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    भारत-EFTA व्यापार समझौते के तहत 99.6% भारतीय निर्यात को टैरिफ कवरेज, वाणिज्य सचिव ने निर्यातकों से बनाई रणनीति

    Yugcharan News / 08-10-2026 नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत EFTA देशों को होने वाले भारत के 99.6% निर्यात को टैरिफ कवरेज मिल रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारतीय निर्यातकों, उद्योग संगठनों और राज्य सरकारों को इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रत्येक बाजार के हिसाब से अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए। नई दिल्ली में प्रमुख निर्यातकों के लिए आयोजित एक आउटरीच कार्यक्रम में बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि भारत-EFTA व्यापार समझौता भारतीय कारोबारियों के लिए आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के बाजारों में पहुंच के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करता है। यह कार्यक्रम दूसरे भारत-EFTA समृद्धि शिखर सम्मेलन 2026 के तहत आयोजित किया गया। इसमें EFTA के चारों देशों के प्रतिनिधि और नेता नई दिल्ली में मौजूद रहे। सम्मेलन का उद्देश्य TEPA लागू होने के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर समझौते की प्रगति की समीक्षा करना और आगे की दिशा पर चर्चा करना था। 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था TEPA भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने विभिन्न उत्पादों पर टैरिफ और बाजार पहुंच से संबंधित प्रतिबद्धताएं की हैं। वाणिज्य सचिव के अनुसार, EFTA की प्रतिबद्धताओं में उसके कुल टैरिफ लाइनों का 92.2% हिस्सा शामिल है, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 99.6% कवर करता है। गैर-कृषि उत्पादों के लिए कवरेज पूर्ण बताया गया है। दूसरी ओर, भारत ने अपनी 82.7% टैरिफ लाइनों के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जो EFTA से होने वाले लगभग 95.3% निर्यात को कवर करती हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से दोनों पक्षों के कारोबारियों को अधिक स्पष्टता और बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। सिर्फ शुल्क में कमी नहीं, स्थिरता भी महत्वपूर्ण राजेश अग्रवाल ने कहा कि TEPA को केवल टैरिफ में कमी वाले समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, व्यापारिक गतिविधियों के लिए पूर्वानुमेयता भी इस समझौते का एक महत्वपूर्ण लाभ है। उन्होंने कहा कि टैरिफ में स्थिरता रहने से कंपनियों को निवेश करने, आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने और लंबे समय की कारोबारी योजनाएं बनाने में अधिक भरोसा मिलेगा। व्यापारिक क्षेत्र के लिए टैरिफ में अचानक बदलाव न होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे निर्यातकों को अपने उत्पादों की कीमत, उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को पहले से तय करने में मदद मिल सकती है। EFTA देशों के साथ कारोबारी साझेदारी पर जोर वाणिज्य सचिव ने भारतीय कंपनियों से EFTA देशों की कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के कारोबारी मिलकर ऐसी मूल्य श्रृंखलाएं विकसित कर सकते हैं, जिनमें कच्चे माल और अन्य इनपुट से लेकर अंतिम उत्पाद तक विभिन्न चरण शामिल हों। ऐसी साझेदारियों से भारतीय कंपनियों को उच्च आय वाले बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, दोनों पक्षों के लिए आपूर्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने का अवसर भी मिल सकता है। अग्रवाल ने भारतीय निर्यातकों से यह समझने को कहा कि किन उत्पादों पर शुल्क में कमी से वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा हुए हैं और उन उत्पादों के लिए EFTA देशों के खरीदारों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते विकसित किए जा सकते हैं। EFTA का बाजार 500 अरब डॉलर से अधिक वाणिज्य सचिव के अनुसार, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड को मिलाकर EFTA देश हर वर्ष 500 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का आयात करते हैं। इतना बड़ा बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा सकता है। सरकार अब चाहती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद निर्यातक इस समझौते का उपयोग करके EFTA बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाएं। अग्रवाल ने निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संघों और राज्य सरकारों से कहा कि वे कारोबारियों को TEPA के तहत उपलब्ध अवसरों और उसके इस्तेमाल की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। हर EFTA देश के लिए अलग पांच वर्षीय रणनीति वाणिज्य सचिव ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अधिक लक्षित रणनीति अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने हितधारकों से प्रत्येक EFTA देश और प्रत्येक बाजार के लिए पांच वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। ऐसी योजनाओं में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भारत किसी विशेष बाजार में अपनी हिस्सेदारी कैसे बढ़ा सकता है और किन गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। इसका उद्देश्य केवल शुल्क में मिलने वाली रियायतों का लाभ उठाना नहीं, बल्कि प्रत्येक देश की मांग, उपभोक्ता बाजार, कारोबारी नियमों और संभावित बाधाओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय निर्यात के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है। कृषि क्षेत्र के लिए भी अवसर TEPA से कृषि क्षेत्र को भी अवसर मिलने की उम्मीद है। राजेश अग्रवाल ने कहा कि कई कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाकर शून्य किया गया है। उन्होंने निर्यातकों से ऐसे उत्पादों की पहचान करने को कहा जिनके लिए टैरिफ में कमी से EFTA बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक अवसर पैदा हुए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने खरीदारों के साथ लंबे समय की आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने पर भी जोर दिया। कृषि निर्यात में स्थिर और दीर्घकालिक खरीदार संबंध महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां केवल तत्काल निर्यात अवसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्थायी बाजार विकसित करें। TEPA में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य भारत-EFTA समझौते की एक प्रमुख विशेषता निवेश से जुड़ी प्रतिबद्धताएं भी हैं। राजेश अग्रवाल ने इसे भारत के अन्य व्यापार समझौतों से अलग महत्वपूर्ण पहलू के रूप में रेखांकित किया। समझौते के अनुच्छेद 7.1 के तहत EFTA देशों ने भारत में EFTA निवेशकों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को समझौता लागू होने के 10 वर्षों के भीतर 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य है। इस तरह कुल मिलाकर 15 वर्षों की अवधि में 100 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समझौते में 15 वर्षों के भीतर भारत में 10 लाख रोजगार सृजित करने में मदद करने का लक्ष्य भी शामिल है। भारत को सिर्फ निर्यात बाजार नहीं, निवेश गंतव्य के रूप में भी देखना होगा अग्रवाल ने कहा कि भारत का तेजी से विस्तार करता घरेलू बाजार EFTA देशों के निवेशकों के लिए कई क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराता है। उनके अनुसार, भारतीय और EFTA कंपनियों के बीच मजबूत साझेदारी से निवेश का स्तर समझौते में निर्धारित लक्ष्यों से भी आगे जा सकता है। उन्होंने भारतीय कारोबारियों से भी EFTA को केवल निर्यात के लिए एक गंतव्य के रूप में देखने के बजाय अपने संभावित बाजार के विस्तार के तौर पर देखने की अपील की। इस दृष्टिकोण के तहत भारतीय कंपनियां EFTA देशों में केवल अपने उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वहां की कंपनियों के साथ निवेश, साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य कारोबारी अवसरों पर भी काम कर सकती हैं।   भारत-EFTA TEPA के एक वर्ष पूरे होने के साथ सरकार अब इस समझौते को कागजी व्यापार प्रतिबद्धताओं से आगे ले जाकर वास्तविक निर्यात, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलने पर जोर दे रही है। आने वाले वर्षों में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां अलग-अलग EFTA बाजारों की जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से समझती हैं और टैरिफ रियायतों के साथ-साथ गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करते हुए वहां अपनी स्थायी कारोबारी मौजूदगी कितनी मजबूत कर पाती हैं।

    17,000 फीट की ऊंचाई पर इंडिगो की फ्लाइट पर गिरी बिजली, विमान के अगले हिस्से को नुकसान; सभी 110 यात्री सुरक्षित

        Yugcharan News / 08-10-2026 नई दिल्ली: पटना से अहमदाबाद जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E925 बुधवार को करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर बिजली की चपेट में आ गई। घटना के बाद विमान के पायलटों ने एहतियाती कदम उठाते हुए फ्लाइट को लखनऊ की ओर मोड़ दिया और सुरक्षित लैंडिंग कराई। विमान में सवार सभी 110 लोग सुरक्षित बताए गए हैं, जिनमें 104 यात्री और छह क्रू सदस्य शामिल थे। बिजली गिरने से विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद इंडिगो ने विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। विमान को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए सेवा से बाहर कर दिया गया है। एयरलाइन के अनुसार, आवश्यक तकनीकी जांच और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद ही विमान को दोबारा व्यावसायिक उड़ान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। 17,000 फीट पर हुआ हादसा इंडिगो की उड़ान संख्या 6E925 पटना से अहमदाबाद के लिए संचालित हो रही थी। उड़ान के दौरान करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर विमान बिजली की चपेट में आ गया। घटना के बाद पायलटों ने विमान को लखनऊ डायवर्ट करने का फैसला किया। विमान ने लखनऊ एयरपोर्ट पर शाम 4:05 बजे सुरक्षित लैंडिंग की। यह समय उसके निर्धारित आगमन समय से करीब आठ मिनट पहले था। लैंडिंग के बाद यात्रियों और चालक दल के सभी सदस्यों की सुरक्षा की पुष्टि की गई। घटना में किसी यात्री या क्रू सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। लैंडिंग के बाद तकनीकी टीम ने विमान की जांच शुरू की। बिजली गिरने से विमान के अगले हिस्से में नुकसान की जानकारी सामने आई है। विमान को आगे की जांच पूरी होने तक उड़ान संचालन से बाहर रखा गया है। यात्रियों को दूसरे विमान से अहमदाबाद भेजा गया घटना के बाद यात्रियों की यात्रा प्रभावित न हो, इसके लिए इंडिगो ने वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की। यात्रियों को दूसरे विमान में स्थानांतरित किया गया और यह फ्लाइट शाम 6:22 बजे अहमदाबाद के लिए रवाना हुई। इस तरह बिजली गिरने की घटना के बावजूद विमान में मौजूद सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से उनकी मंजिल की ओर रवाना किया गया। घटना की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भी दे दी गई है। इंडिगो ने कहा है कि बिजली गिरने से प्रभावित विमान को आवश्यक तकनीकी निरीक्षण पूरा होने और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद ही दोबारा सेवा में लाया जाएगा। बिजली गिरने के बाद विमान को क्यों रखा गया ग्राउंडेड? वाणिज्यिक विमानों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि बिजली गिरने जैसी घटनाओं के दौरान यात्रियों और विमान के महत्वपूर्ण सिस्टम की सुरक्षा की जा सके। हालांकि, विमान पर बिजली गिरने के बाद किसी भी संभावित संरचनात्मक या तकनीकी नुकसान की जांच जरूरी होती है। ऐसी स्थिति में विमान को तुरंत दोबारा उड़ान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इंजीनियर विमान के बाहरी हिस्से, महत्वपूर्ण प्रणालियों और बिजली गिरने से संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों की जांच करते हैं। इसके बाद तकनीकी रिपोर्ट और आवश्यक नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर विमान की सेवा में वापसी का फैसला किया जाता है। इंडिगो के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विमान फिलहाल लखनऊ में ग्राउंडेड है और तकनीकी टीम नुकसान का आकलन कर रही है। उसी दिन इंडिगो ने बढ़ाया था ईंधन शुल्क इंडिगो की यह घटना ऐसे दिन हुई जब एयरलाइन द्वारा नई बुकिंग के लिए बढ़ाए गए ईंधन शुल्क लागू किए गए। एयरलाइन ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज वृद्धि के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संशोधित ईंधन शुल्क लागू करने की घोषणा की थी। इंडिगो के अनुसार, ATF की कीमत में महीने-दर-महीने 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। एयरलाइन ने कहा कि ईंधन की कीमतें पिछले करीब एक दशक के सबसे ऊंचे स्तरों में पहुंच गई हैं। एयरलाइन ने ईंधन की बढ़ती लागत के पीछे हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, खासकर पश्चिम एशिया में जारी परिस्थितियों को भी एक कारण बताया है। घरेलू उड़ानों पर कितना बढ़ा ईंधन शुल्क? इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर अलग-अलग ईंधन शुल्क निर्धारित किया है। 500 किलोमीटर तक की घरेलू उड़ान के लिए यात्रियों से 375 रुपये का ईंधन शुल्क लिया जाएगा। 501 से 1,000 किलोमीटर की दूरी वाली उड़ानों पर यह शुल्क 600 रुपये होगा। 1,001 से 1,500 किलोमीटर की दूरी के लिए ईंधन शुल्क 900 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं 1,501 से 2,000 किलोमीटर की घरेलू उड़ानों पर यात्रियों को 1,150 रुपये का शुल्क देना होगा। 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली घरेलू उड़ानों के लिए नया ईंधन शुल्क 1,300 रुपये रखा गया है। इसका मतलब है कि यात्री की उड़ान जितनी लंबी होगी, संशोधित ईंधन शुल्क भी उसी अनुपात में अधिक होगा। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी संशोधित शुल्क इंडिगो ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी गंतव्य और दूरी के आधार पर अलग-अलग ईंधन शुल्क लागू किए हैं। सार्क क्षेत्र में 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 1,000 रुपये का ईंधन शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि लंबी दूरी वाली सार्क उड़ानों के लिए यह शुल्क 3,000 रुपये होगा। दक्षिण-पूर्व एशिया, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), मध्य पूर्व तथा उत्तर और पूर्वी एशिया के गंतव्यों के लिए यात्रियों से 5,500 रुपये का ईंधन शुल्क लिया जाएगा। अफ्रीका जाने वाली उड़ानों के लिए यह शुल्क 6,000 रुपये और यूरोप की उड़ानों के लिए 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है। एयरलाइन ने कहा- शुल्क वृद्धि वास्तविक लागत से कम इंडिगो का कहना है कि नए ईंधन शुल्क में कंपनी की वास्तविक ईंधन लागत में हुई पूरी वृद्धि को यात्रियों पर नहीं डाला गया है। एयरलाइन के अनुसार, वास्तविक लागत वृद्धि की पूरी भरपाई करने के लिए इससे कहीं अधिक शुल्क बढ़ाना पड़ता। इंडिगो ने कहा कि उसने ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सीमित रखने के उद्देश्य से ईंधन शुल्क में अपेक्षाकृत नियंत्रित वृद्धि की है। इस बीच, बिजली गिरने से प्रभावित फ्लाइट 6E925 का विमान लखनऊ में तकनीकी जांच के अधीन है। फिलहाल सभी 110 यात्री सुरक्षित हैं और वैकल्पिक विमान के जरिए उनकी यात्रा पूरी कराई गई है। विमान को दोबारा सेवा में लाने का फैसला तकनीकी निरीक्षण के निष्कर्ष और संबंधित नियामकीय मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

    SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा बढ़ाई गई, दिल्ली और आगरा में प्रदर्शन के बाद लिया गया फैसला

      Yugcharan News / 08-10-2026 नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ते प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने उनकी मौजूदा Z+ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का फैसला नए सिरे से किए गए खतरे के आकलन के बाद लिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब प्रदर्शनकारी दिल्ली स्थित ज्ञानेश कुमार के आवास के नजदीक पहुंच गए थे और आगरा में उनके परिवार के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास, चुनाव आयोग के कार्यालय और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली में उनके आवास का पता लगाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे का दोबारा आकलन किया। दिल्ली और आगरा में प्रदर्शन के बाद सुरक्षा समीक्षा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि प्रदर्शनकारियों के दिल्ली स्थित आवास तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद सभी संभावित खतरों का आकलन किया गया और सुरक्षा कवर बढ़ाया गया। अधिकारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के घर के आसपास अतिरिक्त पुलिस पिकेट भी तैनात की गई। इसके अलावा, आगरा में उनके परिवार के घर के बाहर भी प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार से जुड़े स्थानों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा बढ़ाने का आधार नया खतरा आकलन है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने किसी एक विशिष्ट धमकी को आधार बनाकर यह निर्णय लिया है या विभिन्न घटनाओं और प्रदर्शनों को समग्र खतरे के आकलन में शामिल किया गया है। SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का विरोध जारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ाए जाने की खबर ऐसे समय आई है जब कांग्रेस और विपक्षी INDIA ब्लॉक SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दलों ने चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कहा है कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने, गिरफ्तारी का सामना करने और कानूनी मामलों का सामना करने की बात कही है। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से मतदाता सूची और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों को संबंधित संस्थाओं की ओर से अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। SIR को लेकर राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर बहस जारी है। CJP ने भी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का आह्वान किया इस बीच, समाचार रिपोर्ट के अनुसार CJP ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी तेज कर दी है। संगठन ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और कहा है कि चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। CJP इससे पहले 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों द्वारा चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर निकाले गए विरोध मार्च के समर्थन में भी सामने आया था। संगठन ने उस प्रदर्शन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ी व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया था। CJP ने 2023 के उस कानून को वापस लेने की मांग भी उठाई है जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है। संगठन के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र चयन प्रक्रिया होनी चाहिए। SIR पर चुनाव आयुक्तों की असहमति की रिपोर्ट SIR को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर इन फैसलों और आदेशों को लेकर कहा था कि इन्हें उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किया गया। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए। हालांकि, इस संबंध में सामने आए दावों और रिपोर्टों को उनके संदर्भ में ही देखा जाना आवश्यक है। चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और संस्थागत स्पष्टीकरणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। क्या है Z+ सुरक्षा? Z+ सुरक्षा भारत सरकार द्वारा गंभीर और विश्वसनीय खतरे का सामना कर रहे व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च सामान्य वीआईपी सुरक्षा श्रेणी है। किसी व्यक्ति को यह सुरक्षा स्थायी रूप से नहीं दी जाती। खतरे की स्थिति और सुरक्षा संबंधी आकलन के आधार पर इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है। गृह मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था उसके खतरे की धारणा यानी थ्रेट परसेप्शन के आकलन पर निर्भर करती है। इस आकलन में केंद्रीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों, जिसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो भी शामिल है, से प्राप्त जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति को दी गई सुरक्षा श्रेणी परिस्थितियों के अनुसार बदली जा सकती है। खतरे के स्तर में बदलाव होने पर सुरक्षा में अतिरिक्त जवानों की तैनाती या अन्य सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं। Z+ सुरक्षा में क्या-क्या शामिल होता है? Z+ सुरक्षा व्यवस्था में आम तौर पर चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसमें सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के आवास, कार्यालय, आवाजाही और यात्रा मार्गों की सुरक्षा शामिल हो सकती है। सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विशेष सुरक्षा इकाइयों के जवानों की तैनाती की जा सकती है। इसके तहत आवास और कार्यालय के आसपास सशस्त्र जवानों की तैनाती, यात्रा के दौरान सुरक्षा दल, प्रवेश और निकास की निगरानी तथा रूट सिक्योरिटी जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था और तैनात जवानों की संख्या खतरे के आकलन तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के निर्णय पर निर्भर करती है। इसलिए Z+ सुरक्षा का मतलब हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल एक जैसी तैनाती नहीं होता। सुरक्षा बढ़ाए जाने का राजनीतिक संदर्भ ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच SIR को लेकर राजनीतिक टकराव तेज है। एक ओर विपक्ष प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग से संबंधित निर्णयों और प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक बहस जारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास के आसपास प्रदर्शन और उनके परिवार से जुड़े स्थान पर विरोध प्रदर्शन की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का नए सिरे से आकलन किया है। इसके आधार पर उनके आवास, चुनाव आयोग कार्यालय और व्यक्तिगत सुरक्षा दल में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। फिलहाल, सुरक्षा बढ़ाए जाने का तत्काल कारण नए खतरे के आकलन को बताया गया है। SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बीच आने वाले दिनों में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर एजेंसियों की निगरानी बनी रहने की संभावना है।          

    कंगना रनौत ने व्यक्तित्व अधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, AI कंटेंट और फेक न्यूज पर जताई चिंता

