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    203 ग्लोबल कंपनियों से 2104 ऑफर्स : फॉर्च्यून कंपनियों में चमके जेईसीआरसी के छात्र

    2027 प्लेसमेंट के लिए कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम से हो रही विशेष तैयारी   150 से ज़्यादा अनुभवी ट्रेनर्स देंगे टेक्निकल और कम्युनिकेशन स्किल्स ट्रेनिंग    जयपुर    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी  के छात्रों को अब तक 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स मिल चुके हैं। यह उपलब्धि छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय की बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है।   इस वर्ष 2026 में  203 देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के छात्रों का चयन किया है। इस प्लेसमेंट सीजन में छात्रों को मिला सर्वोच्च पैकेज 33 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा,  कुल ऑफर्स में से 35 प्रतिशत ऑफर्स फॉर्च्यून 500 कंपनियों द्वारा दिए गए हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय ने कैपजेमिनी के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किया है, जिससे छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।   इस वर्ष प्लेसमेंट में 40 प्रतिशत छात्राओं का चयन हुआ है, जो समान अवसर और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न स्कूलों में टियर-1 और टियर-2 कंपनियां लगातार भर्ती के लिए आ रही हैं। हर क्षेत्र और हर डोमेन में छात्रों के लिए नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।   इस वर्ष एचपी, कैपजेमिनी, डाबर, ब्लिंकिट, जोमैटो, माइंडट्री, कॉग्निजेंट, वॉचगार्ड, जेके सीमेंट, ताज ग्रुप ऑफ होटल्स, बालाजी टेलीफिल्म्स, ऐड फैक्टर, डेंट्सू, क्विंट, ओबरॉय होटल्स और कई अन्य प्रतिष्ठित कंपनिया प्लेसमेंट के लिए आई |   इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2027 के प्लेसमेंट सीजन की तैयारी भी शुरू कर दी है। बदलते जॉब मार्केट और उसमें आ रही चुनौतियों को समझते हुए विश्वविद्यालय ने माना है कि आने वाला प्लेसमेंट सीजन पहले जैसा नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखकर विशेष कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग (CRT) कार्यक्रम को नए तरीके से तैयार किया गया है, ताकि छात्र हर परिस्थिति के लिए पहले से तैयार रहें। इस पहल का मकसद है कि विद्यार्थी न सिर्फ आसानी से प्लेस हों, बल्कि किसी भी चुनौती के बीच आत्मविश्वास के साथ खुद को साबित कर सकें और हर बदलते माहौल में मजबूती से खड़े रहें।   यह 75 दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं। इस दौरान छात्रों को कुल 499 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस वर्ष इस कार्यक्रम में 3800 से ज़्यादा  छात्र भाग ले रहे हैं। सीआरटी  के तहत छात्रों को एप्टीट्यूड, लॉजिकल रीजनिंग, तकनीकी ज्ञान, समूह चर्चा, इंटरव्यू स्किल्स, सॉफ्ट स्किल्स और कम्युनिकेशन स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, मॉक इंटरव्यू और एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट  के माध्यम से उन्हें वास्तविक भर्ती प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 150 प्रशिक्षक जुड़े हुए हैं, जिनमें आंतरिक और बाहरी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें से 45 प्रशिक्षक देश के विभिन्न हिस्सों से आए हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए 100 सदस्यीय टीम कार्य कर रही है।   जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को ऐसा ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास देना है, जो उन्हें जीवन और करियर की हर चुनौती के लिए तैयार करे। 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे छात्र न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट हैं, बल्कि उद्योग जगत की अपेक्षाओं पर भी पूरी तरह खरे उतर रहे हैं। हमें गर्व है कि जेईसीआरसी के छात्र देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर छात्र अपने सपनों को साकार करे और एक सफल भविष्य की मजबूत नींव रखे।"   आने वाले प्लेसमेंट सीजन के लिए जेईसीआरसी में 400 से अधिक कंपनियों आएंगी | जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें सफल, आत्मविश्वासी और उद्योग के लिए पूरी तरह तैयार बनाना है। 2104 प्लेसमेंट ऑफर्स की उपलब्धि और 2027 के लिए शुरू किया गया कैंपस रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

    शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को सशक्त बनाने हेतु पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) एवं पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू हस्ताक्षरित

    - एमओयू के अंतर्गत पूर्निमा यूनिवर्सिटी में यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (YCC) की स्थापना जयपुर: पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) ने पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.), एक अग्रणी अखिल भारतीय कम्युनिकेशन एक्सचेंज मंच है जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। इस समझौते का उद्देश्य जनसंपर्क, पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, इंडस्ट्री इंटरैक्शन तथा व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना है।   यह एमओयू 15 मई 2026 को PRCI जयपुर चैप्टर के चेयरमैन सोमेन्द्र हर्ष एवं पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. देवेन्द्र सोमवंशी द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर मीडिया एवं शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें सनी कुलश्रेष्ठ, सचिव, PRCI, प्रो. मंजरी राय, प्रो प्रेसिडेंट- FPA and FDA, पूर्निमा यूनिवर्सिटी; तथा डॉ. जितेन्द्र शर्मा, डीन, फैकल्टी ऑफ डिजाइन आर्ट्स (FDA), पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रमुख रूप से शामिल रहे।   इस अवसर पर पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (PRCI) जयपुर चैप्टर के जॉइंट सेक्रेटरी, डॉ. राहुल बाबू कोडाली तथा पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की डॉ. आस्था सक्सेना, हेड, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग, को एमओयू के समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया।   इस सहयोग का उद्देश्य दोनों संस्थाओं के मध्य शैक्षणिक एवं शोध संबंधों को मजबूत बनाना है, जिससे विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों एवं संचार क्षेत्र के पेशेवरों को लाभ मिल सके। इस साझेदारी के अंतर्गत इंडस्ट्री विशेषज्ञों, शिक्षकों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स तथा पब्लिक रिलेशंस एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन से संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से वर्कशॉप, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, संगोष्ठी, पीआर क्लब गतिविधियां, इवेंट मैनेजमेंट पहल एवं प्रकाशन संपादन परियोजनाओं का आयोजन करेंगी। साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में शोध प्रकाशनों, शैक्षणिक संसाधनों एवं व्यावसायिक विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।   एमओयू की एक प्रमुख विशेषता पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में यंग कम्युनिकेटर्स क्लब (YCC) की स्थापना है। यह क्लब विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त समन्वयक के मार्गदर्शन में संचालित होगा तथा विद्यार्थियों को नेतृत्व, संचार कौशल एवं इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कार्यक्रमों के माध्यम से पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया (पी.आर.सी.आई.) जयपुर चैप्टर गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ेगा।   दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा तथा मीडिया एवं संचार क्षेत्र में इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के संबंधों को और अधिक सशक्त बनाएगा।   यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा ग्राम जयरामपुरा और दौलतपुरा में 'समावेशी विकास के लिए वित्तीय समावेशन' पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित

    विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व एवं उन्नत भारत अभियान के तहत हुआ कार्यक्रम आयोजन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी सार्थक परिचर्चा   जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय की टीम द्वारा 'समावेशी विकास के लिए वित्तीय समावेशन' विषय पर दो विशेष जागरूकता सत्रों का आयोजन किया गया।   नोडल अधिकारी व लाइफ़लॉंग लर्निंग विभाग के निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम राज्यपाल राजस्थान हरिभाऊ बागड़े एवं कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा के कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व (यू एस आर) स्कीम एवं भारत सरकार की ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वाकांक्षी परियोजना “उन्नत भारत अभियान” के तहत आयोजित किया गया। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए प्रावधानों और वित्तीय साक्षरता के प्रति जागरूक करना है।   प्रथम सत्र: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयरामपुरा कार्यक्रम के प्रथम सत्र का आयोजन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयरामपुरा में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए किया गया। सत्र की शुरुआत में श्रीमती अंबू वर्मा ने विश्वविद्यालय की टीम का स्वागत किया और इस ज्ञानवर्धक पहल के लिए आभार व्यक्त किया।   राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में एनईपी के तहत संचालित किए जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों और उनके महत्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।   वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता सीएस भुवन अग्रवाल ने वित्तीय समावेशन की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, अटल पेंशन योजना, जन आधार योजना और चिरंजीवी योजना के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल बैंकिंग, बैंक ऋण प्रक्रियाओं और मीशो व अमेज़न जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसाय करने के आधुनिक तरीकों की भी जानकारी दी। इस सत्र में स्कूली विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान किया।   द्वितीय सत्र: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा कार्यक्रम का दूसरा सत्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा में परिचर्चा के रूप में विशेष रूप से स्कूल टीचर्स एवं आम ग्रामीणों के लिए आयोजित किया गया। यहाँ कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्या श्रीमती सुमन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का स्वागत किया और ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सत्रों की उपयोगिता को रेखांकित किया ।   कोर्स स्ट्रीम और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने इस सत्र में एनईपी के तहत कोर्स स्ट्रीम में हुए नए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से 'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट' सिस्टम के बारे में बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार पढ़ाई छोड़ने और दोबारा शुरू करने की अनूठी आजादी देती है ।   एनईपी में वित्तीय समावेशन विशेषज्ञ सीएस भुवन अग्रवाल ने इस सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण और इसके व्यावहारिक महत्व पर चर्चा की, ताकि विद्यार्थी भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस विशेष सत्र के आयोजन के लिए सभी शिक्षकों ने राजस्थान विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया ।  

