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    प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय बने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर के सह-निदेशक शैक्षणिक

      जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में दिनांक 13 मई 2026 को मुख्यालय, नई दिल्ली के आदेशानुसार प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय, वरिष्ठ आचार्य व्याकरण ने सह-निदेशक शैक्षणिक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर जयपुर परिसर निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र एवं सह-निदेशक प्रशासन प्रो. शीशराम ने उन्हें विधिवत पूजा अर्चना कर कार्यभार ग्रहण करवाया तथा पुष्पमाला साफा पहनाकर उनका स्वागत किया। कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय ने कहा कि वे परिसर की शैक्षणिक गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण भाव से कार्य करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रवेश, विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों को सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रो पाण्डेय ने जयपुर परिसर के सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए समन्वित रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. श्रीधर मिश्र, प्रो सुभस्मिता मिश्र प्रो कृष्णा शर्मा, प्रो. गोरांग बाघ, डॉ कैलाश चंद्र सैनी,डॉ रानी दाधीच डॉ नमिता मित्तल डॉ दिनेश यादव डॉ सुभाषचंद्र मीना,डॉ लक्ष्मी शर्मा, डॉ किरण खींची,डॉ अंजू चौधरी, डॉ हरिओम शर्मा,नरेश सिंह, रजनीश पाण्डेय, डॉ.अश्विनी ठाकुर,मनमोहन दाधीच डॉ सत्यकाम आर्य सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे  

    नीट परीक्षा विश्वसनीय और पारदर्शी होनी चाहिए : नितिन कुकरेजा

    कोटा. नीट परीक्षा रद्द होने पर एलन करियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ऐसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास को प्रभावित करती हैं। कुकरेजा ने कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए मजबूत और तकनीक आधारित सिस्टम अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जेईई की तरह नीट परीक्षा भी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित की जानी चाहिए, जिससे पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि नीट परीक्षा को भी जेईई की तर्ज पर दो चरणों मेंस और एडवांस की तरह आयोजित किया जा सकता है। जिस प्रकार जेईई मेन दो सत्रों में आयोजित होती है, उसी तरह नीट में भी यह व्यवस्था लागू करने से विद्यार्थियों में परीक्षा का तनाव कम होगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, इससे अभ्यर्थियों की शैक्षणिक क्षमता का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा और योग्य एवं मेहनती छात्रों को देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने का अधिक निष्पक्ष अवसर मिलेगा। साथ ही, पूरी प्रवेश प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकेगी।  

    स्किल ट्रेनिंग से रोजगार की राह आसान” — यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के बीसीए विद्यार्थियों को मिले जॉब ऑफर लेटर

    स्किल ट्रेनिंग से रोजगार की राह आसान” — यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के बीसीए विद्यार्थियों को मिले जॉब ऑफर लेटर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर के बीसीए विभाग के विद्यार्थियों ने कौशल आधारित प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर विभिन्न कंपनियों से जॉब ऑफर लेटर प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम एमसीसी (MCC) अंडर CII फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें कुल 24 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम पिछले माह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया था। 15 दिनों तक प्रतिदिन 3 घंटे चलने वाले इस प्रशिक्षण सत्र में विद्यार्थियों को एडवांस एक्सेल ,कम्युनिकेशन स्किल, इंटरव्यू तकनीक, पर्सनालिटी डेवलपमेंट एवं कॉर्पोरेट व्यवहार से संबंधित महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण का संचालन मास्टर ट्रेनर गौरव उपाध्याय द्वारा किया गया, जिन्होंने विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कौशल विकसित करने हेतु व्यावहारिक एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद विद्यार्थियों को विभिन्न कंपनियों से जॉब ऑफर लेटर प्राप्त हुए, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम का सफल समन्वयन बीसीए विभागाध्यक्ष निलेश शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के इंडस्ट्री ओरिएंटेड प्रशिक्षण विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ उनकी रोजगार क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना एवं वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में स्किल आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री ट्रेनिंग विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। विश्वविद्यालय प्रशासन एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। 

    कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने छोड़ी पुलिस एस्कॉर्ट सुविधा

