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    अक्षेंद्र वेलफेयर सोसायटी का विशाल परिंडा अभियान, पक्षियों और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

    भीषण गर्मी के इस दौर में जहाँ इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी और भोजन के अभाव में जीवन संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे समय में अक्षेंद्र वेलफेयर सोसायटी द्वारा एक सराहनीय एवं विशाल परिंडा अभियान का आयोजन पत्रिका गेट, जेएलएन मार्ग, जयपुर में किया गया। इस अभियान का उद्देश्य गर्मी से व्याकुल पक्षियों को पानी और दाना उपलब्ध कराना तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। कार्यक्रम में अक्षेंद्र वेलफेयर सोसायटी के 100 से अधिक वालंटियर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सेवा भावना का परिचय दिया। अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर 500 से अधिक परिंडे लगाए गए, जिनमें पक्षियों के लिए पानी और दाने की समुचित व्यवस्था की गई। साथ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान परिसर में स्थित मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं राहगीरों के लिए 10 पानी के मटके रखे गए, ताकि गर्मी में लोगों को शीतल जल उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम का शुभारंभ वालंटियर्स द्वारा प्रस्तुत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक से हुआ, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ और पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया गया। इस नाटक ने उपस्थित लोगों को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराया। इस अवसर पर रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन एवं अक्षेंद्र वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष बी. एस. रावत ने कहा कि समाज सेवा केवल एक दायित्व नहीं बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि पक्षियों के लिए एक परिंडा लगाना जीवन बचाने जैसा पुण्य कार्य है और हर व्यक्ति को इसमें अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा नेता डॉ. अखिल शुक्ला, समाजसेवी भाजपा जयपुर जिला आईटी संयोजक राजेश गौतम, गढ़वाल सभा के उपाध्यक्ष बुद्धि प्रसाद सती सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया और इस अभियान की सराहना की। सोसायटी के सचिव एवं रावत एजुकेशनल ग्रुप के निदेशक नरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सोसायटी द्वारा प्रतिवर्ष परिंडा अभियान चलाया जाता है तथा विभिन्न समाज सेवा कार्यों जैसे अन्नदान, वस्त्रदान, सेवा कार्य एवं दानोत्सव का आयोजन निरंतर किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियान समाज में संवेदनशीलता और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं।अब तक 30,000 परिंडे लगाए जा चुके हैं एवम भविष्य में इसे और व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की योजना है। सोसायटी की कोषाध्यक्ष डॉ. अक्षिता रावत ने सभी वालंटियर्स को समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत प्रयास करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर रावत कॉलेज की निदेशक कल्पना रावत, दिनेश विष्ट, रवि बिष्ट, दीपक बोहरा,वीरेंद्र ,राकेश चौहान सहित सोसायटी के कार्यकर्ता अमित शर्मा, कन्हैया लाल भूरानी, मधु भूरानी, सोमेंद्र शर्मा ,अंजली ज्ञानानी,धर्मेंद्र ज्ञानानि ,राखी चौधरी,यशपाल सिंह एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला विधिक प्राधिकरण का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं पक्षियों की सुरक्षा हेतु संकल्प लिया। अंत में रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर की प्राचार्या मैत्रेयी शुक्ला एवं एकेडमिक हेड राजेश कंथारिया ने सभी अतिथियों, वालंटियर्स एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह अभियान केवल परिंडे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश देने में सफल रहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है।

    नीट परीक्षा के लिए आॅल स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी ने लगाए शहर में लगाए 50 से अधिक सेवा केन्द्र

        कोटा. मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में शामिल होने जा रहे विद्यार्थियों को आॅल स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी की ओर से शुभकामनाएं दी गई। इसके साथ ही बच्चों की परीक्षा दिलवाने के लिए धूप में खड़े अभिभावकों के लिए छाया-पानी की व्यवस्था के लिए सेवा केन्द्र लगाए गए।    एएसडब्ल्यूएस के अध्यक्ष मुकेश सारस्वत ने बताया कि शहर में 92 परीक्षा केन्द्र थे। टीम द्वारा पूरे शहर की लोकेशन्स का अध्ययन किया गया। इस हेतु जिला प्रशासन से सहयोग लिया गया। तेज गर्मी को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा परीक्षा केन्द्रों के बाहर सेवा केन्द्र की व्यवस्था की गई। इसके तहत परीक्षा केन्द्र से निर्धारित दूरी पर अभिभावकों को छाया और पानी की व्यवस्था की गई। उनके लिए कुर्सियां लगाई गई, कैम्पस का ठंडा पानी उपलब्ध करवाया गया और टेंट लगाकर छाया की गई। सेवा केन्द्रों पर दोपहर 11 बजे से ही परीक्षार्थियों का पहुंचना शुरू हो गया था। परीक्षार्थियों के भीतर प्रवेश करने के साथ ही बाहर अभिभावक सेवा केन्द्रों में पहुंचे और यहां रूके। 6-7 घंटों तक सेवा केन्द्रों में हजारों अभिभावकों को राहत मिली। आल स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसायटी द्वारा करीब 50 स्थानों पर सेवा केन्द्र लगाए गए। इस दौरान सोसायटी के सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने अभिभावकों की मदद की। सेवा केन्द्रों पर मौसम को देखते हुए फस्र्ट एड किट भी रखे गए। इसके साथ ही आॅन काॅल व्यवस्था के लिए चिकित्सा टीम को भी सचेत रखा गया। कई स्थानों पर तेज गर्मी के चलते लोगों को ओआरएस के घोल भी उपलब्ध करवाए गए।

    राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान एवं सुप्रीम फ़ाउंडेशन, जसवन्तगढ़ के मध्य शैक्षणिक सहयोग हेतु एमओयू हस्ताक्षरित

    जयपुर। उच्च शिक्षा, शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान एवं सुप्रीम फ़ाउंडेशन, जसवन्तगढ़ के मध्य एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा एवं सुप्रीम फ़ाउंडेशन के पदाधिकारी ट्रस्टी महावीरप्रसाद तापडिया के मध्य सम्पन्न हुआ। यह एमओयू विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत दोनों संस्थाएं शैक्षणिक कार्मिकों की नियुक्ति, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त रूप से आयोजन करेंगी। समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष संयुक्त रूप से शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे । इसके अतिरिक्त, दोनों संस्थान छात्रों और शोधार्थियों के लिए विनिमय कार्यक्रमों और मन्त्र विज्ञान के क्षेत्र में संसाधनों के साझा उपयोग पर कार्य करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. राजधर मिश्र, राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह पालावत, सेठ श्री सूरजमल तापडिया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, जसवन्तगढ़ के प्राचार्य डॉ. हेमन्त कृष्ण मिश्र, राजस्थान संस्कृत अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. सरोज कोचर तथा डॉ. सुरेन्द्र शर्मा सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। संस्थानों के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों को प्राप्त करने और प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

    NEET Short Analysis: नीट का पेपर एवरेज रहा रहा

    NEET Short Analysis नीट का पेपर एवरेज रहा रहा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-2026 रविवार को आयोजित हुई। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा के प्रेसिडेंट विनोद कुमावत ने बताया कि विद्यार्थियों से मिले फीडबैक के अनुसार पेपर का लेवल नीट-2024 से थोड़ा कठिन जबकि नीट 2025 की तुलना में आसान रहा। ऑनलाइन पोल पर आए फीडबैक के अनुसार करीब 34 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पेपर को आसान एवं 58 प्रतिशत ने पेपर को मध्यम स्तरीय बताया। सिर्फ आठ प्रतिशत विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होनें पेपर को कठिन बताया। पेपर एनसीईआरटी आधारित था।   फिजिक्स के पेपर में टाइम मैनेजमेंट चैलेन्जिंग रहा। क्योंकि स्ट्राॅन्ग कंसेप्ट के साथ स्पीड भी जरूरी थी। फिजिक्स के प्रश्न मध्यम से कठिन स्तरीय थे। न्यूमेरिकल आधारित प्रश्नों के साथ कैलकुलेशन थोड़ी कठिन रही।   कैमिस्ट्री के पेपर में आॅर्गेनिक कैमिस्ट्री से आसान प्रश्न पूछे गए थे। इसमें एक भी प्रश्न स्टेटमेेंट आधारित नहीं था। मैच द काॅलम संबंधित प्रश्नों की संख्या ज्यादा थी। फिजीकल कैमिस्ट्री से 17 प्रश्न पूछे गए थे। यानी पूरे पेपर में 37 प्रतिशत फिजीकल कैमिस्ट्री से थे। इसमें भी मैच द काॅलम के दो सवाल थे।   बाॅयोलाॅजी का पेपर एनसीईआरटी सिलेबस आधारित एवं स्कोरिंग रहा। पेपर का लेवल आसान से मध्यम स्तरीय रहा।

    सुबोध पी.जी. स्वायत्तशासी काॅलेज के पाँच एनसीसी कैडेटों का लैफ्टीनेंट (आफिसर) के पद पर सेना में चयन

