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    टी20 विश्व कप 2026 में ‘अनुचित मदद’ के आरोपों पर उठा विवाद, बीसीसीआई और आईसीसी के समर्थन में उतरे पूर्व क्रिकेटर

    YUGCHARAN / 21 फरवरी 2026 टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण की संरचना को लेकर भारतीय क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद पर लगे आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया और कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच यह दावा किया जा रहा है कि भारत को टूर्नामेंट में अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए शेड्यूल और ग्रुपिंग इस तरह बनाई गई है, जिससे भारतीय टीम को आसान राह मिल सके। हालांकि इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए न सिर्फ भारतीय क्रिकेट बोर्ड बल्कि कई पूर्व खिलाड़ी भी खुलकर सामने आए हैं। विवाद की जड़ सुपर-8 चरण की ग्रुपिंग है, जिसमें ग्रुप-1 में भारत, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और ज़िम्बाब्वे जैसी टीमें शामिल हैं, जबकि ग्रुप-2 में न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका को रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि ग्रुप-2 तुलनात्मक रूप से “आसान” है और इस तरह कुछ टीमों को सेमीफाइनल में पहुंचने का बेहतर मौका मिल सकता है, जबकि ग्रुप-1 की टीमें आपस में कड़ी टक्कर के बाद ही आगे बढ़ पाएंगी। इन आरोपों के केंद्र में बीसीसीआई और आईसीसी हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स और चर्चाओं में यह तक कहा गया कि भारत को मेज़बान होने का फायदा दिलाने के लिए टूर्नामेंट की योजना बनाई गई है। हालांकि क्रिकेट जगत के कई जानकारों ने इसे बेबुनियाद और तथ्यों से परे बताया है। ‘दिमाग खाली है क्या?’ — आकाश चोपड़ा का तीखा पलटवार पूर्व भारतीय ओपनर और मौजूदा क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोग बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष निकाल रहे हैं। एक वीडियो विश्लेषण में उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट दो देशों — भारत और श्रीलंका — में आयोजित हो रहा है, और लॉजिस्टिक्स के कारण यह स्वाभाविक है कि भारत अपने सभी मैच भारत में खेले, जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका अपने मैच श्रीलंका में खेलें। आकाश चोपड़ा ने कहा, “अगर भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रख दिया जाता, तो शेड्यूल कैसे बनता? यह कोई साज़िश नहीं, बल्कि व्यावहारिक मजबूरी है।” उन्होंने आलोचकों से सवालिया लहजे में कहा कि क्या वे टूर्नामेंट आयोजन की बुनियादी समझ भी रखते हैं। उनके शब्दों में, “फालतू की बातें मत किया करो, शोभा नहीं देता।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सुपर-8 या दूसरे चरणों में इस तरह की ग्रुपिंग कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 2007, 2009, 2010 और 2012 के टी20 विश्व कप में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां ग्रुप-स्टेज की टॉप टीमें एक ही समूह में आई थीं। 2012 के संस्करण में भी ठीक इसी तरह का परिदृश्य देखने को मिला था। मेज़बानी और शेड्यूल की मजबूरियां विशेषज्ञों के अनुसार, टूर्नामेंट दो देशों में आयोजित होने के कारण यात्रा, सुरक्षा और प्रसारण जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। पाकिस्तान की टीम का भारत में मैच न खेलना पहले से तय है, और इसी कारण से ग्रुपिंग में कुछ सीमाएं अपने-आप लागू हो जाती हैं। ऐसे में इसे किसी एक देश को लाभ पहुंचाने की साजिश बताना अतिशयोक्ति मानी जा रही है। क्रिकेट प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आईसीसी ने ग्रुपिंग करते समय निष्पक्षता और व्यावहारिकता — दोनों को संतुलित करने की कोशिश की है। टूर्नामेंट का ढांचा पहले से तय नियमों के अनुसार ही बनाया गया है और इसमें कोई असाधारण बदलाव नहीं किया गया। प्रदर्शन के आधार पर ही तय होगी किस्मत आलोचकों के दावों के विपरीत, क्रिकेट जानकारों का मानना है कि सुपर-8 जैसे चरण में “आसान” या “कठिन” ग्रुप की धारणा अक्सर कागज़ों तक ही सीमित रहती है। मैदान पर परिस्थितियां, फॉर्म और दबाव असली अंतर पैदा करते हैं। ग्रुप-1 में मौजूद ज़िम्बाब्वे जैसी टीम पहले ही यह साबित कर चुकी है कि वह किसी भी बड़ी टीम को चौंका सकती है। इसके अलावा, टूर्नामेंट के मौजूदा स्वरूप में हर टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए उच्च स्तर का प्रदर्शन करना ही होगा। एक-दो मैचों की चूक पूरे अभियान को पटरी से उतार सकती है, चाहे ग्रुप कोई भी हो। भारतीय टीम पर दबाव और अपेक्षाएं भारत के लिए यह विश्व कप सिर्फ खिताब जीतने की चुनौती नहीं, बल्कि घरेलू दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने की परीक्षा भी है। सुपर-8 में भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका जैसी मज़बूत टीम से होना है, जो अपने तेज़ गेंदबाज़ों और आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए जानी जाती है। ऐसे में किसी भी तरह की “आसान राह” की बात करना ज़मीनी हकीकत से दूर माना जा रहा है। पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि अगर भारत वास्तव में टूर्नामेंट जीतना चाहता है, तो उसे हर मुकाबले को फाइनल की तरह लेना होगा। ग्रुपिंग या शेड्यूल से ज्यादा अहम खिलाड़ियों की फॉर्म, रणनीति और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता होगी। सोशल मीडिया बनाम वास्तविकता यह विवाद एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि सोशल मीडिया पर चलने वाली चर्चाएं कितनी जल्दी बिना तथ्यों के निष्कर्ष तक पहुंच जाती हैं। कुछ वायरल पोस्ट्स ने आरोपों को हवा दी, लेकिन जैसे-जैसे अनुभवी खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, तस्वीर ज्यादा संतुलित नजर आने लगी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों में इस तरह के आरोप लगभग हर बार लगते हैं, खासकर तब जब मेज़बान देश अच्छा प्रदर्शन कर रहा हो। लेकिन अंततः इतिहास उन्हीं टीमों को याद रखता है, जो मैदान पर बेहतर क्रिकेट खेलती हैं। निष्कर्ष टी20 विश्व कप 2026 की सुपर-8 ग्रुपिंग को लेकर उठे सवालों ने भले ही कुछ समय के लिए माहौल गरमाया हो, लेकिन उपलब्ध तथ्यों और विशेषज्ञों की राय यह संकेत देती है कि आरोपों में ठोस आधार नहीं है। बीसीसीआई और आईसीसी दोनों ने टूर्नामेंट आयोजन के स्थापित नियमों और व्यावहारिक सीमाओं के भीतर रहकर निर्णय लिए हैं।   आखिरकार, क्रिकेट एक ऐसा खेल है जहां कागज़ी गणनाएं मैदान पर अक्सर गलत साबित हो जाती हैं। सुपर-8 का हर मुकाबला अपनी कहानी खुद लिखेगा, और सेमीफाइनल तक वही टीमें पहुंचेंगी जो दबाव में बेहतर खेल दिखा पाएंगी। आरोप-प्रत्यारोप से परे, अब सभी की निगाहें मैदान पर होने वाले वास्तविक मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां जवाब बल्ले और गेंद से मिलेगा, न कि सोशल मीडिया बहसों से।

