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    बालिका शिक्षा की सारथी :डॉ स्वाति जैन मैट्रिआर्क अवार्ड से सम्मानित

    ए के एस फाउंडेशन एवं ग्रोथड के संयुक्त तत्वावधान में कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ राजस्थान में आयोजित एक भव्य समारोह में सुबोध पीजी महिला महाविद्यालय रामबाग की प्राचार्या डॉ. स्वाति जैन को 'द मैट्रिआर्क अवार्ड ” से नवाज़ा गया। यह सम्मान उन्हें बालिका शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। समारोह में अनेक गणमान्य राजनीतिक हस्तियों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के संयोजक ऋषभ माथुर एवं अनीता माथुर ने बताया कि डॉ. जैन को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण एवं प्रेरणादायी नेतृत्व तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के सतत प्रयासों के लिए दिया गया है। डॉ. जैन के नेतृत्व में महाविद्यालय की 50 से अधिक छात्राएं गत वर्ष सिविल एवं अन्य राजकीय सेवाओं में चयनित हुई हैं एवं विश्वविद्यालय की वारियता सूची मे उत्कृष्ट स्थान पाया है l पुरस्कार ग्रहण करने के पश्चात डॉ. स्वाति जैन ने कहा, "यह सम्मान सुबोध परिवार की हर उस बेटी का है जो बड़े सपने देखती है। एक शिक्षित बेटी केवल परिवार नहीं, पूरे समाज की दिशा बदलती है। बालिका शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र का आधार है।"  

    उन्नत भारत अभियान के तहत बियानी लॉ कॉलेज द्वारा दो दिवसीय सर्वे एवं जागरूकता अभियान आयोजित

    ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक सहायता शिविर, नुक्कड़ नाटक व सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता कार्यक्रम संपन्न जयपुर। बियानी लॉ कॉलेज की टीम द्वारा भारत सरकार की ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वाकांक्षी परियोजना ‘उन्नत भारत अभियान’ के तहत 16 एवं 17 मई 2026 को दो दिवसीय सर्वे एवं जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी एवं डायरेक्टर डॉ. प्रो. संजय बियानी के निर्देशन में संचालित किया गया।   इस अभियान के तहत डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने बताया कि यह कार्यक्रम ‘उन्नत भारत अभियान’ के अंतर्गत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण भारत की समस्याओं, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को समाज सेवा, व्यवहारिक ज्ञान एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत संचालित नई शिक्षा व्यवस्थाओं से जोड़ते हैं।   अभियान के अंतर्गत बियानी लॉ कॉलेज द्वारा बिचपरी,गोविंदपुरा, जयचंदपुरा, जयभवानीपुरा, नटलालपुरा, नीमरा सहित पाँच गाँवों में सर्वे कार्य किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचकर लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।   बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी एवं सीए साक्षी बियानी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने शिक्षकों के साथ मिलकर निःशुल्क विधिक सहायता शिविर लगाया। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को सामाजिक जागरूकता एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।   इस दो दिवसीय अभियान में यूबीए पीआई को-ऑर्डिनेटर कुसुम सैनी एवं विधि संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनम रत्नू के साथ 20 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझा तथा उन्हें आवश्यक कानूनी एवं सामाजिक जानकारी प्रदान की।   कार्यक्रम के सफल आयोजन पर बियानी लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार वर्मा एवं बियानी गर्ल्स कॉलेज के डीन व प्राचार्य डॉ. ध्यानसिंह गोठवाल ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए इस पहल को समाजहित में महत्वपूर्ण बताया।  

    जेईई एडवांस्ड 2026ःफिजिक्स करेगी स्टूडेंट्स की रैंक निर्धारित विनोद कुमावत, प्रेसिडेंट, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट, कोटा

    देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजिनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड-2026 रविवार को दो पारियों में आयोजित हुई। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा के प्रेसिडेंट विनोद कुमावत ने बताया कि विद्यार्थियों से मिले फीडबैक के अनुसार पेपर मध्यम से कठिन स्तरीय रहा। पेपर 1 में कुल 16 प्रश्न प्रत्येक विषय में पूछे गए जिसमें चार मल्टीपल च्वाइस प्रश्न, चार सिंगल करेक्ट, चार न्यूमेरिकल प्रश्न एवं चार प्रश्न मैचिंग लिस्ट के थे। पेपर 2 में 18 प्रश्न प्रत्येक विषय में पूछे गए थे। इसमें चार सिंगल करेक्ट, पांच मल्टीपल, पांच न्यूमेरिकल एवं दो पैराग्राफ थे। जिनके आंसर न्यूमेरिकल थे। पेपर का लेवल जिस तरह से कोटा में माॅक टेस्ट की तैयारी कराई गई थी, वैसे ही कई सारे प्रश्न विद्यार्थियों को पेपर में देखने को मिले। इस बार फिजिक्स के पेपर का लेवल देखकर उसे रैंक निर्धारण का आधार बताया जा रहा हैं। क्योंकि तीनों विषयों में सबसे अच्छा पेपर फिजिक्स का रहा है।   फिजिक्स फिजिक्स के पेपर ओवरआॅल लेन्दी रहा और पिछले सालों की तुलना में कठिन रहा। कैलकुलेशन ने बच्चों को उलझाए रखा एवं इनोवेटिव यानी नए तरीके से प्रश्नों को पूछा गया था। सिलेबस में जो नए टाॅपिक्स जोड़े गए थे, उनसे कोई प्रश्न नहीं पूछा गया। पेपर में 12वीं कक्षा के सिलेबस का वेटेज ज्यादा रहा। पेपर 1 की तुलना में पेपर 2 ज्यादा कठिन और लेन्दी रहा। सारे प्रश्न जेईई एडवांस्ड के टाॅपिक से पूछे गए थे।   कैमिस्ट्री कैमिस्ट्री के पेपर में आॅर्गेनिक कैमिस्ट्री के प्रश्नों का वेटेज ज्यादा रहा। आॅर्गेनिक कैमिस्ट्री का पेपर 1 आसान रहा और पेपर 2 मोडरेट और लेन्दी रहा। अधिकतर सवाल स्टैंडर्ड रिएक्शन और मल्टीपल कंसेप्ट्स पर आधारित थे। इनआॅर्गेनिक कैमिस्ट्री का पेपर 1 आसान से मध्यम स्तरीय रहा। पेपर 2 मध्यम से स्तरीय रहा। सारे प्रश्न सिलेबस से पूछे गए थे एवं सबसे ब्लाॅक कैमिस्ट्री का वेटेज अच्छा रहा। फिजीकल कैमिस्ट्री का पेपर 1 आसान रहा जबकि पेपर 2 आसान से मध्यम स्तरीय रहा। साॅलिड स्टेट और रीयल गैस से एक भी प्रश्न नहीं पूछा गया। सभी प्रश्न जेईई एडवांस्ड के सिलेबस से पूछे गए थे।   मैथ्स मैथ्स का पेपर हमेशा की तरह लेन्दी एवं इनोवेटिव रहा। सिलेबस में जोडे गए नए टाॅपिक्स से दो-दो प्रश्न पूछे गए। काॅनिक सेक्शन व परम्यूटेशन एंड काॅम्बिनेशन के प्रश्नों की संख्या सामान्य से ज्यादा रही। पेपर में 11वीं एवं 12वीं कक्षा से पूछे गए प्रश्नों का वेटेज लगभग एक समान रहा। प्रोबेबिलिटी और डेफिनेट इंटीग्रेशन के प्रश्नों की संख्या पिछले सालों की तुलना में कम रही। ....… ये रही मार्किंग स्कीम कुल प्रश्नपत्र = 360 अंक पेपर-1 16 सवाल प्रति विषय 4 सवाल - 16 अंक = मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन = प्लस 4, माइनस 1  4 सवाल = 12 अंक = सिंगल च्वाइस क्वेश्चन = प्लस 3, माइनस 1 4 सवाल = 16 अंक = इंटीजर टाइप = प्लस 4, माइनस 0 4 सवाल = 16 अंक = मैच द लिस्ट - प्लस 4, माइनस 1 कुल = 60 अंक प्रति विषय फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स तीनों विषय = 48 सवाल = 180 अंक पेपर-2 18 सवाल प्रति विषय 4 सवाल = 8 अंक = दो पैराग्राफ = प्लस 2, माइनस 0  4 सवाल = 12 अंक = सिंगल च्वाइस क्वेश्चन = प्लस 3, माइनस 1 5 सवाल = 20 अंक = मल्टीपल करेक्ट प्लस = प्लस 4, माइनस 1 5 सवाल = 20 अंक = इंटीजर टाइप = प्लस 4, माइनस 1 कुल = 60 अंक प्रति विषय फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स तीनों विषय = 54 सवाल = 180 अंक  

    मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स का दूसरा संस्करण आयोजित, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने दिए 4 कैटेगरी में अवॉर्ड, प्रतिभाओं को मिला सम्मान

    -- प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा को मिला अवॉर्ड जयपुर। मनोज माथुर फाउंडेशन की ओर से गुरुवार को राजधानी जयपुर के सी-स्कीम स्थित एक होटल में “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स” के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में ज़ी राजस्थान न्यूज के चैनल हेड मनीष शर्मा खास तौर पर मौजूद रहे । कार्यक्रम में मनोज माथुर फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं स्वर्गीय मनोज माथुर की धर्मपत्नी सुलक्षणा माथुर मौजूद रहीं। मंच पर नेटवर्क 18 राजस्थान के एडिटर अमित भट्ट और टाइम्स ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर आशीष दत्ता भी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड” से सम्मानित किया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया श्रेणी में Dev Ankur Wadhawan, प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा, डिजिटल मीडिया श्रेणी में सौरभ गृहस्थी तथा फोटो जर्नलिज्म श्रेणी में फोटो जर्नलिस्ट Purushottam Diwakar को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सार्थक पहल बताया और इसके लिए मनोज माथुर फाउंडेशन को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि मनोज माथुर ने हमेशा पत्रकारिता के वास्तविक मूल्यों और सिद्धांतों के साथ कार्य किया, जिसका अनुसरण आज के पत्रकारों को भी करना चाहिए।उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व केवल खबर का सच सामने लाना है और उसमें व्यक्तिगत विचारों या पूर्वाग्रहों का समावेश नहीं होना चाहिए। राजे ने कहा कि निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

    मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स का दूसरा संस्करण आयोजित, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने दिए 4 कैटेगरी में अवॉर्ड

    -- प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा को मिला अवॉर्ड   जयपुर। मनोज माथुर फाउंडेशन की ओर से गुरुवार को राजधानी जयपुर के सी-स्कीम स्थित एक होटल में “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स” के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में ज़ी राजस्थान न्यूज के चैनल हेड मनीष शर्मा खास तौर पर मौजूद रहे ।   कार्यक्रम में मनोज माथुर फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं स्वर्गीय मनोज माथुर की धर्मपत्नी सुलक्षणा माथुर मौजूद रहीं। मंच पर नेटवर्क 18 राजस्थान के एडिटर अमित भट्ट और टाइम्स ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर आशीष दत्ता भी उपस्थित रहे।   समारोह के दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड” से सम्मानित किया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया श्रेणी में Dev Ankur Wadhawan, प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा, डिजिटल मीडिया श्रेणी में सौरभ गृहस्थी तथा फोटो जर्नलिज्म श्रेणी में फोटो जर्नलिस्ट Purushottam Diwakar को सम्मानित किया गया।   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सार्थक पहल बताया और इसके लिए मनोज माथुर फाउंडेशन को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि मनोज माथुर ने हमेशा पत्रकारिता के वास्तविक मूल्यों और सिद्धांतों के साथ कार्य किया, जिसका अनुसरण आज के पत्रकारों को भी करना चाहिए।उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व केवल खबर का सच सामने लाना है और उसमें व्यक्तिगत विचारों या पूर्वाग्रहों का समावेश नहीं होना चाहिए। राजे ने कहा कि निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।  

    मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स का दूसरा संस्करण आयोजित, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिए 4 कैटेगरी में अवॉर्ड

    -- प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा को मिला अवॉर्ड   जयपुर। मनोज माथुर फाउंडेशन की ओर से गुरुवार को राजधानी जयपुर के सी-स्कीम स्थित एक होटल में “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड्स” के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में ज़ी राजस्थान न्यूज के चैनल हेड मनीष शर्मा खास तौर पर मौजूद रहे ।   कार्यक्रम में मनोज माथुर फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं स्वर्गीय मनोज माथुर की धर्मपत्नी सुलक्षणा माथुर मौजूद रहीं। मंच पर नेटवर्क 18 राजस्थान के एडिटर अमित भट्ट और टाइम्स ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर आशीष दत्ता भी उपस्थित रहे।   समारोह के दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को “मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड” से सम्मानित किया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया श्रेणी में Dev Ankur Wadhawan, प्रिंट मीडिया श्रेणी में दैनिक भास्कर के सीनियर रिपोर्टर अर्पित शर्मा, डिजिटल मीडिया श्रेणी में सौरभ गृहस्थी तथा फोटो जर्नलिज्म श्रेणी में फोटो जर्नलिस्ट Purushottam Diwakar को सम्मानित किया गया।   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सार्थक पहल बताया और इसके लिए मनोज माथुर फाउंडेशन को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि मनोज माथुर ने हमेशा पत्रकारिता के वास्तविक मूल्यों और सिद्धांतों के साथ कार्य किया, जिसका अनुसरण आज के पत्रकारों को भी करना चाहिए।उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व केवल खबर का सच सामने लाना है और उसमें व्यक्तिगत विचारों या पूर्वाग्रहों का समावेश नहीं होना चाहिए। राजे ने कहा कि निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।  

    203 ग्लोबल कंपनियों से 2104 ऑफर्स : फॉर्च्यून कंपनियों में चमके जेईसीआरसी के छात्र