    जयपुर। राजस्थान सरकार में पशुपालन, गोपालन, डेयरी एव देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के सादगी और जनसरोकारों के संदेश से प्रेरित होकर अपने दौरों के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट नहीं लेने का फैसला किया है। मंत्री कुमावत ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को आमजन से जुड़कर काम करना चाहिए और अनावश्यक वीआईपी संस्कृति से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उनके टूर कार्यक्रमों में पुलिस एस्कॉर्ट की व्यवस्था नहीं की जाए, ताकि आम लोगों को यातायात और अन्य असुविधाओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जनप्रतिनिधियों से सादगी अपनाने और जनता के बीच सहज रूप से रहने का आह्वान करते रहे हैं। उसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मंत्री  कुमावत के इस फैसले की चर्चा हो रही है तथा इसे वीआईपी संस्कृति कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    ग्राम रथ अभियान के तहत फलोदी जिले की पंचायत समिति देचू के सेतरावा में आयोजित रात्रि चौपाल कार्यक्रम

    ग्राम रथ अभियान के तहत फलोदी जिले की पंचायत समिति देचू के सेतरावा में आयोजित रात्रि चौपाल कार्यक्रम में बोले शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर । कांग्रेस ने पेपर बेचे और नौकरी की आस लगाए बैठे बेरोजगार युवाओं का भविष्य बर्बाद किया ! प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेरोजगारों के भविष्य को संवार रहे। बिना गारंटी के युवाओं को रोजगार के लिए मिल रहा लोन ! मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हर साल 100000 सरकारी नौकरियां देने के काम में जुटे !   जल जीवन मिशन घोटाले पर भी बरसे शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर । बोले मोदी ने दिल्ली से लोगों को साफ स्वच्छ और घर में टोटी से पानी पहुंचाने के लिए पैसा भेजा , कांग्रेस के लोगों ने पैसे पर डांका डाला । कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री महेश जोशी और अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल जेल में बंद है । अभी जांच चल रही है। अभी और लोग भी जेल जाएंगे। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने रात्रि चौपाल में लोगों की समस्याएं सुनी और सब का मौके पर ही निस्तारण किया। इस अवसर पर सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे।  

    स्टार्टअप इकोसिस्टम की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा छात्राओं के नवाचार एवं उद्यमिता कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से 13 मई 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को स्टार्टअप इनक्यूबेशन, नवाचार प्रक्रिया, बिजनेस मॉडल निर्माण, तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने छात्राओं को अपने अभिनव विचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान भ्रमण के दौरान छात्राओं ने विभिन्न स्टार्टअप्स की कार्यप्रणाली को समझा तथा उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित हुईं। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमणों को विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम में आईआईसी अध्यक्ष डॉ. प्रियंका खुराना एवं आईआईसी संयोजक डॉ. सुमिता शेखावत के साथ महाविद्यालय की लगभग 60 छात्राओं ने इन्क्यूबेशन सेंटर का भ्रमण किया। कार्यक्रम का समापन छात्राओं के प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में खुलेगा आधुनिक “सरस पार्लर

    राजस्थान विश्वविद्यालय एवं जयपुर डेयरी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण एमओयू ‘‘जेएलएन मार्ग स्थित सरस पार्लर के समान क्वालिटी युक्त एवं हाइजीन युक्त सरस उत्पादों की रेंज विश्वविद्यालय परिसर के अध्यनरत छात्रों को एवं छात्रावास के विद्यार्थियों हेतु उपलब्ध हो सकेगी‘‘ - प्रो. अल्पना कटेजा जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर एवं सरस डेयरी के मध्य एक एमओयू सम्पन्न हुआ। इसके तहत जेएलएन मार्ग पर स्थित सरस पार्लर के समान विश्वविद्यालय परिसर में शीघ्र ही आधुनिक सरस पार्लर प्रारंभ किया जाएगा, जिससे हजारों छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, छात्रावासियों, विश्वविद्यालय स्टाफ एवं आगंतुकों को उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध एवं पौष्टिक डेयरी उत्पाद सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगे। पार्लर पर छाछ, लस्सी, दही, पनीर, श्रीखंड, फ्लेवर्ड मिल्क, कोल्ड कॉफी, आइसक्रीम सहित सरस के विभिन्न लोकप्रिय उत्पाद उचित दरों पर उपलब्ध रहेंगे।  कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने बताया कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि सरस पार्लर विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ, गुणवत्तायुक्त एवं पौष्टिक खाद्य उत्पादों का एक विश्वसनीय केंद्र साबित होगा तथा इससे परिसर में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के हित में लगातार नई सुविधाओं का विस्तार कर रहा है तथा यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरस पार्लर से विद्यार्थियों को परिसर में ही गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उनका समय भी बचेगा और उन्हें बेहतर सुविधा प्राप्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन समय-समय पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगा ताकि विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं उचित दर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। पार्लर का संचालन प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में सरस पार्लर खुलने से विद्यार्थियों को विश्वसनीय एवं पौष्टिक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। उक्त सरस पार्लर में विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें केसर जलेबी, केसर हॉट कुल्हड़ मिल्क, पनीर पकौड़ा, समोसा, सॉफ्टी, मिल्क शेक, पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर, सरस बटर मसाला बन, पनीर स्टफ्ड पराठा, पनीर टिक्का, दक्षिण भारतीय व्यंजन, छोले भटूरे, मिनी मील एवं अन्य खाद्य सामग्री भी उचित दर पर उपलब्ध करायी जायेगी। शिक्षण संस्थानों में सरस पार्लरों की स्थापना से युवाओं में पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा आमजन को शुद्ध एवं गुणवत्तायुक्त डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के उद्देश्य को भी मजबूती मिलेगी। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में आमजन एवं युवाओं तक शुद्ध, पौष्टिक एवं गुणवत्तायुक्त उत्पाद पहुंचाना है। जयपुर डेयरी प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा, रजिस्ट्रार आशु चौधरी, वित्त अधिकारी मंजू चौधरी, राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज एवं जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक मनीष फौजदार की उपस्थिति में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार आशु चौधरी एवं जयपुर डेयरी की ओर से प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।  

