Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Long Island City

    -0.79°C

    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    पाताल लोक तक गूंजा देवनारायण का पराक्रम: राक्षसों का संहार कर नाग कन्या और दैत्य कन्या से रचाया विवाह

    भोपा की ढाणी बेगस स्थित श्री देवनारायण मंदिर  देवधाम के महा फड़ वाचक  बिरदी चंद कुमावत ने साझा की देव अवतार की अद्भुत गाथा जयपुर/बेगस। लोक देवता देवनारायण के जीवन से जुड़ी अलौकिक घटनाएं आज भी समाज के लिए श्रद्धा और विस्मय का केंद्र हैं। बेगस स्थित भोपा की ढाणी में प्रतिष्ठित देवधाम श्री देवनारायण मंदिर के महा फड़ वाचक भोपा जी बिरदी चंद कुमावत ने देवनारायण के पाताल लोक प्रस्थान और वहां हुए उनके विवाह प्रसंगों पर प्रकाश डाला है। यह गाथा बताती है कि किस तरह नारायण ने राक्षसी शक्तियों का अंत कर धर्म की स्थापना की और भोपा संस्कृति को उसके प्रतीक चिन्ह प्रदान किए। गढ़ गाजणा का युद्ध और 64 जोगणियों का आह्वान  बिरदी चंद कुमावत के अनुसार, देवनारायण का राक्षसों के साथ भीषण युद्ध गढ़ गाजणा के द्वार पर हुआ था। वहां स्थिति ऐसी थी कि एक राक्षस को मारने पर उसके रक्त की बूंदों से कई नए राक्षस जन्म ले रहे थे। इस संकट को भांपते हुए नारायण ने अपने दाहिने पैर से 64 जोगणियों और 52 भैरुओं को प्रकट किया। उन्होंने आदेश दिया कि राक्षसों के रक्त की एक भी बूंद धरती पर नहीं गिरनी चाहिए। जोगणियों ने रक्त का पान किया और नारायण ने राक्षसों का समूल नाश कर दिया। पाताल लोक प्रस्थान और शेषनाग से मिलन युद्ध के अंत में गज दन्त और नीम दन्त नामक दो राक्षस साढ़ू माता की घोड़ी लेकर पाताल लोक की खाई में छिप गए। उनका पीछा करते हुए नारायण भी पाताल लोक जा पहुंचे। वहां पृथ्वी को धारण करने वाले शेषनाग आराम कर रहे थे, जो घोड़े के टापों की आवाज से जागृत हुए। नारायण ने जब राक्षसों के बारे में पूछा, तो शेषनाग ने एक शर्त रखी। उन्होंने अपनी कुंवारी नाग कन्या के विवाह का प्रस्ताव नारायण के सम्मुख रखा। नाग कन्या से विवाह और भोपा समाज को 'सेली' की सौगात लोक मान्यताओं के अनुसार, देवनारायण ने नाग कन्या के साथ विवाह स्वीकार किया। विवाह का पहला फेरा पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी चंवरी से उठकर एक फटकार मारी, जिससे 'सेली' (काली डोरी) का निर्माण हुआ। नारायण ने यह सेली जोगी भोपा को प्रदान की। यही कारण है कि आज भी देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपे अपने गले में काली डोरी (सेली) धारण करते हैं, जो उनके आध्यात्मिक पद का प्रतीक है। दैत्य कन्या चीमटी बाई से विवाह और फड़ का लकड़ी प्रतीक शेषनाग से रास्ता जानकर नारायण पुनः गढ़ गाजणा पहुंचे और दैत्यराज पर प्रहार किया। भयभीत होकर गज दन्त और नीम दन्त ने साढ़ू माता की काली घोड़ी वापस कर दी और अपनी राजकुमारी चीमटी बाई (दैत्य कन्या) से विवाह का प्रस्ताव रखा। नारायण ने दूसरा विवाह चीमटी बाई से किया। इस अवसर पर दूसरे फेरे के बाद उन्होंने फटकार मारकर एक लकड़ी तैयार की और भोपा को दी। यह लकड़ी आज भी फड़ बांचते समय दृश्यों को दर्शाने (परिचय देने) के काम आती है। आस्था का केंद्र: देवधाम बेगस  बिरदी चंद कुमावत ने बताया कि देवनारायण के ये प्रसंग केवल कथाएं नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित परंपराएं हैं जिन्हें भोपा समाज सदियों से सहेज रहा है। बेगस स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां भक्त नारायण के इन चमत्कारों और उनके द्वारा दी गई सीखों को याद करते हैं। 'जय देव धणी' और 'जय सवाई भोज' के उद्घोष के साथ श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें मांगते हैं।  

