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    योग से ही निरोग रहेगा शरीर: राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

    जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय (जेआरआरएसयू) के मदाऊ, भांकरोटा स्थित परिसर में रविवार को12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों, प्रबुद्ध आचार्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने न केवल योग के विभिन्न आसनों का प्रदर्शन किया, बल्कि मानव जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग की महत्ता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।   -'स्वस्थ शरीर और सुखी जीवन' का संदेश   कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (डॉ.) मदन मोहन झा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से और मन को शरीर से जोड़ने का विज्ञान है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और संस्कृत वांग्मय में छिपे स्वास्थ्य सूत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। जब तक हमारा शरीर पूरी तरह निरोग नहीं होगा, तब तक हम जीवन के वास्तविक सुख और लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया। शैक्षणिक निदेशक डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव को दूर करने में योग की भूमिका को रेखांकित किया। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजधर मिश्र ने बताया कि कैसे प्राचीन योग पद्धतियों पर आज वैश्विक स्तर पर शोध हो रहे हैं और यह चिकित्सा विज्ञान के पूरक के रूप में उभर रहा है। डीन डॉ. दिवाकर मिश्र तथा वेद विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण होसमने ने वेदों और उपनिषदों के संदर्भों के माध्यम से योग के आध्यात्मिक महत्व को समझाया।   -यह रहा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण   समारोह का मुख्य आकर्षण सामूहिक योगाभ्यास सत्र रहा, जो योग विभाग के डॉ. शत्रुघ्न सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम, कपालभाति) और आसनों के सही तरीके व उनसे होने वाले शारीरिक लाभों की जानकारी दी। इस पूरे कार्यक्रम का अत्यंत कुशल और ऊर्जावान संचालन योग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉक्टर वंदना राठौड़ ने किया। उन्होंने योग क्रियाओं के बीच-बीच में शारीरिक सुख, मानसिक शांति और दीर्घायु होने के वैज्ञानिक सूत्रों को विस्तार से साझा किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य शशि कुमार शर्मा और विवि के आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर रीटा, रिंकी गौड़, पूनिता चोटियाँ, विकास कोलीवाल, तरुण सिंह, रवि पारीक सहित अन्य लोग उपस्थित थे कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने नियमित रूप से योग करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ ली। परिसर का वातावरण 'ॐ' की ध्वनि और योग के संकल्प से गुंजायमान रहा।  

    स्किल्स, एआई और एडेप्टेबिलिटी: सफलता के तीन मंत्र, जेईसीआरसी में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने दी सीख