    Yugcharan News / 08-10-2026 नई दिल्ली: अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने अपने नाम, तस्वीर, पहचान और व्यक्तित्व के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कंगना रनौत द्वारा दायर मुकदमे में संबंधित पक्षों को समन जारी किए। अदालत ने उनके अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर भी नोटिस जारी किया है। इस मामले में कथित फेक न्यूज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार सामग्री और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान तथा व्यक्तित्व के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। न्यायमूर्ति विकास महाजन की अदालत ने कंगना रनौत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके नाम, तस्वीर और व्यक्तित्व के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से संबंधित सामग्री पर विचार किया। याचिका में अभिनेत्री ने अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है। अदालत के समक्ष पेश की गई ऑनलाइन सामग्री की जांच सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने कई वेब लिंक प्रस्तुत किए। इनमें एक एनिमेटेड सामग्री और एक मीम भी शामिल था। अदालत ने इन सामग्रियों को देखने के बाद प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि इनमें से कुछ सामग्री व्यंग्यात्मक प्रतीत होती है। कंगना रनौत के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि फिलहाल इन सामग्रियों को हटाने की मांग पर जोर नहीं दिया जा रहा है। यानी इस चरण में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित सामग्री को तत्काल हटाने के लिए अदालत से आदेश की मांग नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कंगना की ओर से पेश अधिवक्ता साकेत सिकरी ने अदालत को बताया कि मुकदमे की अग्रिम प्रति संबंधित पक्षों को दिए जाने के बाद कुछ प्रतिवादियों ने कथित आपत्तिजनक सामग्री पहले ही हटा दी थी। इसके बाद अदालत ने मुकदमे में समन जारी किए और अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग वाले आवेदन पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। कुछ प्रतिवादियों के नाम हटाए गए सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत के वकील को पक्षकारों की सूची यानी मेमो ऑफ पार्टीज में संशोधन करने का निर्देश भी दिया। अदालत ने गौर किया कि कार्यवाही में शामिल कुछ प्रतिवादियों को पहले ही हटा दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है। उस समय अदालत मामले में आगे की दलीलों और याचिका से जुड़े पहलुओं पर विचार कर सकती है। व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं? कंगना रनौत की याचिका ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में मशहूर हस्तियों के व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों से जुड़े मामलों पर अदालतों में लगातार सुनवाई हो रही है। विशेष रूप से दिल्ली हाईकोर्ट में बॉलीवुड कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों ने अपने नाम, तस्वीर, आवाज, समानता, पहचान और अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण की मांग की है। व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति की पहचान और उसके व्यक्तित्व से जुड़े उन अधिकारों को संदर्भित करते हैं, जिनके तहत उसकी पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज, समानता या अन्य विशिष्ट पहचान संबंधी विशेषताओं के व्यावसायिक या अन्य अनधिकृत इस्तेमाल पर आपत्ति उठाई जा सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में अदालत संबंधित तथ्यों, सामग्री और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है। अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर के मामलों में भी सामने आया था मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट इससे पहले अभिनेता अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा से जुड़े मामले में भी आदेश दे चुका है। उस मामले में अभिनेता के नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल का मुद्दा सामने आया था। इसी तरह अभिनेता अनिल कपूर के मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षण दिया था। इसमें उनके नाम, तस्वीर, समानता, आवाज और उनकी विशिष्ट अभिव्यक्तियों से जुड़े पहलू शामिल थे। इसके अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेता रजनीकांत और अभिनेता जैकी श्रॉफ समेत अन्य सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े मामलों में भी व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स का मुद्दा अदालतों के सामने आया है। गायक अरिजीत सिंह और सोनू निगम जैसे कलाकारों से जुड़े मामलों ने भी इस बहस को आगे बढ़ाया है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है और कब ऐसा इस्तेमाल उसके अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। AI तकनीक ने बढ़ाई नई कानूनी चुनौती कंगना रनौत का मामला इस व्यापक कानूनी बहस में एक नए पहलू को सामने लाता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर AI आधारित सामग्री के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीर, आवाज और पहचान का इस्तेमाल पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। AI तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की तस्वीर या आवाज जैसी विशेषताओं का इस्तेमाल कर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है जो वास्तविक प्रतीत हो सकती है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की पहचान का डिजिटल इस्तेमाल किस सीमा तक स्वीकार्य है और किस स्थिति में यह कानूनी विवाद का विषय बन सकता है। कंगना रनौत की याचिका में भी कथित फेक न्यूज, AI से तैयार सामग्री और उनकी पहचान से संबंधित ऑनलाइन सामग्री को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, अदालत ने जिन सामग्रियों को सुनवाई के दौरान देखा, उनमें से कुछ को प्रथम दृष्टया व्यंग्यात्मक बताया गया। इसलिए इस स्तर पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि अदालत ने सभी संबंधित ऑनलाइन सामग्री को अवैध या आपत्तिजनक माना है। मामले में आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा समन जारी किए जाने और अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर नोटिस दिए जाने के बाद अब मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत आगे यह देख सकती है कि याचिका में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत की गई ऑनलाइन सामग्री के संबंध में कानूनी तौर पर किस प्रकार की राहत दी जा सकती है। साथ ही, पक्षकारों की संशोधित सूची दाखिल किए जाने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027 को होगी।   कंगना रनौत का यह मामला केवल एक सेलिब्रिटी के नाम और तस्वीर के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में सार्वजनिक हस्तियों की पहचान की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है। खास तौर पर AI आधारित सामग्री और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अदालतों के सामने यह चुनौती बढ़ रही है कि व्यक्तित्व अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यंग्य और डिजिटल सामग्री के इस्तेमाल के बीच कानूनी संतुलन किस तरह कायम किया जाए।

    सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हूती हमलों की भारत ने की निंदा, कहा- नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’

        Yugcharan News / 08-10-2026 भारत ने सऊदी अरब के अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार 6 और 7 अक्टूबर को अबहा और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हुए अलग-अलग हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और 36 अन्य घायल हुए। ईरान समर्थित हूती समूह ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। इन हमलों में हवाई अड्डों के अलावा देश के अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। भारत ने नागरिक ठिकानों पर हमले को बताया अस्वीकार्य भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों का उल्लेख किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पिछले कुछ दिनों में इन दोनों हवाई अड्डों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की निंदा करता है, जिनमें नागरिकों की मौत और लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने हमलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई। विदेश मंत्रालय ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की और कहा कि भारत सऊदी अरब की जनता और उसकी सरकार के साथ एकजुटता से खड़ा है। अबहा और रियाद हमलों में तीन लोगों की मौत सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 6 और 7 अक्टूबर को हुए हमलों में कुल तीन लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में दो लोगों की मौत और 28 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। वहीं, रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत और आठ लोगों के घायल होने की खबर है। इन हमलों के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। हूतियों ने रियाद को निशाना बनाने का दावा किया यमन में सक्रिय हूती समूह ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब और सऊदी समर्थित ठिकानों के खिलाफ मिसाइल हमले किए। हूती समूह लंबे समय से सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ संघर्ष में शामिल रहा है। यमन में जारी संघर्ष का क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है और समय-समय पर सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालिया हमलों में नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने के दावों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सऊदी गठबंधन ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती हमलों के जवाब में यमन में सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाएगा। गठबंधन के अनुसार, उसने यमन के सादा, अल-हुदैदाह, अल-जौफ और मारिब प्रांतों में हूती समूह से जुड़े कुल 82 सैन्य ठिकानों को नष्ट किया। गठबंधन ने दावा किया कि इन लक्ष्यों में बैलिस्टिक मिसाइल से संबंधित ठिकाने, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, संचार प्रणालियां, मिसाइल और हथियार भंडारण केंद्र तथा हूती लड़ाकों के जमावड़े वाले स्थान शामिल थे। इसके अलावा सादा में पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित 11 बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण स्थलों को निशाना बनाए जाने का भी दावा किया गया है। सना में मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म नष्ट करने का दावा सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह भी कहा कि उसने यमन की राजधानी सना में एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को नष्ट कर दिया। गठबंधन के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सऊदी अरब के खिलाफ संभावित हमले की तैयारी के लिए किया जा रहा था। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने वाले हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, सैन्य अभियानों से संबंधित ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं की गई है। संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों की ओर से सैन्य कार्रवाई और उसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। रियाद में फिर सुनाई दिए धमाकों के स्वर गुरुवार को सऊदी राजधानी रियाद में कई धमाकों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब सऊदी अरब और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। हाल के हमलों के बाद सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। हवाई अड्डों पर संभावित हमलों का असर नागरिक उड़ानों और यात्रियों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी नागरिकों के लिए भी चेतावनी सऊदी अरब स्थित अमेरिकी मिशन ने अपने नागरिकों को हूती खतरों के बीच अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिकी मिशन ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र को लेकर संभावित सुरक्षा जोखिमों की चेतावनी जारी की। अमेरिकी मिशन के अनुसार, सुरक्षा स्थिति के कारण उड़ानें रद्द हो सकती हैं, हवाई क्षेत्र बंद किया जा सकता है और यात्रियों को यात्रा संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब सऊदी अरब के प्रमुख शहरों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे के आसपास सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं। यमन संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव सऊदी अरब और हूती समूह के बीच संघर्ष यमन के लंबे समय से चले आ रहे युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हूती समूह यमन में एक प्रमुख सशस्त्र शक्ति है और उसे ईरान का समर्थन प्राप्त होने का व्यापक रूप से उल्लेख किया जाता है। दूसरी ओर, सऊदी अरब यमन में हूती समूह के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल रहा है। इस संघर्ष का प्रभाव केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहा है। लाल सागर और आसपास के महत्वपूर्ण समुद्री एवं हवाई मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी समय-समय पर चिंता सामने आती रही है। सऊदी अरब के हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय तनाव के और बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। नागरिक हवाई अड्डों पर हमलों से यात्रियों की सुरक्षा के अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय विमानन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। भारत ने सऊदी अरब के साथ जताई एकजुटता भारत की प्रतिक्रिया में नागरिकों की सुरक्षा और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा पर जोर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। भारत ने सऊदी अरब की सरकार और वहां की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर सुरक्षा तनाव बना हुआ है और क्षेत्रीय संघर्षों का असर ऊर्जा, व्यापार, विमानन तथा समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अबहा और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हुए हमलों को लेकर सऊदी अधिकारियों और हूती समूह की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। भारत ने स्पष्ट रूप से नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने का विरोध किया है। क्षेत्र में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सऊदी अरब और हूती समूह के बीच सैन्य तनाव किस दिशा में बढ़ता है और क्या आने वाले दिनों में हमलों तथा जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है।

    बेंगलुरु में SIR के खिलाफ प्रदर्शन: ध्रुव राठी बोले- ‘EC में पारदर्शिता और जवाबदेही शून्य’, प्रकाश राज ने प्रक्रिया रद्द करने की मांग की

    Yugcharan News / 08-10-2026 बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में राजनीतिक और सामाजिक हलकों के कई चर्चित चेहरे शामिल हुए। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग (EC) पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग की ओर से “शून्य पारदर्शिता और शून्य जवाबदेही” दिखाई दे रही है। वहीं अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग करते हुए इसे नागरिकों के अधिकारों और गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताया। प्रदर्शन का आयोजन नागरिक समाज से जुड़े समूहों और CJP की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके समेत कई कार्यकर्ता और छात्र संगठनों से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। ‘मैं सत्ता परिवर्तन के लिए यहां नहीं आया’: ध्रुव राठी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का आरोप लगाया। राठी ने कहा कि वह यहां “सत्ता परिवर्तन” के लिए नहीं आए हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर विभिन्न नागरिक और छात्र संगठनों की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इसके दौरान मतदाताओं के नामों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव से जुड़ा है। हालांकि, SIR को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित चुनावी और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही तय होगा। प्रकाश राज ने SIR खत्म करने की मांग की अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भी बेंगलुरु के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने SIR को समाप्त करने की मांग की और आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया केवल मतदाताओं के नाम हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा विषय है। प्रकाश राज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर काम कर रहे हैं। यह प्रकाश राज का आरोप है और इस संबंध में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है। प्रदर्शन में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों और समर्थकों ने चुनावी मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें सामने रखीं। छात्र संगठनों और नागरिक समूहों की भी भागीदारी बेंगलुरु का यह प्रदर्शन एक व्यापक अभियान का हिस्सा बताया गया है, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे एक दिन पहले नई दिल्ली में CJP, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) समेत कई संगठनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (ASAP) ने भी इसमें भाग लिया था। इन संगठनों ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले व्यापक लामबंदी का आह्वान किया है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने लोगों से देशभर से दिल्ली पहुंचने और लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहने की अपील की। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर तैयारी सौरव दास ने कहा कि यह लड़ाई आसान नहीं होगी। उन्होंने देशभर के लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की और कहा कि विरोध केवल किसी एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा। दास के अनुसार, यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा भी दे देते हैं, तब भी आंदोलन समाप्त नहीं होगा, क्योंकि प्रदर्शनकारी चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस अभियान का विरोध “अनंत सत्ता की लालसा” को दर्शाता है। यह भी संगठन की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है, जिसे तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं? CJP और उसके सहयोगी संगठनों ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। संगठन ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी SIR को तत्काल रोकने, आगामी चुनावों को स्थगित करने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं। संगठनों ने 2023 के उस कानून को भी निरस्त करने की मांग की है, जो चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित व्यवस्था निर्धारित करता है। उनका तर्क है कि चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए अधिक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रक्रिया स्थापित की जानी चाहिए। विरोध का राजनीतिक दायरा बढ़ने के संकेत SIR को लेकर शुरू हुआ विरोध अब केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी मुद्दों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक एवं छात्र संगठनों की भागीदारी के कारण यह मुद्दा व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। 6 अक्टूबर को विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसदों ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च निकाला था। CJP और सहयोगी संगठनों ने उस प्रदर्शन का समर्थन किया और चुनावी व्यवस्था को लेकर अपने अभियान को व्यापक राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश की। संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य चुनावी व्यवस्था में सुधार और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के संदर्भ में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है? विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अद्यतन करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नामों के हटने या मतदाताओं से अतिरिक्त दस्तावेज और जानकारी मांगे जाने को लेकर राजनीतिक दलों तथा नागरिक संगठनों की ओर से चिंता व्यक्त की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वे मांग कर रहे हैं कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव से पहले पर्याप्त सत्यापन, सूचना और अपील की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। हालांकि, किसी भी मतदाता का नाम हटाया जाना या सूची में संशोधन होना अपने आप में अवैध कार्रवाई नहीं माना जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित प्रक्रिया कानून और चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई गई है या नहीं। आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन बेंगलुरु में गुरुवार का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब 10 अक्टूबर के प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को लेकर CJP और छात्र संगठनों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संगठनों ने देशभर से समर्थकों को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। ध्रुव राठी और प्रकाश राज जैसी सार्वजनिक हस्तियों की भागीदारी से इस मुद्दे को सोशल मीडिया और व्यापक सार्वजनिक बहस में और अधिक ध्यान मिलने की संभावना है। हालांकि, SIR और चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक स्पष्टीकरण, कानूनी कार्यवाही और चुनावी प्राधिकरणों के निर्णयों से स्पष्ट होगी।   फिलहाल बेंगलुरु का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर असहमति और राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। प्रदर्शनकारी जहां SIR को रोकने और चुनावी व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं इस पूरी प्रक्रिया की वैधता और उसके प्रभाव को लेकर विवाद अब सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

    मद्रास हाईकोर्ट में विजय की ₹30 करोड़ की संपत्ति का मामला, क्या जानकारी छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ माना जाएगा?

    Yugcharan News / 08-10-2026 तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की चुनावी संपत्तियों से जुड़ा मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक मतदाता ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करते समय विजय ने अपनी कुछ संपत्तियों और उनसे जुड़े लेनदेन की पूरी जानकारी चुनावी हलफनामे में नहीं दी। याचिका में करीब ₹30 करोड़ की संपत्तियों से संबंधित कथित गैर-प्रकटीकरण और संपत्ति विवरण में विसंगतियों का मुद्दा उठाया गया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन कर रहे हैं। 7 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि यदि किसी उम्मीदवार ने लगभग ₹30 करोड़ की संपत्ति का विवरण नहीं दिया हो, तो क्या इसे चुनाव को प्रभावित करने वाला ‘भ्रष्ट आचरण’ माना जा सकता है। अदालत ने यह भी पूछा कि जब विजय ने अपने हलफनामे में ₹600 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है, तब अतिरिक्त ₹30 करोड़ की संपत्ति का कथित गैर-प्रकटीकरण क्या वास्तव में किसी मतदाता के निर्णय को प्रभावित कर सकता था। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। मतदाता ने विजय की चुनावी जीत को दी चुनौती मद्रास हाईकोर्ट में यह मामला पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता एस. दिनेश की ओर से दायर चुनाव याचिका से जुड़ा है। दिनेश ने अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में विजय की जीत को चुनौती देते हुए उनके चुनावी हलफनामे में कथित वित्तीय विसंगतियों का आरोप लगाया है। विजय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका को खारिज करने की मांग की है। उनका पक्ष है कि चुनाव याचिका में आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तथ्य और विवरण पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। विजय की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि हलफनामे में मामूली अथवा तकनीकी विसंगतियां अपने आप में किसी चुनाव को रद्द करने का आधार नहीं हो सकतीं, जब तक यह स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया जाए कि कथित गलतियों या गैर-प्रकटीकरण का चुनाव परिणाम पर कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा। कोडाइकनाल की जमीन पर भी उठे सवाल याचिकाकर्ता ने विजय की संपत्ति संबंधी जानकारी में कई कथित विसंगतियों का उल्लेख किया है। इनमें कोडाइकनाल के विलपट्टी गांव में करीब 50 सेंट कृषि भूमि का मामला भी शामिल है। याचिका के अनुसार, विजय के चुनावी हलफनामे में बताया गया था कि उन्होंने यह जमीन वर्ष 1997 में ₹30,000 में खरीदी थी और इसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग ₹20 लाख बताई गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में इस जमीन को सरकारी ‘पोरम्बोक’ भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। यह आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है और मामले में अदालत को उपलब्ध दस्तावेजों तथा पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे निर्णय लेना है। पोरुर की संपत्ति के क्षेत्रफल और कीमत पर विवाद याचिका में चेन्नई के पोरुर स्थित एक गैर-कृषि संपत्ति के विवरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, विजय के हलफनामे में 2010 में 33,955 वर्ग फुट जमीन ₹9.13 करोड़ में खरीदे जाने का उल्लेख है। वहीं, याचिका में पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि संबंधित खरीद 20,773 वर्ग फुट क्षेत्रफल और ₹7.5 करोड़ की कीमत से जुड़ी थी। इस अंतर को याचिकाकर्ता ने चुनावी हलफनामे में कथित गलत या अपूर्ण जानकारी के उदाहरण के तौर पर पेश किया है। पाडी की संपत्ति और ₹35 करोड़ की बिक्री का आरोप याचिका में चेन्नई के पाडी इलाके की एक व्यावसायिक संपत्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, विजय के हलफनामे में 11,854 वर्ग फुट की इमारत का मूल्य ₹7 करोड़ बताया गया था। इसमें यह भी उल्लेख था कि संपत्ति वर्ष 2009 में ₹1.95 करोड़ में खरीदी गई और इसके निर्माण पर ₹3.9 करोड़ खर्च किए गए। याचिकाकर्ता का दावा है कि संबंधित संपत्ति का निर्मित क्षेत्रफल 23,460 वर्ग फुट था और इसे 12 फरवरी 2026 को ₹35 करोड़ में बेचा गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि संपत्ति विजय ने सीधे खरीदने के बजाय कोरट्टूर की एक संपत्ति से जुड़े एक्सचेंज डीड के जरिए प्राप्त की थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संपत्ति के अधिग्रहण के तरीके और बाद में हुई कथित ₹35 करोड़ की बिक्री का चुनावी हलफनामे में उचित रूप से खुलासा नहीं किया गया। नीलांगरई बंगले को लेकर भी विवाद विजय की नीलांगरई स्थित संपत्ति को लेकर भी याचिका में अलग दावा किया गया है। याचिकाकर्ता ने हलफनामे में इस संपत्ति को विरासत में मिली संपत्ति बताए जाने पर आपत्ति जताई है। याचिका के अनुसार, विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने वर्ष 2003 में यह संपत्ति खरीदी थी और वर्ष 2005 में इसे एक सेटलमेंट डीड के जरिए विजय के नाम किया गया था। दस्तावेज के अनुसार, करीब 17,100 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली इस संपत्ति में लगभग 5,500 वर्ग फुट का भवन था और इसकी कीमत ₹2.75 करोड़ निर्धारित की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विजय के 2026 के चुनावी हलफनामे में इस संपत्ति के संबंध में 18,633 वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र पर ₹18.73 करोड़ खर्च होने और मौजूदा बाजार मूल्य करीब ₹20 करोड़ होने की जानकारी दी गई थी। इन सभी दावों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों के आधार पर ही निकलना है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एन.सी. अशोक कुमार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ‘रेसर्जेंस इंडिया बनाम निर्वाचन आयोग’ मामले के फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में उम्मीदवार के बारे में जानकारी हासिल करने के मतदाता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि उम्मीदवार द्वारा अपनी संपत्तियों के संबंध में गलत, अधूरी या छिपाई गई जानकारी मतदाता के सूचित चुनावी निर्णय के अधिकार को प्रभावित कर सकती है। वकील ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी सवाल उठाया और 2009 के ‘कृष्णमूर्ति बनाम शिवकुमार’ मामले में न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन के फैसले का हवाला दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उस फैसले में गलत, अधूरी, झूठी अथवा छिपाई गई जानकारी को मतदाता के स्वतंत्र चुनावी अधिकार में हस्तक्षेप से जोड़ा गया था। इस फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में बरकरार रखा था। विजय के वकील ने आरोपों को बताया अपर्याप्त मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोपों का विरोध किया। उनके पक्ष की दलील है कि चुनाव याचिका में ऐसे आवश्यक तथ्य नहीं दिए गए हैं, जिनके आधार पर चुनाव परिणाम को चुनौती देने का कानूनी आधार बनता हो। विजय की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि क्या याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 81 की आवश्यकताओं को पूरा किया है। अदालत के समक्ष यह तर्क रखा गया कि याचिका में यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं किया गया कि याचिकाकर्ता संबंधित विधानसभा क्षेत्र का मतदाता है। विजय की ओर से यह भी कहा गया कि हलफनामे में कथित विसंगतियों और चुनाव परिणाम के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को याचिका में स्थापित नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने पूछा—क्या ₹30 करोड़ का अंतर चुनाव को प्रभावित करता है? 7 अक्टूबर की सुनवाई में न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मामले के इसी पहलू पर विशेष ध्यान दिया। अदालत ने पूछा कि यदि विजय ने अपने हलफनामे में ₹600 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है, तो लगभग ₹30 करोड़ की कथित गैर-घोषित संपत्ति से मतदाता के चुनावी निर्णय पर कितना प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि कोई मतदाता पहले ही विजय को वोट देने का फैसला कर चुका था, तो क्या अतिरिक्त संपत्ति की जानकारी उसके निर्णय को बदल देती। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने इस संदर्भ में यह संभावना भी उठाई कि इतने बड़े संपत्ति पोर्टफोलियो का पूरा विवरण स्वयं उम्मीदवार द्वारा तैयार किए जाने के बजाय चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता से तैयार किया गया हो सकता है। अदालत ने उदाहरण देते हुए सवाल किया कि यदि किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपत्ति की सूची तैयार कराने के दौरान कोई संपत्ति छूट जाती है, तो क्या केवल इस आधार पर चुनाव को रद्द किया जा सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी सवाल अदालत ने याचिकाकर्ता के उस आरोप पर भी सवाल किया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने विजय का नामांकन अनुचित तरीके से स्वीकार किया था। न्यायालय ने पूछा कि रिटर्निंग ऑफिसर से उम्मीदवार के हलफनामे में घोषित प्रत्येक संपत्ति की वास्तविकता और सही बाजार मूल्य की विस्तृत जांच की अपेक्षा किस सीमा तक की जा सकती है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी नामांकन के समय दाखिल हलफनामों में उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारी की प्रकृति और उसकी जांच की सीमा चुनावी कानून के तहत अलग-अलग स्तरों पर निर्धारित होती है। मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं मद्रास हाईकोर्ट ने अभी इस मामले में विजय के चुनाव को रद्द करने या याचिकाकर्ता के आरोपों को सही ठहराने संबंधी कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। फिलहाल अदालत विजय की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही है, जिसमें चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की गई है। अदालत ने 7 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों पर भरोसा किए जाने से मामले का कानूनी स्वरूप अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने विजय के पक्ष से इन दलीलों पर जवाब मांगा और सुनवाई 8 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।   इसलिए फिलहाल ₹30 करोड़ की कथित संपत्ति के गैर-प्रकटीकरण को लेकर लगाए गए आरोप केवल याचिकाकर्ता के दावे हैं। इन आरोपों की सत्यता और उनका चुनाव परिणाम पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ा या नहीं, इसका निर्धारण अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही होगा।

