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    फ्यूज़न फेस्ट 2026 के दूसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में मंगलवार को आयोजित ‘फ्यूज़न फेस्ट 2026’ के दूसरे दिन विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक अभिरुचि एवं बहुआयामी प्रतिभा को मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दिन की प्रमुख प्रतियोगिताओं में ‘हेलोवीन डांस रायट ‘म्हारी माटी, म्हारी कहानी’ समूह नाट्य प्रतियोगिता तथा ‘मेलोडीज थ्रू द डिकेड एकल गायन प्रतियोगिता आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने नृत्य, अभिनय और गायन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। ‘हेलोवीन डांस रायट “समूह नृत्य प्रतियोगिता में कंप्यूटर साइंस विभाग के अंकित एवं समूह (जोश सदन) ने विजेता बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं, ‘म्हारी माटी, म्हारी कहानी’ समूह नाट्य प्रतियोगिता में बी.एससी.-बी.एड. विभाग के मनीष एवं समूह (रंग सदन) ने विजेता स्थान प्राप्त किया। ‘‘मेलोडीज थ्रू द डिकेड “एकल गायन प्रतियोगिता में ह्यूमैनिटीज विभाग के सूरज एवं अविरल (तरंग सदन) ने विजेता के रूप में सफलता हासिल की। इस अवसर पर कॉलेज के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और टीम भावना की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम में सोनिया गौड़ एवं दिव्या पाठक ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम का संयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अनिला शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. मोनिका चौहान एवं डॉ. अपर्णा सोनी के निर्देशन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा हेमा सिंह ने कार्यक्रम के समन्वय में सहयोग दिया।फ्यूज़न फेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, मंच अनुभव प्राप्त करने तथा आपसी सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर मिला। इस आयोजन ने महाविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक सहभागिता और सर्वांगीण विकास के वातावरण को और सशक्त बनाया।  

    RTI कानून के 21 वर्ष: नरबदखेड़ा में जनसंघर्ष को किया याद, संग्रहालय के स्थायी भवन की रखी नींव

    दस राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा; बदनोर, जवाजा, जैतारण, भीम और देवगढ़ की सैकड़ों महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ब्यावर। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के 21 वर्ष पूरे होने पर ब्यावर के नरबदखेड़ा में जनमेला आयोजित किया गया। इसमें दस राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, मजदूर-किसान आंदोलन से जुड़े साथियों, युवाओं और आसपास के क्षेत्रों की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। मेले में RTI आंदोलन के इतिहास और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव भी रखी गई। सूचना का अधिकार कानून लंबे जनसंघर्ष का परिणाम है। मजदूरी के भुगतान, सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ राजस्थान के गांवों में उठी आवाज ने जनसुनवाइयों के जरिए राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लिया। मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) सहित अनेक साथियों के प्रयासों से सरकारी रिकॉर्ड तक जनता की पहुंच और जवाबदेही की मांग मजबूत हुई। इसी संघर्ष के फलस्वरूप वर्ष 2005 में RTI कानून बना। आम लोगों के संघर्ष की विरासत सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि सूचना का अधिकार आम लोगों के साहस और भागीदारी से हासिल हुआ। इस आंदोलन ने दिखाया कि साधारण लोग संगठित होकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। ब्यावर, भीम और आसपास के क्षेत्रों की इसमें अहम भूमिका रही है। इस इतिहास को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। निखिल डे ने कहा कि RTI कानून जनता के संघर्ष से मिला अधिकार है, जो नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने और सरकारी कामकाज की जानकारी हासिल करने की ताकत देता है। इसकी मूल भावना की रक्षा करना सामूहिक जिम्मेदारी है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने RTI को जनभागीदारी और सरकारी जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने ब्यावर में RTI कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की निंदा करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की। ब्यावर को ‘RTI सिटी’ के रूप में पहचान दिलाने का संकल्प निरंतर के संपादक रामप्रसाद कुमावत ने ब्यावर को सूचना के अधिकार आंदोलन की ऐतिहासिक पहचान के रूप में स्थापित करने की जरूरत बताई और इसे ‘RTI सिटी’ के रूप में पहचान दिलाने की बात कही। उन्होंने आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए ‘घाघरा पलटन’ के संघर्ष को याद किया। इन महिलाओं ने आंदोलन को मजबूती देने और RTI कानून की मांग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चुन्नी सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार के बाद अब जवाबदेही कानून हासिल करना जरूरी है, ताकि सरकारी व्यवस्था आम जनता के प्रति उत्तरदायी बने। लोगों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने की भागीदारी बदनोर, जवाजा, जैतारण, भीम और देवगढ़ से आई सैकड़ों महिलाओं ने मेले में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने क्षेत्रों में मजदूरी, पेंशन, सरकारी योजनाओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर अधिकार हासिल करने के अनुभव साझा किए। MKSS के साथ काम कर रहे विभिन्न विश्वविद्यालयों के इंटर्न और युवाओं ने भी भागीदारी की। झारखंड से आए सार्थक, सरोज प्रिया, लाल सिंह, प्रवीर, डॉ. शेख, शंकर सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने RTI आंदोलन के इतिहास और मौजूदा चुनौतियों पर विचार रखे। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि सूचना तक पहुंच के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सरकारी कामकाज की निगरानी भी जरूरी है। मेले में विभिन्न स्टॉलों के जरिए आंदोलन, जनअधिकारों और सूचना के अधिकार से जुड़ी सामग्री लोगों तक पहुंचाई गई। जलेबी-पकौड़ी की दुकानों और सामूहिक मेल-मिलाप ने आयोजन को जनसंघर्ष की स्मृतियों, संवाद और आपसी सहयोग का मंच बनाया। RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव रखी। प्रस्तावित संग्रहालय में आंदोलन से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और ऐतिहासिक सामग्री संरक्षित की जाएगी, ताकि सूचना के अधिकार के लिए हुए संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके। SIR में कटे नामों का सर्वे, मताधिकार की रक्षा का संकल्प मेले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ब्यावर विधानसभा क्षेत्र में हटाए गए नामों का जमीनी सर्वे करने का संकल्प लिया गया। सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कितने पात्र मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं और कौन अपने मताधिकार से वंचित होने की आशंका में है। प्रभावित लोगों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा जुड़वाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए लोगों को संगठित करते हुए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से संघर्ष किया जाएगा तथा निर्वाचन अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की जाएगी। लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास मेले का संदेश था कि सूचना का अधिकार, मताधिकार और सरकारी जवाबदेही लोकतंत्र के बुनियादी आधार हैं। इन अधिकारों को हासिल करने और सुरक्षित रखने में जनभागीदारी की निर्णायक भूमिका है। RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव और SIR में हटाए गए नामों की जांच के लिए सर्वे का संकल्प इसी साझा प्रयास की कड़ी हैं।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति के कार्यकाल में प्रशासनिक आदेशों में संशोधन पर राज्यपाल का कड़ा रुख; 15 दिनों में जाँच रिपोर्ट तलब

    RUTA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की शिकायत पर राज्यपाल सचिवालय ने लिया संज्ञान जयपुर. राजस्थान के राज्यपाल और कुलाधिपति ने राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। यह मामला विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति (कुलगुरु) प्रो. अल्पना कटेजा के कार्यकाल से संबंधित है। यह कार्रवाई राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (RUTA) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत अभ्यावेदन (प्रतिनिधित्व) और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर की गई है। शिकायत में प्रो. अल्पना कटेजा के कार्यकाल के दौरान उनके Leave Without Pay (बिना वेतन के अवकाश) से संबंधित एक मूल प्रशासनिक आदेश में लगभग दो वर्ष आठ महीने बाद किए गए संशोधनों पर सवाल उठाए गए हैं। संशोधन की वैधानिकता: पूर्व कुलपति के Leave Without Pay आदेश में कार्यालय आदेश संख्या 1/2026/3459, दिनांक 28.04.2026 द्वारा किए गए संशोधन की कानूनी वैधता।सक्षम प्राधिकारी का अधिकार क्षेत्र: क्या सक्षम प्राधिकारी के पास इस तरह के मूल आदेश को इतने समय बाद संशोधित करने का अधिकार क्षेत्र था? वित्तीय एवं सेवा-संबंधी प्रभाव: इस संशोधन से उत्पन्न होने वाले संभावित वित्तीय और सेवा-संबंधी प्रभावों की जाँच। वित्तीय भुगतानों की जाँच: कार्यकाल के अंतिम तीन महीनों में जारी प्रशासनिक स्वीकृतियों और करोड़ो रुपये के वित्तीय बिलों के भुगतानों की स्वतंत्र जाँच। राज्यपाल सचिवालय के निर्देश डॉ. संजय कुमार के अभ्यावेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए, राज्यपाल सचिवालय ने राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलसचिव को इस संवेदनशील प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक: एफ.1(1)आरबी/2024/पार्ट-1/6713, दिनांक 07 अक्टूबर 2026) के माध्यम से, कुलसचिव को अभ्यावेदन में उल्लिखित सभी बिंदुओं से संबंधित अभिलेखों, पत्रावलियों, कार्यादेशों और भुगतान-संबंधी दस्तावेजों की "गहनता से जाँच" करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यपाल ने इस मामले में 15 दिवस के भीतर विस्तृत जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। डॉ. संजय कुमार की प्रतिक्रिया इस त्वरित कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए, RUTA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने राज्यपाल और राज्यपाल सचिवालय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके अभ्यावेदन और संलग्न दस्तावेजों पर विचार कर नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश देकर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की गरिमा और पारदर्शिता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। आगामी कदम विश्वविद्यालय प्रशासन को अब राज्यपाल सचिवालय के निर्देशों के अनुसार सभी संबंधित दस्तावेजों की गहन जाँच करनी होगी और निर्धारित 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही से जुड़ा एक गंभीर मामला है।  

    टीएसपी क्षेत्र के शिक्षकों की पुनः नियुक्ति के लिए संगठन ने शिक्षा मंत्री का किया अभिनंदन

    शिक्षकों की विभिन्न मांगों पर हुई चर्चा राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में आज संगठन पदाधिकारीयों ने कोटा में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से मुलाकात की। संगठन द्वारा शिक्षको की विभिन्न समस्याओं के बारे में चर्चा की गई। शिक्षा मंत्री को व्याख्याताओं के कोमन सीनियरिटी, तृतीय श्रेणी पदौनति प्रकरण, 1301 शिक्षकों के लिए शैडो पोस्ट सहित वेतन नियमितीकरण,शैक्षिक सम्मेलन की तिथियां सहित अन्य बिंदुओं से अवगत कराया गया। शिक्षा मंत्री द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया गया। संगठन द्वारा टीएसपी क्षेत्र के 75 शिक्षकों को पुनः विभाग में नियुक्ति देने पर‌ स्वागत किया गया। संगठन प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेश सभाध्यक्ष शशिभूषण शर्मा, बूंदी सभाध्यक्ष धनश्याम नकलक , विशेष शिक्षा के अध्यक्ष पवन शर्मा व, कोटा जिला अध्यक्ष धनंजय नागर, जिला मंत्री बालेन्दु चौधरी, हनुमान नागर, विकास पाटीदार , प्रतीक नागर सहित अनेक शिक्षकों द्वारा स्वागत किया गया।

    अनिंद्या, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, खेतड़ी को "स्टैटिसटिकल एनालिसिस ऑफ ह्यूमन हेल्थ रिक्स एसोसिएटेड विद ग्रोइंग एयर पॉल्यूशन इन अर्बन एरिया ऑफ जयपुर ” विषय पर पी एच डी की उपाधि

    अनिंद्या, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, खेतड़ी को "स्टैटिसटिकल एनालिसिस ऑफ ह्यूमन हेल्थ रिक्स एसोसिएटेड विद ग्रोइंग एयर पॉल्यूशन इन अर्बन एरिया ऑफ जयपुर ” विषय पर शोध के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर की ओर से पी एच डी की उपाधि प्रदान की गई। उनके शोध गाइड प्रो. अनिल कुमार भारद्वाज है.  