    गाज़ा के लिए बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में भारत की पर्यवेक्षक के रूप में भागीदारी, दो-राष्ट्र समाधान पर दोहराया समर्थन

    YUGCHARAN / 21 फरवरी 2026 भारत ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उसने वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित गाज़ा के लिए बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में केवल पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया था। विदेश मंत्रालय (MEA) ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस बैठक में भारत की मौजूदगी का अर्थ उसकी विदेश नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं है। भारत ने एक बार फिर फ़िलिस्तीन मुद्दे पर अपने पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि वह 1967 की सीमाओं पर आधारित एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के पक्ष में खड़ा है। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इज़राइल–फ़िलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत का मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, शांति से सह-अस्तित्व में रहें। यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही यह जानकारी सामने आई थी कि एक भारतीय राजनयिक ने गाज़ा के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या भारत की भूमिका में कोई बदलाव आया है। विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। पर्यवेक्षक के रूप में भारत की भूमिका विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लेकर केवल यह समझने का प्रयास किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाज़ा संकट को लेकर किन मुद्दों पर चर्चा कर रहा है और भविष्य में कौन-से संभावित रास्ते सामने आ सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षक की भूमिका का मतलब यह नहीं है कि भारत बैठक में रखे गए सभी विचारों या प्रस्तावों का समर्थन करता है, न ही इससे भारत पर कोई बाध्यकारी जिम्मेदारी आती है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत हमेशा ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़ा रहा है, जहां शांति, मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। हालांकि, भारत का यह भी मानना है कि किसी भी समाधान की बुनियाद अंतरराष्ट्रीय कानून और आपसी संवाद पर ही टिकी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत शुरू से ही संतुलित और विवेकपूर्ण नीति अपनाता आया है। यही कारण है कि वह इज़राइल और फ़िलिस्तीन — दोनों के साथ अपने-अपने संबंधों को महत्व देता है और किसी एक पक्ष के समर्थन में एकतरफ़ा रुख नहीं अपनाता। फ़िलिस्तीन मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय ने फ़िलिस्तीन मुद्दे पर भारत की नीति को फिर से दोहराया। प्रवक्ता ने कहा कि भारत 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का समर्थन करता है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यही रुख अपनाया है। यह केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही भारत की विदेश नीति का हिस्सा है। भारत ने न केवल राजनीतिक स्तर पर, बल्कि मानवीय आधार पर भी फ़िलिस्तीनी जनता का समर्थन किया है। भारत की ओर से फ़िलिस्तीन को समय-समय पर मानवीय सहायता, चिकित्सा मदद, शिक्षा और क्षमता निर्माण से जुड़ा सहयोग दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह सहायता फ़िलिस्तीनी लोगों के सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्णय के अधिकार में भारत के विश्वास को दर्शाती है। हिंसा और आतंकवाद पर भारत का रुख भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी रूप में आतंकवाद और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा का समर्थन नहीं करता। चाहे वह इज़राइल में हो या फ़िलिस्तीन में, भारत का मानना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हिंसा और बदले की राजनीति से केवल पीड़ा बढ़ती है और शांति की संभावना और दूर हो जाती है। भारत का यह भी मानना है कि मानवीय सहायता को कभी भी राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए और संघर्ष प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए। गाज़ा के लिए बोर्ड ऑफ पीस: पृष्ठभूमि गाज़ा के लिए बोर्ड ऑफ पीस एक अंतरराष्ट्रीय पहल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य गाज़ा में जारी संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक और मानवीय विकल्पों पर विचार करना है। गाज़ा क्षेत्र लंबे समय से हिंसा, विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। इस मंच पर विभिन्न देशों और संगठनों के प्रतिनिधि यह चर्चा कर रहे हैं कि कैसे युद्धविराम, पुनर्निर्माण और दीर्घकालिक शांति की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि, इस बोर्ड के अधिकार क्षेत्र और भविष्य की योजनाओं को लेकर अभी बहुत अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। भारत का इस पहली बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होना उसकी उस नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जिसके तहत वह किसी भी नए अंतरराष्ट्रीय मंच को पहले समझने और परखने के बाद ही उसमें सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लेता है। कूटनीतिक संतुलन की नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख पश्चिम एशिया में उसके कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है। बीते वर्षों में भारत और इज़राइल के बीच रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संबंध काफ़ी मज़बूत हुए हैं। इसके साथ ही भारत ने अरब देशों और फ़िलिस्तीन के साथ भी अपने रिश्ते बनाए रखे हैं। भारत की यही संतुलित नीति उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार देश के रूप में स्थापित करती है। न तो भारत किसी एक पक्ष के पूरी तरह साथ खड़ा होता है और न ही वह मानवीय मुद्दों से आंख मूंदता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और महत्व भारत के इस स्पष्टीकरण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी ध्यान से देखा गया है। कई देशों और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने समय रहते अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी, जिससे किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रही। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह स्पष्टता उसे वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच और अधिक विश्वसनीय बनाती है, जहां भारत को अक्सर एक संतुलित और संवाद समर्थक आवाज़ के रूप में देखा जाता है। आगे की राह विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भारत गाज़ा की स्थिति पर लगातार नज़र बनाए रखेगा और जहां आवश्यक होगा, वहां अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ संवाद बनाए रखेगा। हालांकि, फिलहाल भारत की भूमिका पर्यवेक्षक तक ही सीमित रहेगी। सरकार का मानना है कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष वार्ता अनिवार्य है और बाहरी पहलें केवल सहायक भूमिका ही निभा सकती हैं। भारत ने यह भी दोहराया कि वह शांति, स्थिरता और मानवीय मूल्यों के पक्ष में हमेशा खड़ा रहेगा।   अंततः, भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उसका रुख स्पष्ट, सुसंगत और दशकों पुरानी विदेश नीति पर आधारित है — एक ऐसी नीति जो संवाद, सह-अस्तित्व और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर टिकी हुई है।

    मुख्यमंत्री ने की 84 हजार 282 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर प्रगति की समीक्षा

