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    उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा बढ़ी, हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ रहे निहंग जत्थे को लेकर प्रशासन अलर्ट

    Yugcharan News / 26 जून 2026 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर गुरुवार देर रात उस समय सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई जब निहंग सिखों का एक बड़ा जत्था हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और सीमा पर निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन के अनुसार सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। हालात को देखते हुए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और यातायात को नियंत्रित किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की सूचना मिली, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, त्वरित प्रतिक्रिया दल और अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, जत्थे के कुछ सदस्यों ने अपने साथियों की गिरफ्तारी को लेकर नाराज़गी जताई और उनकी रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई होने तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा। हेमकुंड साहिब देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पहले से ही व्यापक तैयारियां करता है। अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा स्थिति के बावजूद यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहों से दूर रहने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार की गलत जानकारी स्थिति को और जटिल बना सकती है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो अतिरिक्त बल भी तैनात किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य बातचीत और कानून के दायरे में रहकर स्थिति का समाधान निकालना है ताकि किसी भी पक्ष को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा और संवाद दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी संवेदनशील परिस्थिति में प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच शांतिपूर्ण संवाद से समाधान निकलने की संभावना अधिक रहती है। इसी दिशा में अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल सीमा क्षेत्र में स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुणे किले से युवक की मौत मामले में नया मोड़, आरोपी युवती के माता-पिता ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की

    Yugcharan News / 26 जून 2026 महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस मामले में गिरफ्तार युवती के माता-पिता ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद उनकी बेटी दोषी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सबसे कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे निष्पक्ष जांच के पक्ष में हैं और किसी भी प्रकार की रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में दर्ज बयानों, तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मृतक युवक और आरोपी युवती की शादी इसी वर्ष तय बताई जा रही थी। दोनों परिवार लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और विवाह की तैयारियां भी चल रही थीं। ऐसे में इस घटना ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। आरोपी युवती के माता-पिता ने कहा कि मृतक उनके लिए भी परिवार के सदस्य जैसा था और उसकी मृत्यु से उन्हें भी उतना ही दुख पहुंचा है। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी ने कभी विवाह को लेकर किसी गंभीर असहमति की जानकारी उन्हें नहीं दी थी। यदि उसे किसी प्रकार की परेशानी थी तो उसने परिवार के साथ खुलकर चर्चा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के अपना काम करने दिया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। पुलिस इस मामले में आरोपी युवती और एक अन्य आरोपी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों के अनुसार घटना से पहले दोनों के बीच संपर्क, यात्रा का विवरण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और क्या इसके पीछे कोई पूर्व योजना थी। मामले से जुड़े कुछ दावों और बयानों की भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के बयान को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता और सभी तथ्यों का सत्यापन कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। इसलिए मामले से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी गई है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहें फैलाने या अपुष्ट दावों को साझा करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा किया जाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और प्रत्यक्ष गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी आरोपी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय केवल न्यायालय ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। दोनों परिवारों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उम्मीद जताई है कि सभी तथ्यों के सामने आने के बाद न्याय सुनिश्चित होगा। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने तक मामले के प्रत्येक पहलू की सावधानीपूर्वक पड़ताल की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, हेमकुंड साहिब की ओर बढ़े निहंग श्रद्धालुओं को लेकर बढ़ी सतर्कता

    Yugcharan News / 26 जून 2026 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर गुरुवार देर रात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब निहंग सिखों का एक बड़ा जत्था हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचा। प्रशासन द्वारा लगाए गए सुरक्षा अवरोधों के बीच कुछ स्थानों पर तनावपूर्ण माहौल बना, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी। प्रशासन के अनुसार सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को एहतियात के तौर पर तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। सुरक्षा अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की। बताया जा रहा है कि जत्था पंजाब से उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ था। सीमा पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत का दौर भी चला। कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग के पास धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई थी। दंगा नियंत्रण उपकरणों से लैस पुलिस बल, स्थानीय प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता शांति बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रदर्शन कर रहे निहंग समूह ने अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रशासन के सामने बात रखी। उन्होंने कहा कि वे संबंधित मामले में गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी निर्णय के लिए कानून का पालन किया जाएगा। हेमकुंड साहिब हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। ऐसे में प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। सीमा क्षेत्र में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल भी तैनात किया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार यात्रा मार्ग पर सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही आम लोगों को सलाह दी गई है कि यदि वे इस मार्ग से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो प्रशासन द्वारा जारी यातायात और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रशासन ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की स्थिति का समाधान बातचीत और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था सख्त है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव, एशियाई शेयर बाजारों पर भी पड़ा असर