    राजस्थान में नरेगा बहाली और वीबी-ग्रामजी कानून रद्द करने की मांग तेज

     *मनरेगा ग्रामीण गरीबों की जीवन-रेखा है, इसे खत्म करना करोड़ों मजदूर परिवारों की आजीविका पर हमला है- निखिल डे*     *मनरेगा पर हमला मतलब ग्रामीण गरीबों की रोटी, सम्मान और जीने के अधिकार पर हमला, मजदूर इसका जवाब संघर्ष से देंगे -मुकेश निर्वासित*     *काम मांगो अभियान” की राज्यव्यापी शुरुआत, राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन*  जयपुर सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के नेतृत्व में आज पूरे राजस्थान में नरेगा बहाली तथा वीबी-ग्रामजी कानून को रद्द करने की मांग को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों एवं ग्राम पंचायतों में मजदूरों, ग्रामीणों, महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे तथा “काम मांगो अभियान” की शुरुआत की। आज भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सिरोही, सीकर, जयपुर, डीग, डूंगरपुर सहित अनेक जिलों में विरोध प्रदर्शन, रैलियाँ एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित हुए। देवगढ़ की ग्राम पंचायत लसानी, भीम की ग्राम पंचायत कालदेह, कूकरखेड़ा , डूंगरपुर के बीछीवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र, ब्यावर जिले के बदनोर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बदनोर, छतरपुरा, गिरधरपुरा एवं मोगर, जवाजा की ग्राम पंचायत बामनहेड़ा एवं आसान रावतमाल, कोटड़ा तथा भीलवाड़ा जिले की करेडा पंचायत समिति की थाना, शिवपुर और नारेली ज्ञानगढ़ सहित कई पंचायतों में मजदूरों ने ज्ञापन देकर नरेगा को बहाल करने और वीबी-ग्रामजी कानून वापस लेने की मांग उठाई। आज से शुरू हुए “काम मांगो अभियान” के तहत पूरे राजस्थान में ग्रामीण मजदूरों द्वारा रोजगार की मांग के आवेदन पंचायतों और प्रशासन को दिए गए। अभियान के कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर मजदूरों को उनके रोजगार अधिकारों की जानकारी दी तथा अधिक से अधिक परिवारों को काम मांगने के लिए प्रेरित किया। अभियान का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रोजगार कोई दया नहीं बल्कि कानूनी अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराए। मनरेगा कानून लाने के लिए हुए ऐतिहासिक आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले एवं सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक निखिल डे ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों की जीवन-रेखा है। मनरेगा ने आर्थिक मंदी, सूखा, कोरोना महामारी और ग्रामीण संकट के दौर में सुरक्षा कवच का काम किया था। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि वीबी-ग्रामजी कानून जरिए रोजगार गारंटी की मूल भावना को खत्म किया जा रहा है। पहले मजदूर पूरे 12 महीने काम की मांग कर सकते थे, लेकिन अब केंद्र सरकार अपने हिसाब से कभी भी दो महीने तक काम बंद कर सकती है। इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर होगा और पंचायतों का काम की योजना बनाने का अधिकार भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 125 दिन रोजगार देने का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाएगा क्योंकि पहले जैसी मजबूत कानूनी गारंटी अब नहीं बचेगी। मनरेगा के क्रियान्वयन, मजदूरों के रोजगार अधिकार और ग्रामीण आजीविका के सवालों पर लंबे समय से सक्रिय रूप से कार्य कर रहे तथा राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के सचिव मुकेश निर्वासित ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के वित्तीय ढांचे में किया गया बदलाव ग्रामीण भारत के रोजगार अधिकार पर सीधा हमला है। पहले इस योजना के