    जेईसीआरसी में आयोजित हुआ टैलेंट एक्विजिशन लीडर्स मीट 2026 इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने कहा एआई नहीं, एआई को समझने वाले करेंगे भविष्य पर राज जयपुर, जेईसीआरसी  में आयोजित टैलेंट एक्विजिशन लीडर्स मीट 2026 में देश की अग्रणी कंपनियों के एचआर और टैलेंट एक्विजिशन विशेषज्ञों ने छात्रों को भविष्य के रोजगार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आवश्यक कौशलों के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलती दुनिया में सफलता के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। स्किल्स, एआई की समझ और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता यानी एडेप्टेबिलिटी ही भविष्य की सफलता के तीन प्रमुख मंत्र हैं। सैंडिस्क के ब्रायन सिसारियो ने कहा कि आने वाले समय में एआई लोगों की नौकरियां नहीं लेगा, बल्कि वे लोग आगे बढ़ेंगे जो एआई का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं। उन्होंने छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने और लगातार सीखते रहने की सलाह दी। एडोबी के समर्थ आर्या ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया एक मंच की तरह है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। उन्होंने छात्रों को अपनी पहचान बनाए रखने के साथ-साथ विनम्र और प्रामाणिक बने रहने का संदेश दिया। ऑटोरैबिट के एस. आर. कृष्णमूर्ति ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में मजबूत अवधारणात्मक समझ सफलता की नींव होती है। उन्होंने एआई को एक सक्षम सहायक बताते हुए कहा कि छात्रों को उस पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अपनी रचनात्मकता और नवाचार क्षमता को विकसित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सफलता और असफलता दोनों की जिम्मेदारी व्यक्ति स्वयं पर होती है। उन्होंने छात्रों को शोध पत्र पढ़ने, नई तकनीकों को समझने और सीखने की निरंतर प्रक्रिया को अपनाने की सलाह दी। ईबे के वेंकटेश नीलम ने कहा कि रोजगार योग्य बनने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि संचार कौशल, समस्या समाधान क्षमता और टीमवर्क जैसे गुण भी आवश्यक हैं। उन्होंने हैकाथॉन को प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच बताते हुए कहा कि वहां कॉलेज नहीं, बल्कि व्यक्ति की क्षमता और प्रदर्शन मायने रखता है। विशेषज्ञों ने छात्रों को शुरुआती करियर में केवल नौकरी के निश्चित घंटों पर ध्यान देने के बजाय सीखने की मानसिकता विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में अपस्किलिंग, अनलर्निंग और री-लर्निंग की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही छात्रों को एआई से संचालित होने के बजाय एआई को अपने विकास का साधन बनाना सीखना होगा। इस अवसर पर जेईसीआरसी फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर, कॉर्पोरेट रिलेशंस, रमेश रावत ने कहा, “आज इंडस्ट्री केवल डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, एडेप्टेबिलिटी और सीखने की क्षमता को महत्व देती है। जेईसीआरसी लगातार ऐसे मंच उपलब्ध करा रहा है जहां छात्र सीधे इंडस्ट्री लीडर्स से संवाद कर सकें और भविष्य की आवश्यकताओं को समझ सकें। हमारा उद्देश्य छात्रों को केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है।” कार्यक्रम ने छात्रों को इंडस्ट्री की वर्तमान आवश्यकताओं, भविष्य के रोजगार अवसरों और सफल करियर के लिए जरूरी कौशलों को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। साथ ही इसने शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

    पीसीएस दिवस पर उभरते डिजिटल टूल्स और एआई तकनीकों पर मंथन

    आईसीएसआई 11 जुलाई को जयपुर में करेगी स्टेट कॉन्फ्रेंस जयपुर। द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के एनआईआरसी (एनआईआरसी) के जयपुर चैप्टर द्वारा होटल व्रीसा में "प्रैक्टिसिंग कंपनी सेक्रेटरीज (पीसीएस) डे सेलिब्रेशन" के उपलक्ष्य में सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय "इमर्जिंग टूल्स एंड टेक्निक्स फॉर पीसीएस" था। इसमें कॉर्पोरेट जगत और सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस में आ रहे आधुनिक तकनीकी बदलावों पर देश भर के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत में जयपुर चैप्टर के चेयरमैन सीएस सुमित कुमार श्योराण ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बदलते हुए वैश्विक परिवेश में कंपनी सचिवों की भूमिका को रेखांकित किया और नए तकनीकी उपकरणों को अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर एनआईआरसी के चेयरमैन सीएस संतोष पांडेय और एनआईआरसी के सचिव सीएस राहुल शर्मा भी उपस्थित रहे। सेमिनार के दौरान एनआईआरसी (NIRC) के चेयरमैन सीएस संतोष पांडेय ने 11 जुलाई 2026 को जयपुर में "स्टेट कॉन्फ्रेंस" का आयोजन की घोषणा की, जिसमें राज्यभर के कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में राजस्थान के राज्यपाल के एडीसी सक्षम अग्रवाल उपस्थित रहे। सेमिनार के प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता मितेश राठौड़ ने "अपॉर्चुनिटी फॉर कंपनी सेक्रेटरीज इन रेरा" विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। दूसरे सत्र में "यूज़ ऑफ एआई टूल्स इन सेक्रेटेरियल ऑडिट एंड अदर सेक्रेटेरियल प्रैक्टिसेज" विषय पर पैनल चर्चा हुई। इस सत्र के मॉडरेटर सीएस विकास वर्मा रहे। इस परिचर्चा में पैनलिस्ट सीएस ताराचंद शर्मा, सीएस रुचि मित्रा, सीएस सुनीता गर्ग और सीएस वैभव अग्निहोत्री रहे। कार्यक्रम का संचालन विवेक शर्मा एवं रजत कुमार गोयल ने किया। समापन पर जयपुर चैप्टर के सचिव सीएस वरुण मेहरा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।  

