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    जंतर-मंतर पर अनशन का 16वां दिन: एक छात्र अस्पताल में भर्ती, सोनम वांगचुक का वजन 8 किलो से अधिक घटा

    52 minutes ago

    युगचरण न्यूज़ | 14 जुलाई 2026

    नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी इस प्रदर्शन का 16वां दिन पूरा हो गया है। इस दौरान एक छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन भी आठ किलोग्राम से अधिक घटने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों के अनुसार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े एक छात्र को हाइपोवोलेमिक शॉक (शरीर में तरल पदार्थ की गंभीर कमी) की स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ा। संगठन का कहना है कि लंबे समय से भोजन न करने और लगातार धरने पर बैठे रहने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी।

    इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठन का दावा है कि अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन लगभग 8.25 किलोग्राम कम हो चुका है। डॉक्टरों द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है, हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वांगचुक अपनी मांगों को लेकर अब भी अडिग हैं।

    प्रदर्शनकारी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कथित मुद्दों पर कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह अनशन किया जा रहा है।

    आंदोलन से जुड़े नेताओं ने राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यधारा के मीडिया द्वारा इस आंदोलन की अनदेखी की जा रही है, जिसे वे दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। वहीं संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए अपने स्वास्थ्य को इस हद तक दांव पर लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है।

    इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अनशन समाप्त करने की अपील की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनकारी फिलहाल अपनी मांगों पर किसी ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन अब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण भी चर्चा का विषय बन गया है। छात्र संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे मामलों में नियमित चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक होती है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

     

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी प्रकार की बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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