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    अनिंद्या, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, खेतड़ी को "स्टैटिसटिकल एनालिसिस ऑफ ह्यूमन हेल्थ रिक्स एसोसिएटेड विद ग्रोइंग एयर पॉल्यूशन इन अर्बन एरिया ऑफ जयपुर ” विषय पर पी एच डी की उपाधि

    अनिंद्या, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, खेतड़ी को "स्टैटिसटिकल एनालिसिस ऑफ ह्यूमन हेल्थ रिक्स एसोसिएटेड विद ग्रोइंग एयर पॉल्यूशन इन अर्बन एरिया ऑफ जयपुर ” विषय पर शोध के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर की ओर से पी एच डी की उपाधि प्रदान की गई। उनके शोध गाइड प्रो. अनिल कुमार भारद्वाज है.  

    अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की ओर से अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को यूनिसेफ एवं संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित थीम “बाल विवाह का अंत करें और बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करें” पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम तथा बालिकाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की 48 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पोस्टरों के माध्यम से बाल विवाह उन्मूलन, बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा तथा समान अवसर जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में डॉ. सारिका कौल, विभागाध्यक्ष, चित्रकला विभाग एवं डॉ. मोहिता चतुर्वेदी शर्मा, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में प्रिया कुमावत ने प्रथम, कनिका शर्मा ने द्वितीय तथा पूर्वी सिंह, ट्विंकल जांगिड़ एवं सोनिया चौधरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पायल महावर को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। विजेता छात्राओं को कार्यक्रम के निर्णायक गण द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय की निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्राचार्य डॉ सीमा अग्रवाल एवं उप प्राचार्य डॉ रंजुला जैन ने सभी प्रतिभागी छात्राओं एवं विजेताओं को बधाई देते हुए उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए छात्राओं द्वारा अपने पोस्टरों के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संवेदनशीलता और जागरूकता हेतु किये गये प्रर्दशन की प्रशंसा की और सभी छात्राओं को भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा बालिकाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए सदैव सजग एवं प्रयासरत रहने हेतु प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के अंत में सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की संयोजिका डॉ. स्वीटी माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं छात्राओं के प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सदस्य डॉ. दमयंती सोढ़ा, डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. सुरभि माथुर एवं डॉ. पूर्वा भारद्वाज की सक्रिय भूमिका रही।  

    “औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन

    कानोड़िया पी. जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को औषधीय पौधों के महत्व, आयुर्वेद में उनकी भूमिका तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक वनस्पति विज्ञान के बीच संबंधों से परिचित कराना रहा। व्याख्यान में डॉ. निशा शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, राजकीय आयुर्वेद औषधालय, जयपुर, ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्राओं से अपने विचार साझा किये। डॉ निशा शर्मा ने पेठा, अरंडी, प्याज़, तिल, जाती, मोगरा, मेंहदी, वसाका, मुलेठी, धनिया, आमला, बेल, हल्दी, मिर्च, तुलसी, लॉन्ग आदि के औषधीय गुणों, उनके पारंपरिक उपयोगों तथा स्वस्थ्य जीवनशैली में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। साथ ही, पौधों में पाए जाने वाले जैव-सक्रिय घटकों और उनके आयुर्वेदिक औषधीय महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। डॉ. शर्मा ने कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित आयुर्वेदिक ज्ञान की समृद्ध विरासत से अवगत कराने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत उपयोग तथा जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की समस्त प्राध्यापिकाएं एवं 75 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं अपना ज्ञानवर्धन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं में पादपों के औषधीय महत्व, रोगनाशक क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई।

