Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Long Island City

    -0.79°C

    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    मनरेगा में कटौती और नई व्यवस्था के खिलाफ मजदूर यूनियन का आक्रोश

    - 12-13 मार्च को पंचायत समितियों व जिला परिषदों पर प्रदर्शन का ऐलान जयपुर। राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की राज्य कमेटी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष दुर्गा स्वामी की अध्यक्षता में जयपुर स्थित मजदूर किसान भवन में आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय कमेटी की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में डॉ. विक्रम सिंह उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत पूर्व विधायक कामरेड हेतराम बेनीवाल तथा ईरान-अमेरिका युद्ध में मारे गए 186 स्कूली बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. विक्रम सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के कारण खेत व ग्रामीण मजदूरों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा कानून को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उसकी जगह नया कानून लाने की बात की जा रही है। उनके अनुसार मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को मिलने वाला रोजगार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत काम के लिए 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार को वहन करनी होगी, जबकि अधिकांश राज्यों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में आशंका है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और भी कम हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा में नई एप आधारित हाजिरी प्रणाली लागू की जा रही है, जिसमें मजदूरों की आंखों की रेटिना से पहचान की जाएगी। जिन मजदूरों की आंखें कमजोर हैं या जिनकी आंखों का ऑपरेशन हो चुका है, उनके लिए हाजिरी लगाना मुश्किल हो जाएगा। डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि पिछले चार दिनों से पूरे राजस्थान में लगभग 25 लाख मजदूर मनरेगा कार्यस्थलों पर जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उनकी हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है और उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति मजदूरों के साथ मजाक के समान है, क्योंकि एक ओर उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि मनरेगा कानून को बहाल करने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर 12 और 13 मार्च को पूरे राजस्थान में पंचायत समितियों और जिला परिषदों पर प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य भी तय किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष दुर्गा स्वामी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान व मजदूर विरोधी निर्णय लागू कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनों में संशोधन कर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेतिहर मजदूरों के लिए कोई ठोस केंद्रीय कानून नहीं है और कार्यस्थलों पर पानी, छांव तथा दवाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। बैठक में राज्य महासचिव रामरतन बगड़िया, रघुवीर वर्मा, एडवोकेट पालाराम नायक, पूरन सिंह, पहलाद, बहलोंल नगर, श्रीकांत, हंसराज, मेवाराम, जीत सिंह, सरोज देवी, शीशपाल, महावीर प्रसाद सहित कई पदाधिकारियों ने भाग लिया। रामरतन बगड़िया ने  आंदोलन की रूपरेखा की जानकारी दी।

    शिक्षामंत्री एवं शासन सचिव स्कूल शिक्षा विभाग की उपस्थिति में विभिन्न शिक्षक संगठनों की बैठक हुई संपन्न

    आज पंचम ब्लॉक शिक्षा संकुल जयपुर में शिक्षामंत्री एवं शिक्षा सचिव की उपस्थिति में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई जिसमें प्रमुख मुद्दा नवीन शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किए जाने,प्रवेशोत्सव,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,विद्यायल एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा,विद्यालय संचालन पर विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने बैठक में कहा कि शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पड़े राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश महामंत्री नवीन कुमार शर्मा ने मांग रखी कि अगला सत्र जल्द शुरू करने से वर्तमान सत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ा है लेकिन फिर भी आगामी सत्र 1 अप्रैल से शुरू होते ही FTB पुस्तके,शिक्षक डायरी,निःशुल्क कपड़े आदि समय पर मिल जाए तो ये कदम बहुत विद्यार्थियों के लिए कारगार साबित होगा और हर सत्र में ऐसी निरंतरता बनी रहेगी।अच्छा निर्णय है डेड महीने पढ़ाई-लिखाई उसके बाद कुछ होमवर्क देकर छुट्टी का सदुपयोग किया जा सकेगा सरकार ग्रीष्मावकाश में 10 दिन की कटौती नहीं कर ग्रीष्मावकाश को यथावत रखें। शिक्षकों से केवल शैक्षणिक कार्य करवाया जाए इसके अलावा गैर शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त रखा जाए राजकोष से वेतन लेने वाले सभी के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने चाहिए बोर्ड परीक्षा के दौरान स्थानांतरित किए गए थे वो ग़लत हमेशा गर्मियों की छुट्टी में ट्रांसफर किए जाने चाहिए प्रदेश प्रवक्ता मुकेश मीणा ने बताया कि विद्यालयों में सप्ताह में मनाए जाने वाले सभी उत्सवों को केवल शनिवार को ही मनाया जाए,पदोन्नति के बाद तुंरत स्कूलों में पदस्थापन दिया जाए,जनगणना में प्रत्येक विद्यालय से 25% से अधिक स्टाफ को नहीं लगाया जाए,बाड़मेर जिले में तृतीय श्रेणी भर्ती 2022 के अध्यापकों का जल्द स्थाईकरण किया जाए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल मीणा ने मांग रखी कि नवीन सत्र प्रारंभ होने पूर्व वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता की लंबित तीन सत्रों की पदोन्नति को पूर्ण करवाया जाए,तृतीय श्रेणी अध्यापकों की 6 सत्रों से लंबित पदोन्नति को सरकार द्वारा कोर्ट में उचित पैरवी करते हुए जल्द सम्पन्न कराया जावे, सभी क्रमोन्नत स्कूलों में व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाए। अन्य संगठनों ने भी अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा।

    नवीन सत्र से पूर्व शिक्षामंत्री ने किया शिक्षक संघ प्रतिनिधियों से संवाद

    - शिक्षक नेताओं के सुझावों पर हुई चर्चा  जयपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में इस वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नवीन शिक्षा संत्र व अन्य बिंदुओं पर शिक्षकों का पक्ष समझने के लिए शिक्षामंत्री श्री मदन दिलावर ने शुक्रवार को शिक्षक संगठनों के प्रदेश प्रतिनिधियों से संवाद किया। सभी संगठन प्रतिनिधियों ने विभाग की ओर से चलाई जा रही गतिविधियों पर अपना पक्ष रखते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए जिन पर विचार करने का शिक्षामंत्री ने आश्वासन दिया। शिक्षा संकुल में आयोजित चर्चा बैठक शिक्षामंत्री ने सभी से प्रदेश की शैक्षिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील करते हुए विद्यालय परिसरों को गंदगी, सिंगल यूज प्लास्टिक, गुटखा व तंबाकू आदि से मुक्त करने का आव्हान किया। बैठक में मुख्य रूप से 1 अप्रैल से नवीन सत्र के आरंभ, मेगा पीटीएम, प्रवेशोत्सव, पाठ्यपुस्तक व यूनिफॉर्म वितरण, शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान और मई माह में प्रस्तावित प्रथम परख के संबंध में चर्चा की गई।  बैठक के प्रारंभ में शासन सचिव स्कूल शिक्षा कृष्ण कुणाल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुपालना में प्रदेश में कई महत्वपूर्ण शिक्षण सुधार किए जा रहे हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल को नवीन सत्रारम्भ के साथ ही सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करवा दी जाएंगी व निशुल्क यूनिफॉर्म की राशि प्रवेशोत्सव समाप्त होने के साथ ही विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से प्रदान कर दी जाएगी। सत्रारम्भ से पूर्व 25 मार्च को मेगा पीटीएम (अभिभावक शिक्षक बैठक) व पीएएम (अभिभावक आंगनबाड़ी बैठक) आयोजित की जाएंगी। अधिकाधिक बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाने के लिए इस वर्ष प्रवेशोत्सव के तहत चार दिन का गहन अभियान चलाया जाएगा जिसमें शिक्षक व कर्मचारी एक-एक घर तक पहुंचेंगे और प्रवेश योग्य बच्चों को विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित करेंगे। यह अभियान 27 मार्च और 6, 10 व 15 अप्रैल को चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष शिक्षण दिवसों की संख्या बढ़ाकर 214 कर दी गई है जिसके चलते ग्रीष्मावकाश 16 मई से 20 जून तक रहेगा।    निदेशक माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा सीताराम जाट ने बताया कि सभी विद्यार्थियों को 1 अप्रैल को ही नवीन पाठ्यपुस्तकें मिल जाएं, इसके लिए 31 मार्च तक सभी विद्यालयों तक पुस्तकें पहुंचा दी जाएंगी। राजस्थान पाठ्यपुस्तक मंडल से पुस्तकों के वितरण का कार्य शुरू कर दिया गया है व वितरण की शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच व आवश्यक चिकित्सा के लिए शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान की शुरूआत 16 अप्रैल से होगी। इस वर्ष निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। उन्होंने विभाग की ओर से विद्यार्थी, शिक्षक व कर्मचारी हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।    इस अवसर पर विभाग के विभिन्न अधिकारी व शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

