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    पोस्टर "हर घर तिरंगा" का विमोचन

    जयपुर । पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान द्वारा तैयार किया गया पोस्टर "हर घर तिरंगा" का विमोचन शासन सचिवालय में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने किया । इस अवसर पर यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ पर हर घर तिरंगा अभियान का शिक्षक समाज प्रचार- प्रसार करें ।तिरंगा झंडा अपने घरों पर फहराने के लिए प्रेरित करें। पुरस्कृत शिक्षक फोरम के महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने बताया कि विमोचन के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव से स्थानांतरण में पुरस्कृत शिक्षकों को प्राथमिकता देने के आदेश को स्थानांतरण नीति में सम्मिलित करने तथा विभाग द्वारा पुरस्कृत शिक्षकों को अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने के प्रस्ताव में वित्त विभाग द्वारा लगाये आक्षेप को दूर करके पुन: स्वीकृति के लिए भेजने का ज्ञापन दिया तथा वार्ता की।अतिरिक्त मुख्य सचिव ने दोनों मांगों को पूरा करवाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर पुरस्कृत शिक्षक फोरम अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार तथा विनोद कुमार शर्मा, महिला सचिव मधुर कुल्हार तथा अंजना वर्मा, सह सचिव सतीश शर्मा ,सह संरक्षक डॉ. के. के चोटिया, कार्यालय सचिव दामोदर शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य रामावतार नवल ,सीताराम मीणा तथा खामोश कंवर उपस्थित थे ।  

    वाणिज्य महाविद्यालय की 9 सूत्रीय मांगों को लेकर ABVP ने सौंपा ज्ञापन

    वाणिज्य महाविद्यालय, (राजस्थान विश्वविद्यालय) में विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं एवं मूलभूत सुविधाओं में सुधार को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) ने महाविद्यालय प्राचार्य को 9 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छात्रसंघ चुनाव, जर्जर भवन की मरम्मत, कैंटीन एवं स्वच्छता व्यवस्था में सुधार, शुद्ध पेयजल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का नियमित संचालन, BBA-BCA फीस में किस्त सुविधा, नई BBA-BCA बिल्डिंग शुरू करने, BBA लैब के आधुनिकीकरण एवं संचालन, बाहरी तत्वों के प्रवेश पर रोक तथा आधिकारिक सूचना समूह बनाने की मांग की गई। ABVP ने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाना महाविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। संगठन ने सभी मांगों पर शीघ्र एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। ABVP ने चेतावनी दी कि यदि विद्यार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो विद्यार्थी हित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा  

    दो दिवसीय विधि महोत्सव ‘जश्न-ए-ज्यूरिस 2026’

    कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वीमेन, जयपुर में पहली बार दो दिवसीय विधि महोत्सव ‘जश्न-ए-ज्यूरिस 2026’ का दिनांक 10 एवं 11 अगस्त को भव्य आयोजन किया गया। कानून, संस्कृति, कला और रचनात्मकता के इस अनूठे संगम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव के पहले दिन महाविद्यालय परिसर संगीत, कविता, नृत्य, फैशन, मनोरंजन और कानूनी प्रतिभा से गुलजार रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मानसी चौधरी और सोहा अजीज खान के उद्घाटन संबोधन से हुई। इसके बाद निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा एवं शिप्रक खंडाल ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया एवं छात्रा सोनल, निकिता, सावी एवं पारुल ने गणेश वंदना की प्रस्तुती दी। प्राचार्या, डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने स्वागत संबोधन में महाविद्यालय के प्रथम विधि महोत्सव को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। निदेशक, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को जीवनभर याद रहने वाली खूबसूरत स्मृतियां प्रदान करते हैं। महोत्सव के पहले दिन 6 प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई। महोत्सव के पहले आयोजन ‘अल्फाज़-ए-मंच’ ओपन माइक में छात्राओं ने गीत, बांसुरी, हारमोनिका, शायरी एवं कविता के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायक शिप्रक खाण्डल ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और मंच पर प्रस्तुति देने के साहस की सराहना की। उन्होंने आवाज के उतार-चढ़ाव और भावों की प्रभावी अभिव्यक्ति पर उपयोगी सुझाव दिए। इसके बाद आयोजित ‘वोग वर्डिक्ट’ फैशन शो का थीम ‘एलिमेंटल ओडिसी’ रहा। छात्राओं ने अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु, वृक्ष और सूर्य सहित प्राकृतिक तत्वों से प्रेरित परिधानों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को रैंप पर प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में डॉ. रिचा चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग, कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर उपस्थित रहीं। इसके बाद आयोजित फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में छात्राओं ने चेहरे को रचनात्मक अभिव्यक्ति का कैनवास बनाया। प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. सारिका कॉल, विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर, ड्राइंग एवं पेंटिंग विभाग, कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर ने किया। ‘द साइलेंट वर्डिक्ट’ लीगल चैराड्स प्रतियोगिता में छात्राओं ने कानूनी सूक्तियों और फिल्मों को अभिनय के माध्यम से प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में कानूनी ज्ञान के साथ विद्यार्थियों की अभिनय एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता भी परखी गई। ‘स्टेप अप’ डांस बैटल के एकल एवं युगल वर्ग में छात्राओं ने विभिन्न नृत्य शैलियों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक घूमर और भरतनाट्यम से लेकर आधुनिक हिप-हॉप तक विभिन्न नृत्य रूपों ने दर्शकों को आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका मिस पलक वशिष्ठ ने निभाई। ‘इल्म-ए-कानून’ लीगल क्विज प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के कानूनी ज्ञान, समसामयिक घटनाओं और सामान्य जागरूकता की परीक्षा ली गई। प्रतियोगिता के प्रथम चरण के बाद शीर्ष 10 टीमों ने अगले दौर के लिए स्थान बनाया। महोत्सव के दूसरे दिन ‘इल्म-ए-कानून’ लीगल क्विज के द्वितीय एवं तृतीय चरण तथा ‘ट्रेजर हंट’ सहित दो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। छात्राओं ने इन प्रतियोगिताओं में कानूनी ज्ञान, तार्किक क्षमता, टीमवर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का प्रदर्शन किया। ‘इल्म-ए-कानून’ लीगल क्विज प्रतियोगिता के द्वितीय एवं तृतीय चरणों में प्रतिभागियों से विधि, संविधान, महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों एवं समसामयिक कानूनी विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे गए। चुनौतीपूर्ण प्रश्नों के बीच छात्राओं ने आपसी समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय दिया। इसके पश्चात् आयोजित दूसरी प्रतियोगिता ‘ट्रेजर हंट’ रही, जिसमें छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को विभिन्न स्थानों पर छिपाए गए संकेतों, पहेलियों और सुरागों को खोजकर अगले पड़ाव तक पहुंचना था। परिसर में सुरागों की तलाश करती छात्राओं के बीच जीत की होड़ ने पूरे माहौल को रोमांचक बना दिया। प्रतियोगिताओं के बाद पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह आयोजित किया गया जिसमें विजेताओं एवं उपविजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि मीनाक्षी राठौड़, प्रसिद्ध राजस्थानी लोक गायिका, गीतकार एवं ‘डत् त्मबवतके’ प्रोडक्शन हाउस की निदेशक रहीं। मुख्य अतिथि मीनाक्षी राठौड़ ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए, तब तक रुकना नहीं चाहिए।” उन्होंने कहा कि आज का दौर स्वतंत्र महिलाओं का है और यदि महिला आत्मनिर्भर नहीं है तो उसे जीवन में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कानून के क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि कानून व्यक्ति को परिपक्व बनाता है तथा जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों और समस्याओं का आत्मविश्वास के साथ सामना करने में सक्षम बनाता है। कार्यक्रम का संचालन सेमेस्टर 10 की छात्राओं द्वारा किया गया। छात्राओं ने मंच संचालन की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाते हुए कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य डॉ. तेजस्वी शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दो दिनों तक चले इस महोत्सव ने कानून के साथ कला, संस्कृति, रचनात्मकता, मनोरंजन और व्यक्तित्व विकास को जोड़ते हुए छात्राओं को अपनी बहुआयामी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया। आयोजन ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व, टीम भावना और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ एक यादगार अनुभव प्रदान किया। महोत्सव के दौरान छात्राओं द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल, नेल आर्ट कॉर्नर एवं और मनोरंजक खेल भी आकर्षण का केंद्र रहे।

