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    पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हर नागरिक का सामाजिक कर्तव्य : मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास

    'साइक्लोथॉन फॉर ऑल': जयपुर में 300 से अधिक साइकलिस्ट्स ने दिया स्वस्थ और हरित पर्यावरण का संदेश पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हर नागरिक का सामाजिक कर्तव्य : मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास जयपुर। राजस्थान को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से रविवार को राजधानी जयपुर में राज्य-स्तरीय 'साइक्लोथॉन फॉर ऑल' का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राज्य सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के तत्वावधान में, 'इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज' (आईएसएसएस) के सहयोग से आयोजित इस साइक्लोथॉन में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित 300 से अधिक उत्साही प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह आयोजन वैश्विक अभियान 'ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक' (1-7 नवंबर 2026) के अंतर्गत नागरिकों में पर्यावरण चेतना विकसित करने और जीवनशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। मुख्य अतिथि वी. श्रीनिवास ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना झालाना डूंगरी स्थित राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय से रविवार प्रातः 6:15 बजे राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हरी झंडी दिखाकर साइक्लोथॉन का विधिवत फ्लैग-ऑफ किया। इस मौके पर मुख्य सचिव ने कहा कि"पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हर नागरिक का सामाजिक कर्तव्य है। साइकिल चलाना न केवल हमारे व्यक्तिगत शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करके हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित ग्रह का निर्माण करता है। " इस मौके पर विशिष्ट अतिथि आनंद कुमार (अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) ने कहा कि"जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए हमें दैनिक जीवन में 'सस्टेनेबल लाइफस्टाइल' (सतत जीवनशैली) को अपनाना होगा। सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार, पेड़ों की रक्षा और जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी लाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।" श्रीमती शैलजा देवल (संयुक्त शासन सचिव, पर्यावरण विभाग) ने कहा कि"साइक्लोथॉन जैसे आयोजन समाज के हर वर्ग को एकजुट करते हैं। जब आम नागरिक सड़कों पर आकर हरित राजस्थान का संदेश देते हैं, तो इसका प्रभाव बहुत दूरगामी और सकारात्मक होता है।" प्रोफेसर जी.सी. जैन (उपाध्यक्ष, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज) ने कहा कि"मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण का सीधा संबंध है। लाइफ साइंसेज के दृष्टिकोण से, हमारी दैनिक आदतें ही पर्यावरण की सेहत तय करती हैं। साइकिल चलाने से स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ प्रकृति के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव भी स्थापित होता है।" कपिल चंद्रवाल (सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल) ने कहा कि राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जन-जागरूकता कार्यक्रमों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। 300 से अधिक साइकलिस्ट्स की भागीदारी यह साबित करती है कि जयपुर के नागरिक स्वच्छ वायु और हरित पर्यावरण के प्रति अत्यंत संवेदनशील और सजग हैं।"  प्रतिभागियों का उत्साह आयोजन समिति के मुख्य सदस्य डॉ. सुनील छिम्पा, डॉ. राम भजन कुमावत और डॉ. रितु जैन ने बताया कि 'साइक्लोथॉन फॉर ऑल' को लेकर समाज के सभी वर्गों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि साइक्लोथॉन में समाज के सभी आयु वर्गों—विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी पंजीकृत साइकलिस्ट्स को आयोजकों की ओर से कैप, टी-शर्ट, पर्यावरण-अनुकूल बैग, सर्टिफिकेट, रिफ्रेशमेंट और पेयजल निःशुल्क वितरित किए गए।प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी साइकिलों पर 'ग्रीन राजस्थान-क्लीन राजस्थान' और 'पर्यावरण बचाओ' के पोस्टर लगाकर पूरा मार्ग तय किया। समारोह का समापन झालाना डूंगरी से शुरू हुई यह साइकिल रैली प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड परिसर पहुँची। समापन समारोह में सभी 300+ प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया और पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। आयोजकों ने सभी सहयोगियों, प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई दी। इस कार्यक्रम में अकादमिक पार्टनर के रूप में यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलॉजी जयपुर, कनोडिया पीजी कॉलेज, एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, एलबीएस कॉलेज जयपुर, एसएस जैन सुबोध शिक्षा समिति और एसएसजी पारीक कॉलेज एवं सम्बध्द शिक्षण संस्थाएं रहीं.       