    विधानसभा अध्यक्ष से शिक्षकों की समस्याओं के‌ निराकरण की गुहार

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश पदाधिकारीयों ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मुलाकात की तथा शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराया। विधानसभा अध्यक्ष के विदेशी दौरे के बाद संगठन की ओर से उनका स्वागत किया गया।   राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा एवं सभाध्यक्ष शशि भूषण शर्मा ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों को राज्य कर्मी नहीं माने जाने तथा पर पे-प्रोटेक्शन में कटौती एवं शिक्षकों की अन्य समस्याएं टेट की अनिवार्यता,शिक्षक स्थानांतरण, स्टाफिंग पैटर्न आदि शिक्षकों की समस्याओं से माननीय विधानसभा अध्यक्ष को अवगत कराया की शिक्षकों की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचा कर उनका तुरंत समाधान कराने की गुहार लगाई। शीघ्र समाधान कराकर शिक्षकों में हो रहे आक्रोश को कम किया जा सके। माननीय विधानसभा अध्यक्ष ने आस्वस्त किया शिक्षकों की समस्याओं को शीघ्रता से सकारात्मक निराकरण करवाया जायेगा।  

    चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जयपुर में ऐतिहासिक “लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह”

    हजारों सत्याग्रहियों ने गांधीवादी शैली में उठाई चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता की आवाज जयपुर। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन द्वारा आज जयपुर के शहीद स्मारक पर आयोजित “लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह” लोकतंत्र, संविधान तथा चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वायत्तता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण जनअभियान के रूप में सम्पन्न हुआ। प्रदेशभर से आए हजारों कार्यकर्ताओं, पंचायत राज एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों तथा लोकतंत्र समर्थक नागरिकों ने अत्यंत अनुशासित एवं गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह में भाग लिया। सत्याग्रही “लोकतंत्र बचाओ” लिखी काली टोपी पहनकर पहुंचे। अनेक कार्यकर्ता अपने साथ संविधान की प्रतियां, महापुरुषों के चित्र, हाथ से बनाए पोस्टर, तिरंगे, पुस्तकें तथा चरखे लेकर आए। सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक रामधुन, गांधीवादी भजनों, लोकतंत्र एवं संविधान रक्षा के गीतों तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया गया। “मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रश्न” – डॉ. सुनील पवार   राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनील पवार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन निरस्त किया जाना केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता लोकतंत्र की आधारशिला है तथा उस पर उठ रहे प्रश्न पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंता का विषय हैं।   “लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बचाने के लिए संघर्ष आवश्यक” – गोविंद सिंह डोटासरा   राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था उसकी आत्मा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठ रहे प्रश्नों के विरुद्ध जनता को जागरूक करना समय की आवश्यकता है और यह सत्याग्रह उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।   “स्थानीय स्वशासन को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ जनआंदोलन होगा” – टीकाराम जूली   नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पंचायती राज एवं नगरीय निकाय चुनावों में हो रही देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गांव और शहर स्तर पर चुनी हुई संस्थाओं का समय पर गठन लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है तथा इसके लिए व्यापक जनजागरण और संघर्ष की आवश्यकता है।   “ग्रामीण लोकतंत्र पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है” – डॉ. सी. पी. जोशी   पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी ने कहा कि पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों में देरी का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण विकास और स्थानीय जनप्रतिनिधित्व पर पड़ता है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तथा चुनावी प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।   “हर जिले में चलेगा जनजागरण अभियान” – डॉ. सी. बी. यादव   राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. बी. यादव ने कहा कि लोकतंत्र का आधार स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव हैं। यदि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होते हैं तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होने लगती हैं।   उन्होंने घोषणा की कि संगठन इस अभियान को राजस्थान के प्रत्येक जिले तक ले जाएगा। आगामी दिनों में जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा तथा 20 अगस्त से पूरे राजस्थान में “लोकतंत्र बचाओ पदयात्राओं” का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र, संविधान और चुनावी संस्थाओं की गरिमा की रक्षा के लिए घर-घर संवाद स्थापित करने का आह्वान किया।   कार्यक्रम को संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कुनाल बनर्जी सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। अंत में प्रदेश प्रभारी रीना वाल्मीकि ने सभी सत्याग्रहियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।   यह सत्याग्रह शांतिपूर्ण, अनुशासित और गांधीवादी स्वरूप के कारण विशेष रूप से चर्चित रहा तथा लोकतंत्र और चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता के प्रश्न को जनचर्चा के केंद्र में लाने का सफल प्रयास सिद्ध हुआ।    