    Yugcharan News / 26 जून 2026 मध्य पूर्व में बढ़ते समुद्री सुरक्षा संबंधी तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में पहले तेज़ उछाल दर्ज किया गया, हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता लौटने से कीमतों में आंशिक गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी मार्ग से विभिन्न देशों तक पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर सीधे ऊर्जा बाजारों और निवेशकों की धारणा पर पड़ता है। तेल की कीमतों में पहले तेजी, फिर आई नरमी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार शुक्रवार को कारोबार के शुरुआती घंटों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि बाद में निवेशकों द्वारा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के बाद कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अभी भी क्षेत्रीय हालात पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। यदि समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। समुद्री सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता हाल के घटनाक्रमों के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। कुछ जहाजों की आवाजाही पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और शिपिंग कंपनियाँ भी जोखिम का आकलन कर रही हैं। समुद्री परिवहन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है क्योंकि इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू की, जिसके चलते कई प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊँची बनी रहती है तो इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। वैश्विक व्यापार पर संभावित प्रभाव होर्मुज़ जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं। यदि सुरक्षा कारणों से जहाजों की आवाजाही धीमी होती है तो कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का असर परिवहन, विमानन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप कई देशों में महँगाई पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका रहती है। निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर वित्तीय बाजारों में इस समय निवेशकों का ध्यान पूरी तरह मध्य पूर्व की स्थिति पर केंद्रित है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, जबकि किसी भी नई घटना से तेल और शेयर बाजारों में फिर से अस्थिरता देखने को मिल सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए जाने वाले कदम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों की राय ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो कीमतों में अत्यधिक उछाल की संभावना कम होगी। वहीं किसी भी लंबे व्यवधान की स्थिति में ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। आगे क्या? फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। शिपिंग कंपनियाँ, ऊर्जा उत्पादक देश और निवेशक सभी आगामी घटनाक्रमों का इंतजार कर रहे हैं। यदि समुद्री मार्गों पर सामान्य संचालन बना रहता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन सुरक्षा संबंधी किसी भी नई चुनौती का असर वैश्विक तेल कीमतों और वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।

    वेनेजुएला में दो शक्तिशाली भूकंपों से भारी तबाही, मृतकों की संख्या 235 पहुँची, राहत एवं बचाव अभियान जारी

    Yugcharan News / 26 जून 2026 वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई है। अधिकारियों के अनुसार अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में मलबा हटाने का कार्य अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका बनी हुई है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, सड़कों में दरारें आ गईं और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी राष्ट्रीय आपदा राहत एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग, पुलिस और स्वयंसेवकों की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। भारी मशीनों की मदद से क्षतिग्रस्त इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है ताकि यदि कोई व्यक्ति अभी भी जीवित हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के बाद शुरुआती कुछ दिन बचाव कार्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण राहत दल दिन-रात बिना रुके प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। अस्पतालों पर बढ़ा दबाव भूकंप के बाद बड़ी संख्या में घायल लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की टीमें लगातार मरीजों का उपचार कर रही हैं। कई अस्पतालों में अतिरिक्त चिकित्सा व्यवस्था की गई है ताकि अधिक से अधिक लोगों को समय पर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रशासन ने घायलों के उपचार के लिए अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। कई इलाकों में भारी नुकसान भूकंप के कारण कई रिहायशी मकान, व्यावसायिक इमारतें और सार्वजनिक ढाँचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ स्थानों पर इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि कई भवनों में गंभीर दरारें आने के कारण लोगों को उन्हें खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों, बिजली व्यवस्था और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा है। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित रही, जबकि कुछ इलाकों में संचार सेवाएँ भी प्रभावित हुईं। संबंधित एजेंसियाँ इन सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने का प्रयास कर रही हैं। राहत शिविरों की स्थापना प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयाँ, कंबल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिन लोगों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके लिए अस्थायी आवास की भी व्यवस्था की जा रही है। राहत एजेंसियाँ बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं का भी ध्यान रख रही हैं। स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भी राहत सामग्री वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। लापता लोगों की तलाश जारी भूकंप के बाद कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए विशेष सहायता केंद्र बनाए हैं, जहाँ लोग अपने परिजनों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। राहत दल लगातार मलबे में खोज अभियान चला रहे हैं और प्रत्येक सूचना की गंभीरता से जाँच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट खबर को साझा करने से बचें। अंतरराष्ट्रीय सहायता की संभावना प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों ने सहायता देने की इच्छा व्यक्त की है। मानवीय सहायता के तहत चिकित्सा सामग्री, राहत उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की आपदा से उबरने में समय लगेगा और पुनर्निर्माण का कार्य कई महीनों तक जारी रह सकता है। पुनर्निर्माण की चुनौती राहत अभियान के साथ-साथ प्रशासन अब क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण की योजना भी तैयार कर रहा है। इंजीनियर प्रभावित इमारतों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि किन भवनों की मरम्मत संभव है और किन्हें पूरी तरह दोबारा बनाना होगा। हजारों परिवार फिलहाल अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। आने वाले दिनों में उनके पुनर्वास, रोजगार और आवश्यक सेवाओं की बहाली प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। लोगों से सतर्क रहने की अपील विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बड़े भूकंपों के बाद आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करने और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।   राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जैसे-जैसे नए इलाकों तक राहत दल पहुँच रहे हैं, वैसे-वैसे नुकसान का वास्तविक आकलन सामने आ रहा है।

    भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण में युवाओं की सहभागिता सराहनीय : डॉ. अमृता कौर

    राष्ट्र सम्मत/नागपुर। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं इम्म्वर्स एआई के संयुक्त तत्वावधान में नागपुर में आयोजित 21 दिवसीय समर स्कूल "बिल्डिंग सिविलाइजेशनल एआई फ्रॉम भारत" के दसवें दिवस पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग की सहायक आचार्या एवं समन्वयक डॉ. अमृता कौर ने प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य और पांडुलिपि संपदा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। संस्कृत और एआई का समन्वय भविष्य के ज्ञान-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर के संरक्षण का सशक्त प्रयास बताया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. लीना सक्करवाल के संरक्षण में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन एवं निर्देशन प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, सह संयोजक सहायक आचार्य योगेंद्र दीक्षित द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के 23 प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों से चयनित 30 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के अंतर्गत पांडुलिपियों एवं प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) तकनीक द्वारा जनित पदों एवं वाक्यों का प्रतिभागियों द्वारा सत्यापन एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इससे भारतीय ज्ञान-संपदा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित एवं शोधोपयोगी बनाने का कार्य आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण उन्हें संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक समन्वय को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम में इम्म्वर्स एआई के प्रोजेक्ट मैनेजर नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े तथा उन्होंने परियोजना की प्रगति, उद्देश्यों और तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। समर स्कूल के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि विज्ञान, ग्रंथों के डिजिटलीकरण, भाषा प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग तथा एआई आधारित नवाचारों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय: नीतू यादव को भूगोल विषय में मिली पीएच.डी. की उपाधि

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर ने सोशल साइंस फैकल्टी के भूगोल (Geography) विभाग की शोध छात्रा नीतू यादव को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि के लिए योग्य घोषित करते हुए प्रोविज़नल सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। ​नीतू यादव ने विश्वविद्यालय के जियोग्राफी विभाग के प्रो. आर. एन. शर्मा के निर्देशन में अपना शोध कार्य पूरा किया है। उनके शोध का मुख्य विषय "शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में सूखा नियोजन तथा प्रबंधन - एक भौगोलिक अध्ययन" था।

    स्वरोत्सव' 26 का आयोजन किया गया

    विश्वविद्यालय राजस्थान महाविद्यालय में व्यंजना सोसाइटी द्वारा विश्व संगीत दिवस के उपलक्ष में स्वरोत्सव' 26 का आयोजन किया गया। "हम भारत के लोग: नादब्रम्ह से नवभारत तक" विषय पर आधारित इस कार्यक्रम के अंतर्गत अंतर महाविद्यालय शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता में संगीत के साधक विद्यार्थीयों द्वारा मल्हार, भूपाली, मालकौंस एवं मालश्री जैसी विभिन्न रागों का गायन किया गया। संयोजिका डॉ. मीना रानी ने बताया कि उत्सव में संगीत विभाग ,राजस्थान विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रो. आरती भट्ट तैलंग मुख्य अतिथि रहीं। प्री लोक मंथन, जयपुर 2026 के अंतर्गत इस कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि प्रज्ञा प्रवाह राजस्थान के क्षेत्र संयोजक कमलेश विद्यार्थी रहे। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. विनोद कुमार शर्मा ने विद्यार्थीयों को कर्तव्य बोध कराया। प्रतियोगिता में साहिल कट्टा प्रथम, राघवी मेवाल द्वितीय एवं भारती कुमारी तृतीय स्थान पर विजेता रहीं। विभागाध्यक्ष डॉ. मोहन नायक कार्यक्रम समन्वयक रहे। छात्र समन्वयक वैभव पाटनेचा ने बताया की शास्त्रीय संगीत को आम-जन तक पहुँचाने एवं भारतीय परंपरा को सहेजकर रखने की दृष्टि से स्वरोत्सव जैसे कार्यक्रम होना महत्वपूर्ण हैं।  

    प्रतिष्ठित न्यूरो सर्जन डॉ. वी.डी. सिन्हा बने AASNS के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष

    जयपुर। राजधानी जयपुर के नाम एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि दर्ज हुई है। देश के विख्यात और वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वी.डी. सिन्हा को 'एशियन-ऑस्ट्रेलियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स' (एएएसएनएस) का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। यह गौरव हासिल करने वाले डॉ. सिन्हा भारत के पहले न्यूरो सर्जन हैं, जो कि अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं जो कि महासचिव व न्यूरो ट्रोमा सोसाइटी के चैयरमैन भी रह चुके हैं। उनकी इस वैश्विक कामयाबी से देश और प्रदेश के चिकित्सा जगत में हर्ष की लहर है। दुनिया के सबसे बड़े कॉन्टिनेंटल संगठन में निर्विरोध चयन यह ऐतिहासिक निर्णय फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित एएएसएनएस की इंटरनेशनल मीटिंग के दौरान लिया गया। विश्व के इस सबसे बड़े कॉन्टिनेंटल न्यूरोसर्जिकल संगठन के द्विवार्षिक चुनाव में डॉ. सिन्हा की साख और योग्यता को देखते हुए उन्हें सर्वसम्मति (निर्विरोध) से अध्यक्ष चुना गया। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले डॉ. सिन्हा इस प्रतिष्ठित संस्था के महासचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वैश्विक मंचों पर मजबूत दखल डॉ. वी.डी. सिन्हा का न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा योगदान रहा है। वे इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण वैश्विक पदों को सुशोभित कर चुके हैं। वे 'वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सोसाइटीज' (डब्ल्यूएफएनएस) के सैकंड वाइस प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। 'वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सोसाइटीज' की 'न्यूरोरिहैबिलिटेशन और पुनर्निर्माण न्यूरोसर्जरी कमेटी' के डॉ. वीडी सिन्हा अध्यक्ष भी हैं। एसएमएस से एसडीएमएच तक का शानदार सफर डॉ. सिन्हा ने राजस्थान में न्यूरोसर्जरी की आधुनिक तकनीकों और इलाज को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। वे जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में लंबे समय तक आचार्य (प्रोफेसर) के पद पर रहे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में डॉ. सिन्हा जयपुर के प्रसिद्ध संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल (एसडीएमएच) में न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में मरीजों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सा जगत के लिए बड़ा संदेश चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. सिन्हा का इस शीर्ष अंतरराष्ट्रीय पद पर पहुंचना भारत में न्यूरोसर्जरी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। इससे न केवल भारतीय डॉक्टरों का वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में नए शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।  

    पीटीईटी परीक्षा 2026 का रिजल्ट घोषित

    भरतपुर के कार्तिक व चुरू के जयप्रकाश अव्वल उदयपुर के मनोज दूसरे व नागौर के युवराज रहे तीसरे स्थान पर उपमुख्यमंत्री बैरवा बोले, वीएमओयू के कुलगुरू प्रो वर्मा और उनकी टीम को बधाई कुलगुरू प्रो वर्मा ने उच्चशिक्षा मंत्री का जताया आभार जल्द शुरू होगी कालेजों के लिए काउंसलिंग जयपुर/कोटा। राज्य के 944 बीएड कालेजों में प्रवेश के लिए वर्धमान महावीर खुला विवि द्वारा आयोजित पीटीईटी परीक्षा 2026 का परीक्षा परिणाम गुरूवार को जयपुर में घोषित किया गया। इस बार प्रथम स्थान पर भरतपुर के कार्तिक कुमार गर्ग और चुरू के जयप्रकाश बिस्सू रहे, दोनों को 600 में से 509 अंक मिले। दूसरे स्थान पर उदयपुर के मनोज नागदा रहे जिन्हें 600 में से 508 अंक मिले और तृतीय स्थान पर नागौर के युवराज रहे जिन्हें 600 में से 507 अंक मिले। सभी टापर बच्चों से परिणाम घोषणा करने के बाद राज्य के उप मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री डा प्रेमचंद बैरवा ने मोबाइल पर वार्ता की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर डा बैरवा ने कहा कि मात्र 10 दिनों के अंदर परीक्षा परिणाम निकाल देने का अनूठा कार्य वीएमओयू ने किया हैं इसके लिए खुला विवि के कुलगुरू प्रो बीएल वर्मा और उनकी टीम बधाई की पात्र है। डा बैरवा ने कहा आज का अवसर युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा देने वाला है और ये उनके जीवन का एक नया द्वारा खोलने वाला है। भविष्य में ये सभी युवा शिक्षक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। डा बैरवा ने कहा कि सभी भावी शिक्षक अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएंगे जिससे देश आगे बढ़ सकेगा। कुलगुरू प्रो बीएल वर्मा ने राज्य सरकार, उपमुख्यमंत्री महोदय डा बैरवा समेत परीक्षा कार्य में लगे सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और जिलों के अधिकारियों व पुलिस कर्मियों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि हमारे उपमुख्यमंत्री डा बैरवा उच्चशिक्षा को समर्पित हैं और एनईपी 2020 को बढ़ावा देने के लिए हमेशा सक्रिय रहते हैं, यही वजह है कि आज सभी उच्चशिक्षा संस्थानों को एक नई उर्जा मिल रही है। प्रो वर्मा ने कहा कि डा बैरवा वंचितों को उच्चशिक्षा देने के मामले में सबसे आगे हैं। प्रो वर्मा ने पीटीईटी 2026 परीक्षा की संपूर्ण जानकारी प्रदान की और बताया कि किस तरीके से शुचितापूर्ण और अनुशासन से परीक्षा का सफल आयोजन संभव हुआ। उन्होंने बताया कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद जल्द ही काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परिणाम की घोषणा के वक्त पीटीईटी समन्वयक प्रो क्षमता चौधरी, डा संदीप हुडा, डा अकबर अली समेत विवि के अधिकारी, कर्मचारी व मीडियाकर्मी मौजूद रहे।  

    राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल का कक्षा 10वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी

    — शिक्षामंत्री ने टॉपर्स को फोन पर दी बधाई जयपुर। राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल का ऑन डिमांड (मार्च-मई 2026) कक्षा 10वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ। शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने आरएसओएस के 'माधव सभागार' में स्ट्रीम-1 एवं पूरक विद्यार्थियों का परिणाम जारी किया। शिक्षामंत्री ने 12वीं में टॉपर रहे झुंझुनूं के अभ्यर्थी करण चनेजा और 10वीं की अभ्यर्थी सोनू रेगर को राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर फोन कर बधाई दी। 10वीं और 12वीं में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों (महिला एवं पुरुष वर्ग) को 21 हजार रुपए और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 11 हजार रुपए की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। जिला स्तर पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को 5100 रुपए की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी। इस अवसर पर आरएसओएस निदेशक महेंद्र कुमार खींची, विशेषाधिकारी बी.के.गुप्ता, सचिव डॉ.अरूणा शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कक्षा 10वीं एवं 12वीं मार्च-मई 2026 का परीक्षा परिणाम कार्यालय की वेबसाइट https://rsosadmission.rajasthan.gov.in/rsos पर देखा जा सकता है। समस्या समाधान के लिए जारी होगा व्हाट्सएप नंबर — छात्रों की समस्या निवारण एवं जिज्ञासा समाधान हेतु आरएसओएस का एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया जाएगा, जिससे विद्या​र्थी आरएसओएस से जुड़कर आसान समाधान प्राप्त कर सकेंगे। आवेदन पत्रों में निरस्तीकरण के संबंध में भी प्रश्न पूछे जा सकेंगे।  

    पशुपालकों के कल्याण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की

    जयपुर । राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी और देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने गुरुवार को पशुपालन निदेशालय में विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में मंत्री ने पशुपालकों के कल्याण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से 'मुख्यमंत्री मंगला बीमा योजना' और 'सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी पात्र पशुपालकों को इस बीमा योजना का लाभ समय पर मिलना चाहिए। पशुओं के बीमा क्लेम की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि संकट के समय पशुपालकों को आर्थिक संबल मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए। सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन तकनीक का प्रसार: उन्नत नस्ल की बछड़ियों के जन्म को बढ़ावा देने वाली सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना को जमीनी स्तर पर मजबूती से लागू करने के निर्देश दिए। इस तकनीक से राज्य में उच्च दुग्ध क्षमता वाली गायों की संख्या बढ़ेगी, जिससे पशुपालकों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि होगी। मंत्री ने अधिकारियों को इस योजना के तहत दिए गए लक्ष्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए पाबंद किया। विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार और मॉनिटरिंग सख्त निगरानी: विभागीय योजनाओं की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक सुदृढ़ सिस्टम बनाने को कहा गया। अधिकारियों को हिदायत: कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें।बैठक के अंत में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार पशुपालकों और गोपालकों के आर्थिक उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के निदेशक सुरेश मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।