श्रम मद का पूरा वित्तीय दायित्व केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 60:40 के अनुपात में 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। राजस्थान जैसे राज्य, जो पहले से लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के दबाव में हैं, उनके लिए इस योजना को प्रभावी ढंग से चलाना बेहद कठिन हो जाएगा। यह केवल बजट का प्रश्न नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूर परिवारों के जीवन, सम्मान और आजीविका का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में रोजगार देना चाहती है तो उसे बजट घटाने और मनरेगा को खत्म करने के बजाय मनरेगा को और मजबूत करना चाहिए। आज गांवों में मजदूर काम मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय अधिकार छीनने की तैयारी कर रही है। यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय दोनों के खिलाफ है। उन्होंने मनरेगा के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में राजस्थान में मानव दिवसों में भारी गिरावट दर्ज हुई है। MIS रिपोर्ट 5.1.4 के अनुसार अप्रैल 2025 में राज्य में 216.05 लाख मानव दिवस सृजित हुए थे, जबकि अप्रैल 2026 में यह घटकर केवल 76.76 लाख रह गए। यानी कुल मिलाकर लगभग 64.47 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि कई जिलों में रोजगार में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इनमें भरतपुर में 82.24 प्रतिशत, बाड़मेर में 82 प्रतिशत, सीकर में 75.93 प्रतिशत, हनुमानगढ़ में 75.92 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 73.98 प्रतिशत, टोंक में 72.40 प्रतिशत, अलवर में 71.98 प्रतिशत और झुंझुनूं में 71.62 प्रतिशत की गिरावट शामिल है। इसके अलावा पाली, सिरोही, प्रतापगढ़, दौसा और भीलवाड़ा जैसे जिलों में भी रोजगार के अवसरों में भारी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लाखों ग्रामीण मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाया। इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार द्वारा नए कानून और नई व्यवस्थाओं के नाम पर केवल झूठे वादे किए जा रहे हैं तथा ग्रामीण मजदूरों के साथ धोखा किया गया है। 125 दिन रोजगार का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि मजदूरों को 25 दिन काम मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है। अभियान से जुड़े साथियों ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों को आर्थिक शोषण और पलायन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे समय में इस कानून को कमजोर करना ग्रामीण रोजगार अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी तरह मजदूर भी अपने रोजगार अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करेंगे।  *अभियान की प्रमुख मांगें:*  1. मनरेगा को पूर्व स्वरूप में पूर्ण कानूनी गारंटी के साथ बहाल किया जाए। 2. वीबी-ग्रामजी कानून को तत्काल वापस लिया जाए। 3. ग्रामीण परिवारों को मांग पर न्यूनतम 200 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए। 4. रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। 5. सभी लंबित मजदूरी भुगतान तुरंत जारी किए जाएं। 6. पंचायतों को योजना निर्माण और कार्य चयन के अधिकार वापस दिए जाएं। 7. मजदूरी दर को बढ़ाया जाए।  8. महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों के रोजगार अधिकारों की रक्षा की जाए। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में “काम मांगो अभियान” को और व्यापक रूप से चलाया जाएगा तथा पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक मजदूरों के रोजगार अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा।

    *विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस, राजस्थान में 15 पुनर्विकसित स्टेशन

      जैसलमेर, बूंदी, बाड़मेर, मंडलगढ़ और सोमेसर आदि नवीनतम सुविधाओं के साथ यात्रियों की सेवा कर रहे हैं*   *2 साइड एंट्री, एक और प्लेटफ़ॉर्म, 6 मीटर चौड़ाई के 2 ओवरब्रिज और 9 लिफ्ट के साथ   , अलवर रेलवे स्टेशन को ₹112 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है*   राजस्थान की वास्तुकला, विरासत को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ मिलाते हुए, अलवर स्टेशन का पुनर्विकास तेज़ी से प्रगति पर है: अश्विनी वैष्णव   नई दिल्ली। केन्द्रीय रेल, सूचना और प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक् स और सूचना प्रौदयोगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज राजस् थान में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन् विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया। राज्य मंत्री संजय शर्मा के साथ अन्य गणमान्य व्यक्तियों और वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने भी वर्चुअल रूप से इस कार्यक्रम में भाग लिया।   रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अलवर रेलवे स्टेशन पर 112 करोड़ रुपये का पुनर्विकास कार्य किया जा रहा है। महत्वपूर्ण दिल्ली-जयपुर मार्ग पर महत्वपूर्ण रूप से स्थित, अलवर स्टेशन हर दिन हजारों यात्रियों को खानपान के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करता है। लगातार बढ़ते यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, स्टेशन को बेहतर यातायात प्रबंधन प्रणालियों, पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं, बेहतर आगमन और प्रस्थान क्षेत्रों और आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।    वैष्णव ने कहा कि अलवर रेलवे स्टेशन पर पुनर्विकास कार्य तेज़ी से प्रगति पर है और स्टेशन पूरा होने के बाद एक आधुनिक और सौंदर्यपूर्ण रूप से डिज़ाइन की गई सुविधा के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप अलवर स्टेशन के पुनर्विकास  योजना बनाई गई है कि रेलवे स्टेशनों को शहरों के लिए कनेक्टर के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी कनेक्टिविटी में सुधार के लिए स्टेशन के दोनों ओर प्रवेश सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्टेशन भवनों का निर्माण राजस्थान की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के अनुसार किया जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि आधुनिक प्लेटफ़ॉर्म, फुट ओवरब्रिज, पार्किंग व्यवस्था और यात्री आवाजाही सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।   पुनर्विकास परियोजना के तहत, यात्रियों को स्टेशन के मुख्य और दिव्तीय प्रवेश द्वारों पर बेहतर और निर्बाध प्रवेश और निकास व्यवस्था से लाभ होगा। लगभग 16,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विकसित किया जा रहा नया स्टेशन परिसर, आधुनिक बुनियादी ढांचे और यात्री-केंद्रित सुविधाओं से युक्त होगा। यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त हाई लेवल प्लेटफ़ार्म, 6-मीटर चौड़ाई के 2 फुट ओवरब्रिज का निर्माण और 9 आधुनिक लिफ्ट भी लगायी जा रही हैं।   यात्रियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए निजी वाहनों, टैक्सियों और ऑटो-रिक्शा के लिए पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ़ ज़ोन भी बनाए जा रहे हैं। लगभग 4,500 वर्ग मीटर में नई पार्किंग सुविधा स्टेशन क्षेत्र में और उसके आसपास पहुंच में सुधार करेगी और भीड़भाड़ को कम करेगी। इसके अलावा, वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन के बाहरी क्षेत्र के लिए एक व्यापक यातायात परिसंचरण योजना भी तैयार की गई है।   पुनर्विकास परियोजना में वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए लगभग 1,900 वर्ग मीटर क्षेत्र भी शामिल है। विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं प्रदान करने के अलावा, इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के लिए एक उभरते केंद्र के रूप में अलवर की स्थिति को मज़बूत करने की उम्मीद है।   रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत, अलवर क्षेत्र में तीन स्टेशन, गोविंदगढ़, राजगढ़ और खैरथल पहले ही पूरे हो चुके हैं। पूरे राजस्थान में 85 स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम चल रहा है, जिसमें से 15 स्टेशन अब तक पूरे हो चुके हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि पूर्ण किए गए स्टेशनों में बाड़मेर, बूंदी, दौसा, डीग, देशनोक, फतेहपुर शेखावती, गंगापुर शहर, गोगामेडी, गोविंदगढ़, राजगढ़, खैरथल, जैसलमेर, मंडलगढ़, मंडावर महवा रोड और सोमेसर शामिल हैं। देश भर में, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास के लिए 1,340 स्टेशनों पर कार्य चल रहा है।   श्री वैष्णव ने कहा कि राजस्थान में वर्तमान में 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं तथा एक अमृत भारत एक्सप्रेस भी शुरू की गई है। वैष्णव ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राजस्थान के लिए कई नई रेल सेवाएं भी शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली से जोधपुर और दिल्ली से बीकानेर तक वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं, उदयपुर से अहमदाबाद वंदे भारत एक्सप्रेस, जैसलमेर को दिल्ली से जोड़ने वाली स्वर्ण नगरी एक्सप्रेस, हैदराबाद-जोधपुर (भगत की कोठी) एक्सप्रेस और पुणे-जोधपुर एक्सप्रेस शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान के लिए कुल 46 नई ट्रेनें प्रदान की गई हैं, जिससे राज्य भर में कनेक्टिविटी और यात्री सुविधा में काफ़ी सुधार हुआ है।   रेल मंत्री ने कहा कि राजस्थान के लिए रेलवे बजट आवंटन बढ़कर 10,228 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछली सरकारों में यह लगभग 682 करोड़ रुपये था।   राज्य में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रकाश डालते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि 2014 से राजस्थान में लगभग 3,900 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। मारवाड़ मुंडवा, खेमली, भूपाल सागर, सोनू, हनवंत, मांडलगढ़, न्यू सराधना, हिरनोदा और केरला सहित स्थानों पर दस गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों को पहले ही चालू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जोगीमगरा, लेनला, धानक्या, कोटा जंक्शन, नवलगढ़ और बिरधवाल में छह और कार्गो टर्मिनल निर्माणाधीन हैं, जबकि आठ अतिरिक्त टर्मिनलों के लिए भी मंजूरी दी गई है।   रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे सीमेंट और वस्त्र से लेकर हस्तशिल्प, सेमीकंडक्टर और इंजीनियरिंग उत्पादों तक के क्षेत्रों के लिए देश भर के बंदरगाहों को निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करके राजस्थान में उद्योगों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।   वैष्णव ने कहा कि राजस्थान में कई प्रमुख रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं एक साथ प्रगति पर हैं। इनमें आगरा-बांदीकुई, अजमेर-चित्तौड़गढ़, बीकानेर-लालगढ़, चूरू-सादुलपुर और लुनी-भीलडी रेल मार्गों पर दोहरीकरण कार्य शामिल हैं; धौलपुर-सिरमाथुरा-गंगापुर और देवगढ़ मदरिया-नाथद्वारा सहित गेज परिवर्तन परियोजनाएं; मथुरा और झांसी के बीच तीसरी लाइन ; मथुरा और नागदा के बीच तीसरी और चौथी लाइन ; और नई लाइनें जैसे नीमच-बडी सादडी और पुष्कर-मेड़ता सिटी शामिल ह।   रेल मंत्री ने आगे कहा कि रेवाड़ी-काठूवास और रींगस-सीकर खंड पर दोहरीकरण कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि शिवपुर कलां-कोटा नई लाइन और तारंगा हिल-आबू रोड नई लाइन परियोजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, उमरा-देबारी दोहरीकरण का काम चल रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि राजस्थान के सभी क्षेत्रों तक रेलवे का विकास हो।    भूपेंद्र यादव ने अलवर क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया और कहा कि यात्रियों के लाभ के लिए कई ट्रेन सेवाओं को या तो शुरू किया गया है या विस्तारित किया गया है। श्री यादव ने कहा कि अलवर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास राजस्थान की भव्यता और स्थापत्य पहचान को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक अलवर स्टेशन राज्य के बेहतरीन रेलवे स्टेशनों में से एक के रूप में उभरेगा।  यादव ने क्षेत्र में कई रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास परियोजनाओं को मंजूरी देने और पूरा करने के लिए रेल मंत्रालय को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कनेक्टिविटी में सुधार और परिवहन को आसान बनाकर खैरथल, किशनगढ़ बास, बहरोड़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बहुत लाभ होगा।    भजन लाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान दिल्ली से अपनी निकटता से लाभान्वित हो रहा है, जो राज्य में औद्योगिक और परिवहन कनेक्टिविटी को मज़बूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी, नीमराणा जैसे औद्योगिक केंद्रों को बेहतर रेलवे और परिवहन बुनियादी ढांचे के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए दो प्रमुख रेल कनेक्टिविटी कॉरिडोर की योजना बनाई जा रही है, जिसमें अलवर की ओर एक रेलवे लाइन और बेहरोड की ओर एक आरआरटीएस कॉरिडोर शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से पारंपरिक रेलवे बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम दोनों के साथ एकीकरण में सुधार होगा, और राज्य सरकार उनके कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।   भारतीय रेलवे प्रगति, विश्वास और विकसित नए भारत के प्रतीक के रूप में आगे बढ़ना जारी रखता है। यह प्रत्येक यात्री के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यात्री सुविधाओं को मज़बूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।   अलवर स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संजय शर्मा, उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ, जयपुर मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन सहित गणमान्य अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।  

    बगड़ी में धार्मिक आस्था का महोत्सव : आई माताजी पाट स्थापना

      • देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने किया भामाशाहों का सम्मान सुमेरपुर। सोजत विधानसभा क्षेत्र के बगड़ी नगर स्थित श्री आईमाता गौशाला परिसर में श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव से ओतप्रोत भव्य आयोजन के तहत श्री आई माताजी पाट स्थापना, श्री महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं भामाशाह सम्मान समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के देवस्थान, पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंत्री कुमावत ने परम पूज्य गुलजी महाराज जी की समाधि के पावन दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसमें आई माताजी के पाट की स्थापना एवं महादेव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न करवाई गई। कार्यक्रम के दौरान गौशाला विकास में सहयोग देने वाले भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। अतिथियों ने गौसेवा को समाज की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए सभी से इसमें सहयोग करने का आह्वान किया। अपने संबोधन में मंत्री श्री कुमावत ने कहा कि आई माताजी एवं भगवान महादेव की कृपा से इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि गौशालाएं केवल पशु संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं की जीवंत पहचान हैं। उन्होंने कहा, “राजस्थान सरकार गौसंवर्धन एवं गौशाला विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।” मंत्री ने भामाशाहों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही ऐसे पुनीत कार्य संभव हो पाते हैं। उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रसादी वितरण के साथ आयोजन का समापन हुआ। कार्यक्रम में सोजत विधायक श्रीमती शोभा चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी, जिला महामंत्री दिगविजय सिंह, मंडल अध्यक्ष पूनम सिंह, चाड़वास के मंडल अध्यक्ष जगदीश सिंह राजपुरोहित, पूर्व मंडल अध्यक्ष भूपेंद्रपाल सिंह, पूर्व प्रधान पुख सिंह, जिला उपाध्यक्ष रूघाराम सेणचा, चैयरमैन प्रतिनिधि जुगल किशोर, मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहनलाल सेणचा, आई माता गौशाला समिति के अध्यक्ष रतन फौजी, सचिव भंवरलाल सेणचा, पंचायत समिति सदस्य मंजीत सिंह, जिला उपाध्यक्ष नरपत सिंह सोलंकी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

    पोसालिया में कुम्हार-कुमावत समाज की धर्मशाला का शुभ मुहूर्त

    कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत व राज्यमंत्री ओटाराम देवासी रहे मौजूद सिरोही। जिले के पोसालिया कस्बे में श्री कुम्हार कुमावत समाज द्वारा निर्मित नई धर्मशाला के शुभ मुहूर्त एवं लोकार्पण समारोह का भव्य आयोजन गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत तथा राज्य मंत्री ओटाराम देवासी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य नागरिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से साफा व माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। धर्मशाला के निर्माण को समाज की एकता और सामाजिक सहयोग का प्रतीक बताते हुए अतिथियों ने इसकी सराहना की। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि धर्मशालाएं केवल भवन नहीं होतीं, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा और एकजुटता का प्रतीक होती हैं। उन्होंने कहा कि कुम्हार-कुमावत समाज ने आपसी सहयोग और समर्पण से इस धर्मशाला का निर्माण कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे सामाजिक भवन भविष्य में शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों एवं जरूरतमंदों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। कुमावत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दें, जिससे समाज और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने भी समाज को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धर्मशाला का निर्माण सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्य समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। कार्यक्रम के अंत में समाज के प्रतिनिधियों ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और धर्मशाला के सफल संचालन का संकल्प लिया। इस मौके पर परम पुज्य श्री श्री 1008 श्री गोविंद वल्लभदास जी महाराज श्रीपतिधाम नंदवन राजपुरा सिरोही, भाजपा जिला प्रतिनिधि, पाली भरत सिंह राजपुरोहित, सिरोही भाजपा युवा मोर्चा के महामंत्री अनिल प्रजापत, जिला कार्यकारिणी सदस्य पुखराज प्रजापत, समाजसेवी मशाराम कुमावत, शंकरलाल कुमावत, पुराराम कुमावत, मोहनलाल कुमावत, महेंद्र कुमावत सहित अनेक प्रबुद्धजन मौजूद रहे।  

    राज्य सरकार का उद्देश्य गांवों का समग्र विकास कर आत्मनिर्भर बनाना : मंत्री कुमावत