    सुबोध पीजी महाविद्यालय में संचालित एन.सी.सी. यूनिट के कैडेट्स प्रतिवर्ष राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एन.सी.सी. गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर राजस्थान एन.सी.सी. निदेशालय एवं प्रथम राजस्थान एन.सी.सी. बटालियन के साथ-साथ काॅलेज के लिए कीर्तिमान स्थापित करते हैं। जैसे गणतंत्र दिवस परेड नई दिल्ली में प्रतिवर्ष महाविद्यालय के 10-12 कैडेट भाग लेते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। इसी प्रकार युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों का भ्रमण कर वहाँ की ऐतिहासिक, सामरिक एवं एन.सी.सी. गतिविधियों का अध्ययन करते हैं। एन.सी.सी. गतिविधियों के अंतर्गत प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ कीर्तिमान स्थापित करते हैं। जिसके आधार पर एनसीसी निदेशालय एवं महानिदेशालय ने हमारे एन.सी.सी. कैडेटों और अधिकारियों को समय समय पर सम्मानित किया जाता रहा है। इसी कड़ी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि महाविद्यालय के पाँच एनसीसी कैडेटों का चयन (सत्र-2025-26) भारतीय सेना में लैफ्टीनेंट पद पर हुआ है। जोकि राज्य ही नहीं बल्कि भारत में किसी एक काॅलेज से एक वर्ष में एक साथ पाँच कैडेटों का ऑफिसर्स के पद पर चयन होना सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक उपलब्धि है।   इस अवसर पर एन.सी.सी. बटालियन के कमान अधिकारी कर्नल एस. चन्द्रशेखर एवं एडम आफिसर लैफ्ट. कर्नल के पी.एस. शेखावत ने कैडेटों एवं काॅलेज के एनसीसी अधिकारियों एवं काॅलेज प्रशासन को हार्दिक बधाई देते हुए काॅलेज की एन.सी.सी. में उपलब्धियों की प्रशंसा की हैं।   इस अवसर पर काॅलेज प्राचार्या प्रो. रेणु जोशी ने कैडेटों को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि काॅलेज के अन्य छात्र-छात्राओं को कठिन परिश्रम करते हुए इन कैडेटों से प्रेरणा लेनी चाहिए। साथ ही काॅलेज एन.सी.सी. आफिसर को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।   चयनित कैडेटों के नाम निम्न प्रकार हैं 1. हैमेन्द्र सिंह राठौर 2. तिलक पारीक 3. सुधीर सिंह 4. अमन सैन 5. सुमित यादव आदि।  

    आईसीडीएस के प्रयासों से एसआरएस के माध्यम से राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण 86 प्रतिशत हुआ

    उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत बालिकाओं और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिए जाने के दिए निर्देश   जयपुर।उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण कौशल की ट्रेनिंग दिए जाने के निर्देश। उन्होंने भविष्य में एआई की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं और महिलाओं को कौशल विकास के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ए आई के इस दौर में तकनीकी प्रशिक्षण से ही महिलाओं की आजीविका सुनिश्चित हो सकती है। उन्होंने इस हेतु महिला अथिकारिता निदेशालय द्वारा गुणवत्ता पूर्ण तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिए जाने के निर्देश दिए।   उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने शनिवार शासन सचिवालय में उनकी अध्यक्षता में तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार की उपस्थिति में विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की आयोजित समीक्षा बैठक में उक्त निर्देश दिए।   दिया कुमारी ने लाडो प्रोत्साहन योजना पर चर्चा कर, पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ने काली बाई भील उड़ान योजना की समीक्षा करते हुए योजना का प्रभावी क्रियान्वयन करने के लिए आवश्यक उपाय किये जाने के निर्देश दिए।   इसी के साथ उन्होंने शिक्षा सेतु योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम योजना की भी समीक्षा की।     उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बैठक में राज्य सरकार की बजट घोषणाओं का समयबद्ध से क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए।    उपमुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं जैसे विद्युत, पेय जल और क्रियाशील शौचालय के कार्यों में तीव्र प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आधारभूत सुविधाएं विकसित करने हेतु निर्माण एवं मरम्मत के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जो निर्माण कार्य पूरे हो गए हैं उनका उच्चाधिकारी निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन करें। इसी प्रकार उन्होंने प्रगतिरत कार्यों का भी निरीक्षण कर उनमें तेजी लाने के निर्देश दिए इसके साथ ही उन्होंने अप्रारम्भ कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि ये कार्य अप्रारम्भ क्यों हैं इसका समाधान कर कार्य शीघ्र प्रारम्भ करवाये जाने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही इस वर्ष आंगनबाड़ियों को 7 हजार 500 नए नंद घर विकसित करने के निर्देश दिए।   दिया कुमारी ने शासन सचिव महिला एवं बाल विकास एवं निदेशक आईसीडीएस के प्रयासों से राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पात्र लाभार्थियों को एसआरएस के माध्यम से THR पोषाहार वितरण 86 प्रतिशत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर सभी पात्र लाभार्थियों को FRS से THR पोषाहार का वितरण किया जाए। उन्होंने इसके साथ ही पोषाहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।    उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत पिछले वर्ष के पोषण पखवाड़ा में प्रथम आने की सफलता को दोहराते हुए इस बार फिर से राजस्थान को देश में फिर से प्रथम स्थान पर आने की प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अन्य योजनाओं और कार्यक्रमों में विभाग को कड़ी मेहनत कर इसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर आग्रणी राज्य बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता से गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण दिए जाने के निर्देश दिए।