    राजस्थान में स्वस्थ और हरित पर्यावरण के संदेश के साथ आज आयोजित होगी 'साइक्लोथॉन फॉर ऑल'

    जयपुर. राज्य सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के तत्वावधान में, 'इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज' (आईएसएसएस) के सहयोग से आगामी 1 नवंबर 2026 को एक राज्य-स्तरीय साइक्लोथॉन का आयोजन किया जा रहा है। 'ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक' (1-7 नवंबर 2026) के अंतर्गत आयोजित होने वाली इस ' साइक्लोथॉन फॉर ऑल' का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और एक स्वच्छ, हरित व स्वस्थ राजस्थान का संदेश देना है। ये आयोजन रविवार को सुबह 6:15 बजे (फ्लैग-ऑफ ) राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झालाना डूंगरी, जयपुर से किया जाएगा जिसमें सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क एंट्री रहेगी। साइकिल चलाने वालों को फ्री में यह दिए जाएंगे आयोजक डॉ. सुनील छिम्पा, डॉ. राम भजन कुमावत और डॉ. रितु जैन ने बताया कि साइक्लोथॉन को अधिक आकर्षक और उत्साहवर्धक बनाने के लिए पंजीकृत साइकिल चलाने वालों को आयोजकों की ओर से कैप, टी-शर्ट, पर्यावरण बैग, सर्टिफिकेट , रिफ्रेशमेंट और पेयजल की व्यवस्था रहेगी. कोई भी ले सकता है भाग इस आयोजन में विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों और वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज के सभी वर्गों के लोग हिस्सा ले सकते हैं। आयोजन समिति के अनुसार, प्रतिभागियों को अपनी साइकिल स्वयं लानी होगी। पंजीकरण की ये रहेगी प्रक्रिया इस साइकिल रैली में भाग लेने के लिए इच्छुक नागरिक पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।  

    मुख्य सचिव ने दिये आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित करने के दिए निर्देश

    जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जयपुर के गांधीनगर स्थित समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय में पोषण 2.0 तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों की मुख्य गतिविधियों तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की। बैठक में विभाग की ओर से सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग एवं निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं द्वारा विभिन्न कार्यक्रम एवं गतिविधियों के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया गया। मुख्य सचिव ने ली आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जानकारी एवं अधिकारियों को दिए नियमित भ्रमण के निर्देश :- मुख्य सचिव ने आंगनबाड़ी पर शाला पूर्व शिक्षा की दैनिक समय सारणी पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य सचिव द्वारा उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से आंगनबाड़ी केदो के संचालन संबंधी जानकारी प्राप्त की तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा केंद्र पर प्रतिदिन बच्चों की शाला पूर्व शिक्षा एवं देखभाल गतिविधियो का संचालन, अल्पाहार एवं गर्म पका हुआ भोजन, पोषण ट्रैकर पर गतिविधियों को अपडेट करने इत्यादि कार्यो के साथ साथ प्रधानमंत्री मातृत्व वन्दना योजना एवं मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना योजनांतर्गत लाभार्थियों का पंजीकरण, बच्चों की वृद्धि निगरानी,परिवार सर्वेक्षण कार्य, तथा प्रतिदिन लक्षित गृह भ्रमण के बारे में अवगत कराया गया । मासिक गतिविधियों के अंतर्गत महीने में 2 बार समुदाय आधारित कार्यक्रम, महीने में एक बार MCHN दिवस, आंगनबाड़ी प्रबंधन समिति (AMC) एवं कार्यकर्ता-अभिभावक बैठक का आयोजन किया जाता हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन संचालन समय मे 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सत्रवार शाला पूर्व शिक्षा की विभिन्न गतिविधियां प्रदान की जाती है। मुख्य सचिव ने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित किये जाने हेतु निर्देशित किया, साथ ही निर्देशित किया कि आईसीडीएस के सभी अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर,आंगनबाड़ी की दैनिक संचालन का अवलोकन करना चाहिए,वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को निर्धारित कलेंडर अनुसार कार्य करने हेतु प्रेरित करे, संचालन में आ रही कठिनाइयों एवं कमियों को समझ कर उनमें अपेक्षित सुधार करावे,ताकि लाभार्थियों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के कार्यो का होगा संकलन:- मुख्य सचिव ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है , इनमें से 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की पहचान की जाए जिन्होंने राजस्थान की आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया है तथा उनके कार्यो को संकलन कर प्रकाशित किया जाए ताकि अन्य कार्यकर्ता भी प्रेरित हो सके। विभाग द्वारा किये गए नवाचारों की सराहना:- मुख्य सचिव द्वारा विभाग द्वारा, शाला पूर्व गतिविधियों तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की भी सराहना की। विशेष रूप से प्रदेश में संचालित 'कैश प्लस मॉडल' की प्रशंसा की गई, जिसके अंतर्गत प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) एवं मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना (MMMPY) के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) गतिविधियों से जोड़ा गया है। बच्चों के विकासात्मक विलंब की पहचान एवं प्रबंधन:- मुख्य सचिव ने बच्चों में विकासात्मक विलंब (developmental delay) के लक्षणों की शीघ्र पहचान करने के लिए फील्ड कार्यकर्ता के क्षमता वर्धन पर निर्देश प्रदान किये तथा सभी संबंधित विभागों में समन्वय पर जोर दिया,ताकि बच्चों में विकासात्मक विलंब (developmental delay) के लक्षणों की शीघ्र पहचान कर प्रबंधन किया जा सके। इसके लिए यूनिसेफ तथा विभाग को डिजिटल प्रबंधन पर कार्य करने के निर्देश भी प्रदान किये। AAA कन्वर्जेंस को बेहतर करने के दिये निर्देश:- मुख्य सचिव ने ए.एन.एम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा सहयोगिनी (AAA) के मध्य कन्वर्जेंस को और बेहतर करने के लिए निर्देश प्रदान किये ताकि महिला एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के स्तर में अपेक्षित सुधार लाया जा सके। लौह पुरुष श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को अर्पित की पुष्पांजलि एवं निदेशालय में किया पौधरोपण:- मुख्य सचिव ने "राष्ट्रीय एकता दिवस" के अवसर पर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जन्म तिथि के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने निदेशालय का निरीक्षण भी किया तथा परिसर में पौधरोपण भी किया।मुख्य सचिव द्वारा विभाग के विभिन्न कार्मिको के साथ भी वार्ता की गई तथा उनके साथ समूह फ़ोटो भी लिया गया। बैठक में शासन सचिव, महिला एवं बाल विकास श्रीमती पूनम, निदेशक आईसीडीएस वासुदेव मालावत, वित्तीय सलाहकार मनोज शांडिल्य, अतिरिक्त निदेशक पोषाहार दीनानाथ बब्बल, अतिरिक्त निदेशक श्रीमती अलका विश्नोई, अतिरिक्त निदेशक महिला अधिकारिता श्रीमती नीतू राजेश्वर, उपनिदेशक विखाका श्रीमती सरोज ढाका सहित विभाग के समस्त अधिकारियो के साथ यूनिसेफ तथा IPE ग्लोबल के विभिन्न प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