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज-उन्नति की दूसरी बैठक— —अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान को दें सर्वोच्च प्राथमिकता —लापरवाह कार्मिकों पर होगी कड़ी कार्रवाई —परियोजनाओं के शीघ्र संचालन के लिए आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र हों जारी- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा    जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार जन सेवा को सर्वोपरि मानकर कार्य कर रही है। अधिकारी जनता की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कार्मिक निष्ठा से अपने राजकीय दायित्वों का निर्वहन करें। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज-उन्नति की बैठक को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की 84 हजार 282 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और योजनाओं पर चर्चा की तथा अधिकारियों को इनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि अधिकारी तय समय में विकास कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, जिससे परियोजनाओं की लागत में वृद्धि ना हो तथा जनता को राहत मिले।   अधिकारी नियमित करें जनसुनवाई— मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी सम्पर्क हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निस्तारण करें। साथ ही, जिला एवं विभाग स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी इसकी नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कलक्टर्स को निर्देश दिए कि सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त समस्याओं के समाधान में देरी ना हो। साथ ही, नियमित जन सुनवाई करें, जिससे स्थानीय स्तर पर ही आमजन की परिवेदनाओं का निस्तारण सुनिश्चित हो सके। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन के चयनित परिवादियों से उनके परिवाद निस्तारण पर फीडबैक लिया। जैसलमेर के धन्नाराम सहित अन्य परिवादियों ने मुख्यमंत्री का समस्याओं के समाधान के लिए आभार जताया।   पावरग्रिड के प्रोजेक्ट्स को समय से करें पूर्ण—  शर्मा ने पावर ग्रिड के प्रोजेक्ट्स को गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने 765 केवी डी/सी ब्यावर-दौसा ट्रांसमिशन लाइन से संबंधित कार्य में गति लाने और 765 केवी डी/सी सीकर-खेतड़ी ट्रांसमिशन लाइन को भी जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।    आरएफआईडी एवं जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली की हो नियमित मॉनिटरिंग—  शर्मा ने उद्योग विभाग को भीलवाड़ा में बन रहे टेक्सटाइल पार्क में समस्त कार्य शीघ्र पूर्ण करते हुए भूखण्ड आवंटन प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में आरएफआईडी एवं जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली को चरणबद्ध रूप से लागू करने के लिए मुख्य सचिव पाक्षिक रूप से बैठक करें। साथ ही, वेब्रिज ऑटोमेशन एवं वाहन टेªकिंग सिस्टम से संबंधित मॉडयूल को शीघ्र पूर्ण किया जाए। वहीं, खान विभाग एवं परिवहन विभाग आपसी समन्वय से पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन करें, जिससे खनिज परिवहन की वास्तविक समय निगरानी एवं ओवरलोडिंग नियंत्रण किया जा सके।    न्यू एज कोर्स के कनवर्जेन्स पर दें जोर— मुख्यमंत्री ने कौशल विकास कार्यक्रम के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं की जिला कौशल समितियों को और अधिक सक्रिय करने के भी निर्देश दिए। साथ ही, न्यू एज कोर्स का कनवर्जेन्स करने तथा जिलों में स्किल गैप कवर करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष में 1 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कालीबाई भील उड़ान योजना के तहत महिलाओं एवं बालिकाओं को निःशुल्क सेनेटरी नेपकिन वितरण के लिए वितरण केन्द्रों पर सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।    युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर करें सृजित—  शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा 5 साल में 6 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। अब तक 2 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से भी युवाओं के लिए रोजगार के भरपूर अवसर सृजित हुए हैं। हमारी प्राथमिकता है कि राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। साथ ही, उन्हें इंडस्ट्री रेडी एवं रोजगारपरक बनाना जाए। इस दृष्टि से इस वर्ष के बजट में प्रत्येक जिले में इंडस्ट्री पार्टनर को जोड़ते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल डवलपमेंट एंड वोकेशनल टेªनिंग प्रारम्भ की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में शीघ्र अग्रिम कार्यवाही करने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि गत वर्ष की लंबित बजट घोषणाओं को शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ नीति के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भरतपुर तथा अलवर में बनने वाले नवीन बस स्टैण्ड के कार्य को शीघ्र पूरा करने के भी निर्देश दिए। शर्मा ने राजस्थान रिफाइनरी सहित अन्य परियोजनाओं एवं योजनाओं की प्रगति को लेकर भी समीक्षा की। इस दौरान मुख्य सचिव ने राज उन्नति की प्रथम बैठक में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।   उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज उन्नति की पहल की गई है। इनमें चयनित परियोजनाओं, योजनाओं एवं कार्यों की विस्तृत चर्चा कर प्रदेश के विकास को गति दी जा रही है। इसमें आमजन से जुड़े कार्यों और परिवेदनाओं को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।   बैठक में वीसी के माध्यम से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव तथा जिला कलक्टर्स जुड़े।   

    संवाद से सशक्त होगा विकास का खाका: जेडीए ने शुरू किया ‘संवाद’ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम

    —पहले सत्र में आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने आमजन की सुनी समस्याएं व सुझाव, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा—निर्देश जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा सहभागितापूर्ण और पारदर्शी शहरी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘संवाद’ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस पहल के तहत जेडीए विभिन्न हितधारकों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर उनके सुझाव एवं समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेगा।   कार्यक्रम का प्रथम सत्र ‘मंथन’ सभागार में आयोजित हुआ। इस अवसर पर जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने उपस्थित स्टेकहोल्डर्स की समस्याएं, सुझाव एवं फीडबैक गंभीरता से सुने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   आयुक्त महाजन ने कहा कि जेडीए आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने तथा विकास कार्यों में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘संवाद’ कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जाएगा।   उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों एवं सुझावों पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े स्टेकहोल्डर्स ने भाग लेकर अपने सुझाव साझा किये ।   त्वरित समाधान से खिले चेहरे— कार्यक्रम में पधारे लोगों ने अपनी लीज, आरक्षण पत्र, पट्टा आदि की समस्याएं भी आयुक्त से साझा की जिन्हें श्री महाजन ने क्रमवार सुनकर संबंधित उपायुक्त को समयबद्ध तरीके से समाधान करने के निर्देश दिए। अपनी समस्याओं का हाथो हाथ निवारण मिलने से कार्यक्रम में पधारे लोगों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने जेडीए की इस जनहितेशी पहल पर संतोष व्यक्त किया।   जेडीए द्वारा ‘संवाद’ कार्यक्रम के ऐसे सत्र प्रत्येक माह आयोजित किए जाएंगे, जिससे शहरी विकास कार्यों में आमजन की भागीदारी को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

