Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    राजस्थान विश्वविद्यालय में 8वें विश्व सम्मेलन LAECS-2026 का भव्य शुभारंभ

    2 hours ago

    भारत सहित अनेक देशों के शोधकर्ता प्रस्तुत करेंगे शोधपत्र, 822 से अधिक शोध सारांश प्राप्त

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के यूजीसी-एमएमटीटीसी सभागार में शनिवार को 8वें विश्व सम्मेलन ‘लाइफ साइंसेज, एग्रीकल्चर, एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट सॉल्यूशंस (LAECS-2026)’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का संयुक्त आयोजन ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर, वनस्पति विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय तथा AETDS सोसायटी द्वारा किया जा रहा है।

    सम्मेलन में भारत सहित अमेरिका, तुर्किये, कोरिया, जापान, यूरोप, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, नाइजर, जिम्बाब्वे तथा अन्य देशों के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं की भागीदारी है। सम्मेलन के लिए 822 से अधिक शोध सारांश (Abstracts) प्राप्त हुए हैं। सम्मेलन के दौरान भारत तथा नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सहित विभिन्न देशों के शोधकर्ता अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवन विज्ञान, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास से जुड़े नवीन शोध निष्कर्षों और वैज्ञानिक नवाचारों पर विचार-विमर्श होगा।

    कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. एस.एल. कोठारी ने नवाचार एवं अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अकादमिक शोध को औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के परिणामों को प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रखकर उद्योग एवं समाज तक पहुंचाना चाहिए। इससे नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और शोध के माध्यम से विकसित तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग संभव होगा।

    प्रो. संतोष मराठा, निदेशक, पीजीएस, एएफयू, नेपाल ने प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन तथा उसके पर्यावरण, कृषि एवं मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरणीय जागरूकता तथा सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। 

    सम्मेलन की अध्यक्ष प्रो. सुमिता कच्छवाहा ने सम्मेलन की अवधारणा, उद्देश्यों एवं वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन विज्ञान, कृषि, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन परस्पर जुड़े हुए क्षेत्र हैं। इन विषयों पर अंतर्विषयक अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से ही प्रभावी एवं दीर्घकालिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने सम्मेलन को देश-विदेश के शोधकर्ताओं के लिए अपने अनुभवों और शोध निष्कर्षों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।

    सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. वाजिद हसन ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा कृषि और समाज के परस्पर संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने सम्मेलन के आयोजन, इसके प्रमुख उद्देश्यों और विभिन्न तकनीकी सत्रों की रूपरेखा से भी अवगत कराया।

    इस अवसर पर AETDS के अध्यक्ष प्रो. सी.पी. सिंह ने सोसायटी के उद्देश्यों एवं गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने में सोसायटी की भूमिका को रेखांकित किया।

    उद्घाटन समारोह में प्रो. अश्विनी कुमार, डॉ. सुनील छिम्पा एवं दीपक कुमार शर्मा सहित अनेक शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी और सम्मेलन के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

    तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता अपने नवीन शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में मौखिक शोध प्रस्तुतियों (Oral Presentations) तथा पोस्टर प्रस्तुतियों (Poster Presentations) के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने अनुसंधान कार्य साझा करने का अवसर मिलेगा। विभिन्न देशों से आए शोधकर्ताओं की सहभागिता से वैज्ञानिक विचारों, नवीन तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य जीवन विज्ञान, कृषि, पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के समाधान के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना है। इसके साथ ही अकादमिक अनुसंधान को नवाचार, तकनीकी हस्तांतरण और औद्योगिक अनुप्रयोगों से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि शोध के परिणामों का लाभ समाज, कृषि और उद्योग तक पहुंच सके।

    इस प्रकार LAECS-2026 वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और नवाचारकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से सतत विकास तथा वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय में ‘ANANTA FRESHERS 2026’ का भव्य आयोजन
    Next Article
    विशाल उज्जैनिया बने इकाई अध्यक्ष एवं हर्षवर्धन सिंह खर्रा को मिली इकाई मंत्री की जिम्मेदारी

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment