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    तारिक रहमान की वापसी: क्या बदलेंगे भारत-बांग्लादेश रिश्ते और हिंदुओं की सुरक्षा?

    1 month ago

    बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय बाद एक ऐसा क्षण आया है, जिसने न सिर्फ ढाका बल्कि नई दिल्ली की रणनीतिक सोच को भी झकझोर दिया है। वर्षों के निर्वासन, विवादों और आरोपों के बाद तारिक रहमान की वापसी अब औपचारिक रूप से सत्ता के केंद्र में होने जा रही है। बीएनपी की चुनावी जीत के साथ यह तय माना जा रहा है कि तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे और भारत इस घटनाक्रम को बेहद सतर्क निगाहों से देख रहा है।

    शेख़ हसीना के 2024 में सत्ता से हटने और भारत चले जाने के बाद भारत–बांग्लादेश संबंध जिस निचले स्तर पर पहुंचे थे, उसके बाद तारिक रहमान की वापसी को नई शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने नतीजों की औपचारिक घोषणा से पहले ही बधाई देकर यह साफ कर दिया कि वह ढाका के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए तैयार है।

     

     भारत के लिए तारिक रहमान की वापसी क्यों अहम है?

     

    भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी साझा सीमा, व्यापार, बिजली आपूर्ति, ट्रांजिट रूट और क्षेत्रीय सुरक्षा इन सबके चलते ढाका में सत्ता परिवर्तन का सीधा असर नई दिल्ली पर पड़ता है।

    ऐसे में तारिक रहमान की वापसी भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि बीएनपी को परंपरागत रूप से जमात-ए-इस्लामी की तुलना में अधिक व्यवहारिक और अपेक्षाकृत उदार राजनीतिक ताकत माना जाता रहा है।

    अंतरिम सरकार के दौर में बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान और चीन की ओर बढ़ा, जिससे भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी। इसी संदर्भ में तारिक रहमान का यह बयान कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान से समान दूरी रखेगा, नई दिल्ली के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है। भारत के लिए यह स्पष्ट है कि तारिक रहमान की वापसी संबंधों में संतुलन बहाल करने का अवसर दे सकती है बशर्ते यह केवल बयानबाज़ी न रहे।

     

     “ना दिल्ली, ना पिंडी”: बदली हुई राजनीतिक छवि

     

    तारिक रहमान की वापसी के बाद सबसे बड़ा बदलाव उनके राजनीतिक लहजे में दिखाई देता है। कभी “डार्क प्रिंस” कहे जाने वाले तारिक अब खुद को एक राष्ट्र-केंद्रित, स्थिर और व्यावहारिक नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
    उनका नारा—

    “ना दिल्ली, ना पिंडी, पहले बांग्लादेश”
    यह संदेश देता है कि बीएनपी किसी बाहरी शक्ति के दबाव में नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेना चाहती है।

     

    यह रुख़ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शेख़ हसीना के भारत जाने के बाद बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं, खासकर युवाओं के बीच, तेज़ हुई हैं। ऐसे माहौल में तारिक रहमान की वापसी भारत के लिए अवसर भी है और कूटनीतिक परीक्षा भी।

     

     हिंदुओं की सुरक्षा और भारत की संवेदनशील चिंता

     

    भारत के लिए तारिक रहमान की वापसी का एक बेहद अहम पहलू बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा से जुड़ा है। हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों पर हमलों और हिंसा की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई थी।


    तारिक रहमान ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कहा —

     

    “धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सबका है।”

     

    यह बयान भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 8 प्रतिशत है और उनकी सुरक्षा हमेशा भारत–बांग्लादेश रिश्तों का संवेदनशील मुद्दा रही है। यदि तारिक रहमान की वापसी वास्तव में समावेशी शासन में बदलती है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों में भरोसा बहाल कर सकती है।

     

    अतीत की परछाइयाँ: क्या ‘डार्क प्रिंस’ की छवि पीछा छोड़ेगी?

     

    हालांकि, तारिक रहमान की वापसी के साथ अतीत के साए भी लौट आए हैं। 2001 से 2006 के बीच बीएनपी शासन भारत–बांग्लादेश संबंधों के सबसे कठिन दौरों में गिना जाता है।
    हवा भवन को सत्ता का समानांतर केंद्र माना गया,
    चटगांव हथियार कांड,

    और पूर्वोत्तर उग्रवादियों को कथित संरक्षण—
    ये आरोप आज भी नई दिल्ली की स्मृति में ताज़ा हैं।

    इसी कारण भारत इस बार उत्साह के साथ-साथ सतर्कता भी बरत रहा है। तारिक रहमान की वापसी से जुड़ी उम्मीदें तभी टिकेंगी, जब वह नीतियों और व्यवहार में अतीत से अलग रास्ता अपनाते दिखें।

     

     निष्कर्ष: भारत के लिए अवसर भी, सावधानी भी

     

    भारत के नजरिए से तारिक रहमान की वापसी एक संभावित रीसेट बटन है लेकिन बिना शर्त नहीं। यदि तारिक रहमान अपने बदले हुए तेवर को ठोस नीतियों में बदलते हैं, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और भारत के साथ संतुलित रिश्ते बनाते हैं, तो दक्षिण एशिया में स्थिरता बढ़ सकती है।

     

    लेकिन अगर अतीत की गलतियां दोहराई गईं, तो यह अवसर भी एक खोया हुआ अध्याय बन सकता है। फिलहाल, भारत और पूरी दुनिया तारिक रहमान की वापसी को उम्मीद और आशंका दोनों नजरों से देख रही है।

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