    बच्चों को नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाई

     एकता नगर ,धवास हीरापुरा पावर हाउस के पीछे, अजमेर रोड स्थित D.N.पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से नशा मुक्त भारत अभियान एवं मिशन स्पंदन के अंतर्गत विकसित भारत की ओर एक सशक्त कदम दादी प्रकाशमणि जी की पावन स्मृति में कक्षा नवी से 12वीं कक्षा तक के 400 बच्चों को नशा न करने की प्रतिज्ञा दिलाई गई जिसमें जगदंबा नगर केंद्र की बी.के. शशि तथा बी.के. मंजू एवं विद्यालय निदेशक बी.पी. गुर्जर तथा संतोष देवी गुर्जर उपस्थित रहे  

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से कुलगुरू प्रो. मदन मोहन झा की शिष्टाचार भेंट, दीक्षान्त समारोह के लिए किया सादर आमंत्रित

    जयपुर। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने मुख्यमंत्री निवास पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से औपचारिक शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को विश्वविद्यालय में आगामी 7 सितंबर को आयोजित होने वाले दीक्षान्त समारोह के लिए सादर आमंत्रित किया तथा समारोह का औपचारिक निमंत्रण पत्र भेंट किया। कुलगुरू प्रो. झा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी भी उपस्थित रहे। शिष्टाचार भेंट के दौरान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, संस्कृत शिक्षा के संवर्धन, भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण तथा विश्वविद्यालय की भावी विकास योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर सकारात्मक एवं प्रेरणादायी चर्चा हुई। कुलगुरू ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं आगामी शैक्षणिक योजनाओं से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा का मार्गदर्शन एवं सान्निध्य विश्वविद्यालय परिवार के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति आगामी दीक्षान्त समारोह को और अधिक गौरवपूर्ण बनाएगी।  

    आज के बदलते दौर में डिग्री के साथ स्किल्स, एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप जरूरी: डॉ. किरण बेदी

    ऊर्जा 2026’ का जोशपूर्ण आगाज बियानी में नए विद्यार्थियों ने शुरू किया नया सफर जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस की ओर से नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम ‘ऊर्जा 2026’ का आगाज नए अंदाज के साथ किया गया। इस अवसर पर ‘ऊर्जा’ के लाल रंग के स्वरूप को समझने के लिए सभी विद्यार्थियों ने लाल रंग के वस्त्र पहन कार्यक्रम में जोश और उत्साह का एहसास जगाया। इस वर्ष ‘द नेक्स्ट यू’ थीम के तहत कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सकारात्मक सोच एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करना रहा। कार्यक्रम की शुरूआत चैयरमेन डॉ. राजीव बियानी, प्रसिद्ध मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी ,अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी , अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी , डीन व प्रिंसिपल डॉ.ध्यान सिंह गोठवाल ने दीप प्रज्जवलित कर की। इस अवसर पर ‘शक्ति : सौम्यता से प्रचंडता तक’ विषय पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम में बियानी गर्ल्स कॉलेज की 20 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा एवं ‘ऊर्जा 2026-27’ की झलक प्रस्तुत कर नवागंतुक विद्यार्थियों को उपलब्धियों से परिचित कराया गया। इस अवसर पर संस्था के निदेशक एवं मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी विचारों के साथ संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न एटीट्यूड के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, करुणा, प्रेम, साहस एवं उत्साह को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ‘मन के हारे हार, मन के जीते जीत’ का संदेश देते हुए विद्यार्थियों के साथ टू-वे इंटरेक्शन किया और नए सफर में निरंतर सीखने, सकारात्मक दृष्टिकोण रखने तथा अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पालीवाल ने ‘अपने महाविद्यालय को जानें एवं प्रबंधन खेल’ गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। साथ ही कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत की प्रथम महिला सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी , सामाजिक कार्यकर्ता एवं पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी विशेष स्किल्स विकसित कर आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने अनिश्चित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने के साथ निर्णय क्षमता, बुद्धिमत्ता एवं कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन जैसी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास की दुनिया के प्रति सजग रहने, नियमित रूप से समाचार-पत्र पढ़ने, रेडियो सुनने तथा किताबों से ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर गुमराह होने से बचना चाहिए तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बैंक खाता खोलने और धन के महत्व को समझने के लिए भी प्रेरित किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भरता को अपनी प्राथमिकता बनाया, ताकि स्वयं के साथ अपने परिवार और माता-पिता को भी सम्मानजनक जीवन दे सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किताबों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उसमें प्राप्त ज्ञान को अपना ज्ञान बनाएं और निरंतर सीखते हुए स्वयं, परिवार एवं समाज के लिए सफल और उपयोगी बनें। वहीं, असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. राधिका बियानी डागा और डॉ. स्मृति तिवाड़ी द्वारा ‘गुलाबी इंडिया-जापान कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम’ के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ. किरण बेदी ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे भारत-जापान के बीच संवाद एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कल ऊर्जा के दूसरे दिन कॉलेज के विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा छात्राओं के लिए कई महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें यूपीएससी/आरपीएससी की तैयारी, जापान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी, तथा साकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम के अनुभव उजैसे विषयों पर विशेष सत्र शामिल होंगे। इन सत्रों का उद्देश्य छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, वैश्विक अवसरों, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभवों से परिचित कराना है।  

    शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में दीक्षारम्भ नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला संस्कार और संकल्प का मंत्र, विद्या के साथ संस्कार और जीवन का लक्ष्य जरूरी प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

    जयपुर.  केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में सोमवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय मुख्यालय के साथ देशभर के जयपुर सहित विभिन्न परिसरों से नवप्रवेशित विद्यार्थी आभासीय माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. डी. दयानाथ के वैदिक मंगलाचरण से हुई। छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई दी तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र कल्याण गतिविधियों, सुविधाओ एवं अवसरो की जानकारी दी। विद्या ही मनुष्य का द्वितीय जन्म कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माता के गर्भ से जन्म लेने पर मनुष्य को शरीर प्राप्त होता है, जबकि विद्या और संस्कार से उसका द्वितीय जन्म होता है। विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी निर्मल एवं जिज्ञासु मन से शिशुवत भाव लेकर ज्ञान की साधना करें। उन्होंने कहा कि विद्या केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा, श्रवण, मनन, अनुशीलन और निरंतर प्रयास से अर्जित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिस प्रकार माता-पिता के प्रति श्रद्धा होती है, उसी प्रकार अपने आचार्यों और गुरुओं के प्रति भी श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए। संस्कृत माध्यम से अध्ययन करते हुए विद्यार्थी ज्ञान के साथ संस्कार भी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणों को अपनाते हुए अवगुणों और दोषों का त्याग करना चाहिए तथा सही-गलत का विवेक करते हुए सदैव उचित मार्ग को स्वीकार करना चाहिए। पहले दिन से तय करें जीवन का लक्ष्य कुलपति प्रो.वरखेड़ी ने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का लक्ष्य पहले दिन से निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ें। नियमित अध्ययन, पुस्तकों की तैयारी, अनुशासन और निरंतर अभ्यास विद्यार्थी जीवन की सफलता का आधार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल शास्त्रों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन और जीविका के लिए भी सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं को एक श्रेष्ठ शिल्प की तरह तैयार करें। ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि नए विद्यार्थी अब विश्वविद्यालय के व्यापक परिवार का हिस्सा हैं और यहां उन्हें नए परिवेश, नए मित्रों तथा नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुलपति ने विद्यार्थियों को सफलता का सूत्र देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य “छात्र भी, शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी” के समन्वय के साथ आगे बढ़ना होना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी तथा प्रो. कुलदीप शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परम्परा, अनुशासन एवं अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी डॉ. विजय दाधीच, उपनिदेशक शैक्षणिक डॉ. देवानंद शुक्ल, डॉ. योगेन्द्र दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार बुटोलिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नारायण आरएल सिम्हा ने किया।  

    व्यापारियों के लिए medeation सहायक...जस्टिस शुक्ला

    आज के बदलते दौर में व्यापार उद्योगों में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ आवश्यक है यदि हम अपने कॉन्ट्रैक्ट में इसे डालेंगे तो न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले विलंब को टाल कर जल्द समाधान पा सकते है विवादों का तो उत्पन्न होना पीढ़ियों का किस्सा है जो सैकड़ों साल से चलता आ रहा है तब पंचायते निपटारा त्वरित करती थीं आज ज्यूडिशियरी पर बहुत भार होने के कारण समय ज्यादा लगता हैं l उपरोक्त विचार जस्टिस शुक्ला ने अप्सरा होटल मे GOCAL द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये l अध्यक्ष सर्च कौल ने स्वागत भाषण दिया ब कहा कि राम राज्य से विवादों का निपटारा मिडिएशन से होता आया है आज हम व्यापारियों को यह सुविधा उपलब्ध करने हेतु अग्रसर हैं आज हम तीन MOU साइन किए हैं जिनमें CAIT FMCG aur मावा विक्रेता संघ हैं। केट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश गुप्ता ने कहा कि व्यापारी जगत लिटिगेशन में कोर्ट में समय और धन की बर्बादी करता है फैसले आने में वर्षों लगते हैं आर्बिट्रेशन क्लॉज़ कॉन्ट्रैक्ट में डालने से समय और पैसे के अलावा मानसिक संत्रास से बचा जा सकता है कार्यक्रम में शहर के ईश्वर बाहेती गौतम कोठारी संजय पटवर्धन धर्मेंद्र खंडेलवाल प्रमोद खंडेलवाल आदि उपस्थित थी सचिव रेनू गुप्ता ने मोमेंटो भेट किया और आभार माना  

    साण्डेराव में खुलेगा देश का इकलौता 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म'

    60 करोड़ की लागत से सुधरेगी पशुओं की नस्ल -पशुपालन विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने किया भूमिपूजन एवं शिलान्यास जयपुर। पशुओं में नस्ल सुधार और उनके संरक्षण की दिशा में राजस्थान ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के एकमात्र एवं प्रथम 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म' के प्रशासनिक भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। यह शिलान्यास पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत द्वारा पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गांव साण्डेराव में स्थापित हो रहे इस सेंटर के प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। संभंतया यह देश का भी पहला एवं एकमात्र एक्सीलेंस इंडीजिनस सेंटर है, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार एवं संवर्धन का कार्य होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए राजस्थान सरकार की बजट घोषणा (2025-26) की क्रियान्विति के तहत काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे सेंटर के निर्माण और विकास पर करीब 60 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह अत्याधुनिक सेंटर करीब 200 बीघा की विशाल भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान की पारंपरिक और विशिष्ट पशु प्रजातियों का संरक्षण करना है। पशुओं की 30 प्रजातियों के पशुओं की नस्लों का होगा सुधार और संवर्धन  पशुपालन, मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि करीब दो वर्ष में यह सेंटर पूर्ण रूप से अपना मूर्त रूप ले लगा। यह देश का एकमात्र ऐसा सेंटर होगा, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार व संवर्धन पर रिसर्च होंगे। उन्होंने बताया कि खासकर उन प्रजातियों पर अधिक फोकस होगा, जो कि राजस्थान की हैं। कुमावत ने बताया कि गाय में गिर, कॉकरेंच, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी, मालवी व हरियाणा नस्ल का सैक्स सोर्टेड सीमन, कृत्रिम गर्भाधान व उन्नत नस्ल के सांड से सुधार व संवर्धन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खासकर दुनिया की सबसे छोटी गाय की पुंगनूर प्रजाति के नस्ल सुधार को लेकर भी संरक्षण व संवर्धन के लिए रिसर्च किया जाएगा। मूल रूप् से आंध्रप्रदेश की इस पुंगनूर नस्ल की गाय के पालन को लेकर पशुपालकों में खासा उत्साह है। इसके अलावा भैंस की स्वदेशी प्रजाति- मुर्रा, सूरती, जाफराबादी, मेहसाना, भेड़ की मगरा, मारवाड़ी, नाली, चोकला, पूगल, जैसलमेरी, मालपुरा व सोनाड़ी, बकरी की राजस्थान की प्रजाति- बारबरी, सिरोही, जमनापारी, जखराना, सोजत, मारवाड़ी, ऊंट की प्रजाति- जैसलमेरी व बीकानेरी तथा घोड़े की एकमात्र राजस्थान की प्रजाति मारवाड़ी के नस्ल का संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा। पशुपालकों को मिलेगा प्रशिक्षण और उन्नत नस्ल के पशु यह सेंटर सिर्फ एक अनुसंधान केंद्र नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बनेगा। पशुपालन मंत्री कुमावत ने बताया कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन के क्षेत्र में नए स्टार्टअप और उद्यमिता को विकसित किया जाएगा। इसके साथ-साथ पशुपालकों को आधुनिक और नवीन वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, समय-समय पर पशुपालकों के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे। यहाँ से पशुपालकों को सीधे उन्नत नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले पशु भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रशासनिक ढांचा और नए पदों का सृजन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार के वित्त विभाग ने प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत पशुपालन विभाग के लिए कुल 15 पदों का सृजन किया गया है, जिनमें 07 स्थायी पद शामिल हैं। वहीं, 8 पद संविदाकर्मियों के लिए सृजित किए गए हैं। इको-फ्रेंडली और ग्रीन टेक्नोलॉजी से लैस होगा सेंटर आधुनिकता के साथ-साथ इस सेंटर को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है। इस फार्म की दो सबसे बड़ी तकनीकी खास बातें होंगी। पहला, पूरे परिसर की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा जैसे पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों का बेहतरीन उपयोग किया जाएगा। साथ ही पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए उन्नत वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे भूजल स्तर सुधरेगा और फार्म आत्मनिर्भर बनेगा। वहीं, इस सेंटर का पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है। इस शिलान्यास समारोह के दौरान सरस डेयरी, पाली के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह नेतरा, सुमेरपुर एसडीएम कालूराम कुम्हार, विकास अधिकारी शैलेंद्र जोशी, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट, साण्डेराव के अध्यक्ष जगत सिंह राणावत, साण्डेराव की प्रशासक दाकू देवी, साण्डेराव मण्डल के अध्यक्ष जोराराम देवासी, समाजसेवी गणपत सिंह देवतरा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रगतिशील पशुपालक व ग्रामीण मौजूद रहे।  