    यूपीएसई टॉपर अनुज का एलन कोटा कनेक्शन

    यूपीएसई 2025 के आल इंडिया टॉपर अनुज अग्निहोत्री का परिवार कोटा के निकट रावतभाटा से है। कक्षा 10 तक रावतभाटा में पढ़ाई के बाद अनुज कोटा आए। अनुज ने वर्ष 2015-16 व 2016-17 में दो सत्रों तक कोटा में रहकर एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा से मेडिकल प्रवेश परीक्षा एम्स व नीट-यूजी की तैयारी के बाद 2017 एम्स में आल इंडिया रैंक-215 और नीट-यूजी में आल इंडिया रैक-306 प्राप्त की। यहां से उन्होंने एम्स जोधपुर में प्रवेश लिया और एमबीबीएस की। इसके बाद यूपीएसई की परीक्षा दी। पिता केबी अग्निहोत्री ने एलन से बातचीत में बताया कि कोटा में दो साल का सफर अनुज के लिए बहुत प्रेरणादायी रहा और बहुत कुछ सीखा। एलन कोटा में उसे खुद को निखारने का अवसर मिला। हमारे लिए यह सुखद रहा कि कोटा के पास ही हमारा निवास था। यहां डिवोशन और डेडीकेशन सीखने को मिला। मैं आरएपीपी में टेक्नीशियन हूं तथा मां मंजू अग्निहोत्री ग्रहिणी हैं। बडा भाई हैदराबाद में प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग ऑफिसर हैं।

    West Bengal Governor C.V. Ananda Bose Resigns Ahead of Assembly Elections

      Yugcharan News | March 5, 2026 In a significant political development ahead of the upcoming state elections, C. V. Ananda Bose, the Governor of West Bengal, resigned from his position on Thursday, submitting his resignation to Droupadi Murmu, the President of India. The move has triggered widespread discussion in political circles as it comes just months before the state is expected to head into crucial assembly polls. The resignation was confirmed after Bose formally stepped down in New Delhi. According to officials, his resignation was accepted by the President shortly after it was submitted. The sudden decision has raised questions about the political timing of the move and the possible implications for the state’s administrative and political landscape. Change in Governorship Following the resignation of C.V. Ananda Bose, R. N. Ravi, who is currently serving as the Governor of Tamil Nadu, has been assigned additional responsibility to oversee the role in West Bengal. This arrangement ensures that the constitutional responsibilities of the Governor’s office continue without interruption. Governors in India play a crucial role in overseeing the constitutional functioning of state governments. They act as the official representatives of the President in the states and have responsibilities ranging from approving legislation passed by the state assembly to ensuring that the government functions according to constitutional guidelines. With the elections approaching in West Bengal, the presence of a Governor becomes even more significant because the office often plays a key role during politically sensitive periods. Information Shared with State Leadership Reports suggest that Mamata Banerjee, the Chief Minister of West Bengal, was informed about the development by Amit Shah, the Union Home Minister of India. According to sources, the communication was part of the standard protocol followed by the central government when such constitutional changes occur. Mamata Banerjee’s government has had a complicated relationship with the Governor’s office over the past several years. Differences between the state administration and the Governor have frequently become the subject of political debate in the state. Political observers say the resignation could potentially influence the dynamics between the state government and the central administration, especially at a time when political tensions often intensify during election seasons. Political Context in West Bengal West Bengal has long been one of India’s most politically vibrant states. Elections in the state are closely watched not only because of their regional importance but also because of their national political implications. The upcoming assembly elections are expected to be a major political contest. Parties across the spectrum are preparing for an intense campaign that could shape the political direction of the state for the next five years. Against this backdrop, the resignation of the Governor has become a topic of debate among political analysts. Some believe the move is simply a routine administrative decision, while others suggest it may reflect broader political calculations. Role of the Governor During Elections In India’s constitutional system, the Governor’s role becomes particularly important during election periods and government transitions. If a state assembly election results in a hung verdict — where no single party wins a clear majority — the Governor is responsible for inviting political parties to form the government. In such scenarios, the Governor’s judgment and decisions can have a significant impact on the formation of the state government. Because of this, the timing of changes in the Governor’s office often attracts attention from both political parties and the public. Background of C.V. Ananda Bose C.V. Ananda Bose has had a long and distinguished career in public administration. Before becoming the Governor of West Bengal, he served in several senior government roles and built a reputation as an experienced bureaucrat and administrator. His tenure as Governor saw a number of interactions — and occasionally disagreements — with the state government on various administrative and political matters. These differences were widely reported and often became part of broader debates about the role of Governors in India’s federal structure. Despite these tensions, Bose maintained that his decisions were guided by constitutional responsibilities and the need to ensure proper governance. R.N. Ravi’s Expanded Role With Bose stepping down, R.N. Ravi’s assignment as the acting Governor of West Bengal adds another major responsibility to his existing role in Tamil Nadu. Ravi is known for his extensive background in security and governance. Before entering gubernatorial service, he worked in several national security and intelligence-related positions within the Indian government. His experience in administrative and security matters is expected to help manage the transition period in West Bengal, especially as the state prepares for elections. Reactions from Political Leaders The resignation has drawn reactions from political leaders and commentators across the country. Some opposition leaders have questioned the timing of the move, suggesting that changes in key constitutional positions close to elections should be handled with transparency. Supporters of the central government, however, have said that such decisions are routine administrative matters and should not be interpreted as political manoeuvres. As of now, neither the central government nor Bose himself has publicly detailed the reasons behind the resignation. Broader Implications Political analysts say that while the Governor’s resignation may not immediately change the political equation in West Bengal, it could influence the broader political atmosphere as elections approach. The state has witnessed intense political competition in recent years, with several national and regional parties vying for influence. Administrative developments like this often become part of the larger political narrative, especially in highly competitive states. Looking Ahead For now, the immediate focus remains on ensuring that the constitutional functioning of the state continues smoothly under the temporary leadership of R.N. Ravi. As West Bengal moves closer to the assembly elections, political parties will continue their preparations for what is expected to be one of the most closely watched state elections in India. Whether the resignation of C.V. Ananda Bose has any long-term political impact remains to be seen. However, the development has already added another layer of intrigue to the evolving political landscape in West Bengal. In the coming months, attention will likely remain on both the election campaign and the administrative decisions surrounding the governance of the state.    

    15 मार्च को पटना में होगा 7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स जुटेंगी भोजपुरी सिनेमा की दिग्गज हस्तियाँ रंगारंग अवार्ड्स नाइट्स में 60 श्रेणियों में दिया जायेगा अवार्ड

    पटना। भोजपुरी सिनेमा के प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित का सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 7वां संस्करण 15 मार्च 2026 को सायं 6 बजे बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित किया जाएगा। यह समारोह भोजपुरी फिल्म उद्योग के लिए एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। आयोजकों नें बताया कि इस बार अवॉर्ड समारोह को और अधिक भव्य रूप दिया जा रहा है, जिससे दर्शकों को मनोरंजन का विशेष अनुभव मिलेगा।   सरस सलिल के इंचार्ज भानु प्रकाश राणा ने जानकारी दी है कि नामांकित फिल्मों और कलाकारों का चयन जूरी द्वारा किया गया है जिन्हें विभिन्न श्रेणियों में सम्मान प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस और स्टार नाइट मुख्य आकर्षण रहेंगे।   आयोजन समिति से जुड़े बृहस्पति कुमार पाण्डेय ने बताया कि डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए इस बार अवॉर्ड्स को तीन वर्गों—थिएटर रिलीज फिल्में, ओटीटी प्लेटफॉर्म और यूट्यूब/टीवी कंटेंट—में बांटकर सम्मानित किया जाएगा।   बताया गया कि सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स की शुरुआत वर्ष 2020 में से हुई थी और इसके बाद अयोध्या, बस्ती और लखनऊ में इसके सफल आयोजन हो चुके हैं। पिछले वर्ष लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित छठे संस्करण में 50 से अधिक श्रेणियों में कलाकारों को सम्मानित किया गया था।   अब तक हुए अवॉर्ड समारोह में यह अवॉर्ड दिनेशलाल यादव 'निरहुआ', अरविंद अकेला 'कल्लू', प्रदीप पांडे 'चिंटू', अंजना सिंह, आम्रपाली दुबे, ऋचा दीक्षित, संजय पांडेय, देव सिंह, अवधेश मिश्रा, रक्षा गुप्ता, मनोज टाइगर, प्रियंका सिंह, सीपी भट्ट, संजय कुमार श्रीवास्तव,विजय खरे, केके गोस्वामी, शुभम तिवारी, माही खान, मनोज भावुक, प्रसून यादव, कविता यादव, अनुपमा यादव, अंतरा सिंह 'प्रियंका', समर सिंह, सहित कई नामचीन एक्टरों को मिल चुका है। पिछले वर्ष लखनऊ में हुए अवॉर्ड शो में लोकप्रिय अभिनेता अरविंद अकेला ‘कल्लू’ और अभिनेत्री अंजना सिंह सहित कई चर्चित हस्तियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिला। समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों और मीडिया की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। आयोजकों ने बताया कि इस समारोह का उद्देश्य भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों और तकनीशियनों को प्रोत्साहित करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। सिने प्रेमियों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस सांस्कृतिक उत्सव की शोभा बढ़ाने की अपील की गई है।

    कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन

    कानोड़िया पीजी महाविद्यालय, जयपुर के करियर गाइडेंस, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सेंटर द्वारा दिनांक 5 मार्च 2026 को छात्राओं के लिए कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। इस प्लेसमेंट ड्राइव में श्योरपाथ तथा ह्यूमालाइफ हेल्थकेयर कंपनियों द्वारा रिलेशनशिप मैनेजमेंट, कंटेंट क्रिएशन, ह्यूमन रिसोर्सेज तथा ऑपरेशन्स से संबंधित विभिन्न पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया आयोजित की गई। श्योरपाथ द्वारा रिलेशनशिप एग्जीक्यूटिव एवं कंटेंट क्रिएशन के पदों के लिए अवसर प्रदान किए गए, जबकि ह्यूमालाइफ हेल्थकेयर द्वारा एचआर स्पेशलिस्ट तथा ऑपरेशन एग्जीक्यूटिव के पदों के लिए भर्ती की गई। प्लेसमेंट ड्राइव में लगभग 40 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने, उद्योग की अपेक्षाओं को समझने तथा अपने करियर के लिए नए अवसरों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। इस प्लेसमेंट ड्राइव में कुल 17 छात्राओं का चयन किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल ने चयनित छात्राओं को बधाई दी

    वी एम ओ यू:M.Sc तथा B.Ed की प्रथम आवंटन सूची जारी , अगले सप्ताह होगी काउंसलिंग

    कोटा | वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय ने जनवरी 2026 सत्र में M.Sc. और B.Ed. प्रवेश के लिए पहली मेरिट लिस्ट वेबसाइट पर जारी कर दी गई हैं| अभ्यर्थी प्रथम आवंटन का परिणाम तथा अपना प्रोविजनल सीट एलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकते है| निदेशक विज्ञान एवं तकनीकी विद्यापीठ प्रो. अनुराधा दुबे ने बताया कि MSc की प्रथम काउंसलिंग 11 और 12 मार्च को संबंधित क्षेत्रीय केंद्र पर आयोजित होगी| काउन्सलिंग के लिए विस्तृत दिशा निर्देश वेबसाइट पर उपलब्ध हैं| सह समन्वयक डॉ संदीप हुड्डा ने बताया कि सफल अभ्यर्थी वांछित दस्तावेजों तैयार रखे तथा नियत समय व स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करावे|MSc पाठ्यक्रम की प्रथम वर्ष की फीस 17,300 रुपया है जो की चयनित अभ्यर्थी को काउंसलिंग दिनांक को ऑनलाइन माध्यम से जमा करानी होगी| मूल दस्तावेजों और व्यक्तशः उपस्थिति के अभाव में सीट पर अभ्यर्थी का दावा नहीं माना जाएगा | शिक्षा विद्यापीठ की निदेशक प्रो कीर्ति सिंह ने बताया कि BEd की पांच सौ सीटों पर भी एलॉटमेंट जारी किए जा चुके हैं| अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी वेबसाइट देखते रहे |

    कैबिनेट मंत्री ने किया निर्माणाधीन सड़क का औचक निरीक्षण

    सुमेरपुर। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली जिले के प्रवास के दौरान सुमेरपुर–कोलीवाडा मार्ग पर निर्माणाधीन पुल एवं नाले के कार्यों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री कुमावत ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि "निर्माण कार्य को निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।" उन्होंने कहा कि सड़क के निर्माण से ग्राम्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी में सुधार आएगा और स्थानीय लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा प्राप्त होगी। ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलने से सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। मंत्री कुमावत ने कहा, "राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन में हम पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत सड़क नेटवर्क से विकास की नई राहें खुलेंगी। आपको बता दें बिपरजॉय स्कीम में वर्ष-2024-25 में 125 लाख रुपए से करीब तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क के नवीनीकरण मय पुल का निर्माण किया जाएगा। इसमें तीन जगह पाइप भी डाली जाएगी। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि अनोपसिंह, भाजपा जिला मंत्री दिनेश सिंह राजपुरोहित,जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, सुमेरपुर के मंडल अध्यक्ष रविकांत रावल आदि मौजूद रहे।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026: वानखेड़े में आज भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल, पिछली भिड़ंत में ‘मेन इन ब्लू’ ने रचा था इतिहास

      Yugcharan News | 5 मार्च 2026 | मुंबई टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है और आज क्रिकेट प्रेमियों की नजरें मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम पर टिकी हुई हैं, जहां भारत और इंग्लैंड के बीच टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाएगा। इस मुकाबले की खास बात यह है कि जो भी टीम जीत दर्ज करेगी, वह सीधे फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी। फाइनल मुकाबला 8 मार्च को खेला जाना तय है। भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला यह सेमीफाइनल केवल एक सामान्य मैच नहीं माना जा रहा, बल्कि पिछले मुकाबलों के इतिहास और दोनों टीमों की मौजूदा फॉर्म के कारण इसे बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर वानखेड़े स्टेडियम पर दोनों टीमों के बीच खेले गए पिछले मुकाबलों को देखते हुए यह मैच और भी दिलचस्प हो गया है। वानखेड़े में पिछली भिड़ंत में भारत की ऐतिहासिक जीत भारत और इंग्लैंड के बीच वानखेड़े स्टेडियम में आखिरी टी20 मुकाबला फरवरी 2025 में खेला गया था। उस मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज में हराया था। उस मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 247 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। यह स्कोर उस मैदान पर टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े स्कोरों में से एक माना जाता है। भारत की इस शानदार पारी के केंद्र में युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा रहे, जिन्होंने 54 गेंदों में 135 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। उनकी इस पारी ने पूरे मैच की दिशा बदल दी थी और इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह दबाव में ला दिया था। अभिषेक शर्मा की तूफानी पारी अभिषेक शर्मा की उस पारी को आज भी क्रिकेट प्रेमी याद करते हैं। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 7 चौके और 13 छक्के लगाए थे। उनकी बल्लेबाजी इतनी आक्रामक थी कि इंग्लैंड के लगभग सभी गेंदबाजों को भारी दबाव का सामना करना पड़ा था। अभिषेक का स्ट्राइक रेट लगभग 250 रहा, जो टी20 क्रिकेट में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। उस मैच में उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के साथ ओपनिंग की थी। हालांकि सैमसन केवल 16 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए थे, लेकिन इसके बाद अभिषेक शर्मा ने पारी को पूरी तरह संभाल लिया था। अन्य बल्लेबाजों का योगदान अभिषेक शर्मा के अलावा भारत की ओर से तिलक वर्मा और शिवम दुबे ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। तिलक वर्मा ने 24 रन बनाए जबकि शिवम दुबे ने केवल 13 गेंदों में तेज 30 रन की पारी खेली थी। इन दोनों की तेज बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को 240 से अधिक के स्कोर तक पहुंचाने में मदद की थी। इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी में ब्राइडन कार्से सबसे सफल गेंदबाज रहे थे, जिन्होंने 3 विकेट लिए थे। इसके अलावा मार्क वुड ने 2 विकेट हासिल किए थे। हालांकि अन्य गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों के सामने ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके थे। इंग्लैंड की बल्लेबाजी रही कमजोर 247 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। इंग्लैंड की ओर से फिल सॉल्ट ने जरूर तेज शुरुआत करते हुए 23 गेंदों में 55 रन बनाए थे, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से ज्यादा समर्थन नहीं मिला। टीम के अन्य प्रमुख बल्लेबाज जल्दी आउट हो गए। बेन डकेट बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि कप्तान जोस बटलर केवल 7 रन बना सके। हैरी ब्रुक भी 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे। भारतीय गेंदबाजों का दबदबा इंग्लैंड की कमजोर बल्लेबाजी के पीछे भारतीय गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन भी एक बड़ा कारण रहा। अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट लिए थे। इसके अलावा वरुण चक्रवर्ती, शिवम दुबे और अभिषेक शर्मा ने भी 2-2 विकेट हासिल किए थे। इन शानदार गेंदबाजी प्रदर्शनों के कारण इंग्लैंड की पूरी टीम केवल 97 रन पर ऑल आउट हो गई थी। इस तरह भारत ने यह मुकाबला 150 रन के बड़े अंतर से जीत लिया था। अभिषेक शर्मा को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। वानखेड़े में पहला टी20 मुकाबला भारत और इंग्लैंड के बीच वानखेड़े स्टेडियम में पहला टी20 मुकाबला दिसंबर 2012 में खेला गया था। उस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 177 रन बनाए थे। उस पारी में विराट कोहली ने 20 गेंदों में 38 रन की तेज पारी खेली थी। इसके अलावा एमएस धोनी ने 18 गेंदों में 38 रन बनाए थे जबकि सुरेश रैना ने नाबाद 35 रन बनाए थे। रोहित शर्मा ने भी 24 रन का योगदान दिया था। इंग्लैंड ने किया था लक्ष्य हासिल 177 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने उस मैच में शानदार प्रदर्शन किया था। माइकल लम्ब ने 34 गेंदों में 50 रन की पारी खेलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई थी। इसके अलावा एलेक्स हेल्स ने 42 रन बनाए थे। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मॉर्गन ने 26 गेंदों में नाबाद 49 रन बनाए और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उस मैच में इंग्लैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 181 रन बनाते हुए लक्ष्य हासिल कर लिया था। वानखेड़े में बराबरी का रिकॉर्ड अब तक वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच दो टी20 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें से एक मैच भारत ने जीता है और एक मैच इंग्लैंड के नाम रहा है। इस तरह इस मैदान पर दोनों टीमों का रिकॉर्ड फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। ऐसे में आज का सेमीफाइनल मुकाबला निर्णायक साबित हो सकता है। सेमीफाइनल मुकाबले पर सबकी नजर आज होने वाले इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। दोनों टीमों के पास कई विश्वस्तरीय खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मैच का रुख कभी भी बदल सकते हैं। भारतीय टीम जहां अपने घरेलू मैदान का फायदा उठाने की कोशिश करेगी, वहीं इंग्लैंड की टीम भी पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतर सकती है। फाइनल का रास्ता इस सेमीफाइनल मुकाबले की विजेता टीम 8 मार्च को होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी। न्यूजीलैंड ने पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बना ली है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि आज का मुकाबला भी बेहद रोमांचक और यादगार होगा। निष्कर्ष वानखेड़े स्टेडियम का इतिहास बताता है कि यहां भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबले हमेशा रोमांचक रहे हैं। एक ओर भारत की टीम पिछली बड़ी जीत के आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं इंग्लैंड भी अपने पुराने रिकॉर्ड को बेहतर करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आज का सेमीफाइनल मुकाबला केवल एक मैच नहीं बल्कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक माना जा रहा है, जिस पर दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें टिकी हुई हैं।    