    राज्य परियोजना निदेशक एवं स्कूल शिक्षा आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने किया राजस्थान संपर्क पोर्टल का निरीक्षण

    जनसमस्याओं के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश विद्यालय व्यवस्थाओं, टीसी व अंकतालिका संबंधी प्रकरणों का मौके पर ही किया विश्लेषण जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन के संकल्प और जीरो पेंडेंसी की नीति को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग लगातार कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की आयुक्त एवं राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा अभियान डॉ. रश्मि शर्मा ने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 हेल्पलाइन अनुभाग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिवादियों से स्थानीय भाषा में संवाद करते हुए आत्मीयता का परिचय दिया और विभाग से संबंधित आमजन की शिकायतों, उनके निवारण की स्थिति और आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैकउनकी शिकायतों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। साथ ही विद्यालय व्यवस्थाओं, टीसी व अंकतालिका संबंधी प्रकरणों का मौके पर ही विश्लेषण किया। डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार प्राप्त कुल 3,563 शिकायतों में से 3,327 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। विभाग ने तत्परता से कार्य करते हुए कुल पंजीकृत मामलों में से 93 प्रतिशत से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया है । राज्य परियोजना निदेशक ने महिला सशक्तिकरण, समावेशी शिक्षा एवं छात्र हितों को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को भयमुक्त, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण, पेयजल की समुचित उपलब्धता तथा समयबद्ध दस्तावेजीकरण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों का न केवल समय सीमा के भीतर निस्तारण किया जाए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि परिवादी दी गई राहत से पूरी तरह संतुष्ट हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक मजबूत बनाकर ही हम विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक अशोक कुमार मीणा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर शीघ्र समाधान प्राप्त कर रहे हैं।  

    सुदूर जर्मनी में महकी मरुधरा की माटी फ्रैंकफर्ट में राजस्थानी प्रवासियों की भव्य 'दाल-बाटी गोठ' संपन्न

    फ्रैंकफर्ट। सात समंदर पार, जर्मनी के ऐतिहासिक शहर फ्रैंकफर्ट में मरुधरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जीवंत परंपराओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था प्रवासी राजस्थानियों द्वारा आयोजित भव्य 'सामूहिक दाल-बाटी गोठ' का, जहाँ सौ से अधिक राजस्थानी प्रवासियों ने अपनी सहभागिता से सात समंदर पार एक 'लघु राजस्थान' जीवंत कर दिया। जयपुर की सेवानिवृत्ति जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार गुप्ता के पुत्र और पुत्रवधू आकाश एवं छवि ने बताया कि इस सांस्कृतिक अनुष्ठान के केंद्रबिंदु में रहीं प्रवासी राजस्थानी महिलाएँ, जिनके कुशल नेतृत्व, आत्मीय प्रबंधन और अनूठे संयोजन ने इस गोठ को केवल एक खान-पान का आयोजन न रखकर, एक अविस्मरणीय उत्सव में बदल दिया। सुदूर विदेश में जब पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों की सोंधी सुगंध हवाओं में घुली, तो वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति अपनी माटी की महक से सराबोर हो उठा। आत्मीयता के इस मिलन ने भौतिक दूरियों को पाटकर सीधे मातृभूमि के अंतर्मन से जोड़ दिया। ​आयोजन के दौरान वैचारिक एवं सांस्कृतिक संवाद, आत्मीय परिचय और सामुदायिक सुदृढ़ता का एक ऐसा विहंगम दृश्य उपस्थित हुआ, जिसने भारतीय वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को चरितार्थ कर दिया। सभी उपस्थित जनों ने इस बात को रेखांकित किया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए ऐसे आयोजन प्रवासी समाज के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। ​फ्रैंकफर्ट की धरा पर सजी यह 'दाल-बाटी गोठ' केवल स्वाद का उत्सव नहीं थी, बल्कि यह विदेशी परिवेश में राजस्थानी अस्मिता, परस्पर सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव और अटूट भाईचारे का एक अनुकरणीय अध्याय बन गई।    

    मरूभूमि में खजूर की खेती का कमाल : 270 पौधों से बदली किसान की तकदीर

    मंत्री बोले- "जल संरक्षण और जीरो बजट फार्मिंग का यह मॉडल प्रदेश के लिए प्रेरणा " जयपुर। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली जिले की सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के खोड़ मण्डल स्थित खैरोफड़ा ग्राम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसान द्वारा विकसित किए गए प्राकृतिक खेती आधारित खजूर के बाग का गहन निरीक्षण किया। मंत्री ने वहां अपनाई जा रही आधुनिक कृषि पद्धति, उन्नत जल प्रबंधन और उत्पादन व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने इसे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय और प्रेरणादायी उदाहरण बताया।   5 वर्ष की मेहनत लाई रंग, सालाना आय ₹10 लाख निरीक्षण के दौरान उपस्थित प्रगतिशील कृषक ने मंत्री कुमावत को बताया कि लगभग 5 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने खेत में खजूर के 270 पौधे लगाए थे। बेहतर देखरेख और सही प्रबंधन के चलते आज ये सभी पौधे पूरी तरह विकसित होकर फल देने लगे हैं। किसान ने बताया कि खजूर के इस बाग से अब उन्हें प्रतिवर्ष लगभग ₹10 लाख की शानदार वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस सफलता को देख कैबिनेट मंत्री ने किसान के प्रयासों की पीठ थपथपाई।   बूंद-बूंद सिंचाई और प्राकृतिक खाद का अनूठा संगम इस कृषि मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। कृषक द्वारा बाग में बूंद-बूंद (ड्रिप) सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का समुचित और किफायती उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही, पौधों को पोषण देने के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया जा रहा है। इस दोहरे प्रबंधन से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर खेती की लागत कम होकर यह अधिक लाभकारी साबित हो रही है।   क्षेत्र के किसानों के लिए बनेगा रोल मॉडल मंत्री कुमावत ने कहा कि सीमित पानी में प्राकृतिक तरीके से खजूर की खेती करना कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है। प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सटीक कृषि प्रबंधन का यह अनूठा प्रयास मरूभूमि के लिए वरदान है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखता है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को भी पूरा करता है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और स्थानीय किसानों से इस सफल प्रयोग को देखने और सीखने का आह्वान किया ताकि क्षेत्र में बागवानी को और बढ़ावा दिया जा सके।  

    यादों, उपलब्धियों और शुभकामनाओं के साथ एम. फार्मा. विद्यार्थियों को दी भावभीनी विदाई”

