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    रिसर्च इन्वेस्टिगेशन: नागार्जुन की प्राचीन विधि पर जयपुर में प्रयोग, नमूने की जांच में 23.77 कैरेट सोना

    3 hours ago

    -कानोड़िया कॉलेज की फिजिक्स लैब में ढाई घंटे चला प्रयोग; वैज्ञानिक लाल बहादुर और टीम ने किया दावा, अब उन्नत लैब में सत्यापन की तैयारी

    जयपुर। प्राचीन भारतीय रसशास्त्र में आचार्य नागार्जुन से जुड़ी पारद (मरकरी) और धातु परिवर्तन की विधि को लेकर जयपुर में किया गया एक प्रयोग चर्चा का विषय बना है। कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर की भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिक लाल बहादुर और उनकी टीम ने 27 अगस्त को करीब ढाई घंटे तक प्रयोग किया। इसके बाद प्राप्त 0.240 ग्राम नमूने को जांच के लिए भेजा गया, जिसक ऐसे रिपोर्ट में परीक्षण की गई सतह पर 99.04% गोल्ड यानी 23.77 कैरेट दर्ज किया गया है।

    बीट्स पिलानी से इंजीनियरिंग, पोखरण-II परियोजना से भी जुड़े रहे

    लाल बहादुर कृतिका डायनामिक रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर के संस्थापक/निदेशक हैं और लंबे समय से ऊर्जा एवं संबंधित अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने बीट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में पोखरण-II से संबंधित परियोजना में भी कार्य किया। वे कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय में छात्राओं के स्टार्टअप के लिए मेंटोर तथा आईएसएलएस के लेट'एस स्टार्ट सेंटर के इनक्यूबिलिटी भी हैं. प्रयोग के दौरान विकिरण की निगरानी भी की गई.

    नागार्जुन के साहित्य से ली प्रक्रिया, लाल बहादुर ने किया मानकीकरण

    टीम के अनुसार प्रयोग की प्रक्रिया प्राचीन भारतीय रसशास्त्रीय साहित्य में आचार्य नागार्जुन से संबद्ध पारद एवं धातु-संस्कार संबंधी वर्णनों पर आधारित है। लाल बहादुर ने इस प्रक्रिया पर लंबे अध्ययन और प्रयोग के बाद इसे मानकीकृत किया। कॉलेज की सुसज्जित फिजिक्स लैब में आवश्यक सावधानियों के साथ इसे दोहराया गया। प्रयोग के दौरान विकिरण की निगरानी भी की गई और टीम के अनुसार कोई असामान्य विकिरण दर्ज नहीं हुआ।

    रिपोर्ट में 99.04% कैरेट, लेकिन अभी वैज्ञानिक पुष्टि बाकी

    एस्से रिपोर्ट में नमूने का वजन 0.240 ग्राम, गोल्ड 99.04%, सिल्वर 0.48% और तांबा 0.48% दर्ज है। स्वर्ण की शुद्धता 23.77 कैरेट बताई गई है। हालांकि रिपोर्ट पर “स्किन टेस्ट ओनली” अंकित है। इसलिए यह परिणाम नमूने की सतह की प्रारंभिक जांच है और इससे अभी यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं होता कि पारद का तात्विक रूपांतरण होकर ही सोना बना है।

    अब स्वतंत्र लैब में जांच और प्रयोग दोहराने

    अब स्वतंत्र लैब में जांच और प्रयोग दोहराने की जरूरत

    प्रारंभिक परिणाम को देखते हुए टीम अब अलग-अलग मात्रा में अभिकारकों के साथ प्रयोग दोहराने, शुरुआती पदार्थों की जांच, नमूने के आंतरिक हिस्से का परीक्षण तथा एक्सआरएफ, आईसीपी-एमएस/आईसीपी- औइएस और आवश्यकता होने पर आइसोटोपिक एनालिसिस जैसे उन्नत परीक्षण कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से सत्यापन के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि प्राप्त सोने का स्रोत क्या है और प्रयोग के दौरान वास्तव में कौन-सी भौतिक, रासायनिक अथवा अन्य प्रक्रिया हुई।

    परिणामों की व्यापक वैज्ञानिक जांच

    कॉलेज प्रशासन, संकाय सदस्यों तथा आईएसएलएसी पदाधिकारियों ने प्रारंभिक प्रयोग के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर लाल बहादुर और उनकी टीम को बधाई दी तथा परिणामों की व्यापक वैज्ञानिक जांच और स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया।

    यदि स्वतंत्र एवं नियंत्रित प्रयोगों में परिणाम पुनः प्राप्त होते हैं, तो यह प्राचीन भारतीय रसशास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध-विषय बन सकता है।

     

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