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    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में कल सुनवाई

    Yugcharan News / 21-10-2026 दिल्ली हाईकोर्ट 22 अक्टूबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस 16 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में उनकी भागीदारी के बाद जारी किया गया था। नेहा बोरा ने अदालत से नोटिस रद्द करने, उससे जुड़ी कार्यवाही समाप्त करने और अधिकारियों को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मामले को 21 अक्टूबर को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, नेहा बोरा के वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने सुनवाई स्थगित कर दी। अब मामले की सुनवाई 22 अक्टूबर को होने की संभावना है। यह मामला दिल्ली में प्रदर्शनों, निषेधाज्ञाओं और शांति बनाए रखने के लिए जारी किए जाने वाले निवारक नोटिसों से जुड़े व्यापक कानूनी विवाद के बीच सामने आया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या अधिकारियों ने नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले शांति भंग होने की आशंका को दर्शाने वाली पर्याप्त सामग्री पेश की थी। BNSS की धाराओं के तहत जारी नोटिस को दी चुनौती नेहा बोरा ने अपनी याचिका में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा 17 अक्टूबर को जारी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 130 के साथ धारा 135(3) के तहत जारी किया गया था। नोटिस में नेहा बोरा से जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया है। याचिका में उन्होंने इस नोटिस को रद्द करने के साथ-साथ इससे उत्पन्न होने वाली कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अदालत से अधिकारियों को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका का प्रमुख तर्क यह है कि नोटिस में ऐसी ठोस सामग्री का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे यह स्थापित हो सके कि नेहा बोरा के कारण शांति भंग होने की वास्तविक आशंका थी। उनके पक्ष का कहना है कि BNSS की धारा 126 के तहत निवारक कार्यवाही शुरू करने के लिए शांति भंग होने की संभावना से संबंधित आधार आवश्यक हैं। हालांकि, ये याचिका में किए गए दावे हैं। इन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है। आगामी सुनवाई में अदालत नोटिस को चुनौती देने वाले तर्कों पर विचार कर सकती है और मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन का आह्वान याचिका के अनुसार, नेहा बोरा ने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराना था। याचिका में कहा गया है कि यह कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था। नेहा बोरा का आरोप है कि उन्हें उसी दिन शाम लगभग 5:30 बजे हिरासत में ले लिया गया। याचिका के मुताबिक, उन्हें पहले एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और बाद में आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया, जहां उन्हें रातभर रखा गया। याचिका में कहा गया है कि उन्हें 17 अक्टूबर की सुबह छह बजे रिहा किया गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को उन्हें विवादित नोटिस प्राप्त हुआ। इन घटनाओं का विवरण नेहा बोरा की ओर से दायर याचिका में दिया गया है। हिरासत के दौरान हुई घटनाओं और नोटिस जारी करने के आधारों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा अदालत की आगे की टिप्पणियां मामले के परिणाम को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगी। नोटिस में नारेबाजी और निषेधाज्ञा के उल्लंघन का आरोप याचिका के अनुसार, नेहा बोरा को जारी नोटिस में मंडी हाउस में कथित नारेबाजी, जंतर-मंतर के आसपास बार-बार प्रदर्शन किए जाने और 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को कथित रूप से उकसाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में जंतर-मंतर के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद प्रदर्शनों का आयोजन किए जाने का भी संदर्भ दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित प्रतिबंधों का उल्लेख BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेशों के संदर्भ में किया गया है। नेहा बोरा की याचिका इन आरोपों के आधार पर जारी नोटिस की वैधता को चुनौती देती है। उनका कहना है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका को साबित करने वाली आवश्यक सामग्री नहीं बताई गई है। इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न यह है कि निवारक कार्रवाई के लिए केवल प्रदर्शन में भागीदारी या नारेबाजी का उल्लेख पर्याप्त है या अधिकारियों को ऐसी विशिष्ट परिस्थितियां भी दिखानी होंगी, जिनसे सार्वजनिक शांति को खतरा होने की आशंका स्थापित होती हो। इस प्रश्न पर अदालत का रुख मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी दिया गया हवाला नेहा बोरा की याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अक्टूबर और 15 अक्टूबर 2026 को पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। ये आदेश नई दिल्ली में सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों और BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेशों से संबंधित कार्यवाहियों के संदर्भ में दिए गए थे। याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। याचिका में इस निर्देश को विशेष रूप से उन मामलों के संदर्भ में उद्धृत किया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण सभाएं धारा 163 के आदेश से प्रभावित क्षेत्र के बाहर आयोजित की जाती हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह 23 अगस्त के आदेश के अतिरिक्त नई दिल्ली में लागू धारा 163 के आदेशों को रिकॉर्ड पर रखे। इन आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 19 नवंबर के लिए स्थगित कर दी गई थी। नेहा बोरा ने इन आदेशों का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण सभा से संबंधित अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उनकी याचिका पर सटीक प्रभाव क्या होगा, यह दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए तथ्यों और कानूनी दलीलों पर निर्भर करेगा। शांति बांड की कार्यवाही पर क्यों है विवाद? शांति बनाए रखने के लिए बांड प्रस्तुत कराने की प्रक्रिया का उद्देश्य संभावित शांति भंग होने की स्थिति में निवारक कार्रवाई करना है। ऐसी कार्यवाही में अधिकारियों को लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करनी होती है। नेहा बोरा की याचिका इसी प्रक्रिया के आधार और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाती है। उनकी ओर से अदालत में यह दलील दी गई है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका से संबंधित पर्याप्त सामग्री का खुलासा नहीं किया गया। यदि अदालत इस तर्क पर विचार करती है, तो उसे नोटिस में दर्ज आधारों, लागू कानूनी प्रावधानों और याचिका में उद्धृत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में मामले का परीक्षण करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, नोटिस में जिन घटनाओं और आरोपों का उल्लेख किया गया है, उनका कानूनी महत्व संबंधित रिकॉर्ड और अधिकारियों के पक्ष को देखकर ही निर्धारित किया जा सकता है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा नोटिस की वैधता पर कोई अंतिम फैसला सुनाए जाने की जानकारी नहीं है। 22 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर नेहा बोरा की याचिका पर 22 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें एक ओर निवारक कार्रवाई के लिए आवश्यक कानूनी आधार का प्रश्न है और दूसरी ओर प्रदर्शन तथा सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रतिबंधों का मुद्दा है। याचिका में नोटिस रद्द करने, उससे जुड़ी कार्यवाही समाप्त करने और अधिकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है। अदालत को इन मांगों पर विचार करते हुए याचिका में दिए गए तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और उद्धृत न्यायिक आदेशों का परीक्षण करना होगा। फिलहाल, नेहा बोरा को जारी नोटिस को रद्द करने की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। 22 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत का रुख और आगे जारी होने वाले आदेश यह स्पष्ट करने में मदद करेंगे कि इस मामले में निवारक कार्यवाही को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाएगा।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को लगाई फटकार, जंतर-मंतर बैरिकेड तोड़ने पर उठाए सवाल

    Yugcharan News / 21-10-2026 दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि बैरिकेड लगाने का एक उद्देश्य होता है। अदालत ने जंतर-मंतर पर कथित रूप से बैरिकेड पार करके प्रवेश करने और बिना अनुमति प्रदर्शन करने से जुड़े मामले में दोनों नेताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई करने को लेकर अनिच्छा जताए जाने के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। यह मामला जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद वहां कथित रूप से प्रवेश करने और शांति भंग की आशंका से जुड़ा है। सौरव दास और आशुतोष रंका 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट पर चढ़कर परिसर में प्रवेश किया था। इससे पहले दोनों नेताओं को 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर हिरासत में लिया गया था। ‘बैरिकेड का एक उद्देश्य होता है’: अदालत की टिप्पणी हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं के वकील अभिक चिमनी से कहा कि बैरिकेड किसी कारण से लगाए जाते हैं और उन्हें तोड़ने से स्थिति बिगड़ने की आशंका पैदा हो सकती है। अदालत ने विदेशों में हुई आगजनी और हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण उद्देश्य से होने का दावा किया जा सकता है, लेकिन यदि उसमें अनधिकृत लोगों की भागीदारी बढ़ जाए तो हालात बदल सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति लेने का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं है। इससे पुलिस को व्यवस्था बनाए रखने और ऐसे लोगों को रोकने में मदद मिलती है, जो प्रदर्शन में शामिल होकर स्थिति बिगाड़ सकते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने वकील से सवाल किया कि जब प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, तो बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने इस संदर्भ में यह भी पूछा कि क्या विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश पुनरीक्षण याचिका के जरिए चुनौती देने योग्य है। अदालत की ये टिप्पणियां फ्रांस सहित विदेशों में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आईं। हालांकि, सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों को मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। आरोपों और हिरासत से जुड़े विवाद पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय होना बाकी है। न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दी गई थी चुनौती सौरव दास और आशुतोष रंका ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई थी। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सार्वजनिक शांति और सुरक्षा से संबंधित चिंताओं का हवाला देते हुए हिरासत बढ़ाने का फैसला किया था। रिपोर्ट के अनुसार, आदेश में यह भी कहा गया था कि निर्धारित प्रदर्शन स्थल से जुड़े प्रतिबंधों के बावजूद बार-बार प्रदर्शन का आह्वान करना कानून के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। दिल्ली पुलिस ने भी यह दलील दी थी कि दोनों नेताओं की रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था के लिए तत्काल खतरा पैदा हो सकता है। बुधवार की सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं के वकील ने पुलिस की इस दलील पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि पुलिस ने ऐसा कौन-सा नया तथ्य या सामग्री पेश की है, जिसके आधार पर भविष्य में तत्काल खतरे की आशंका जताई गई और हिरासत बढ़ाने की जरूरत बताई गई। इस प्रकार, विवाद का एक प्रमुख पहलू यह है कि हिरासत बढ़ाने के लिए पेश किए गए आधार कितने पर्याप्त हैं और क्या संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। जमानत बांड और BNSS की प्रक्रिया पर भी सवाल सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जमानत बांड से संबंधित प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। अदालत ने वकील से पूछा कि जब किसी व्यक्ति के जमानत बांड स्वीकार किए जा चुके हों और बाद में उनके उल्लंघन का आरोप लगे, तो कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का उल्लेख करते हुए कहा कि जमानत बांड के उल्लंघन की स्थिति में निर्धारित कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, इन उपायों में जमानतदार की जमानत राशि जब्त करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। उसने यह सवाल भी उठाया कि संबंधित प्रक्रिया अपनाने के बजाय दोनों नेताओं को नया नोटिस क्यों दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रंका ने 11 अक्टूबर को जमानत बांड जमा किए थे। उसी दिन जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित रखने की व्यवस्था समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद दोनों को फिर से हिरासत में लिया गया। हाईकोर्ट ने इस घटनाक्रम के संदर्भ में पूछा कि जमानत बांड के कथित उल्लंघन पर BNSS के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से उठाए गए सवालों को अंतिम आदेश या किसी पक्ष के पक्ष में दिए गए निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 10 अक्टूबर को हवाई अड्डे पर हुई थी हिरासत मामले की शुरुआत 10 अक्टूबर को हुई घटनाओं से जुड़ी है। उस दिन सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उनके खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके बाद दोनों ने 50,000 रुपये के जमानत बांड जमा किए थे। 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इस फैसले को अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इसके बाद दोनों नेताओं पर आरोप लगा कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट पर चढ़कर वहां प्रवेश किया और प्रदर्शन किया। इसी घटनाक्रम के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में लिया गया। पुलिस की ओर से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका जताई गई, जबकि बचाव पक्ष ने इस आशंका के समर्थन में पर्याप्त सामग्री पेश किए जाने पर सवाल उठाए। अदालत ने उम्र को लेकर भी की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका की उम्र के बारे में भी पूछा। उनके वकील अभिक चिमनी ने बताया कि सौरव दास की उम्र 27 वर्ष और आशुतोष रंका की उम्र 32 वर्ष है। इसके बाद अदालत ने जेनरेशन Z को लेकर टिप्पणी की। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत को बताया गया था कि जेनरेशन Z में 1997 के बाद जन्म लेने वाले लोग शामिल होते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि दोनों नेताओं को इस परिभाषा के अनुसार जेनरेशन Z का हिस्सा नहीं माना जाएगा। यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान हुई बातचीत का हिस्सा थी। मामले का मुख्य कानूनी मुद्दा दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत, कथित जमानत बांड उल्लंघन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ी परिस्थितियां बनी रहीं। याचिका वापस लेने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि संबंधित आदेश को चुनौती देने के लिए पहले निचली अदालत में पुनरीक्षण का विकल्प अपनाने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने बचाव पक्ष से यह भी पूछा कि कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण को अपनाने से पहले हाईकोर्ट में चुनौती देने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रंका ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली। इस घटनाक्रम का अर्थ यह नहीं है कि हिरासत से जुड़े सभी विवाद समाप्त हो गए हैं। मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं, यह संबंधित पक्षों के निर्णय और अदालतों में उपलब्ध कानूनी उपायों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस मामले में दो प्रमुख प्रश्न सामने हैं। पहला, क्या हिरासत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक शांति को लेकर जताई गई आशंका पर्याप्त आधारों पर आधारित थी? दूसरा, कथित जमानत बांड उल्लंघन के मामले में क्या BNSS के तहत निर्धारित प्रक्रिया का सही ढंग से पालन किया गया? इन प्रश्नों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश, डोनाल्ड ट्रंप बोले- पिछली डीलों से बिल्कुल अलग होगा समझौता

    Yugcharan News / 21-10-2026 भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच समझौता होने की संभावना मजबूत है, लेकिन यह वाशिंगटन द्वारा पहले किए गए व्यापार समझौतों से काफी अलग होगा। हालांकि, ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते की शर्तों, संभावित समयसीमा या उन क्षेत्रों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी, जिनमें दोनों पक्षों के बीच सहमति बननी बाकी है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब नई दिल्ली और वाशिंगटन एक वर्ष से अधिक समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लगातार चर्चा जारी है। इस बीच अमेरिका की टैरिफ नीति में हुए बदलावों ने भी बातचीत के समीकरणों को प्रभावित किया है। ऐसे में दोनों सरकारों के सामने ऐसा समझौता तैयार करने की चुनौती है, जो उनके आर्थिक और रणनीतिक हितों के अनुरूप हो। ओवल ऑफिस में ट्रंप ने क्या कहा? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते की प्रगति पर सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भारत समझौता करना चाहता है और दोनों देश इसे लेकर आगे बढ़ रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ होने वाला समझौता अमेरिका के पिछले व्यापार समझौतों से काफी अलग तरह का होगा। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्तावित डील की संरचना किस प्रकार अलग होगी या उसमें किन विशेष प्रावधानों को शामिल किया जा सकता है। ट्रंप की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन केवल इस बयान के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि समझौते की सभी शर्तों पर अंतिम सहमति बन चुकी है। व्यापार वार्ताओं में कई बार व्यापक सहमति बनने के बाद भी शुल्क, बाजार तक पहुंच, उत्पादों के आयात-निर्यात और अन्य आर्थिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा जारी रहती है। इसलिए समझौते की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए दोनों देशों की ओर से आने वाली आधिकारिक घोषणाओं और अंतिम शर्तों का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा। मार्को रुबियो के भारत दौरे के बीच अहम संकेत भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को लेकर ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं। रुबियो ने संकेत दिया है कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले कुछ मुद्दों का समाधान किया जाना बाकी है। उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत केवल व्यापक राजनीतिक सहमति तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उन विषयों पर भी काम किया जा रहा है, जिन पर अंतिम निर्णय आवश्यक है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन लंबित मुद्दों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। रुबियो का भारत दौरा दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार के अलावा ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई विषय शामिल हैं। ऐसे में उच्चस्तरीय बातचीत से दोनों पक्षों को विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करने और सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है। फिर भी, व्यापार समझौते के संदर्भ में यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का भारत दौरा या बातचीत में प्रगति का संकेत अपने आप में समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं करता। अंतिम स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब दोनों सरकारें समझौते की शर्तों और उसके लागू होने की प्रक्रिया की औपचारिक जानकारी देंगी। अमेरिकी टैरिफ नीति ने बातचीत को बनाया महत्वपूर्ण भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिकी टैरिफ नीति भी एक प्रमुख कारक रही है। आयात शुल्क किसी देश के बाजार में विदेशी उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करते हैं। यदि किसी उत्पाद पर अधिक शुल्क लगाया जाता है, तो दूसरे देश से आने वाले उस उत्पाद की लागत बढ़ सकती है। इसके विपरीत, शुल्क में कमी से व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना पैदा होती है। भारत और अमेरिका जैसे बड़े आर्थिक साझेदारों के बीच व्यापार समझौते में शुल्क से जुड़े प्रावधानों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों की बाजार संबंधी अपेक्षाएं अलग-अलग हो सकती हैं। एक पक्ष अपने उत्पादों के लिए दूसरे देश के बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष घरेलू उद्योगों और उत्पादकों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे सकता है। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी व्यापार समझौते का उद्देश्य केवल आयात शुल्क कम करना नहीं होता। इसमें बाजार तक पहुंच, व्यापारिक नियमों, उद्योगों के हितों और आर्थिक सहयोग की व्यापक शर्तों पर भी सहमति बनानी पड़ सकती है। हालांकि, ट्रंप ने अपने ताजा बयान में यह नहीं बताया कि अमेरिकी टैरिफ में संभावित बदलाव भारत के साथ प्रस्तावित समझौते का कितना बड़ा हिस्सा होंगे। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि समझौते के बाद किन भारतीय उत्पादों या अमेरिकी वस्तुओं को विशेष लाभ मिलेगा। भारत और अमेरिका के लिए क्यों अहम है यह समझौता? भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार है, जबकि भारत में अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अवसर मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौता होने से कारोबारियों को नियमों और शुल्क से जुड़ी स्पष्टता मिल सकती है। इससे कंपनियों को अपने उत्पादन, निवेश और आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित दीर्घकालिक निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसे लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि अंतिम समझौते में किन क्षेत्रों को शामिल किया जाता है और उसकी शर्तें किस प्रकार लागू होती हैं। भारत के लिए अमेरिका के बाजार में बेहतर पहुंच निर्यात से जुड़े कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं, अमेरिकी कंपनियां भी भारतीय बाजार में अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए अधिक अवसर तलाश सकती हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से निवेश और कारोबारी संपर्कों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। लेकिन व्यापार समझौते के लाभों का समान रूप से सभी क्षेत्रों तक पहुंचना निश्चित नहीं होता। अलग-अलग उद्योगों पर शुल्क में बदलाव और बाजार खोलने की शर्तों का प्रभाव अलग हो सकता है। इसी कारण अंतिम समझौते के प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा। क्या समझौता जल्द हो जाएगा? डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बातचीत को लेकर सकारात्मक माहौल का संकेत मिलता है। उनका यह कहना कि दोनों देश समझौते के करीब हैं, इस दिशा में प्रगति की ओर इशारा करता है। मार्को रुबियो की ओर से कुछ मुद्दे लंबित होने की बात भी यह दर्शाती है कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, किसी समझौते को अंतिम रूप देने में राजनीतिक सहमति के साथ-साथ तकनीकी और आर्थिक विवरणों पर सहमति भी आवश्यक होती है। दोनों देशों को यह तय करना होगा कि अंतिम शर्तें उनके घरेलू उद्योगों, व्यापारिक हितों और व्यापक आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप हैं या नहीं। ट्रंप ने समझौते को पिछली डीलों से अलग बताया है, लेकिन इस अंतर का स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी सामने नहीं आया है कि समझौते में किन विशेष क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी या इसके लागू होने के लिए क्या समयसीमा निर्धारित की जा सकती है। फिलहाल, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्षों के बयानों से आगे बढ़ने की इच्छा दिखाई देती है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि लंबित मुद्दों पर सहमति कब बनती है और क्या दोनों देश निकट भविष्य में समझौते की औपचारिक घोषणा कर पाते हैं। तब तक ट्रंप का बयान वार्ता में प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेत है, न कि समझौते के अंतिम रूप से पूरा होने की आधिकारिक पुष्टि।

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने विदेशों में बसने की तैयारी कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों पर उठाए सवाल, पूछा- क्या उनकी निष्ठा पाकिस्तान के प्रति है?

    Yugcharan News / 21-10-2026 पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश की नौकरशाही के वरिष्ठ अधिकारियों की विदेशों में स्थायी रूप से बसने की कथित योजनाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि सरकारी पदों पर रहते हुए विदेश में निवास की व्यवस्था करने वाले अधिकारी पाकिस्तान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितने प्रतिबद्ध हैं। आसिफ के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों में बसने की प्रवृत्ति देखने को मिली है, जबकि पुर्तगाल भी कुछ अधिकारियों के लिए पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि क्या ऐसे अधिकारी देश की सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं या सरकारी सेवा को विदेश में बसने से पहले का एक अस्थायी पड़ाव मानते हैं। हालांकि, अधिकारियों की संख्या, उनकी पहचान और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। वरिष्ठ नौकरशाहों के विदेश में बसने पर चिंता ख्वाजा आसिफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान के कई सरकारी अधिकारी पिछले वर्षों में कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों को अपना स्थायी निवास बनाने की तैयारी करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों ने सरकारी सेवा में रहते हुए ही विदेश जाने की योजनाएं बनाई थीं और इस दौरान वे पाकिस्तानी सरकार से वेतन भी प्राप्त कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने इस प्रवृत्ति को प्रशासनिक जवाबदेही और देश के प्रति प्रतिबद्धता के नजरिए से महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों को सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में उनके विदेश में स्थायी रूप से बसने की योजनाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, विदेश में निवास की योजना बनाना अपने आप में किसी अधिकारी की गैरकानूनी गतिविधि या देश के प्रति बेवफाई का प्रमाण नहीं है। किसी अधिकारी के आचरण का मूल्यांकन संबंधित सेवा नियमों, सरकारी दायित्वों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। आसिफ की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब पाकिस्तान की आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में इस कथित प्रवृत्ति के आर्थिक प्रभाव या इसके व्यापक स्तर को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है। पुर्तगाल को बताया अधिकारियों का पसंदीदा गंतव्य पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि पुर्तगाल हाल के वर्षों में विदेश में बसने की इच्छा रखने वाले कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच लोकप्रिय विकल्प बन गया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह कुछ महीने पहले भी सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मामला चर्चा में बना हुआ है। आसिफ के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर सरकारी सेवा के दौरान ही विदेश में स्थायी निवास प्राप्त करने की व्यवस्था की। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारी अपने भविष्य की योजना किस तरह बना रहे हैं और क्या इससे उनकी सरकारी जिम्मेदारियों पर कोई असर पड़ता है। हालांकि, पुर्तगाल को अधिकारियों का पसंदीदा गंतव्य बताए जाने के समर्थन में पोस्ट में विस्तृत आंकड़े या आधिकारिक दस्तावेजों का उल्लेख नहीं किया गया। इसलिए इस दावे को रक्षा मंत्री के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। विदेश में स्थायी निवास प्राप्त करने के लिए अलग-अलग देशों में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाएं और पात्रता शर्तें होती हैं। किसी अधिकारी द्वारा ऐसी प्रक्रिया अपनाए जाने से उसके सरकारी कर्तव्यों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह संबंधित नियमों और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष समर्थन मिलने का दावा ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि इस मामले से जुड़े कुछ अधिकारियों को अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में विशेष समर्थन मिला था। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के नाम इस मुद्दे के संदर्भ में सामने आए हैं, उनमें से कुछ अब भी प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। रक्षा मंत्री की टिप्पणियों से यह सवाल सामने आता है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की विदेश में बसने की योजनाओं की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं और यदि थी, तो क्या इस विषय पर कोई प्रशासनिक समीक्षा की गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित अधिकारियों के नाम, उनके पदों, उनके विरुद्ध किसी औपचारिक जांच या किसी सरकारी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण नहीं है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है या सरकार ने उन्हें किसी विशेष उद्देश्य से संरक्षण दिया था। सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सेवा नियमों, हितों के टकराव से संबंधित प्रावधानों और आधिकारिक जिम्मेदारियों का पालन महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध नियमों के उल्लंघन का आरोप है, तो उसकी जांच तथ्यों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर की जानी चाहिए। पुर्तगाल में स्थायी निवास दिलाने वाले व्यक्ति पर भी आरोप आसिफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक ऐसे व्यक्ति का भी उल्लेख किया, जिसने कथित तौर पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पुर्तगाल में स्थायी निवास की व्यवस्था करने में सहायता की थी। रक्षा मंत्री का दावा है कि इस व्यक्ति ने कई प्रभावशाली नौकरशाहों से बड़ी रकम एकत्र की और बाद में पाकिस्तान छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़ी कई चिंताजनक बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उस व्यक्ति की पहचान, कथित रूप से एकत्र की गई रकम, लेन-देन के दस्तावेज या किसी जांच एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज हुई है या कोई जांच शुरू की गई है। इसलिए इन आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। यदि धन लेने, धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि के आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का निर्धारण साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जा सकता है। मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कथित भुगतान, निवास संबंधी आवेदन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पुष्टि करने वाले दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में ऐसे दस्तावेजों का विवरण नहीं है। ईमानदार अधिकारियों की भूमिका को भी स्वीकार किया रक्षा मंत्री ने अपनी टिप्पणी में पाकिस्तान की पूरी नौकरशाही को एक ही श्रेणी में रखने से परहेज करते हुए कहा कि देश में कई सक्षम और ईमानदार अधिकारी भी हैं। हालांकि, उन्होंने उन अधिकारियों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया, जो महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर रहते हुए विदेश में स्थायी रूप से बसने की तैयारी करते हैं। आसिफ ने पूछा कि जिन अधिकारियों को देश की ओर से सम्मान, अवसर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं, क्या वे अपने पूरे करियर के दौरान पाकिस्तान की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुछ अधिकारी राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन से प्रभावशाली पदों तक पहुंचे हैं और उन्हें संपत्ति अर्जित करने के अवसर मिले हैं, तो वे सरकारी सेवा में रहते हुए विदेश में बसने की तैयारी क्यों कर रहे हैं। इन टिप्पणियों के जरिए रक्षा मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों की निष्ठा और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को लेकर बहस शुरू की है। हालांकि, किसी व्यक्ति की निष्ठा का निर्धारण केवल विदेश में निवास की योजना के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसके आचरण, सरकारी दायित्वों और लागू नियमों के पालन जैसे पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है। पाकिस्तान की नौकरशाही और जवाबदेही पर बहस ख्वाजा आसिफ के बयान ने सरकारी सेवा में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। नौकरशाही किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा होती है। सरकारी नीतियों को लागू करने, सार्वजनिक संसाधनों का प्रबंधन करने और नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध कराने में अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और संभावित हितों के टकराव से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसी अधिकारी ने विदेश में बसने की योजना बनाई है, तो उससे जुड़े प्रशासनिक प्रश्नों का उत्तर संबंधित सेवा नियमों और परिस्थितियों के आधार पर दिया जाना चाहिए। इसी तरह, यदि किसी व्यक्ति पर अधिकारियों से पैसे लेकर विदेश में निवास दिलाने का दावा किया गया है, तो उसकी जांच के लिए विश्वसनीय साक्ष्य और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, रक्षा मंत्री के बयान के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है और वरिष्ठ अधिकारियों की देश के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध सामग्री में किसी व्यापक आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान के अंत में सवाल किया कि क्या विदेश में स्थायी रूप से बसने की तैयारी कर रहे अधिकारियों की पाकिस्तान के प्रति निष्ठा पर भरोसा किया जा सकता है या वे सरकारी सेवा को विदेश जाने से पहले का अस्थायी पड़ाव मान रहे हैं। यह टिप्पणी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है। हालांकि, मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों की पहचान, उनके निवास संबंधी आवेदन, कथित वित्तीय लेन-देन और सेवा नियमों के अनुपालन से जुड़ी जानकारी आवश्यक होगी। यदि सरकार इस मामले में जांच या समीक्षा शुरू करती है, तो उसके निष्कर्षों से यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोप कितने सही हैं और क्या किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है। फिलहाल, पुर्तगाल में स्थायी निवास प्राप्त करने की कथित योजनाओं और संबंधित व्यक्ति द्वारा पैसे लिए जाने के दावे रक्षा मंत्री के आरोपों तक सीमित हैं। जब तक इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

    सलमान खान थे हमले के असली निशाने पर, सुरक्षा कड़ी होने के बाद टाइगर श्रॉफ को बनाया गया लक्ष्य: रिपोर्ट

    Yugcharan News / 21-10-2026 मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी के मामले में जांच के दौरान एक नया खुलासा सामने आया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि हमलावरों का शुरुआती निशाना अभिनेता सलमान खान थे, लेकिन उनके घर के बाहर कड़ी सुरक्षा देखकर आरोपियों ने अपनी योजना बदल दी। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाया। रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा नरसी ग्राउंड से निकलते समय टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इस हमले के पीछे की साजिश, हथियारों के स्रोत और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, सलमान खान को शुरुआती निशाना बनाए जाने से संबंधित जानकारी फिलहाल जांच से जुड़े सूत्रों के दावों पर आधारित है। सलमान खान के घर की रेकी करने का दावा रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से पहले आरोपियों ने सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट्स आवास की कथित तौर पर रेकी की थी। सूत्रों का दावा है कि घर के बाहर भारी पुलिस सुरक्षा देखकर हमलावरों को लगा कि वहां हमला करना मुश्किल होगा। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर दूसरे ऐसे फिल्मी सितारों को निशाना बनाने की योजना बनाई, जिनकी सुरक्षा अपेक्षाकृत कम थी। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी मुंबई पहुंचने के बाद आम नागरिकों की तरह शहर में घूमते रहे। उन्होंने कथित तौर पर ऑटो-रिक्शा और मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करते हुए कई इलाकों की जानकारी जुटाई। रिपोर्ट में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे अभिनेताओं के घरों के आसपास रेकी किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, इन गतिविधियों और कथित साजिश से संबंधित सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है। इसलिए इन्हें जांच से जुड़े सूत्रों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर रखी जा रही थी नजर NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ और उनके प्रशंसकों के इंस्टाग्राम अकाउंट पर उपलब्ध पोस्ट तथा वीडियो पर नजर रखी। सूत्रों का दावा है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री के माध्यम से अभिनेता की गतिविधियों और उनके आने-जाने की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। जांच से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, आरोपियों को कथित तौर पर पता चला कि टाइगर श्रॉफ जुहू के पुष्पा नरसी ग्राउंड में नियमित रूप से फुटबॉल खेलने आते हैं। रिपोर्ट में एक ऑटो-रिक्शा चालक से मिली जानकारी का भी उल्लेख किया गया है, जिसने कथित तौर पर अभिनेता की साप्ताहिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी थी। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों का उद्देश्य बॉलीवुड में भय का माहौल पैदा करना था। हालांकि, इस कथित उद्देश्य और सोशल मीडिया के माध्यम से निगरानी किए जाने के दावों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्षों से ही हो सकेगी। रविवार शाम करीब सात बजे हुई गोलीबारी रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ जुहू स्थित पुष्पा नरसी ग्राउंड से निकल रहे थे। इसी दौरान दो लोगों ने उनकी कार को निशाना बनाकर गोलीबारी की। तीसरा कथित सहयोगी कुछ दूरी पर मोटरसाइकिल के साथ मौजूद था। NDTV की खबर में दावा किया गया है कि हमलावरों ने सात राउंड गोलियां चलाईं और इसके बाद मोटरसाइकिल से मौके से फरार हो गए। भागने के दौरान उन्होंने कथित तौर पर बाइक को अंधेरी पश्चिम रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया और फिर ट्रेन से जयपुर की ओर रवाना हो गए। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने जांच तेज की। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपियों को सोमवार को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हृतिक उर्फ रोशन, उम्र 22 वर्ष, निवासी बेगूसराय, बिहार; रेहान, उम्र 18 वर्ष, निवासी सोनीपत, हरियाणा; और फूल सिंह, उम्र 18 वर्ष, हरियाणा के निवासी के रूप में बताई गई है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे मुंबई किसी अन्य बड़े व्यक्ति की हत्या के इरादे से पहुंचे थे। इसी पूछताछ के आधार पर सलमान खान को शुरुआती निशाना बनाए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। हमले से पहले भी इलाके में पहुंचे थे आरोपी रिपोर्ट में घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा गया है कि आरोपी कथित हमले से लगभग 20 दिन पहले मुंबई पहुंचे थे। पुलिस से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, वे 11 अक्टूबर को भी जुहू के फुटबॉल ग्राउंड पहुंचे थे, लेकिन उस दिन टाइगर श्रॉफ वहां नहीं आए। सूत्रों का अनुमान है कि आरोपियों की यह यात्रा रेकी का हिस्सा हो सकती थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों को कथित तौर पर हथियार 17 अक्टूबर को मिले थे, यानी घटना से लगभग एक सप्ताह पहले। इसके बाद रविवार शाम को गोलीबारी की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, आरोपियों को निर्देश किसने दिए और कथित साजिश में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना में विदेशी निर्मित और देश में बने पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था। आरोपियों को विदेशी हथियार के मॉडल और उसकी तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी नहीं थी। गोलीबारी के बाद दोनों हथियारों को कथित तौर पर किसी अज्ञात स्थान पर छोड़ दिया गया। मुंबई पुलिस उन्हें बरामद करने का प्रयास कर रही है। सलमान खान की सुरक्षा बढ़ाई गई टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के बाद सलमान खान की सुरक्षा और कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अभिनेता की सुरक्षा में मुंबई पुलिस के साथ विशेष कमांडो भी तैनात किए गए हैं। NDTV की खबर में बताया गया है कि सुरक्षा कर्मियों को जर्मन कंपनी हेकलर एंड कोच द्वारा निर्मित MP5 SD6 सबमशीन गन से लैस किया गया है। यह हथियार 9×19 मिमी पैरबेलम कारतूस का इस्तेमाल करता है और इसमें एकीकृत सप्रेसर लगा होता है। इस तरह के हथियार का उपयोग सुरक्षा अभियानों में किया जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष हथियार की तैनाती से संबंधित विवरण रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। सलमान खान की सुरक्षा पहले भी उनके खिलाफ सामने आई धमकियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण चर्चा में रही है। ताजा घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों का उद्देश्य अभिनेता की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सहयोगी ने ली जिम्मेदारी NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिसमें अनिल पंडित नाम के व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई जैसा बताया और हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। रिपोर्ट में ऑडियो क्लिप के हवाले से बताया गया है कि वक्ता ने हरमन संधू और स्वयं का नाम लेते हुए घटना की जिम्मेदारी लेने की बात कही। उसने कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ को चेतावनी दिए जाने और सलमान खान से जुड़े लोगों को धमकाने की बात भी कही। ऑडियो में कथित रूप से फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को धमकी दी गई थी। हालांकि, किसी व्यक्ति या गिरोह द्वारा जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में उसकी संलिप्तता का निर्णायक प्रमाण नहीं होता। पुलिस को ऑडियो की प्रामाणिकता, उसे जारी करने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना से उसके संबंध की जांच करनी होगी। जांच में साजिश और अन्य सहयोगियों की भूमिका अहम इस मामले में अब पुलिस की जांच केवल गोलीबारी करने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं है। यह भी महत्वपूर्ण है कि क्या हमले की योजना पहले से बनाई गई थी, क्या किसी ने आरोपियों को हथियार या जानकारी उपलब्ध कराई और क्या अन्य व्यक्तियों ने कथित साजिश में सहायता की। सलमान खान को शुरुआती निशाना बनाए जाने और बाद में टाइगर श्रॉफ को लक्ष्य बनाने संबंधी दावों ने मामले को नया आयाम दिया है। यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों ने कथित तौर पर किन परिस्थितियों में अपना लक्ष्य बदला और घटना के पीछे उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। फिलहाल, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस हथियारों की बरामदगी, डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित सहयोगियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद, मार्को रुबियो ने ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

    Yugcharan News / 21-10-2026 भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि दोनों देश समझौते के करीब पहुंच सकते हैं। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई व्यापक वार्ता के दौरान ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। रुबियो ने भारत से अमेरिका से ऊर्जा की खरीद बढ़ाने और अमेरिकी रक्षा तकनीकों तथा प्रणालियों की खरीद को विस्तार देने का आग्रह किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब व्यापार नीतियों और आव्रजन नियमों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव बना हुआ है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द पूरा करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मुंबई में जयशंकर और रुबियो के बीच व्यापक बातचीत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत की यात्रा पर मुंबई पहुंचे, जहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनके साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। यह पांच महीने से भी कम समय में रुबियो की भारत की दूसरी यात्रा बताई गई है। बैठक का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर विचार करना था। वार्ता में ऊर्जा व्यापार, रक्षा सहयोग और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहे। भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा की भी अहम भूमिका है। दोनों देश लंबे समय से व्यापारिक साझेदारी को व्यापक बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, व्यापार से संबंधित अमेरिकी नीतियों और आव्रजन नियमों को लेकर पैदा हुई चुनौतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में कुछ जटिलताएं भी उत्पन्न की हैं। ऐसे माहौल में रुबियो की यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर आगे बढ़ने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत में प्रगति भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए बेहतर आधार तैयार करना है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने समझौते पर जारी बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने वार्ता को आगे बढ़ाते हुए समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में समझौते पर हस्ताक्षर की कोई निश्चित तारीख या सभी लंबित मुद्दों के समाधान की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए समझौते के करीब पहुंचने के संकेतों को बातचीत में प्रगति के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि समझौता अंतिम रूप से संपन्न होने की घोषणा के रूप में। व्यापार समझौते पर आगे की बातचीत में दोनों देशों के आर्थिक हित, बाजार तक पहुंच और व्यापारिक नीतियों से संबंधित मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। किसी भी अंतिम समझौते का वास्तविक प्रभाव उसके विस्तृत प्रावधानों, लागू होने की शर्तों और दोनों पक्षों द्वारा किए जाने वाले कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा। अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने का आग्रह बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने भारत से अमेरिका से ऊर्जा की खरीद बढ़ाने का आग्रह किया। ऊर्जा व्यापार भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करनी होती है। अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को विस्तार देने की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, भारत की ऊर्जा खरीद से जुड़े निर्णयों में कीमत, आपूर्ति की उपलब्धता, परिवहन लागत और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना भी अहम है, ताकि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके। ऐसे में अमेरिका से खरीद बढ़ाने के आग्रह पर आगे होने वाली चर्चा को भारत की व्यापक ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के संदर्भ में देखना होगा। बैठक में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया, लेकिन उपलब्ध जानकारी में किसी नए ऊर्जा खरीद समझौते, निश्चित आयात लक्ष्य या अतिरिक्त खरीद की मात्रा की घोषणा नहीं की गई। रक्षा तकनीक और अमेरिकी प्रणालियों की खरीद पर जोर ऊर्जा के अलावा रक्षा सहयोग भी रुबियो और जयशंकर के बीच चर्चा का प्रमुख विषय रहा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत से अमेरिकी रक्षा तकनीकों और प्रणालियों की खरीद बढ़ाने का आग्रह किया। भारत और अमेरिका के बीच पिछले वर्षों में रक्षा सहयोग का महत्व बढ़ा है। दोनों देश रक्षा उपकरणों, सैन्य तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर काम करते रहे हैं। अमेरिकी रक्षा तकनीकों की खरीद बढ़ाने से दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, भारत के रक्षा संबंधी फैसले केवल खरीद की लागत तक सीमित नहीं होते। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतें, तकनीकी क्षमताएं, उपकरणों का रखरखाव, आपूर्ति की निरंतरता और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे पहलू भी शामिल होते हैं। इसलिए रुबियो का आग्रह दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार को विस्तार देने की अमेरिकी इच्छा को दर्शाता है। लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि भारत ने किसी विशेष अमेरिकी रक्षा प्रणाली की खरीद बढ़ाने का अंतिम निर्णय ले लिया है। व्यापार नीतियों और आव्रजन नियमों से संबंधों में तनाव भारत-अमेरिका वार्ता ऐसे समय में हुई, जब दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन की बदलती व्यापार नीतियों और आव्रजन नियमों को सख्त किए जाने से द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा हुआ है। व्यापार नीतियों में बदलाव का असर दोनों देशों के कारोबार, निवेश और निर्यातकों की योजनाओं पर पड़ सकता है। इसी तरह, आव्रजन नियमों में सख्ती का प्रभाव उन लोगों और व्यवसायों पर पड़ सकता है, जिनकी गतिविधियां दोनों देशों के बीच पेशेवर आवाजाही से जुड़ी हैं। भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों का दायरा व्यापक है। इसमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, तकनीकी सहयोग, निवेश, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में व्यापारिक मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रखना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। मुंबई में हुई बैठक से यह संकेत मिला कि मतभेदों के बीच भी दोनों पक्ष व्यापार समझौते और रणनीतिक सहयोग से जुड़े विषयों पर आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि, संबंधों में मौजूद सभी चुनौतियों के समाधान की पुष्टि अभी नहीं हुई है। आगे की दिशा पर रहेगी नजर मार्को रुबियो की भारत यात्रा और एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर जारी प्रयासों को नया महत्व मिला है। दोनों देशों ने वार्ता में प्रगति का स्वागत करते हुए समझौते को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अमेरिकी आग्रह भी बैठक का महत्वपूर्ण पहलू रहा। अमेरिका चाहता है कि भारत उसकी ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा तकनीकों के लिए अपनी खरीद बढ़ाए। दूसरी ओर, भारत को ऐसे किसी भी निर्णय में अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा। आने वाले समय में व्यापार समझौते की शर्तों, लंबित मुद्दों और संभावित समयसीमा को लेकर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी। इसी तरह, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में किसी ठोस निर्णय या नए समझौते की घोषणा से ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में सहयोग को किस स्तर तक आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल, विदेश मंत्रालय का बयान वार्ता में प्रगति और समझौते को जल्द पूरा करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। लेकिन अंतिम समझौते, अतिरिक्त ऊर्जा खरीद या किसी विशेष रक्षा प्रणाली की खरीद के संबंध में कोई निश्चित निर्णय उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

    दिल्ली हाईकोर्ट से CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने वापस ली याचिका, न्यायिक हिरासत को दी थी चुनौती

    Yugcharan News / 21-10-2026 दिल्ली हाईकोर्ट में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा 19 अक्टूबर को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ घोषित विरोध-प्रदर्शनों और दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा प्रदर्शन करने के कथित प्रयास से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध होने की बात कहते हुए याचिका पर सुनवाई जारी रखने को लेकर अनिच्छा जताई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील अभिक चिमनी ने निर्देश मिलने के बाद याचिका वापस ले ली। अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की। दोनों नेताओं की दो दिन की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। उन्हें इसी दिन आगे की कार्यवाही के लिए विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाना था। इस परिस्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि पहले मजिस्ट्रेट की अदालत में होने वाली कार्यवाही का परिणाम देखा जाए और उसके बाद कानून के तहत उचित कदम उठाया जाए। वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध होने पर अदालत ने उठाए सवाल सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन जहां कानून किसी मामले में विशिष्ट उपाय उपलब्ध कराता है, वहां उस प्रक्रिया पर भी विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि स्वतंत्रता पवित्र है, लेकिन यदि संबंधित कानून में पहले से ही राहत पाने का प्रावधान मौजूद है, तो उसका इस्तेमाल करने के प्रश्न पर विचार करना जरूरी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अभिक चिमनी ने 19 अक्टूबर के उस आदेश को रद्द करने की मांग की, जिसके तहत दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ाई गई थी। उन्होंने दलील दी कि मजिस्ट्रेट के आदेश में कथित रूप से तत्काल शांति भंग होने के खतरे के पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि यदि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश पुनरीक्षण यानी रिवीजन के माध्यम से चुनौती देने योग्य है, तो याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका क्यों दायर की है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि किसी रिट याचिका की विचारणीयता और उस पर सुनवाई किए जाने की उपयुक्तता दो अलग-अलग प्रश्न हैं। पीठ ने कहा कि रिट कार्यवाही में अदालत सामान्यतः निर्णय लेने की प्रक्रिया की वैधता की समीक्षा करती है, जबकि अपीलीय या पुनरीक्षण कार्यवाही में तथ्यों और आदेश की शुद्धता की जांच अलग तरीके से की जा सकती है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति बांड के कथित उल्लंघन का मामला यह पूरा मामला जंतर-मंतर पर प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन और शांति बनाए रखने के लिए पहले दिए गए बांड के कथित उल्लंघन से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं को 10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ घोषित विरोध-प्रदर्शनों से पहले हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 170 के तहत निवारक कार्रवाई की गई थी। उसी दिन उन्हें ₹50,000 के शांति बांड प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा कर दिया गया था। अधिकारियों का आरोप था कि दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने का आश्वासन देने के बावजूद 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा प्रदर्शन करने का प्रयास किया। इसके बाद उन्हें दोबारा हिरासत में लिया गया। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 19 अक्टूबर को मामले पर आगे विचार करते हुए हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप यह है कि उन्होंने पहले दिए गए बांड का उल्लंघन करते हुए उस स्थान पर जाने का प्रयास किया, जिसे विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचना से हटाए जाने के निर्णय को चुनौती देने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और संबंधित अधिसूचना पर रोक नहीं लगी है। हालांकि, इन टिप्पणियों के माध्यम से हाईकोर्ट ने आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया। याचिका वापस लिए जाने के कारण अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर जताई चिंता सुनवाई के दौरान पीठ ने प्रदर्शन के आयोजन, संभावित भीड़ और सार्वजनिक शांति बनाए रखने से संबंधित पहलुओं पर भी सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ा जाता है, तो अन्य लोगों के भी वहां शामिल होने की संभावना बढ़ सकती है। पीठ के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के उद्देश्य के बावजूद ऐसी परिस्थितियों में अनियंत्रित व्यक्तियों के शामिल होने और स्थिति बिगड़ने की आशंका पर विचार करना पड़ सकता है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि पुलिस से अनुमति लेने की प्रक्रिया का उद्देश्य केवल प्रदर्शन को रोकना नहीं, बल्कि अवांछित तत्वों की भागीदारी और संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना भी हो सकता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब किसी संगठन की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दे समय के साथ बदलते हैं, तो उसके सदस्यों की गतिविधियों और संबंधित परिस्थितियों का महत्व बढ़ जाता है। पीठ ने जुलाई में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए जेन-जी प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान मामले में आंदोलन का मुद्दा अलग बताया जा रहा है। अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका की उम्र का उल्लेख करते हुए पूछा कि उनकी गतिविधियों, संगठन और प्रदर्शन के उद्देश्य को किस संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे व्यापक प्रश्नों पर विचार करने के लिए उचित कानूनी कार्यवाही आवश्यक है। मौजूदा याचिका में मुख्य प्रश्न न्यायिक हिरासत बढ़ाने और बांड से संबंधित आदेश की वैधता का था। BNSS की धारा 135(3) पर भी हुई चर्चा सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभिक चिमनी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत की गई कार्रवाई के प्रभाव पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि केवल व्यक्तिगत शांति बांड के कथित उल्लंघन के आधार पर हिरासत को उचित नहीं ठहराया जा सकता, विशेषकर तब जब आदेश में तत्काल खतरे का पर्याप्त विवरण न दिया गया हो। BNSS के तहत शांति भंग होने या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका की स्थिति में मजिस्ट्रेट को निवारक कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए हैं। संबंधित प्रावधानों का उद्देश्य संभावित अव्यवस्था या अपराध को रोकना है। हालांकि, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की वैधता का निर्धारण मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना होता है। चिमनी ने दलील दी कि 19 अक्टूबर के आदेश में राज्य पक्ष की बात सुनने और आशंका होने का उल्लेख तो किया गया, लेकिन ऐसी कौन-सी तत्काल परिस्थिति थी जिसके कारण न्यायिक हिरासत आवश्यक हो गई, इसका पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या पहले दिए गए शांति बांड का कथित उल्लंघन अपने आप में तत्काल चिंता का कारण नहीं हो सकता। वकील ने जवाब में कहा कि दोनों याचिकाकर्ता आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार होना चाहिए। पीठ ने इसके जवाब में उल्लेख किया कि दोनों नेताओं ने 11 अक्टूबर को शांति बनाए रखने के लिए बांड दिया था और उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने बाद में उसका उल्लंघन किया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियां और किसी पक्ष की दलीलें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के समान नहीं होतीं। इस मामले में याचिका वापस लिए जाने के कारण हाईकोर्ट ने इन मुद्दों पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया। जमानतदारों की पात्रता पर भी उठा विवाद मामले में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उन जमानतदारों की स्वीकार्यता का भी था, जिन्हें दोनों नेताओं की रिहाई के लिए प्रस्तुत किया गया था। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, अदालत ने प्रस्तुत जमानतदारों को उपयुक्त नहीं पाया था। आदेश में जमानत संबंधी दस्तावेजों में लगी तस्वीरों और आधार कार्ड पर मौजूद तस्वीरों के बीच कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा, जमानतदारों से पूछताछ के दौरान मिले जवाबों को भी असंतोषजनक बताया गया था। अधिवक्ता चिमनी ने जमानतदारों को अस्वीकार करने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कार्रवाई मनमाने ढंग से की गई। उन्होंने व्यक्तिगत बांड पर रिहाई देने की मांग भी उठाई। वकील ने यह आशंका व्यक्त की कि यदि हाईकोर्ट में याचिका वापस लेने के बाद मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानतदारों को फिर अस्वीकार कर दिया जाता है, तो याचिकाकर्ताओं को राहत के लिए दोबारा अदालत का रुख करना पड़ेगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में उपलब्ध उपायों के तहत मामले को आगे बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या नए जमानतदार उसी दिन प्रस्तुत किए जा रहे हैं और जमानतदारों को अस्वीकार करने वाले आदेश को किस कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जा सकती है। पीठ ने निवारक हिरासत और निवारक निरोध के बीच अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि निवारक निरोध के मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका यानी हेबियस कॉर्पस का उपाय उपयुक्त हो सकता है, लेकिन दोनों प्रकार की कार्रवाई को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। आगे क्या होगा? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि दोनों नेताओं को पहले 21 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होने दिया जाए। वहां से मिलने वाली राहत या आदेश के आधार पर आगे की कानूनी रणनीति तय की जा सकती है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि मजिस्ट्रेट की अदालत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में राहत देती है, तो विवाद समाप्त हो सकता है। यदि राहत नहीं मिलती, तो वे कानून के तहत पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। अंततः अधिवक्ता अभिक चिमनी ने अपने मुवक्किलों के निर्देश पर याचिका वापस ले ली और हाईकोर्ट ने इसकी अनुमति दे दी। अदालत ने स्पष्ट रूप से मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की। इसलिए, याचिका वापस लिए जाने को दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत के आदेश के खिलाफ जीत या हार के रूप में नहीं देखा जा सकता। हिरासत, जमानतदारों की स्वीकार्यता और कथित शांति बांड उल्लंघन से जुड़े प्रश्नों पर आगे की स्थिति विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में होने वाली कार्यवाही तथा उपलब्ध कानूनी उपायों पर निर्भर करेगी।