    जैन आचार्य लोकेशजी द्वारा आयोजित मोरारीबापू राम कथा में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर आए

      जैन आचार्य लोकेशजी द्वारा आयोजित मोरारीबापू राम कथा में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर आए   श्री राम धर्म रूप हैं, वो नैतिकता, आदर्श, जीवन और न्याय के प्रतीक है - पूज्य श्री मोरारी बापू   सनातन धर्म किसी एक पंथ का नाम नहीं, बल्कि एक शाश्वत सिद्धांत है – आचार्य लोकेश   भारत से विश्व को शांति सद्भावना का संदेश-विजेंद्र गुप्ता स्पीकर, दिल्ली विधानसभा   नई दिल्ली: भारत मंडपम में मोरारी बापू रामकथा के द्वितीय दिवस पर अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने मुख्य अतिथि  विजेंद्र गुप्ता, स्पीकर, दिल्ली विधानसभा ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। विश्व शांति मिशन के लिए भारत मंडपम के मल्टीपर्पस हाल में 17-25 जनवरी तक नौ दिवसीय रामकथा में देश विदेश से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आयोजक जैन आचार्य लोकेश ने कहा सनातन धर्म किसी एक पंथ का नाम नहीं, बल्कि एक शाश्वत सिद्धांत है।    मोरारी बापू ने कहा कि ‘राम विग्रहवान धर्मः, राम स्वयं धर्म के साकार स्वरूप हैं, जो नैतिकता, आदर्श, जीवन और न्याय के प्रतीक है। उनका जीवन 'राजधर्म' और 'लोकधर्म' के बीच संतुलन को दर्शाता है। सनातन धर्म सत्य, करुणा, सेवा, अहिंसा जैसे मूल सिद्धांतों पर केंद्रित हैं | धार्मिक मान्यताओं में ठहराव नहीं, बल्कि प्रगतिशील सोच और बहाव होना चाहिए। रामचरितमानस हर जीव के कल्याण के लिए है और इसके माध्यम से जीवन को समझना कि रामकथा का उद्देश्य है। विश्व शांति मिशन के लिए आयोजित इस कथा के मध्याम से जन जन में मानव धर्म का प्रचार हो यही इसकी सफलता है।   मुख्य अतिथि विजेंद्र गुप्ता, स्पीकर, दिल्ली विधानसभा ने कहा कि भारत भूमि केवल एक देश नहीं, बल्कि एक पवित्र आध्यात्मिक केंद्र है जहाँ वेद, उपनिषद, आगमों की रचना हुई, योग, ध्यान, आयुर्वेद जैसी ज्ञानधाराएँ विश्व को मिली। यह भूमि धार्मिक विविधता, शांति और सहिष्णुता का प्रतीक है, जहाँ सनातन धर्म के साथ-साथ कई अन्य धर्मों ने भी जड़ें जमाई हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में जैन आचार्य लोकेश द्वारा पूज्य मोरारी बापू कि रामकथा का आयोजन अनेकता में एकता का प्रतीक है। कथा के दूसरे दिन स्वामी शैंलद्र (ओशो के भाई) ने कहा कि राम सभी का मूल है।   विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेश ने कहा कि सनातन चेतना को जोड़ने वाली शक्ति हैं, जो सभी धर्मों हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध आदि को एक सूत्र में पिरोती है। भगवान महावीर के अहिंसा, शांति और सद्भावना के सिद्धांतों की आज विश्व को आवश्यकता है। युद्ध, हिंसा, असंतुलन से जूझ रहे विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भगवान महावीर दर्शन में मिलता है।   राम कथा में आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का परिवार भी शामिल हुआ। उनके बेटे नीरज सिंह और बहु ने कथा सुनी। इसके साथ भी भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू भी शामिल हुए।   विश्व शांति केंद्र मिशन के लिए भारत मंडपम में आयोजित रामकथा में 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का आनंद उठाया।  

    इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज के अजमेर चैप्टर के सत्र 2026 के लिए चुनाव हुए

    इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज के अजमेर चैप्टर के सत्र 2026 के लिए चुनाव हुए l संसथान की वर्तमान अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर ने बताया की प्रतिवर्ष जनवरी माह आने वाली नई कार्यकारणी का चुनाव किया जाता हैं l जिसमे अध्यक्ष सीएस सुनील कुमार शर्मा , उपाध्यक्ष सीएस मोनिका लालवानी ,सचिव सीएस प्रिंस शर्मा एवम कोषाध्यक्ष सीएस रोनक सोगानी को बनाया गया l निर्वाचन के बाद नवनिर्वाचित कार्यकारणी को वर्तमान अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर ने माल्यार्पण कर सम्मान किया l इस मौके पर अजमेर चैप्टर की अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर , पूर्व अध्यक्ष मुक्ता भंसाली एवं चैप्टर इंचार्ज  आनंद मिश्रा भी मौजूद रहे। नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने बताया कि मेंबर्स और स्टूडेंट्स के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम और सेमिनार आयोजित करेगे।        

    “द फूड विजार्ड शेफ – जेके मसाले प्रेज़ेंट्स द फूड विजार्ड शेफ प्रतियोगिता” का सफल आयोजन

    डंगायच स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट, जयपुर में भव्य रूप से “द फूड विजार्ड शेफ – जेके मसाले प्रेज़ेंट्स द फूड विजार्ड शेफ प्रतियोगिता” का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपने पाक-कौशल, रचनात्मकता एवं नवाचार का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का सम्मान समारोह (Felicitation Ceremony) शहर के प्रतिष्ठित होटल जयपुर मैरियट में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जयपुर एवं देश के कई नामी फाइव स्टार होटल्स के एग्जीक्यूटिव शेफ, जनरल मैनेजर्स, उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों तथा प्रतियोगिता के स्पॉन्सर्स की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा दंगायच ग्रुप से अतुल दंगायच एवम कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ ज्योति अरोड़ा एंड समस्त जूरी मेंबर्स के द्वारा की गई, जिसमें इंडिया इंटरनेशनल स्कूल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता ट्रॉफी अपने नाम की। इसके साथ ही फर्स्ट रनर-अप रावत स्कूल विवेक विहार, सेकंड रनर-अप वर्धमान स्कूल रही एवं विभिन्न विशेष कैटेगरी अवॉर्ड्स में भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावसायिक पाक कला की ओर प्रेरित करना, उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना तथा होटल एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग से उन्हें परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का समापन उत्साह, प्रेरणा एवं सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ।  

    वित्त पोषित विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधिमंडल फेडरेशन की हुई चर्चा

    आज रविवार को वित्त पोषित विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधिमंडल फेडरेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर सोमदेव, महासचिव, राजीव सक्सेना एवं संयोजक प्रोफेसर बी डी रावत के संयुक्त नेतृत्व में घनश्याम तिवारी सांसद के निवास स्थान पर मिला। घनश्याम तिवारी को शिष्ट मंडल ने विश्वविद्यालयों में व्याप्त पेंशन की समस्या के संदर्भ में विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किया। तिवारी ने त्वरित रूप से मुख्यमंत्री भजनलाल के मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से इस समस्या के संदर्भ में फोन पर बात की तथा शिष्ट मंडल को मिलने का समय मांगा। अरोड़ा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में 5:00 का समय दिया। अखिल अरोड़ा जी से शिष्ट मंडल ने मिलकर विश्वविद्यालयों में 1990 -91 से लागू पेंशन की समस्या के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा कर निर्णय करने की गुहार लगाई। अरोड़ा जी ने सार्थक हल निकालने का आश्वासन दिया।  प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं रूपा के अध्यक्ष प्रोफेसर हरिशंकर शर्मा एवं प्रोफेसर मधुसूदन शर्मा भी मौजूद रहे।

    देवनारायण का पाताल विजय अभियान: राक्षसों का संहार कर नाग कन्या और दैत्य पुत्री से रचाया विवाह

