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    जयपुर की गालीबाज़ी, अलगोजा, माँझीरा और तमाशा ने जमाया रंग, लोक कला संगम में दिखे ढूँढाढ़ की संस्कृति के अलबेले रूप

    3 months ago

    लोक चौपाल में लोक संस्कृति की चर्चा

     

    संस्कार भारती जयपुर तथा कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार द्वारा जवाहर कला केंद्र में आयोजित हो रहे लोक कला संगम 2026 में ढूँढाढ़ की लोककलाओं का मंचन हुआ।

    जिसमें टोंक के चार बैंत गायन, कुचामणि ख्याल पांच वचन, चरी नृत्य चिरमी और जयपुर की कठपुतली नाट्य प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया।

    इन लोक कलाओं के माध्यम से कलाकारों ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक शिष्टाचार से सम्बंधित विषयों को विशिष्ट शैली में आमजन के बीच रखा।

    कृष्णायन सभागार में दिन में दो सत्रों में लोक कलाओं से सम्बंधित विषयों पर लोके चौपाल में चर्चा आयोजित हुई।

     

    प्रथम सत्र में वक्ताओं ने लोक दृष्टि : मन, मिट्टी और परम्परा का देशज संसार विषय पर अपनी बात रखी।

    डॉ. चेतन औदिच्य द्वारा संचालित इस सत्र में पद्मश्री तिलक गीताई, अरुण प्रकाश व्यास एवं अंशु हर्ष ने सहभागिता करते हुए लोक के माध्यम से व्यष्टि से समष्टि हेतु अपना विचार रखा।

     

    द्वितीय सत्र में पर्यटन, पर्यावरण और लोक कला धरोहर से नवाचार तक, उक्त विषय पर मंथन हुआ। अक्षय हाड़ा द्वारा संचालित इस सत्र में डॉ. अमिता राज गोयल, अशोक शर्मा तथा अरुण शर्मा की सहभागिता रही एवं पर्यावरण के लोक पक्ष के साथ ही हमारी धरोहर के संरक्षण के लिए मंथन हुआ।

    शाम 6 बजे से आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जयपुर ग़ालीबाजी, चार बेंत, कठपुतली, अलगोजा मंजीरा वादन, चरी नृत्य, कुचामणी ख्याल एवं जयपुर तमाशा का मंचन हुआ। मंच संचालन राजेन्द्र शर्मा राजू व सीमा वालिया व नेकीराम ने किया।

    मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले उपस्थित रहे।

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