    प्रतिभाओं का सम्मान, संस्कृति का संगम: सुबोध महिला महाविद्यालय में सजा वार्षिकोत्सव "पिनेकल-2026'

      रामबाग स्थित सुबोध महिला महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव "पिनेकल" में विभिन्न संस्कृतियों के समागम की झलक क्षेत्रीय नृत्यो के माध्यम से दिखाई दी l इस अवसर पर सिविल एवं अन्य प्रतिष्ठित राजकीय सेवाओं में चयनित करीब 50 छात्राओं हेतु प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया l दीप प्रज्वलन एवं ईश वंदना से प्रारम्भ हुए इस समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने छात्राओं को पुरुस्कृत कर बदलते परिवेश में सबला बनकर देशहित में योगदान देने की बात कहीं l उन्होंने छात्र जीवन को स्वर्णिम एवं सृजनात्मकता काल बताते हुए अनुशासित होकर लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर कार्यशील होने पर जोर दिया l विशिष्ट अतिथि मंडल में अल्पा चौधरी,आयुक्त भू -प्रबंध विभाग,मेजर नीति बंसल एवं विशेष अतिथि विक्रम पुरुषार्थी ने एक सुर में नारी के पुरातन वैभव की पुर्नस्थापना पर बल दिया और हर परिस्थिति में अपने मनोबल और प्रयासों को बुलंद रखने की बात कहीं l समारोह में उपस्थित सुबोध शिक्षा समिति के अध्यक्ष नवरत्न कोठारी ने कहा की "हम केवल किताबें ही नहीँ पढ़ाते है, हौसले गढ़ते है l आज पुरस्कार पाने वाली प्रत्येक छात्रा कल की एक सशक्त कहानी होगी" मानद सचिव एस एस बोथरा ने अपने उदबोधन में कहा की आज जिन बेटियों को मंच पर सम्मान दिया जारहा है कल वही बेटियां किसी और की प्रेरणा बनेगी, यही शिक्षा की सबसे बड़ी जीत है l कोषाध्यक्ष विनोद लोढ़ा ने कहा की ये मेडल गले में नहीँ अपितु होंसलों को पहनाये जाते है l महाविद्यालय के संयोजक डॉ राकेश हीरावत ने शिक्षा पर किये गए खर्च को निवेश बताकर कहा की आज जिन हाथों में पुरुस्कार है कल उन्ही हाथो में समाज का नेतृत्व होगा l महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ स्वाती जैन ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर कहा की हमारा संकल्प है की महाविद्यालय की प्रत्येक छात्रा आर्थिक, मानसिक रूप से इतनी सशक्त बने की उसे किसी सहारे की जरूरत ना पड़े और यह वार्षिक उत्सव उसी संकल्प का जश्न है l इस अवसर पर शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय मेरिट सूची, खेल-कूद, एनसीसी, एनएसएस तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को स्मृति चिन्ह, मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया l सम्मान से अभिभूत छात्राओं ने भी एक स्वर में महाविद्यालय द्वारा उनके सपनो को साकार कर उनको पँख प्रदान करने हेतु उद्घोषित रूप में धन्यवाद ज्ञापित किया l छात्राओं द्वारा नृत्य की विभिन्न विधाओं द्वारा 'हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत क़र रंगारंग प्रस्तुति दी गई lअंत में प्राचर्या डॉ जैन ने छात्राओं को स्टार्टअप हेतु तैयार करने हेतु नवीन सत्र में इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की घोषणा कर आगँतुको को धन्यवाद ज्ञापित किया एवं छात्राओं के हित में कृत संकल्पित होकर साझा प्रयास करने का आश्वासन दिया l डॉ तनु यादव ने प्रभावी मंच संचालन से आयोजन को सरस और जोशीला बना दिया l डॉ ममता शर्मा ने रंगारंग कार्यक्रम को आकर्षक बनाने में अग्रणी भूमिका निभाईl