    चांचोड़ी में विकसित ग्राम-2026 अभियान के तहत रात्रि चौपाल आयोजित • पशुपालन मंत्री ने जनसमस्याओं का किया मौके पर निस्तारण जयपुर/सुमेरपुर। सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव चांचोड़ी में “विकसित ग्राम-2026” अभियान के तहत बुधवार को रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री एवं स्थानीय विधायक जोराराम कुमावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं एवं मांगें मंत्री के समक्ष रखीं। चौपाल के दौरान पेयजल, सड़क, बिजली, पशुपालन सुविधाएं, चरागाह भूमि, चिकित्सा सेवाओं सहित विभिन्न मुद्दों पर ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी। मंत्री कुमावत ने मौके पर ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए और कई मामलों में त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित करवाई। अपने संबोधन में मंत्री कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य गांवों का समग्र विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। “विकसित ग्राम-2026” अभियान के तहत हर गांव में मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों को शहरों जैसी सुविधाएं अपने ही गांव में उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार गांवों के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक हर गांव को विकसित बनाकर वहां की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “रात्रि चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हमें सीधे जनता से संवाद करने का अवसर मिलता है, जिससे समस्याओं की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और उनका समाधान तेजी से किया जा सकता है। आप सभी ग्रामीणजन निसंकोच अपनी समस्याएं रखें, सरकार आपके साथ है।” कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने मंत्री का आभार व्यक्त किया। इस दौरान जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, मन की बात कार्यक्रम के जिला संयोजक शिवराज सिंह बिठिया, मंडल अध्यक्ष खोड नारायण सिंह बालराई, पूर्व मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह खरोकड़ा, सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रथ अभियान की प्रभारी शिवांगी कानावत, निवर्तमान सरपंच चांचौड़ी पूनम सिंह राजपुरोहित, नादाना भाटान सरपंच प्रतिनिधि श्रवण सिंह राव, बूथ अध्यक्ष सोहन सिंह राजपुरोहित, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता मोहन सिंह राव, बूथ अध्यक्ष पृथ्वी सिंह, केशाराम देवासी, उप सरपंच जगाराम, रानी एसडीएम, तहसीलदार, विकास अधिकारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।   स्कूल के लिए टीन शेड की घोषणा, विद्यार्थियों को मिलेगी राहत रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांग पर कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने गांव चांचोड़ी में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टीन शेड निर्माण की घोषणा की है। उन्होंने इसके लिए दस लाख रुपए की राशि जारी करने के निर्देश दिए। मंत्री कुमावत ने कहा कि विद्यालय परिसर में टीन शेड बनने से विद्यार्थियों को तेज धूप व बारिश के दौरान काफी राहत मिलेगी और शैक्षणिक गतिविधियां अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी। ग्रामीणों व विद्यालय स्टाफ ने मंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए आभार जताया। उन्होंने बताया कि लंबे समय से स्कूल में छाया की उचित व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ मिल सके।  

    प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय बने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर के सह-निदेशक शैक्षणिक

      जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में दिनांक 13 मई 2026 को मुख्यालय, नई दिल्ली के आदेशानुसार प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय, वरिष्ठ आचार्य व्याकरण ने सह-निदेशक शैक्षणिक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर जयपुर परिसर निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र एवं सह-निदेशक प्रशासन प्रो. शीशराम ने उन्हें विधिवत पूजा अर्चना कर कार्यभार ग्रहण करवाया तथा पुष्पमाला साफा पहनाकर उनका स्वागत किया। कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय ने कहा कि वे परिसर की शैक्षणिक गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण भाव से कार्य करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रवेश, विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों को सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रो पाण्डेय ने जयपुर परिसर के सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए समन्वित रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. श्रीधर मिश्र, प्रो सुभस्मिता मिश्र प्रो कृष्णा शर्मा, प्रो. गोरांग बाघ, डॉ कैलाश चंद्र सैनी,डॉ रानी दाधीच डॉ नमिता मित्तल डॉ दिनेश यादव डॉ सुभाषचंद्र मीना,डॉ लक्ष्मी शर्मा, डॉ किरण खींची,डॉ अंजू चौधरी, डॉ हरिओम शर्मा,नरेश सिंह, रजनीश पाण्डेय, डॉ.अश्विनी ठाकुर,मनमोहन दाधीच डॉ सत्यकाम आर्य सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे  

    नीट परीक्षा विश्वसनीय और पारदर्शी होनी चाहिए : नितिन कुकरेजा

    कोटा. नीट परीक्षा रद्द होने पर एलन करियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ऐसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास को प्रभावित करती हैं। कुकरेजा ने कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए मजबूत और तकनीक आधारित सिस्टम अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जेईई की तरह नीट परीक्षा भी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित की जानी चाहिए, जिससे पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि नीट परीक्षा को भी जेईई की तर्ज पर दो चरणों मेंस और एडवांस की तरह आयोजित किया जा सकता है। जिस प्रकार जेईई मेन दो सत्रों में आयोजित होती है, उसी तरह नीट में भी यह व्यवस्था लागू करने से विद्यार्थियों में परीक्षा का तनाव कम होगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, इससे अभ्यर्थियों की शैक्षणिक क्षमता का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा और योग्य एवं मेहनती छात्रों को देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने का अधिक निष्पक्ष अवसर मिलेगा। साथ ही, पूरी प्रवेश प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकेगी।