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    राजस्थान मौसम अलर्ट: बारिश ओलावृष्टि और ठंड से बढ़ी लोगों की मुश्किलें

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ताज़ा चेतावनी के अनुसार राजस्थान मौसम को लेकर राज्य के कई जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश, तेज़ हवाएँ, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इस राजस्थान मौसम अलर्ट के चलते तापमान में और गिरावट आएगी, जिससे ठंड का असर तेज़ होगा। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम से जुड़ी सलाहों का पालन करने को कहा गया है।    राजस्थान मौसम अलर्ट का असर: जलभराव कोहरा और यातायात बाधित मौसम विभाग के मुताबिक जयपुर भरतपुर बीकानेर कोटा समेत कई इलाकों में दो फरवरी तक बारिश जारी रह सकती है। इस राजस्थान मौसम अलर्ट के कारण सुबह के समय घने बादल और तेज़ हवाएँ देखने को मिलेंगी। लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे दफ़्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को परेशानी हो सकती है। पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में घना कोहरा भी दर्ज किया गया है, जो इस अलर्ट को और गंभीर बनाता है। लगातार जारी  मौसम अलर्ट के बीच कृषि और बागवानी से जुड़े लोगों की चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई जा रही है, खासकर सरसों और गेहूँ की फसल पर इसका असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि यदि राजस्थान मौसम अलर्ट के तहत बारिश और तेज़ हवाओं का यह सिलसिला लंबा चला, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में कृषि विभाग ने भी किसानों को मौसम के अनुसार आवश्यक सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है।    तापमान में गिरावट के साथ बढ़ी चिंता, राजस्थान मौसम अलर्ट जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार बाड़मेर में अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। माउंट आबू, सिरोही और अलवर जैसे क्षेत्रों में ठंड का असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने साफ कहा है कि यह राजस्थान मौसम अलर्ट केवल बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि ठंड और कोहरे की वजह से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि प्रशासन और मौसम विभाग बार-बार  मौसम को गंभीरता से लेने की अपील कर रहे हैं। पर्यटन के लिहाज़ से भी यह अहम माना जा रहा है। माउंट आबू और अन्य पर्यटन स्थलों पर ठंड और बारिश की वजह से सैलानियों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। वहीं, प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम अलर्ट को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी और खुले इलाकों की यात्रा से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी जरूर लें। मौसम विभाग का कहना है कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर राजस्थान मौसम अलर्ट को और सख़्त किया जा सकता है।    अन्य राज्यों पर भी असर, राजस्थान मौसम अलर्ट बना संकेत मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश बिहार पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी हल्की बारिश और शीतलहर की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा राजस्थान मौसम अलर्ट उत्तर भारत में बदलते मौसम के व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में ठंड और बारिश का यह दौर और इलाकों तक फैल सकता है। कुल मिलाकर, राजस्थान मौसम सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में मौसम की गंभीरता का संकेत है। लोगों के लिए ज़रूरी है कि वे इस को ध्यान में रखते हुए अपनी दिनचर्या और यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके। राजस्थान मौसम अलर्ट के बीच लोगों को कुछ ज़रूरी precautions अपनाने की सलाह दी गई है। बारिश और lightning की आशंका को देखते हुए खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या ऊँचे ढाँचों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। तेज़ हवाओं और hailstorm के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और घरों में सुरक्षित स्थानों पर रहें। वाहन चालकों को खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि wet roads और low visibility से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे IMD updates, और सरकारी advisories पर लगातार नज़र रखें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों को ढककर रखें और जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी की व्यवस्था करें। पर्यटकों और यात्रियों को travel plans मौसम के अनुसार बदलने की सलाह दी गई है, क्योंकि राजस्थान मौसम अलर्ट के चलते आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।   Frequently Asked Questions  1 राजस्थान मौसम अलर्ट क्यों जारी किया गया है? उत्तर: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने western disturbance के प्रभाव के कारण राजस्थान मौसम अलर्ट जारी किया है। इसके तहत कई जिलों में बारिश, तेज़ हवाएँ, hailstorm और lightning की संभावना जताई गई है। 2 राजस्थान मौसम अलर्ट कितने दिनों तक लागू रहेगा? उत्तर: मौसम विभाग के अनुसार यह राजस्थान मौसम अलर्ट कम से कम 2 फरवरी तक प्रभावी रह सकता है। हालांकि, weather conditions को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ भी सकती है। 3 क्या राजस्थान मौसम अलर्ट से तापमान में और गिरावट आएगी? उत्तर: हाँ, इस राजस्थान मौसम अलर्ट के दौरान लगातार rainfall और cloudy weather के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे cold wave का असर बढ़ेगा। 4 राजस्थान मौसम अलर्ट का किसानों पर क्या असर पड़ेगा? उत्तर: राजस्थान मौसम अलर्ट के चलते बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों, खासकर गेहूँ और सरसों, को नुकसान पहुँचने की आशंका है। IMD और कृषि विभाग ने किसानों को crop protection के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। 5 क्या राजस्थान मौसम अलर्ट के दौरान यात्रा करना सुरक्षित है? उत्तर: मौसम विभाग ने travel advisory जारी की है। इस राजस्थान मौसम अलर्ट के दौरान low visibility, waterlogging और strong winds के कारण यात्रा में परेशानी हो सकती है, इसलिए लोगों को मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।  

    सोने और चांदी की कीमत 1980 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, सोने और चांदी की कीमत से निवेशकों में हड़कंप