    जयपुर. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर विभिन्न गतिविधियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान, राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे एवं देशभक्ति के महत्व से अवगत कराना तथा उनमें सामाजिक समरसता की भावना विकसित करना था। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना, प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन, प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) अंकित गांधी एवं कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के संदेश को विद्यार्थियों तक पहुँचाने के महत्व पर बल दिया। प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संदेश में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। प्रो-प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) अंकित गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है तथा सरदार पटेल का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दूरदर्शिता एवं दृढ़ नेतृत्व से देश की एकता को मजबूत आधार प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सीताराम माली ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप शर्मा ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता दिवस एवं सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती की ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक एकता में विविधता विषय पर आधारित ड्रेस थीम प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का संदेश देते हुए आकर्षक पोस्टर तैयार कर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में एक छात्रा द्वारा राष्ट्रीय एकता की भावना पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुति भी दी गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रजनी खंडेलवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन खुशबू चौधरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे और सभी ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों, राष्ट्रीय एकता, अखंडता, आपसी सद्भाव तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का संदेश दिया गया। कार्यक्रम सकारात्मक, प्रेरणादायक एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

    विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय में अंतर महाविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता का समापन

    जयपुर। विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय, जयपुर में आयोजित विश्वविद्यालय राजस्थान की अंतर महाविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता 2026-27 का दो दिवसीय आयोजन उत्साह एवं खेल भावना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की कुल 7 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्घाटन 30 अक्टूबर को फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के निदेशक वीरेंद्र चौधरी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. नूपुर माथुर भी उपस्थित रहीं। श्री चौधरी ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेलों से अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं टीम भावना का विकास होता है। प्रतियोगिता के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि श्री राम कुमार, ध्यानचंद पुरस्कार, महाराणा प्रताप पुरस्कार एवं रेल मंत्री पुरस्कार से सम्मानित तथा भारतीय रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी, उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय, जयपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कनोडिया गर्ल्स कॉलेज ने द्वितीय स्थान हासिल किया। विजेता एवं उपविजेता टीमों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. नूपुर माथुर एवं खेल समन्वयक डॉ. जितेंद्र सिंह के निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन की सराहना की गई। प्रतियोगिता की आयोजन सचिव डॉ. चेतना चौधरी ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्रशिक्षकों, टीम मैनेजरों, तकनीकी अधिकारियों, निर्णायकों, आयोजन समिति के सदस्यों एवं सहयोगी कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। प्रतियोगिता ने महिला खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा खेल भावना, अनुशासन एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। समारोह का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।  