    गढ़ गाजणा के युद्ध से पाताल लोक तक गूंजा देव अवतार का प्रताप, भोपा संस्कृति के प्रतीकों का हुआ प्राकट्य राजस्थान। लोक संस्कृति के महानायक और विष्णु स्वरूप देवनारायण की गाथाएं शौर्य और अध्यात्म का अनूठा संगम हैं। उनके जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय गढ़ गाजणा का युद्ध और उसके पश्चात पाताल लोक में उनकी विजय से जुड़ा है। यह कथा न केवल उनके पराक्रम को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपा समाज के पारंपरिक प्रतीकों का जन्म हुआ। रक्तबीज सदृश राक्षसों का अंत और जोगणियों का आह्वान पौराणिक वृत्तांत के अनुसार, जब देवनारायण ने गढ़ गाजणा के बाहर राक्षसों का संहार प्रारंभ किया, तो एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई। किसी भी राक्षस को मारने पर उसके रक्त की बूंदें जमीन पर गिरते ही नए राक्षसों को जन्म दे रही थीं। इस मायावी संकट को देखते हुए देवनारायण ने अपने दाहिने पांव से 64 जोगणियों और 52 भैरुओं को प्रकट किया। उन्होंने आदेश दिया कि राक्षसों के रक्त की एक भी बूंद धरती का स्पर्श न करे। जोगणियों और भैरुओं ने समस्त रक्त का पान किया, जिससे राक्षसों का समूल नाश संभव हो सका। पाताल लोक प्रस्थान और शेषनाग से साक्षात्कार भयंकर युद्ध के अंत में गज दन्त और नीम दन्त नामक दो शेष राक्षस साडू माता की घोड़ी लेकर पाताल लोक की खाई में जा छिपे। उनका पीछा करते हुए देवनारायण भी पाताल लोक जा पहुंचे, जहां पृथ्वी को धारण करने वाले शेषनाग विश्राम कर रहे थे। देवनारायण के अश्व की टापों की गूँज से शेषनाग जागृत हुए। जब देवनारायण ने उनसे राक्षसों के विषय में पूछा, तो शेषनाग ने अपनी कुंवारी नाग कन्या के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे देवनारायण ने स्वीकार कर लिया। 'सेली' का रहस्य: जोगी भोपा को मिला वरदान नाग कन्या के साथ प्रथम फेरा पूर्ण करने के बाद, देवनारायण ने चंवरी से उठकर एक तीव्र फटकार मारी। इस अलौकिक क्रिया से 'सेली' (काली डोरी) का निर्माण हुआ, जिसे उन्होंने जोगी भोपा को प्रदान किया। यही कारण है कि आज भी देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपे परंपरा के अनुसार अपने गले में इस काली डोरी को धारण करते हैं। दैत्य कन्या चीमटी बाई और फड़ दर्शन की लकड़ी शेषनाग से मार्ग का ज्ञान प्राप्त कर देवनारायण पुनः गढ़ गाजणा पहुंचे और दैत्यराज की सेना पर आक्रमण किया। भयभीत होकर गज दन्त और नीम दन्त ने साडू माता की काली घोड़ी और किवाड़ लौटा दिए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी राजकुमारी चीमटी बाई (दैत्य कन्या) से विवाह का आग्रह किया। देवनारायण ने वहां दूसरा विवाह किया और दूसरे फेरे के बाद पुनः फटकार मारकर एक लकड़ी तैयार की। यह वही लकड़ी है जिसका उपयोग भोपा आज भी फड़ का परिचय देते समय दृश्यों को दर्शाने के लिए करते हैं। एक जीवंत परंपरा का आधार देवनारायण के ये प्रसंग केवल कथाएं नहीं हैं, बल्कि ये उस संस्कृति का आधार हैं जो सदियों से ग्रामीण अंचलों में रची-बसी है। पाताल लोक की इस विजय गाथा ने समाज को यह संदेश दिया कि अधर्म चाहे कितना भी गहरा क्यों न छिपा हो, नारायण का प्रताप उसे खोज निकालता है। आज भी 'जय देव धणी' के जयघोष के साथ भक्त इन चमत्कारों को याद करते हैं।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय: छात्रसंघ चुनावों पर बड़ी हलचल, हाईकोर्ट के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुलाई आपात बैठक

    चुनाव नहीं होने और भविष्य की कार्ययोजना पर मथेंगे छात्र प्रतिनिधि, वनस्पति शास्त्र विभाग में कल जुटेगा हुजूम जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति की रुकी हुई धड़कनों को फिर से बहाल करने की सुगगाहट तेज हो गई है। छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन अब हरकत में आया है। अधिष्ठाता छात्र कल्याण कार्यालय की ओर से एक आधिकारिक परिपत्र जारी कर छात्र प्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। न्यायालय के निर्देश और 'सिविल रिट पिटीशन' का हवाला विश्वविद्यालय द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: डी.एस.डब्ल्यू./2026/554) में स्पष्ट उल्लेख है कि SB Civil writ petition No.-11354/2025 और उससे जुड़ी अन्य याचिकाओं (11789/2025, 11800/2025, 13904/2025, 14689/2025) के संदर्भ में यह कदम उठाया गया है। न्यायालय ने "Grievances qua the non-conduct the student union elections" यानी छात्रसंघ चुनाव आयोजित न होने से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। बैठक का समय, स्थान और मुख्य एजेंडा राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर रामावतार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण संवाद के लिए 19 जनवरी 2026 की तारीख तय की है।  * समय: प्रातः 11:00 बजे।  * स्थान: सेमिनार भवन, वनस्पति शास्त्र विभाग (Botany Department), राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर।  * एजेंडा: बैठक का मुख्य विषय "छात्रसंघ चुनावों का गैर-आयोजन और प्रस्तावित आयोजन" रखा गया है। छात्र प्रतिनिधियों और अभ्यर्थियों की भागीदारी अनिवार्य अधिष्ठाता छात्र कल्याण की ओर से जारी इस आदेश में राजस्थान विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों और विभागों के अभ्यर्थियों, नियमित विद्यार्थियों, इच्छुक व्यक्तियों और व्यथित विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनाव की राह में आ रही बाधाओं और भविष्य में इनके आयोजन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी। क्या फिर बहाल होगा छात्र राजनीति का गौरव? पिछले काफी समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण कैंपस में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर विराम लगा हुआ है। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब छात्र नेताओं में एक नई उम्मीद जगी है। इस बैठक में होने वाले निर्णय यह तय करेंगे कि राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति का ऊँट किस करवट बैठेगा। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों को अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सूचित किया है ताकि चुनाव संबंधी शिकायतों का विधिवत निस्तारण किया जा सके। प्रशासनिक सतर्कता और आगामी कदम यह परिपत्र अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा 13 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित किया गया है। इसकी प्रतियां विश्वविद्यालय के सभी संबद्ध महाविद्यालयों और विभागों को भेज दी गई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जा सकती है, जो भविष्य में छात्रसंघ चुनावों की तिथि निर्धारित करने में मील का पत्थर साबित होगी।  

    साहित्य के अनुष्ठान से दशा व दिशा मिलती है -डॉ मंजू बाघमार

    संपर्क साहित्य संस्थान का आठवां वार्षिक उत्सव समारोहपूर्वक सम्पन्न जयपुर ।  राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ मंजू बाघमार ने कहा है क़ि साहित्य की सेवा एक अनूठा अनुष्ठान है जिससे हम सब लोगों को दशा और दिशा मिलती है।  उन्होंने संपर्क साहित्य संस्थान की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के तहत इस तरह के आयोजनों से उनमें एक शक्ति और साथ मिलता है।   डॉ मंजू जयपुर में सम्पर्क साहित्य संस्थान के 8 वे वार्षिकोत्सव समारोह को संबोधित कर रही थी । इस अवसर पर उन्होंने संस्थान को बधाई देते हुए संस्थान की नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी का स्वागत किया। आयोजन में देश के नामचीन 21 साहित्यकारों को सम्पर्क श्री सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर 7 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष रोजियम ग्रुप के चैयरमेन अर्पित जैन , हिन्दी प्रचार-प्रसार संस्थान अध्यक्ष डॉ. अखिल शुक्ला, शिक्षाविद डॉ ऋत्विज गौड़ संपर्क अध्यक्ष अनिल लढ़ा, महासचिव रेनू शब्दमुखर ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।  इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। मुख्य संरक्षक डॉ आरती भदोरिया ने स्वागत करते हुए सम्पर्क के सेव बेटी सेफ बेटी अभियान की जानकारी दी ।  महासचिव रेनू शब्दमुखर ने 8 वर्षी की साहित्यिक यात्रा की विस्तृत चर्चा की ।   विशिष्ट अतिथि डॉ. अखिल शुक्ला ने साहित्य आंदोलन को इसी तरह आगे बढ़ाने का आह्वान किया।  डॉ ऋत्विज गौड़ ने साहित्य व शिक्षा के समन्वय से ही आगे बढ़ने व नवाचार की बात रखी।  कार्यक्रम अध्यक्ष अर्पित जैन ने संस्थान की भूरी भूरी प्रशंशा करते हुए हर सम्भव सहायता का विश्वास दिलाया  कार्यक्रम का संचालन विजयलक्ष्मी जांगिड़ व सीमा वालिया ने किया ।   *पुस्तकों का विमोचन*    आयोजन के दौरान   लेखिका सुनिता त्रिपाठी ‘अजय’ की पुस्तकों सृष्टिमन भाग–2 और 3 एवं लड्डू गोपाल की पालकी, शालिनी शर्मा की पुस्तक आईना-ए-मोहब्बत, हर्षवर्धन पांडेय की पुस्तक उम्र 18 की व डॉ अनु चौधरी की चक्रा एस्ट्रोलॉजी के साथ ही रेनू शब्दमुखर के आगामी कविता संग्रह'प्रेम अनहद नाद' कवरपेज का विमोचन किया गया ।  

    भगवान विष्णु अवतार देवनारायण: राजस्थान से लेकर देशभर में फैला है आस्था का साम्राज्य, जानिए कहाँ-कहाँ हैं प्रमुख मंदिर

    राजस्थान से हरियाणा और मध्य प्रदेश तक गूंजता है 'जय देव' का उद्घोष, औषधियों के देवता के रूप में पूजती है दुनिया विशेष रिपोर्ट/ भीलवाड़ा. भारतीय लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना में देवनारायण का स्थान एक ऐसे महापुरुष और लोक देवता के रूप में है, जिन्हें स्वयं विष्णु का स्वरूप माना जाता है। विक्रम संवत 968 में अवतार लेने वाले देवनारायण ने न केवल समाज को संगठित किया, बल्कि आयुर्वेद और गौ-सेवा के माध्यम से लोक कल्याण की नई परिभाषा लिखी। आज उनके मंदिर केवल राजस्थान की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली सहित पूरे भारत में फैले हुए हैं। 1. मालासेरी डूंगरी: जहाँ कमल के फूल से अवतरित हुए भगवान भीलवाड़ा जिले के आसींद तहसील में स्थित मालासेरी डूंगरी को देवनारायण की अंतरराष्ट्रीय जन्मस्थली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साढ़ू माता की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने इसी स्थान पर कमल के फूल के रूप में अवतार लिया था। यहाँ चट्टान फट गई थी और साक्षात नारायण प्रकट हुए थे। यह स्थान आज करोड़ों भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। 2. सवाई भोज मंदिर (आसींद): शौर्य और भक्ति की गाथा आसींद में खारी नदी के तट पर स्थित सवाई भोज मंदिर देवनारायण के पिता और 24 बगड़ावतों के पराक्रम की याद दिलाता है। यहाँ देवनारायण के साथ उनके परिवार और घोड़े 'लीलाधर' की पूजा की जाती है। इस मंदिर की वास्तुकला और यहाँ का आध्यात्मिक परिवेश भक्तों को एक अलग ही शांति का अनुभव कराता है। 3. देवधाम जोधपुरिया (टोंक): आस्था का महाकुंभ टोंक जिले की निवाई तहसील में स्थित देवधाम जोधपुरिया भारतभर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ है। यहाँ माशी बांध के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ भाद्रपद शुक्ल सप्तमी पर आयोजित होने वाला मेला राजस्थान के सबसे बड़े ग्रामीण मेलों में से एक है, जहाँ देशभर से लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पहुँचते हैं। 4. देवमाली (ब्यावर): त्याग और तपस्या की तपोस्थली ब्यावर (अजमेर) के पास स्थित देवमाली गाँव को देवनारायण का निवास स्थान माना जाता है। इस गाँव की विशेषता यह है कि यहाँ के लोग आज भी कच्चा घर बनाकर रहते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि देवनारायण ने यहाँ पक्के घरों का त्याग करने का उपदेश दिया था। यहाँ के मंदिर में ईंटों की पूजा की जाती है, जो सादगी और भक्ति का प्रतीक है। 5. पुष्कर (अजमेर): पवित्र सरोवर और नारायण का संबंध अजमेर के पुष्कर तीर्थ से देवनारायण का गहरा नाता रहा है। कथाओं के अनुसार, देवनारायण ने पुष्कर सरोवर के तट पर कई महत्वपूर्ण कार्य किए और यहाँ के गऊ घाट पर विशेष पूजा-अर्चना की थी। पुष्कर क्षेत्र में स्थित देवनारायण मंदिर को प्राचीनता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 6. मध्य प्रदेश में विस्तार: मालवा और निमाड़ की श्रद्धा राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश वह राज्य है जहाँ देवनारायण के सबसे अधिक अनुयायी हैं। उज्जैन, मंदसौर, नीमच और इंदौर जैसे शहरों में देवनारायण के भव्य मंदिर स्थापित हैं। मालवा क्षेत्र में तो देवनारायण की 'फड़' बांचने की परंपरा सदियों पुरानी है, जहाँ भोपा-भोपी रातभर नारायण की गाथा सुनाते हैं। 7. हरियाणा और दिल्ली: राजधानी क्षेत्र में बढ़ती मान्यता गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों जैसे हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और नई दिल्ली के दक्षिणी हिस्सों में देवनारायण के कई नवनिर्मित और भव्य मंदिर हैं। ये मंदिर न केवल पूजा के केंद्र हैं, बल्कि समाज के शैक्षणिक और सामाजिक संवाद के मंच भी बन चुके हैं। 8. गुजरात में आस्था: द्वारका से सटे इलाकों में प्रभाव विष्णु अवतार होने के कारण गुजरात के यादव और गुर्जर समाज में भी देवनारायण के प्रति गहरी आस्था है। बनासकांठा और कच्छ के कुछ क्षेत्रों में देवनारायण के मंदिर मिलते हैं, जहाँ उन्हें कृष्ण के समान ही पूजा जाता है। 9. औषधियों के देवता: नीम और ईंटों का अनोखा पूजन देवनारायण के मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वहाँ अधिकांश स्थानों पर मूर्ति के स्थान पर ईंटों की पूजा की जाती है। उन्हें 'नीम का देवता' भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने नीम के पत्तों और गोमूत्र से असाध्य रोगों का इलाज किया था। आज भी उनके मंदिरों में नीम के पत्ते प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। 10. सामाजिक समरसता के प्रतीक: हर वर्ग की अटूट श्रद्धा देवनारायण ने अपने जीवनकाल में ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाया था। यही कारण है कि उनके मंदिरों के द्वार हर जाति और वर्ग के लिए खुले हैं। राजस्थान से शुरू हुई यह धार्मिक लहर अब पूरे भारत में एक सांस्कृतिक सेतु का काम कर रही है, जो लोगों को गौ-रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मानवता की सेवा से जोड़ती है। देवनारायण के मंदिर केवल पत्थर के ढांचे नहीं, बल्कि उस महान परंपरा के साक्षी हैं जहाँ ईश्वर ने जन-सामान्य के बीच रहकर धर्म की स्थापना की। मालासेरी से लेकर देश के कोने-कोने तक फैले ये मंदिर आज भी 'जय देवनारायण' के उद्घोष के साथ नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ रहे हैं।  