    कांग्रेस द्वारा एआई समिट का विरोध राष्ट्रहित के विरुद्ध – शंकर गोरा

    नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यक्रम स्थल में घुसकर विरोध प्रदर्शन किए जाने के विरोध में आज भारतीय जनता युवा मोर्चा, राजस्थान ने प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा के नेतृत्व में युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस बॉर रूम का घेराव किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप राहुल गांधी का पुतला दहन कर अपनी नाराज़गी दर्ज कराई।   प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा ने कहा कि जब पूरा विश्व भारत की तकनीकी प्रगति, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नेतृत्व क्षमता को स्वीकार कर रहा है, तब कांग्रेस द्वारा ऐसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन का विरोध करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस प्रकार का आचरण भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करने का प्रयास प्रतीत होता है।   उन्होंने आगे कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत डिजिटल क्रांति और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। ऐसे समय में विपक्ष द्वारा राष्ट्रहित से जुड़े आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करना कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को दर्शाता है।   शंकर गोरा ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा राष्ट्रविरोधी एवं विकास-विरोधी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेशभर में कांग्रेस की इस मानसिकता के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि युवाओं को यह बताया जा सके कि किस प्रकार कांग्रेस देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास कर रही है।   प्रदर्शन के दौरान युवा मोर्चा के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में “राष्ट्रहित सर्वोपरि” का संकल्प दोहराते हुए देश की प्रगति एवं सम्मान की रक्षा के लिए सतत संघर्ष का संकल्प लिया।

    शिक्षा सचिव का शिक्षा सुधार पर फोकस, स्थानीय नवाचार पर दिया जोर

    — चूरू डाइट में शैक्षिक गुणवत्ता एवं नवाचारों की समीक्षा बैठक आयोजित जयपुर/चूरू। शैक्षिक परिदृश्य एवं गुणवत्ता और औसत रैंकिंग सुधार के लिए स्कूल शिक्षा के शासन सचिव कृष्ण कुणाल चूरू जिले के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले के शैक्षिक परिदृश्य, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और विद्यालयों में संचालित नवाचारों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने जिले की शैक्षिक उपलब्धियों, गुणवत्ता सुधार के प्रयासों एवं प्राथमिकताओं की तथ्यपरक चर्चा की और शिक्षण गुणवत्ता सुधार हेतु वर्कबुक मूल्यांकन, सम्बलन की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं आंगनबाड़ी के समस्त बच्चों का 31 मार्च से पूर्व नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।    शासन सचिव ने नवाचारों के दस्तावेजीकरण, परिणाम आधारित मूल्यांकन तथा सफल मॉडलों की राज्य स्तर पर विस्तार योग्य रूपरेखा तैयार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले की औसत रैंकिंग 31 है और इसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने अगले माह तक समस्त ब्लॉक औसत रैंकिंग तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया।   उन्होंने शैक्षिक गुणवत्ता एवं नवाचारों की व्यापक समीक्षा करते हुए स्थानीय नवाचार, 3R पहल, कोड चूरू, लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम, सेक्टर समीक्षा मीटिंग पोर्टल और अटल टिंकरिंग लैब जैसे नवाचारों पर जोर दिया। साथ ही राजस्थान में पहली बार आयोजित EduHack Churu-2026 हैकाथॉन को एक उल्लेखनीय पहल बताया।  कृणाल ने जिले की वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य और संस्थागत सुदृढ़ीकरण की व्यापक समीक्षा करते हुए संबलन को प्रभावी बनाने हेतु वर्कबुक मूल्यांकन एवं आंगनबाड़ी के बच्चों का 31 मार्च तक अस्थाई प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   इस दौरान जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.संतोष म​हर्षि, डाइट चूरू के प्राचार्य डॉ. गोविंद सिंह राठौड़ सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारीगण मौजूद रहे।   *विद्यालयों का औचक निरीक्षण*   इससे पहले कृणाल ने जिले के विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया और डिजिटल लर्निंग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पुस्तकालय सहित अन्य शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संस्था प्रधानों को जिले में औसत रैंकिंग सुधार सहित स्थायी शैक्षिक सुधार सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया।

    राजस्थान का छात्र राजनीति में बढ़ा कद:

    विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस ने पहली बार मरुधरा के लाल को सौंपी कमान जयपुर/दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के इतिहास में पहली बार राजस्थान के किसी कार्यकर्ता ने सर्वोच्च पद पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से उभरे प्रखर युवा नेता विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निर्णय न केवल राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े छात्र संगठन के नेतृत्व में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। पहली बार राजस्थान को मिला यह गौरव कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के दशकों पुराने इतिहास में यह पहला अवसर है जब राजस्थान से किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक इस पद पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश या दक्षिण भारतीय राज्यों का वर्चस्व रहा था, लेकिन विनोद जाखड़ की नियुक्ति ने इस परंपरा को तोड़ दिया है। उनकी यह ताजपोशी राजस्थान के उन हजारों छात्र नेताओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से शुरू हुआ संघर्ष का सफर विनोद जाखड़ का राजनीतिक सफर राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) की छात्र राजनीति की नर्सरी से शुरू हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं के लिए लंबा संघर्ष किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली और संगठन के प्रति निष्ठा को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि राजस्थान में आगामी चुनावों और युवाओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने के लिए यह एक मास्टरस्ट्रोक है। आलाकमान का भरोसा और युवाओं में जोश मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की सहमति के बाद जारी हुए इस आदेश ने प्रदेश कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर दिया है। विनोद जाखड़ की नियुक्ति को राहुल गांधी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय मंच पर आगे लाना चाहते हैं। नई जिम्मेदारी और आगामी चुनौतियां राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में विनोद जाखड़ के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी:  * संगठन का विस्तार: देश भर के विश्वविद्यालयों में NSUI की जड़ों को फिर से मजबूत करना।  * छात्र चुनाव: विभिन्न राज्यों में होने वाले छात्र संघ चुनावों में संगठन को जीत दिलाना।  * बेरोजगारी और पेपर लीक: केंद्र सरकार के खिलाफ बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली जैसे मुद्दों पर छात्रों को एकजुट करना। प्रदेश के नेताओं ने दी बधाई विनोद जाखड़ की इस उपलब्धि पर राजस्थान के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने हर्ष जताया है। प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सहित तमाम बड़े नेताओं ने इसे राजस्थान के गौरव का क्षण बताया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जाखड़ की नियुक्ति से राजस्थान में छात्र राजनीति को एक नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।  

    अमोहा जैन बनी चार्टर अध्यक्षा जिनांशी जैन बनी सचिव, “जूनियर लीनेस क्लब जयपुर HERizon” की घोषणा

    जयपुर। डिस्ट्रिक्ट आरएम-1 स्वयंसिद्धा के अंतर्गत प्रथम “जूनियर लीनेस क्लब जयपुर HERizon” की घोषणा की गई, जिसमें 9 वर्ष की अमोहा जैन को क्लब की चार्टर अध्यक्षा नियुक्त किया गया। यह क्लब बच्चों में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सेवा भावना और व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।   क्लब की स्थापना Lyn. अंजना जैन, PMP डिस्ट्रिक्ट CEO, RM-1 स्वयंसिद्धा द्वारा की गई। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि जूनियर क्लब के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम वर्षभर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं, इसलिए उन्हें सही दिशा और अवसर प्रदान करना हम सभी का दायित्व है।   श्रीमती सीमा अग्रवाल, डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट, RM-1 स्वयंसिद्धा 2026 ने बताया कि यह डिस्ट्रिक्ट का प्रथम जूनियर लीनेस क्लब है, जो बच्चों में सेवा और नेतृत्व के संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।   क्लब की चार्टर टीम में चार्टर अध्यक्षा लीनेस अमोहा जैन, चार्टर सचिव लीनेस जिनांशी जैन तथा चार्टर कोषाध्यक्ष लीनेस सायरा बिष्ट को दायित्व सौंपा गया। इसके साथ ही निहारिका चितलंगिया, नविशा गोयल, अनान्शी गोयल, अद्विका गुप्ता, अद्विका जैन, मायरा खोड़ा, भव्या चौहान और अविश्का बियानी को सदस्य के रूप में इंस्टाल किया गया।   यह क्लब “सेवा से संस्कार (From Dawn to Dusk, She Serves)” थीम के साथ वर्षभर विभिन्न सेवा गतिविधियों का संचालन करेगा।

    22-23 फरवरी को दिल्ली में एआई और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटेंगे दुनिया भर के दिग्गज शिक्षाविद्

    - डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में आयोजित होगी दो दिवसीय भव्य संगोष्ठी - एआई के दौर में 'एकात्म मानववाद' की प्रासंगिकता पर मंथन करेंगे वैश्विक विद्वान नई दिल्ली : तकनीकी क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से देश की राजधानी में एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), शैक्षिक फाउंडेशन और दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 22 और 23 फरवरी 2026 को दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इस संगोष्ठी का आयोजन नई दिल्ली के जनपथ स्थित प्रतिष्ठित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में होगा। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता’ रखा गया है। ABRSM के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने बताया इस सम्मेलन में भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से 800 से अधिक शिक्षाविद्, वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन की मुख्य विशेषता यह होगी कि इसमें एआई और समाज के अंतर्संबंधों पर केंद्रित सैकड़ों महत्वपूर्ण शोध पत्र (Research Papers) प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन के दौरान दोनों दिन अलग-अलग सत्रों के माध्यम से तकनीक और मानवता के मेल पर विस्तार से चर्चा की जाएगी जिस्में डीपफेक (Deepfake), डिजिटल नैतिकता और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में मानवीय मूल्यों के समावेश पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र (22 फरवरी) में केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद (वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय) मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इस अवसर पर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, महासचिव प्रो. गीता भट्ट और दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमचंद जैन सहित शिक्षा जगत की कई नामचीन हस्तियां मार्गदर्शन देंगी। प्रो. गुप्ता ने कहा कि यह सम्मेलन डिजिटल युग में तकनीक और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक वैश्विक रोडमैप तैयार करेगा।