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीतिक भूमिका" विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर स्थित ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर में भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), विकास एवं सुविधा कार्यालय, जयपुर के सहयोग से आयोजित "डिजिटल युग में एमएसएमई का विस्तार : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीतिक भूमिका" विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया, सहायक निदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), जयपुर रहीं। कार्यक्रम में अन्य मेंटर्स एवं डॉ. सुनील छींपा, मेंटरशिप इंचार्ज, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर तथा दीपक कुमार शर्मा, टेक्निकल ऑफिसर, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुमिता कच्छवाहा, समन्वयक, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर ने की। समापन सत्र के दौरान कार्यक्रम में चयनित 25 प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित कर उनके द्वारा तैयार की गई पावर पॉइंट प्रस्तुतियाँ (PPT Presentations) करवाई गईं। प्रतिभागियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित व्यावसायिक नवाचार, डिजिटल मार्केटिंग, उत्पादकता वृद्धि, व्यवसाय विस्तार, ग्राहक प्रबंधन, डेटा विश्लेषण तथा एमएसएमई क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रभाव जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों के उपरांत विशेषज्ञों के साथ एक पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा एमएसएमई क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग, डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप विकास, बाजार विस्तार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने संबंधी अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाने तथा व्यवसाय में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी तकनीक बन चुकी है। यदि उद्यमी डिजिटल तकनीकों और एआई आधारित समाधानों को अपनाते हैं तो वे अपनी उत्पादकता, गुणवत्ता, विपणन क्षमता तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्राप्त ज्ञान को अपने उद्यमों एवं संस्थानों में व्यवहारिक रूप से लागू करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुमिता कच्छवाहा ने कहा कि ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता तथा तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम का फीडबैक प्राप्त किया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताया। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल उद्यमिता, स्टार्टअप, नवाचार एवं व्यवसाय विकास जैसे विषयों पर इसी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का अनुरोध किया। इस अवसर पर डॉ. सुनील छींपा ने कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी एवं प्रायोगिक सत्रों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों, शोधार्थियों एवं युवाओं को नवीनतम डिजिटल तकनीकों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों से जोड़ना था, जिससे वे भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। कार्यक्रम के अंत में चयनित सभी 25 प्रतिभागियों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन पर भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र मुख्य अतिथि श्रीमती अनिला चौरड़िया, प्रो. सुमिता कच्छवाहा, डॉ. सुनील छींपा तथा अन्य अतिथियों द्वारा वितरित किए गए। समारोह का समापन प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजन दल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर की टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।  

    प्रो. मंजू ठाकुर लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया

    मनोविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर की विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी को भारत में स्कूल मनोविज्ञान सेवाओं के क्षेत्र में उनके सराहनीय और उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘प्रो. मंजू ठाकुर लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। प्रो. पुरी का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का प्रमाण है, बल्कि यह देश में मानसिक स्वास्थ्य, विशेष शिक्षा और बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में एक मजबूत आधारशिला रखने की उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। ​यह पुरस्कार उन्हें हाल ही में चेन्नई के प्रतिष्ठित एन.के.टी. नेशनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर वीमेन में आयोजित 16वें InSPA (इंडियन स्कूल साइकोलॉजी एसोसिएशन) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। इस तीन दिवसीय (5 से 7 अगस्त 2026) सम्मेलन का मुख्य विषय “न्यूरोडाइवर्सिटी को सशक्त बनाना: विविधताओं का उत्सव, क्षमताओं को उजागर करना और समावेशन का निर्माण” था। इस प्रतिष्ठित आयोजन में विभिन्न देशों फ़िलिस्तीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया से कुल 300 प्रतिनिधियों (डेलिगेट्स) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। ​सम्मेलन के दौरान InSPA के अध्यक्ष प्रो. पंचरामालिंगम ने इस आयोजन के उद्देश्यों और वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रकार के सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य "भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर स्कूल मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं का एक जीवंत वैश्विक समुदाय तैयार करना है, जो आपसी साझा सीख और सहयोग को बढ़ावा दे सके।"  

    राजस्थान में बढ़ेगा उन्नत नस्ल की बकरियों का दुग्ध उत्पादन

    रामसर में स्थापित होगी देश की सबसे बड़ी व अत्याधुनिक 'गोट सीमन लैब'  जयपुर। प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उन्नत नस्ल के छोटे जुगाली करने वाले पशुओं (विशेषकर बकरियों) की उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की राजस्थान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय प्रवर्तित योजना-नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) के तहत अजमेर के रामसर स्थित राजकीय पशु प्रजनन फार्म में संभंवत देश की सबसे बड़ी एवं अत्याधुनिक 'गोट सीमन उत्पादन प्रयोगशाला' की स्थापना की जाएगी। यह भारत की सबसे बड़ी लैब होगी, जिसमें सालाना दो लाख डोजेज तैयार की जाएंगी। इस आधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस पर ₹875 लाख रुपए खर्च होंगे, जिसमें 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र व 40 फीसदी हिस्सेदारी राजस्थान सरकार की है। इस लैब का मुख्य उद्देश्य उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बकरों के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान (एआई) को बढ़ावा देना है। यूपी की 'डीयूवीएएसयू' यूनिवर्सिटी से मिलाया हाथ प्रयोगशाला को विश्वस्तरीय तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित करने के लिए राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को एमओयू की प्रति सौंपी गई है। यह तकनीकी सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार के 'उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान 'डीयूवीएएसयू', मथुरा' के साथ किया गया है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा, "यह समझौता राजस्थान के पशुपालन क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मथुरा विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर हम रामसर (अजमेर) फार्म को देश के बेहतरीन गोट सीमन सेंटर्स में से एक के रूप में विकसित करेंगे। उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब दो करोड़ बकरियां हैं, जो पूरे भारत का 16 फीसदी है। बकरियों की संख्या के आधार पर राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य भी है। राज्य की पारंपरिक और प्रसिद्ध बकरी नस्लों जैसे- सिरोही, मारवाड़ी व जखराना प्रजाति के आनुवंशिक सुधार में मदद मिलेगी। दो लाख डोजेज की मदद से राज्यभर के सुदूर गांवों में पशुपालकों के द्वार तक बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा पहुंचेगी। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार सीमन के इस्तेमाल से बकरियों में फैलने वाली कई संक्रामक और आनुवंशिक बीमारियों पर लगाम लगेगी। अजमेर का यह राजकीय फार्म अब एक नेशनल हब के रूप में उभरेगा। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों के पशुपालक भी लाभान्वित हो सकेंगे। सरकार का लक्ष्य इस लैब को दिसंबर-2026 तक पूरी तरह क्रियाशील करने का है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार मीना, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के प्रबंधक डॉ. प्रीतपाल सिंह कालरा, 'उप्र. पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा, मथुरा लैब गोट सीमन लैब के प्रभारी डॉ. मुकुल आनंद की मौजूदगी में एमओयू किया गया।