    राज्यपाल बागडे ने किया साई मंदिर का शुभारम्भ

    जयपुर/अजमेर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को पुष्कर स्थित साईदत्त विकास साईधाम मंदिर के विकास कार्यों का विधिवत पूजा अर्चना के साथ शुभारंभ किया। साईदत्त विकास साईधाम के संस्थापक विकास रूणवाल ने ट्रस्ट द्वारा करवाए विकास कार्यों से अवगत कराया। इसके साथ केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने भी पूजा की।   राज्यपाल ने पूर्ण विधि विधान के साथ सांई मंदिर गर्भगृह में पूूजा कर मंदिर का शुभारम्भ किया। उन्होंने मुख्य मंदिर में पूजा करने के पश्चात परिसर स्थित अन्य मंदिरों में भी पूजा की। चावड़ी मंदिर तथा द्वारका माई श्री सांई बाबा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ-साथ नवग्रह मंदिर तथा 24 तीर्थंकर मंदिर को नमन किया। श्री गणेश, दुर्गा माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता, विट्ठल रूक्मणी, राधाकृष्ण मंदिर में भी पूजा करने के पश्चात, 11 मुखी हनुमान मंदिर और शिव मंदिर में शीश नवाया।     बागडे ने बाद में कहा कि पुष्कर क्षेत्र में सांई मंदिर के साथ अन्य देवी देवता मंदिरों की स्थापना से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पुष्कर में पूर्व के केन्द्रों के साथ यह भी नवीन पर्यटन केन्द्र विकसित होने से आगन्तुकों को आकर्षित करेगा। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में वृद्वि होगी।    उन्होंने आगंतुकों को पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण से वर्षा की मात्रा बढ़ेगी। इससे किसानों को लाभ होगा। इसका प्रभाव देश के उत्पादन तथा आर्थिक तंत्र पर सकारात्मक रूप से पडे़गा।      

    प्रजापति समाज ने मनाई भक्त शिरोमणि श्रीयादे मां की जयंती -कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रतिभाओं को किया सम्मानित

    जयपुर/गंगापुर सिटी। दक्ष प्रजापति विकास समिति की ओर से रविवार को प्रजापति समाज छात्रावास परिसर में प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 10वीं और 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 150 से अधिक विद्यार्थियों को को मेडल, शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रजापति समाज की कुलदेवी भक्त शिरोमणि श्रीयादे मां की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। समिति अध्यक्ष ब्रजमोहन प्रजापति ने बताया कि पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत मुख्य अतिथि थे। साथ ही श्रीयादे माटी कला बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मदन प्रजापति, कुमावत महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आरसी कुमावत, सभापति शिवरतन अग्रवाल और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील दीक्षित विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह में संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जोराराम कुमावत ने प्रजापति समाज में शिक्षा की कमी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा के प्रति जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा व्यक्ति को सशक्त करती है, सही-गलत का ज्ञान देती है, सामाजिक बुराइयों से लड़ने की ताकत देती है और समाज को प्रगति की ओर ले जाती है। यह जागरूकता व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर समाज को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे लोग अपने अधिकारों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझ सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अभाव की वजह से ही प्रजापत समाज का अपेक्षित उत्थान नहीं हो पाया है। अब समाज के युवाओं को बदलते जमाने के साथ-साथ अपने आप को भी बदलना होगा। युवाओं को कम्प्यूटर व एआई तकनीक को अपनाते हुए समाज में बदलाव लाने में अपनी भूमिका निभानी होगी। इस दौरान प्रहलाद राय टाक व मदन प्रजापत ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम से पहले अतिथियों का माला और साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर नगरपरिषद अध्यक्ष शिवरतन अग्रवाल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील दीक्षित, करौली नगरपरिषद के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर प्रजापत, प्रजापत समाज के जिलाध्यक्ष रामफूल प्रजापत, राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ सुरेश प्रजापत, भामाशाह मिश्रीलाल प्रजापत, समाजसेवी रोहिताश प्रजापत, मंगलसेन प्रजापत आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व शहर में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के आगमन पर भाजपा जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर के आवास पर एक स्वागत-अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, राज्यमंत्री प्रहलाद राय टाक और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मदन प्रजापति का पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। गौशाला संचालकों ने मंत्री से की मुलाकात  इस अवसर पर शहर की विभिन्न गौशालाओं के संचालकों और पदाधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री सहित अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने गंगापुर सिटी के पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की मांग रखी, जिस पर मंत्री ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस आयोजन से क्षेत्र में भाजपा संगठन की सक्रियता और स्थानीय नेतृत्व की एकजुटता का संदेश भी देखने को मिला।

    अजमेर: गुर्जर समाज के शौर्य और दानशीलता का संगम, प्रतिभाओं के सारथियों का हुआ अभिनंदन

    मालासेरी डूंगरी के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल की उपस्थिति ने कार्यक्रम में फूंकी आध्यात्मिक ऊर्जा अजमेर। राजस्थान की हृदयस्थली अजमेर में आयोजित जिला स्तरीय गुर्जर प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत भामाशाहों के सम्मान में एक भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के उन स्तंभों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का जरिया बना, जिन्होंने युवाओं के भविष्य को संवारने में अपना निस्वार्थ योगदान दिया है। कार्यक्रम की दिव्यता तब और बढ़ गई जब देवनारायण भगवान की अंतरराष्ट्रीय जन्मस्थली, मालासेरी डूंगरी के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने समारोह में शिरकत की। आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक उत्थान का मिलन समारोह का आरंभ 'जय जय देव, घर घर देव' के गगनभेदी जयघोष के साथ हुआ। देवनारायण भगवान, साढ़ू माता और मालासेरी डूंगरी की पावन शक्ति को नमन करते हुए समाज की एकजुटता पर बल दिया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हेमराज पोसवाल का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और संस्कार ही समाज की असली पूंजी है और जो लोग इस पूंजी को बढ़ाने में मदद करते हैं, वे वंदनीय हैं। भामाशाहों का समर्पण: समाज की प्रगति का आधार इस विशेष सत्र में उन दानदाताओं और भामाशाहों को मंच पर सम्मानित किया गया, जिनके आर्थिक और नैतिक सहयोग से जिला स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह का सफल आयोजन संभव हो पाया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि प्रतिभाएं अक्सर संसाधनों के अभाव में दब जाती हैं, लेकिन अजमेर के इन भामाशाहों ने आगे आकर यह सिद्ध कर दिया कि समाज अपने होनहारों के साथ मजबूती से खड़ा है। कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु:  * सांस्कृतिक गौरव: मालासेरी डूंगरी के पुजारी की उपस्थिति ने युवाओं को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने की प्रेरणा दी।  * सम्मान की परंपरा: सहयोगियों को स्मृति चिह्न और साफा भेंट कर उनके त्याग को सराहा गया।  * नया संकल्प: उपस्थित जनसमूह ने आने वाले समय में शैक्षणिक क्रांति लाने और सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया। एकजुटता की नई मिसाल अजमेर जिले के विभिन्न कोनों से आए समाजबंधुओं ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। 'जय जय देव' के नारों के बीच यह संदेश स्पष्ट था कि गुर्जर समाज अब संगठित होकर विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है। भामाशाहों के सम्मान के इस दौर ने भविष्य के दानदाताओं को भी प्रेरित किया है, ताकि समाज की कोई भी प्रतिभा धन के अभाव में पीछे न रहे।