    रैंप वॉक, टैलेंट राउंड और बॉलीवुड डांस ने बांधा समां, दिखी प्रतिभा

    बियानी नर्सिंग कॉलेज में फ्रेशर्स पार्टी ‘बॉलीवुड बैश’ का हुआ आयोजन जयपुर। बियानी नर्सिंग कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत के लिए फ्रेशर्स पार्टी ‘बॉलीवुड बैश’ का आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। सीनियर्स ने नए विद्यार्थियों का गर्मजोशी से स्वागत किया । कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत कर उनमें आत्मविश्वास और प्रतिभा को प्रोत्साहित करना रहा। बॉलीवुड थीम पर विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर एजुकेशन डिपार्टमेंट की डॉ. तृप्ति सैनी एवं डॉ. सुनीता शर्मा ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में आयोजक संस्था के निदेशक एवं प्रसिद्ध मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी, डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, अस्सिटेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी तथा नर्सिंग प्रिंसिपल डॉ. जीशू जॉर्ज भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बॉलीवुड डांस ने समारोह में उत्साह एवं मनोरंजन का माहौल बना दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक एवं प्रसिद्ध मोटिवेशनल गुरु डॉ. संजय बियानी ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी अकादमिक जर्नी सफल एवं सुखद रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में कृतज्ञता की भावना अपनाने तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि फ्रेशर्स पार्टी जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी टैलेंट, क्रिएटिविटी और कॉन्फिडेंस को मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी टैलेंट को निखारने और प्रत्येक अवसर से सीखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में फ्रेशर्स के लिए रैंप वॉक, टैलेंट राउंड, गेम्स एवं क्वेश्चन-आंसर राउंड जैसी रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैंप वॉक के दौरान विद्यार्थियों ने अपने आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया, वहीं टैलेंट राउंड में गायन, नृत्य सहित विभिन्न प्रतिभाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। इस अवसर पर बी.एससी. नर्सिंग में मिस फ्रेशर का खिताब पूर्वा ने अपने नाम किया वहीं तनू श्री फर्स्ट रनर-अप तथा अंकिता सेकंड रनर-अप रहीं। वहीं जीएनएम नर्सिंग वर्ग में प्रियांशी सोनी को मिस फ्रेशर चुना गया। मुस्कान फर्स्ट रनर-अप तथा हिमानी सेकंड रनर-अप रहीं। विजेताओं एवं रनर-अप विद्यार्थियों को निर्णायकों द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बॉलीवुड गानों पर विद्यार्थियों की शानदार डांस प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला और बॉलीवुड थीम ने फ्रेशर्स पार्टी को यादगार बना दिया।

    चोमू नगर के सभा पति आशीष दुसाद का का भव्य सम्मान

    चोमू के दुसाद परिवार के रत्न, चोमू नगर वासियों के चहेते, जन जन के लाडले, हस मुख, हर दिल अजीज, जनप्रिय, चोमू नगर परिषद के प्रथम नागरिक एवं प्रथम पूर्ण कालिक सभापति आशीष दुसाद का अशोक विहार मे रावत परिवार के निवास पर आयोजित एक सम्मान समारोह मे अगरवाल वेश्य समाज के अध्यक्ष एवं समाज बंधुओ, खंडेलवाल वेश्य समाज चोमू के सभी पदाधिकारी एवं समाज बंधुओ, महेश्वरी समाज एवं ब्राहमन समाज के समाज बंधुओ ने, अशोक विहार एवं चोमू नगर के अन्य निवासीयो ने भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया! इसके साथ ही सभी ने सभापति आशीष दुसाद के उज्जवल भविष्य की कामना की! इससे पहले भी आशीष दुसाद एक बार नगरपालिका के चेयरमेन रह चुके है! कार्यक्रम का शुभ आरंभ सभी आगन्तुक अतिथियों का अखिल भारत वर्षीय खंडेलवाल वेश्य महा सभा के राष्ट्रिय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी एवं सिक्किम प्रोफेरेशनल यूनिवर्सिटी, गैंगटोक सिक्किम के कुलसचिव प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने सिक्किम की राजधानी गैंगटोक से आकर सिक्किम प्रदेश का रुद्राक्ष के पेड से टुटा हुआ एवं पक्षी की चोच से रुद्राक्ष के पेड से गिरा कर प्राप्त किया हुआ सिक्किम के ओरिजिनल ओम से एवं अन्य शिव परिवार से अंकित एकल रुद्राक्ष की कंठी पहनाकर किया! इस अवसर पर रावत परिवार की और से दामोदर प्रसाद रावत ने सभापति आशीष दुसाद का माला, साफा, हनुमान जी का आशीर्वाद का फोटो भेट कर स्वागत किया! इस अवसर पर अभिनंदन समारोह मे अगरवाल समाज चोमू के अध्यक्ष राजेंद्र अगरवाल, खंडेलवाल समाज चोमू के संरक्षक- अमरचंद रावत, ओमप्रकाश कासलीवाल, कैलाश जी सेठी, मूलचंद दुसाद, अध्यक्ष मुकेश खुटेटा, उपाध्यक्ष गोविन्द झालानी, संयुक्त मंत्री रमेश डगायच एवं कोषाध्यक्ष नवीन कासलीवाल, पूर्व अध्यक्ष खंडेलवाल समाज चोमू जुगल डँगायच, अशोक विहार एवं चोमू के निवासी राजेंद्र धमोड, नवल किशोर रावत, दिनेश अगरवाल (खेमावाला), एडवोकेट बनवारी लाल शर्मा, नारायण महेश्वरी, पवन कामदार, प्रशांत खाण्डल, मनोज दीक्षित, जयेश रावत, मेहुल् अगरवाल, बिशन रावत, देव की नंदन अगरवाल, राकेश सेठी, महेश ताम्बी ने सभापति आशीष दुसाद का माला पहना कर स्वागत किया एवं भदाई दी! कार्यक्रम मे आशीष दुसाद के पिता गोविंद दुसाद, उनके चाचा रामअवतार दुसाद, मूल चंद दुसाद राम कृष्ण दुसाद, पपू दुसाद, राम मनोहर दुसाद एवं अपने भाई सोनू दुसाद सहित अशोक विहार चोमू के निवासी भी मौजूद थे! इसके साथ ही चोमू के भाजपा से पूर्व विधायक एवं राजस्थान प्रदेश के भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा, अशोक बंसल, सुरेश रावत, हरीश रावत, रामबाबू रावत, मनीष गोयल, रमेश बजाज, गोविंद झालानी, दीपक जोशी ने भी स्वागत कार्यक्रम पर खुशी व्यक्त करते हुए सभापति आशीष दुसाद को शुभकामना प्रेषित की है!  