    “ग्राफिक डिज़ाइन विद एआई विषय पर एक प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय में कंप्यूटर साइंस विभाग के द्वारा “ग्राफिक डिज़ाइन विद एआई विषय पर सोमवार को एक प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक ग्राफिक डिज़ाइन के सिद्धांतों और अत्याधुनिक जेनरेटिव एआई टूल्स के बीच की दूरी को कम करना था, जिससे छात्राओं को क्रिएटिव वर्कफ़्लो को सुव्यवस्थित करने, प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और उद्योग-मानक डिजिटल एसेट्स तैयार करने का व्यावहारिक कौशल मिल सके। EUONUS IT Pvt. Ltd. जयपुर के सीईओ दिनेश वर्मा ने कार्यशाला की शुरुआत करते हुए मैनुअल वेक्टर/रैस्टर एडिटिंग से मानव-एआई सहयोग के इस बदलाव पर चर्चा की और डिजिटल मीडिया में उद्यमी अवसरों व उद्योग की अपेक्षाओं पर प्रकाश डाला। सीनियर ग्राफिक डिजाइनर प्रवीण कुमार ने बताया कि एआई मॉडलों को निर्देशित करते समय टाइपोग्राफी, कलर थ्योरी और कंपोज़िशन के बुनियादी सिद्धांत कितने महत्वपूर्ण बने रहते हैं। महाविद्यालय की पूर्व छात्रा, एआई ग्राफिक डिजाइनर, दीपाली अग्रवाल ने टेक्स्ट-टू-इमेज जेनरेशन, इनपैंटिंग/आउटपैंटिंग, ऑटोमेटेड वेक्टराइज़ेशन और एआई-असिस्टेड लेआउट डिज़ाइन का लाइव डेमो दिया। इसके अतिरिक्त कार्यशाला में एथिक्स एआई आर्ट के नैतिक पहलुओं, कॉपीराइट बारीकियों और करियर तैयारी पर चर्चा हुई। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस कार्यशाला की सराहना करते हुए, रचनात्मक उद्योगों में एआई के तीव्र एकीकरण पर ज़ोर दिया। इस कार्यशाला में शामिल लगभग 90 प्रतिभागियों को कमर्शियल-ग्रेड ग्राफिक्स को कुशलतापूर्वक तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. जयन्ती गोयल द्वारा EUONUS IT Pvt. Ltd. की रिसोर्स टीम के प्रति आभार व्यक्त करने और छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राध्यापिका दीपा चौहान, स्वाति शर्मा, निधि महर्षि और हर्षिता वर्मा भी उपस्थित रहीं।  

    रेंजर्स एवं रोवर्स ग्रुप के छात्रों द्वारा छायादार एवं फलदार पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया

     अग्रवाल पीजी महाविद्यालय में राजस्थान राज्य भारत सरकार स्काउट एवं गाइड यूनिट के रेंजर्स एवं रोवर्स द्वारा छायादार एवं फलदार पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।जिसका शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर बी एल देवन्दा द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य ने सभी स्काउट एवं गाइड के छात्रों को रसीले फल एवं छाया देने वाले पौधों का महत्व समझाते हुए बताया कि हमें जीवन के अंदर दूसरे को अधिक से अधिक सहारा देकर उसको समर्थ बनाया जाए ताकि जीवन में उमंगता बनी रहे। तथा बताया कि ये वृक्ष न केवल धरती को हरा भरा बनाते हैं बल्कि मानव जीवन को समृद्ध ,स्वस्थऔर संतुलित बनाते हैं तथा आसपास के वातावरण के तापमान को काम करते हैं। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की स्काउटिंग गाइड टीम के सभी सदस्य तथा स्टाफ गणमौजूद रहे और कार्यक्रम को सराहा गया। और सभी को अपने आसपास की वातावरण को सुगम बनाने हेतु वृक्ष लगाने पर जोर दिया गया।  

    दीपशिखा कॉलेज में ‘दीक्षारंभ 2026-27’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं ‘फ्यूज़न फेस्ट 2026’ का भव्य शुभारंभ

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में सोमवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं मार्गदर्शन हेतु ‘दीक्षारंभ’ (Student Orientation Programme 2026-27) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, संस्थागत कार्यप्रणाली, अनुशासन एवं उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात गणेश वंदना प्रस्तुत की गई। महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने अपने सन्देश में विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व, अनुशासन, परिश्रम और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को नई संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करने का संदेश दिया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनिला शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, नियमों और गतिविधियों से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता के माध्यम से अपने व्यक्तित्व और शैक्षणिक क्षमताओं को निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जनक सिंह मीणा, प्रोफेसर, गांधीवादी चिंतन एवं शांति अध्ययन विभाग, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्याल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को गांधी दर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों, सत्य, अहिंसा, नैतिक मूल्यों एवं सादगीपूर्ण जीवन के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है।  विशेष अतिथि यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के भूतपूर्व वाईस चांसलर डॉ. वी. एन. प्रधान ने महाविद्यालय को ज्ञान एवं संस्कारों का मंदिर बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने हेतु प्रेरित किया। प्रो. (डॉ.) राम भजन कुमावत, औषधीय पादप शोधकर्ता, प्राणीशास्त्री, प्रोफेसर, योगाचार्य, गीताचार्य, सलाहकार एवं परामर्शदाता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग को कम करने तथा अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करना चाहिए, ताकि उनका बहुमूल्य समय व्यर्थ न हो, मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष सोनिया गौड़ ने विद्यार्थियों को पुस्तकालय की सुविधाओं, पुस्तकों एवं डिजिटल संसाधनों की जानकारी देते हुए नियमित अध्ययन और पठन-पाठन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान कंप्यूटर साइंस हेड निलेश शर्मा, प्रवेश निदेशक डॉ. राधा शर्मा, हेड-एडमिशन एवं आउटरीच श नितिन जैन, था विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों को संबंधित विभागों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन संसाधनों एवं महाविद्यालय में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली को समझने, शिक्षकों से परिचित होने तथा अपने नए शैक्षणिक सफर की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीतू चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन डॉ अपर्णा सोनी एवं हेमा सिंह द्वारा किया गया ,इस प्रकार प्रथम दिवस का ओरिएंटेशन कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक एवं प्रेरणादायक रहा।  

    कपकजा द्वारा वार्षिक साधारण सभा 2026 का सफल आयोजन

    खेतान पॉलिटेक्निक कॉलेज जयपुर एलूमनी एसोसिएशन द्वारा वार्षिक साधारण सभा 2026 का आयोजन शनिवार 10 October को होटल ग्रैंड सफारी में किया गया । सर्वप्रथम एसोसिएशन महासचिव दिनेश चंद सैनी द्वारा एजीएम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमे संस्था द्वारा विगत एक वर्ष में किये गये कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया । उसके बाद कोषाध्यक्ष श्री जयसिंह शेखावत द्वारा वर्ष 2025 - 26 का वार्षिक अंकेषित लेखा जोखा सदस्यों के सम्मुख पेश किया गया जो सर्वसम्मिति से पारित हुआ । उसके पश्चात संस्था के दो सदस्यों को उनके द्वारा उल्लेखनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया । सर्वप्रथम आरटीओ इंस्पेक्टर श्री दिनेश सिंह को उनके विभाग द्वारा रोड सेफ्टी एक्सीलेंस अवार्ड दिये जाने और ये सवाल आरपीएससी एग्जाम में शामिल करने हेतु उन्हें संस्था द्वारा सम्मानित किया गया । उसके पश्चात आरटीओ इंस्पेक्टर श्रीमती मुक्ता वर्मा सोनी को रोड एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद करके जान बचाने हेतु सामाजिक कार्य के लिये सम्मानित किया गया । एसोसिएशन अध्यक्ष जी पी शर्मा ने अपने संबोधन में अपने 4 वर्षों में किये गये कार्यों का उल्लेख किया और उनके कार्यकाल में किये गये नवाचारों और उपलब्धियों को सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत किया । इस अवसर पर उन्होंने सभी सदस्यों को उनके द्वारा दिये गये सहयोग और समय के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया और नव निर्वाचित पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बधाई दी । उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि भलें ही वो आगे अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे परन्तु उनका सहयोग और मार्गदर्शन निरन्तर जारी रहेगा । कार्यक्रम में वर्तमान कार्यकारिणी समिति के सभी सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान करके उनके द्वारा पिछले वर्षों में किये गये कार्यों के लिये सम्मानित किया गया । इसी क्रम में नव निर्वाचित अध्यक्ष रघुवीर सिंह, उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह, महासचिव एन राम, संयुक्त सचिव भंवर लाल यादव , कोषाध्यक्ष नंदा राम और पूरी कार्यकारिणी को पुष्प गुच्छ और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया । नव निर्वाचित अध्यक्ष रघुवीर सिंह और महासचिव एन राम ने भी अपने अपने विचार व्यक्त कियें । मीडिया प्रभारी अजय शर्मा को उनके द्वारा किये गये कार्य के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया गया । कार्यक्रम में सभी कपकजा सदस्य, कॉलेज कोऑर्डिनेटर्स और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहें । कार्यक्रम के समापन में उपाध्यक्ष प्रयाग राज विजयवर्गीय द्वारा वोट ऑफ़ थैंक्स दिया गया और अंत में राष्ट्रगान गाया गया । कार्यक्रम समाप्ति के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रात्रि भोज का आनंद उठाया ।  

    यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित

    राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में सोमवार को 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वर्ष 1844 में स्थापित संस्थान की गौरवशाली विरासत का स्मरण करते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया। समारोह में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र के विधायक एवं विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य  गोपाल शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत समारोह के संरक्षक रहे, जबकि महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किए गए। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय सेना तथा सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने संकाय सदस्यों के शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।  गोपाल शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम में महाविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र चिंतन तथा जागरूक एवं उत्तरदायी वैश्विक नागरिकों के निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा ने महाविद्यालय की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के हित में कुलगुरु प्रो. सारस्वत द्वारा की गई सकारात्मक पहलों की सराहना की। उन्होंने उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रगति के प्रति विश्वास व्यक्त किया। कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने महाविद्यालय की गौरवशाली विरासत तथा पूर्व प्राचार्यों एवं शिक्षकों के सम्मान की परंपरा की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों एवं समाज के प्रति उनके दायित्वों पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए शिक्षकों से उनके चरित्र निर्माण एवं नैतिक मूल्यों के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्यों को संस्थान के विकास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया तथा विभिन्न उपलब्धियाँ अर्जित करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया गया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक एवं जीवंत नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह और सांस्कृतिक रंग भर दिए। समारोह में महाविद्यालय के पदाधिकारियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। यह आयोजन संस्थान की गौरवशाली परंपरा एवं सामूहिक उपलब्धियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

    कानोड़िया पी जी महिला महाविद्यालय जयपुर और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के मध्य शैक्षणिक सहयोग हेतु हुआ एमओयू

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के मध्य शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू ) पर हस्ताक्षर किए गए। कानोड़िया कॉलेज की प्राचार्य डॉ सीमा अग्रवाल ने बताया कि इस साझेदारी का उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन, शिक्षक प्रशिक्षण, शोध, नवाचार तथा ज्ञान एवं संसाधनों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। समझौते के तहत दोनों संस्थान शिक्षकों के क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (CBP), अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम (STP), शैक्षणिक नवाचार, नेतृत्व विकास, प्रबंधन कौशल एवं विद्यार्थी व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों में सहयोग करेंगे। साथ ही, शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर जागरूकता एवं अकादमिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस सहयोग से शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता, शिक्षण-पद्धतियों में नवाचार तथा शोध क्षमता को सुदृढ़ करने के अवसर उपलब्ध होंगे। यह समझौता तीन वर्ष के लिए हुआ है ।इसमें किसी प्रत्यक्ष वित्तीय लेन-देन का प्रावधान नहीं है; विशिष्ट वित्तीय व्यय वाली गतिविधियों के लिए दोनों संस्थानों के बीच अलग से लिखित सहमति की जाएगी। इस अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल, निदेशक प्रो शिव प्रसाद, कुलसचिव नेहा शर्मा, निदेशक शोध प्रो॰ सुब्रतो दत्ता के साथ कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल तथा उप-प्राचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रंजना अग्रवाल भी उपस्थित रहीं।  

    एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 का आयोजन

    जयपुर: एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय, रामबाग, जयपुर में आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम "लीवड एक्सपेरिएंसेस हर्ड : रियल वॉइसेस , रियल चेंज " रही। यह कार्यक्रम महाविद्यालय द्वारा सेंटर फॉर कम्युनिटी रेजिलिएंस एंड एडवोकेसी फाउंडेशन (सीसीआरएएफ ) एवं सोसाइटी ऑफ सोशल साइंस डेवलपमेंट एंड रिसर्च सेंटर के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ.लक्की आहूजा और पलक मेहता रही। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, व्यक्तिगत अनुभवों को सुनने और सामाजिक बदलाव में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. स्वाति जैन ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और खुलकर बात करना कितना जरूरी है। इस अवसर पर छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. पारुल मित्तल, डॉ. गणेश चौधरी एवं सुश्री शालिनी खंगारोत रहे। सेंटर फॉर कम्युनिटी रेजिलिएंस एंड एडवोकेसी फाउंडेशन के निदेशक डॉ. गणेश नारायण चौधरी ने धन्यवाद ओर आभार व्यक्त किया। सोसाइटी ऑफ सोशल साइंस डेवलपमेंट एंड रिसर्च सेंटर के सचिव डॉ. बद्री नारायण जाट भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस तरह के आयोजन छात्राओं में आत्म-जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में सहायक होते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य छात्राओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना तथा इस विषय पर खुलकर संवाद करने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना रहा।

    रिसर्च इन्वेस्टिगेशन: नागार्जुन की प्राचीन विधि पर जयपुर में प्रयोग, नमूने की जांच में 23.77 कैरेट सोना

    -कानोड़िया कॉलेज की फिजिक्स लैब में ढाई घंटे चला प्रयोग; वैज्ञानिक लाल बहादुर और टीम ने किया दावा, अब उन्नत लैब में सत्यापन की तैयारी जयपुर। प्राचीन भारतीय रसशास्त्र में आचार्य नागार्जुन से जुड़ी पारद (मरकरी) और धातु परिवर्तन की विधि को लेकर जयपुर में किया गया एक प्रयोग चर्चा का विषय बना है। कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर की भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिक लाल बहादुर और उनकी टीम ने 27 अगस्त को करीब ढाई घंटे तक प्रयोग किया। इसके बाद प्राप्त 0.240 ग्राम नमूने को जांच के लिए भेजा गया, जिसक ऐसे रिपोर्ट में परीक्षण की गई सतह पर 99.04% गोल्ड यानी 23.77 कैरेट दर्ज किया गया है। बीट्स पिलानी से इंजीनियरिंग, पोखरण-II परियोजना से भी जुड़े रहे लाल बहादुर कृतिका डायनामिक रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर के संस्थापक/निदेशक हैं और लंबे समय से ऊर्जा एवं संबंधित अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने बीट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में पोखरण-II से संबंधित परियोजना में भी कार्य किया। वे कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय में छात्राओं के स्टार्टअप के लिए मेंटोर तथा आईएसएलएस के लेट'एस स्टार्ट सेंटर के इनक्यूबिलिटी भी हैं. प्रयोग के दौरान विकिरण की निगरानी भी की गई. नागार्जुन के साहित्य से ली प्रक्रिया, लाल बहादुर ने किया मानकीकरण टीम के अनुसार प्रयोग की प्रक्रिया प्राचीन भारतीय रसशास्त्रीय साहित्य में आचार्य नागार्जुन से संबद्ध पारद एवं धातु-संस्कार संबंधी वर्णनों पर आधारित है। लाल बहादुर ने इस प्रक्रिया पर लंबे अध्ययन और प्रयोग के बाद इसे मानकीकृत किया। कॉलेज की सुसज्जित फिजिक्स लैब में आवश्यक सावधानियों के साथ इसे दोहराया गया। प्रयोग के दौरान विकिरण की निगरानी भी की गई और टीम के अनुसार कोई असामान्य विकिरण दर्ज नहीं हुआ। रिपोर्ट में 99.04% कैरेट, लेकिन अभी वैज्ञानिक पुष्टि बाकी एस्से रिपोर्ट में नमूने का वजन 0.240 ग्राम, गोल्ड 99.04%, सिल्वर 0.48% और तांबा 0.48% दर्ज है। स्वर्ण की शुद्धता 23.77 कैरेट बताई गई है। हालांकि रिपोर्ट पर “स्किन टेस्ट ओनली” अंकित है। इसलिए यह परिणाम नमूने की सतह की प्रारंभिक जांच है और इससे अभी यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं होता कि पारद का तात्विक रूपांतरण होकर ही सोना बना है। अब स्वतंत्र लैब में जांच और प्रयोग दोहराने की जरूरत प्रारंभिक परिणाम को देखते हुए टीम अब अलग-अलग मात्रा में अभिकारकों के साथ प्रयोग दोहराने, शुरुआती पदार्थों की जांच, नमूने के आंतरिक हिस्से का परीक्षण तथा एक्सआरएफ, आईसीपी-एमएस/आईसीपी- औइएस और आवश्यकता होने पर आइसोटोपिक एनालिसिस जैसे उन्नत परीक्षण कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से सत्यापन के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि प्राप्त सोने का स्रोत क्या है और प्रयोग के दौरान वास्तव में कौन-सी भौतिक, रासायनिक अथवा अन्य प्रक्रिया हुई। परिणामों की व्यापक वैज्ञानिक जांच कॉलेज प्रशासन, संकाय सदस्यों तथा आईएसएलएसी पदाधिकारियों ने प्रारंभिक प्रयोग के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर लाल बहादुर और उनकी टीम को बधाई दी तथा परिणामों की व्यापक वैज्ञानिक जांच और स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया। यदि स्वतंत्र एवं नियंत्रित प्रयोगों में परिणाम पुनः प्राप्त होते हैं, तो यह प्राचीन भारतीय रसशास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध-विषय बन सकता है।  

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    मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर फ्लैश मॉब का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर फ्लैश मॉब का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा भावनात्मक कल्याण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर 100 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल एवं डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने अपने प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक विचारों से छात्राओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन तथा स्वयं की देखभाल को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी एवं प्राध्यापिका सोना मिश्रा, जेनिस हाशमी एवं काउंसलर शुभि शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। सभी के सहयोग एवं छात्राओं की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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