    पाँच दिवसीय मतदाता जागरूकता रैली सफलतापूर्वक हुई संपन्न

    लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने एवं शत-प्रतिशत मतदाता सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिनांक 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक पाँच दिवसीय मतदाता जागरूकता रैली आज सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर द्वारा मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) तथा इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच गांवों में जागरूकता रैलियां निकाली गईं। आज 31 अक्टूबर 2026 को रैली के अंतिम दिन ग्राम कुम्हारियावास में विशाल मतदाता जागरूकता रैली निकाली गई। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों को मतदान के अधिकार एवं महत्व के प्रति जागरूक किया। रैली के समापन पर सभी को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की शपथ दिलाई गई। मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रथम दिवस ग्राम सीमलियावास में विद्यार्थियों ने रैली निकालकर ग्रामीणों को मतदान के महत्व एवं अपने मताधिकार के अनिवार्य प्रयोग के प्रति जागरूक किया। द्वितीय दिवस ग्राम तीतरिया में रैली के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं को मतदान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। तृतीय दिवस ग्राम बाजडोली में विद्यार्थियों ने स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं निर्भीक मतदान का संदेश देते हुए ग्रामीणों से बिना किसी प्रलोभन, दबाव एवं भेदभाव के योग्य प्रतिनिधि चुनने की अपील की। वहीं, चतुर्थ दिवस 30 अक्टूबर 2026 को ग्राम टूटोली में जागरूकता रैली एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने “अपने वोट के महत्त्व को समझो” (Your Vote Matters) और “जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ” जैसे प्रेरक संदेशों के माध्यम से ग्रामीणों को अपने मताधिकार का महत्व समझाया गया। इन पाँच दिनों में विद्यार्थियों ने ग्रामीण समुदाय को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि ऐसे अभियानों का हिस्सा बनकर विद्यार्थी न सिर्फ सामाजिक बुराइयों और अवेयरनेस के प्रति गंभीर होते हैं, बल्कि उनमें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार भी विकसित होते हैं। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में व्यावहारिक शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) अंकित गांधी ने संस्थागत समन्वय, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुव्यवस्थित सामुदायिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस तरह की पहलों को उच्च शिक्षा संस्थानों और समाज के बीच संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों की सामूहिक सहभागिता बढती है तथा सामाजिक जागरूकता के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुँचाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम के समन्वयक की जिम्मेदारी डॉ. रजनी खंडेलवाल ने निभाई, वहीं, डॉ. अंशु श्रीवास्तव, डॉ. जितेन्द्र सिंह चौधरी, वेद प्रकाश चौधरी, प्रह्लाद सिंह चौधरी और खुशबू चौधरी ने अभियान के संचालन तथा विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नागरिक कर्तव्य एवं जनसेवा की भावना विकसित करने के साथ ग्रामीण समुदाय को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।  

    NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका : प्रो. (डॉ.) रश्मि जैन

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के समापन सत्र में विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संबोधन में कहा कि NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए उनके कौशल संवर्द्धन एवं निरंतर व्यावसायिक विकास के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने ‘भविष्य की कार्ययोजना: गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नवाचार और बेहतर कल’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान एवं नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ (SBAS) के सहयोग से 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन’ था। कार्यक्रम के प्रथम दिवस प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार अग्रवाल ने NEP 2020 की दृष्टि एवं नीतिगत रूपरेखा पर व्याख्यान दिया। दूसरे दिन डॉ. रोहित सारस्वत ने बौद्धिक संपदा अधिकार एवं शोध-नवाचार तथा डॉ. कमल किशोर जांगिड़ ने परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों पर चर्चा की। तीसरे दिन डॉ. एस. वी. एच. नागेंद्र ने CO-PO Mapping तथा डॉ. कुलदीप शर्मा ने शोध-पत्र लेखन पर व्याख्यान दिया। चौथे दिन पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार सिंह ने ‘पांडुलिपि से प्रकाशन तक’ विषय पर जानकारी प्रदान की। समापन सत्र में प्रतिभागियों से कार्यक्रम का फीडबैक भी प्राप्त किया गया। इस दौरान जितेंद्र सिंह, डॉ. कुलदीप शर्मा एवं डॉ. प्रेम कुमार ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। इसके पश्चात प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह का शुभारंभ डॉ. प्रेम कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ। इस अवसर पर प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना एवं कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने भी अपने संदेशों के माध्यम से कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की प्रधान संयोजक प्रो. (डॉ.) रश्मि जैन ने सफल आयोजन के लिए IQAC समन्वयक एवं संयोजक डॉ. रजनी माथुर, सह-संयोजक डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल एवं सुश्री मनीषा यादव तथा मंच संचालक सुश्री खुशबू चौधरी सहित समस्त आयोजन समिति के सदस्यों की सराहना की।

    राष्ट्रीय लोक मंथन कार्यक्रम का राज्य सरकार करेगी आयोजन

    शुक्रवार, 30.10.26 को वैचारिक समूह एवं राजस्थानसरकार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय लोक मंथन कार्यक्रम (4-6 दिसम्बर)को लेकर राजस्थान विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो बी पी सारस्वत से कुलगुरु आवास पर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अध्येताओ की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु विमर्श हुआ , चर्चा में प्रो विमलाडूकियाकुलगुरु कृषि विश्वविद्यालय कोटा, डॉ विनय दीक्षित प्रज्ञा प्रवाह एवं डॉ वैभव शुक्ला विज्ञान भारती की उपस्थिति रही। इसी क्रम में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च BISR के निदेशक डॉ पूर्णेन्दु घोष से विमर्श हुआ। स्वास्थ्य भवन में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक डॉ रवि प्रकाश से लोकमंथन में स्वास्थ्य विषय पर चर्चा हुई। सभी से लोकमंथन में प्रबुद्ध थिंकर और प्रैक्टिसनर को साझा मंच पर नए भारत लोक के ज्ञान का confluence कर समाज के समक्ष रखने का आग्रह किया गया। मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर में निदेशक प्रो N P Padhy से लोकमंथन कार्यक्रम पर चर्चा हुई    

    लोकतंत्र की मजबूती के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों ने टूटोली में निकाली मतदाता जागरूकता रैली, ग्रामीणों को दिलाई शपथ

    जयपुर। आम जनता को मतदान के महत्व के प्रति जागरूक करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर द्वारा पाँच दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में, अभियान के चौथे दिन (30 अक्टूबर 2026) विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का दल टूटोली गाँव पहुँचा। इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। विद्यार्थियों ने टूटोली गाँव की गलियों, ढाणियों और सार्वजनिक चौपालों में घूमकर स्थानीय निवासियों, महिलाओं और युवाओं से सीधा संपर्क साधा। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि देश के उज्ज्वल भविष्य और समग्र विकास के लिए प्रत्येक नागरिक का वोट बेहद महत्वपूर्ण है। छात्रों ने सभी से बिना किसी प्रलोभन, डर या भेदभाव के पूरी समझदारी से अपने मताधिकार का प्रयोग करने का आग्रह किया। रैली के दौरान छात्रों ने हाथों में "Your Vote Matters" और "जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ" जैसे संदेशों वाली तख्तियाँ थाम रखी थीं, जो पूरे गाँव में आकर्षण का केंद्र रहीं। इस अभियान को सफल बनाने और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने में विश्वविद्यालय के डॉ. जितेन्द्र सिंह चौधरी, श्री वेद प्रकाश चौधरी और श्री प्रह्लाद सिंह चौधरी ने सक्रिय भूमिका निभाई और इस पहल को समाज के लिए बेहद उपयोगी बताया। प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि इस तरह के सामाजिक अभियानों से छात्रों में देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है। प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन और कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा ने इस जमीनी जुड़ाव को विद्यार्थियों के व्यावहारिक विकास और उच्च शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम बताया। संस्थान के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के अनुसार, ये ग्रामीण दौरे विद्यार्थियों को सामाजिक यथार्थ से परिचित कराते हैं। आयोजन के अंत में एनएसएस समन्वयक श्री यश यादव ने टूटोली के ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को देश के लोकतांत्रिक आदर्शों को बनाए रखने तथा अनिवार्य रूप से मतदान करने की शपथ दिलाई। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के इस अभियान ने टूटोली गाँव में नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और चुनावी साक्षरता बढ़ाने में बड़ी सफलता हासिल की।  