    “जयपुर के नागरिकों को पक्षियों से क्या प्राप्त होता है तथा नागरिक पक्षियों को क्या लौटाते हैं” विषय पर एक जागरूकता अभियान

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर द्वारा पर्यटन एवं वन्यजीव सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से दिनांक 2 मई 2026 को “जयपुर के नागरिकों को पक्षियों से क्या प्राप्त होता है तथा नागरिक पक्षियों को क्या लौटाते हैं” विषय पर एक जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय में किया गया, जिसमंे सर्वेक्षण करवाने तथा उसके विश्लेषण करने का कार्य महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा प्राध्यापिकाओं के निर्देशन में किया जायेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व एवं जैव विविधता संरक्षण में नागरिकों की भूमिका के प्रति जागरूक करना था। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने अपने संबोधन में सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भविष्य को सुरक्षित और संतुलित बनाने हेतु वनों एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। सत्र के दौरान एक इंटरैक्टिव सर्वे गतिविधि भी आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने आसपास के क्षेत्रों में पाये जाने वाले विभिन्न पक्षियों की पहचान की तथा उनके संरक्षण के उपायों पर चर्चा की। इस गतिविधि ने छात्राओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध बनाया प्रख्यात फिल्म निर्माता एवं वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्लामुथु (नल्ला) ने, जो रॉयल बंगाल टाइगर पर अपने कार्य के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं। उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री के तीन प्रेरणादायक क्लिप प्रस्तुत किए, जिनसे वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी समझ विकसित हुई। इस अवसर पर पर्यटन एवं वन्यजीव सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्यों की उपस्थिति भी रही, साथ ही स्वयंसेवकों की एक टीम, जिसका नेतृत्व श्री हर्षवर्धन कर रहे थे, ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सत्र में, कुल 72 छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की।

    राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को बढ़ावा दे मीडिया : निम्बाराम

    जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन सत्ता के बल पर नहीं, बल्कि समाज की जागरुकता और एकजुटता से संभव होता है। उन्होंने पत्रकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज को शिक्षित, प्रशिक्षित और संगठित करने का दायित्व पत्रकारिता का है। जब समाज सकारात्मक और राष्ट्रहितकारी विचारों के साथ आगे बढ़ता है, तभी सच्ची जागृति संभव होती है।    क्षेत्र प्रचारक शनिवार को मालवीय नगर स्थित पाथेय कण संस्थान के देवर्षि नारद सभागार में विश्व संवाद केंद्र की ओर से आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने पत्रकारिता को एक “धर्म” बताते हुए देवर्षि नारद का उदाहरण दिया, जिनकी विश्वसनीयता और प्रमाणिकता के कारण उन्हें हर स्थान पर सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि आज के पत्रकारों को भी सत्यनिष्ठ, जिम्मेदार और संतुलित रहकर कार्य करना चाहिए।    उन्होंने चेताया कि ब्रेकिंग न्यूज और सनसनीखेज खबरों की होड़ में तथ्यहीन या राष्ट्रहित के विरुद्ध सामग्री प्रसारित करना उचित नहीं है। विशेष परिस्थितियों, जैसे राष्ट्रीय संकट या सुरक्षा से जुड़े मामलों में, समाचारों के प्रसारण में संयम और विवेक अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को पत्रकारिता में उचित स्थान देने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि नकारात्मक नैरेटिव को बदलकर समाज में सकारात्मक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को बढ़ावा देना चाहिए। पत्रकारिता को बिना किसी भेदभाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष रहते हुए समाज और शासन दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।   *पत्रकारों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती तेजी के साथ सत्यता बनाए रखना : देवनानी* इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि पत्रकारों के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती तेजी के साथ सत्यता बनाए रखना है। जल्दबाजी में कई बार समाचारों में त्रुटियां हो जाती हैं, जिससे समाज में भ्रम और नकारात्मकता फैलती है।    शनिवार को मालवीय नगर स्थित पाथेय कण भवन में देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह का मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक (राजस्थान) निम्बाराम और कार्यक्रम अध्यक्ष स्वदेश समूह के सलाहकार संपादक गिरीश उपाध्याय ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। समारोह के प्रथम चरण में कत्थक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसमें सृष्टि के संरक्षण में देवर्षि नारद के योगदान को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया। अपने उद्बोधन में वासुदेव देवनानी ने नाट्य प्रस्तुति की सराहना की और कहा कि इसमें देवर्षि नारद के जीवन का सार सजीव रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि नारद ने कंस और रावण जैसे शक्तिशाली शासकों के समक्ष भी निर्भीक होकर सत्य का संदेश दिया। युधिष्ठिर को राजधर्म का बोध कराया। जहां-जहां वे गए, वहां उन्होंने सकारात्मक और रचनात्मक विचारों का प्रसार किया। देवनानी ने कहा कि नारद के जीवन से हमें मर्यादा, सत्य और निष्पक्षता का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।   विधानसभा अध्यक्ष ने वर्तमान समय में पत्रकारिता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती तेजी के साथ सत्यता बनाए रखना है। जल्दबाजी में कई बार समाचारों में त्रुटियां हो जाती हैं, जिससे समाज में भ्रम और नकारात्मकता फैलती है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे सनसनीखेज प्रस्तुति से बचें। समाचारों को संतुलन तथा जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करें। उनके अनुसार पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक प्रकार का धर्म है, जिसे नैतिकता और गंभीरता के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को भारत की उपलब्धियों और सकारात्मक पहलुओं को प्रभावी रूप से सामने लाना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।   *लोकधर्म और सत्य के वाहक थे नारद : उपाध्याय* कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गिरीश उपाध्याय ने कहा कि देवर्षि नारद निर्भय होकर सत्य कहने के प्रतीक थे। यही गुण आज की पत्रकारिता में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भले ही फिल्मों में नारद जी को अलग रूप में दिखाया गया हो, लेकिन वे वास्तव में लोकधर्म और सत्य के वाहक थे। उन्होंने “चौथा स्तंभ” की धारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्रकार का कार्य केवल स्तंभ की भांति निष्क्रिय रहना नहीं, बल्कि समाज में सक्रिय भूमिका निभाना है। उन्होंने वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पत्रकारिता के सामने उभरती चुनौती बताते हुए कहा कि तकनीक के इस दौर में मानवीय संवेदनाओं, विवेक और संतुलन को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को तकनीक का उपयोग करना चाहिए, लेकिन अपनी नैतिकता और मानवीय दृष्टिकोण को नहीं खोना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता सत्य, प्रमाणिकता और जिम्मेदारी पर आधारित होनी चाहिए, न कि केवल सनसनी या शोर पैदा करने का माध्यम।   *पत्रकार सम्मानित* समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। प्रिंट मीडिया से मदन कलाल, इलेक्ट्रोनिक मीडिया से लखवीर सिंह शेखावत और वेब मीडिया से रामगोपाल जाट को उनकी उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए देवर्षि नारद सम्मान दिया गया। निबंध लेखन के लिए छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ पत्रकार, बुद्धिजीवी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।

    पण्डितराज उपाधि से सम्मानित हुए प्रो. बृजभूषण ओझा एवं प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय

    जयपुर । पाणिनीय शोध संस्थान, बिलासपुर द्वारा “पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय एवं विद्वत्सम्मान” परिचर्चा का आयोजन लखीराम स्मृति ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। मुख्यातिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी थे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व राज्य मंत्री अमर अग्रवाल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्षा प्रो. पुष्पा दीक्षित ने की। इस अवसर पर व्याकरण शास्त्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो.ब्रजभूषण ओझा एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के वरिष्ठाचार्य प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय को ‘पण्डितराज’ उपाधि से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप दोनों विद्वानों को प्रमाण-पत्र एवं चाँदी का मुकुट प्रदान किया गया, जिस पर उनके नाम अंकित थे। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा की दोनो आचार्य केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य हैं। एक हमारे आचार्य हैं दूसरे पूर्व में विवि का प्राध्यापक रहे है। इस लिए विवि परिवार आनन्दित है अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा एवं पाणिनीय परंपरा को आधुनिक तकनीकी साधनों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल युग में संस्कृत को पुनः वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया जा सकता है। कार्यक्रम में संस्थान के छात्रों ने अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें संस्कृत अध्ययन की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर सार्थक विचार रखे गए। साथ ही, प्रो. बृजभूषण ओझा एवं प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय ने “पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय” विषय पर अपने विशिष्ट व्याख्यान प्रस्तुत किए, जिन्हें विद्वानों एवं शोधार्थियों ने सराहा। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के सचिव चन्द्रप्रकाश वाजपेयी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, विद्वानों एवं छात्रों का आभार व्यक्त किया।

