंस के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में ए एम डी एस की अध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवंदा ने अपने स्वागत संबोधन से सभी आगंतुक शिक्षाविदों, शोधार्थियों और अतिथियों का अभिनंदन किया।

    ​मुख्य अतिथियों के बीज कथन (Keynote Addresses):

    ​प्रो. कैलाश सोढ़ानी (सलाहकार, राज्यपाल): उन्होंने अपने बीज कथन में कहा, "NEP 2020 केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा के पुनरुत्थान का मार्ग है। हमें तकनीक (AI) का स्वागत करना होगा, लेकिन अपनी जड़ों (भारतीय ज्ञान प्रणाली) को मजबूत रखते हुए। कला और विज्ञान का यह समन्वय ही नए भारत का निर्माण करेगा।"

    ​प्रो. नंद किशोर पांडे (कुलगुरु, हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय): उन्होंने संचार और शिक्षा के माध्यम पर जोर देते हुए कहा, "भारतीय ज्ञान प्रणाली को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आधुनिक तकनीक और कुशल शिक्षकों की आवश्यकता है। ITEP (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) के माध्यम से हम ऐसे शिक्षक तैयार कर रहे हैं जो वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व कर सकें।"

    ​प्रो. आर. पी. पाठक (संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली): उन्होंने प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता बताते हुए कहा, "हमारे वेदों और संस्कृत ग्रंथों में निहित विज्ञान और गणित को जब हम ए आई और आधुनिक डेटा साइंस से जोड़ेंगे, तभी हम सच्चे अर्थों में विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर होंगे।"

    ​ए आई (AI) की भूमिका पर तकनीकी विमर्श

    कांफ्रेंस के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों और फ्लोरिडा से ऑनलाइन जुड़े ए आई एक्सपर्ट श्री अनिल मिश्रा ने रेखांकित किया कि AI के माध्यम से प्रत्येक छात्र की सीखने की क्षमता के अनुसार पाठ्यक्रम (Personalized Learning) तैयार किया जा सकता है। यह तकनीक शिक्षकों की सहायक बनकर मूल्यांकन और डेटा विश्लेषण को आसान बनाएगी, जिससे रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

    ​प्रथम दिन ऑनलाइन सत्र में जुड़े वैश्विक विशेषज्ञ

    इससे पूर्व, कांफ्रेंस के पहले दिन आयोजित ऑनलाइन सत्र में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के पूर्व कुलगुरु प्रो. अनिल शुक्ला और अंतरराष्ट्रीय हिंदी संस्थान नीदरलैंड की अध्यक्ष डॉ. ऋतु पांडे ने भी अपने विचार साझा किए थे।

    ​समापन सत्र

    समापन के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर की डीन ऑफ एजुकेशन प्रो. रीटा शर्मा ने शिक्षा में हो रहे इन क्रांतिकारी बदलावों और एनईपी 2020 के प्रारूप पर अपनी सहमति जताई। अंत में, प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवंदा ने कांफ्रेंस के सफल और ऐतिहासिक आयोजन के लिए सभी आगंतुक विद्वानों, आयोजकों और संचालन समिति का सहृदय आभार व्यक्त किया।

     

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