    ग्राम रथ अभियान से ग्रामीणों को मिली योजनाओं की जानकारी

    बालोतरा जिला प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने रात्रि चौपाल में सुनी जन समस्याएं जयपुर। बालोतरा जिला के सिमरखिया गांव में मंगलवार को आयोजित रात्रि चौपाल एवं ग्राम रथ अभियान ग्रामीणों के लिए संवाद और समाधान का मंच बना। कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने आमजन से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल संकट, जर्जर सड़कों की मरम्मत, विद्युत आपूर्ति में सुधार, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व प्रकरणों एवं कृषि से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इस पर प्रभारी मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही समस्याओं के त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के साथ संचालित ग्राम रथ अभियान ग्रामीणों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी का प्रभावी माध्यम बना। अभियान के तहत ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया। प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान और जरूरतमंद वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ विकास कार्यों को गति दे रही है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।  

    कोसेलाव में श्री तनोट माता वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न

    -कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत रहे मुख्य अतिथि सुमेरपुर। विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसेलाव में श्री स्वांगिया तनोटराय चामुंडा मंदिर विकास समिति के तत्वावधान में मंगलवार को श्री तनोट माता का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत थे। उनके आगमन पर समिति पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने माता तनोट के दर्शन कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कार्यक्रम के दौरान आमजन से संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने पेयजल, सड़क, बिजली तथा पशुपालन से जुड़ी विभिन्न समस्याएं मंत्री के समक्ष रखीं, जिन पर मंत्री ने शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अपने संबोधन में मंत्री कुमावत ने कहा कि “तनोट माता की कृपा से यह क्षेत्र हमेशा समृद्ध और सुरक्षित रहा है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सरकार भी आमजन की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है और हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि “ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हमारी प्राथमिकता है। पशुपालन, डेयरी और गोपालन क्षेत्र को मजबूत बनाकर किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो भी समस्याएं आज आपके द्वारा रखी गई हैं, उनका समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि “जनता की समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में मंदिर विकास समिति द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। वार्षिकोत्सव के सफल आयोजन से ग्रामीणों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस मौके पर साण्डेराव के पूर्व मण्डल अध्यक्ष महिपाल सिंह जोधा, पाली के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मनसाराम परमार, पुखराज चौधरी, सरपंच प्रतिनिधि हनुमान भाटी, पूर्व इकाई अध्यक्ष राम सिंह भोमिया, मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष नरेश भाटी, सचिव जसराज भाटी, उपाध्यक्ष नेमीचंद भाटी, महासचिव मंसाराम भाटी, कोषाध्यक्ष घीसूलाल भाटी, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, मन की बात कार्यक्रम के जिला संयोजक शिवराज सिंह बिठिया, सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  

