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    जयपुर महानगर: 292 बस्तियों में संपन्न हुए विजयादशमी उत्सव, एकता का दिखा महासंगम

    1 hour ago

    पथ संचलनों में कदम से कदम मिले, दिखाई दी पूर्ण एकात्मता; करधनी नगर में राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया

    जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस विजयादशमी के अवसर पर जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में विजयादशमी उत्सव पूर्ण उत्साह एवं अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। इन कार्यक्रमों में हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में सहभागिता किया। विभिन्न बस्तियों में शस्त्र पूजन, पथ संचलन एवं शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें समाजबंधुओं, मातृशक्ति एवं विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने भी सहभागिता की।

    जयपुर महानगर के विभिन्न नगरों एवं बस्तियों से शहर के अलग-अलग मार्गों एवं प्रमुख स्थानों से पथ संचलन निकाले गए। गालव नगर, पॉन्ड्रिक नगर, झोटवाड़ा, करधनी नगर, विद्याधर, मानसरोवर, जगतपुरा, पत्रकार कॉलोनी आदि जगहों पर स्वयंसेवकों ने घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अनुशासन, सामूहिकता एवं पूर्ण एकात्मता का परिचय दिया। एक लय, एक गति और एक दिशा में आगे बढ़ते स्वयंसेवकों के संचलन में संगठन की एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। विभिन्न मार्गों पर समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया।

    विभिन्न उत्सव स्थलों पर शस्त्र पूजन के साथ शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए। इनमें स्वयंसेवकों ने दंड, योग, आसन एवं अन्य शारीरिक कौशलों का प्रदर्शन किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक दक्षता, अनुशासन, सामूहिक समन्वय और संगठन भावना का परिचय दिया गया।

    विजयादशमी का सांस्कृतिक महत्त्व और राष्ट्र निर्माण का संदेश

    विजयादशमी उत्सव के अवसर पर आयोजित बौद्धिक सत्रों में विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य, संगठित समाज की आवश्यकता तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने विजयादशमी को शक्ति-उपासना, शस्त्र-पूजन एवं विजय का पर्व बताते हुए इसे दैवी शक्तियों की आसुरी प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक बताया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में संघ की स्थापना की थी। वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति-निर्माण से समाज-निर्माण और समाज-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण की संकल्पना साकार होती है। पथ संचलन इसी अनुशासित, संगठित एवं समर्पित समाज का परिचायक है।

    करधनी नगर के विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्रमुख रहा। अपने उद्बोधन में डॉ अग्रवाल ने विजयादशमी के सांस्कृतिक महत्त्व, संगठन की भूमिका तथा समाजजीवन में एकता, समरसता एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने के विषय को प्रमुखता दी।

    विभिन्न नगरों एवं बस्तियों में वक्ताओं ने रखा विचार

    जयपुर महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में अनेक पदाधिकारियों एवं वक्ताओं ने स्वयंसेवकों और समाजबंधुओं का मार्गदर्शन किया। मधुबन बस्ती में राजस्थान क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीकांत ने विचार रखे। विद्याधर नगर में जयपुर महानगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख अशोक गर्ग ने मार्गदर्शन किया। भगत सिंह बस्ती, सरदार पटेल नगर में नगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख रुबिन माथुर का बौद्धिक हुआ।

    कुंदनपुरा बस्ती में जयपुर महानगर सहकार्यवाह रूप सिंह तथा भांकरोटा बस्ती में सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार ने विचार रखे। विवेकानंद नगर में भाग सह बौद्धिक प्रमुख नरेश सिंह ने बौद्धिक प्रदान किया। गोविंद नगर, गालव भाग में जयपुर प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख दिनेश मणिरत्नम ने मार्गदर्शन किया। ज्योति नगर बस्ती में माननीय सह संघचालक डॉ मामराज गुप्ता ने विचार रखे।

    सरस्वती नगर की विभिन्न बस्तियों में माधव , राजकुमार जैन, दुर्गेश खंडेलवाल, शंकर बाबू, जिला प्रचारक सुभाष कुमार तथा राजेंद्र आर्य ने बौद्धिक प्रदान किया। विभिन्न कार्यक्रमों में स्थानीय पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों एवं समाजबंधुओं की सहभागिता रही।

    जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में आयोजित विजयादशमी उत्सवों ने अनुशासन, संगठन शक्ति, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को अभिव्यक्त किया। इन आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता, सहयोग, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रहित में सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया गया।

     

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