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    अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की ओर से अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को यूनिसेफ एवं संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित थीम “बाल विवाह का अंत करें और बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करें” पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम तथा बालिकाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की 48 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पोस्टरों के माध्यम से बाल विवाह उन्मूलन, बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा तथा समान अवसर जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में डॉ. सारिका कौल, विभागाध्यक्ष, चित्रकला विभाग एवं डॉ. मोहिता चतुर्वेदी शर्मा, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में प्रिया कुमावत ने प्रथम, कनिका शर्मा ने द्वितीय तथा पूर्वी सिंह, ट्विंकल जांगिड़ एवं सोनिया चौधरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पायल महावर को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। विजेता छात्राओं को कार्यक्रम के निर्णायक गण द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय की निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्राचार्य डॉ सीमा अग्रवाल एवं उप प्राचार्य डॉ रंजुला जैन ने सभी प्रतिभागी छात्राओं एवं विजेताओं को बधाई देते हुए उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए छात्राओं द्वारा अपने पोस्टरों के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संवेदनशीलता और जागरूकता हेतु किये गये प्रर्दशन की प्रशंसा की और सभी छात्राओं को भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा बालिकाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए सदैव सजग एवं प्रयासरत रहने हेतु प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के अंत में सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की संयोजिका डॉ. स्वीटी माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं छात्राओं के प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सदस्य डॉ. दमयंती सोढ़ा, डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. सुरभि माथुर एवं डॉ. पूर्वा भारद्वाज की सक्रिय भूमिका रही।  

    “औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन

    कानोड़िया पी. जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को औषधीय पौधों के महत्व, आयुर्वेद में उनकी भूमिका तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक वनस्पति विज्ञान के बीच संबंधों से परिचित कराना रहा। व्याख्यान में डॉ. निशा शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, राजकीय आयुर्वेद औषधालय, जयपुर, ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्राओं से अपने विचार साझा किये। डॉ निशा शर्मा ने पेठा, अरंडी, प्याज़, तिल, जाती, मोगरा, मेंहदी, वसाका, मुलेठी, धनिया, आमला, बेल, हल्दी, मिर्च, तुलसी, लॉन्ग आदि के औषधीय गुणों, उनके पारंपरिक उपयोगों तथा स्वस्थ्य जीवनशैली में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। साथ ही, पौधों में पाए जाने वाले जैव-सक्रिय घटकों और उनके आयुर्वेदिक औषधीय महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। डॉ. शर्मा ने कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित आयुर्वेदिक ज्ञान की समृद्ध विरासत से अवगत कराने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत उपयोग तथा जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की समस्त प्राध्यापिकाएं एवं 75 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं अपना ज्ञानवर्धन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं में पादपों के औषधीय महत्व, रोगनाशक क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई।

    “ग्राफिक डिज़ाइन विद एआई विषय पर एक प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय में कंप्यूटर साइंस विभाग के द्वारा “ग्राफिक डिज़ाइन विद एआई विषय पर सोमवार को एक प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक ग्राफिक डिज़ाइन के सिद्धांतों और अत्याधुनिक जेनरेटिव एआई टूल्स के बीच की दूरी को कम करना था, जिससे छात्राओं को क्रिएटिव वर्कफ़्लो को सुव्यवस्थित करने, प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और उद्योग-मानक डिजिटल एसेट्स तैयार करने का व्यावहारिक कौशल मिल सके। EUONUS IT Pvt. Ltd. जयपुर के सीईओ दिनेश वर्मा ने कार्यशाला की शुरुआत करते हुए मैनुअल वेक्टर/रैस्टर एडिटिंग से मानव-एआई सहयोग के इस बदलाव पर चर्चा की और डिजिटल मीडिया में उद्यमी अवसरों व उद्योग की अपेक्षाओं पर प्रकाश डाला। सीनियर ग्राफिक डिजाइनर प्रवीण कुमार ने बताया कि एआई मॉडलों को निर्देशित करते समय टाइपोग्राफी, कलर थ्योरी और कंपोज़िशन के बुनियादी सिद्धांत कितने महत्वपूर्ण बने रहते हैं। महाविद्यालय की पूर्व छात्रा, एआई ग्राफिक डिजाइनर, दीपाली अग्रवाल ने टेक्स्ट-टू-इमेज जेनरेशन, इनपैंटिंग/आउटपैंटिंग, ऑटोमेटेड वेक्टराइज़ेशन और एआई-असिस्टेड लेआउट डिज़ाइन का लाइव डेमो दिया। इसके अतिरिक्त कार्यशाला में एथिक्स एआई आर्ट के नैतिक पहलुओं, कॉपीराइट बारीकियों और करियर तैयारी पर चर्चा हुई। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस कार्यशाला की सराहना करते हुए, रचनात्मक उद्योगों में एआई के तीव्र एकीकरण पर ज़ोर दिया। इस कार्यशाला में शामिल लगभग 90 प्रतिभागियों को कमर्शियल-ग्रेड ग्राफिक्स को कुशलतापूर्वक तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. जयन्ती गोयल द्वारा EUONUS IT Pvt. Ltd. की रिसोर्स टीम के प्रति आभार व्यक्त करने और छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राध्यापिका दीपा चौहान, स्वाति शर्मा, निधि महर्षि और हर्षिता वर्मा भी उपस्थित रहीं।  

    रेंजर्स एवं रोवर्स ग्रुप के छात्रों द्वारा छायादार एवं फलदार पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया

     अग्रवाल पीजी महाविद्यालय में राजस्थान राज्य भारत सरकार स्काउट एवं गाइड यूनिट के रेंजर्स एवं रोवर्स द्वारा छायादार एवं फलदार पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।जिसका शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर बी एल देवन्दा द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य ने सभी स्काउट एवं गाइड के छात्रों को रसीले फल एवं छाया देने वाले पौधों का महत्व समझाते हुए बताया कि हमें जीवन के अंदर दूसरे को अधिक से अधिक सहारा देकर उसको समर्थ बनाया जाए ताकि जीवन में उमंगता बनी रहे। तथा बताया कि ये वृक्ष न केवल धरती को हरा भरा बनाते हैं बल्कि मानव जीवन को समृद्ध ,स्वस्थऔर संतुलित बनाते हैं तथा आसपास के वातावरण के तापमान को काम करते हैं। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की स्काउटिंग गाइड टीम के सभी सदस्य तथा स्टाफ गणमौजूद रहे और कार्यक्रम को सराहा गया। और सभी को अपने आसपास की वातावरण को सुगम बनाने हेतु वृक्ष लगाने पर जोर दिया गया।  

    दीपशिखा कॉलेज में ‘दीक्षारंभ 2026-27’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं ‘फ्यूज़न फेस्ट 2026’ का भव्य शुभारंभ

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में सोमवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं मार्गदर्शन हेतु ‘दीक्षारंभ’ (Student Orientation Programme 2026-27) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, संस्थागत कार्यप्रणाली, अनुशासन एवं उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात गणेश वंदना प्रस्तुत की गई। महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने सन्देश में विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व, अनुशासन, परिश्रम और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को नई संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करने का संदेश दिया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनिला शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, नियमों और गतिविधियों से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता के माध्यम से अपने व्यक्तित्व और शैक्षणिक क्षमताओं को निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जनक सिंह मीणा, प्रोफेसर, गांधीवादी चिंतन एवं शांति अध्ययन विभाग, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्याल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को गांधी दर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों, सत्य, अहिंसा, नैतिक मूल्यों एवं सादगीपूर्ण जीवन के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है।  विशेष अतिथि यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के भूतपूर्व वाईस चांसलर डॉ. वी. एन. प्रधान ने महाविद्यालय को ज्ञान एवं संस्कारों का मंदिर बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने हेतु प्रेरित किया। प्रो. (डॉ.) राम भजन कुमावत, औषधीय पादप शोधकर्ता, प्राणीशास्त्री, प्रोफेसर, योगाचार्य, गीताचार्य, सलाहकार एवं परामर्शदाता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग को कम करने तथा अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करना चाहिए, ताकि उनका बहुमूल्य समय व्यर्थ न हो, मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष सोनिया गौड़ ने विद्यार्थियों को पुस्तकालय की सुविधाओं, पुस्तकों एवं डिजिटल संसाधनों की जानकारी देते हुए नियमित अध्ययन और पठन-पाठन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान कंप्यूटर साइंस हेड निलेश शर्मा, प्रवेश निदेशक डॉ. राधा शर्मा, हेड-एडमिशन एवं आउटरीच श नितिन जैन, था विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों को संबंधित विभागों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन संसाधनों एवं महाविद्यालय में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली को समझने, शिक्षकों से परिचित होने तथा अपने नए शैक्षणिक सफर की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीतू चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन डॉ अपर्णा सोनी एवं हेमा सिंह द्वारा किया गया ,इस प्रकार प्रथम दिवस का ओरिएंटेशन कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक एवं प्रेरणादायक रहा।  

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    कपकजा द्वारा वार्षिक साधारण सभा 2026 का सफल आयोजन

    खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर एलूमनी एसोसिएशन द्वारा वार्षिक साधारण सभा 2026 का आयोजन शनिवार 10 October को होटल ग्रैंड सफारी में किया गया । सर्वप्रथम एसोसिएशन महासचिव दिनेश चंद सैनी द्वारा एजीएम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमे संस्था द्वारा विगत एक वर्ष में किये गये कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया । उसके बाद कोषाध्यक्ष श्री जयसिंह शेखावत द्वारा वर्ष 2025 - 26 का वार्षिक अंकेषित लेखा जोखा सदस्यों के सम्मुख पेश किया गया जो सर्वसम्मिति से पारित हुआ । उसके पश्चात संस्था के दो सदस्यों को उनके द्वारा उल्लेखनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया । सर्वप्रथम आरटीओ इंस्पेक्टर श्री दिनेश सिंह को उनके विभाग द्वारा रोड सेफ्टी एक्सीलेंस अवार्ड दिये जाने और ये सवाल आरपीएससी एग्जाम में शामिल करने हेतु उन्हें संस्था द्वारा सम्मानित किया गया । उसके पश्चात आरटीओ इंस्पेक्टर श्रीमती मुक्ता वर्मा सोनी को रोड एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद करके जान बचाने हेतु सामाजिक कार्य के लिये सम्मानित किया गया । एसोसिएशन अध्यक्ष जी पी शर्मा ने अपने संबोधन में अपने 4 वर्षों में किये गये कार्यों का उल्लेख किया और उनके कार्यकाल में किये गये नवाचारों और उपलब्धियों को सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत किया । इस अवसर पर उन्होंने सभी सदस्यों को उनके द्वारा दिये गये सहयोग और समय के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया और नव निर्वाचित पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बधाई दी । उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि भलें ही वो आगे अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे परन्तु उनका सहयोग और मार्गदर्शन निरन्तर जारी रहेगा । कार्यक्रम में वर्तमान कार्यकारिणी समिति के सभी सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान करके उनके द्वारा पिछले वर्षों में किये गये कार्यों के लिये सम्मानित किया गया । इसी क्रम में नव निर्वाचित अध्यक्ष रघुवीर सिंह, उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह, महासचिव एन राम, संयुक्त सचिव भंवर लाल यादव , कोषाध्यक्ष नंदा राम और पूरी कार्यकारिणी को पुष्प गुच्छ और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया । नव निर्वाचित अध्यक्ष रघुवीर सिंह और महासचिव एन राम ने भी अपने अपने विचार व्यक्त कियें । मीडिया प्रभारी अजय शर्मा को उनके द्वारा किये गये कार्य के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया गया । कार्यक्रम में सभी कपकजा सदस्य, कॉलेज कोऑर्डिनेटर्स और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहें । कार्यक्रम के समापन में उपाध्यक्ष प्रयाग राज विजयवर्गीय द्वारा वोट ऑफ़ थैंक्स दिया गया और अंत में राष्ट्रगान गाया गया । कार्यक्रम समाप्ति के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रात्रि भोज का आनंद उठाया ।  

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    यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित

    राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में सोमवार को 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वर्ष 1844 में स्थापित संस्थान की गौरवशाली विरासत का स्मरण करते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया। समारोह में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र के विधायक एवं विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य  गोपाल शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत समारोह के संरक्षक रहे, जबकि महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किए गए। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय सेना तथा सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने संकाय सदस्यों के शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।  गोपाल शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम में महाविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र चिंतन तथा जागरूक एवं उत्तरदायी वैश्विक नागरिकों के निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा ने महाविद्यालय की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के हित में कुलगुरु प्रो. सारस्वत द्वारा की गई सकारात्मक पहलों की सराहना की। उन्होंने उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रगति के प्रति विश्वास व्यक्त किया। कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने महाविद्यालय की गौरवशाली विरासत तथा पूर्व प्राचार्यों एवं शिक्षकों के सम्मान की परंपरा की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों एवं समाज के प्रति उनके दायित्वों पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए शिक्षकों से उनके चरित्र निर्माण एवं नैतिक मूल्यों के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्यों को संस्थान के विकास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया तथा विभिन्न उपलब्धियाँ अर्जित करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया गया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक एवं जीवंत नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह और सांस्कृतिक रंग भर दिए। समारोह में महाविद्यालय के पदाधिकारियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। यह आयोजन संस्थान की गौरवशाली परंपरा एवं सामूहिक उपलब्धियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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