    RGHS सुविधा सुचारु रूप से शुरू किया जाए - कर्मचारी महासंघ

    अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रमुख शासन सचिव (कार्मिक) तथा प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा) से मुलाकात की तथा बताया कि RGHS सुविधा सुचारु रूप से कर्मचारीयों को प्राप्त नहीं हो रही है , इससे कर्मचारियों में असंतोष है, अगर दुरूस्त नहीं किया तो महासंघ कर्मचारियों की भावनाओं के अनुरूप तीव्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। आरजीएचएस निजी कंपनी को नहीं दिया जाए तथा RGHS में सेवा में कमियों को शीघ्र दुरुस्त किया जाए ताकि कर्मचारियों को इलाज मिल सके।   इस हेतु कर्मचारी महासंघ ने नौ सूत्री सुझाव पत्र भी दिया महासंघ के प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राणा,प्रदेश महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा, वित्त मंत्री कैलाश शर्मा तथा कार्यालय मंत्री गोवर्धन सिंह साथ रहे। महासंघ के प्रदेश महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की आरजीएचएस सेवा को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु निम्न लिखित सुझाव प्रेषित किए --   1. पति तथा पत्नी दोनों राज्य सेवा में है तो उनके परिवार सदस्यों के मद में दोनो के वेतन से मासिक कटौतियां की जा कर एक ही सेवा के लिए दोहरी वसूली की जा रही है, जो नीतिगत नहीं है, अतः एक परिवार के लिए एक ही कर्मचारी के वेतन से कटौती की जाए।   1. सरकारी डिस्पेंसरीज द्वारा बीपी ,शुगर ,डायबिटीज आदि की दवाई लिखने पर पाबंदी लगाई गई है, ऐसे में डिस्पेंसरी में कर्मचारी इलाज ना कराकर निजी अस्पतालों में डॉक्टरों से वह दवाई लिखवा रहे है ऐसे में डॉक्टर की ₹350/- फीस का भार सरकार पर अनावश्यक रूप से ही पड़ रहा है ऐसे में उन सभी चिकित्सकों को ऐसी बीमारियों की दवाई लिखने के लिए अधिकृत किया जाए तो सरकार पर फीस का भार नहीं पड़ेगा तथा कर्मचारियों का निजी अस्पतालो की ओर पलायन रुकेगा, तथा सरकार पर भी अधिभार कम होगा।   1. राज्य में RGHS में गड़बड़ी तथा मनमानी करने वाले मेडिकल स्टोर तथा निजी चिकित्सालयो को चिन्हित कर पूर्णतया प्रतिबंधित किया जाए तथा उनकी मान्यताओं को रद्द किया जाए। जिससे प्रभावी लगाम लग सके । (4) RGHS सेवाए प्रदान करने वाले निजी चिकित्सालयो एवम दवा स्टोर की त्रैमासिक सेवा समीक्षा एवम उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए।  (5) Rghs सेवाओं में भ्रष्टाचार की रोक थाम हेतु 24/7 कस्टमर केयर सेंटर ,विशेषज्ञ निरीक्षण दलो का गठन ,इत्यादि प्रभावी सिस्टम डेवलप किया जाए। (6) निजी चिकित्सालय RGHS में एक दिन में एक से अधिक बीमारी के विषेषज्ञ चिकित्सक को दिखाने की सुविधा नहीं दे रहे हैं ,जिससे मरीज कार्मिक को बार बार चिकित्सालयो के चक्कर लगाने पड़ते हैं, अतः सरकारी चिकित्सालयो की तरह निजी चिकित्सालयो को भी निर्देशित किया जाए।   (7) RGHS सेवाओं को निजी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं सौंपा जाए। (8) सरकारी चिकित्सालयो की ओपीडी में वरिष्ठ चिकित्सको द्वारा निर्धारित ओपीडी समय दोपहर 2 बजे तक मरीजों को देखना सुनश किया जाए, वरिष्ठ डॉक्टर आचार्य /सह आचार्य दोपहर 12 बजे बाद ओपीडी में मिलते ही नही हैं यदि बैठे भी हो तब भी उनके रेजिडेंट ही मरीज देखते हैं,जिससे मरीजों की विषेज्ञ इलाज की कामना पूरी नहीं होती, और मरीज निजी चिकित्सालयो में उन्ही को दिखाने एवम इलाज कराने को पलायन करते हैं। (9) Rghs में विटामिन और कैल्शियम जैसी आधार भूत दवाइयों को पूर्ववत शामिल किया जाए, 50 वर्ष के बाद अधिकतम उक्त तत्वों के अभाव से ग्रसित होते हैं। जिन्हे खरीदने में भरी व्यय का भार अधिकतम को भुगतना पड़ रहा है।  

    पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का किया फैसला

      Yugcharan News / 13 May 2026 पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि वह भवानीपुर विधानसभा सीट को अपने पास रखेंगे और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देंगे। हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले समय की रणनीतिक तैयारी के रूप में देख रहे हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संवैधानिक नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी ही होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भवानीपुर सीट से विधायक के रूप में शपथ ले चुके हैं, इसलिए नंदीग्राम सीट खाली की जाएगी। उनके इस फैसले के बाद अब नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों ने भी इस फैसले को लेकर अपनी रणनीतिक चर्चाएं शुरू कर दी हैं। भवानीपुर सीट क्यों मानी जाती है खास? भवानीपुर विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद प्रतिष्ठित और प्रभावशाली सीट मानी जाती रही है। यह क्षेत्र कई वर्षों तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता था। ऐसे में इस सीट से सुवेंदु अधिकारी की जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भवानीपुर सीट बनाए रखने का फैसला सुवेंदु अधिकारी की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह सीट कोलकाता और आसपास के शहरी राजनीतिक क्षेत्रों में प्रभाव स्थापित करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव प्रचार के दौरान भवानीपुर पूरे राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रही। विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने यहां प्रचार किया था और इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था। नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास नंदीग्राम सीट का पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अलग ही महत्व है। यह क्षेत्र पिछले डेढ़ दशक से राजनीतिक संघर्ष और बदलाव का प्रतीक माना जाता रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने इसी सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराया था। उस चुनाव ने राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था, जिसके बाद नंदीग्राम चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला बन गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा का प्रतीक बन चुकी है। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री द्वारा नंदीग्राम सीट छोड़ने के फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल इसे राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे प्रशासनिक और संवैधानिक आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं। विधानसभा में नई सरकार की तैयारी मुख्यमंत्री के इस फैसले के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। विधायकों के शपथ ग्रहण और नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम फैसले लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के समर्थन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में नई राजनीतिक दिशा स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में कई केंद्रीय योजनाओं और विकास परियोजनाओं को तेज गति से लागू किया जाएगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकार शुरुआती चरण में ही अपने प्रशासनिक एजेंडे और राजनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर हालांकि मुख्यमंत्री के फैसले पर विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेताओं का मानना है कि भवानीपुर सीट बनाए रखना पूरी तरह राजनीतिक संदेश देने की रणनीति हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भवानीपुर सीट का प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है। इस सीट पर नियंत्रण बनाए रखना राज्य की शहरी राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने का संकेत माना जा सकता है। दूसरी ओर, नंदीग्राम सीट खाली होने से संभावित उपचुनाव को लेकर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि यदि उपचुनाव होता है तो यह एक बार फिर राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है। बदलते राजनीतिक समीकरण पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय तक राज्य की राजनीति कुछ प्रमुख दलों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही, लेकिन अब नए राजनीतिक गठजोड़ और रणनीतियां सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का भवानीपुर सीट बनाए रखने का फैसला इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा हो सकता है। यह फैसला यह भी दर्शाता है कि राज्य की राजनीति अब केवल पारंपरिक क्षेत्रीय प्रभाव तक सीमित नहीं रह गई है। राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती है, जहां शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीतिक रणनीतियां अलग-अलग तरीके से तय की जाएंगी। उपचुनाव पर टिकी रहेंगी निगाहें अब सभी की निगाहें नंदीग्राम में संभावित उपचुनाव पर टिकी रहेंगी। यदि उपचुनाव की घोषणा होती है, तो यह राज्य की राजनीति में एक और बड़ा चुनावी मुकाबला बन सकता है। राजनीतिक दल पहले से ही संभावित उम्मीदवारों और रणनीतियों को लेकर विचार-विमर्श शुरू कर चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नंदीग्राम का चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह राज्य की वर्तमान राजनीतिक दिशा और जनमत की परीक्षा भी माना जाएगा। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री का यह फैसला भविष्य में राज्य की राजनीति को नए तरीके से प्रभावित कर सकता है। खासकर शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने के लिए भवानीपुर सीट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जनता के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मुख्यमंत्री के फैसले को लेकर आम लोगों और राजनीतिक समर्थकों के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यावहारिक और संवैधानिक आवश्यकता मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे रणनीतिक राजनीतिक कदम बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि यह फैसला आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। आगे की राजनीति पर असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का यह फैसला आने वाले समय में बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। भवानीपुर सीट पर उनकी मौजूदगी राज्य की राजधानी और शहरी राजनीति में उनकी सक्रियता को और मजबूत कर सकती है। वहीं नंदीग्राम सीट खाली होने से वहां राजनीतिक गतिविधियां फिर से तेज होने की संभावना है। यदि उपचुनाव होता है, तो यह चुनाव राज्य की राजनीतिक स्थिति का नया संकेतक माना जा सकता है। फिलहाल, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट को बनाए रखने का निर्णय लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया राजनीतिक संदेश दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और दलों की रणनीतियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।      

    पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट रखने का फैसला किया, नंदीग्राम सीट छोड़ेंगे

      Yugcharan News / 13 May 2026 पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को घोषणा की कि वह भवानीपुर विधानसभा सीट अपने पास रखेंगे और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देंगे। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। राजनीतिक रूप से यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि भवानीपुर लंबे समय से राज्य की राजनीति का अत्यंत चर्चित और प्रतिष्ठित निर्वाचन क्षेत्र माना जाता रहा है। वहीं नंदीग्राम वह सीट है जिसने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया था। दो सीटों से चुनाव लड़ने के बाद लिया निर्णय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों सीटों पर उनकी जीत ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया। हालांकि भारतीय चुनावी नियमों के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि एक समय में दो विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। इसी कारण मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। उन्होंने कहा कि वह भवानीपुर सीट से विधायक के रूप में शपथ ले चुके हैं, इसलिए नंदीग्राम सीट खाली की जाएगी। इस घोषणा के बाद अब नंदीग्राम में उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है। भवानीपुर सीट का राजनीतिक महत्व भवानीपुर सीट को पश्चिम बंगाल की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में इस सीट से सुवेंदु अधिकारी की जीत को राजनीतिक विश्लेषक प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भवानीपुर में जीत हासिल कर सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की पारंपरिक राजनीतिक संरचना को चुनौती देने का प्रयास किया है। चुनाव प्रचार के दौरान यह सीट पूरे राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रही। नंदीग्राम से जुड़ी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि नंदीग्राम सीट का बंगाल की राजनीति में विशेष स्थान रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी यह सीट राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी, जब सुवेंदु अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराया था। उस समय सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था, जिसके बाद नंदीग्राम चुनाव राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला बन गया था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा का प्रतीक बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने जनता का जताया आभार अपने बयान में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लोगों का समर्थन और आशीर्वाद मिला है। उन्होंने कहा कि नई सरकार विधानसभा में विकास और प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और विकास परियोजनाओं को लागू करने की दिशा में काम करेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, आने वाले समय में राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा। विधानसभा में नई सरकार की गतिविधियां तेज मुख्यमंत्री की घोषणा ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। विधायकों के शपथ ग्रहण और नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया भी जारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुरुआती फैसलों के जरिए सरकार अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत देने की कोशिश कर रही है। वहीं विपक्ष भी नई सरकार की रणनीतियों और फैसलों पर लगातार नजर बनाए हुए है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर नजर हालांकि मुख्यमंत्री के फैसले पर अभी तक विपक्ष की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर सीट बनाए रखने का निर्णय पूरी तरह राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। दूसरी ओर नंदीग्राम सीट खाली होने से वहां संभावित उपचुनाव की राजनीतिक तैयारियों को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं। यदि उपचुनाव होता है, तो यह एक बार फिर राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन सकता है। बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरण हालिया विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई नए समीकरण उभरकर सामने आए हैं। लंबे समय तक एक ही राजनीतिक धारा के प्रभाव में रहने वाले राज्य में अब प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक ध्रुवीकरण दोनों बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी का भवानीपुर सीट बनाए रखने का फैसला केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी माना जा सकता है। इससे यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि सरकार राज्य की पारंपरिक राजनीतिक सीमाओं से बाहर निकलकर नए क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। उपचुनाव पर टिकी रहेंगी निगाहें अब राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की नजर संभावित नंदीग्राम उपचुनाव पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री की सीट छोड़ने के बाद वहां किस उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाता है और क्या यह मुकाबला फिर से बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदलता है। राज्य की राजनीति में नंदीग्राम की संवेदनशील और प्रतीकात्मक भूमिका को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रह सकती है। फिलहाल, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस और नए राजनीतिक संकेतों को जन्म दे दिया है।