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    पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की LPG आपूर्ति पर असर, ‘ग्रीन सनवी’ ने सुरक्षित पार किया Strait of Hormuz

    5 days ago

    युगचरण न्यूज़ | 04 अप्रैल 2026

    पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है। इस बीच, भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है—भारत-ध्वज वाला LPG कैरियर ग्रीन सनवी (Green Sanvi) सुरक्षित रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को पार कर चुका है। इस जहाज में लगभग 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लदा हुआ है, जो देश की ईंधन आपूर्ति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

    हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम 17 भारतीय जहाज अभी भी Strait of Hormuz के पश्चिम में फंसे हुए हैं और सुरक्षा हालात बेहतर होने का इंतजार कर रहे हैं।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का महत्व

    Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की बड़ी मात्रा का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।

    मौजूदा संकट United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण उत्पन्न हुआ है, जिससे इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

    भारतीय नौसेना और सरकार की तैयारी

    स्थिति को देखते हुए Indian Navy पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए तैयार है। सरकार के विभिन्न मंत्रालय, जैसे पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय, लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

    करीब 18 भारतीय जहाज और 485 नाविक इस समय फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, और सभी सुरक्षित बताए गए हैं। इसके अलावा, 964 से अधिक भारतीय नाविकों को पहले ही सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

    LPG आपूर्ति जारी, लेकिन चुनौतियां बरकरार

    चुनौतियों के बावजूद, भारत में LPG की आपूर्ति पूरी तरह रुकी नहीं है। अब तक 6 LPG जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, दो अन्य जहाज—ग्रीन आशा (Green Asha) और जग विक्रम (Jag Vikram)—भी जल्द भारत के लिए रवाना होने वाले हैं।

    पहले कुछ जहाज Abu Musa Island के पास रुके हुए थे और सुरक्षा अनुमति का इंतजार कर रहे थे।

    घरेलू स्तर पर मिश्रित स्थिति

    घरेलू स्तर पर स्थिति थोड़ी मिली-जुली है। Indian Oil Corporation (इंडियन ऑयल) का कहना है कि देश में LPG की आपूर्ति सामान्य है और रोजाना लगभग 28 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है।

    कंपनी ने लोगों से घबराकर अतिरिक्त बुकिंग न करने की अपील की है। हालांकि, कई इलाकों में लोगों को सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है।

    अचानक बढ़ी मांग से सिस्टम पर दबाव

    मार्च के दौरान अचानक LPG की मांग में भारी वृद्धि देखी गई। जहां पहले रोजाना लगभग 2.5 लाख बुकिंग होती थीं, वहीं यह संख्या बढ़कर 5.9 लाख तक पहुंच गई।

    इस वजह से डिजिटल सिस्टम पर दबाव पड़ा और कई जगहों पर डिलीवरी में देरी हुई।

    कालाबाजारी और प्रशासन की कार्रवाई

    इस संकट के दौरान LPG की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के मामले भी सामने आए हैं। कई राज्यों में पुलिस और प्रशासन ने छापेमारी कर हजारों सिलेंडर जब्त किए हैं।

    सरकार ने चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    व्यापार और आम जीवन पर असर

    LPG की कमी का असर छोटे व्यवसायों, खासकर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा है। कई जगहों पर लोग कोयला, लकड़ी और डीजल जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    Shimla जैसे क्षेत्रों में कोयले की मांग बढ़ गई है। वहीं, लखनऊ और पुरी जैसे शहरों में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में 30–40% तक बढ़ोतरी देखी गई है।

    वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ता रुझान

    इस संकट के बीच, सरकार और लोग वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ रही है।

    कर्नाटक के उडुपी में एक मंदिर द्वारा बायोगैस प्लांट लगाने की पहल भी इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

    वैश्विक तेल व्यापार पर असर

    इस संकट का असर वैश्विक तेल व्यापार पर भी पड़ा है। एक विदेशी टैंकर, जो ईरान से भारत तेल लेकर आ रहा था, उसने बीच रास्ते में अपना रुख बदलकर चीन की ओर कर लिया।

    यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।

    निष्कर्ष

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि, ग्रीन सनवी का सुरक्षित आगमन एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

    आगे आने वाले समय में सरकार को कूटनीतिक प्रयास, मजबूत लॉजिस्टिक्स और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों पर ध्यान देना होगा, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर रखा जा सके।

     
     
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