    श्रम अधिकारों की रक्षा जरूरी तथा 365 दिन काम की हो गारंटी - प्रशांत भूषण

     भीम ( राजसमंद). अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजसमंद जिले के भीम स्थित पाटिया का चौड़ा में मजदूर किसान शक्ति संगठन का स्थापना दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस बड़े उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। इस मौके पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने अपने अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए एकजुटता दिखाई।    *भीम के बाजारों में निकाली तीन तरफ से रैली* भीम नगर में तीन अलग-अलग स्थानों से रैली की शुरुआत हुई, जिनमें भीम बस स्टैंड, बलाइयों का कूड़ा और बदनोर चौराहा शामिल थे। ये सभी रैलियां आगे बढ़ते हुए सूजाजी के चौक पर एकत्रित हुईं। वहां से संयुक्त रैली अस्पताल और डाक बंगला मार्ग से होती हुई पाटिया का चौड़ा पहुंची। रैली के दौरान राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं और सदस्यों ने न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये किए जाने, मनरेगा को वापस लाने, तथा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों पर जोरदार और जोशीले नारे लगाए। सुजाजी के चौक पर सभा हुई जिसे सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने संबोधित करते हुए कहा कि सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने न्यूनतम मजदूरी को 800 रुपये प्रतिदिन करने, मनरेगा कानून को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और रोजगार के कार्य दिवस बढ़ाने की मांग रखी। रैली के पाटिया पहुंचने के बाद मेला शुरू हुआ और सभा शुरू हुई जिसका संचालन महिलाओं के द्वारा किया गया।  इस अवसर पर अरुणा रॉय ने कहा कि "मजदूर दिवस संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का दिन है और मौजूदा समय में मजदूरों की एकजुटता पहले से कहीं अधिक जरूरी है।" उन्होंने संघर्ष के पूराने दिनों को याद किया और कहा कि संघर्ष को और तेज करने की जरूरत है। हरमाड़ा की पूर्व सरपंच और प्रसिद्ध श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता नौरती बाई को उनके जीवन भर के कार्यों के लिए दुपट्टा ओढ़ाकर अरुणा रॉय ने सामनी किया।   उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी मजदूर साथियों का है जो अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हमें मिलकर इस लड़ाई को और आगे बढ़ाना है।" सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं मजदूरों की हमेशा पैरवी करने वाले प्रशांत भूषण ने कहा कि "श्रम अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनआंदोलनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को 365 दिन काम को गारंटी होनी चाहिए।  राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के अध्यक्ष शंकर सिंह ने कहा कि "मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे लगातार हमलों के खिलाफ अब निर्णायक संघर्ष की जरूरत है।" इसलिए अब हमें संघर्ष में उतरना होगा।  प्रसिद्ध मानवाधिका कार्यकर्ता एवं पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि"लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के सबसे कमजोर तबकों को न्याय और अधिकार मिलेंगे।" उन्होंने दुनिया के हो रहे युद्ध को तुरंत बंद किए जाने का भी आह्वान किया।  भारतीय महिला फेडरेशन की महासचिव निशा सिद्धू ने कहा कि "मजदूर महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।" महिलाओं को ना केवल सम्मान की लड़ाई लड़नी है बल्कि अधिकारों को प्राप्त करने के साथ साथ बचाना भी है।  राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के सचिव मुकेश निर्वासित ने कहा कि "हमें हर हाल में नरेगा को वापस लाना होगा और VB Gram जैसी केंद्र नियंत्रित योजनाओं को लाने से रोकना होगा। उन्होंने देशव्यापी आन्दोलन छेड़ने का आह्वान किया और ये लड़ाई दिल्ली तक लड़ने की बात कही।  मेले में पूर्व विधायक सुदर्शन सिंह रावत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि "महात्मा गांधी नरेगा को समाप्त करना मगरा इलाके के लिए बहुत बड़ी क्षति है। नरेगा हमारे लिए जीवन-रेखा है और इसे हम वापस लाकर रहेंगे।" मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े लाल सिंह ने कहा कि आज हमें एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है और हमें ये भी समझने की आवश्यकता है कि हमारी भलाई कौन चाहते हैं और कौन नहीं, इसीलिए अब मगरा क्षेत्र के लोगों के साथ पूरे देश के लोगों को समझना होगा कि हमें नरेगा बचाना है और संविधान के अनुसार देश के शासन को चलवाना है।     *महिलाओं की सक्रिय भागीदारी*  रैली और मेले में बड़ी संख्या में राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया। विभिन्न ब्लॉकों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और मांग की कि हर हाल में मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा VB Gram जैसी केंद्र नियंत्रित योजना को रद्द किया जाए। साथ ही उन्होंने बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की मांग की।  *सस्ते भाव की दुकानें लगी और दुकानों पर उम्दा हुजूम*  मेले में सस्ते भाव की जलेबी, पकौड़ी, राब, ककड़ी, टमाटर, कपड़े, गैंती, फावड़ा, खिलौने, आदि की सस्ते भाव की दुकानें लगी जिन पर बड़ी संख्या में लोगों ने खरीददारी की।   *मंच का संचालन*  कार्यक्रम का संचालन सफलतापूर्वक राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की ओर से कनिका कुमारी, प्रेमलता और वनिता प्रजापत, मजदूर किसान शक्ति संगठन की ओर से लक्ष्मी चौहान, चतर सिंह और वर्षा खांडल, तथा संविधान केंद्र की ओर से निर्मला और कंकू चौहान द्वारा किया गया। देश के कई राज्यों और *राजस्थान के कई जिलों के लोगों ने मेले में लिया भाग*  देश के विभिन्न राज्यों से लोगों ने भागीदारी की जिनमें केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों के लोगों ने हिस्सेदारी निभाई तथा राजस्थान के कई जिले जिनमें भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सिरोही, सीकर, जयपुर, डीग, आदि जिलों से भागीदारी की।   *निम्न प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए:*  1. न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए। 2. VB Gram (वीबी ग्राम) व्यवस्था को रद्द किया जाए तथा मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। 3. सामाजिक सुरक्षा पेंशन को न्यूनतम मजदूरी के आधे के बराबर किया जाए। 4. सूचना का अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधनों को वापस लिया जाए और पारदर्शिता को मजबूत किया जाए। 5. स्वास्थ्य का अधिकार कानून के नियम राजस्थान में शीघ्र बनाए जाकर प्रभावी रूप से लागू किए जाएं। 6. न्यूनतम आय गारंटी कानून के नियम राजस्थान में बनाए जाएं और लागू किए जाएं। कार्यक्रम में न्यूनतम मजदूरी, मनरेगा, शहरी रोजगार गारंटी, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। अंत में सभी साथियों ने “न्याय, समानता और बंधुता” पर आधारित समाज के निर्माण का संकल्प लिया और संगठित संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