    जयपुर। रीजनल कॉलेज ऑफ फार्मेसी, जयपुर में एम. फार्मा. अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए भव्य विदाई समारोह का आयोजन हर्षोल्लास एवं भावनात्मक वातावरण में किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने कला, कविता, रंगोली, सोलो एवं ग्रुप डांस सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में दीपशिखा कला संस्थान के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना एवं वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना ही सफलता की कुंजी है। डॉ. प्रेम सुराना ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करना चाहिए तथा जीवन में सदैव उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. अंशु सुराना ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और समर्पण के साथ अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ताराचंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अनुशासित रहकर अपने कार्य को पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील पेशेवर बनना है। समारोह के दौरान कॉलेज स्टाफ ने भी विद्यार्थियों को उनके आगामी करियर के लिए शुभकामनाएं दीं तथा बेहतर प्लेसमेंट और व्यावसायिक मार्गदर्शन के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कॉलेज में बिताए गए समय को यादगार बताया और शिक्षकों एवं संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। सभी विद्यार्थी अपने अध्ययन, शोध कार्य एवं पाठ्यक्रम से संतुष्ट नजर आए। यह विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव और उनके नए जीवन की शुरुआत का प्रेरणादायक अवसर भी बना।  

    राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में आर्टिस्टिक स्विमिंग प्रस्तुति देगा एमजीडी गर्ल्स स्कूल

    महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल (एमजीडी), जयपुर को एक विशेष राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। स्कूल को अहमदाबाद में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में आर्टिस्टिक स्विमिंग की प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह उपलब्धि विद्यालय द्वारा इस खेल के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए किए गए दीर्घकालिक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है। आर्टिस्टिक स्विमिंग के क्षेत्र में एमजीडी का योगदान लंबे समय से उल्लेखनीय रहा है। विद्यालय ने वर्षों से छात्राओं को इस विशिष्ट खेल में प्रशिक्षण, अवसर और प्रोत्साहन प्रदान करते हुए अनेक प्रतिभाओं को विकसित किया है। तैराकी, लय, समन्वय और कलात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम मानी जाने वाली इस खेल विधा को विद्यालय ने लगातार बढ़ावा दिया है। राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में एमजीडी की आर्टिस्टिक स्विमिंग टीम अपनी विशेष प्रस्तुति के माध्यम से विद्यालय की समृद्ध खेल परंपरा और छात्राओं की प्रतिभा का प्रदर्शन करेगी। यह प्रस्तुति वर्षों की मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और खेल के प्रति समर्पण का प्रतिबिंब होगी। विद्यालय के लिए यह अवसर केवल एक प्रस्तुति भर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और योगदान को प्रदर्शित करने का गौरवपूर्ण क्षण है। साथ ही यह विद्यालयी खेलों की बढ़ती भूमिका और युवा खिलाड़ियों को उपलब्ध हो रहे नए अवसरों को भी रेखांकित करता है। एमजीडी गर्ल्स स्कूल का यह चयन जयपुर तथा राजस्थान के लिए भी गर्व का विषय है। विद्यालय को विश्वास है कि यह उपलब्धि छात्राओं को नई प्रेरणा प्रदान करेगी तथा आर्टिस्टिक स्विमिंग के प्रति जागरूकता और रुचि को और अधिक बढ़ाएगी। खेल उत्कृष्टता, नवाचार और प्रतिभा संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ एमजीडी गर्ल्स स्कूल लगातार नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में होने वाली यह प्रस्तुति विद्यालय की गौरवशाली यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगी।  

    अभिभावक-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठक (PAM) में पिताओं की सहभागिता पर विशेष जोर