    दो दिवसीय पीपीटी प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम आयोजित

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के राजनीति विज्ञान विभाग (स्नातकोत्तर) द्वारा एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं के लिए 29 एवं 30 अक्टूबर, 2026 को “Foundations & Frontiers of Political Science” विषय पर दो दिवसीय पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में विषयगत समझ विकसित करने के साथ-साथ उनके शोध कौशल, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण कौशल को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पीपीटी प्रस्तुतियाँ अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित होती हैं। उन्होंने प्रस्तुतीकरण में विषयवस्तु एवं आत्मविश्वास के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से छात्राओं के ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि होती है तथा नियमित प्रस्तुतीकरण के अभ्यास से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। उन्होंने छात्राओं को निरंतर अध्ययन, तार्किक चिंतन एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया। प्रस्तुतीकरण में छात्राओं ने राजनीति विज्ञान के विभिन्न सैद्धांतिक, वैचारिक एवं समसामयिक आयामों से जुड़े विषयों पर पीपीटी के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में राजनीतिक चिंतन, व्यवहारवाद, उदारवाद, नारीवाद, संवैधानिकता, मौलिक अधिकार, शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत, कार्ल मार्क्स, जॉन लॉक, टी.एच. ग्रीन, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भारत की विदेश नीति, ब्रिक्स, आतंकवाद एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे विविध विषय सम्मिलित रहे। डॉ. पालू जोशी, विभागाध्यक्ष (स्नातकोत्तर एवं शोध) राजनीति विज्ञान ने प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रेरणादायी मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से छात्राओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार की अकादमिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, विषय की गहन समझ, तार्किक विश्लेषण एवं प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में भी इसी उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में 33 छात्राओं ने अपने विषयों की प्रस्तुति देते हुए विभिन्न अकादमिक एवं समसामयिक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।  

    खंडेलवाल वैश्य समाज की 11वीं ब्रज चौरासी कोस वाहन यात्रा सप्तदिवसीय भ्रमण के बाद संपन्न, हवन-पूर्णाहुति के साथ हुआ विश्राम

    गोवर्धन खंडेलवाल वैश्य समाज भरतपुर-डीग जिला के तत्वावधान में 22 अक्टूबर 2026 को प्रारंभ हुई सात दिवसीय 11वीं ब्रज चौरासी कोस वाहन यात्रा का बुधवार को प्रेम सेवा संस्थान गोवर्धन में विधिवत विश्राम हुआ। सुबह प्रेम सेवा संस्थान परिसर में हवन पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी यात्रियों सहित पधारे समाज बंधुओं ने पूर्णाहुति दी। पूर्णाहुति के पश्चात भोजन प्रसादी के साथ यात्रा का समापन किया गया। यात्रा के संयोजक नेमचंद खंडेलवाल ने बताया कि इस सात दिवसीय यात्रा में जो आनंद आया, वह कभी किसी यात्रा में नहीं आया। प्रतिदिन वाहनों से ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग स्थित सभी प्रमुख मंदिरों के भव्य दर्शन लाभ प्राप्त किए गए। यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। देश के कोने-कोने से आए सभी 210 यात्रियों ने आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यात्रा में सहयोग देने वाले सभी समाज बंधुओं का आभार प्रकट किया गया। आयोजन कमेटी ने सभी को प्रसादी वितरित कर विदा किया समापन समारोह में भरतपुर-डीग जिलाध्यक्ष श्याम तमोलिया, भरतपुर- डीग जिला महिला अध्यक्ष श्रीमती शिप्रा खंडेलवाल,नेमचंद, हरप्रसाद नाटाणी (यात्रा संयोजक ) ब्रजेश सिंगोतिया, शंभू दयाल आकड़, पिंकी तमोलिया,रामकिशोर पितलिया, गोविन्द तमोलिया हरिशंकर खंडेलवाल मनमोहन नाटाणी, पिंटू सोंखिया, राकेश चौधरी, मुकेश दनादन,(कामाँ ), कुसुम रावत,भरतपुर-डीग युवा जिला अध्यक्ष निखिल खंडेलवाल, अंकुर खंडेलवाल एडवोकेट, पिंकी खंडेलवाल (भरतपुर ), ओमप्रकाश सितारे वाले, संदीप गांधी, कैलाश नाटाणी (अध्यक्ष )कुम्हेर, सुरेश माठा, दिनेश खंडेलवाल नगर, मुसद्दीलाल, घनश्याम ताम्बी (मंत्री )भरतपुर, गोविन्द खंडेलवाल जनुथर सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के अध्यक्ष रमेश चंद्र खंडेलवाल (तुंगा वाला), अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव जी कट्टा, अखिल भारतीय खंडेलवाल वैश्य महा सभा के प्रधानमंत्री चंद्र प्रकाश खंडेलवाल, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा की पत्रिका के मुख्य संपादक, राम निरंजन खुटेटा ,अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रोफेसर रमेश कुमार रावत, अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़, झारखंड, आसाम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, सहित अनेक प्रदेश एवं कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, रतलाम, मुंबई, राजनंद गाव, सहित देश के अनेक प्रमुख शहरों से अनेक पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, आजीवन सदस्यों ने खुशी व्यक्त करते हुए सभी तीर्थ यात्रियों को भदाई दी है!  