    सोने और चांदी की कीमत में आज ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों और बुलियन बाज़ार को हिलाकर रख दिया है। बुलियन मार्केट में कीमतें लगभग 30 प्रतिशत तक टूट गईं, जिसे 1980 के दशक के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट माना जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमत में तेज़ गिरावट देखी गई, जहाँ चांदी का भाव लुढ़ककर 2,91,922 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गया। वहीं, सोने और चांदी की कीमत में गिरावट के बीच सोने के दाम भी फिसलकर करीब 1,50,849 रुपये तक आ गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर वैश्विक संकेत (weak global cues), डॉलर में तेज़ उतार-चढ़ाव और भारी मुनाफावसूली (profit booking) इस गिरावट की प्रमुख वजह मानी जा रही है। इन कारणों से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमत पर दबाव साफ देखा जा रहा है।    Gold Price Today: 22K और 24K में सोने और चांदी की कीमत का हाल वैश्विक बाज़ार में सोने की कमजोरी का असर घरेलू खुदरा बाज़ार पर भी साफ दिखा है। आज सोने और चांदी की कीमत में गिरावट के बीच 24 कैरेट सोना करीब 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,31,000 रुपये रहा। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि ये दरें GST और मेकिंग चार्ज के बिना हैं, यानी ज्वैलरी खरीदते समय सोने और चांदी की कीमत इससे अधिक पड़ सकती है।   प्रमुख शहरों में आज का सोना भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर 22 कैरेट सोना 24 कैरेट सोना दिल्ली ₹1,38,360 ₹1,51,050 जयपुर ₹1,38,360 ₹1,51,050 अहमदाबाद ₹1,38,360 ₹1,51,050 पुणे ₹1,38,300 ₹1,50,900 मुंबई ₹1,38,300 ₹1,50,900 हैदराबाद ₹1,38,300 ₹1,50,900 चेन्नई ₹1,38,300 ₹1,50,900 बेंगलुरु ₹1,38,300 ₹1,50,900 कोलकाता ₹1,38,300 ₹1,50,900   International Market में भी टूटी सोने और चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी सोने और चांदी की कीमत भारी दबाव में है। स्पॉट गोल्ड की कीमत 8.25 प्रतिशत गिरकर 4,879 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई, यानी करीब 438.80 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, कॉमेक्स (COMEX) पर सोने की कीमत में कमजोरी जारी रही और चांदी का भाव 25.50 प्रतिशत टूटकर 85.250 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।   निवेशकों के लिए क्या संकेत देती है सोने और चांदी की कीमत? विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज़ गिरावट के बाद बाज़ार में अस्थिरता (volatility) बनी रह सकती है। अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, जबकि दीर्घकालिक निवेशक फिलहाल स्थिरता का इंतज़ार कर सकते हैं। आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि सोने और चांदी की कीमत किस दिशा में आगे बढ़ेगी।  निवेश से पहले ताज़ा रेट, टैक्स और जोखिम कारकों का आकलन ज़रूर करें, क्योंकि मौजूदा हालात में कीमत तेज़ी से बदल सकती है    सोने और चांदी की कीमत में गिरावट: बबल फूटा या सिर्फ़ सुधार? सोने और चांदी की कीमत में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या यह बुलियन बाज़ार में बबल फूटने का संकेत है या फिर यह सिर्फ़ एक तेज़ लेकिन अस्थायी करेक्शन है। पिछले कुछ वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेज़ी देखी गई थी, खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं, युद्ध जैसे हालात और महँगाई के डर के बीच निवेशकों ने इन्हें सुरक्षित निवेश के रूप में अपनाया। इसी वजह से सोने और चांदी की कीमत अपने औसत स्तर से काफी ऊपर चली गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट का बड़ा कारण अत्यधिक सट्टेबाज़ी और मुनाफावसूली है। जब कीमतें बहुत तेज़ी से ऊपर जाती हैं, तो एक स्तर पर निवेशक मुनाफा निकालने लगते हैं, जिससे अचानक तेज़ गिरावट देखने को मिलती है। इस नज़रिये से देखा जाए तो सोने और चांदी की कीमत में यह गिरावट एक तकनीकी करेक्शन भी हो सकती है, न कि पूरी तरह बबल फूटने की स्थिति। दूसरी अहम वजह वैश्विक आर्थिक माहौल में आया बदलाव है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर बदला हुआ रुख़ और जोखिम भरे निवेशों की ओर बढ़ता झुकाव इन सभी ने सोने और चांदी की कीमत पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मज़बूत होता है, तो सोने जैसी परिसंपत्तियाँ कम आकर्षक हो जाती हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आती है। यह संकेत देता है कि यह गिरावट नीतिगत और आर्थिक बदलावों से प्रेरित हो सकती है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि बुलियन बाज़ार में बबल पूरी तरह फूट चुका है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो सोने और चांदी की कीमत में तेज़ गिरावट के बाद अक्सर स्थिरता और धीरे-धीरे रिकवरी भी देखने को मिली है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह गिरावट जोखिम के साथ-साथ अवसर भी हो सकती है, बशर्ते वैश्विक हालात अचानक और ज़्यादा न बिगड़ें। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह इशारा करते हैं कि सोने और चांदी की कीमत में आई यह गिरावट फिलहाल एक गंभीर लेकिन अस्थायी करेक्शन लगती है, न कि पूरी तरह बबल फूटने का संकेत। आने वाले दिनों में बाज़ार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, डॉलर और ब्याज दरें किस तरह का रुख़ अपनाती हैं।   Frequently Asked Questions 1 क्या सोने और चांदी की कीमत में आई गिरावट बबल फूटने का संकेत है? उत्तर: फिलहाल विशेषज्ञ इसे पूरी तरह बबल फूटना नहीं मान रहे हैं। अधिकतर विश्लेषकों के अनुसार यह तेज़ी के बाद आया एक मजबूत करेक्शन है, जो बाज़ार को संतुलित करता है। 2 सोने और चांदी की कीमत में इतनी तेज़ गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है? उत्तर: डॉलर की मजबूती, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदला रुख़ और निवेशकों की भारी मुनाफावसूली सोने और चांदी की कीमत में गिरावट की प्रमुख वजहें हैं। 3 क्या सोने और चांदी की कीमत में और गिरावट आ सकती है? उत्तर: अल्पकाल में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन दीर्घकाल में सोने और चांदी की कीमत वैश्विक आर्थिक स्थिरता और महँगाई के रुख़ पर निर्भर करेगी। 4 क्या मौजूदा गिरावट के दौरान सोना या चांदी खरीदना सही रहेगा? उत्तर: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने और चांदी की कीमत में आई गिरावट एक अवसर हो सकती है, लेकिन निवेश से पहले जोखिम और बाज़ार की स्थिरता का आकलन ज़रूरी है। 5 भविष्य में सोने और चांदी की कीमत किन कारकों से तय होगी? उत्तर: डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियाँ, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएँ और महँगाई का स्तर आगे सोने और चांदी की कीमत की दिशा तय करेंगे।