    2027 प्लेसमेंट के लिए कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम से हो रही विशेष तैयारी   150 से ज़्यादा अनुभवी ट्रेनर्स देंगे टेक्निकल और कम्युनिकेशन स्किल्स ट्रेनिंग    जयपुर    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी  के छात्रों को अब तक 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स मिल चुके हैं। यह उपलब्धि छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय की बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है।   इस वर्ष 2026 में  203 देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के छात्रों का चयन किया है। इस प्लेसमेंट सीजन में छात्रों को मिला सर्वोच्च पैकेज 33 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा,  कुल ऑफर्स में से 35 प्रतिशत ऑफर्स फॉर्च्यून 500 कंपनियों द्वारा दिए गए हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय ने कैपजेमिनी के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किया है, जिससे छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।   इस वर्ष प्लेसमेंट में 40 प्रतिशत छात्राओं का चयन हुआ है, जो समान अवसर और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न स्कूलों में टियर-1 और टियर-2 कंपनियां लगातार भर्ती के लिए आ रही हैं। हर क्षेत्र और हर डोमेन में छात्रों के लिए नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।   इस वर्ष एचपी, कैपजेमिनी, डाबर, ब्लिंकिट, जोमैटो, माइंडट्री, कॉग्निजेंट, वॉचगार्ड, जेके सीमेंट, ताज ग्रुप ऑफ होटल्स, बालाजी टेलीफिल्म्स, ऐड फैक्टर, डेंट्सू, क्विंट, ओबरॉय होटल्स और कई अन्य प्रतिष्ठित कंपनिया प्लेसमेंट के लिए आई |   इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2027 के प्लेसमेंट सीजन की तैयारी भी शुरू कर दी है। बदलते जॉब मार्केट और उसमें आ रही चुनौतियों को समझते हुए विश्वविद्यालय ने माना है कि आने वाला प्लेसमेंट सीजन पहले जैसा नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखकर विशेष कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग (CRT) कार्यक्रम को नए तरीके से तैयार किया गया है, ताकि छात्र हर परिस्थिति के लिए पहले से तैयार रहें। इस पहल का मकसद है कि विद्यार्थी न सिर्फ आसानी से प्लेस हों, बल्कि किसी भी चुनौती के बीच आत्मविश्वास के साथ खुद को साबित कर सकें और हर बदलते माहौल में मजबूती से खड़े रहें।   यह 75 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं। इस दौरान छात्रों को कुल 499 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस वर्ष इस कार्यक्रम में 3800 से ज़्यादा  छात्र भाग ले रहे हैं। सीआरटी  के तहत छात्रों को एप्टीट्यूड, लॉजिकल रीजनिंग, तकनीकी ज्ञान, समूह चर्चा, इंटरव्यू स्किल्स, सॉफ्ट स्किल्स और कम्युनिकेशन स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, मॉक इंटरव्यू और एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट  के माध्यम से उन्हें वास्तविक भर्ती प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 150 प्रशिक्षक जुड़े हुए हैं, जिनमें आंतरिक और बाहरी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें से 45 प्रशिक्षक देश के विभिन्न हिस्सों से आए हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए 100 सदस्यीय टीम कार्य कर रही है।   जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को ऐसा ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास देना है, जो उन्हें जीवन और करियर की हर चुनौती के लिए तैयार करे। 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे छात्र न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट हैं, बल्कि उद्योग जगत की अपेक्षाओं पर भी पूरी तरह खरे उतर रहे हैं। हमें गर्व है कि जेईसीआरसी के छात्र देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर छात्र अपने सपनों को साकार करे और एक सफल भविष्य की मजबूत नींव रखे।"   आने वाले प्लेसमेंट सीजन के लिए जेईसीआरसी में 400 से अधिक कंपनियों आएंगी | जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें सफल, आत्मविश्वासी और उद्योग के लिए पूरी तरह तैयार बनाना है। 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स की उपलब्धि और 2027 के लिए शुरू किया गया कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

    शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को सशक्त बनाने हेतु पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) एवं पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू हस्ताक्षरित

    - एमओयू के अंतर्गत पूर्निमा यूनिवर्सिटी में यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (YCC) की स्थापना जयपुर: पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) ने पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.), एक अग्रणी अखिल भारतीय कम्युनिकेशन एक्सचेंज मंच है जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। इस समझौते का उद्देश्य जनसंपर्क, पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, इंडस्ट्री इंटरैक्शन तथा व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना है।   यह एमओयू 15 मई 2026 को PRCI जयपुर चैप्टर के चेयरमैन सोमेन्द्र हर्ष एवं पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. देवेन्द्र सोमवंशी द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर मीडिया एवं शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें सनी कुलश्रेष्ठ, सचिव, PRCI, प्रो. मंजरी राय, प्रो प्रेसिडेंट- FPA and FDA, पूर्निमा यूनिवर्सिटी; तथा डॉ. जितेन्द्र शर्मा, डीन, फैकल्टी ऑफ डिजाइन आर्ट्स (FDA), पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रमुख रूप से शामिल रहे।   इस अवसर पर पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (PRCI) जयपुर चैप्टर के जॉइंट सेक्रेटरी, डॉ. राहुल बाबू कोडाली तथा पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की डॉ. आस्था सक्सेना, हेड, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, को एमओयू के समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया।   इस सहयोग का उद्देश्य दोनों संस्थाओं के मध्य शैक्षणिक एवं शोध संबंधों को मजबूत बनाना है, जिससे विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों एवं संचार क्षेत्र के पेशेवरों को लाभ मिल सके। इस साझेदारी के अंतर्गत इंडस्ट्री विशेषज्ञों, शिक्षकों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स तथा पब्लिक रिलेशंस एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन से संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से वर्कशॉप, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, संगोष्ठी, पीआर क्लब गतिविधियां, इवेंट मैनेजमेंट पहल एवं प्रकाशन संपादन परियोजनाओं का आयोजन करेंगी। साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में शोध प्रकाशनों, शैक्षणिक संसाधनों एवं व्यावसायिक विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।   एमओयू की एक प्रमुख विशेषता पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (YCC) की स्थापना है। यह क्लब विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त समन्वयक के मार्गदर्शन में संचालित होगा तथा विद्यार्थियों को नेतृत्व, संचार कौशल एवं इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कार्यक्रमों के माध्यम से पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) जयपुर चैप्टर गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ेगा।   दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा तथा मीडिया एवं संचार क्षेत्र में इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के संबंधों को और अधिक सशक्त बनाएगा।   यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा ग्राम जयरामपुरा और दौलतपुरा में 'समावेशी विकास के लिए वित्तीय समावेशन' पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित

    विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व एवं उन्नत भारत अभियान के तहत हुआ कार्यक्रम आयोजन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी सार्थक परिचर्चा   जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय की टीम द्वारा 'समावेशी विकास के लिए वित्तीय समावेशन' विषय पर दो विशेष जागरूकता सत्रों का आयोजन किया गया।   नोडल अधिकारी व लाइफ़लॉंग लर्निंग विभाग के निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम राज्यपाल राजस्थान हरिभाऊ बागड़े एवं कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा के कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व (यू एस आर) स्कीम एवं भारत सरकार की ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वाकांक्षी परियोजना “उन्नत भारत अभियान” के तहत आयोजित किया गया। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए प्रावधानों और वित्तीय साक्षरता के प्रति जागरूक करना है।   प्रथम सत्र: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयरामपुरा कार्यक्रम के प्रथम सत्र का आयोजन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयरामपुरा में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए किया गया। सत्र की शुरुआत में श्रीमती अंबू वर्मा ने विश्वविद्यालय की टीम का स्वागत किया और इस ज्ञानवर्धक पहल के लिए आभार व्यक्त किया।   राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में एनईपी के तहत संचालित किए जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों और उनके महत्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।   वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता सीएस भुवन अग्रवाल ने वित्तीय समावेशन की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, अटल पेंशन योजना, जन आधार योजना और चिरंजीवी योजना के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल बैंकिंग, बैंक ऋण प्रक्रियाओं और मीशो व अमेज़न जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसाय करने के आधुनिक तरीकों की भी जानकारी दी। इस सत्र में स्कूली विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान किया।   द्वितीय सत्र: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा कार्यक्रम का दूसरा सत्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा में परिचर्चा के रूप में विशेष रूप से स्कूल टीचर्स एवं आम ग्रामीणों के लिए आयोजित किया गया। यहाँ कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्या श्रीमती सुमन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का स्वागत किया और ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सत्रों की उपयोगिता को रेखांकित किया ।   कोर्स स्ट्रीम और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने इस सत्र में एनईपी के तहत कोर्स स्ट्रीम में हुए नए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से 'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट' सिस्टम के बारे में बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार पढ़ाई छोड़ने और दोबारा शुरू करने की अनूठी आजादी देती है ।   एनईपी में वित्तीय समावेशन विशेषज्ञ सीएस भुवन अग्रवाल ने इस सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण और इसके व्यावहारिक महत्व पर चर्चा की, ताकि विद्यार्थी भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस विशेष सत्र के आयोजन के लिए सभी शिक्षकों ने राजस्थान विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया ।  

    राजस्थान में नरेगा बहाली और वीबी-ग्रामजी कानून रद्द करने की मांग तेज

     *मनरेगा ग्रामीण गरीबों की जीवन-रेखा है, इसे खत्म करना करोड़ों मजदूर परिवारों की आजीविका पर हमला है- निखिल डे*     *मनरेगा पर हमला मतलब ग्रामीण गरीबों की रोटी, सम्मान और जीने के अधिकार पर हमला, मजदूर इसका जवाब संघर्ष से देंगे -मुकेश निर्वासित*     *काम मांगो अभियान” की राज्यव्यापी शुरुआत, राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन*  जयपुर सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के नेतृत्व में आज पूरे राजस्थान में नरेगा बहाली तथा वीबी-ग्रामजी कानून को रद्द करने की मांग को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों एवं ग्राम पंचायतों में मजदूरों, ग्रामीणों, महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे तथा “काम मांगो अभियान” की शुरुआत की। आज भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सिरोही, सीकर, जयपुर, डीग, डूंगरपुर सहित अनेक जिलों में विरोध प्रदर्शन, रैलियाँ एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित हुए। देवगढ़ की ग्राम पंचायत लसानी, भीम की ग्राम पंचायत कालदेह, कूकरखेड़ा , डूंगरपुर के बीछीवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र, ब्यावर जिले के बदनोर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बदनोर, छतरपुरा, गिरधरपुरा एवं मोगर, जवाजा की ग्राम पंचायत बामनहेड़ा एवं आसान रावतमाल, कोटड़ा तथा भीलवाड़ा जिले की करेडा पंचायत समिति की थाना, शिवपुर और नारेली ज्ञानगढ़ सहित कई पंचायतों में मजदूरों ने ज्ञापन देकर नरेगा को बहाल करने और वीबी-ग्रामजी कानून वापस लेने की मांग उठाई। आज से शुरू हुए “काम मांगो अभियान” के तहत पूरे राजस्थान में ग्रामीण मजदूरों द्वारा रोजगार की मांग के आवेदन पंचायतों और प्रशासन को दिए गए। अभियान के कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर मजदूरों को उनके रोजगार अधिकारों की जानकारी दी तथा अधिक से अधिक परिवारों को काम मांगने के लिए प्रेरित किया। अभियान का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रोजगार कोई दया नहीं बल्कि कानूनी अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराए। मनरेगा कानून लाने के लिए हुए ऐतिहासिक आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले एवं सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक निखिल डे ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों की जीवन-रेखा है। मनरेगा ने आर्थिक मंदी, सूखा, कोरोना महामारी और ग्रामीण संकट के दौर में सुरक्षा कवच का काम किया था। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि वीबी-ग्रामजी कानून जरिए रोजगार गारंटी की मूल भावना को खत्म किया जा रहा है। पहले मजदूर पूरे 12 महीने काम की मांग कर सकते थे, लेकिन अब केंद्र सरकार अपने हिसाब से कभी भी दो महीने तक काम बंद कर सकती है। इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर होगा और पंचायतों का काम की योजना बनाने का अधिकार भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 125 दिन रोजगार देने का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाएगा क्योंकि पहले जैसी मजबूत कानूनी गारंटी अब नहीं बचेगी। मनरेगा के क्रियान्वयन, मजदूरों के रोजगार अधिकार और ग्रामीण आजीविका के सवालों पर लंबे समय से सक्रिय रूप से कार्य कर रहे तथा राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के सचिव मुकेश निर्वासित ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के वित्तीय ढांचे में किया गया बदलाव ग्रामीण भारत के रोजगार अधिकार पर सीधा हमला है। पहले इस योजना के श्रम मद का पूरा वित्तीय दायित्व केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 60:40 के अनुपात में 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। राजस्थान जैसे राज्य, जो पहले से लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के दबाव में हैं, उनके लिए इस योजना को प्रभावी ढंग से चलाना बेहद कठिन हो जाएगा। यह केवल बजट का प्रश्न नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूर परिवारों के जीवन, सम्मान और आजीविका का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में रोजगार देना चाहती है तो उसे बजट घटाने और मनरेगा को खत्म करने के बजाय मनरेगा को और मजबूत करना चाहिए। आज गांवों में मजदूर काम मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय अधिकार छीनने की तैयारी कर रही है। यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय दोनों के खिलाफ है। उन्होंने मनरेगा के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में राजस्थान में मानव दिवसों में भारी गिरावट दर्ज हुई है। MIS रिपोर्ट 5.1.4 के अनुसार अप्रैल 2025 में राज्य में 216.05 लाख मानव दिवस सृजित हुए थे, जबकि अप्रैल 2026 में यह घटकर केवल 76.76 लाख रह गए। यानी कुल मिलाकर लगभग 64.47 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि कई जिलों में रोजगार में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इनमें भरतपुर में 82.24 प्रतिशत, बाड़मेर में 82 प्रतिशत, सीकर में 75.93 प्रतिशत, हनुमानगढ़ में 75.92 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 73.98 प्रतिशत, टोंक में 72.40 प्रतिशत, अलवर में 71.98 प्रतिशत और झुंझुनूं में 71.62 प्रतिशत की गिरावट शामिल है। इसके अलावा पाली, सिरोही, प्रतापगढ़, दौसा और भीलवाड़ा जैसे जिलों में भी रोजगार के अवसरों में भारी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लाखों ग्रामीण मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाया। इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार द्वारा नए कानून और नई व्यवस्थाओं के नाम पर केवल झूठे वादे किए जा रहे हैं तथा ग्रामीण मजदूरों के साथ धोखा किया गया है। 125 दिन रोजगार का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि मजदूरों को 25 दिन काम मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है। अभियान से जुड़े साथियों ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों को आर्थिक शोषण और पलायन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे समय में इस कानून को कमजोर करना ग्रामीण रोजगार अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी तरह मजदूर भी अपने रोजगार अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करेंगे।  *अभियान की प्रमुख मांगें:*  1. मनरेगा को पूर्व स्वरूप में पूर्ण कानूनी गारंटी के साथ बहाल किया जाए। 2. वीबी-ग्रामजी कानून को तत्काल वापस लिया जाए। 3. ग्रामीण परिवारों को मांग पर न्यूनतम 200 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए। 4. रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। 5. सभी लंबित मजदूरी भुगतान तुरंत जारी किए जाएं। 6. पंचायतों को योजना निर्माण और कार्य चयन के अधिकार वापस दिए जाएं। 7. मजदूरी दर को बढ़ाया जाए।  8. महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों के रोजगार अधिकारों की रक्षा की जाए। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में “काम मांगो अभियान” को और व्यापक रूप से चलाया जाएगा तथा पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक मजदूरों के रोजगार अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा।

    *विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस, राजस्थान में 15 पुनर्विकसित स्टेशन

      जैसलमेर, बूंदी, बाड़मेर, मंडलगढ़ और सोमेसर आदि नवीनतम सुविधाओं के साथ यात्रियों की सेवा कर रहे हैं*   *2 साइड एंट्री, एक और प्लेटफ़ॉर्म, 6 मीटर चौड़ाई के 2 ओवरब्रिज और 9 लिफ्ट के साथ   , अलवर रेलवे स्टेशन को ₹112 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है*   राजस्थान की वास्तुकला, विरासत को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ मिलाते हुए, अलवर स्टेशन का पुनर्विकास तेज़ी से प्रगति पर है: अश्विनी वैष्णव   नई दिल्ली। केन्द्रीय रेल, सूचना और प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक् स और सूचना प्रौदयोगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज राजस् थान में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन् विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया। राज्य मंत्री संजय शर्मा के साथ अन्य गणमान्य व्यक्तियों और वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने भी वर्चुअल रूप से इस कार्यक्रम में भाग लिया।   रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अलवर रेलवे स्टेशन पर 112 करोड़ रुपये का पुनर्विकास कार्य किया जा रहा है। महत्वपूर्ण दिल्ली-जयपुर मार्ग पर महत्वपूर्ण रूप से स्थित, अलवर स्टेशन हर दिन हजारों यात्रियों को खानपान के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करता है। लगातार बढ़ते यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, स्टेशन को बेहतर यातायात प्रबंधन प्रणालियों, पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं, बेहतर आगमन और प्रस्थान क्षेत्रों और आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।    वैष्णव ने कहा कि अलवर रेलवे स्टेशन पर पुनर्विकास कार्य तेज़ी से प्रगति पर है और स्टेशन पूरा होने के बाद एक आधुनिक और सौंदर्यपूर्ण रूप से डिज़ाइन की गई सुविधा के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप अलवर स्टेशन के पुनर्विकास  योजना बनाई गई है कि रेलवे स्टेशनों को शहरों के लिए कनेक्टर के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी कनेक्टिविटी में सुधार के लिए स्टेशन के दोनों ओर प्रवेश सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्टेशन भवनों का निर्माण राजस्थान की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के अनुसार किया जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि आधुनिक प्लेटफ़ॉर्म, फुट ओवरब्रिज, पार्किंग व्यवस्था और यात्री आवाजाही सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।   पुनर्विकास परियोजना के तहत, यात्रियों को स्टेशन के मुख्य और दिव्तीय प्रवेश द्वारों पर बेहतर और निर्बाध प्रवेश और निकास व्यवस्था से लाभ होगा। लगभग 16,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विकसित किया जा रहा नया स्टेशन परिसर, आधुनिक बुनियादी ढांचे और यात्री-केंद्रित सुविधाओं से युक्त होगा। यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त हाई लेवल प्लेटफ़ार्म, 6-मीटर चौड़ाई के 2 फुट ओवरब्रिज का निर्माण और 9 आधुनिक लिफ्ट भी लगायी जा रही हैं।   यात्रियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए निजी वाहनों, टैक्सियों और ऑटो-रिक्शा के लिए पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ़ ज़ोन भी बनाए जा रहे हैं। लगभग 4,500 वर्ग मीटर में नई पार्किंग सुविधा स्टेशन क्षेत्र में और उसके आसपास पहुंच में सुधार करेगी और भीड़भाड़ को कम करेगी। इसके अलावा, वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन के बाहरी क्षेत्र के लिए एक व्यापक यातायात परिसंचरण योजना भी तैयार की गई है।   पुनर्विकास परियोजना में वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए लगभग 1,900 वर्ग मीटर क्षेत्र भी शामिल है। विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं प्रदान करने के अलावा, इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के लिए एक उभरते केंद्र के रूप में अलवर की स्थिति को मज़बूत करने की उम्मीद है।   रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत, अलवर क्षेत्र में तीन स्टेशन, गोविंदगढ़, राजगढ़ और खैरथल पहले ही पूरे हो चुके हैं। पूरे राजस्थान में 85 स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम चल रहा है, जिसमें से 15 स्टेशन अब तक पूरे हो चुके हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि पूर्ण किए गए स्टेशनों में बाड़मेर, बूंदी, दौसा, डीग, देशनोक, फतेहपुर शेखावती, गंगापुर शहर, गोगामेडी, गोविंदगढ़, राजगढ़, खैरथल, जैसलमेर, मंडलगढ़, मंडावर महवा रोड और सोमेसर शामिल हैं। देश भर में, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास के लिए 1,340 स्टेशनों पर कार्य चल रहा है।   श्री वैष्णव ने कहा कि राजस्थान में वर्तमान में 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं तथा एक अमृत भारत एक्सप्रेस भी शुरू की गई है। वैष्णव ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राजस्थान के लिए कई नई रेल सेवाएं भी शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली से जोधपुर और दिल्ली से बीकानेर तक वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं, उदयपुर से अहमदाबाद वंदे भारत एक्सप्रेस, जैसलमेर को दिल्ली से जोड़ने वाली स्वर्ण नगरी एक्सप्रेस, हैदराबाद-जोधपुर (भगत की कोठी) एक्सप्रेस और पुणे-जोधपुर एक्सप्रेस शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान के लिए कुल 46 नई ट्रेनें प्रदान की गई हैं, जिससे राज्य भर में कनेक्टिविटी और यात्री सुविधा में काफ़ी सुधार हुआ है।   रेल मंत्री ने कहा कि राजस्थान के लिए रेलवे बजट आवंटन बढ़कर 10,228 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछली सरकारों में यह लगभग 682 करोड़ रुपये था।   राज्य में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रकाश डालते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि 2014 से राजस्थान में लगभग 3,900 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। मारवाड़ मुंडवा, खेमली, भूपाल सागर, सोनू, हनवंत, मांडलगढ़, न्यू सराधना, हिरनोदा और केरला सहित स्थानों पर दस गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों को पहले ही चालू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जोगीमगरा, लेनला, धानक्या, कोटा जंक्शन, नवलगढ़ और बिरधवाल में छह और कार्गो टर्मिनल निर्माणाधीन हैं, जबकि आठ अतिरिक्त टर्मिनलों के लिए भी मंजूरी दी गई है।   रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे सीमेंट और वस्त्र से लेकर हस्तशिल्प, सेमीकंडक्टर और इंजीनियरिंग उत्पादों तक के क्षेत्रों के लिए देश भर के बंदरगाहों को निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करके राजस्थान में उद्योगों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।   वैष्णव ने कहा कि राजस्थान में कई प्रमुख रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं एक साथ प्रगति पर हैं। इनमें आगरा-बांदीकुई, अजमेर-चित्तौड़गढ़, बीकानेर-लालगढ़, चूरू-सादुलपुर और लुनी-भीलडी रेल मार्गों पर दोहरीकरण कार्य शामिल हैं; धौलपुर-सिरमाथुरा-गंगापुर और देवगढ़ मदरिया-नाथद्वारा सहित गेज परिवर्तन परियोजनाएं; मथुरा और झांसी के बीच तीसरी लाइन ; मथुरा और नागदा के बीच तीसरी और चौथी लाइन ; और नई लाइनें जैसे नीमच-बडी सादडी और पुष्कर-मेड़ता सिटी शामिल ह।   रेल मंत्री ने आगे कहा कि रेवाड़ी-काठूवास और रींगस-सीकर खंड पर दोहरीकरण कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि शिवपुर कलां-कोटा नई लाइन और तारंगा हिल-आबू रोड नई लाइन परियोजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, उमरा-देबारी दोहरीकरण का काम चल रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि राजस्थान के सभी क्षेत्रों तक रेलवे का विकास हो।    भूपेंद्र यादव ने अलवर क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया और कहा कि यात्रियों के लाभ के लिए कई ट्रेन सेवाओं को या तो शुरू किया गया है या विस्तारित किया गया है। श्री यादव ने कहा कि अलवर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास राजस्थान की भव्यता और स्थापत्य पहचान को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक अलवर स्टेशन राज्य के बेहतरीन रेलवे स्टेशनों में से एक के रूप में उभरेगा।  यादव ने क्षेत्र में कई रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास परियोजनाओं को मंजूरी देने और पूरा करने के लिए रेल मंत्रालय को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कनेक्टिविटी में सुधार और परिवहन को आसान बनाकर खैरथल, किशनगढ़ बास, बहरोड़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बहुत लाभ होगा।    भजन लाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान दिल्ली से अपनी निकटता से लाभान्वित हो रहा है, जो राज्य में औद्योगिक और परिवहन कनेक्टिविटी को मज़बूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी, नीमराणा जैसे औद्योगिक केंद्रों को बेहतर रेलवे और परिवहन बुनियादी ढांचे के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए दो प्रमुख रेल कनेक्टिविटी कॉरिडोर की योजना बनाई जा रही है, जिसमें अलवर की ओर एक रेलवे लाइन और बेहरोड की ओर एक आरआरटीएस कॉरिडोर शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से पारंपरिक रेलवे बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम दोनों के साथ एकीकरण में सुधार होगा, और राज्य सरकार उनके कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।   भारतीय रेलवे प्रगति, विश्वास और विकसित नए भारत के प्रतीक के रूप में आगे बढ़ना जारी रखता है। यह प्रत्येक यात्री के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यात्री सुविधाओं को मज़बूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।   अलवर स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संजय शर्मा, उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ, जयपुर मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन सहित गणमान्य अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।