    हीरापुरा के राजकीय विद्यालय में समग्र शिक्षा अभियान के तहत सोशल ऑडिट एवं जनसुनवाई आयोजित

    प्रदेश के 4 हजार विद्यालयों में प्रस्तावित सोशल ऑडिट के पायलट प्रोजेक्ट हेतु चयनित 20 विद्यालयों में श्रीमती कमला देवी बुधिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, हीरापुरा का चयन जयपुर। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने के उद्देश्य से राजस्थान के 4 हजार विद्यालयों का सोशल ऑडिट किया जाना है। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित 20 विद्यालयों की सूची में से श्रीमती कमला देवी बुधिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, हीरापुरा, जयपुर का सोशल ऑडिट करने हेतु चयन किया गया है। इसी क्रम में बुधवार को विद्यालय में सोशल ऑडिट के तहत विद्यालय सभा एवं जनसुनवाई का आयोजन किया गया। सोशल ऑडिट का कार्य सामाजिक लेखा परीक्षा, जवाबदेही एवं पारदर्शिता सोसाइटी, राजस्थान (SSAAT) द्वारा किया गया। इस दौरान समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालय में किए गए विभिन्न कार्यों, संचालित योजनाओं एवं विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। विद्यालय सभा एवं जनसुनवाई के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों से भी संवाद किया गया। इसमें यह जानने का प्रयास किया गया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत किए गए कार्यों एवं संचालित योजनाओं का विद्यार्थियों, अभिभावकों और समुदाय पर क्या प्रभाव पड़ा है। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्ध सुविधाओं और उनके उपयोग से संबंधित समस्याओं एवं कमियों के बारे में भी जानकारी ली गई। सोशल ऑडिट के दौरान विद्यालय स्तर पर समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत उपलब्ध संसाधनों एवं सुविधाओं की स्थिति, योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया गया। जनसुनवाई के माध्यम से संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने और सुझाव साझा करने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम में विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावक, SDMC एवं विद्यालय समिति के सदस्य, CBEO कार्यालय एवं ADPC कार्यालय के कार्मिक, राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अधिकारी तथा विद्यालय के शिक्षक एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित विद्यालयों में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया से प्राप्त अनुभवों एवं निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश के 4 हजार विद्यालयों में प्रस्तावित सोशल ऑडिट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत आयोजित यह सोशल ऑडिट विद्यालय स्तर पर संचालित योजनाओं एवं कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के साथ ही विद्यार्थियों, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही एवं पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।  

    टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय बैठक लखनऊ में सम्पन्न संसद के शीतकलीन सत्र में पुनः दिल्ली में धरना प्रदर्शन किया जाएगा

    टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय बैठक लखनऊ में सोमवार को सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधित्व के रूप में उनके पुत्र नीरज सिंह विशिष्ट अतिथि थे। दोनों अतिथि नेताओं ने टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को आश्वास्त किया , टीएफआई के प्रतिनिधि मंडल की वार्ता केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से कराई जाएगी और शिक्षकों की समस्याओं का हल निकाला जाएगा। टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि बैठक में 2011 से पूर्व लगे शिक्षकों की टेट की अनिवार्यता छूट, पूरे देश में पुरानी पेंशन व्यवस्था, आठवें वेतन आयोग में पूरे देश मे सभी शिक्षकों के लिए केन्द्रीय विद्यालय अनुसार समान वेतन एवं भत्ते लागू किया जाए, शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, आदि मुद्दों पर चर्चा हुई! टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि शीघ्र ही टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया का प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से वार्ता करेगा अगर सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो संसद के आगामी दिसंबर माह में शीतकालीन सत्र में एक बार पुनः शिक्षकों का धरना प्रदर्शन दिल्ली में किया जाएगा। टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने बताया कि बैठक में देश के 17 राज्यों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।  

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में जनरेटिव एआई एवं एजेंटिक एआई पर सेमिनार आयोजित

    जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की ओर से ‘जनरेटिव एआई एवं एजेंटिक एआई’ विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आधारित सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम एडुनेट फाउंडेशन एवं आईबीएम के सहयोग से आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग से परिचित कराना तथा उनके तकनीकी कौशल को विकसित करना था। कार्यक्रम में एडुनेट फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर हिरन जे. मोधा, डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, आईटी विभागाध्यक्ष सचिन बगोरिया, एसोसिएट प्रोफेसर राहुल अग्रवाल सहित आईटी विभाग के फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मास्टर ट्रेनर हिरन जे. मोधा ने प्रतिभागियों को विभिन्न एजेंटिक एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनरेटिव एआई एवं एजेंटिक एआई की सहायता से दैनिक कार्यों को किस प्रकार आसान बनाया जा सकता है तथा जनरेटिव एआई का प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान फैकल्टी सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने विभिन्न जनरेटिव एआई एवं एजेंटिक एआई टूल्स का स्वयं प्रयोग कर उनके व्यावहारिक उपयोग को समझा। संवादात्मक एवं व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने जाना कि एआई को दैनिक जीवन में प्रभावी, जिम्मेदार एवं उद्देश्यपूर्ण तरीके से किस प्रकार शामिल किया जा सकता है। डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी के विजन के अनुरूप विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नई तकनीकों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसी दिशा में प्रतिभागियों को एआई के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। सेमिनार के माध्यम से प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी मिली तथा उन्हें उपयुक्त एआई टूल्स को प्रभावी एवं जिम्मेदारी के साथ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।