    बच्चों के समग्र विकास में पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : शासन सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग जयपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सोमवार को अभिभावक-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठक (PAM) का आयोजन किया गया। इस माह की बैठक का मुख्य विषय "पोषण, संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य" तथा "बच्चे के जीवन में पिता की भूमिका" रहा। शासन सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती पूनम ने बताया कि बच्चों के समग्र विकास में पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित PAM की बैठकों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समग्र विकास के लिए जन-जागरूकता को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों के सामग्र विकास हेतु परिवारों की सहभागिता को और खास कर पिता की भूमिका को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किये जाएंगे। आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि आज की PAM बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास, पोषण, स्वास्थ्य, प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) तथा परिवार की सामूहिक भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बार PAM बैठकों में पिता, दादा, चाचा एवं अन्य पुरुष अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। अमावस्या के अवसर पर आयोजित इस बैठक का उद्देश्य परिवार के पुरुष सदस्यों को बच्चों के विकास में सक्रिय भागीदार बनाना तथा उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करना रहा। उन्होंने बताया कि PAM बैठक में यह संदेश दिया गया कि "एक पिता का हाथ पकड़कर चलना बच्चे को पूरी दुनिया की ताकत देता है।" PAM कार्यक्रम केवल एक बैठक नहीं, बल्कि परिवार एवं समुदाय को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट करने का सशक्त माध्यम है। PAM में अभिभावकों को बताया गया कि पिता की सक्रिय सहभागिता बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक वातावरण प्रदान करती है। शोधों के अनुसार जिन बच्चों को पिता का पर्याप्त समय और मार्गदर्शन प्राप्त होता है, उनमें बौद्धिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास बेहतर होता है। पिता बच्चों को साहस, धैर्य, अनुशासन एवं जिम्मेदारी जैसे जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं। साथ ही उनकी सहभागिता से बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।   PAM बैठक के दौरान अभिभावकों को बच्चों के नियमित पोषण, स्वास्थ्य जांच एवं वृद्धि निगरानी के महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के समस्त बच्चों का APAR ID एवं ABHA ID तैयार करवाने, आधार नामांकन सुनिश्चित करने तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अभिभावकों के साथ केन्द्र की आगामी कार्ययोजना, बच्चों की नियमित उपस्थिति, शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों तथा पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन पर चर्चा की। अभिभावकों को यह भी बताया गया कि बच्चों के विकास में माता-पिता दोनों की समान भागीदारी आवश्यक है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी महिला पर्यवेक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि बैठक की ऑनलाइन रिपोर्टिंग निर्धारित प्रारूप में 18 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करें, जिससे कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।  

    डिप्टी सीएम डॉ. बैरवा ने कुलगुरू प्रो. वर्मा के कार्यों को सराहा पीटीईटी परीक्षा के सफल संचालन से उच्चशिक्षा मंत्री को अवगत कराया

    जयपुर/ कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने सोमवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री और उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा से मुलाकात की। कुलगुरू प्रो. वर्मा ने उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. बैरवा को शाल ओढ़ाकर व बुके भेंटकर उनका स्वागत किया। कुलगुरू ने रविवार को संपन्न हुई पीटीईटी 2026 की प्रवेश परीक्षा की समस्त जानकारियों से उन्हें अवगत कराया। प्रो. वर्मा ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री महोदय को बताया कि किस तरीके से राज्य सरकार, जिलों के प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों के अलावा समस्त जिला समन्वयकों और विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ के सदस्यों के सहयोग से परीक्षा का सफल संचालन किया गया। पूरे प्रदेश के 41 जिलों के 300 परीक्षा केन्द्रों पर शुचिता, गोपनीयता और पारदर्शिता के साथ परीक्षा कराई गई। उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा से प्रोफेसर बीएल वर्मा के नेतृत्व की तारीफ करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं, साथ ही शासन-प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के अलावा जिलों समस्त स्टाफ तथा वीएमओयू के सभी शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को भी परीक्षा आयोजन की सफलता पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वीएमओयू ने लगातार तीसरे वर्ष शुचिता और गोपनीयता के साथ इस परीक्षा को संपन्न कराया है, यह वास्तव में सभी स्टाफ कर्मियों और अधिकारियों की कर्मठता का परिणाम है। प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि अब अगले चरण में जल्द ही प्रवेश परीक्षा परिणाम को तैयार कर जारी किया जाएगा जिससे काउंसलिंग की प्रक्रिया के बाद शैक्षणिक सत्र का समय से संचालन किया जा सके।