    मुझे हीरो ही नहीं, विलेन और जोकर भी बनना होगा”: संजू सैमसन के बयान ने खेल जगत में छेड़ी नई बहस

      Yugcharan News | 5 मार्च 2026 भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन का एक बयान इन दिनों खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया है। अपने करियर, पेशेवर चुनौतियों और उम्मीदों को लेकर दिए गए एक बयान में सैमसन ने कहा कि उन्हें सिर्फ “हीरो” की भूमिका निभाने की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए, बल्कि टीम की जरूरत के अनुसार “विलेन, जोकर या किसी भी तरह की भूमिका” निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। संजू सैमसन ने अपने इस विचार को समझाने के लिए भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता मोहनलाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मोहनलाल पिछले कई दशकों से फिल्मों में काम कर रहे हैं और उन्होंने अपने लंबे करियर में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं। उसी तरह क्रिकेट में भी खिलाड़ियों को टीम की जरूरत के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। सैमसन का यह बयान उस समय सामने आया है जब हाल ही में टी20 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके इस बयान को कई विशेषज्ञों ने पेशेवर खेलों में लचीलापन और धैर्य का महत्वपूर्ण संदेश बताया है। मोहनलाल से की तुलना संजू सैमसन ने अपने बयान में कहा कि एक अभिनेता की तरह खिलाड़ी को भी हर तरह की भूमिका निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोहनलाल को हाल ही में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला है और उन्होंने 30 से 40 साल तक अभिनय किया है। सैमसन के अनुसार, “जब कोई कलाकार इतने लंबे समय तक काम करता है, तो वह केवल हीरो की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखता। उसे कभी विलेन बनना पड़ता है, कभी हास्य कलाकार और कभी सहायक किरदार निभाना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि क्रिकेट में भी यही सिद्धांत लागू होता है। खिलाड़ी को टीम की जरूरत के अनुसार अपनी भूमिका बदलनी पड़ती है। भारतीय टीम में उतार-चढ़ाव भरा सफर संजू सैमसन का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने लगभग एक दशक पहले भारतीय टीम के लिए खेलना शुरू किया था, लेकिन टीम में स्थायी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। कई बार उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा और कई बार अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम में खेलने का मौका मिला। कभी उन्हें ओपनिंग करने भेजा गया तो कभी मध्यक्रम में बल्लेबाजी करनी पड़ी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियां कई खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन सैमसन ने इन परिस्थितियों को अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। आलोचनाओं के बीच शानदार प्रदर्शन टी20 विश्व कप 2026 के दौरान संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक शानदार पारी खेली, जिसने उनकी आलोचनाओं का काफी हद तक जवाब दे दिया। उन्होंने 50 गेंदों पर नाबाद 97 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई और टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पारी को कई विशेषज्ञों ने उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण पारियों में से एक बताया। लंबे समय से आलोचक यह सवाल उठाते रहे थे कि क्या सैमसन दबाव की परिस्थितियों में मैच को खत्म कर सकते हैं। लेकिन इस पारी के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह कठिन परिस्थितियों में भी टीम के लिए निर्णायक योगदान दे सकते हैं। खेल में लचीलेपन का महत्व संजू सैमसन का बयान केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पेशेवर जीवन के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। कई बार लोगों को अपने पसंदीदा रोल या पद से अलग काम करना पड़ता है। ऐसे समय में यदि व्यक्ति लचीला रवैया अपनाता है तो वह नई चुनौतियों से सीख सकता है और अपने कौशल को और मजबूत बना सकता है। सैमसन के बयान में यही संदेश छिपा हुआ है कि सफलता हमेशा हीरो बनने से नहीं मिलती। कई बार छोटी या अलग भूमिकाएं निभाते हुए भी बड़ा योगदान दिया जा सकता है। करियर में धैर्य की भूमिका संजू सैमसन की यात्रा यह भी दिखाती है कि खेल या किसी भी पेशे में करियर हमेशा सीधी रेखा की तरह नहीं चलता। कई बार खिलाड़ियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है और कई अवसर हाथ से निकल जाते हैं। लेकिन यदि खिलाड़ी धैर्य बनाए रखते हैं और अपने खेल पर ध्यान देते रहते हैं, तो सही समय आने पर उन्हें खुद को साबित करने का मौका मिल सकता है। सैमसन के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। लंबे समय तक टीम में जगह को लेकर अनिश्चितता के बावजूद उन्होंने अपने खेल पर काम करना जारी रखा। कप्तान और कोच की भूमिका संजू सैमसन ने अपने विचार साझा करते हुए यह भी कहा कि टीम का माहौल किसी फिल्म के सेट की तरह होता है, जहां कप्तान और कोच निर्देशक की भूमिका निभाते हैं। वे तय करते हैं कि किस खिलाड़ी को किस भूमिका में खेलना है और टीम के लिए कौन सा संयोजन सबसे बेहतर रहेगा। इसलिए खिलाड़ी के लिए यह जरूरी होता है कि वह व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर उठकर टीम के लक्ष्य को प्राथमिकता दे। युवाओं के लिए प्रेरणा संजू सैमसन का यह बयान खासतौर पर युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में कई युवा खिलाड़ी जल्दी सफलता की उम्मीद करते हैं और यदि उन्हें तुरंत अवसर नहीं मिलता तो वे निराश हो जाते हैं। लेकिन सैमसन की कहानी यह बताती है कि निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहने से आखिरकार सफलता मिल सकती है। खेल से जीवन तक का संदेश सैमसन के शब्द केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जीवन के कई क्षेत्रों पर लागू होते हैं। कई बार लोगों को अपने करियर में अलग-अलग भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यदि वे हर भूमिका को सीखने और बेहतर बनने का अवसर मानें तो वे भविष्य में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही सोच किसी भी व्यक्ति को लंबी दौड़ में सफल बनाती है। निष्कर्ष संजू सैमसन का यह बयान खेल और पेशेवर जीवन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने यह दिखाया कि केवल चमकदार भूमिकाएं ही सफलता का रास्ता नहीं होतीं। कई बार अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हुए, चुनौतियों से सीखते हुए और धैर्य बनाए रखते हुए ही असली उपलब्धियां हासिल होती हैं। टी20 विश्व कप में उनके हालिया प्रदर्शन ने भी यह साबित कर दिया कि जब अवसर मिलता है तो तैयारी और आत्मविश्वास के साथ खिलाड़ी किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है। इसी कारण संजू सैमसन का यह विचार आज खेल जगत के साथ-साथ पेशेवर दुनिया में भी चर्चा का विषय बन गया है।