Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    पीजीटी-संस्कृत पद के लिए ‘आचार्य’ उपाधि को स्नातकोत्तर समकक्ष मानने की मांग

    1 hour ago

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को लिखा पत्र

    नई दिल्ली।केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन संख्या 06/2026 के अंतर्गत प्रवक्ता (PGT-संस्कृत) पद के लिए ‘आचार्य’ उपाधि को स्नातकोत्तर अथवा समकक्ष शैक्षिक अर्हता के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर संबंधित प्रकरण पर सकारात्मक विचार करने का आग्रह किया है।

    कुलपति प्रो. वरखेड़ी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम, 2020 के अंतर्गत स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय है। वहीं भारत के अन्य राज्यों में स्थापित संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत विषय में ‘आचार्य’ उपाधि निर्धारित पाठ्यक्रम, नियमों एवं विनियमों के अनुसार स्नातकोत्तर स्तर पर प्रदान की जाती है। उन्होंने आग्रह किया है कि इस उपाधि की शैक्षिक समकक्षता को ध्यान में रखते हुए पीजीटी-संस्कृत पद के लिए निर्धारित अर्हता के संदर्भ में उचित निर्णय लिया जाए।

    पूर्ववर्ती सरकारी आदेशों एवं यूजीसी अधिसूचना का दिया हवाला

    कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने अपने पत्र में भारत सरकार के पूर्ववर्ती आदेशों तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अधिसूचना का संदर्भ देते हुए संस्कृत की पारंपरिक उपाधियों की मान्यता एवं समकक्षता के संबंध में पूर्व में किए गए प्रावधानों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने भारत सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा 18 जुलाई, 1972 को जारी कार्यालय ज्ञापन तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा 15 अक्टूबर, 2013 को जारी पत्र का उल्लेख किया है। इन दस्तावेजों में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित परीक्षाओं तथा प्रदान की गई उपाधियों एवं प्रमाण-पत्रों की मान्यता और समकक्षता से संबंधित प्रावधानों का संदर्भ दिया गया है।

    इसके अतिरिक्त, कुलपति ने 5 जुलाई, 2014 को जारी यूजीसी की राजपत्र अधिसूचना का उल्लेख करते हुए संस्कृत संबंधी उपाधियों की मान्यता के विषय को रेखांकित किया है। उन्होंने संबंधित दस्तावेजों को पत्र के साथ संलग्न करते हुए इन प्रावधानों के आलोक में ‘आचार्य’ उपाधि की स्नातकोत्तर समकक्षता पर विचार करने का अनुरोध किया है।

    आचार्य उपाधिधारक अभ्यर्थियों को समान अवसर देने का आग्रह

    प्रो. वरखेड़ी ने पत्र में कहा है कि विज्ञापन संख्या 06/2026 के अंतर्गत प्रवक्ता (PGT-संस्कृत) पद के लिए संस्कृत विषय में मान्य विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि निर्धारित शैक्षिक अर्हता है। ऐसे में संस्कृत विषय में निर्धारित पाठ्यक्रम एवं नियमानुसार प्रदान की जाने वाली ‘आचार्य’ उपाधि को स्नातकोत्तर समकक्ष शैक्षिक अर्हता के रूप में स्वीकार किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं आयोग के अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि संबंधित दस्तावेजों और पूर्ववर्ती मान्यता संबंधी प्रावधानों के आधार पर इस विषय में उचित निर्णय लिया जाए तथा ‘आचार्य’ उपाधिधारक अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर नियमानुसार विचार किया जाए। जिससे संस्कृत छात्रों को इस भर्ती प्रकिया में शामिल होने का अवसर मिल सकें उन्होंने कहा कि इस संबंध में सकारात्मक कार्यवाही से संस्कृत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त योग्य अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में समान अवसर उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    जेईसीआरसी फाउंडेशन में फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन, रंगारंग प्रस्तुतियों से सजा समारोह
    Next Article
    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की प्रगति को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment