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    E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं होता, IIT कानपुर के शोध और ऑटो विशेषज्ञों ने दावों को बताया भ्रामक

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 15-07-2026

    देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर चल रही बहस के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के शोधकर्ताओं और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने दावा किया है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईंधन की माइलेज में यदि कोई कमी आती भी है तो वह बहुत सीमित होती है और सामान्य परिस्थितियों में वाहन मालिकों को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे वायरल हुए हैं। इनमें इंजन खराब होने, माइलेज में भारी गिरावट आने और पुराने वाहनों के लिए इस ईंधन को नुकसानदायक बताए जाने जैसी बातें शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों का अधिकांश हिस्सा वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और लोगों को अपुष्ट जानकारी की बजाय अधिकृत स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए।

    E20 पेट्रोल को लेकर क्यों शुरू हुई बहस?

    केंद्र सरकार ने देशभर में चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की आपूर्ति शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

    लेकिन E20 लागू होने के बाद कुछ वाहन मालिकों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया जाने लगा कि इससे वाहनों के इंजन को नुकसान हो सकता है तथा माइलेज में काफी गिरावट आएगी। इन दावों के बाद E20 को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    IIT कानपुर की रिसर्च में क्या सामने आया?

    IIT कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की इंजन रिसर्च लैब में किए गए परीक्षणों के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाता।

    शोधकर्ताओं के अनुसार विस्तृत परीक्षणों के दौरान इंजन में किसी प्रकार की गंभीर तकनीकी समस्या, जंग (Corrosion) या यांत्रिक क्षति के प्रमाण नहीं मिले।

    संस्थान का यह भी कहना है कि माइलेज में होने वाली कमी सामान्य परिस्थितियों में पांच प्रतिशत से कम रहती है और कई बार यह अंतर ड्राइविंग शैली, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और वाहन के रखरखाव जैसे अन्य कारणों से भी हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार केवल ईंधन को माइलेज में बदलाव का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

    सोशल मीडिया के दावों को बताया वैज्ञानिक आधार से परे

    शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावों को वैज्ञानिक रूप से असत्य बताया है।

    उनका कहना है कि वाहन मालिकों को इंटरनेट पर फैल रही अपुष्ट जानकारी की बजाय अपने वाहन निर्माता द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की आधिकारिक सलाह पर भरोसा करना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि गलत सूचनाएं लोगों में अनावश्यक भ्रम और डर पैदा कर रही हैं।

    ऑटो विशेषज्ञ ने भी किया समर्थन

    ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी E20 पेट्रोल को लेकर फैल रही आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहनों की उपयोगकर्ता पुस्तिका (मैनुअल) उस समय तैयार की गई थी, जब देश में E20 ईंधन उपलब्ध नहीं था। इसलिए कई पुराने मैनुअल में केवल E10 या सामान्य पेट्रोल का उल्लेख मिलता है।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसे वाहन E20 पर नहीं चल सकते। वाहन निर्माता आमतौर पर सुरक्षा और कानूनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए सीमित तकनीकी जानकारी प्रकाशित करते हैं।

    पुराने वाहन मालिकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन का नियमित रखरखाव किया जाता है, तो अधिकांश मामलों में E20 पेट्रोल से कोई विशेष समस्या नहीं आती।

    हालांकि जिन वाहनों की लंबे समय तक सर्विस नहीं हुई है या जिनके फ्यूल सिस्टम में पहले से गंदगी जमा है, उनमें एथेनॉल की सफाई करने वाली प्रकृति (डिटर्जेंट प्रभाव) के कारण कुछ प्रारंभिक समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    ऐसी स्थिति में ईंधन प्रणाली में मौजूद पुरानी गंदगी निकलकर फिल्टर या अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकती है।

    इसलिए वाहन मालिकों को समय-समय पर सर्विस और रखरखाव करवाने की सलाह दी जा रही है।

    लंबे समय तक खड़ा वाहन होने पर हो सकती है परेशानी

    विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि एथेनॉल वातावरण से नमी को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।

    यदि कोई वाहन एक महीने या उससे अधिक समय तक बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो ईंधन में नमी बढ़ने के कारण कुछ तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    हालांकि नियमित रूप से उपयोग किए जाने वाले वाहनों में ऐसी स्थिति की संभावना काफी कम मानी जाती है।

    ईंधन में मिलावट की समस्या नई नहीं

    हाल के दिनों में कुछ लोगों ने खराब ईंधन की शिकायत भी की है। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन में मिलावट की समस्या नई नहीं है और यह कई वर्षों से अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में ईंधन की गुणवत्ता खराब है, तो उसका असर किसी भी वाहन पर पड़ सकता है। इसे केवल E20 से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    तेल विपणन कंपनियों ने भी पिछले कुछ वर्षों में गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को पहले की तुलना में काफी मजबूत बनाया है।

    वाहन निर्माता कंपनियों का भी समर्थन

    देश की कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी E20 पेट्रोल को सुरक्षित बताया है।

    कंपनियों का कहना है कि उन्होंने बड़ी संख्या में पुराने वाहनों का परीक्षण और सर्विसिंग की है, जिसमें E20 से संबंधित कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई।

    निर्माताओं के अनुसार उनके परीक्षणों में धातु या प्लास्टिक के हिस्सों पर भी कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया।

    इससे उद्योग जगत का विश्वास और मजबूत हुआ है कि E20 ईंधन का उपयोग सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।

    सरकार ने भी दी सफाई

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि E20 पेट्रोल एक स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाला ईंधन है।

    मंत्रालय के अनुसार इसे लागू करने से पहले कई वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए गए, ऑटोमोबाइल कंपनियों से परामर्श लिया गया और घरेलू एथेनॉल उत्पादन क्षमता को भी मजबूत किया गया।

    सरकार का कहना है कि E20 के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    केंद्रीय मंत्री ने भी किया बचाव

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी E20 पेट्रोल का समर्थन करते हुए कहा है कि माइलेज को लेकर कई दावे वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते।

    हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन की माइलेज कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहन का रखरखाव, ड्राइविंग शैली और मौसम भी शामिल हैं।

    इसलिए केवल ईंधन को माइलेज में बदलाव का कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही अधिकांश आशंकाएं अतिरंजित हैं।

    उनका कहना है कि यदि वाहन का नियमित रखरखाव किया जाए, समय-समय पर सर्विस कराई जाए और अधिकृत पेट्रोल पंपों से ईंधन भरवाया जाए, तो अधिकांश वाहन बिना किसी बड़ी समस्या के E20 पर चल सकते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अपुष्ट दावों की बजाय वैज्ञानिक शोध, वाहन निर्माता कंपनियों की सलाह और सरकारी दिशानिर्देशों पर भरोसा करना चाहिए।

     

    E20 पेट्रोल को भारत की स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके व्यापक उपयोग के साथ इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर भी लगातार अध्ययन जारी रहेगा, लेकिन फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक शोध और उद्योग विशेषज्ञों की राय यही संकेत देती है कि उचित रखरखाव वाले वाहनों के लिए E20 पेट्रोल किसी बड़े खतरे का कारण नहीं है।

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