    संस्कृत भारत की चिरंतन सांस्कृतिक धारा है, जिसमें हमारी प्राचीन परंपराएँ और ज्ञान-संपदा निहित हैं लोकरंजन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर में वार्षिकोत्सव एवं छात्रावास दिवस धूमधाम से आयोजित

      जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जयपुर परिसर में वार्षिकोत्सव एवं छात्रावास दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति आशुतोष कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकारी लोकरंजन सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने की, सह-निदेशक प्रशासन प्रो. शीशराम भी मंचासीन रहे। वैदिक मंगलचरण सरस्वती पूजन से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुया। सह-निदेशक प्रशासन आचार्य शीशराम ने जयपुर परिसर का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अतिथियों ने परिसर की वार्षिक पत्रिका “जयंती” का लोकार्पण किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सच्चिदानंद स्नेही ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने उद्बोधन में सारस्वत अतिथि लोकरंजन ने कहा कि संस्कृत भारत की चिरंतन सांस्कृतिक धारा है, जिसमें हमारी प्राचीन परंपराएँ और ज्ञान-संपदा निहित हैं। वहीं न्यायाधिपति आशुतोष कुमार ने कहा कि प्राचीन भारत में संस्कृत लोकभाषा के रूप में प्रचलित थी। उन्होंने संस्कृत मंच से बोलने के अवसर को अपना सौभाग्य बताते हुए परिसर द्वारा दिए गए आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें देश की विविध लोक संस्कृतियों एवं विभिन्न राज्यों की झलकियाँ देखने को मिलीं। संस्कृत गीतों एवं प्रस्तुतियों ने आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया। योग विभाग के छात्रों ने योगासन, पिरामिड एवं विभिन्न शारीरिक कौशलों का प्रभावशाली प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही परिसर की राष्ट्रीय एवं अंतर-परिसरीय उपलब्धियों के लिए भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्रावास दिवस एवं वार्षिकोत्सव की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन-अधिगम प्रक्रिया में पूर्ण तन्मयता के साथ जुड़ने तथा अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठाचार्य श्रीधर मिश्र ने सभी अतिथियों, आचार्यों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय,प्रो. ईश्वर भट्ट निदेशक, IQAC, प्रो. कृष्णा शर्मा, डॉ. रानी दाधीच, डॉ. कैलाश सैनी, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. नमिता मित्तल, नरेश सिंह डॉ लक्ष्मी शर्मा, डॉ आरती मीना,डॉ अंजू चौधरी,डॉ ललित शर्मा डॉ अंजली गौतम डॉ ज्योत्सना वर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।