    अमेरिका पर ईरान की चेतावनी: जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं होगी, मध्य पूर्व संघर्ष क्यों खतरनाक मोड़ पर

    तेहरान ने एक बार फिर Iran retaliation warning जारी कर दी है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हमले का ईरान की जवाबी कार्रवाई “सीमित” तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक और गंभीर होगा। यह चेतावनी ईरान अमेरिका तनाव के सबसे कड़े मोड़ पर आई है और विशेषज्ञों को विश्वास है कि इससे मध्य पूर्व संघर्ष की जटिलता और गहराई बढ़ सकती है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अमेरिका किसी प्रकार का हमला करता है चाहे वह छोटा हो या बड़ा  Iran retaliation warning के तहत उसका जवाब बहुत तेज़ और व्यापक होगा। वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी सैन्य आक्रमण को वे “पूरी जंग” मानेंगे, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा और बढ़ जाता है।    ईरान ने अमेरिका को चेतावनी क्यों दी? ईरान की ओर से Iran retaliation warning की पृष्ठभूमि में अमेरिका ईरान टकराव की हालिया घटनाएँ हैं, जिसमें अमेरिका ने अपने सैन्य समूह को मध्य पूर्व में तैनात कर दिया है और खुले तौर पर बातचीत के साथ-साथ संभवत: military action का हवाला भी दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनियों और क्षेत्र में अमेरिकी फोर्सेस की मौजूदगी के जवाब में, ईरान ने दोबारा चेतावनी दी है कि उसकी ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल प्रतिकार तक सीमित नहीं रहेगी।  ईरान की यह प्रतिक्रिया खुद ईरान के लिए सुरक्षा का दावा है, लेकिन यह मध्य पूर्व संघर्ष में पहले से मौजूद अस्थिरता को और बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चेतावनी दरअसल अमेरिका को यह संकेत देने की भी कोशिश है कि किसी भी तरह के हमले का परिणाम controllable escalation से आगे जा सकता है।   अमेरिका की सैन्य तैयारी और क्षेत्रीय स्ट्रैटेजी संयुक्त बयान और सैन्य विश्लेषण बताते हैं कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। विमान वाहक USS अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और लड़ाकू विमान Iran retaliation warning के बीच क्षेत्र में तैनात हैं ताकि किसी भी संभावित हमले का जवाब देने की क्षमता मौजूद रहे।  ईरान की सेना ने भी संकेत दिया है कि उसकी ईरान सैन्य प्रतिक्रिया तत्काल और निर्णायक होगी। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी भी प्रकार का आक्रमण होता है, तो वे उसको “पूरी जंग” मानेंगे और Iran retaliation warning के तहत निर्णायक जवाब देंगे।    मध्य पूर्व में प्रॉक्सी युद्ध और रणनीतिक गंभीरता मध्य पूर्व संघर्ष में अब केवल दो देशों की बात नहीं बची है। ईरान समर्थित समूह और वैश्विक ताक़तों के बीच की खींचतान ने इसे proxy war in Middle East में बदल दिया है। इस संघर्ष में सीधी लड़ाई के बजाय अप्रत्यक्ष दबाव और समर्थित गुटों के ज़रिये Iran retaliation warning की गंभीरता और बढ़ती है। यह प्रॉक्सी रणनीति, जहां ईरान अपने प्रभाव को अप्रत्यक्ष तरीक़े से बनाये रखता है, अमेरिका के लिए और अधिक चुनौती खड़ी कर सकती है। इसी वजह से विश्लेषक कहते हैं कि केवल किसी सीमित हमले का जवाब देना अब संभव नहीं है इसी पर ईरान बार-बार ज़ोर दे रहा है कि उसकी ईरान की जवाबी कार्रवाई वैश्विक स्तर पर असर दिखा सकती है।   क्या ईरान अमेरिका युद्ध की आशंका बढ़ रही है? यह कहना जल्दबाज़ी होगा कि इलाक़ाई तनाव सीधे “युद्ध” में बदल जाएगा, लेकिन ईरान अमेरिका तनाव के बीच यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि कोई भी बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव को और गहरा करेगा। अगर दोनों पक्षों के बीच miscalculation होती है, तो ईरान अमेरिका युद्ध की आशंका वास्तविक हो सकती है। यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व संघर्ष के लिये खतरा है, बल्कि इससे तेल की कीमतों पर असर और वैश्विक सुरक्षा संकट की संभावना भी बढ़ सकती है क्योंकि क्षेत्र तेल और ऊर्जा मार्गों का केंद्र है और किसी भी टकराव से वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल हो सकती है।   अमेरिका का पक्ष: दबाव नीति, सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक संतुलन अमेरिका के नज़रिए से देखा जाए तो मौजूदा ईरान अमेरिका तनाव केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव की नीति का हिस्सा है। वॉशिंगटन यह मानता है कि मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर ही वह ईरान की बदले की नीति को नियंत्रित कर सकता है। अमेरिकी युद्धपोतों और विमानवाहक पोतों की तैनाती यह संदेश देने के लिए है कि यदि हालात बिगड़े, तो अमेरिका ईरान टकराव में वह पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, अमेरिका यह भी समझता है कि सीधा टकराव मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ा सकता है और तेल की कीमतों पर असर के ज़रिये वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकता है। इसी वजह से अमेरिका एक तरफ़ सैन्य शक्ति दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ़ कूटनीति के रास्ते खुले रखने की बात भी कर रहा है, ताकि यह संकट एक बड़े वैश्विक सुरक्षा संकट में न बदल जाए।   ईरान का पक्ष: संप्रभुता, आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी ईरान की ओर से देखा जाए तो अमेरिका पर ईरान की चेतावनी सीधे उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता और आत्मसम्मान से जुड़ी हुई है। तेहरान का साफ कहना है कि किसी भी अमेरिका के हमले पर ईरान की प्रतिक्रिया केवल सीमित नहीं होगी, बल्कि उसकी ईरान की जवाबी कार्रवाई व्यापक और निर्णायक होगी। यही वजह है कि Iran retaliation warning को बार-बार दोहराया जा रहा है, ताकि अमेरिका को यह स्पष्ट संदेश मिल सके कि दबाव की नीति अब स्वीकार्य नहीं है। ईरान का तर्क है कि उसकी ईरान सैन्य प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत आत्मरक्षा का अधिकार है और यदि टकराव बढ़ता है, तो मध्य पूर्व में प्रॉक्सी युद्ध और तेज़ हो सकता है। तेहरान मानता है कि अगर अमेरिका ने सीमाएँ लांघीं, तो ईरान अमेरिका युद्ध की आशंका सिर्फ़ अटकल नहीं, बल्कि हकीकत बन सकती है जिसका असर पूरे मध्य पूर्व संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संतुलन पर पड़ेगा।   निष्कर्ष: जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं, खतरा व्यापक ईरान की तरफ़ से की गई Iran retaliation warning यह स्पष्ट संदेश देती है कि किसी भी आक्रमण का जवाब केवल प्रतिकार भर नहीं होगा बल्कि पूरे क्षेत्र और संभावित रूप से दुनिया भर के भू-राजनीतिक संतुलन पर असर छोड़ सकता है। यदि अमेरिका हमले जैसे कदम उठाता है, तो ईरान की ईरान की जवाबी कार्रवाई इत्मिनान से नहीं बल्कि निर्णायक जवाब के रूप में सामने आ सकती है। इसी उलझते हुए मध्य पूर्व संघर्ष की अनिश्चितता ने वैश्विक सुरक्षा समुदाय को एक बार फिर सतर्क कर दिया है।   Frequently Asked Questions (FAQ) Q1: Iran retaliation warning का मतलब क्या है?उत्तर: इसका मतलब है कि ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो उसकी जवाबी कार्रवाई सिर्फ़ सीमित प्रतिकार तक नहीं रहेगी, बल्कि व्यापक और निर्णायक होगी। Q2: क्या अमेरिका ईरान युद्ध की आशंका वास्तविक है?उत्तर: फिलहाल सीधी लड़ाई की संभावना कम है, लेकिन escalating retaliation warnings और military buildup के कारण ईरान अमेरिका युद्ध की आशंका बन सकती है। Q3: इस तनाव से तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?उत्तर: क्षेत्रीय अस्थिरता से तेल की कीमतों पर असर साफ़ दिख सकता है क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया के ऊर्जा मार्गों में अहम है। Q4: क्या international security crisis हो सकता है?उत्तर: अगर Iran retaliation warning वास्तविक हमले तक पहुंचती है, तो यह एक वैश्विक सुरक्षा संकट का रूप ले सकता है।  

    सायकोलॉजीकल फर्स्ट एड कार्यशाला का आयोजन

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय के सेंटर फॉर काउसलिंग एण्ड गाईडेंस द्वारा मनोविज्ञान विभाग एवं जॉयफुल हेवन के समन्वित सौजन्य से ‘‘सायकोलॉजीकल फर्स्ट एड’’ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता रूचिका बदरसेरा, उनके सहयोगी दिपेन्द्र शेखावत एवं कांता जाखड़ ने छात्राओं को सायकोलॉजीकल फर्स्ट एड के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। महाविद्यालय प्राचार्य, डॉ. सीमा अग्रवाल, ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर छात्राओं को प्रोत्साहित किया एवं उनका मनोबल बढ़ाया। कार्यशाला के अतंर्गत लगभग 87 छात्राओं ने उक्त कार्यशाला में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। स्वागत वक्तव्य विभाग से सोना मिश्रा द्वारा दिया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. शुचि चौधरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।  

    अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वस्तरीय विशेषज्ञों ने दी सतत विकास की राह

    जयपुर। सेंट जेवियर्स कॉलेज जयपुर में 30 जनवरी 2026 को आईसीएसएसआर प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय ट्रांसडिसिप्लिनरी सम्मेलन “पीपल, प्लैनेट एंड प्रोस्पेरिटी: नेविगेटिंग पाथवेज़ टू ए सस्टेनेबल फ्यूचर” का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष  अरुण चतुर्वेदी मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. सौदामिनी दास (इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ) तथा मुख्य वक्ता प्रो. विभा अरोड़ा (आईआईटी दिल्ली) ने सतत विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो. मैनफ्रेड मैक्स बर्गमैन (यूनिवर्सिटी ऑफ बेसल, स्विट्जरलैंड) ने “ट्रांसडिसिप्लिनरी रिसर्च” पर कार्यशाला ली, जिसकी अध्यक्षता डॉ. रश्मि बरुआ ने की। “प्रॉस्पेरस इकोलॉजीज़” पैनल में प्रो. विभा अरोड़ा, प्रो. सौदामिनी दास और प्रो. शेलजा के. जुनेजा ने विचार रखे, सत्र का संचालन डॉ. श्रुति रावल ने किया। समानांतर सत्रों में प्रो. मोहन प्रसाद सिंह (ट्रैक 1), डॉ. रश्मि बरुआ (ट्रैक 2), डॉ. शहनवाज़ आलम (ट्रैक 3) की अध्यक्षता प्रो. रेखा सक्सेना ने की। ट्रैक 4 में प्रो. सेदा यिलदिरिम (तुर्की) के सत्र की अध्यक्षता प्रो. कृष्णा गुप्ता ने की। साहित्यिक सत्रों में डॉ. मीनाक्षी जैन और डॉ. अरुण सिंह तथा मनोविज्ञान सत्र में प्रो. विश्वा चौधरी ने अध्यक्षता की। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों की सक्रिय भागीदारी रही।

    दो दिवसीय अर्न्तराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन: तकनीकी और नावाचारो के साथ सतत विकास पर हुआ मंथन

    सुबोध पी जी महिला महाविद्यालय रामबाग जयपुर में दो दिवसीय इन्टरनेशनल मल्टीडिसिप्लिनरी कॉन्फ्रेंस "इन्नोवेशन एंड ट्रांसफार्मेशन इन इमरजिंग टेक्नोलॉजीज, रिसर्च एंड सस्टेनबल डवलपमेंट" का सफल आयोजन हुआ l   समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ मनीषा अरोडा, कमिश्नर डोमेस्टिक एंड ओवरसीज राजस्थानी अफेयर्स एवं विशिष्ट अतिथि प्रो महेश शर्मा वाईस प्रेसिडेंट आई एस सी बी, प्रबंध निदेशक प्लांट्स मेड लबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड तथा कैप्टन शशि किरण,मुख्य जनसंपर्क अधिकारी उत्तर-पश्चिम रेलवे एवं अन्य अतिथि प्रोफ़ पीसी माली, डॉ घनश्याम कच्छवाह उपस्थित रहे l   कॉन्फ्रेंस के तीसरे तकनीकी सत्र में निधि सोढाणी, सीइओ एंड फाउंडर लेक्सकॉम्प ग्लोबल कैलिफोरनिया प्रोफ विनोद भारद्वाज, केंद्रिय विश्व विद्यालय सागर की अध्यक्षता में डॉ ऋतुजा शर्मा वनस्थली विधापीठ अपराधों से जुड़े क़ानूनो एवं मानवधिकारो पर प्रकाश डाला वही डॉ रोहित जैन, राजस्थान विश्वविद्यालय नें सोशल मीडिया के समाज पर बढ़ते प्रभावो को रेखांकित करते हुए हमारी संस्कृति को अक्षुण रखने हेतु इसके विवेक पूर्ण उपयोग की वकालत की l इस सत्र में लगभग 30 शोधपत्रों का वाचन हुआ l प्रोफ़ वाणी भटनागर, डिजिटल-वेब स्टर्टजिस्ट, टैक्सस यूनाइटेड स्टेट एवं अनुराग लाल, ग्लोबल हेड, बिजनिस डॉवलपमेंट, ताईवान की अध्यक्षता में कृत्रिम बुद्धिमता पर आयोजित चौथे तकनीकी सत्र में डॉ रमा सोलंकी, वरिष्ठ टीवी पत्रकार, टाइम्स नेटवर्क डॉ रेखा, नेशनल चुंग हसींग यूनिवर्सिटी टाइचूंग ताईवांन एवं डॉ पवनदीप बिंद्रा, फाइनेंस एक्सपर्ट एंड फ्रीलेंस ट्रेनर नें अपने वक्तव्यओं में सतर्कता के साथ कृत्रिम बुद्धिमिता के उपयोग की वकालत की l लगभग 28 प्रतिभागियों सबंधित विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सभी सत्रों के प्रतिभागियों को उत्कृष्ट शोध पत्रों एवं पोस्टर प्रस्तुति के लिय पुरुस्कार दिए गए l समापन पर कॉन्फ्रेंस की चेयरपर्सन एवं प्राचार्या डॉ. स्वाति जैन ने आगन्तुक सभी अतिथियो,वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय भागीदारी हेतु धन्यवाद ज्ञापित कर आयोजन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला l इस अवसर पर सुबोध शिक्षा समिति के मानद सचिव एस एस बोथरा नें कॉन्फ्रेंस को बुद्धिजीवीयो का मंच बताकर इसकी धरातलीय उपयोगिता को अतिआवश्यक बताया l साथ ही इस आयोजन को सराहा lमहाविद्यालय के संयोजक डॉ राकेश हीरावत नें शोध, नवाचारो एवं कृत्रिम बुद्धिमता के दौर में भी संस्कृति को पोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया l आयोजन की संयोजिका डॉ रुचिका शर्मा एवं सह संयोजिका डॉ रेखा जैन नें इस आयोजन को सफल बनाने में सभी के प्रयासों की भूरी भूरी प्रशंशा की l डॉ तनु यादव, प्रीती ओझा, राहुल चौधरी एवं सृस्टि शर्मा नें प्रभावी मंच संचालन किया l

    राज्य स्तरीय करियर परामर्श कार्यशाला ने विद्यार्थियों के भविष्य को दिखाई दिशा

    — शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को लेकर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और मार्गदर्शन के नवाचार मॉडल जयपुर। 'आज के तेजी से बदलते दौर में करियर का चयन केवल अंक या परंपरा के आधार पर नहीं किया जा सकता। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और बदलते रोजगार परिदृश्य को समझते हुए उन्हें सही दिशा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।'    इसी सोच को साकार करने के लिए जयपुर के एक निजी होटल में 'व्यापक करियर मार्गदर्शन' विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप करियर मार्गदर्शन को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने की दिशा में ठोस सुझाव साझा किए। इस दौरान माई करियर ऐप की जानकारी भी दी गयी।   कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षा अधिकारी, शिक्षाविद्, करियर काउंसलर, शिक्षकगण और सफल हुए विद्या​र्थी शामिल हुए। पूरे दिन चले सत्रों में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि कैसे विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को आत्म-मूल्यांकन, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास से लैस किया जाए ताकि वे अपने भविष्य एवं रोजगार को लेकर सजग एवं सक्षम बन सकें। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने स्वयं के अनुभव भी साझा किए।   विषय विशेषज्ञों के मुताबिक, अब करियर विकल्प केवल डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, ग्रीन जॉब्स, स्टार्टअप, स्किल आधारित रोजगार और डिजिटल उद्यमिता जैसे नए क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। कार्यशाला में इन उभरते क्षेत्रों की जानकारी के साथ-साथ विद्यार्थियों को उनके अनुरूप तैयार करने की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि करियर मार्गदर्शन को केवल एक बार की गतिविधि नहीं, बल्कि सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाए।    अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक अशोक कुमार मीणा ने वर्तमान के बदलते परिदृश्य में विद्यालयों में प्रशिक्षित काउंसलर, शिक्षक मार्गदर्शक एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करियर मार्गदर्शन की सुविधा हर विद्यार्थी तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि करियर गाइडेंस के बिना बच्चों का समग्र विकास असंभव है। उन्होंने करियर बनाने से ज्यादा करियर जीने और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया।   इस अवसर पर उपायुक्त संतोष मीना ने कहा कि जब विद्यार्थी अपने भीतर की क्षमताओं को पहचानते हैं, तभी वे आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बन पाते हैं।   समापन सत्र में प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि राज्य में एक समन्वित और प्रभावी करियर मार्गदर्शन मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जिससे ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। यह कार्यशाला केवल संवाद का मंच नहीं थी, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने की एक मजबूत पहल बनकर उभरी।   इस दौरान राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् (व्यावसायिक शिक्षा) के उप निदेशक डालचंद्र गुप्ता, यूनिसेफ की एजुकेशन एक्सपर्ट श्रीमती अमृता एवं एजुकेशन ऑफिसर जितेंद्र शर्मा, अंतरंग फाउंडेशन की संयुक्त कार्यकारी निदेशक श्रीमती स्वाति मोहन सहित शिक्षा विशेषज्ञ, करियर काउंसलर एवं शिक्षक उपस्थित रहे। मॉडरेटर एक्सपर्ट श्रीमती प्राची वैंकटारमनन रहीं।

    उपमुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर 75 यूनिट रक्तदान

    बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में रक्तदान शिविर का आयोजन जयपुर। राजस्थान की माननीय उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के जन्मदिवस के अवसर पर बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ओम शिव भगवती सेवा संस्थान का सहयोग प्राप्त हुआ।   इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और 75 यूनिट रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक नई मिसाल कायम की।    शिविर का उद्देश्य समाज सेवा की भावना को बढ़ावा देना तथा अधिक से अधिक लोगों को इस मानवीय कार्य से जोड़ना रहा।    कार्यक्रम में स्वयं माननीय उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी ने शिरकत कर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। उनके जन्मदिवस के अवसर पर बियानी परिवार द्वारा उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया तथा केक कटिंग सेरेमनी का आयोजन भी किया गया।   शिविर में आयोजक संस्थान के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन व प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, ओम शिव भगवती सेवा संस्थान के हरफूल कुमावत एवं कमलेश देवी कुमावत, नर्सिंग सीनियर प्रिंसिपल डॉ. तारावती चौधरी, प्रिंसिपल डॉ. लथा पी.एस. तथा समस्त बियानी परिवार विशेष रूप से उपस्थित रहा।   इसके अतिरिक्त शिविर के दौरान रक्तदाताओं एवं आमजन के लिए नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त हुआ।