    धौलपुर की बेटी का राजस्थान में डंका: किसान की पुत्री नीरज कुमारी बनीं RPSC असिस्टेंट प्रोफेसर, हासिल की 63वीं रैंक

    धौलपुर। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और न ही संसाधनों की कमी कभी सफलता का मार्ग रोक सकती है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा घोषित सहायक आचार्य (वनस्पति शास्त्र/Botany) परीक्षा के परिणामों में धौलपुर जिले के बाड़ी उपखंड के एक छोटे से गाँव संडपुरा (निधारा) की बेटी नीरज कुमारी ने यह चरितार्थ कर दिखाया है। साधारण किसान परिवार में जन्मी नीरज ने पूरे राजस्थान में 63वीं रैंक प्राप्त कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। साधारण परिवेश, असाधारण संकल्प नीरज कुमारी की यह सफलता इसलिए विशेष है क्योंकि वे पूरी तरह से ग्रामीण और कृषि आधारित पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके पिता रामवीर सिंह गुर्जर एक साधारण किसान हैं और माता शिवदेवी गृहिणी हैं। गाँव की पगडंडियों से निकलकर राजस्थान विश्वविद्यालय और फिर RPSC की मेरिट लिस्ट तक का सफर नीरज के कड़े परिश्रम, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास की कहानी कहता है। बचपन से ही मेधावी: सफलताओं का सफर नीरज कुमारी का शैक्षणिक करियर शुरू से ही उपलब्धियों से भरा रहा है। उनकी मेहनत का अंदाजा उनके पिछले कुछ वर्षों के परिणामों से लगाया जा सकता है:  * 12वीं कक्षा (2018): विज्ञान वर्ग में जिला स्तर पर 90.80% अंक प्राप्त किए और एमवीसी वर्ग में प्रथम स्थान पाकर प्रतिष्ठित पद्माक्षी अवार्ड जीता।  * पीजी प्रवेश परीक्षा (2021): राजस्थान विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर (PG) प्रवेश परीक्षा में सामान्य वर्ग में 9वां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।  * CSIR NET JRF (2025): हाल ही में जुलाई 2025 में आयोजित देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली शोध पात्रता परीक्षा में ऑल इंडिया 85वीं रैंक हासिल की। पहले ही प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता नीरज के बड़े भाई के अनुसार, नीरज ने बिना किसी भटकाव के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सहायक आचार्य जैसे उच्च पद पर सफलता प्राप्त की है। ग्रामीण परिवेश में जहाँ बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है, वहाँ नीरज ने स्वयं को साबित कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। गाँव संडपुरा में उत्सव जैसा माहौल जैसे ही सहायक आचार्य परीक्षा के अंतिम परिणाम घोषित हुए और नीरज का नाम मेरिट सूची में चमका, वैसे ही बाड़ी उपखंड और संडपुरा (निधारा) गाँव में जश्न शुरू हो गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुँह मीठा कराया और ढोल-नगाड़ों के साथ खुशियाँ मनाईं। ग्रामीणों का कहना है कि नीरज ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे धौलपुर जिले का गौरव बढ़ाया है। बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा इस बड़ी उपलब्धि पर क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने हर्ष व्यक्त किया है। जेईएन सवाई सिंह गुर्जर ने कहा कि नीरज की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि कभी बाधा नहीं बनती। उनकी यह जीत आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए शिक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास का नया संचार करेगी। सफलता का संदेश नीरज कुमारी की यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए एक संदेश है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं। नीरज ने दिखाया है कि मेहनत और लगन के दम पर सफलता के सबसे ऊंचे पायदान तक पहुँचा जा सकता है। अब वे सहायक आचार्य के रूप में वनस्पति शास्त्र के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ देंगी और उच्च शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।  

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    पी. टी. ई. टी.-2026, दो वर्षीय बी.एड. में प्रवेश हेतु आवेदन प्रारंभ

    कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पी. टी. ई. टी.- 2026 परीक्षा हेतु आज से ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ किये जा चुके है । वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कुलगुरु एवं मुख्य समन्वयक प्रो.बी.एल.वर्मा ने बताया की अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में आवेदन करने से पूर्व परीक्षा सम्बन्धी दिशानिर्देश का आवश्यक रूप से अध्ययन कर लेवें । समन्वयक प्रो.क्षमता चौधरी ने बताया की पी. टी. ई. टी.-2026 में स्नातक उपरांत 2 वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु ही आवेदन खोले गए है ।   *आवेदन प्रक्रिया*  अभ्यर्थी https://ptetvmoukota2026.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है । स्वयं के नाम, जन्म दिनांक एवं माता- पिता का नाम को भरते वक्त कक्षा 10 वीं अंक तालिका को आधार बनाना चाहिए । बैंक से सम्बंधित जानकारी हेतु अभ्यार्थी स्वंय का बैंक खाते की डिटेल्स को ही भरें, परिवार के किसी भी सदस्य की बैंक जानकारी परीक्षा हेतु आवेदन करने के लिए मान्य नहीं होगी । बी.एड. हेतु विषय का चयन काउंसलिंग के समय करवाया जायेगा । आवेदन से पूर्व अभ्यर्थी स्वयं का नवीनतम सुस्पष्ट रंगीन फोटो, अंगूठा निशानी व हस्ताक्षर की सॉफ्ट कॉपी अपने पास रखे । अभ्यर्थी राजस्थान राज्य के निर्धारित ई मित्र कियोस्क के माध्यम से भी आवेदन कर सकते है । परीक्षा शुल्क 500 /- रूपये जमा कराने के लिए ऑनलाइन पेमेंट डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड / नेट बैंकिंग / यूपीआई से किया जा सकता तथा सफलतापूर्वक ऑनलाइन भुगतान के पश्चात अपने आवेदन पत्र की हार्ड कोपी प्रिंट कर संभाल कर रखें । हार्ड कॉपी को कार्यालय में जमा नहीं करवाना है | आवेदन की अंतिम तिथि 20 मार्च है ।  *कौन कर सकते है आवेदन* आवेदन के लिए विज्ञान / सामाजिक विज्ञान / मानविकी वर्ग में न्यूनतम 50 % (पचास प्रतिशत) अंकों के साथ विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय की स्नातक/ स्नातकोत्तर उपाधि वाले अभ्यर्थी पात्र होंगे । इंजीनियरिंग या प्रौद्योगिकी में विज्ञान एवं गणित में विशेषज्ञता के साथ स्नातक में कम से कम 55% अंक प्राप्त करने वाले या उपरोक्त के समतुल्य कोई अन्य अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार भी इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र होंगे। एनसीटीई (मान्यता मानदंड एवं प्रक्रिया) विनियम, 2014 के परिशिष्ट-4 के अनुसार - भारत के राजपत्र में अधिसूचित के अनुसार रहेगी । जो अभ्यर्थी पी.टी.ई.टी.-2026 के ऑनलाइन प्रवेश फॉर्म की अन्तिम तिथि के समय योग्यताधारी नहीं हैं वे भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। ऐसे अभ्यर्थी का परीक्षा परिणाम काउंसलिंग में पंजीकरण की अन्तिम तिथि से पूर्व उपलब्ध होना चाहिए अन्यथा प्रवेश निरस्त माना जायेगा। अनुसूचित जाति /जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अति पिछड़ा वर्ग /पी. डब्ल्यू. डी. और अन्य वर्गों के लिए आरक्षण तथा अंकों में छूट राज्य सरकार के नियमों के अनुसार देय होगी । इस कोर्स में आवेदन करने हेतु अधिकतम आयु की कोई सीमा नहीं है । राजस्थान प्रदेश से बाहर के अभ्यर्थी भी पी. टी. ई. टी.- 2026 के लिए आवेदन कर सकते है परन्तु वह सभी जनरल केटेगरी में प्रवेश के लिए पात्र होगें ।   *सावधानियाँ* सह-समन्वयक डॉ.रवि गुप्ता ने बताया कि परीक्षा की संभावित तिथि 14 जून है । परीक्षा केंद्र के चयन हेतु जिलों के नाम की सूची आवेदन पत्र में दी गयी है । आवेदन पत्र भरते समय अभ्यर्थी पूर्ण सावधानी रखें । अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरते हुए अपनी श्रेणी, संकाय व लिंग आदि सभी सूचनाएँ सही व ध्यानपूर्वक भरें, इनमें परिवर्तन नहीं किया जायेगा । अभ्यर्थी केवल स्वयं के एवं वैध मोबाईल नं. एवं वैध ईमेल एड्रेस ही अंकित करें। अभ्यर्थी द्वारा आवेदन पत्र में गलत जानकारी पर प्रवेश निरस्त कर दिया जायेगा।आवेदन करने के पश्चात परीक्षा केंद्र परिवर्तन संभव नहीं होगा । सभी संकायों में आरक्षण राज्य सरकार के नियमानुसार देय होगा । परीक्षा फॉर्म को भरने में आने वाली परेशानियों के निराकरण हेतु वेबसाइट पर दिये गए हेल्पलाइन नंबर एवं helpdesk का उपयोग करें ।  *ऐसा होगा प्रश्न पत्र* परीक्षा आयोजना समिति सदस्य डॉ.संदीप हुड्डा ने बताया कि परीक्षा प्रश्न पत्र चार भागों में बंटा होगा | प्रत्येक भाग में 50 प्रश्न तथा प्रश्न-पत्र में कुल 200 बहुविकल्पी प्रश्न होंगे | पी. टी. ई. टी.- 2026 में मेंटल एबिलिटी, टीचिंग एटीट्यूड, जनरल अवेयरनेस तथा लेंग्वेज प्रोफिशियेन्सी के चार भाग होंगे | परीक्षा अवधि तीन घण्टे की होगी । प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का होगा | लैंग्वेज प्रोफिशियेन्सी भाग को छोड़कर शेष प्रश्न पत्र अभ्यर्थी द्वारा चुनी गई भाषा में होगा । प्रश्न पत्र में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी |