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    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने निदेशालय आईसीडीएस की योजनाओं की समीक्षा की

    ईसीसीई में नवाचारों की सराहना, कुपोषण में कमी एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण सेवाओं में संवर्धन के निर्देश मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभाग की शासन सचिव पूनम एवं निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) वासुदेव मालावत, वित्तीय सलाहकार मनोज शांडिल्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।   मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा शाला पूर्व देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की और उन्हें निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एनईपी आधारित आधारशिला पाठ्यक्रम को और अधिक प्रभावी करने के निर्देश दिए।   उल्लेखनीय है कि आधारशिला के माध्यम से खेल, गतिविधियों एवं अन्वेषण आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।   मुख्य सचिव द्वारा सराहे गए प्रमुख नवाचार एवं सकारात्मक उपलब्धियां:   1. 98.5% आंगनबाड़ी केंद्रों का विद्यालयों से सह-स्थापन: प्रदेश में 98.5% आंगनबाड़ी केंद्रों (61,483 केंद्रों) को विद्यालयों के साथ सह-स्थित एवं मैप किया जा चुका है, जिससे बच्चों का प्राथमिक विद्यालय में सहज प्रवेश सुनिश्चित हो रहा है।   2. 1,000 चैंपियन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का क्षमता वर्धन: विभाग द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाली 1,000 उच्च प्रदर्शन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का चयन चैंपियन के रूप में किया गया है। इसके लिए 90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ये चैंपियन अपने ग्राम पंचायत की 3-4 आंगनबाड़ियों को मेंटर करेंगी।   3. प्रवेशोत्सव से 2.47 लाख बच्चों का नामांकन प्रोत्साहन: प्रवेशोत्सव के तहत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 2.47 लाख से अधिक बच्चों ने निकटवर्ती विद्यालयों का भ्रमण किया, जिससे नामांकन को बढ़ावा मिला है। साथ ही अभिभावक बैठकों के माध्यम से अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाई जा रही है।   4. पोषण ट्रैकर से सघन निगरानी:पोषण ट्रैकर के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित एवं वास्तविक निगरानी की जा रही है।   मुख्य सचिव के महत्वपूर्ण निर्देश:   मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि - • बाल स्वास्थ्य एवं पोषण के निर्धारित मानकों पर अपेक्षाकृत पीछे रहने वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए। • योजनाओं की वास्तविक स्थिति के आकलन के लिए नियमित क्षेत्रीय भ्रमण एवं औचक निरीक्षण किया जाए। • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर कार्य के लिए आवश्यक दक्षता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। • प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर विद्युत, पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।   उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा एवं बेहतर पोषण सेवाओं के माध्यम से बच्चों के स्वस्थ एवं सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जाए।  

    एमजीडी स्कूल में 13वीं नन्हीं छाँव राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित, जयपुर की हीर भाटिया बनीं विजेता

    महारानी गायत्री देवी (एमजीडी) गर्ल्स स्कूल में 13वीं 'नन्हीं छाँव राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता 2026' का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूलों से आए 18 प्रतिभागियों ने 'नन्ही सोच, बड़े विचार' थीम पर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में एमजीडी स्कूल की हीर भाटिया ने पहला स्थान हासिल कर 30,000 रुपये का नकद पुरस्कार और स्कूल के लिए रोटेटिंग ट्रॉफी जीती। वहीं, द सिंधिया स्कूल (ग्वालियर) के लक्ष्य तुलस्यान 20,000 रुपये के नकद पुरस्कार के साथ उपविजेता रहे। सभी प्रतिभागियों को स्मार्टवॉच देकर सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक व पूर्व राजनयिक पवन के. वर्मा और नन्हीं छाँव फाउंडेशन के चेयरमैन हरपाल सिंह रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती अर्चना एस. मनकोटिया ने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता और अभिव्यक्ति के विकास पर बल दिया। उल्लेखनीय है कि नन्हीं छाँव फाउंडेशन बालिकाओं के सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आपसी सद्भाव जैसे गंभीर विषयों पर युवा पीढ़ी को अपने विचार साझा करने के लिए निरंतर मंच प्रदान करता रहा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'सोशल मीडिया: एक प्रभावशाली ताकत' विषय पर ग्रुप डिस्कशन शामिल रहा, जिसका संचालन हरपाल सिंह ने किया। छात्राओं ने महिषासुर मर्दिनी नृत्य नाटिका की शानदार प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि पवन के. वर्मा ने छात्रों को ज्ञान के प्रति जिज्ञासु बनने और आत्मविश्वास से अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य निर्मला दुर्लभ, कुँवर अजय सिंह, राजकुँवरानी अंबिका सिंह जी, निर्णायक राजीव दुबे, प्रो. प्रजापति त्रिवेदी, प्राचार्या श्रीमती प्रमेंद्र खंगारोत और प्रशासनिक अधिकारी कर्नल एस. एस. सांगवान मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन हेड गर्ल अपूर्वा रावत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।  