    धर्मयुद्ध: जब देवनारायण के प्रताप से डगमगा उठा बिसलदेव का सिंहासन

    अजमेर/खेड़ा चौसला। मालवा से वापसी के पश्चात भगवान देवनारायण द्वारा 'खेड़ा चौसला' गांव बसाने की सूचना ने तत्कालीन अजमेर की सियासत में हलचल पैदा कर दी। यह संघर्ष केवल भूमि का नहीं, बल्कि स्वाभिमान और दैवीय शक्ति के प्रदर्शन का गवाह बना, जिसमें अंततः अहंकार की हार और धर्म की विजय हुई। बिसलदेव का रोष और अनुचित मांग इतिहास के पन्नों के अनुसार, जब अजमेर के राजा बिसलदेव को यह ज्ञात हुआ कि देवनारायण ने उनकी अनुमति के बिना नया गांव बसा लिया है, तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने संदेशवाहक के जरिए देवनारायण को अपमानजनक संदेश भेजा। बिसलदेव का तर्क था कि देवनारायण उनके संरक्षण में बड़े हुए हैं, अतः उन्हें गांव बसाने का अधिकार नहीं था। साथ ही, उन्होंने मेहन्दू के पालन-पोषण और बटूर की थानेदारी के दौरान हुए खर्च की वसूली की भी अनुचित मांग रख दी। अजमेर आगमन: नीलागर की टाप और कांपता राजमहल बिसलदेव की चुनौती को स्वीकार करते हुए देवनारायण अपने विश्वस्त साथी छोछू भाट के साथ अजमेर की ओर कूच कर गए। लोक कथाओं के अनुसार, जैसे ही उनके शक्तिशाली अश्व 'नीलागर' ने अजमेर की धरा पर कदम रखा, पूरा शहर और राजमहल भूकंप की भांति कांपने लगा। देवनारायण ने अपनी शक्ति का परिचय देते हुए महल का ऊपरी कंगूरा ध्वस्त कर दिया, जिससे बिसलदेव के मन में भय का संचार हुआ। भैंसासुर दानव का वध और जोगणियों का आह्वान देवनारायण की शक्ति से घबराकर बिसलदेव ने अपने सबसे क्रूर अस्त्र 'भैंसासुर दानव' को उन्हें समाप्त करने के लिए भेजा। 11 वर्षीय बालक का रूप धरे देवनारायण और उस विशालकाय दानव के बीच भीषण युद्ध हुआ। देवनारायण ने अपनी तलवार के एक ही प्रहार से भैंसासुर का अंत कर दिया। किंतु, चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई थी। भैंसासुर के रक्त की बूंदें भूमि पर गिरते ही नए दानव उत्पन्न होने लगे। इस विकट परिस्थिति में देवनारायण ने अपनी अलौकिक शक्तियों का प्रयोग किया:  * उन्होंने अपने बाएं पैर के झटके से 64 जोगणियों और 52 भैरुओं को प्रकट किया।  * जोगणियों को आदेश दिया गया कि दानवों के रक्त की एक भी बूंद जमीन पर न गिरने पाए।  * खप्परों में रक्त झेलते ही दानवों का पुनर्जन्म रुक गया और देवनारायण ने समस्त असुर सेना का संहार कर दिया। गरड़ा घोड़ा और पत्थर के खंभे का विच्छेदन अपनी हार स्वीकार करने के बजाय बिसलदेव ने एक और चाल चली। उन्होंने देवनारायण को 'गरड़ा' नामक एक आदमखोर घोड़ा भेंट किया, जो किसी को भी अपनी पीठ पर नहीं बैठने देता था। देवनारायण ने न केवल उस अश्व को वश में किया, बल्कि उस पर सवार होकर एक विशाल पत्थर के खंभे को तलवार के वार से दो टुकड़ों में काट दिया। अहंकार का अंत और क्षमा याचना देवनारायण का यह अतुलनीय साहस और बल देखकर बिसलदेव का अहंकार चूर-चूर हो गया। उन्हें आभास हो गया कि वे किसी साधारण बालक से नहीं बल्कि साक्षात ईश्वर के अवतार से टकरा रहे हैं। भयभीत राजा दौड़ते हुए देवनारायण के चरणों में गिर पड़े और अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी। अंततः, बिसलदेव ने उन्हें अपार धन-संपत्ति भेंट की और ससम्मान विदा किया। निष्कर्ष: यह घटना सिद्ध करती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के सामने बड़े से बड़ा सत्ता बल भी नतमस्तक हो जाता है। आज भी राजस्थान की लोक संस्कृति में यह प्रसंग देवनारायण की महिमा के रूप में गाया जाता है।  

    ग्राम उत्थान शिविरों में अधिक से अधिक आमजन तक लाभ पहुंचाना हो सुनिश्चित - जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने अधिकारियों को दिये सख्त निर्देश

    - 12 विभागों की योजनाओं की मिल रही जानकारी, मौके पर जारी हो रही स्वीकृतियां जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों की अनुपालना में जयपुर जिले के प्रत्येक गिरदावर सर्किल में ग्राम उत्थान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उपलब्ध करवाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी जयपुर जिले में आयोजित हो रहे ग्राम उत्थान शिविरों की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं।   इसी क्रम में गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में ग्राम उत्थान शिविरों की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविरों में अधिक से अधिक आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का तत्काल लाभ प्रदान किया जाए।   जिला कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निस्तारण करते हुए पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही स्वीकृतियां जारी की जाएं, ताकि आमजन को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी सक्रिय रूप से उपस्थित रहें तथा योजनाओं की स्पष्ट, सरल और व्यवहारिक जानकारी आमजन को उपलब्ध कराएं। साथ ही शिविरों के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।   ग्राम उत्थान शिविरों के माध्यम से कृषि, पशुपालन, उद्योग, ऊर्जा, जल संसाधन, सहकारिता, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास सहित कुल 12 विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन को दी जा रही है तथा विभिन्न योजनाओं में पात्रता अनुसार स्वीकृतियां मौके पर ही जारी की जा रही हैं।   अतिरिक्त जिला कलक्टर मुकेश कुमार मूंड कहा कि ग्राम उत्थान शिविर राज्य सरकार की फ्लैगशिप पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। जिला प्रशासन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में गांव-गांव तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और ग्राम उत्थान शिविर इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रहे हैं।   समीक्षा बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर आशीष कुमार सहित कृषि, पशुपालन, उद्योग, ऊर्जा, जल संसाधन, सहकारिता, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान शिविरों की प्रगति की विभागवार समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए।   31 जनवरी को यहां आयोजित होंगे शिविर— सांगानेर के कलवाड़ा में, आमेर के बिलौची, रामपुरा डाबड़ी के सेवापुरा, बस्सी के देवगांव टहटडा में, चाकसू के शिवदासपुरा एवं ठिकरिया गुजरान में, माधोराजपुरा के चित्तौड़ा में, चौमूं के सिंगोदखुद में, शाहपुरा में मनोहरपुर, सांभरलेक के सिनोदिया में, जमवारामगढ़ के भानपुरा कलां एवं नीमला में, किशनगढ़ रेनवाल के बाघावास, दूदू के मरवा में, मौजमाबाद के धमाणा में, फागी के चौरू में, जोबनेर के हिंगोनिया में ग्राम उत्थान शिविर का आयोजन किया जाएगा।   1 फरवरी को यहां आयोजित होंगे शिविर— सांगानेर के बगरू में, रामपुरा डाबड़ी के जालसू में, बस्सी के बांसखोह में, चाकसू के छांदेलकलां देहलाला में, चौमूं के सामोद एवं नांगल भरड़ा में, शाहपुरा में खोरालाडखानी, सांभरलेक के हिरनोदा में, जमवारामगढ़ के ताला एवं धूलारावजी, किशनगढ़ रेनवाल के बधाल में, दूदू के रहलाना, मौजमाबाद के बोराज, फागी के नगरपालिका परिसर फागी में, जोबनेर के करणसर में ग्राम उत्थान शिविर का आयोजन किया जाएगा।   शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सहित संबंधित विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। शिविरों के माध्यम से कृषकों, पशुपालकों एवं ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी तथा पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही स्वीकृतियां जारी की जा रही है।   कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा तारबंदी, डिग्गी, पाइपलाइन, फार्म पॉण्ड, फव्वारा एवं ड्रिप, प्लास्टिक मल्च, सौर पंप संयंत्र की स्वीकृतियां, बैलों से खेती करने पर 30 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि, फसल बीमा एवं एमएसपी की जानकारी, आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, सोलर पंप एवं पॉलीहाउस के आवेदन तैयार करने सहित बीज एवं मिनी किट वितरण का सत्यापन किया जा रहा है।   कृषि विपणन विभाग द्वारा पीएमएफएमई के आवेदन तैयार करना, मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के आवेदनों का निस्तारण तथा किसान विश्राम स्थल निर्माण हेतु प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सहकारिता विभाग द्वारा मुख्यमंत्री किसान निधि का डीबीटी, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, एनसीओएल एवं एनसीईएल सदस्यता, नवीन गोदाम निर्माण, सहकारी बैंक खाते, स्वयं सहायता समूहों के ऋण, 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना एवं कस्टम हायरिंग सेंटर से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।   पशुपालन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना अंतर्गत पंजीकरण, पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, पशु आहार एवं खनिज मिश्रण वितरण तथा गौशाला विकास योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।   डेयरी (आरसीडीएफ) विभाग द्वारा पीडीसीएस/डीसीएस पंजीयन, नवीन सदस्यता, सरस बूथ एवं मार्ट आवंटन तथा सहकारी ऋण से संबंधित कार्य किए जाएंगे। मत्स्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रचार-प्रसार एवं फार्म पॉण्ड में मछली पालन की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।   ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत गृह प्रवेश एवं चाबी सुपुर्दगी, वीबी-ग्राम-जी अभियान तथा दीनदयाल उपाध्याय योजना के सर्वे कार्य पूर्ण किए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा एसडीआरएफ की शेष अनुदान राशि का डीबीटी, उद्योग विभाग द्वारा युवा स्वरोजगार योजनाओं के आवेदन तथा जल संसाधन विभाग द्वारा डब्ल्यूयूए को सक्रिय करने, वंदे गंगा संरक्षण अभियान एवं नहरों की मरम्मत आवश्यकताओं का चिन्हीकरण किया जाएगा। ऊर्जा विभाग द्वारा पीएम सूर्य घर योजना अंतर्गत पंजीकरण किए जा रहे हैं।

    मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई— 43 हजार लीटर घी किया सीज

    —फर्म निर्धारित पते के स्थान पर अन्य जगह कर रही थी कारोबार —पूर्व में भी ​घी का नमूना पाया गया था अनसेफ जयपुर। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में मिलावट के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरूवार को खाद्य सुरक्षा विभाग ने 'शुद्ध आहार—मिलावट पर वार' अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 43 हजार लीटर से अधिक घी मिलावट के संदेह पर जब्त किया।    खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी शुभमंगला ने बताया कि जयपुर में श्याम विहार कॉलोनी, माचेड़ा स्थित फर्म गिरधर मिल्क फूड प्रोडक्ट भोग विनायक ब्राण्ड से घी का उत्पादन करती है। प्रतापगढ़ जिले में भोग विनायक ब्राण्ड घी के नमूने जांच रिपोर्ट में अनसेफ पाये गये थे। इस पर अतिरिक्त आयुक्त भगवत सिंह एवं अभिहित अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल ने मैसर्स गिरधर मिल्क फूड प्रोडक्ट, माचेडा, जयपुर पर पहुंचकर जांच की तो पाया की फर्म का जो पता खाद्य अनुज्ञा पत्र एवं कार्यालय रिकॉर्ड में है, वहां पर नहीं होकर चोरी-​छिपे अन्य स्थान से घी का कारोबार कर रही थी, जो खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की पूर्ण अवहेलना है।    खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल ने मौके पर पाया कि इस संस्थान पर एक अन्य फर्म जिसका नाम श्री श्याम मिल्क फूड प्रोडक्ट है भी संचालित हो रही है। दोनों फर्मों के तीन गोदामों में भोग विनायक ब्राण्ड का 9065 लीटर घी विभिन्न पैकिंग साइज में, हरियाणा क्रीम ब्राण्ड का 17741 लीटर एवं नक्ष डेयरी ब्राण्ड का 16617 लीटर घी विभिन्न पैकिंग साइज में पाया गया। सभी ब्राण्ड के नमूने लेने के बाद इस 43 हजार 421 लीटर घी को मौके पर सीज किया गया। नमूनों की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अन्तर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।    अतिरिक्त आयुक्त ने बताया कि पूर्व में केंद्रीय प्रयोगशाला जयपुर की रिपोर्ट में भोग ​विनायक ब्राण्ड घी का नमूना जांच में अनसेफ पाया गया था। इस पर प्रदेशभर में बाजार से इस घी को तत्काल वापस लिए जाने के लिए आदेश जारी किए गए थे। फर्म के खिलाफ मिली अनियमितताओं के दृष्टिगत खाद्य अनुज्ञा पत्र निरस्त किये जाने की कार्रवाई भी की जा रही है।