    दिल्ली में पटाखामुक्त दिवाली के लिए विराट कोहली की मदद ले सकता है प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सेलिब्रिटी जागरूकता अभियान का सुझाव

    Yugcharan News / 30-10-2026 देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले नुकसान को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। अदालत ने कहा है कि लोगों को पटाखामुक्त दिवाली मनाने के लिए जागरूक करने के अभियान में विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों की मदद ली जा सकती है। अदालत का मानना है कि खेल जगत और सार्वजनिक जीवन में लोकप्रियता रखने वाली हस्तियां आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रभावी तरीके से दे सकती हैं। यह सुझाव पटाखों के इस्तेमाल, उनके निर्माण और बिक्री पर नियंत्रण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हर साल पटाखों और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहता है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब बार-बार प्रतिबंध और दिशानिर्देश लागू करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो क्या जनजागरूकता के लिए कोई अलग और प्रभावी तरीका नहीं अपनाया जा सकता। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ कर रही थी। पीठ ने विशेष रूप से दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए लोकप्रिय हस्तियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। विराट कोहली जैसे क्रिकेटरों से मदद लेने का सुझाव सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले ने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां ऐसे लोकप्रिय व्यक्तित्वों की सेवाएं क्यों नहीं ले सकतीं, जिन्हें समाज के विभिन्न वर्गों में सम्मान प्राप्त है। उन्होंने सुझाव दिया कि अच्छे खिलाड़ियों और सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठित हस्तियों को लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए आगे लाया जा सकता है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने विशेष रूप से विराट कोहली जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में लोगों को पटाखामुक्त दिवाली मनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ऐसे खिलाड़ियों से अनुरोध किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय क्रिकेटर इस तरह का संदेश देने में मदद कर सकते हैं कि दिवाली रोशनी का त्योहार है और इसे खुशियों तथा उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य यह था कि लोगों को केवल प्रतिबंधों और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रित करने के बजाय उन्हें स्वयं प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित किया जाए। हालांकि, अदालत ने विराट कोहली को कोई औपचारिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी है और न ही उनके अभियान में शामिल होने की पुष्टि हुई है। यह सुझाव सरकार और संबंधित अधिकारियों के लिए एक संभावित जनजागरूकता रणनीति के रूप में सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध के असर पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि हर साल पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए आदेश दिए जाने के बावजूद प्रदूषण की समस्या क्यों बनी रहती है। अदालत का मानना था कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। यदि लोग नियमों का पालन नहीं करते हैं और बाजार में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री जारी रहती है, तो ऐसे आदेशों का वास्तविक प्रभाव सीमित रह जाता है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण पहले से प्रदूषित हवा को और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में अदालत ने जनभागीदारी और जागरूकता को प्रदूषण नियंत्रण के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखने का संकेत दिया। दिवाली में पटाखों की परंपरा पर भी अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने दिवाली के साथ पटाखों के जुड़ने के ऐतिहासिक संदर्भ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मूल रूप से दिवाली में पटाखे जलाने की परंपरा नहीं थी। समय के साथ बारूद और आतिशबाजी के इस्तेमाल के बाद यह गतिविधि त्योहार का हिस्सा बन गई। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि बारूद के इस्तेमाल का चलन लगभग 14वीं और 15वीं शताब्दी के दौरान बढ़ा और बाद में आतिशबाजी त्योहारों के उत्सव से जुड़ गई। अदालत की इस टिप्पणी का उद्देश्य यह रेखांकित करना था कि दिवाली की मूल भावना रोशनी और उत्सव से जुड़ी है, न कि अनिवार्य रूप से पटाखे जलाने से। इस दृष्टिकोण के आधार पर अदालत ने लोगों को पारंपरिक उत्सव की भावना बनाए रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पटाखों में बेरियम की मात्रा पर भी विचार कर रहा है सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट केवल पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों और उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रहा है। अदालत पटाखों में बेरियम की स्वीकार्य मात्रा से संबंधित मुद्दे पर भी विचार कर रही है। बेरियम कुछ प्रकार की आतिशबाजी में रंग और प्रभाव पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस रसायन की मात्रा और उसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर अदालत के सामने सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि बेरियम की स्वीकार्य मात्रा से जुड़े मुद्दे पर दिवाली के बाद सुनवाई की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि अदालत पटाखों के नियमन को केवल बिक्री और इस्तेमाल के प्रतिबंध के रूप में नहीं, बल्कि उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और पर्यावरणीय प्रभावों के व्यापक संदर्भ में भी देख रही है। याचिकाकर्ताओं ने पटाखों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने पटाखों के निर्माण और बिक्री से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार नियामकीय प्रक्रिया और संबंधित पक्षों से परामर्श पूरा करने के लिए दो सप्ताह का समय मांग रही है, जबकि इस दौरान बाजार में पटाखों की बिक्री और परिवहन जारी है। याचिकाकर्ता ने पटाखों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका तर्क था कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण लोगों के जीवन के अधिकार के लिए खतरा पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पटाखा उद्योग में बाल श्रम और भंडारण से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, केवल प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीमित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पटाखों के निर्माण और उनकी आपूर्ति व्यवस्था पर भी प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जब तक प्रभावी नियामकीय व्यवस्था तैयार नहीं होती, तब तक पटाखों पर प्रतिबंध जारी रखा जाना चाहिए। एमिकस क्यूरी ने बताया पटाखों के धुएं से स्वास्थ्य को खतरा सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं और सूक्ष्म कणों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि आतिशबाजी से कई प्रकार की हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण निकलते हैं। इनमें पीएम 2.5 जैसे प्रदूषक भी शामिल हैं, जो सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। पीएम 2.5 बेहद छोटे आकार के प्रदूषणकारी कण होते हैं। इनके फेफड़ों तक पहुंचने और शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने की आशंका रहती है। अपराजिता सिंह ने डॉक्टरों के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसका असर बच्चों और धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाजार में कई पटाखों को ग्रीन क्रैकर्स बताकर बेचा जा रहा है, जबकि उनकी वास्तविक पहचान और प्रमाणिकता की जांच के लिए भरोसेमंद व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, ग्रीन क्रैकर्स भी पूरी तरह प्रदूषणमुक्त नहीं होते। वे पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन इससे उनका पर्यावरणीय प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता। एमिकस क्यूरी ने अदालत से आग्रह किया कि जब तक प्रभावी निगरानी और नियमन की व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक प्रतिबंध जारी रखा जाए। पटाखा निर्माताओं ने पूर्ण प्रतिबंध का किया विरोध दूसरी ओर, पटाखा निर्माताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जे. साई दीपक ने पूर्ण प्रतिबंध की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से समस्या समाप्त नहीं होती, बल्कि इससे अवैध बाजार को बढ़ावा मिल सकता है। उनका कहना था कि प्रतिबंध के कारण चीनी पटाखों की तस्करी और बिना लाइसेंस वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे उत्पाद निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन किए बिना बाजार में पहुंच सकते हैं। साई दीपक ने कहा कि पटाखा उद्योग पहले से ही विस्फोटक अधिनियम के तहत नियमन के दायरे में आता है। इसलिए नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से क्यूआर कोड संबंधी नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और कहा कि जिन निर्माताओं द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाता, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। निर्माताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है, लेकिन नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को भी उन लोगों की गलतियों के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है जो नियमों का उल्लंघन करते हैं। उनका कहना था कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय मौजूदा नियामकीय व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना अधिक उपयोगी होगा। दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और तैयारियों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि दिल्ली में मौजूद 39 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से केवल नौ ही चालू क्यों थे। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने अधिकारियों से निरीक्षण व्यवस्था, प्रवर्तन टीमों की संख्या और अवैध रूप से पटाखे बेचने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण मांगा। इस दौरान दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि वायु प्रदूषण दिल्ली के सामने हर साल आने वाली गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए कई उपाय लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर तैयारी के साथ प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास कर रही है। 1 नवंबर से दिल्ली में लागू होगी नई वाहन व्यवस्था ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से एक नई योजना शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए बीएस-6 उत्सर्जन मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। इस कदम का उद्देश्य राजधानी में बाहर से आने वाले वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। सरकार ने यातायात का दबाव कम करने के लिए सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया है। इसके अलावा निर्माण स्थलों के आसपास एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं। अदालत को बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न योजनाएं, नियंत्रण केंद्र और एयर वार्डन भी तैनात किए गए हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार, राजधानी में कुल 608 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं। इनका इस्तेमाल निर्माण गतिविधियों और धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत किया जा रहा है। ऐश्वर्या भाटी ने यह भी स्वीकार किया कि जिन दिनों पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति रही है, उन दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर अधिक दर्ज किया गया। दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण बना बड़ी चुनौती दिल्ली में दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसमी परिस्थितियां पहले से ही वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई से यह स्पष्ट है कि अदालत केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दे रही है। विराट कोहली जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा सकता है। लोकप्रिय हस्तियों की पहुंच समाज के बड़े वर्ग तक होती है और उनके संदेश का प्रभाव विशेष रूप से युवाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान केवल जनजागरूकता से संभव नहीं है। इसके लिए सरकारी निगरानी, नियमों का सख्त पालन, अवैध पटाखों की बिक्री पर रोक और नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट पटाखों के नियमन, ग्रीन क्रैकर्स की प्रमाणिकता, बेरियम की मात्रा और दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण तैयारियों जैसे मुद्दों पर विचार कर रहा है। दिवाली के बाद होने वाली अगली सुनवाई में इन विषयों पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।