    जयपुर स्थापना के 300 वर्ष पूर्ण होने के उत्सव रूप में ध्रुवपद विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' 29 अक्टूबर को

    जयपुर स्थापना के 300 वर्ष पूर्ण होने के उत्सव रूप में ध्रुवपद विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' 29 अक्टूबर को - जयपुर की स्थापना कच्छवाहा वंश के महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय द्वारा 18 नवम्बर 1725 में हुआ था इसके 300 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं,जिसके हर्ष के पूर्व उत्सव के श्री गणेश के रूप में हम जयपु -र निवासी ध्रुवपद -कलाकार "जयपुर घराना विमर्श " एवं नई पीढ़ी को जयपुर घराने के समृद्ध इतिहास और उसकी ध्रुवपद -परम्परा से जोड़ने हेतु एक प्रशिक्षण - कार्यशाला का आयोजन इन्टरनेशनल धुवपद धाम ट्रस्ट, जयपुर द्वारा राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़, जयपुर एवं कला - संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से अजमेरी गेट स्थित भैरोसिंह शेखावत भवन, राज. चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़,जयपुर में दिनांक 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे 5 बजे तक आयोजित होने जा रहा है। राजस्थान की धुवपद -परम्परा के प्रबल - प्रतिनिधि एवं प्रमुख प्रचारक रहे पद्मश्री पं लक्ष्मण भट्ट तैलंग की शिष्या राजस्थान की प्रथम ध्रुवपद - गायिका प्रोफेसर डॉ मधु भट्ट तैलंग राजस्थान के जयपुर घराने की ध्रुवपद - शैली को बताते हुए उसका प्रशिक्षण भी युवा विद्यार्थियों को प्रदान करेंगी, इसमें विद्यार्थियों का पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क होगा । 

    चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने राजस्थान विश्वविद्यालय के सीडीपीई का किया शैक्षणिक भ्रमण

    राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकी शिक्षा विकास केंद्र (सीडीपीई) में जी. जी. डी. एस. डी. महाविद्यालय, चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने 27 अक्टूबर को शैक्षणिक भ्रमण किया। इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के एम.एससी. भौतिकी के छात्र भी सम्मिलित रहे। इस दौरान विद्यार्थियों को भौतिकी के विभिन्न प्रयोगों एवं उपकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।   ​कार्यक्रम के दौरान प्रो. वाई. के. विजय ने विद्यार्थियों को भौतिकी विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हुए इसके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को भौतिकी की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।   ​सीडीपीई की निदेशक सरिता कुमारी के मार्गदर्शन में केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सीडीपीई द्वारा विकसित विभिन्न भौतिकी उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इनमें लीनियर एयर ट्रैक, मैग्नेटिक बैलेंस, बार्टन पेंडुलम तथा कंपाउंड पेंडुलम प्रमुख रहे। विद्यार्थियों को इन उपकरणों की कार्यप्रणाली एवं प्रयोगों में उनकी उपयोगिता से अवगत कराया गया।   ​इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ भौतिकी के प्रायोगिक पक्ष से परिचित कराना था। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी साबित हुआ।  

    अब खुलेगा राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का परमानेंट विभाग, छात्र नेता शुभम रेवाड़ के लंबे संघर्ष की हुई जीत

    जयपुर। राजस्थान के युवाओं, मातृभाषा प्रेमियों और छात्र शक्ति के लिए आज एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण दिन है। राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) में आखिरकार राजस्थानी भाषा का परमानेंट (नियमित) विभाग खोलने का रास्ता साफ हो गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही पूरे प्रदेश के छात्रों और मायड़ भाषा के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसे राजस्थान की माटी और छात्र नेता शुभम रेवाड़ के एक लंबे व अथक संघर्ष की सबसे बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। क्या है पूरी घोषणा: लंबे समय से की जा रही मांग को स्वीकार करते हुए आखिरकार राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का एक पूर्ण और स्वतंत्र नियमित विभाग (Permanent Department) स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस घोषणा के तहत अब छात्र अपनी मातृभाषा में नियमित रूप से डिप्लोमा, डिग्री और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) जैसे उच्च स्तरीय कोर्स कर सकेंगे। अब तक विश्वविद्यालय में विदेशी भाषाओं के नियमित विभाग तो चल रहे थे, लेकिन राजस्थान की अपनी भाषा को यह सम्मान हासिल नहीं था, जो कि शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में लड़ गए आंदोलन के बाद अब मुमकिन हो पाया है। शुभम रेवाड़ का लंबा संघर्ष और दर्जनों धरने: इस ऐतिहासिक मांग को हकीकत में बदलने के पीछे छात्र नेता शुभम रेवाड़ और उनके साथियों का एक लंबा और कड़ा संघर्ष रहा है। शुभम रेवाड़ पिछले लंबे समय से राजस्थानी भाषा को उसका हक दिलाने और प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों को बहाल कराने की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहे हैं। प्रशासन और सरकार के कानों तक छात्रों की आवाज पहुंचाने के लिए उन्होंने पूर्व में दर्जनों धरने दिए, रैलियां निकालीं और हर स्तर पर शांतिपूर्ण लड़ाइयां लड़ीं। 14 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल: इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ हाल ही में देखने को मिला, जब शुभम रेवाड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू कर दिया था। यह भूख हड़ताल पूरे 14 दिनों तक चली, जिसने पूरे प्रदेश के छात्र आंदोलन और सियासत में हलचल मचा दी थी। बिना अन्न-जल ग्रहण किए बैठने के कारण शुभम की तबीयत बेहद नाजुक हो गई थी और किडनी फेल होने का खतरा मंडराने लगा था। पुलिस प्रशासन ने उन्हें जबरन धरना स्थल से उठाकर सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के आईसीयू में भी भर्ती कराया था, लेकिन अस्पताल के बेड से भी शुभम ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और अनशन जारी रखा। आख़िरकार इस भीषण और अडिग संघर्ष के आगे प्रशासन को झुकना ही पड़ा। यह जीत केवल एक विभाग के खुलने की नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के करोड़ों लोगों की अस्मिता, उनकी मातृभाषा के सम्मान और छात्र शक्ति के एकजुट संकल्प की जीत है। छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने इस घोषणा पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे मायड़ भाषा के सम्मान और छात्र समुदाय के संघर्ष की एक बड़ी ऐतिहासिक जीत बताया है।  

    वेबसाइट बनाने से लेकर कंटेंट तैयार करने तक, एआई टूल्स के इस्तेमाल की दी जानकारी

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में एआई पर विशेष कार्यशाला आयोजित जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर एआई ट्रेनर सीए कमलेश बंसल, चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, अस्सिटेंट डायरेक्टर डॉ राधिका बियानी डागा, अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी,अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल सभी विभागाध्यक्ष और फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। इसमें सीए कमलेश बंसल ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई के उपयोग और उसके फायदों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि एआई की मदद से पढ़ाई, रिसर्च और रोजमर्रा के कई काम कम समय में और आसानी से किए जा सकते हैं। इस दौरान वेबसाइट बनाना, ई-मेल का प्रबंधन, समय-सारणी तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, जानकारी जुटाना और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट, परप्लेक्सिटी एआई, नोटबुक एलएम, कैनवा, गामा, लवेबल, फ्रेमर एआई, जैपियर, मेक, हेजेन और इलेवनलैब्स जैसे एआई टूल्स की जानकारी दी गई। कार्यशाला में प्रभावी परिणाम पाने के लिए सही प्रॉम्प्ट लिखने और चैटजीपीटी की मदद से बेहतर निर्देश तैयार करने के तरीके भी समझाए गए। इसके साथ ही, गूगल के नैनो बनाना टूल की मदद से एआई इमेज जनरेट करने, एआई की सहायता से प्रेजेंटेशन तैयार करने, अवतार बनाने और वॉइस ओवर तैयार करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को रिसर्च पेपर तैयार करने और शोध कार्य में सहायता के लिए नेपकिन एआई जैसे टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही, इन एआई टूल्स की मदद से समय बचाने, काम को व्यवस्थित करने, रचनात्मकता बढ़ाने और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए। वहीं बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने कहा कि बदलते दौर में नई तकनीकों को समझना और उनका सही इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने शिक्षा और रोजमर्रा के कामों में एआई का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में चंपापुरा कैंपस, कालवाड़ कैंपस, नर्सिंग, एजुकेशन ,लॉ विभाग एवं बीसीए को-एड के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एआई से सही जानकारी प्राप्त करने, तथ्यों की जाँच करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और कॉपीराइट का ध्यान रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई से तैयार सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले उसकी जाँच करना जरूरी है। कार्यशाला का आयोजन बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया और एसोसिएट प्रोफेसर राहुल अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना और उनके काम को आसान बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।  

    पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और कार्मिक प्रकरणों के निस्तारण पर चर्चा

    विभागीय गतिविधियों और लंबित प्रकरणों की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की समीक्षा यूनिफॉर्म डीबीटी, अपार आईडी एवं निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण की प्रगति की समीक्षा जयपुर। राजस्थान शिक्षा परिषद में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यों की प्रगति, लंबित प्रकरणों के निस्तारण, विभिन्न शैक्षिक योजनाओं के क्रियान्वयन तथा शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक (एएसपीडी) श्री अशोक मीणा सहित राज्य स्तर के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कार्मिक प्रकरणों और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा बैठक में कार्मिकों से संबंधित पेंशन एवं अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की गई। पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक (एनटीटी) से संबंधित विषयों तथा विभिन्न पदों से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों में प्रारंभिक जांच की प्रगति की जानकारी ली गई। अधिकारियों के साथ विभागीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्ययोजना से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। समग्र शिक्षा की गतिविधियों पर चर्चा समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने, अपार आईडी बनाने तथा निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन कार्यों की प्रगति, क्रियान्वयन की स्थिति तथा संबंधित प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाने से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया गया। लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा करने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने शैक्षिक योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और विभागीय दायित्वों का समयबद्ध तरीके से निर्वहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। बैठक में संयुक्त शासन सचिव दिव्यांश सिह, संयुक्त शासन सचिव एवं निदेशक ओपन स्कूल महेंद्र खिंची, अप शासन सचिव श्रीमती मुन्नी मीना सहित शिक्षा विभाग के आला अधिकारी उपस्थित रहे।  

    आरोही-2026 में छात्राओं ने जमाया रंग; कनक बारी बनीं मिस फ्रेशर

    जयपुर। गांधी नगर स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में नवागंतुक छात्राओं के स्वागत हेतु फ्रेशर पार्टी 'आरोही-2026' का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नवागंतुक छात्राओं द्वारा एकल नृत्य, फैंसी ड्रेस एवं फैशन शो जैसी विविध व मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। समारोह के दौरान छात्राओं ने रेट्रो थीम पर रैंप वॉक कर अपना प्रभावशाली परिचय दिया। 'मिस फ्रेशर-2026' प्रतियोगिता के लिए संस्थान के सभी छह डिप्लोमा विभागों से चयनित छात्राओं के मध्य कैटवॉक व इंट्रोडक्शन राउंड, टैलेंट राउंड तथा क्वेश्चन-आंसर राउंड का कड़ा व रोचक मुकाबला हुआ। बहुप्रतिभाशाली प्रदर्शन के आधार पर कड़े मुकाबले के पश्चात कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग की हिमानी वैष्णव रनर-अप रहीं तथा मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट (MOM) विभाग की कनक बारी ने अपने उत्कृष्ट एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण प्रदर्शन से 'मिस फ्रेशर-2026' का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही सभी विभागों की छात्राओं ने विभिन्न समसामयिक एवं रचनात्मक थीमों पर मनमोहक फैशन शो का प्रदर्शन किया, जिसमें उत्कृष्ट परिधान निर्माण, पारंपरिक व आधुनिक डिजाइन और प्रभावी थीम प्रस्तुति के बूते टेक्सटाइल डिजाइन विभाग ने प्रथम स्थान हासिल किया। संस्थान की प्राचार्या श्रीमती शालिनी गुप्ता एवं छात्रा सलाहकार श्रीमती लक्ष्मी जैन ने छात्राओं की शानदार सृजनात्मक प्रस्तुतियों, आत्मविश्वास व अनुशासन की भूरि-भूरि सराहना की तथा अंत में विजयी छात्राओं को पुरस्कार व स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया गया।  

    तीतारिया गाँव में पहुँची यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की मतदाता जागरूकता रैली, ग्रामीणों को किया जागरूक

    जयपुर। मतदान के प्रति नागरिकों को जागरूक करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर की पाँचदिवसीय मतदाता जागरूकता रैली दूसरे दिन तीतारिया गाँव पहुँची। विश्वविद्यालय के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS Unit) तथा इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के संयुक्त प्रयास से संचालित इस अभियान के तहत विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से संपर्क कर मतदान के महत्व की जानकारी दी। अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को समझाया कि प्रत्येक मत लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने नागरिकों को अपने मताधिकार का उपयोग सोच-समझकर करने, मतदान के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों ने संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया कि जागरूक मतदाता ही समाज और देश के विकास में सार्थक योगदान दे सकता है। रैली के दौरान “Your Vote Matters” और “जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ” जैसे संदेशों के जरिए लोगों का ध्यान मतदान के प्रति उनकी जिम्मेदारी की ओर आकर्षित किया गया। विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने सामाजिक जागरूकता के प्रसार में शिक्षण संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि उनमें जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित हो और वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहभागी बन सकें। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने सामुदायिक सहभागिता को विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वहीं, प्रो-प्रेसिडेंट प्रोफेसर (डॉ.) अंकित गांधी ने समाज और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस प्रकार के अभियान विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराते हैं। साथ ही, उनके माध्यम से जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक करने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के समन्वयन का दायित्व डॉ. रजनी खंडेलवाल ने संभाला। डॉ. अंशु श्रीवास्तव एवं खुशबू चौधरी ने अभियान के संचालन और विद्यार्थियों की भागीदारी में सहयोग दिया। एनएसएस समन्वयक यश यादव ने ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को मतदाता जागरूकता की शपथ दिलाई। इस दौरान जिम्मेदारी के साथ मतदान करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने का संदेश दिया गया। विश्वविद्यालय की इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर समाज के साथ जुड़ने और जनजागरूकता के कार्यों में योगदान देने का अवसर मिला। तीतारिया गाँव में आयोजित दूसरे दिन की गतिविधियों ने मतदाता शिक्षा, नागरिक कर्तव्यों और सामुदायिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया। पाँच दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान के प्रति समझ विकसित करना और जागरूक नागरिकता की भावना को प्रोत्साहित करना है।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम का शुभारंभ

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर के आइक्यूएसी एवं मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ 26 अक्टूबर 2026 को हुआ। यह कार्यक्रम 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2026 के उच्च शिक्षा में प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार तथा शिक्षकों की शैक्षणिक एवं शोध संबंधी क्षमताओं का विकास करना है। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफ़ेसर (डॉ.) अरविंद कुमार अग्रवाल उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अनूप शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. कमल किशोर जांगीड़, शोध अधिष्ठाता डॉ. रोहित सारस्वत, विभिन्न विद्यापीठों के अधिष्ठाता, संकाय सदस्य एवं एफडीपी के प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ स्वागत संबोधन से हुआ। IQAC समन्वयक एवं मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ की अधिष्ठाता डॉ. रजनी माथुर ने मुख्य अतिथि, प्रेसिडेंट, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने एफडीपी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाना तथा गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर (डॉ.) अरविंद कुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं कौशल-आधारित शिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप अपने ज्ञान एवं शिक्षण कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने अपने संबोधन में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास एवं संस्थागत शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन खुशबू चौधरी ने किया। आयोजन समिति में डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल एवं मनीषा यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पाँच दिवसीय एफडीपी शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, आधुनिक शिक्षण तकनीकों, अनुसंधान तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों के विचारों से लाभान्वित होने का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम का प्रथम दिवस शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ हुआ।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर ने पाँचदिवसीय मतदाता जागरूकता रैली का किया आयोजन

    जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी,जयपुर के मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS Unit) एवं इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब 2.0 के संयुक्त तत्वावधान में 26 अक्टूबर को पाँचदिवसीय मतदाता जागरूकता रैली की शुरुआत की। आज प्रथम दिवस पर रैली अपने गोद लिए गए गाँव सीमलियावास पहुँची, जहाँ ग्रामीणों को मतदान के महत्व, मतदाता अधिकारों, नैतिक मतदान तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के प्रति जागरूक किया गया। इस पहल में लगभग 30 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस रैली अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में मतदाता जागरूकता बढ़ाना तथा नागरिकों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार मतदान के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान “अपने वोट के महत्त्व को समझो” (Your Vote Matters) और “जागो, समझो, मतदान करो, अपने भविष्य को बेहतर बनाओ” जैसे प्रेरक संदेशों के माध्यम से ग्रामीणों को अपने मताधिकार का महत्व समझाया गया। रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने बताया कि मतदान केवल नागरिकों का अधिकार ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक जागरूक नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने शिक्षा संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी तथा विद्यार्थियों को जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने इस प्रकार की गतिविधियों को सामाजिक परिवर्तन, जागरूक नागरिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बताया। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में व्यावहारिक शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज से जुड़ी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने, सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनने तथा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग जनहित में करने का अवसर प्रदान करती हैं। विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) अंकित गांधी ने संस्थागत समन्वय, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुव्यवस्थित सामुदायिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस तरह की पहलों को उच्च शिक्षा संस्थानों और समाज के बीच संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मानविकी, कला एवं सामाजिक विज्ञान विद्केयापीठ विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों की सामूहिक सहभागिता बढती है तथा सामाजिक जागरूकता के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुँचाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम के समन्वयक की जिम्मेदारी डॉ. रजनी खंडेलवाल ने निभाई, वहीं, डॉ. अंशु श्रीवास्तव और सुश्री खुशबू चौधरी ने अभियान के संचालन तथा विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सीमलियावास गाँव के ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया और उन्हें मतदान के महत्व तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के प्रति जागरूक किया। एनएसएस समन्वयक यश यादव ने कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीणों और विद्यार्थियों को मतदाता जागरूकता की शपथ भी दिलाई। शपथ के माध्यम से जिम्मेदार नागरिकता, मताधिकार के प्रति सजगता तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश भी दिया गया। इस पहल ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों को एक साझा सामाजिक उद्देश्य से जोड़ते हुए मतदान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया। रैली में शामिल लगभग 30 विद्यार्थियों ने सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, सामूहिक कार्य करने की भावना, सामाजिक सेवा और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिला। ग्रामीण समुदाय के बीच आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा को समाज से जोड़ने तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा। विश्वविद्यालय की यह पहल ग्रामीण समुदाय को मतदान के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में एआई पर विशेष कार्यशाला आयोजित

    वेबसाइट बनाने से लेकर कंटेंट तैयार करने तक, एआई टूल्स के इस्तेमाल की दी जानकारी जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर एआई ट्रेनर सीए कमलेश बंसल, चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, सीए अमित गट्टानी, डागा जी, सभी विभागाध्यक्ष और फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यशाला में सीए कमलेश बंसल ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई के उपयोग और उसके फायदों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि एआई की मदद से पढ़ाई, रिसर्च और रोजमर्रा के कई काम कम समय में और आसानी से किए जा सकते हैं। इस दौरान वेबसाइट बनाना, ई-मेल का प्रबंधन, समय-सारणी तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, जानकारी जुटाना और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट, परप्लेक्सिटी एआई, नोटबुक एलएम, कैनवा, गामा, लवेबल, फ्रेमर एआई, ज़ैपियर, मेक, हेजेन और इलेवनलैब्स जैसे एआई टूल्स की जानकारी दी गई। साथ ही, इनकी मदद से समय बचाने, काम को व्यवस्थित करने और बेहतर परिणाम पाने के तरीके भी समझाए गए। इसके बाद बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी ने कहा कि एआई टूल्स का सही इस्तेमाल करके हम अपने समय का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और काम को आसान व बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे एआई के बारे में जागरूक हों, इसके नए टूल्स की जानकारी लें और अपने परिवार व मित्रों को भी इनके उपयोग के प्रति जागरूक करें। वहीं बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने कहा कि बदलते दौर में नई तकनीकों को समझना और उनका सही इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने शिक्षा और रोजमर्रा के कामों में एआई का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में बियानी गर्ल्स कॉलेज और बियानी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एआई से सही जानकारी प्राप्त करने, तथ्यों की जाँच करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और कॉपीराइट का ध्यान रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई से तैयार सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले उसकी जाँच करना जरूरी है। कार्यशाला का आयोजन बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन बागोरिया और एसोसिएट प्रोफेसर राहुल अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना और उनके काम को आसान बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।