    अग्रवाल पी.जी. कॉलेज में “Physics in Action: Where Theory Meets Thrills” विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित

    अग्रवाल पी.जी. कॉलेज, जयपुर के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा भौतिक विज्ञान के व्यावहारिक एवं रोचक पहलुओं से परिचित कराने के उद्देश्य से “Physics in Action: Where Theory Meets Thrills” विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नरेंद्र जाखड़ उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवेंदा एवं भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंकित कुमार गुप्ता ने पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति के अनुरूप अतिथि वक्ता डॉ. नरेंद्र जाखड़ का साफा पहनाकर एवं शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। व्याख्यान के दौरान डॉ. जाखड़ ने भौतिक विज्ञान के सैद्धांतिक सिद्धांतों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने दैनिक जीवन में भौतिक विज्ञान की उपयोगिता, आधुनिक तकनीक में इसकी भूमिका तथा विभिन्न वैज्ञानिक घटनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और प्रयोगों के माध्यम से विषय को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. एल. देवेंदा, विभागाध्यक्ष डॉ. अंकित कुमार गुप्ता, डॉ. उमेश कुमार सिंह एवं शुभम शर्मा सहित भौतिक विज्ञान विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस अतिथि व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की विषयगत समझ को सुदृढ़ करना, उनमें वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाना तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना था। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। अंत में अतिथि वक्ता डॉ. नरेंद्र जाखड़ के प्रति आभार व्यक्त किया गया।  

    जयपुर महानगर: 292 बस्तियों में संपन्न हुए विजयादशमी उत्सव, एकता का दिखा महासंगम

    पथ संचलनों में कदम से कदम मिले, दिखाई दी पूर्ण एकात्मता; करधनी नगर में राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस विजयादशमी के अवसर पर जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में विजयादशमी उत्सव पूर्ण उत्साह एवं अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। इन कार्यक्रमों में हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में सहभागिता किया। विभिन्न बस्तियों में शस्त्र पूजन, पथ संचलन एवं शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें समाजबंधुओं, मातृशक्ति एवं विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने भी सहभागिता की। जयपुर महानगर के विभिन्न नगरों एवं बस्तियों से शहर के अलग-अलग मार्गों एवं प्रमुख स्थानों से पथ संचलन निकाले गए। गालव नगर, पॉन्ड्रिक नगर, झोटवाड़ा, करधनी नगर, विद्याधर, मानसरोवर, जगतपुरा, पत्रकार कॉलोनी आदि जगहों पर स्वयंसेवकों ने घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अनुशासन, सामूहिकता एवं पूर्ण एकात्मता का परिचय दिया। एक लय, एक गति और एक दिशा में आगे बढ़ते स्वयंसेवकों के संचलन में संगठन की एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। विभिन्न मार्गों पर समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया। विभिन्न उत्सव स्थलों पर शस्त्र पूजन के साथ शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए। इनमें स्वयंसेवकों ने दंड, योग, आसन एवं अन्य शारीरिक कौशलों का प्रदर्शन किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक दक्षता, अनुशासन, सामूहिक समन्वय और संगठन भावना का परिचय दिया गया। विजयादशमी का सांस्कृतिक महत्त्व और राष्ट्र निर्माण का संदेश विजयादशमी उत्सव के अवसर पर आयोजित बौद्धिक सत्रों में विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य, संगठित समाज की आवश्यकता तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने विजयादशमी को शक्ति-उपासना, शस्त्र-पूजन एवं विजय का पर्व बताते हुए इसे दैवी शक्तियों की आसुरी प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक बताया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में संघ की स्थापना की थी। वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति-निर्माण से समाज-निर्माण और समाज-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण की संकल्पना साकार होती है। पथ संचलन इसी अनुशासित, संगठित एवं समर्पित समाज का परिचायक है। करधनी नगर के विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्रमुख रहा। अपने उद्बोधन में डॉ अग्रवाल ने विजयादशमी के सांस्कृतिक महत्त्व, संगठन की भूमिका तथा समाजजीवन में एकता, समरसता एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने के विषय को प्रमुखता दी। विभिन्न नगरों एवं बस्तियों में वक्ताओं ने रखा विचार जयपुर महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में अनेक पदाधिकारियों एवं वक्ताओं ने स्वयंसेवकों और समाजबंधुओं का मार्गदर्शन किया। मधुबन बस्ती में राजस्थान क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीकांत ने विचार रखे। विद्याधर नगर में जयपुर महानगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख अशोक गर्ग ने मार्गदर्शन किया। भगत सिंह बस्ती, सरदार पटेल नगर में नगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख रुबिन माथुर का बौद्धिक हुआ। कुंदनपुरा बस्ती में जयपुर महानगर सहकार्यवाह रूप सिंह तथा भांकरोटा बस्ती में सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार ने विचार रखे। विवेकानंद नगर में भाग सह बौद्धिक प्रमुख नरेश सिंह ने बौद्धिक प्रदान किया। गोविंद नगर, गालव भाग में जयपुर प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख दिनेश मणिरत्नम ने मार्गदर्शन किया। ज्योति नगर बस्ती में माननीय सह संघचालक डॉ मामराज गुप्ता ने विचार रखे। सरस्वती नगर की विभिन्न बस्तियों में माधव , राजकुमार जैन, दुर्गेश खंडेलवाल, शंकर बाबू, जिला प्रचारक सुभाष कुमार तथा राजेंद्र आर्य ने बौद्धिक प्रदान किया। विभिन्न कार्यक्रमों में स्थानीय पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों एवं समाजबंधुओं की सहभागिता रही। जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में आयोजित विजयादशमी उत्सवों ने अनुशासन, संगठन शक्ति, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को अभिव्यक्त किया। इन आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता, सहयोग, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रहित में सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया गया।  

    डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने बदली विद्यालय की सूरत

    गलता गेट के स्कूल का परिसर पूरा चमकाया जयपुर। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन मानवता भलाई की शिक्षाओं पर चलते हुए जयपुर की साध-संगत ने एक बार फिर समाज के सामने सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है। जयपुर टीम द्वारा गलता गेट, आदर्श नगर क्षेत्र में स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में बड़े स्तर पर 'स्वच्छता सेवा अभियान' चलाया गया। इस अभियान के तहत 20 से अधिक सेवादारों ने पूरे स्कूल परिसर की कायाकल्प कर दी।  प्रधानाचार्या से अनुमति लेकर खुद जुटाए संसाधन जानकारी के अनुसार, जब डेरा सच्चा सौदा के सेवादार इस राजकीय विद्यालय में पहुंचे, तो वहां परिसर में चारों तरफ गंदगी और झाड़-झंकड़ फैले हुए थे। सेवादारों ने महसूस किया कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, अच्छी शिक्षा और उनके मानसिक विकास के लिए एक स्वच्छ वातावरण का होना बेहद जरूरी है। गंदगी के बीच बच्चे न तो सही से पढ़ सकते हैं और न ही खेल सकते हैं। इसी पावन उद्देश्य को लेकर सेवादारों ने विद्यालय की प्रधानाचार्या सोनल सेजरा से सफाई की अनुमति लेकर अपने स्तर पर ही सफाई के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की। सेवादार स्वयं अपने साथ फावड़ा, तसला, पंजा, कुल्हाड़ी और कचरा लोड करने के लिए गाड़ियां आदि लेकर विद्यालय पहुंचे और कंटीली झाड़ियों और अनचाही घास को हटाया, वहीं सालों से जमा कूड़े-कचरे के ढेरों को साफ कर गाड़ियों में भरकर बाहर भिजवाया।   "सेवादारों के प्रयास से मिला स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण "हमारे विद्यालय परिसर को इतना स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाने के लिए मैं डेरा सच्चा सौदा के सभी सेवादारों का पूरे स्कूल प्रशासन, शिक्षकों और बच्चों की तरफ से हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ। एक साफ-सुथरा माहौल बच्चों की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद जरूरी है। जिस लगन, अनुशासन और निस्वार्थ भावना के साथ इन सेवादारों ने स्कूल के कोने-कोने की सफाई की है, वह वास्तव में अद्भुत और वंदनीय है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसां की पावन प्रेरणा से किए जा रहे ये मानवता भलाई के कार्य समाज के लिए एक बेहतरीन मिसाल हैं। बच्चों को किताबों से जो स्वच्छता का पाठ हम पढ़ाते हैं, सेवादारों ने उसे आज व्यावहारिक रूप में यहाँ कर के दिखाया है। इससे हमारे छात्र-छात्राओं को भी श्रमदान और सामाजिक सेवा की एक बहुत बड़ी सीख मिली है। इस सराहनीय प्रयास के लिए पूरी टीम साधुवाद की पात्र है।" सोनल सेजरा, प्रधानाचार्या   डेरा सेवादारों के अथक प्रयास बेहद सराहनीय "शिक्षा के मंदिर (स्कूल) को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने जो अथक प्रयास किया है, वह बेहद सराहनीय है। किसी भी समाज के निर्माण में स्वच्छता का बहुत बड़ा योगदान होता है और जब यह शुरुआत बच्चों के स्कूल से हो, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। सेवादारों ने जिस निस्वार्थ भावना और अनुशासन के साथ पूरे स्कूल परिसर का कायाकल्प किया है, वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। • नरेश नागर, पूर्व पार्षद  

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया JAGS शो के पोस्टर का विमोचन

    जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा जयपुर में आयोजित होने जा रहे JAGS (Jaipur Association Gemstone Show) के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजू अग्रवाल मंगोड़ीवाला ने मुख्यमंत्री एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को शो में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान JAGS के कन्वीनर श्री प्रकाश बेद, आशीष सिंघवी एवं शकूर लाली भी उपस्थित रहे। Secratary jewellery association ke ajay godha ने बताया कि JAGS भारत के प्रमुख रफ एवं कलर जेमस्टोन शो में से एक है, जिसका उद्देश्य जयपुर के रत्न उद्योग को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना, व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देना तथा देश-विदेश के खरीदारों और व्यापारियों को एक मंच पर लाना है। यह भव्य जेमस्टोन शो 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने जा रहा है। शो के माध्यम से जयपुर की रंगीन रत्नों की समृद्ध परंपरा, कारीगरी और व्यापारिक क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।  prakesh baid JAGS convenour ने कहा कि JAGS जयपुर के रत्न एवं आभूषण उद्योग की प्रगति, व्यापार विस्तार और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर इस आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

    साम्प्रदायिक सद्भाव एवं सामाजिक एकता दिवस पर समारोह पूर्वक मनायी, लोगों ने बढ़ चढ़ कर लिया भाग

    जयपुर। महाराव शेखाजी की 593वीं जयंति हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विजयादशमी मंगलवार को प्रातः 8 बजे से 9 बजे तक साम्प्रदायिक सद्भाव एवं सामाजिक एकता दिवस के रूप में श्री भवानी निकेतन पीजी महाविद्यालय सेमीनार हॉल (सीकर रोड) जयपुर पर समारोह पूर्वक मनायी गई। शेखावाटी के संस्थापक, इतिहास पुरुष, नारी सम्मान के रक्षार्थ प्राणोत्सर्ग करने वाले महाराव शेखाजी की जयंति पर सभी जाति-धर्म एवं सम्प्रदाय के प्रबुद्धजन, छात्र, छात्राएँ एवं आम नागरिकों ने पुष्पांजलि कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। कार्यक्रम का संचालन सम्पत सिंह धमोरा, सचिव, महाराव शेखा संस्थान ने करते हुए बताया कि इस अवसर पर विद्वानों द्वारा चर्चा एवं भजन गायिका सहायक प्रो0 गरिमा कुमावत द्वारा सर्वधर्म सम्भाव पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी। इनके साथ तबले पर संगत सुनिल सिंह तंवर ने दी। सर्वधर्म प्रार्थना में हाफिज मंजूर साहब, उपाध्यक्ष, जमियत उलेमा हिन्द राजस्थान ने कुरान के भाई-चारे का संदेश, फादर विजयपाल द्वारा बाईबिल के माध्यम से ईश्वर का संदेश, सहायक प्रो. गरिमा कुमावत ने गीता में वर्णित कर्म की महत्ता बताते हुए सनातन धर्म की व्याख्या, साम्प्रदायिक सद्भाव एवं सामाजिक एकता के क्रम में उद्बोधन दिया। महाराव शेखाजी का 12 वर्ष की अल्पायु में राजतिलक होने के पश्चात् 52 अजेय युद्ध लड़ते हुए 360 गांव के विशाल भू-भाग की स्थापना की, जो शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। महाराव शेखाजी की पहचान देश एवं प्रदेश में अजेय योद्धा के साथ-साथ धर्म सहिष्णु व्यक्तित्व, जातियों में आपसी प्रेम की अलख जगाने वाले तथा नारी के सम्मान के रक्षार्थ प्राणोत्सर्ग करने वाले महामानव के रूप है। वर्तमान में भी धर्म सहिष्णुता, जातिय प्रेम एवं नारी सम्मान आज भी पूरे विश्व में प्रासंगिक है। इस अवसर पर महाराव शेखा संस्थान के पूर्व अध्यक्ष एवं श्री भवानी निकेतन शिक्षा समिति के संरक्षक स्व0 श्री जालिम सिंह जी आसपुरा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में महावीरसिंह सरवड़ी, क्षत्रिय युवक संघ, महाराव शेखा संस्थान के जयपुर जिला अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जेरठी, श्री भवानी निकेतन शिक्षा समिति के नगेन्द्र सिंह बगड़ अध्यक्ष, महेन्द्रसिंह जैसलाण उपाध्यक्ष, सुदर्शन सिंह सुरपुरा सचिव, श्याम सिंह मंढा कोषाध्यक्ष, जनरल कॉउन्सिल सदस्य राजेन्द्र सिंह झाड़ली, शोभ सिंह आसपुरा एवं दहेज विरोधी क्षत्रिय महासंघ के अध्यक्ष गणपतसिंह राठौड, सुरेन्द्रसिंह ढंढार, राजेन्द्र सिंह शेखावत आर.ए.एस. (रिटा.), डॉ0 संजय सिंह, कैप्टन नरेन्द्र सिंह चिंचडोली, शिक्षण संस्थाओ ं के प्रि ंसीपल सहित जयपुर शहर के गणमान्य नागरिक, शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं एवम् सभी जाति समुदाय वर्ग के लोगो ं ने भाग लिया। इस अवसर पर ‘‘वैष्णव जन तो तेने कहीं ये’’ भजन की सुन्दर प्रस्तुती दी।